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बिहार के प्रसिद्ध खान सर पर हमला हुआ है, जिसकी वजह उनकी सस्ती शिक्षा को बताया जा रहा है। मिली जानकारी के अनुसार, खान सर द्वारा बच्चों को बहुत कम दाम में शिक्षा दिए जाने से कुछ एजुकेशन स्टूडियो मालिकों को परेशानी हो रही थी, जिसके चलते उन्हें दो दिन पहले जान से मारने की धमकी भी मिली थी। इसी धमकी के दो दिन बाद अचानक हुए इस हमले से संदेह पैदा हो गया है। फिलहाल खान सर सुरक्षित हैं और उनकी सुरक्षा के लिए भारी संख्या में पुलिस और सेना तैनात कर दी गई है। बच्चों और जनता का उन्हें पूरा सहयोग मिल रहा है। पोस्ट में इसे ईमानदारी का फल बताया गया है, जहां जनता किसी नेक दिल इंसान के लिए मौत से भी टकराने को तैयार दिखती है।

16 hrs ago
user_Pandit Repotar
Pandit Repotar
Advertising agency गनोड़ा, बांसवाड़ा, राजस्थान•
16 hrs ago
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बिहार के प्रसिद्ध खान सर पर हमला हुआ है, जिसकी वजह उनकी सस्ती शिक्षा को बताया जा रहा है। मिली जानकारी के अनुसार, खान सर द्वारा बच्चों को बहुत कम दाम में शिक्षा दिए जाने से कुछ एजुकेशन स्टूडियो मालिकों को परेशानी हो रही थी, जिसके चलते उन्हें दो दिन पहले जान से मारने की धमकी भी मिली थी। इसी धमकी के दो दिन बाद अचानक हुए इस हमले से संदेह पैदा हो गया है। फिलहाल खान सर सुरक्षित हैं और उनकी सुरक्षा के लिए भारी संख्या में पुलिस और सेना तैनात कर दी गई है। बच्चों और जनता का उन्हें पूरा सहयोग मिल रहा है। पोस्ट में इसे ईमानदारी का फल बताया गया है, जहां जनता किसी नेक दिल इंसान के लिए मौत से भी टकराने को तैयार दिखती है।

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  • बिहार के प्रसिद्ध खान सर पर हमला हुआ है, जिसकी वजह उनकी सस्ती शिक्षा को बताया जा रहा है। मिली जानकारी के अनुसार, खान सर द्वारा बच्चों को बहुत कम दाम में शिक्षा दिए जाने से कुछ एजुकेशन स्टूडियो मालिकों को परेशानी हो रही थी, जिसके चलते उन्हें दो दिन पहले जान से मारने की धमकी भी मिली थी। इसी धमकी के दो दिन बाद अचानक हुए इस हमले से संदेह पैदा हो गया है। फिलहाल खान सर सुरक्षित हैं और उनकी सुरक्षा के लिए भारी संख्या में पुलिस और सेना तैनात कर दी गई है। बच्चों और जनता का उन्हें पूरा सहयोग मिल रहा है। पोस्ट में इसे ईमानदारी का फल बताया गया है, जहां जनता किसी नेक दिल इंसान के लिए मौत से भी टकराने को तैयार दिखती है।
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    बिहार के प्रसिद्ध खान सर पर हमला हुआ है, जिसकी वजह उनकी सस्ती शिक्षा को बताया जा रहा है। मिली जानकारी के अनुसार, खान सर द्वारा बच्चों को बहुत कम दाम में शिक्षा दिए जाने से कुछ एजुकेशन स्टूडियो मालिकों को परेशानी हो रही थी, जिसके चलते उन्हें दो दिन पहले जान से मारने की धमकी भी मिली थी। इसी धमकी के दो दिन बाद अचानक हुए इस हमले से संदेह पैदा हो गया है।

फिलहाल खान सर सुरक्षित हैं और उनकी सुरक्षा के लिए भारी संख्या में पुलिस और सेना तैनात कर दी गई है। बच्चों और जनता का उन्हें पूरा सहयोग मिल रहा है। पोस्ट में इसे ईमानदारी का फल बताया गया है, जहां जनता किसी नेक दिल इंसान के लिए मौत से भी टकराने को तैयार दिखती है।
    user_Pandit Repotar
    Pandit Repotar
    Advertising agency गनोड़ा, बांसवाड़ा, राजस्थान•
    16 hrs ago
  • डूंगरपुर जिले के वरदा ग्राम के ग्रामीणों ने राजस्थान के मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन भेजकर अपने गांव को नवगठित ओबरी तहसील से हटाकर पुनः सागवाड़ा तहसील में यथावत रखने की मांग की है। ग्रामीणों के अनुसार, वरदा ग्राम पहले सागवाड़ा तहसील का हिस्सा था, लेकिन हालिया अधिसूचना के तहत इसे ओबरी तहसील में शामिल कर दिया गया है। ग्रामीणों ने इस बदलाव को अव्यावहारिक बताते हुए न्याय की गुहार लगाई है और एसडीएम से भी संपर्क किया है। ग्रामीणों का कहना है कि डूंगरपुर-सागवाड़ा-बांसवाड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग 927-ए पर स्थित नोखना, काहेला, टामटिया, ठाकरड़ा, नंदोड और गोवाड़ी जैसे अन्य गांव सागवाड़ा तहसील में ही रखे गए हैं। ऐसे में इन्हीं गांवों के बीच स्थित वरदा को ओबरी तहसील में शामिल करना तर्कसंगत नहीं है। ग्रामीणों ने ज्ञापन में बताया है कि वरदा गांव की दूरी सागवाड़ा से मात्र 16 किलोमीटर है, जबकि ओबरी से यह लगभग 23 किलोमीटर दूर है। इसके अतिरिक्त, ग्रामीणों ने परिवहन सुविधाओं का भी हवाला दिया है। उनके अनुसार, सागवाड़ा के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग और नियमित रोडवेज बसों सहित पर्याप्त परिवहन व्यवस्था उपलब्ध है। वहीं, ओबरी के लिए कोई सीधी सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था नहीं है, जिसके कारण ग्रामीणों को निजी वाहनों पर निर्भर रहना पड़ेगा, जिससे उनका आर्थिक बोझ बढ़ेगा। ग्रामीणों ने जोर दिया कि सरकार की योजनाओं का उद्देश्य आमजन को सुविधा देना है, लेकिन इस निर्णय से उनकी परेशानियां बढ़ रही हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से जनहित को प्राथमिकता देते हुए वरदा ग्राम को पुनः सागवाड़ा तहसील में शामिल करने का आग्रह किया है। इन मांगों के अलावा, ग्रामीणों ने भविष्य में जनसंख्या, भौगोलिक स्थिति और उपलब्ध सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए वरदा को तहसील का दर्जा दिए जाने की मांग भी उठाई है। उन्हें उम्मीद है कि राज्य सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेगी और क्षेत्र की जनता को राहत प्रदान करेगी, ताकि वरदा गांव के साथ हुए अन्याय का निवारण हो सके।
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    डूंगरपुर जिले के वरदा ग्राम के ग्रामीणों ने राजस्थान के मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन भेजकर अपने गांव को नवगठित ओबरी तहसील से हटाकर पुनः सागवाड़ा तहसील में यथावत रखने की मांग की है। ग्रामीणों के अनुसार, वरदा ग्राम पहले सागवाड़ा तहसील का हिस्सा था, लेकिन हालिया अधिसूचना के तहत इसे ओबरी तहसील में शामिल कर दिया गया है। ग्रामीणों ने इस बदलाव को अव्यावहारिक बताते हुए न्याय की गुहार लगाई है और एसडीएम से भी संपर्क किया है।

ग्रामीणों का कहना है कि डूंगरपुर-सागवाड़ा-बांसवाड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग 927-ए पर स्थित नोखना, काहेला, टामटिया, ठाकरड़ा, नंदोड और गोवाड़ी जैसे अन्य गांव सागवाड़ा तहसील में ही रखे गए हैं। ऐसे में इन्हीं गांवों के बीच स्थित वरदा को ओबरी तहसील में शामिल करना तर्कसंगत नहीं है। ग्रामीणों ने ज्ञापन में बताया है कि वरदा गांव की दूरी सागवाड़ा से मात्र 16 किलोमीटर है, जबकि ओबरी से यह लगभग 23 किलोमीटर दूर है।

इसके अतिरिक्त, ग्रामीणों ने परिवहन सुविधाओं का भी हवाला दिया है। उनके अनुसार, सागवाड़ा के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग और नियमित रोडवेज बसों सहित पर्याप्त परिवहन व्यवस्था उपलब्ध है। वहीं, ओबरी के लिए कोई सीधी सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था नहीं है, जिसके कारण ग्रामीणों को निजी वाहनों पर निर्भर रहना पड़ेगा, जिससे उनका आर्थिक बोझ बढ़ेगा। ग्रामीणों ने जोर दिया कि सरकार की योजनाओं का उद्देश्य आमजन को सुविधा देना है, लेकिन इस निर्णय से उनकी परेशानियां बढ़ रही हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से जनहित को प्राथमिकता देते हुए वरदा ग्राम को पुनः सागवाड़ा तहसील में शामिल करने का आग्रह किया है।

इन मांगों के अलावा, ग्रामीणों ने भविष्य में जनसंख्या, भौगोलिक स्थिति और उपलब्ध सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए वरदा को तहसील का दर्जा दिए जाने की मांग भी उठाई है। उन्हें उम्मीद है कि राज्य सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेगी और क्षेत्र की जनता को राहत प्रदान करेगी, ताकि वरदा गांव के साथ हुए अन्याय का निवारण हो सके।
    user_Sagwara live news
    Sagwara live news
    Local News Reporter सागवाड़ा, डूंगरपुर, राजस्थान•
    17 hrs ago
  • पावन अधिक मास के अवसर पर नीलकंठ महिला मंडल द्वारा आयोजित संगीतमय श्रीराम कथा में कथावाचक डॉ. महेंद्र त्रिवेदी ने भगवान श्रीराम, भगवान शिव और माता सती के मार्मिक प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने इस दौरान बताया कि किस प्रकार माता सीता की खोज में व्याकुल श्रीराम की परीक्षा लेने हेतु माता सती ने सीता का रूप धारण किया था, किंतु सर्वज्ञ भगवान श्रीराम ने उन्हें तुरंत पहचान लिया। इस प्रसंग के माध्यम से डॉ. महेंद्र त्रिवेदी ने उपस्थित श्रद्धालुओं को ईश्वर के प्रति अटूट श्रद्धा और विश्वास का महत्वपूर्ण संदेश दिया। संगीतमय भजनों और मधुर प्रस्तुति से पूरा कथा पांडाल भक्तिमय माहौल में डूब गया, जिसमें विशेष रूप से महिलाओं की बड़ी संख्या में उपस्थिति दर्ज की गई। शिव-सती प्रसंग को सुनकर अनेक श्रद्धालु भावुक हो उठे, और पूरा वातावरण "जय श्रीराम" एवं "हर-हर महादेव" के जयघोषों से गूंज उठा। नीलकंठ महादेव महिला मंडल द्वारा आयोजित इस ऐतिहासिक कार्यक्रम को नगर में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना का अनूठा संदेश फैलाने वाला बताया गया है।
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    पावन अधिक मास के अवसर पर नीलकंठ महिला मंडल द्वारा आयोजित संगीतमय श्रीराम कथा में कथावाचक डॉ. महेंद्र त्रिवेदी ने भगवान श्रीराम, भगवान शिव और माता सती के मार्मिक प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने इस दौरान बताया कि किस प्रकार माता सीता की खोज में व्याकुल श्रीराम की परीक्षा लेने हेतु माता सती ने सीता का रूप धारण किया था, किंतु सर्वज्ञ भगवान श्रीराम ने उन्हें तुरंत पहचान लिया।

इस प्रसंग के माध्यम से डॉ. महेंद्र त्रिवेदी ने उपस्थित श्रद्धालुओं को ईश्वर के प्रति अटूट श्रद्धा और विश्वास का महत्वपूर्ण संदेश दिया। संगीतमय भजनों और मधुर प्रस्तुति से पूरा कथा पांडाल भक्तिमय माहौल में डूब गया, जिसमें विशेष रूप से महिलाओं की बड़ी संख्या में उपस्थिति दर्ज की गई। शिव-सती प्रसंग को सुनकर अनेक श्रद्धालु भावुक हो उठे, और पूरा वातावरण "जय श्रीराम" एवं "हर-हर महादेव" के जयघोषों से गूंज उठा।

नीलकंठ महादेव महिला मंडल द्वारा आयोजित इस ऐतिहासिक कार्यक्रम को नगर में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना का अनूठा संदेश फैलाने वाला बताया गया है।
    user_गाण्डीव न्यूज नेटवर्क
    गाण्डीव न्यूज नेटवर्क
    बांसवाड़ा, बांसवाड़ा, राजस्थान•
    9 hrs ago
  • बांसवाड़ा जिले के गढ़ी क्षेत्र में भारत आदिवासी पार्टी के पदाधिकारियों ने उपखंड अधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें निजी फाइनेंस कंपनियों पर अनुसूचित जाति एवं जनजाति समुदाय के लोगों से कथित रूप से अत्यधिक ब्याज वसूलने का गंभीर आरोप लगाया गया है। ज्ञापन में यह आरोप लगाया गया है कि कुछ निजी वित्तीय संस्थाएं गरीब किसानों, मजदूरों और महिलाओं को ऋण उपलब्ध कराकर उनसे अत्यधिक ब्याज की वसूली कर रही हैं। पार्टी ने इस पूरे मामले की गहन जांच करने, आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने तथा प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत प्रदान करने की मांग की है।
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    बांसवाड़ा जिले के गढ़ी क्षेत्र में भारत आदिवासी पार्टी के पदाधिकारियों ने उपखंड अधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें निजी फाइनेंस कंपनियों पर अनुसूचित जाति एवं जनजाति समुदाय के लोगों से कथित रूप से अत्यधिक ब्याज वसूलने का गंभीर आरोप लगाया गया है। ज्ञापन में यह आरोप लगाया गया है कि कुछ निजी वित्तीय संस्थाएं गरीब किसानों, मजदूरों और महिलाओं को ऋण उपलब्ध कराकर उनसे अत्यधिक ब्याज की वसूली कर रही हैं। पार्टी ने इस पूरे मामले की गहन जांच करने, आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने तथा प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत प्रदान करने की मांग की है।
    user_Aadiwasi Manch news
    Aadiwasi Manch news
    Anandpuri, Banswara•
    10 hrs ago
  • Post by Bhagirath Megwh राजलदेसर गोगा2
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    Post by Bhagirath Megwh राजलदेसर गोगा2
    user_Bhagirath Megwh राजलदेसर गोगा2
    Bhagirath Megwh राजलदेसर गोगा2
    आनंदपुरी, बांसवाड़ा, राजस्थान•
    12 hrs ago
  • सृष्टि सेवा समिति धरियावद ने आज धरियावद के आंगनवाड़ी केंद्र बेड़ा बट्टा, मांडकला पटेल फला, जांबूवेला, भूतिया और अनुपपुरा में गर्भवती एवं धात्री महिलाओं के लिए एक विशेष 'घर ले जाने वाले राशन से रेसिपी डेमोंस्ट्रेशन, प्रशिक्षण एवं प्रतियोगिता कार्यक्रम' आयोजित किया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को घर ले जाने के लिए मिलने वाले राशन से ही पौष्टिक और संतुलित व्यंजन तैयार करने का व्यवहारिक प्रशिक्षण देना, उन्हें कुपोषण के प्रति जागरूक करना और स्थानीय खाद्य सामग्री के माध्यम से पोषणयुक्त आहार अपनाने के लिए प्रेरित करना था। कार्यक्रम के दौरान, कुल 72 महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिनमें 28 गर्भवती महिलाएं, 24 धात्री महिलाएं और 20 अन्य महिलाएं शामिल थीं। उन्हें मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, संतुलित आहार, एनीमिया की रोकथाम, स्तनपान तथा पूरक पोषण से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। महिलाओं को विशेष रूप से बताया गया कि गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान पोषणयुक्त भोजन मां और शिशु दोनों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है। प्रतिभागी महिलाओं ने घर ले जाने वाली (THR) सामग्री का उपयोग कर विभिन्न पौष्टिक और आकर्षक व्यंजन बनाए, जिनमें THR लड्डू, पोषाहार खिचड़ी, मल्टीग्रेन शीरा, पोषण पंजीरी, बाजरा और मूंग दाल आधारित व्यंजन, साथ ही आयरन एवं प्रोटीन युक्त रेसिपियां प्रमुख थीं। उन्होंने स्थानीय स्तर पर उपलब्ध खाद्य सामग्री का उपयोग कर कम लागत में पौष्टिक भोजन तैयार करने की अपनी रचनात्मकता और नवाचार का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता में व्यंजनों का मूल्यांकन पोषण गुणवत्ता, THR सामग्री के सही उपयोग, स्वाद, प्रस्तुति, स्वच्छता, नवाचार और गर्भवती एवं धात्री महिलाओं के लिए उपयोगिता जैसे मापदंडों पर किया गया। प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाली प्रतिभागियों को प्रोत्साहन के रूप में 'पोषण पोटली' भेंट की गई, जिसमें भुने हुए चने, मूंगफली और गुड़ शामिल थे, ताकि उन्हें स्थानीय और पौष्टिक खाद्य पदार्थों के महत्व के प्रति प्रेरित किया जा सके। सृष्टि सेवा समिति धरियावद के प्रोग्राम मैनेजर जितेंद्र कुमार यादव ने इस अवसर पर कहा कि महिलाओं में पोषण संबंधी जागरूकता बढ़ाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है, और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध खाद्य सामग्री का सही उपयोग करके परिवार को कुपोषण से मुक्त किया जा सकता है। उन्होंने सभी महिलाओं से अपने घरों में भी पौष्टिक भोजन और संतुलित आहार को बढ़ावा देने की अपील की। कार्यक्रम के सफल आयोजन में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, आशासहयोगिनियों और सृष्टि सेवा समिति टीम के ब्लॉक कोऑर्डिनेटर रोशन सिंह, रवि नाथ, फील्ड मोबिलाइजर बाल किशन मीणा, गोपाल मीणा, जीवनलाल मीणा एवं नारायण मेघवाल का विशेष सहयोग रहा। यह आयोजन महिलाओं में पोषण जागरूकता बढ़ाने, कुपोषण की रोकथाम और स्वस्थ परिवार निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।
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    सृष्टि सेवा समिति धरियावद ने आज धरियावद के आंगनवाड़ी केंद्र बेड़ा बट्टा, मांडकला पटेल फला, जांबूवेला, भूतिया और अनुपपुरा में गर्भवती एवं धात्री महिलाओं के लिए एक विशेष 'घर ले जाने वाले राशन से रेसिपी डेमोंस्ट्रेशन, प्रशिक्षण एवं प्रतियोगिता कार्यक्रम' आयोजित किया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को घर ले जाने के लिए मिलने वाले राशन से ही पौष्टिक और संतुलित व्यंजन तैयार करने का व्यवहारिक प्रशिक्षण देना, उन्हें कुपोषण के प्रति जागरूक करना और स्थानीय खाद्य सामग्री के माध्यम से पोषणयुक्त आहार अपनाने के लिए प्रेरित करना था।

कार्यक्रम के दौरान, कुल 72 महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिनमें 28 गर्भवती महिलाएं, 24 धात्री महिलाएं और 20 अन्य महिलाएं शामिल थीं। उन्हें मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, संतुलित आहार, एनीमिया की रोकथाम, स्तनपान तथा पूरक पोषण से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। महिलाओं को विशेष रूप से बताया गया कि गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान पोषणयुक्त भोजन मां और शिशु दोनों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है।

प्रतिभागी महिलाओं ने घर ले जाने वाली (THR) सामग्री का उपयोग कर विभिन्न पौष्टिक और आकर्षक व्यंजन बनाए, जिनमें THR लड्डू, पोषाहार खिचड़ी, मल्टीग्रेन शीरा, पोषण पंजीरी, बाजरा और मूंग दाल आधारित व्यंजन, साथ ही आयरन एवं प्रोटीन युक्त रेसिपियां प्रमुख थीं। उन्होंने स्थानीय स्तर पर उपलब्ध खाद्य सामग्री का उपयोग कर कम लागत में पौष्टिक भोजन तैयार करने की अपनी रचनात्मकता और नवाचार का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता में व्यंजनों का मूल्यांकन पोषण गुणवत्ता, THR सामग्री के सही उपयोग, स्वाद, प्रस्तुति, स्वच्छता, नवाचार और गर्भवती एवं धात्री महिलाओं के लिए उपयोगिता जैसे मापदंडों पर किया गया। प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाली प्रतिभागियों को प्रोत्साहन के रूप में 'पोषण पोटली' भेंट की गई, जिसमें भुने हुए चने, मूंगफली और गुड़ शामिल थे, ताकि उन्हें स्थानीय और पौष्टिक खाद्य पदार्थों के महत्व के प्रति प्रेरित किया जा सके।

सृष्टि सेवा समिति धरियावद के प्रोग्राम मैनेजर जितेंद्र कुमार यादव ने इस अवसर पर कहा कि महिलाओं में पोषण संबंधी जागरूकता बढ़ाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है, और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध खाद्य सामग्री का सही उपयोग करके परिवार को कुपोषण से मुक्त किया जा सकता है। उन्होंने सभी महिलाओं से अपने घरों में भी पौष्टिक भोजन और संतुलित आहार को बढ़ावा देने की अपील की। कार्यक्रम के सफल आयोजन में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, आशासहयोगिनियों और सृष्टि सेवा समिति टीम के ब्लॉक कोऑर्डिनेटर रोशन सिंह, रवि नाथ, फील्ड मोबिलाइजर बाल किशन मीणा, गोपाल मीणा, जीवनलाल मीणा एवं नारायण मेघवाल का विशेष सहयोग रहा। यह आयोजन महिलाओं में पोषण जागरूकता बढ़ाने, कुपोषण की रोकथाम और स्वस्थ परिवार निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।
    user_जुबेर अहमद पत्रकार व लॉ छात्र
    जुबेर अहमद पत्रकार व लॉ छात्र
    धरियावद, प्रतापगढ़, राजस्थान•
    22 hrs ago
  • आदर्श ग्राम पंचायत टोडा में श्मशान घाट के पास लगा एक हैंडपंप पिछले दो साल से बंद पड़ा है। इस वजह से सड़क पर आवाजाही करने वाले लोगों को पीने के पानी की सुविधा नहीं मिल पा रही है, जिससे उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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    आदर्श ग्राम पंचायत टोडा में श्मशान घाट के पास लगा एक हैंडपंप पिछले दो साल से बंद पड़ा है। इस वजह से सड़क पर आवाजाही करने वाले लोगों को पीने के पानी की सुविधा नहीं मिल पा रही है, जिससे उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
    user_राजेश कुमार मेहता
    राजेश कुमार मेहता
    Aquaculture farm सलूंबर, उदयपुर, राजस्थान•
    23 hrs ago
  • अखिल भारतीय किसान सभा के आह्वान पर सीकर जिले में पेयजल की स्थायी समस्या के समाधान की मांग को लेकर जलदाय विभाग कार्यालय, सांवली रोड पर एक विशाल धरना-प्रदर्शन किया गया। इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में किसान और कार्यकर्ता शामिल हुए, जिन्होंने राज्य सरकार और प्रशासन की उदासीनता पर गहरा रोष व्यक्त किया। किसान सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और सांसद अमरा राम ने स्पष्ट किया कि शेखावाटी क्षेत्र की पेयजल समस्या का एकमात्र स्थायी समाधान यमुना जल परियोजना ही है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने कई बार सीकर आकर यमुना का पानी लाने की घोषणा तो की है, लेकिन राज्य सरकार ने अब तक इस योजना में अपने हिस्से की राशि जमा नहीं करवाई है। इसी कड़ी में, किसान सभा के प्रदेशाध्यक्ष और पूर्व विधायक पेमाराम ने कहा कि राज्य सरकार और प्रशासन की घोर उदासीनता तथा भीषण गर्मी के कारण जिले की जनता गंभीर पेयजल संकट से जूझ रही है, जिससे लोगों को अपनी मेहनत की कमाई टैंकरों से पानी खरीदने में खर्च करनी पड़ रही है। धरने को किशन पारीक, हरफूल सिंह बाजिया, बृज सुंदर जांगिड़, झाबर राड़, मंगल सिंह यादव, राकेश मुवाल, तारा धायल और अब्दुल कयूम कुरेशी सहित कई नेताओं ने संबोधित किया। इस दौरान भगवान सहाय ढाका, सागर मल सामोता, गोपाल सिंह बिजारणिया, सागरमल बाजिया, घनश्याम सांखला और भागचंद लामिया जैसे हजारों कार्यकर्ता विरोध प्रदर्शन में सक्रिय रूप से मौजूद रहे। संगठन के जिला महामंत्री सागर खाचरिया ने जानकारी दी कि धरने के बाद जलदाय विभाग के अधिकारी ने मौके पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों को ट्यूबवेल, पाइपलाइन और जिला स्तर की अन्य पेयजल समस्याओं का सात दिनों के भीतर समाधान करने का आश्वासन दिया है।
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    अखिल भारतीय किसान सभा के आह्वान पर सीकर जिले में पेयजल की स्थायी समस्या के समाधान की मांग को लेकर जलदाय विभाग कार्यालय, सांवली रोड पर एक विशाल धरना-प्रदर्शन किया गया। इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में किसान और कार्यकर्ता शामिल हुए, जिन्होंने राज्य सरकार और प्रशासन की उदासीनता पर गहरा रोष व्यक्त किया।

किसान सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और सांसद अमरा राम ने स्पष्ट किया कि शेखावाटी क्षेत्र की पेयजल समस्या का एकमात्र स्थायी समाधान यमुना जल परियोजना ही है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने कई बार सीकर आकर यमुना का पानी लाने की घोषणा तो की है, लेकिन राज्य सरकार ने अब तक इस योजना में अपने हिस्से की राशि जमा नहीं करवाई है। इसी कड़ी में, किसान सभा के प्रदेशाध्यक्ष और पूर्व विधायक पेमाराम ने कहा कि राज्य सरकार और प्रशासन की घोर उदासीनता तथा भीषण गर्मी के कारण जिले की जनता गंभीर पेयजल संकट से जूझ रही है, जिससे लोगों को अपनी मेहनत की कमाई टैंकरों से पानी खरीदने में खर्च करनी पड़ रही है।

धरने को किशन पारीक, हरफूल सिंह बाजिया, बृज सुंदर जांगिड़, झाबर राड़, मंगल सिंह यादव, राकेश मुवाल, तारा धायल और अब्दुल कयूम कुरेशी सहित कई नेताओं ने संबोधित किया। इस दौरान भगवान सहाय ढाका, सागर मल सामोता, गोपाल सिंह बिजारणिया, सागरमल बाजिया, घनश्याम सांखला और भागचंद लामिया जैसे हजारों कार्यकर्ता विरोध प्रदर्शन में सक्रिय रूप से मौजूद रहे। संगठन के जिला महामंत्री सागर खाचरिया ने जानकारी दी कि धरने के बाद जलदाय विभाग के अधिकारी ने मौके पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों को ट्यूबवेल, पाइपलाइन और जिला स्तर की अन्य पेयजल समस्याओं का सात दिनों के भीतर समाधान करने का आश्वासन दिया है।
    user_गाण्डीव न्यूज नेटवर्क
    गाण्डीव न्यूज नेटवर्क
    बांसवाड़ा, बांसवाड़ा, राजस्थान•
    10 hrs ago
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