अनूपपुर जिले के जैतहरी विकास खंड अंतर्गत ग्राम पंचायत पड़रिया के ग्राम चोई में स्थित शासकीय प्राथमिक विद्यालय जुनहा टोला घोर बदहाली का शिकार होकर धराशाई होने की कगार पर पहुंच गया है। इस जर्जर स्कूल में पढ़ने वाले नन्हे मासूम बच्चे हर रोज अपनी जान जोखिम में डालकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। चुनाव जीतने के बाद जहां जनप्रतिनिधि 'मिस्टर इंडिया' बन चुके हैं, वहीं जिम्मेदार विभाग और प्रशासन 'धृतराष्ट्र' और 'भीष्म पितामह' की तरह आंखें मूंदे बैठे हैं। स्थानीय लोगों का सवाल है कि क्या प्रशासन तभी जागेगा जब किसी मासूम की जान चली जाएगी। स्कूल भवन की हालत इतनी दयनीय है कि दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें आ चुकी हैं, खिड़कियों के फ्रेम जंग खाकर टूट गए हैं और छत से प्लास्टर लगातार टूटकर गिर रहा है। बरसात के दिनों में कक्षाओं में पानी टपकने के कारण बच्चों को खुले में या बरामदे में बैठकर पढ़ना पड़ता है। सिर्फ भवन ही नहीं, स्कूल परिसर में पीने के पानी का भी कोई इंतजाम नहीं है, जिससे बच्चे भीषण गर्मी में प्यास से बेहाल रहते हैं और कई बार उन्हें बिना पानी के ही पूरा दिन गुजारना पड़ता है। इस मामले को लेकर वार्ड क्रमांक 20 के पंच दिनेश राठौर ने चिंता जताते हुए बताया कि उन्होंने कई बार सरपंच और ब्लॉक शिक्षा अधिकारी को इस गंभीर स्थिति से अवगत कराया, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई। जर्जर भवन के डर से कई अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजने से कतरा रहे हैं, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। आक्रोशित ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही स्कूल भवन की मरम्मत और पेयजल की व्यवस्था नहीं की गई, तो वे कलेक्टर कार्यालय का घेराव करेंगे।
अनूपपुर जिले के जैतहरी विकास खंड अंतर्गत ग्राम पंचायत पड़रिया के ग्राम चोई में स्थित शासकीय प्राथमिक विद्यालय जुनहा टोला घोर बदहाली का शिकार होकर धराशाई होने की कगार पर पहुंच गया है। इस जर्जर स्कूल में पढ़ने वाले नन्हे मासूम बच्चे हर रोज अपनी जान जोखिम में डालकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। चुनाव जीतने के बाद जहां जनप्रतिनिधि 'मिस्टर इंडिया' बन चुके हैं, वहीं जिम्मेदार विभाग और प्रशासन 'धृतराष्ट्र' और 'भीष्म पितामह' की तरह आंखें मूंदे बैठे हैं। स्थानीय लोगों का सवाल है कि क्या प्रशासन तभी जागेगा जब किसी मासूम की जान चली जाएगी। स्कूल भवन की हालत इतनी दयनीय है कि दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें आ चुकी हैं, खिड़कियों के फ्रेम जंग खाकर टूट गए हैं और छत से प्लास्टर लगातार टूटकर गिर रहा है। बरसात के दिनों में कक्षाओं में पानी टपकने के कारण बच्चों को खुले में या बरामदे में बैठकर पढ़ना पड़ता है। सिर्फ भवन ही नहीं, स्कूल परिसर में पीने के पानी का भी कोई इंतजाम नहीं है, जिससे बच्चे भीषण गर्मी में प्यास से बेहाल रहते हैं और कई बार उन्हें बिना पानी के ही पूरा दिन गुजारना पड़ता है। इस मामले को लेकर वार्ड क्रमांक 20 के पंच दिनेश राठौर ने चिंता जताते हुए बताया कि उन्होंने कई बार सरपंच और ब्लॉक शिक्षा अधिकारी को इस गंभीर स्थिति से अवगत कराया, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई। जर्जर भवन के डर से कई अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजने से कतरा रहे हैं, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। आक्रोशित ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही स्कूल भवन की मरम्मत और पेयजल की व्यवस्था नहीं की गई, तो वे कलेक्टर कार्यालय का घेराव करेंगे।
- अनूपपुर जिले के अमरकंटक स्थित सोनमुंडा ग्लास स्काईवॉक पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए अत्याचार और दबंगई का अड्डा बन गया है। मां नर्मदा की पावन नगरी में नगर पालिका की आड़ में तैनात दर्जन भर से अधिक युवक यहां आने वाले श्रद्धालु परिवारों के साथ सरेआम बदतमीजी और बदसलूकी कर रहे हैं। शांति और दर्शन की चाह में आने वाले लोग अपने परिवारों के साथ होने के कारण इन दबंगों के दुर्व्यवहार को चुपचाप सहने के लिए मजबूर हैं। ये युवक न केवल पर्यटकों की जेब काट रहे हैं, बल्कि उनके सम्मान को भी ठेस पहुंचा रहे हैं। इस ग्लास स्काईवॉक पर सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह भगवान भरोसे छोड़ दी गई है। 38 लाख रुपये के ठेके और 20 रुपये के टिकट के इस खेल में यात्रियों की सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए हैं। इतनी ऊंचाई पर बने स्काईवॉक पर किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए न तो कोई बचाव तंत्र (Safety System) मौजूद है और न ही कोई सुरक्षा सामग्री रखी गई है। हजारों की भारी भीड़ के बीच यदि कोई अनहोनी होती है, तो उसका जिम्मेदार कौन होगा, यह एक बड़ा यक्ष प्रश्न है। इस पूरी स्थिति ने नगर पालिका की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ठेका देते समय सुरक्षा मानकों को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया गया है। सुविधा के नाम पर रास्ता रोकना, यात्रियों को धमकाना और उनका अपमान करना ही अब यहां की हकीकत बन चुका है, जिससे ऐसा प्रतीत होता है कि श्रद्धालुओं का सम्मान ठेकेदारों के हाथों बिक चुका है।1
- चिरमिरी में यातायात अभियान के दौरान मॉडिफाइड साइलेंसर का इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई की गई है। इस विशेष अभियान के तहत कुल ₹60 हजार का जुर्माना लगाया गया है।1
- एमसीबी के चिरमिरी में पुलिस ने विशेष यातायात जांच अभियान चलाकर यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। गोदरीपारा, डोमनहिल और हल्दीबाड़ी सहित प्रमुख चौक-चौराहों पर की गई जांच के दौरान 40 से 50 वाहन चालकों के खिलाफ कार्रवाई की गई, जिनसे कुल ₹60,000 का समन शुल्क वसूला गया। इस अभियान के तहत तेज आवाज वाले मॉडिफाइड साइलेंसर लगे तीन दोपहिया वाहनों के अवैध साइलेंसर जब्त किए गए और उन पर ₹15,000 का जुर्माना लगाया गया। इसके साथ ही, बिना सीट बेल्ट, फिटनेस प्रमाण-पत्र और आवश्यक दस्तावेजों के बिना वाहन चलाने वालों पर भी कार्रवाई की गई। कार्रवाई के बीच नियमों का पालन करने वाले लोगों को प्रोत्साहित भी किया गया। अभियान के दौरान हेलमेट पहनकर यातायात नियमों का पालन करने वाले वाहन चालकों को गुलाब का फूल देकर सम्मानित किया गया। थाना प्रभारी विजय सिंह ने बताया कि सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिस द्वारा इस तरह के अभियान आगे भी लगातार जारी रहेंगे।2
- अनूपपुर के पुष्पराजगढ़ विधायक फुंदेलाल सिंह मार्को ने राम मंदिर चंदा चोरी मामले के बाद अब नर्मदा मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विधायक ने मांग की है कि ट्रस्ट को मिलने वाली राशि का उपयोग किस प्रकार किया जा रहा है, इसकी पूरी पारदर्शिता जनता के सामने आनी चाहिए। विधायक फुंदेलाल सिंह मार्को ने सवाल उठाया है कि यदि ट्रस्ट के पास पर्याप्त धनराशि उपलब्ध है, तो अमरकंटक में श्रद्धालुओं के लिए मूलभूत सुविधाओं का अब भी इतना अभाव क्यों बना हुआ है। उन्होंने तीखा प्रहार करते हुए पूछा कि क्या ट्रस्ट का कार्य केवल नर्मदा जयंती के आयोजन और दिखावे की रंगाई-पुताई करने तक ही सीमित है, या फिर विकास कार्यों पर भी प्रभावी ढंग से कोई राशि खर्च की जा रही है? विधायक ने नर्मदा मंदिर ट्रस्ट की आय-व्यय का सार्वजनिक लेखा-जोखा जारी करने और एक पूरी तरह पारदर्शी व्यवस्था लागू करने की मांग की है। विधायक के इस बयान के बाद अमरकंटक के धार्मिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल काफी तेज हो गई है और अब सभी की नजरें ट्रस्ट प्रबंधन की ओर से आने वाले जवाब पर टिकी हुई हैं।1
- सूरजपुर जिले का सोनगरा मार्केट अपनी सादगी और जीवंत माहौल के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इस ग्रामीण बाजार में रोजमर्रा की जरूरत का लगभग हर सामान और ताज़ी सब्जियां बेहद वाजिब और उचित दामों पर आसानी से मिल जाती हैं। यहां का सरल माहौल, लोगों की सहज सादगी और बाजार की रौनक लोगों को बेहद पसंद आ रही है। इसके साथ ही, सोनगरा के स्थानीय निवासियों और इस बाजार का दौरा कर चुके लोगों से अपने अनुभव व विचार साझा करने की अपील भी की गई है।1
- मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के बुढ़ार में 'नशे से दूरी है जरूरी 2.0' का संदेश दिया गया है।4
- शहडोल जिले की सीमा पर स्थित रामपुर में अपराध की बढ़ती घटनाएं बड़ी चिंता का विषय बन गई हैं। जब से रामपुर में कोयला खदान खुली है, तब से क्षेत्र में अवैध गतिविधियों में भारी वृद्धि हुई है। रातोंरात अमीर बनने के लालच में कुछ लोग अपराध का रास्ता चुन रहे हैं। ऐसे में यह जानना अत्यंत महत्वपूर्ण है कि इन अपराधियों के पीछे कौन सी ताकतें हैं और वे आखिर किसके इशारे पर इस तरह की गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं। हाल ही में हुए एक गोलीकांड में एक युवक की मौत होने से पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल फैल गया है। इस घटना के बाद मृतक के परिजनों ने कई गंभीर आरोप लगाए हैं, जिनकी गहन जांच किए जाने की सख्त जरूरत है। रामपुर में बेखौफ अपराधियों की इस हरकत से लोग बेहद चिंतित हैं और मध्य प्रदेश पुलिस, डीजीपी और एडीजीपी शहडोल से मामले की निष्पक्ष जांच कर त्वरित कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।1
- छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के गृह ग्राम के जशपुर पुलिस स्टेशन का एक हैरान करने वाला नजारा सामने आया है, जो किसी साउथ फिल्म के दृश्य जैसा लग रहा है। इस स्थिति पर तीखा आक्रोश व्यक्त करते हुए सवाल उठाया गया है कि क्या यह उचित है और क्या राज्य में अब कोई नियम-कानून बच भी गया है या नहीं। पुलिस का मनोबल गिरने से बचाने के लिए सरकार से पुरजोर मांग की गई है कि वह ऐसे लोगों के खिलाफ तुरंत कड़ी कार्रवाई के निर्देश जारी करे ताकि पुलिस का मनोबल कम न होने पाए।1