*महुआडांड़ में दम तोड़ गई नल-जल योजना, बूंद-बूंद को मोहताज गांव के लोग* रामप्रवेश गुप्ता महुआडांड़ प्रखंड के अक्सी पंचायत के चेतमा सहित पूरे प्रखंड में जल नल योजना की हकीकत कुछ ऐसी है, जहां टंकियां तो आसमान छूती नजर आती हैं, लेकिन उनमें पानी का नामोनिशान नहीं है। पाइपलाइन बिछी है, नल लगे हैं, पर उनमें से बूंद तक नहीं गिरती। करीब तीन हजार की आबादी वाला यह गांव आज भी पुराने जमाने की तरह कुआं और नदी के सहारे जीवन गुजारने को मजबूर है। *हर दिन पानी के लिए जंग* गांव के लोगों के लिए हर दिन पानी जुटाना किसी जंग से कम नहीं है। सुबह होते ही महिलाएं और बच्चे बाल्टी और बर्तन लेकर निकल पड़ते हैं। कई बार दूर-दराज के कुओं और नदी तक जाना पड़ता है। गर्मी बढ़ने के साथ हालात और बिगड़ जाते हैं। नदी सिकुड़ने लगती है और कुएं भी जवाब देने लगते हैं। ऐसे में एक-एक बूंद पानी की कीमत समझ में आती है। *जल मीनारें बनीं बेकार ढांचा* गांव में जल नल योजना के तहत लगाए गए सभी जल मीनार खराब पड़े हैं। कहीं मोटर जल चुकी है, कहीं पाइपलाइन टूट गई है, तो कहीं देखरेख के अभाव में पूरी व्यवस्था जाम हो चुकी है। ग्रामीणों का कहना है कि योजना तो आई, लेकिन उसका रखरखाव और जिम्मेदारी कहीं रास्ते में ही छूट गई। अब ये टंकियां सिर्फ यह याद दिलाती हैं कि कभी यहां पानी आने का वादा किया गया था। *आश्वासन की वर्षा, लेकिन पानी नहीं* पुल्सी देवी,अब्राहम मिंज, केल्टुस कुजूर,अगापित मिंज,अग्नासीयश मिंज,अंजुलुश कुजूर, कोरनेल्यूस मिंज समेत अन्य ग्रामीणों ने बताया कि वे कई बार विभाग को इसकी सूचना दे चुके हैं। हर बार अधिकारी आते हैं, देखते हैं और आश्वासन देकर चले जाते हैं। गांव में यह चर्चा आम है कि यहां पाइपलाइन से ज्यादा वादे बहते हैं, लेकिन पानी नहीं।
*महुआडांड़ में दम तोड़ गई नल-जल योजना, बूंद-बूंद को मोहताज गांव के लोग* रामप्रवेश गुप्ता महुआडांड़ प्रखंड के अक्सी पंचायत के चेतमा सहित पूरे प्रखंड में जल नल योजना की हकीकत कुछ ऐसी है, जहां टंकियां तो आसमान छूती नजर आती हैं, लेकिन उनमें पानी का नामोनिशान नहीं है। पाइपलाइन बिछी है, नल लगे हैं, पर उनमें से बूंद तक नहीं गिरती। करीब तीन हजार की आबादी वाला यह गांव आज भी पुराने जमाने की तरह कुआं और नदी के सहारे जीवन गुजारने को मजबूर है। *हर दिन पानी के लिए जंग* गांव के लोगों के लिए हर दिन पानी जुटाना किसी जंग से कम नहीं है। सुबह होते ही महिलाएं और बच्चे बाल्टी और बर्तन लेकर निकल पड़ते हैं। कई बार दूर-दराज के कुओं और नदी तक जाना पड़ता है। गर्मी बढ़ने के साथ हालात और बिगड़ जाते हैं। नदी सिकुड़ने लगती है और कुएं भी जवाब देने लगते हैं। ऐसे में एक-एक बूंद पानी की कीमत समझ में आती है। *जल मीनारें बनीं बेकार ढांचा* गांव में जल नल योजना के तहत लगाए गए सभी जल मीनार खराब पड़े हैं। कहीं मोटर जल चुकी है, कहीं पाइपलाइन टूट गई है, तो कहीं देखरेख के अभाव में पूरी व्यवस्था जाम हो चुकी है। ग्रामीणों का कहना है कि योजना तो आई, लेकिन उसका रखरखाव और जिम्मेदारी कहीं रास्ते में ही छूट गई। अब ये टंकियां सिर्फ यह याद दिलाती हैं कि कभी यहां पानी आने का वादा किया गया था। *आश्वासन की वर्षा, लेकिन पानी नहीं* पुल्सी देवी,अब्राहम मिंज, केल्टुस कुजूर,अगापित मिंज,अग्नासीयश मिंज,अंजुलुश कुजूर, कोरनेल्यूस मिंज समेत अन्य ग्रामीणों ने बताया कि वे कई बार विभाग को इसकी सूचना दे चुके हैं। हर बार अधिकारी आते हैं, देखते हैं और आश्वासन देकर चले जाते हैं। गांव में यह चर्चा आम है कि यहां पाइपलाइन से ज्यादा वादे बहते हैं, लेकिन पानी नहीं।
- रामप्रवेश गुप्ता महुआडांड़ अनुमंडल के जंगलों में पिछले एक हफ्ते से आग का ऐसा तांडव मचा है कि हर तरफ सिर्फ धुआं, लपटें और तबाही नजर आ रही है। लेकिन हैरानी की बात ये है कि जिम्मेदार महकमा अब भी गहरी नींद में है।जंगल धू-धू कर जल रहा है पेड़ राख बन रहे हैं और बेजुबान जानवर अपनी जान बचाने के लिए गांवों की ओर भाग रहे हैं। हालात इतने खौफनाक हैं कि आसमान में काले धुएं की मोटी चादर छा गई है ग्रामीणों को सांस लेना मुश्किल हो गया है तापमान अचानक कई डिग्री बढ़ गया है छोटे जीव-जंतु, पक्षी और उनके अंडे जलकर खत्म हो चुके हैं स्थानीय ग्रामीणों में नाराजगी एक हफ्ते से आग लगी है, लेकिन वन विभाग गहरी नींद में है कोई सुनने वाला नहीं! तेज हवाएं और सूखे पत्ते आग को और विकराल बना रहे हैं। हर दिन नया इलाका इसकी चपेट में आ रहा है, लेकिन जमीन पर असरदार कार्रवाई कहीं नजर नहीं आ रही। ये सिर्फ आग नहीं है यह सिस्टम की नाकामी, लापरवाही और संवेदनहीनता की जलती हुई मिसाल है।3
- एटा बाटा#1
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- डुमरी में बेखौफ बालू माफिया! नाबालिग चला रहे ट्रैक्टर, प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल डुमरी थाना क्षेत्र में इन दिनों नदी से बालू की अवैध ढुलाई का कारोबार तेजी से फल-फूल रहा है। जानकारी देते हुए शनिवार शाम चार बजे बताया गया कि यह गतिविधि खुलेआम प्रशासन की नजरों के सामने संचालित हो रही है, जिससे कानून-व्यवस्था और सरकारी राजस्व प्रणाली दोनों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। अहले सुबह से ही बासा नदी, डुमरडांड नदी और शंख नदी सहित कई घाटों पर ट्रैक्टरों की लंबी कतार देखी जा रही है। बिना किसी वैध अनुमति के नदी से बालू निकालकर अलग-अलग स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यह अवैध कारोबार दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। सबसे चिंताजनक पहलू यह सामने आया है कि बालू ढुलाई में लगे अधिकांश ट्रैक्टर नाबालिग चालक चला रहे हैं, जिनकी उम्र अठारह वर्ष से कम बताई जा रही है। इनके पास न तो वैध ड्राइविंग लाइसेंस है और न ही सड़क सुरक्षा नियमों की जानकारी। ऐसे में नाबालिगों की जान के साथ-साथ आम राहगीरों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ गई है। इसके अलावा क्षेत्र में चल रहे कई ट्रैक्टर बिना नंबर प्लेट के सड़कों पर दौड़ रहे हैं। नई और पुरानी गाड़ियों में गिने-चुने वाहनों को छोड़कर अधिकतर बिना पंजीकरण पहचान के संचालित हो रहे हैं, जो मोटर वाहन अधिनियम का सीधा उल्लंघन है। इसके बावजूद संबंधित विभाग की चुप्पी लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह पूरा अवैध कारोबार प्रशासन और बालू माफियाओं की मिलीभगत से संचालित हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि निगरानी सख्त होती, तो इतनी बड़ी संख्या में खुलेआम अवैध खनन और ढुलाई संभव नहीं होती। समय-समय पर शिकायतें भी की गईं, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। अवैध खनन के कारण सरकार को भारी राजस्व नुकसान हो रहा है। जहां वैध खनन से सरकारी आय बढ़ सकती थी, वहीं अवैध ढुलाई से यह पैसा माफियाओं की जेब में जा रहा है। अनियंत्रित बालू उठाव से पर्यावरणीय संतुलन पर भी खतरा मंडराने लगा है और नदी की प्राकृतिक संरचना प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से अवैध खनन पर तत्काल रोक लगाने, नाबालिग चालकों के खिलाफ कार्रवाई करने, बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों को जब्त करने और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।1
- गुमला: कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग, झारखंड सरकार की अधिसूचना संख्या 1/पी०-105/2022 का०-2299, दिनांक 17.04.2026 के आलोक में, भा०प्र०से० (झा0-2015) के अधिकारी दिलेश्वर महत्तो ने आज दिनांक 18 अप्रैल 2026 के पूर्वाह्न में जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त, गुमला के पद का प्रभार स्वतः ग्रहण किया।पदभार ग्रहण करने के उपरांत उपायुक्त ने कहा कि जिले में संचालित विकास योजनाओं एवं जनकल्याणकारी कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से क्रियान्वित करना उनकी प्राथमिकता होगी।उन्होंने प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता, जवाबदेही एवं समयबद्धता सुनिश्चित करने पर बल दिया।उपायुक्त ने यह भी कहा कि आम जनता की समस्याओं का त्वरित एवं संवेदनशील समाधान सुनिश्चित किया जाएगा तथा शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने हेतु सभी स्तरों पर समन्वय के साथ कार्य किया जाएगा।1
- गुमला: कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग, झारखंड सरकार की अधिसूचना संख्या 1/पी०-105/2022 का०-2299, दिनांक 17.04.2026 के आलोक में, भा०प्र०से० (झा0-2015) के अधिकारी दिलेश्वर महत्तो ने आज दिनांक 18 अप्रैल 2026 के पूर्वाह्न में जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त, गुमला के पद का प्रभार स्वतः ग्रहण किया। पदभार ग्रहण करने के उपरांत उपायुक्त ने कहा कि जिले में संचालित विकास योजनाओं एवं जनकल्याणकारी कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से क्रियान्वित करना उनकी प्राथमिकता होगी। उन्होंने प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता, जवाबदेही एवं समयबद्धता सुनिश्चित करने पर बल दिया। उपायुक्त ने यह भी कहा कि आम जनता की समस्याओं का त्वरित एवं संवेदनशील समाधान सुनिश्चित किया जाएगा तथा शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने हेतु सभी स्तरों पर समन्वय के साथ कार्य किया जाएगा।1
- चैनपुर: अनुमंडल मुख्यालय में लगभग 25 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे अनुमंडल स्तरीय अस्पताल के निर्माण कार्य में कथित अनियमितताओं को लेकर मामला गरमा गया है। समाचार पत्रों में खबर प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद मंगलवार को भवन निर्माण विभाग के सहायक अभियंता नंदू कुमार जांच के लिए चैनपुर पहुंचे।1
- रामप्रवेश गुप्ता महुआडांड़ प्रखंड के अक्सी पंचायत के चेतमा सहित पूरे प्रखंड में जल नल योजना की हकीकत कुछ ऐसी है, जहां टंकियां तो आसमान छूती नजर आती हैं, लेकिन उनमें पानी का नामोनिशान नहीं है। पाइपलाइन बिछी है, नल लगे हैं, पर उनमें से बूंद तक नहीं गिरती। करीब तीन हजार की आबादी वाला यह गांव आज भी पुराने जमाने की तरह कुआं और नदी के सहारे जीवन गुजारने को मजबूर है। *हर दिन पानी के लिए जंग* गांव के लोगों के लिए हर दिन पानी जुटाना किसी जंग से कम नहीं है। सुबह होते ही महिलाएं और बच्चे बाल्टी और बर्तन लेकर निकल पड़ते हैं। कई बार दूर-दराज के कुओं और नदी तक जाना पड़ता है। गर्मी बढ़ने के साथ हालात और बिगड़ जाते हैं। नदी सिकुड़ने लगती है और कुएं भी जवाब देने लगते हैं। ऐसे में एक-एक बूंद पानी की कीमत समझ में आती है। *जल मीनारें बनीं बेकार ढांचा* गांव में जल नल योजना के तहत लगाए गए सभी जल मीनार खराब पड़े हैं। कहीं मोटर जल चुकी है, कहीं पाइपलाइन टूट गई है, तो कहीं देखरेख के अभाव में पूरी व्यवस्था जाम हो चुकी है। ग्रामीणों का कहना है कि योजना तो आई, लेकिन उसका रखरखाव और जिम्मेदारी कहीं रास्ते में ही छूट गई। अब ये टंकियां सिर्फ यह याद दिलाती हैं कि कभी यहां पानी आने का वादा किया गया था। *आश्वासन की वर्षा, लेकिन पानी नहीं* पुल्सी देवी,अब्राहम मिंज, केल्टुस कुजूर,अगापित मिंज,अग्नासीयश मिंज,अंजुलुश कुजूर, कोरनेल्यूस मिंज समेत अन्य ग्रामीणों ने बताया कि वे कई बार विभाग को इसकी सूचना दे चुके हैं। हर बार अधिकारी आते हैं, देखते हैं और आश्वासन देकर चले जाते हैं। गांव में यह चर्चा आम है कि यहां पाइपलाइन से ज्यादा वादे बहते हैं, लेकिन पानी नहीं।1