जिलाधिकारी के निर्देश पर मधुबनी समाहरणालय स्थित सभा कक्ष में अपर समाहर्ता (आपदा) की अध्यक्षता में सभी बाल विकास परियोजना पदाधिकारियों (सीडीपीओ) के साथ एक समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य महिला एवं बाल विकास विभाग से संबंधित विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा करना था। बैठक के दौरान, सभी बाल विकास परियोजना पदाधिकारियों को लंबित उपयोगिता प्रमाण-पत्र (यूसी) एवं डीसी विपत्रों का शीघ्र निष्पादन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक निर्देश दिए गए। अपर समाहर्ता ने स्पष्ट किया कि वित्तीय मामलों से संबंधित लंबित कार्यों का समयबद्ध निष्पादन विभागीय प्राथमिकताओं में शामिल है और इसमें किसी प्रकार की शिथिलता स्वीकार्य नहीं होगी। पोषण ट्रैकर ऐप के विभिन्न सूचकांकों का अवलोकन करते हुए, जिन प्रखंडों की प्रगति अपेक्षित स्तर पर नहीं पाई गई, उन्हें सुधारात्मक कार्रवाई करते हुए सभी सूचकांकों पर शत-प्रतिशत उपलब्धि सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि पोषण ट्रैकर के माध्यम से उपलब्ध आँकड़े विभागीय कार्यों के मूल्यांकन का महत्वपूर्ण आधार हैं, इसलिए सभी प्रविष्टियाँ अद्यतन एवं त्रुटिरहित होनी चाहिए। इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (Pmmvy) एवं मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना (Mkuy) के अंतर्गत आवेदन प्रविष्टि की स्थिति की भी समीक्षा की गई। जिले की उपलब्धि संतोषजनक न पाए जाने पर सभी संबंधित पदाधिकारियों के प्रति कड़ी नाराजगी व्यक्त की गई और उन्हें निर्देशित किया गया कि आगामी माह की समीक्षा बैठक तक हर हाल में शत-प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त किया जाए। इसके लिए आवेदन प्रविष्टि कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पात्र लाभार्थियों का शत-प्रतिशत आच्छादन सुनिश्चित करने को कहा गया। संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों के नियमित संचालन की भी समीक्षा हुई, जिसमें सभी केंद्रों के न्यूनतम 21 दिनों तक संचालित रहने की स्थिति का आकलन किया गया। सभी सीडीपीओ को अपने-अपने प्रखंडों में किए गए निरीक्षण कार्यों की समीक्षा करते हुए विस्तृत प्रतिवेदन तैयार कर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया, साथ ही यह भी कहा गया कि आंगनबाड़ी केंद्रों की नियमितता एवं गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सतत निगरानी एवं निरीक्षण आवश्यक है। अपर समाहर्ता (आपदा) ने सभी पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाते हुए निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति सुनिश्चित करें और सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समय पर पात्र लाभार्थियों तक पहुंचाएं। उक्त बैठक में जिला प्रोग्राम पदाधिकारी (आईसीडीएस), ललिता कुमारी, और सभी बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (सीडीपीओ) उपस्थित थीं।
जिलाधिकारी के निर्देश पर मधुबनी समाहरणालय स्थित सभा कक्ष में अपर समाहर्ता (आपदा) की अध्यक्षता में सभी बाल विकास परियोजना पदाधिकारियों (सीडीपीओ) के साथ एक समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य महिला एवं बाल विकास विभाग से संबंधित विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा करना था। बैठक के दौरान, सभी बाल विकास परियोजना पदाधिकारियों को लंबित उपयोगिता प्रमाण-पत्र (यूसी) एवं डीसी विपत्रों का शीघ्र निष्पादन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक निर्देश दिए गए। अपर समाहर्ता ने स्पष्ट किया कि वित्तीय मामलों से संबंधित लंबित कार्यों का समयबद्ध निष्पादन विभागीय प्राथमिकताओं में शामिल है और इसमें किसी प्रकार की शिथिलता स्वीकार्य नहीं होगी। पोषण ट्रैकर ऐप के विभिन्न सूचकांकों का अवलोकन करते हुए, जिन प्रखंडों की प्रगति अपेक्षित स्तर पर नहीं
पाई गई, उन्हें सुधारात्मक कार्रवाई करते हुए सभी सूचकांकों पर शत-प्रतिशत उपलब्धि सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि पोषण ट्रैकर के माध्यम से उपलब्ध आँकड़े विभागीय कार्यों के मूल्यांकन का महत्वपूर्ण आधार हैं, इसलिए सभी प्रविष्टियाँ अद्यतन एवं त्रुटिरहित होनी चाहिए। इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (Pmmvy) एवं मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना (Mkuy) के अंतर्गत आवेदन प्रविष्टि की स्थिति की भी समीक्षा की गई। जिले की उपलब्धि संतोषजनक न पाए जाने पर सभी संबंधित पदाधिकारियों के प्रति कड़ी नाराजगी व्यक्त की गई और उन्हें निर्देशित किया गया कि आगामी माह की समीक्षा बैठक तक हर हाल में शत-प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त किया जाए। इसके लिए आवेदन प्रविष्टि कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पात्र लाभार्थियों का शत-प्रतिशत आच्छादन सुनिश्चित करने को कहा गया।
संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों के नियमित संचालन की भी समीक्षा हुई, जिसमें सभी केंद्रों के न्यूनतम 21 दिनों तक संचालित रहने की स्थिति का आकलन किया गया। सभी सीडीपीओ को अपने-अपने प्रखंडों में किए गए निरीक्षण कार्यों की समीक्षा करते हुए विस्तृत प्रतिवेदन तैयार कर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया, साथ ही यह भी कहा गया कि आंगनबाड़ी केंद्रों की नियमितता एवं गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सतत निगरानी एवं निरीक्षण आवश्यक है। अपर समाहर्ता (आपदा) ने सभी पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाते हुए निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति सुनिश्चित करें और सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समय पर पात्र लाभार्थियों तक पहुंचाएं। उक्त बैठक में जिला प्रोग्राम पदाधिकारी (आईसीडीएस), ललिता कुमारी, और सभी बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (सीडीपीओ) उपस्थित थीं।
- मिथिलांचल में पहली बार 'मिथिला आइडल 2026 – मैथिली सुरक महासंग्राम' नामक एक भव्य गायन प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। यह मंच उन सभी गायकों के लिए एक बड़ा अवसर है जिनकी आवाज़ उनकी पहचान बन सकती है। इस प्रतियोगिता में विजेताओं को आकर्षक पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी। प्रथम विजेता को ₹1,00,000, द्वितीय विजेता को ₹71,000, और तृतीय विजेता को ₹51,000 की पुरस्कार राशि से सम्मानित किया जाएगा। ऑडिशन 28 और 29 जून 2026 को पटना, दरभंगा, पूर्णिया, सहरसा, जनकपुर (नेपाल), खजुरिया (नेपाल) और झंझारपुर जैसे विभिन्न स्थानों पर शुरू होंगे। जिन लोगों के अंदर गायकी का हुनर है, उन्हें अपनी आवाज़ से पूरे मिथिलांचल को मंत्रमुग्ध करने के लिए इस मंच पर आमंत्रित किया गया है।1
- मधुबनी नगर निगम क्षेत्र के वार्ड 15 की मौजूदा दशा ऐसी है कि एक थार वाहन भी वहाँ अपनी शक्ति भूल गया। सड़क की खराब स्थिति के कारण थार इस कदर फंस गई कि उसे निकालने के लिए ट्रैक्टर की सहायता लेनी पड़ी। अंततः, एक ट्रैक्टर की मदद से थार को खींचकर सुरक्षित बाहर निकाला गया।1
- मधुबनी में सनातन संस्कारों का एक विशाल महासंगम आयोजित किया गया, जहाँ सामूहिक उपनयन (यज्ञोपवीत) संस्कार और शुभ विवाह जैसे महत्वपूर्ण अनुष्ठानों की धूम मची। इस आयोजन से पूरे क्षेत्र में सनातन परंपराओं की गूंज सुनाई दी।1
- यह जानकारी दी गई है कि पूरे बिहार राज्य में एक जैसी खराब स्थिति बनी हुई है। पोस्ट में लोगों से विशेष रूप से मधुबनी जिले के मौजूदा हालात पर ध्यान देने का आग्रह किया गया है, जो इस बदहाली का एक स्पष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है।1
- कमलावाड़ी फिजिकल एकेडमी ने जयनगर के कमलाबारी में सेना एवं सुरक्षा बलों में चयनित युवाओं के सम्मान में एक भव्य समारोह का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में क्षेत्र के कई गणमान्य व्यक्तियों और समाजसेवियों ने भाग लिया। समारोह में भारतीय सुरक्षा बलों में चयनित हुए विजय कुमार, रविंद्र कुमार, शंभू कुमार और केशव किशोर को सम्मानित किया गया तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई। मुख्य अतिथि के रूप में अजय सिंह, रामचंद्र मंडल, शिवकुमार यादव और संतोष कुमार शर्मा उपस्थित रहे, जिन्हें पारंपरिक पाक-दुपट्टा देकर सम्मानित किया गया। अकादमी के सहायक ट्रेनर गौड़ी कुमार, जितेंद्र कुमार और आयुष कुमार ने इस कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मुख्य ट्रेनर मनीष कुमार, प्रवीण कुमार और सुरेश कुमार ने चयनित युवाओं की मेहनत और अनुशासन की सराहना करते हुए कहा कि निरंतर प्रयास और समर्पण से ही सफलता मिलती है। उपस्थित लोगों ने चयनित युवाओं का उत्साह बढ़ाया और अकादमी की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह संस्थान क्षेत्र के युवाओं को सेना एवं सुरक्षा बलों में शामिल होने के लिए प्रेरित कर रहा है। कार्यक्रम का माहौल उत्साह और गौरव से भरा रहा, जिसमें मुकेश, राकेश, मनोज सहित कई अन्य लोग भी उपस्थित थे।4
- बिहार के आरा में हुआ भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामला अब एक बेहद संवेदनशील और गंभीर मोड़ पर आ गया है। इस एनकाउंटर की सच्चाई पर अब बिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने ही सबसे बड़ा सवाल उठाया है, जिन्होंने पुलिसिया कार्रवाई को पूरी तरह कटघरे में खड़ा करते हुए इसे 'एनकाउंटर' मानने से साफ इनकार कर दिया है और इसे 'प्रथम दृष्ट्या हत्या' का मामला बताया है। अयोध्या से जारी एक वीडियो संदेश में पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने बेहद तल्ख लहजे में कहा कि मृतक भरत तिवारी कोई पेशेवर अपराधी, डकैत, रंगदार या आतंकवादी नहीं था। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह स्थानीय लोगों और जवनिया गांव के विस्थापितों की समस्याओं के लिए लड़ने वाला एक व्यक्ति था। पूर्व डीजीपी ने सोशल मीडिया पर वायरल क्लिपिंग्स का हवाला देते हुए पुलिस की थ्योरी की धज्जियां उड़ा दी हैं। पूर्व डीजीपी ने जो सवाल उठाए हैं, वे कानून व्यवस्था और पुलिस की ट्रेनिंग को शर्मसार करने वाले हैं। उन्होंने पूछा कि जब पुलिस खुद मान रही है कि भरत तिवारी मानसिक रूप से विक्षिप्त यानी इमोशनली अनबैलेंस था, तो एक बीमार व्यक्ति पर इतनी बर्बरता क्यों की गई? उनका दूसरा सवाल था कि भरत तिवारी के हाथ में जो पिस्टल थी, उसकी मारक क्षमता महज 30 मीटर होती है, जबकि पुलिस बल उससे 200 मीटर की दूरी पर था; ऐसे में पुलिस को कौन सा जानलेवा खतरा था? तीसरा और सबसे बड़ा सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि वीडियो में साफ दिख रहा है कि भरत तिवारी ने अपना हथियार फेंक दिया था, वह निहत्था हो चुका था और सरेंडर कर रहा था, तो फिर निहत्थे शख्स पर आधुनिक हथियारों से गोलियों की बौछार क्यों की गई? गुप्तेश्वर पांडेय ने साफ शब्दों में कहा है कि पुलिस को गाली देना या परेशान करना किसी की जान लेने का लाइसेंस नहीं बन जाता। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने अपने अहंकार को चोट पहुंचने के कारण आपा खोया और एक निहत्थे की जान ले ली। उन्होंने मुख्यमंत्री और मौजूदा डीजीपी से मांग की है कि इस मामले में तुरंत एफआईआर दर्ज हो, दोषी पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी हो और माननीय उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की निगरानी में एसआईटी जांच कराई जाए। खाकी पर लगे इस गहरे दाग के बाद अब प्रशासन क्या जवाब देगा, इस पर हमारी नजर बनी रहेगी।1
- मुंबई में आयोजित 19वें मुंबई अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (एमआईएफएफ 2026) के दौरान विश्व सिनेमा के भविष्य की एक अनूठी झलक देखने को मिली। इस महोत्सव में जर्मनी की प्रतिष्ठित फिल्म अकादमी बाडेन-वुर्टेमबर्ग जीएमबीएच की दस पुरस्कार विजेता छात्र फिल्मों का शानदार प्रदर्शन किया गया। इन फिल्मों ने अपनी रचनात्मकता, भावनात्मक गहराई और तकनीकी उत्कृष्टता के साथ दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।1
- महंगाई और बेरोजगारी जैसे ज्वलंत मुद्दों को लेकर सरकार के प्रति जनता का गुस्सा फूट पड़ा है। एक राजद (RJD) समर्थक ने सरकार को मंच से जमकर घेरा और इन गंभीर समस्याओं पर अपना तीव्र आक्रोश व्यक्त किया। वायरल हो रहे एक वीडियो में, समर्थक को सरकार की नीतियों पर तीखे हमले करते हुए देखा गया है।1