निवाली में गूंजा 'जय श्री राम' का जयघोष: श्रीराम कथा के पांचवें दिन धनुष यज्ञ और सीता स्वयंवर ने मोहा भक्तों का मन (सुनील सोनी स्वतंत्र पत्रकार निवाली में गूंजा 'जय श्री राम' का जयघोष: श्रीराम कथा के पांचवें दिन धनुष यज्ञ और सीता स्वयंवर ने मोहा भक्तों का मन (सुनील सोनी स्वतंत्र पत्रकार) नगर में गुमडीया रोड स्थित संकटमोचन पंचमुखी हनुमान हनुमान मंदीर की प्रथम वर्षगांठ 24 मार्च के अवसर पर श्रीराम कथा का आयोजन किया गया है कथा के पांचवे दिन अहिल्या उद्धार, गंगा अवतरण व जनक पुर प्रवेश, पुष्प वाटिका प्रसंग जिससे मर्यादा और प्रेम का संदेश मिलता है, राजा जनक व्दारा धनुष यज्ञ का वर्णन, और धनुष भंग सीता स्वयंवर की कथा सुनाई निवाली (बड़वानी) | 29 मार्च रविवार धर्म और आस्था की त्रिवेणी में सराबोर निवाली क्षेत्र इन दिनों पूरी तरह राममय हो गया है। जारी भव्य श्रीराम कथा के पांचवें दिन आज पांडाल में उस समय अद्भुत दृश्य निर्मित हुआ, जब मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम ने भारी शिव धनुष को खंडित किया और माता जानकी ने उनके गले में वरमाला डाली। इस आलौकिक प्रसंग को देख निवाली और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से आए हजारों श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। 🌸 गुरु आज्ञा और धनुष भंग का प्रसंग कथावाचक ने प्रसंग की शुरुआत करते हुए बताया कि जब जनकपुर की सभा में बड़े-बड़े बलशाली राजा शिव धनुष को हिला तक नहीं पाए, तब राजा जनक अत्यंत व्याकुल हो उठे थे। ऐसे समय में महर्षि विश्वामित्र की आज्ञा पाकर प्रभु श्री राम ने जैसे ही धनुष को स्पर्श किया, वह वज्र के समान भारी धनुष तिनके की भांति टूट गया। "लेत चढ़ावत खैंचत गाढ़े। काहुं न लखा देख सबु ठाढ़े॥ तेहि छन राम मध्य धनु तोरा। भरे भुवन धुनि घोर कठोरा॥" धनुष के टूटते ही पांडाल में पुष्पवर्षा होने लगी और श्रद्धालुओं ने खड़े होकर जयकारे लगाए। सजीव झांकी और सीता स्वयंवर का उल्लास कथा के दौरान मंच पर सीता स्वयंवर की भव्य सजीव झांकी सजाई गई थी। भगवान श्री राम और लक्ष्मण के स्वरूप में सजे बालकों और माता जानकी की छवि देख ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो साक्षात मिथिला नगरी निवाली की पावन धरा पर उतर आई हो। वरमाला उत्सव: जैसे ही माता सीता ने प्रभु श्री राम को वरमाला पहनाई, पूरे पांडाल में शंख ध्वनि और ढोल-नगाड़ों की थाप गूंज उठी। श्रद्धालुओं का उत्साह: निवाली के इस धार्मिक आयोजन में महिलाओं ने मंगल गीत गाए और पुरुषों ने झूमकर अपनी खुशी का इजहार किया। ✨ निवाली के आयोजन की मुख्य विशेषताएं जनसमूह: कथा सुनने के लिए निवाली के साथ-साथ आसपास के गाँव से भी बड़ी संख्या में ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और निजी वाहनों से भक्त पहुंचे। अहिल्या उद्धार का संदेश: कथा में अहिल्या उद्धार के प्रसंग पर जोर देते हुए बताया गया कि ईश्वर केवल भाव के भूखे हैं। श्रद्धा हो तो पत्थर में भी प्राण फूंके जा सकते हैं। प्रसाद वितरण: कथा के समापन पर राम राम का एक माला जाप करवाया गया 'सीता-राम' के मिलन की खुशी में विशेष मिठाई का वितरण किया गया और भव्य महाआरती हुई। 🎙️ कथावाचक का संदेश व्यासपीठ से संदेश देते हुए कहा गया कि सीता स्वयंवर केवल एक विवाह उत्सव नहीं है, बल्कि यह अहंकार (राजाओं का गर्व) पर शालीनता और भक्ति (श्री राम) की विजय का प्रतीक है। आज के युवाओं को भगवान राम के धैर्य और गुरु के प्रति उनके सम्मान से प्रेरणा लेनी चाहिए।
निवाली में गूंजा 'जय श्री राम' का जयघोष: श्रीराम कथा के पांचवें दिन धनुष यज्ञ और सीता स्वयंवर ने मोहा भक्तों का मन (सुनील सोनी स्वतंत्र पत्रकार निवाली में गूंजा 'जय श्री राम' का जयघोष: श्रीराम कथा के पांचवें दिन धनुष यज्ञ और सीता स्वयंवर ने मोहा भक्तों का मन (सुनील सोनी स्वतंत्र पत्रकार) नगर में गुमडीया रोड स्थित संकटमोचन पंचमुखी हनुमान हनुमान मंदीर की प्रथम वर्षगांठ 24 मार्च के अवसर पर श्रीराम कथा का आयोजन किया गया है कथा के पांचवे दिन अहिल्या उद्धार, गंगा अवतरण व जनक पुर प्रवेश, पुष्प वाटिका प्रसंग जिससे मर्यादा और प्रेम का संदेश मिलता है, राजा जनक व्दारा धनुष यज्ञ का वर्णन, और धनुष भंग सीता स्वयंवर की कथा सुनाई निवाली (बड़वानी) | 29 मार्च रविवार धर्म और आस्था की त्रिवेणी में सराबोर निवाली क्षेत्र इन दिनों पूरी तरह राममय हो
गया है। जारी भव्य श्रीराम कथा के पांचवें दिन आज पांडाल में उस समय अद्भुत दृश्य निर्मित हुआ, जब मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम ने भारी शिव धनुष को खंडित किया और माता जानकी ने उनके गले में वरमाला डाली। इस आलौकिक प्रसंग को देख निवाली और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से आए हजारों श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। 🌸 गुरु आज्ञा और धनुष भंग का प्रसंग कथावाचक ने प्रसंग की शुरुआत करते हुए बताया कि जब जनकपुर की सभा में बड़े-बड़े बलशाली राजा शिव धनुष को हिला तक नहीं पाए, तब राजा जनक अत्यंत व्याकुल हो उठे थे। ऐसे समय में महर्षि विश्वामित्र की आज्ञा पाकर प्रभु श्री राम ने जैसे ही धनुष को स्पर्श किया, वह वज्र के समान भारी धनुष तिनके की भांति टूट गया। "लेत चढ़ावत खैंचत गाढ़े। काहुं न लखा देख सबु ठाढ़े॥ तेहि
छन राम मध्य धनु तोरा। भरे भुवन धुनि घोर कठोरा॥" धनुष के टूटते ही पांडाल में पुष्पवर्षा होने लगी और श्रद्धालुओं ने खड़े होकर जयकारे लगाए। सजीव झांकी और सीता स्वयंवर का उल्लास कथा के दौरान मंच पर सीता स्वयंवर की भव्य सजीव झांकी सजाई गई थी। भगवान श्री राम और लक्ष्मण के स्वरूप में सजे बालकों और माता जानकी की छवि देख ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो साक्षात मिथिला नगरी निवाली की पावन धरा पर उतर आई हो। वरमाला उत्सव: जैसे ही माता सीता ने प्रभु श्री राम को वरमाला पहनाई, पूरे पांडाल में शंख ध्वनि और ढोल-नगाड़ों की थाप गूंज उठी। श्रद्धालुओं का उत्साह: निवाली के इस धार्मिक आयोजन में महिलाओं ने मंगल गीत गाए और पुरुषों ने झूमकर अपनी खुशी का इजहार किया। ✨ निवाली के आयोजन की मुख्य विशेषताएं जनसमूह: कथा सुनने के लिए निवाली के
साथ-साथ आसपास के गाँव से भी बड़ी संख्या में ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और निजी वाहनों से भक्त पहुंचे। अहिल्या उद्धार का संदेश: कथा में अहिल्या उद्धार के प्रसंग पर जोर देते हुए बताया गया कि ईश्वर केवल भाव के भूखे हैं। श्रद्धा हो तो पत्थर में भी प्राण फूंके जा सकते हैं। प्रसाद वितरण: कथा के समापन पर राम राम का एक माला जाप करवाया गया 'सीता-राम' के मिलन की खुशी में विशेष मिठाई का वितरण किया गया और भव्य महाआरती हुई। 🎙️ कथावाचक का संदेश व्यासपीठ से संदेश देते हुए कहा गया कि सीता स्वयंवर केवल एक विवाह उत्सव नहीं है, बल्कि यह अहंकार (राजाओं का गर्व) पर शालीनता और भक्ति (श्री राम) की विजय का प्रतीक है। आज के युवाओं को भगवान राम के धैर्य और गुरु के प्रति उनके सम्मान से प्रेरणा लेनी चाहिए।
- User3311Barwani, Madhya Pradesh😤28 min ago
- नगरीय क्षेत्र होने के बाबजूद ग्रामीण क्षेत्र की एजेंसी होने से 25 दिन के बजाय 45 दिन में हो रही है गैस टँकी की बुकिंग, नगरवासियों में भय का माहौल जल्द निराकरण नही हुआ तो बिगड़ेगी स्थिति* (सुनील सोनी स्वतंत्र पत्रकार) निवाली 29 मार्च रविवार बड़वानी जिले के निवाली नगर में गैस की बनी थी ग्राम पंचायत थी जिससे ग्रामीण एेसी के नियमों के तहत् 45 दिन में हो रही है अब 4 वर्ष पहले नगर पंचायत बन जाने से नगरीय क्षेत्र हो जाने से 25 दिन में बुकींग होना चाहिये ग्रामीण और नगरीय क्षेत्र का अंतर के कारण नगर वासी अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहे हैं जबकी इस ओर गैस कंपनी ने ध्यान देकर ग्रामीण एजेंसी को नगरीय एजेंसी में बदलना था इस अंतर से यह न ई समस्या खड़ी हो गई है इस समस्या के चलते बुकिंग को लेकर नगरवासियों को काफी मशक्कत करना पड़ रही है यू कहने को तो निवाली नगर परिषद के चलते शहरी क्षेत्र में आने लग गया है लेकिन निवाली नगर की भारत गैस एजेंसी ग्रामीण वितरक में आ रही है जिसमे कुल 12 हजार से अधिक गेस कनेक्शनधारी है वही शासन के दिशा निर्देश के चलते अब बुकिंग 25 के बजाय 45 से पहले नही हो पा रही है वही नगर में ज्यादातर सयुक्त परिवार (8 से 10 व्यक्ति) रहते है जिनमे उनकी घरेलू गैस टँकी 20 से 25 दिन ही चल पाती है ऐसे में अगर समय पर गैस टँकी की बुकिंग नही हुई तो स्थित बिगड़ सकती है जिससे स्थिति भयानक हो सकती है वही इस सम्बंध में हमारे विशेष संवाददाता सुनील सोनी द्वारा JSO, DSO, डिपो प्रभारी राहुल चंदेल सहित अन्य अधिकारियों से चर्चा की गई लेकिन अभी तक कोई हल नही निकल पाया अब देखना ये है कि आने वाले समय मे स्थिति में सुधार होता है या ओर विकट परिस्थिति हो सकती है समस्या का शीघ्र निराकरण करने की मांग भारत गैस कंपनी से करने की मांग नगरवासियों ने की है नगरवासियों का यह भी कहना है कि पंचायत से नगरीय क्षेत्र में आने के बाद गैस एजेंसी संचालक को भी इस ओर ध्यान देना चाहीये था और अपनी एजेंसी को ग्रामीण से नगरीय योजना में परवर्तित करवाना चाहीये था4
- रविवार शाम करीब साढ़े चार बजे सेंधवा सहित आसपास के क्षेत्रों में चमक धमक के साथ तेज बारिश का दौर शुरू हुआ, एक तरफ जहां भीषण गर्मी में बारिश ने मौसम में ठंडक घोली वही दूसरी और किसानों की चिंताएं दुगनी कर दी हैं1
- (सेंधवा) बड़वानी, 29 मार्च 2026। निमाड़ दस्तक न्यूज़ (ब्यूरो रिपोर्ट) ✍️ . बड़वानी जिले के हज यात्रियों के लिए आगामी 04 अप्रैल 2026 को सेंधवा में एक विशेष 'हज ओरिएंटेशन ट्रेनिंग प्रोग्राम' का आयोजन किया जाएगा। यह कार्यक्रम सुबह 10 बजे से स्थानीय मेकेनिक नगर स्थित गौसिया मस्जिद में संपन्न होगा। 🕋 प्रशिक्षण में दी जाएगी यात्रा की बारीकियां जिला हज कमेटी के अध्यक्ष श्री आदिल तिगाले ने जानकारी देते हुए बताया कि इस वर्ष हज कमेटी और प्राइवेट टूर से जाने वाले सभी हाजियों के लिए यह प्रशिक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण है। हज कमेटी द्वारा नियुक्त ट्रेनर हाजी जाबिर खान द्वारा हाजियों को हज, उमराह, मदीना यात्रा, हज हाउस की प्रक्रिया और एयरपोर्ट पर होने वाली सभी आवश्यक औपचारिकताओं की विस्तृत जानकारी दी जाएगी। 📝 हाजियों के लिए आवश्यक निर्देश आयोजन समिति ने स्पष्ट किया है कि सभी हज यात्रियों की उपस्थिति अनिवार्य है। हाजियों को अपने साथ निम्नलिखित दस्तावेजों की फोटोकॉपी का एक सेट साथ लाना होगा: एक पासपोर्ट साइज फोटो पासपोर्ट की फोटोकॉपी वैक्सीन सर्टिफिकेट अन्य आवश्यक यात्रा दस्तावेज प्रशिक्षण स्थल पर स्थानीय जिम्मेदारों द्वारा हाजियों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई है। साथ ही, सभी प्रतिभागियों को मेडिकल डायरी और मेडिकल किट (दवाइयां) भी उपलब्ध कराई जाएगी। 👥 गरिमामयी उपस्थिति कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला हज कमेटी बड़वानी के जिला अध्यक्ष श्री आदिल तिगाले करेंगे। कार्यक्रम में जिला मुस्लिम कमेटी के जिला सदर श्री इदरीस खान मुख्य अतिथि के रूप में, और श्री अब्दुल रशीद पटेल सरपरस्त के रूप में शामिल होंगे। इसके अलावा हाजी अब्दुल रहीम तिगाले, हाजी असलम शेख, हाजी गफ्फार खत्री, समाजसेवी अब्दुल सादिक चंदेरी, आरिफ अहमद शेख, इक़रा डॉ. हाजी सफी एवं समीर आशना सहित अनेक विशिष्ट अतिथि अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे।1
- बड़वानी। मुख्यमंत्री तीर्थ योजना के तहत आए यात्रियों को अव्यवस्थाओं के कारण पूरी रात परेशानियों के बीच बितानी पड़ी। पानसेमल से बड़ी संख्या में पहुंचे यात्रियों ने आरोप लगाया कि उन्हें बड़वानी नगर पालिका परिसर के बाहर ही रुकना पड़ा, जहां न तो सोने की समुचित व्यवस्था थी और न ही भोजन व पीने के पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। पानसेमल निवासी नारायण ने बताया कि वे योजना के तहत यहां पहुंचे, लेकिन उन्हें खुले में रात गुजारनी पड़ी। उन्होंने कहा कि “यहां ना खाने की व्यवस्था है, ना पानी की और ना ही सोने की सुविधा। गर्मी में भी कोई ध्यान नहीं दे रहा, जिससे बात करो वही भगा देता है।” वहीं राजेंद्र गुप्ता ने बताया कि उनका नाम सूची में 153 नंबर पर होने के बावजूद उन्हें मौके पर वापस जाने के लिए कहा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि “हम अपने खर्चे से यहां आए हैं, लेकिन यहां न बैठने की व्यवस्था है, न पानी और न ही भोजन की सुविधा। केवल महिलाओं के लिए एक कमरा दिया गया है, बाकी लोगों के लिए कोई इंतजाम नहीं है।” यात्रियों ने यह भी बताया कि अधिकारियों से संपर्क करने पर सिर्फ आश्वासन ही मिला। एसडीएम से बात करने पर भी “व्यवस्था हो जाएगी” कहकर टाल दिया गया, लेकिन देर रात तक कोई ठोस इंतजाम नहीं किया गया। कुछ यात्रियों ने यह भी आरोप लगाया कि एक बुजुर्ग के साथ रहने वाले व्यक्ति को भी साथ ले जाने की अनुमति नहीं दी जा रही, जो मानवीय दृष्टिकोण से गलत है। स्थिति तब बदली जब मीडिया मौके पर पहुंची। मीडिया के पहुंचते ही प्रशासन सक्रिय हुआ और यात्रियों के लिए ठहरने, पानी और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था शुरू की गई, जिससे कुछ हद तक राहत मिली। इधर डिप्टी कलेक्टर शक्ति सिंह चौहान ने बताया कि ऊपर से मिले निर्देशों के अनुसार व्यवस्थाएं की गई हैं। वहीं जब नगर पालिका में बंद पड़े पंखों को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने इस संबंध में नगर पालिका से बात करने की बात कही।1
- Post by Lucky Gole (Aditya)1
- *चित्रकूट- धारकुण्डी आश्रम मार्ग में सड़क किनारे बैठा दिखा तेंदुआ, आश्रम के संत ने वीडियो में किया कैद।*1
- Post by रिपोर्टर भगवान सिंह चौहान1
- निवाली में गूंजा 'जय श्री राम' का जयघोष: श्रीराम कथा के पांचवें दिन धनुष यज्ञ और सीता स्वयंवर ने मोहा भक्तों का मन (सुनील सोनी स्वतंत्र पत्रकार) नगर में गुमडीया रोड स्थित संकटमोचन पंचमुखी हनुमान हनुमान मंदीर की प्रथम वर्षगांठ 24 मार्च के अवसर पर श्रीराम कथा का आयोजन किया गया है कथा के पांचवे दिन अहिल्या उद्धार, गंगा अवतरण व जनक पुर प्रवेश, पुष्प वाटिका प्रसंग जिससे मर्यादा और प्रेम का संदेश मिलता है, राजा जनक व्दारा धनुष यज्ञ का वर्णन, और धनुष भंग सीता स्वयंवर की कथा सुनाई निवाली (बड़वानी) | 29 मार्च रविवार धर्म और आस्था की त्रिवेणी में सराबोर निवाली क्षेत्र इन दिनों पूरी तरह राममय हो गया है। जारी भव्य श्रीराम कथा के पांचवें दिन आज पांडाल में उस समय अद्भुत दृश्य निर्मित हुआ, जब मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम ने भारी शिव धनुष को खंडित किया और माता जानकी ने उनके गले में वरमाला डाली। इस आलौकिक प्रसंग को देख निवाली और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से आए हजारों श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। 🌸 गुरु आज्ञा और धनुष भंग का प्रसंग कथावाचक ने प्रसंग की शुरुआत करते हुए बताया कि जब जनकपुर की सभा में बड़े-बड़े बलशाली राजा शिव धनुष को हिला तक नहीं पाए, तब राजा जनक अत्यंत व्याकुल हो उठे थे। ऐसे समय में महर्षि विश्वामित्र की आज्ञा पाकर प्रभु श्री राम ने जैसे ही धनुष को स्पर्श किया, वह वज्र के समान भारी धनुष तिनके की भांति टूट गया। "लेत चढ़ावत खैंचत गाढ़े। काहुं न लखा देख सबु ठाढ़े॥ तेहि छन राम मध्य धनु तोरा। भरे भुवन धुनि घोर कठोरा॥" धनुष के टूटते ही पांडाल में पुष्पवर्षा होने लगी और श्रद्धालुओं ने खड़े होकर जयकारे लगाए। सजीव झांकी और सीता स्वयंवर का उल्लास कथा के दौरान मंच पर सीता स्वयंवर की भव्य सजीव झांकी सजाई गई थी। भगवान श्री राम और लक्ष्मण के स्वरूप में सजे बालकों और माता जानकी की छवि देख ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो साक्षात मिथिला नगरी निवाली की पावन धरा पर उतर आई हो। वरमाला उत्सव: जैसे ही माता सीता ने प्रभु श्री राम को वरमाला पहनाई, पूरे पांडाल में शंख ध्वनि और ढोल-नगाड़ों की थाप गूंज उठी। श्रद्धालुओं का उत्साह: निवाली के इस धार्मिक आयोजन में महिलाओं ने मंगल गीत गाए और पुरुषों ने झूमकर अपनी खुशी का इजहार किया। ✨ निवाली के आयोजन की मुख्य विशेषताएं जनसमूह: कथा सुनने के लिए निवाली के साथ-साथ आसपास के गाँव से भी बड़ी संख्या में ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और निजी वाहनों से भक्त पहुंचे। अहिल्या उद्धार का संदेश: कथा में अहिल्या उद्धार के प्रसंग पर जोर देते हुए बताया गया कि ईश्वर केवल भाव के भूखे हैं। श्रद्धा हो तो पत्थर में भी प्राण फूंके जा सकते हैं। प्रसाद वितरण: कथा के समापन पर राम राम का एक माला जाप करवाया गया 'सीता-राम' के मिलन की खुशी में विशेष मिठाई का वितरण किया गया और भव्य महाआरती हुई। 🎙️ कथावाचक का संदेश व्यासपीठ से संदेश देते हुए कहा गया कि सीता स्वयंवर केवल एक विवाह उत्सव नहीं है, बल्कि यह अहंकार (राजाओं का गर्व) पर शालीनता और भक्ति (श्री राम) की विजय का प्रतीक है। आज के युवाओं को भगवान राम के धैर्य और गुरु के प्रति उनके सम्मान से प्रेरणा लेनी चाहिए।4