मध्य प्रदेश के सागर जिले के बंडा सरकारी अस्पताल से चिकित्सा लापरवाही का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इलाज के लिए लाए गए 19 महीने के एक मासूम बच्चे की आँखों में आई ड्रॉप की जगह कथित तौर पर कफ साफ करने वाली दवा डाल दी गई। परिवार का दावा है कि इस घटना के बाद बच्चे की आँखों की रोशनी चली गई और वह तेज दर्द से तड़प उठा। इस दुखद घटना के कारण पीड़ित परिवार गहरे सदमे में है, जो आर्थिक रूप से कमजोर होने के चलते बच्चे के बेहतर इलाज को लेकर गंभीर रूप से चिंतित है। यह मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जहाँ लोग स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। इस घटना ने सरकारी अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा, दवा वितरण प्रणाली और चिकित्सीय लापरवाही के संबंध में एक गंभीर बहस छेड़ दी है। रिपोर्टों के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है, लेकिन लापरवाही की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी। लोगों की मांग है कि निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए, पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए, और बच्चे के इलाज की पूरी जिम्मेदारी सरकार उठाए।
मध्य प्रदेश के सागर जिले के बंडा सरकारी अस्पताल से चिकित्सा लापरवाही का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इलाज के लिए लाए गए 19 महीने के एक मासूम बच्चे की आँखों में आई ड्रॉप की जगह कथित तौर पर कफ साफ करने वाली दवा डाल दी गई। परिवार का दावा है कि इस घटना के बाद बच्चे की आँखों की रोशनी चली गई और वह तेज दर्द से तड़प उठा। इस दुखद घटना के कारण पीड़ित परिवार गहरे सदमे में है, जो आर्थिक रूप से कमजोर होने के चलते बच्चे के बेहतर इलाज को लेकर गंभीर रूप से चिंतित है। यह मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जहाँ लोग स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। इस घटना ने सरकारी अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा, दवा वितरण प्रणाली और चिकित्सीय लापरवाही के संबंध में एक गंभीर बहस छेड़ दी है। रिपोर्टों के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है, लेकिन लापरवाही की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी। लोगों की मांग है कि निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए, पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए, और बच्चे के इलाज की पूरी जिम्मेदारी सरकार उठाए।
- उन्नाव के सदर तहसील क्षेत्र के सैदापुर परियार गाँव के एक पीड़ित ने जिलाधिकारी को शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया है कि उसके पास वसीयत के आधार पर भूमि का स्वामित्व होने के बावजूद, संबंधित लेखपाल ने नियमों की अनदेखी करते हुए ज़मीन का दाखिल-खारिज (नामांतरण) सलीम नामक व्यक्ति के नाम कर दिया। पीड़ित ने बताया कि इस अनियमितता के कारण उसकी भूमि पर विवाद खड़ा हो गया है और उसे न्याय के लिए लगातार अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि लेखपाल को मामले की पूरी जानकारी थी, फिर भी उसने जानबूझकर अभिलेखों में कथित रूप से गलत नाम दर्ज किया, जबकि पीड़ित के पास वसीयत सहित सभी ज़रूरी दस्तावेज़ मौजूद हैं। पीड़ित ने यह भी बताया कि उसने इसी विवादित भूमि पर बैंक से ऋण लिया है, जिसके लिए मौजूदा प्रधान ने गवाही दी थी। इसके अतिरिक्त, स्थानीय पुलिस पर भी शिकायत मिलने के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई न करने का आरोप लगाया गया है। पीड़ित ने जिलाधिकारी से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, गलत तरीके से की गई दाखिल-खारिज को रद्द किया जाए, लेखपाल और अन्य दोषी अधिकारियों की भूमिका की जांच हो तथा उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाए।1
- उत्तर प्रदेश पुलिस के लखनऊ कमिश्नरेट में तैनात सिपाही सुनील कुमार शुक्ला को विभागीय जांच पूरी होने के बाद सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। उन पर यह कार्रवाई उनके द्वारा मई 2026 में सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी करने के बाद की गई थी। इस वीडियो में सिपाही ने पुलिस विभाग में मनचाही गार्द (ड्यूटी) लगाने के नाम पर प्रति पुलिसकर्मी हर महीने ₹2,000 की कथित अवैध वसूली का गंभीर आरोप लगाया था। सिपाही सुनील कुमार शुक्ला ने यह भी दावा किया था कि इस व्यवस्था के जरिए हर महीने लाखों रुपये की उगाही की जाती है। मामले के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विभाग ने एक आंतरिक जांच शुरू की। पुलिस प्रशासन के अनुसार, इस जांच में सिपाही द्वारा लगाए गए आरोपों के समर्थन में कोई पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए जा सके। इसके अतिरिक्त, उन्हें बिना अनुमति सोशल मीडिया का उपयोग करने का दोषी पाया गया, जिसे सेवा नियमों का उल्लंघन माना गया। इन्हीं आधारों पर सिपाही को सेवा से बर्खास्त करने का निर्णय लिया गया। इस घटना के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर एक तीखी बहस छिड़ गई है। एक वर्ग इसे पुलिस प्रशासन द्वारा की गई एक अनुशासनात्मक कार्रवाई बता रहा है, जबकि दूसरा वर्ग कथित भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग पर अड़ा है। इस पूरे मामले ने पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर नए सिरे से सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे जनमानस में चर्चा का माहौल बन गया है।1
- लखनऊ के इंदिरा नगर थाना क्षेत्र स्थित अरविंदो चौकी इलाके में कल दोपहर करीब 12 बजे दबंगों ने 'गेट खोलो जनगणना करना है' कहकर एक घर में घुसकर महिला, उसके पति और छोटे बच्चे के साथ मारपीट की। पीड़िता के अनुसार, दबंगों ने घर में घुसकर काशीनाथ तिवारी और उनकी पत्नी कालिंदी तिवारी को पीटा और लाखों के जेवर, नकदी व मोबाइल लूट लिए। इसके अतिरिक्त, हमलावरों ने घर के कैमरे भी तोड़ दिए, जबकि पीड़िता पड़ोस के कैमरे में दबंगों की फुटेज होने का दावा कर रही है। यह घटना एक संपत्ति विवाद से जुड़ी बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, काशीनाथ तिवारी ने पीड़िता के ससुर वीरेंद्र प्रताप सिंह से 35 लाख रुपए लिए थे, जिन्हें वापस न कर पाने पर उन्होंने वीरेंद्र को एग्रीमेंट कर वह मकान दे दिया था जिसमें वीरेंद्र की बहू और पुत्र रहते हैं। बताया जा रहा है कि काशीनाथ तिवारी धोखाधड़ी के एक मामले में गाजीपुर थाने से जेल भी जा चुका है। वह अपने दर्जनों साथियों के साथ मकान खाली कराने पहुंचा था और इसी दौरान घर में घुसकर मारपीट की। पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। सूचना मिलने पर 112 और स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन दबंगों ने काफी देर तक पुलिस से बहसबाजी की। पुलिस ने किसी तरह मामला शांत कराया और घायलों को मेडिकल के लिए बुलाया था, लेकिन न तो उनका मेडिकल हुआ और न ही इंदिरा नगर पुलिस ने पीड़ित महिला का मुकदमा दर्ज किया। पीड़िता दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है और पूरा परिवार डरा सहमा हुआ है। पीड़ित परिवार ने प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ और उच्च अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई है। अब देखना यह दिलचस्प होगा कि क्या इंदिरा नगर पुलिस इस मामले में मुकदमा दर्ज कर आरोपियों पर कार्रवाई करती है या यह मामला यूं ही ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।1
- गाजियाबाद के लोनी बॉर्डर थाना क्षेत्र में एक बाइक और कार की मामूली टक्कर के बाद हुए विवाद ने एक युवक की जान ले ली। आरोप है कि कार सवार युवकों ने कहासुनी के बाद युवक की पिटाई कर दी, जिसके बाद उसे अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने इस मामले में मुकदमा दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीमें गठित की गई हैं।2
- कानपुर के ग्वालटोली थाना क्षेत्र में रात्रि लगभग 12:30 बजे गोली चलने की सूचना मिली, जिसके बाद पुलिस तत्काल मौके पर पहुँची। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि कुछ व्यक्तियों ने आपसी कहासुनी के चलते फायरिंग की थी। इस घटना में एक व्यक्ति घायल हो गया है। घायल व्यक्ति का उपचार हैलेट अस्पताल में चल रहा है और उसकी स्थिति खतरे से बाहर बताई गई है। पुलिस ने घटना के संबंध में आरोपियों को चिन्हित करने के लिए एक टीम गठित की है और कुछ लोगों से पूछताछ भी चल रही है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि दोषियों के विरुद्ध कठोर दण्डात्मक कार्यवाही की जाएगी, और इस संबंध में डीसीपी सेंट्रल महोदय का बयान भी सामने आया है।1
- मध्य प्रदेश के सागर जिले के बंडा सरकारी अस्पताल से चिकित्सा लापरवाही का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इलाज के लिए लाए गए 19 महीने के एक मासूम बच्चे की आँखों में आई ड्रॉप की जगह कथित तौर पर कफ साफ करने वाली दवा डाल दी गई। परिवार का दावा है कि इस घटना के बाद बच्चे की आँखों की रोशनी चली गई और वह तेज दर्द से तड़प उठा। इस दुखद घटना के कारण पीड़ित परिवार गहरे सदमे में है, जो आर्थिक रूप से कमजोर होने के चलते बच्चे के बेहतर इलाज को लेकर गंभीर रूप से चिंतित है। यह मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जहाँ लोग स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। इस घटना ने सरकारी अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा, दवा वितरण प्रणाली और चिकित्सीय लापरवाही के संबंध में एक गंभीर बहस छेड़ दी है। रिपोर्टों के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है, लेकिन लापरवाही की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी। लोगों की मांग है कि निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए, पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए, और बच्चे के इलाज की पूरी जिम्मेदारी सरकार उठाए।1
- उन्नाव के बाबा खेड़ा सेहजनी क्षेत्र में कुछ बदमाशों द्वारा एक महिला पर पत्थर फेंकने की घटना सामने आई है। इस घटना के पीछे की मुख्य वजह पास में स्थित शराब की दुकान को बताया जा रहा है। सूचना देने वाले ने मुख्यमंत्री से इस विवाद पर तुरंत संज्ञान लेकर सख्त कार्रवाई करने का अनुरोध किया है। उनका दावा है कि शराब की दुकान होने के कारण इलाके में गुंडागर्दी लगातार बढ़ती जा रही है और उन्नाव में अब गुंडों का राज स्थापित होता दिख रहा है।1