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एलपीजी सिलेंडर को लेकर हुए बड़े बदला नए नियम होंगे लागू आप सब कुछ होगा दूसरे तरीके से दो सिलेंडर बुक करने के लिए काम से कम 25 दिन का होना जरूरी और कई नियम हुए हैं लागू
Dilip Kumar Bharti
एलपीजी सिलेंडर को लेकर हुए बड़े बदला नए नियम होंगे लागू आप सब कुछ होगा दूसरे तरीके से दो सिलेंडर बुक करने के लिए काम से कम 25 दिन का होना जरूरी और कई नियम हुए हैं लागू
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- “महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए बड़ी पहल। सरकार ने गांवों की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए आर्थिक सहायता और आसान लोन सुविधा बढ़ाने का फैसला किया है।”1
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- बांदा : थाना नरैनी पुलिस टीम द्वारा थाना नरैनी क्षेत्रान्तर्गत बरसडामानपुर में घर का ताला तोड़कर हुई चोरी की घटना का सफल अनावरण करते हुए अभियुक्त को गिरफ्तार किया है । बताया गया कि थाना नरैना क्षेत्र के बरसडामानपुर में पप्पू पुत्र रामसेवक के घर का ताला तोड़कर अज्ञात चोरों द्वारा सोने के जेवरात चोरी करने की घटना को अंजाम दिया गया था । जिसके सम्बन्ध में थाना नरैनी में अभियोग पंजीकृत किया गया कर अभियुक्त की पहचान व गिरफ्तारी हेतु कई टीमों का गठन किया गया था । इसी क्रम में थाना नरैनी पुलिस टीम द्वारा सीसीटीवी कैमरों, वैज्ञानिक व तकनिकी साक्ष्यों का प्रयोग कर अभियुक्तों की पहचान करते हुए मुखबिर की सूचना पर 24 घण्टे के अन्दर लहुटेरा के पास से अभियुक्त को गिरफ्तार कर लिया गया1
- अजयगढ़ की अनोखी शादी बैलगाड़ी से निकली बारात अजयगढ़:-जहाँ इस समय समाज में आधुनिकता और चमक दमक से शादी विवाह के समारोह संपन्न करने पर जोर दिया जाता है वही अजयगढ़ में एक ऐसी शादी देखने को मिली जिसमे पुरानी परम्परायो पर जोर दिया गया। अजयगढ़ के प्रसिद्ध डॉ विश्वकर्मा के द्वारा अपने छोटे बेटे की शादी में समाज में चल रही आधुनिकता की दौड़ के विपरीत पुरानी परंपरा के अनुसार बारात को बेलगाड़ियों में निकाला गया। जिसके लिए अजयगढ़ जनपद के लगभग आधा दर्जन गावो से इन वाहनों को लाया गया। बारात के दौरान बेलो के गले में पड़ी घंटियों की मधुर आवाज रात के समा में एक अलग माहौल बना रही थी।बारात में आई बैलगाड़ीया अजयगढ़ के बीरा, लोलास,शहपुरा,गड़रियन पुरवा,मझपुरवा सहित कई ग्रामो की लगभग 30 बेलगाड़ियों से बारात निकाली गई।इस आधुनिक बारात के बारे में बताते हुए डॉ विश्वकर्मा ने कहा की हम सभी आज महगी महगी गाड़ियों सहित हेलीकाप्टर में बारात को निकालते है जिससे हम अपनी पुरानी रीतियों से दूर होते जा रहे है उन्ही पुरानी रितिओ को ध्यान में रखते हुए मेरे दिमाग़ में बारात को बैलगाड़ी से ले जाने का विचार किया गया। दूसरी तरफ अमरीका और इराक में चल रहे युद्ध को देखते हुए प्रट्रोलियम पदार्थो की तंगी को देखते हुए मैंने इस तरह बारात निकालने का विचार किया।4
- मैहर । गर्मी शुरू होते ही आइसक्रीम कारोबार चमक उठा है, लेकिन मुनाफे की दौड़ में कुछ संचालक कानून को ठेंगा दिखाते नजर आ रहे हैं। शहर की सड़कों पर मोडिफाइड मोटरसाइकिल रिक्शा तेज रफ्तार से दौड़ रहे हैं, जो किसी भी वक्त हादसे की वजह बन सकते हैं। कटनी रोड पर पोड़ी गांव के पास एक ऐसे ही आइसक्रीम रिक्शा को रोका गया तो चालक ने दावा किया कि गाड़ी मैहर में पदस्थ पुलिसकर्मी संतोष पटेल की है। इस दावे के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या वर्दी की आड़ में परिवहन नियमों की अनदेखी हो रही है? अब नजरें पुलिस अधीक्षक और आरटीओ की कार्रवाई पर टिकी हैं।1
- #Apkiawajdigital बुलंदशहर | गुरुवार, 12 मार्च 2026 विशेष संवाददाता कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर बुलंदशहर के एक बुजुर्ग का वीडियो तेजी से वायरल हुआ था। वीडियो में बाबा अपनी पोती शिखा की UPSC परीक्षा में 113वीं रैंक आने की खुशी में फूट-फूटकर रो रहे थे। उस पल को लोगों ने 'संघर्ष की जीत' के रूप में देखा था। लेकिन आज, जब हकीकत सामने आई है, तो वही खुशी के आंसू परिवार के लिए गहरे शर्म और अफसोस का सबब बन गए हैं। धोखे की बुनियाद और टूटता हुआ विश्वास जांच में यह स्पष्ट हो चुका है कि पोती शिखा का यूपीएससी परीक्षा में चयन नहीं हुआ है। असल में, 113वीं रैंक हरियाणा की एक अन्य शिखा ने हासिल की थी, और बुलंदशहर वाली शिखा तो मुख्य परीक्षा (Mains) भी पास नहीं कर सकी थीं। केवल नाम की समानता का लाभ उठाकर किए गए इस दावे ने न केवल प्रशासन की नजर में परिवार की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि उस बुजुर्ग बाबा की भावनाओं का भी मजाक बना दिया है, जिन्होंने अपनी पोती की कथित सफलता को अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी उपलब्धि माना था। सोशल मीडिया का 'दिखावटी जश्न' और उसका कड़वा सच यह वायरल वीडियो मंगलवार, 10 मार्च 2026 को सामने आया था। उस वक्त बाबा का भावुक चेहरा हर किसी के दिल को छू गया था। लेकिन जब सच सामने आया कि यह सफलता महज एक 'नाम का भ्रम' थी, तो सोशल मीडिया पर लोगों ने इस पूरे घटनाक्रम को 'असंवेदनशील प्रचार' करार दिया है। परिवार पर उठे सवाल सवाल यह उठता है कि क्या केवल सुर्खियों में बने रहने के लिए एक पूरे परिवार ने बुजुर्ग दादा की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया? बिना रोल नंबर की पुष्टि किए, एक बड़े जश्न का आयोजन करना और उसे सार्वजनिक करना अब बुलंदशहर के इस परिवार पर भारी पड़ रहा है। यह घटना दिखाती है कि कैसे डिजिटल युग में बिना ठोस तथ्यों के किया गया प्रचार, अंततः अपनों के सम्मान को ही दांव पर लगा देता है। आज वह बाबा, जो गर्व से रो रहे थे, सच्चाई सामने आने के बाद शर्मिंदगी के साए में हैं।1
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