Shuru
Apke Nagar Ki App…
बढ़ते चीनी के दाम और महंगाई के विरोध में सांची में कांग्रेस का प्रदर्शन, हाथ ठेले पर खाली गैस सिलेंडर लेकर किया विरोध प्रदर्शन। बढ़ते चीनी के दाम और महंगाई के विरोध में सांची में कांग्रेस का प्रदर्शन, हाथ ठेले पर खाली गैस सिलेंडर लेकर किया विरोध प्रदर्शन।
ABBTAK NEWS Dewangnj
बढ़ते चीनी के दाम और महंगाई के विरोध में सांची में कांग्रेस का प्रदर्शन, हाथ ठेले पर खाली गैस सिलेंडर लेकर किया विरोध प्रदर्शन। बढ़ते चीनी के दाम और महंगाई के विरोध में सांची में कांग्रेस का प्रदर्शन, हाथ ठेले पर खाली गैस सिलेंडर लेकर किया विरोध प्रदर्शन।
More news from मध्य प्रदेश and nearby areas
- बढ़ते चीनी के दाम और महंगाई के विरोध में सांची में कांग्रेस का प्रदर्शन, हाथ ठेले पर खाली गैस सिलेंडर लेकर किया विरोध प्रदर्शन। बढ़ते चीनी के दाम और महंगाई के विरोध में सांची में कांग्रेस का प्रदर्शन, हाथ ठेले पर खाली गैस सिलेंडर लेकर किया विरोध प्रदर्शन।1
- गंदे जानवर आवारा सुअर रायसेन दरगाह में घुसे रायसेन। आवारा सुअर शहर में विचरण कर ही रहे हैं। पर अब यह रायसेन स्थित बाबा पीर फतेह उल्लाह साहब की मजार के आसपास भी घूम रहे हैं इससे मुस्लिम धर्म के लोगों में खासी नाराजगी है। शहर काजी जहीरूद्दीन साहब ने हमें बताया कि इसे लेकर उन्होंने पिछले दिनों एसडीएम को भी शिकायत की थी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब सभी लोग मिलकर कलेक्टर से मिलने की तैयारी में है। इससे पहले मांग की जा रही है कि इन्हें पकड़ लिया जाए। गंदे जानवर आवारा सुअर रायसेन दरगाह में घुसे रायसेन। आवारा सुअर शहर में विचरण कर ही रहे हैं। पर अब यह रायसेन स्थित बाबा पीर फतेह उल्लाह साहब की मजार के आसपास भी घूम रहे हैं इससे मुस्लिम धर्म के लोगों में खासी नाराजगी है। शहर काजी जहीरूद्दीन साहब ने हमें बताया कि इसे लेकर उन्होंने पिछले दिनों एसडीएम को भी शिकायत की थी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब सभी लोग मिलकर कलेक्टर से मिलने की तैयारी में है। इससे पहले मांग की जा रही है कि इन्हें पकड़ लिया जाए।1
- जिनसे नगरीय निकायों की सड़कों के गड्ढे तक नहीं भरा पा रहे वो गणित के विशेषज्ञ बनकर बता रहे की 99 प्रतिशत लोग मीठा खाना पसंद नहीं करते1
- नेपाल के रसुवा में भोटेकोशी नदी का तांडव: भीषण बाढ़ में सड़कें और पुल बहे, भारी तबाही की आशंका नेपाल के रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी में आई अचानक और भीषण बाढ़ ने व्यापक तबाही मचाई है। पहाड़ी ढलानों से तेज रफ्तार में उतरे मटमैले पानी के सैलाब ने कई निचले रिहाइशी इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया है। प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय प्रशासन के अनुसार, बाढ़ का मंजर इतना भयावह था कि लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। तबाही का प्रमुख ब्योरा बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान: सैलाब के तेज बहाव में कई पक्के मकान, संपर्क सड़कें और स्थानीय नदियों पर बने पुल ताश के पत्तों की तरह बह गए। यातायात और संपर्क पूरी तरह ठप्प: मुख्य मार्गों के बह जाने से रसुवा जिले के कई गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय और राजधानी काठमांडू से पूरी तरह कट गया है। व्यापक जन-जीवन प्रभावित: बाढ़ प्रभावित इलाकों से सैकड़ों परिवारों को सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करना पड़ा है, जबकि कई लोग अब भी ऊंचे इलाकों में फंसे हुए हैं। राहत और बचाव कार्य में चुनौतियाँ नेपाल सेना, सशस्त्रा प्रहरी बल और स्थानीय प्रशासन की टीमें राहत और बचाव कार्य में जुट गई हैं। हालांकि, लगातार खराब मौसम और टूट चुके संपर्क मार्गों के कारण दूरदराज के इलाकों तक पहुंचने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासनिक बयान: "जलस्तर बेहद तेज गति से बढ़ा, जिससे नुकसान का दायरा काफी बड़ा है। हमारी पहली प्राथमिकता फंसे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना और अस्थाई राहत पहुंचाना है। वास्तविक आर्थिक और भौतिक नुकसान का सटीक आकलन जलस्तर कम होने के बाद ही संभव हो पाएगा।" अस्थाई स्थिति और आगे का जोखिम भोटेकोशी नदी का बेसिन भौगोलिक रूप से बेहद संवेदनशील और तीव्र ढलान वाला माना जाता है। भूस्खलन या ऊपरी इलाकों में बादल फटने जैसी स्थितियों में यह नदी बेहद आक्रामक रूप ले लेती है। मौसम विभाग ने तटीय और निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर बने रहने की सख्त चेतावनी जारी की है।1
- विदिशा बाईपास पर फिर चोरी, सूने आवास को बनाया निशाना पुलिस ने मौके पर पहुंचकर की पड़ताल विदिशा। सिविल लाइन थाना क्षेत्र के बाईपास स्थित गिरधर कॉलोनी में बुधवार-गुरुवार की दरमियानी रात अज्ञात चोरों ने एक सूने आवास को निशाना बनाकर चोरी की वारदात को अंजाम दिया। चोर मकान का ताला तोड़कर घर में रखे सोने-चांदी के जेवरात और करीब 25 हजार रुपये नकद सहित लगभग डेढ़ लाख रुपये का सामान चोरी कर ले गए। मकान मालिक किसी काम से अपने गांव गए हुए थे और गुरुवार सुबह वापस लौटे, तब उन्हें घर का ताला टूटा मिला और चोरी की जानकारी सामने आई। घटना की सूचना सिविल लाइन पुलिस को दी गई, जिसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच-पड़ताल शुरू कर दी है। वहीं घटनास्थल के पास स्थित एक मंदिर के भी ताले टूटे होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालकर चोरों का सुराग जुटाने में लगी है।1
- गाड़ी विभाग में लगी है तो हिसाब भी विभाग का होगा! प्राइवेट बोलेरो पर ‘मध्य प्रदेश शासन’, रात में ड्राइवर के हाथों दौड़ती गाड़ी ने खोली जल संसाधन विभाग की वाहन व्यवस्था की पोल! रितिक जैन पत्रकार बाड़ी, रायसेन। जल संसाधन विभाग बाड़ी की वाहन व्यवस्था को लेकर अब सवाल और भी गंभीर हो गए हैं। मामला बोलेरो वाहन क्रमांक MP 04 TB 2393 का है। वाहन निजी स्वामित्व का है, लेकिन वह सरकारी अनुबंध के तहत जल संसाधन/सिंचाई विभाग में लगाया गया है। वाहन पर बड़े अक्षरों में “मध्य प्रदेश शासन” लिखा हुआ है और 27 अगस्त की शाम करीब 7:30 बजे बाड़ी बस स्टैंड के आसपास इसे ड्राइवर द्वारा चलाते हुए देखा गया। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उस समय एसडीओ वाहन में मौजूद नहीं थीं। यानी सरकारी अनुबंध पर विभाग में लगा निजी वाहन अधिकारी की गैरमौजूदगी में ड्राइवर के हाथों सड़कों पर दौड़ रहा था। अब सवाल केवल इतना नहीं कि गाड़ी कहां गई। सवाल यह है कि सरकारी अनुबंध पर लगी निजी गाड़ी का उपयोग किस आदेश, किस काम और किस रिकॉर्ड के आधार पर किया जा रहा है? --- सरकारी अनुबंध है तो नियम और रिकॉर्ड भी होंगे यह बात स्पष्ट है कि निजी वाहन को सरकारी विभाग में अनुबंध के आधार पर लगाया जा सकता है। लेकिन जैसे ही कोई निजी वाहन सरकारी अनुबंध का हिस्सा बनता है, उसके उपयोग, चालक, ड्यूटी, भुगतान और निर्धारित शासकीय कार्य से जुड़े रिकॉर्ड महत्वपूर्ण हो जाते हैं। ऐसे में MP 04 TB 2393 को लेकर विभाग को यह बताना होगा कि वाहन किस आदेश के तहत लगाया गया है, उसकी अनुबंध अवधि क्या है और वाहन के उपयोग की निर्धारित शर्तें क्या हैं। यदि विभाग वाहन का किराया सरकारी मद से चुका रहा है, तो फिर सरकारी पैसे से चलने वाली गाड़ी के हर किलोमीटर का हिसाब भी विभागीय रिकॉर्ड में होना चाहिए। --- रात साढ़े सात बजे बस स्टैंड पर गाड़ी—अधिकारी कहां थीं? 27 अगस्त की शाम करीब 7:30 बजे बाड़ी बस स्टैंड के आसपास वाहन की मौजूदगी ने मामले को नया मोड़ दे दिया। वाहन में एसडीओ मौजूद नहीं थीं। स्टीयरिंग ड्राइवर के हाथ में थी। अब सीधा सवाल है—अगर वाहन एसडीओ के उपयोग के लिए विभाग में अनुबंधित है, तो अधिकारी की गैरमौजूदगी में ड्राइवर वाहन लेकर किस काम से निकला था? क्या वह विभागीय ड्यूटी पर था? अगर हां, तो उस ड्यूटी का आदेश कहां है? क्या लॉगबुक में उस समय की यात्रा दर्ज है? कहां से कहां तक वाहन गया? किस अधिकारी के निर्देश पर गया? और उस यात्रा का शासकीय उद्देश्य क्या था? --- ड्राइवर का जवाब बना सबसे बड़ा सवाल जब वाहन के ड्राइवर से इस संबंध में सवाल किया गया तो उसका जवाब था— “वो तो हट गई है, ये भी निकालना है।” यहीं से मामले में सबसे बड़ा सवाल पैदा होता है। अगर ड्राइवर का इशारा विभागीय अटैचमेंट या वाहन की स्थिति की ओर था, तो आखिर “हट गई” का मतलब क्या है? क्या वाहन विभागीय अनुबंध से हट चुका है? अगर नहीं हटा है तो ऐसी बात क्यों कही गई? और अगर हट चुका है तो फिर सरकारी अनुबंध के तहत लगी गाड़ी की स्थिति क्या है? सबसे बड़ा सवाल— अगर गाड़ी हट गई तो ‘मध्य प्रदेश शासन’ क्यों नहीं हटा? --- सरकारी पहचान लगी है तो जवाबदेही भी तय होगी वाहन निजी है, लेकिन उस पर “मध्य प्रदेश शासन” लिखा हुआ है। सरकारी अनुबंध के तहत वाहन का उपयोग हो रहा है तो विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वाहन पर यह पहचान किस प्रावधान/अनुमति के तहत प्रदर्शित की जा रही है और अनुबंध समाप्त होने की स्थिति में इसे हटाने की जिम्मेदारी किसकी है। क्योंकि सड़क पर चलने वाला ऐसा वाहन आम नागरिक को सरकारी वाहन जैसा दिखाई देता है। इसलिए यह सिर्फ लिखावट का मामला नहीं है। यह सरकारी पहचान, विभागीय नियंत्रण और वाहन के अधिकृत उपयोग का सवाल है। --- अवैध गतिविधियों की आशंका पर भी जांच क्यों जरूरी? इस मामले में अभी किसी अवैध गतिविधि का प्रत्यक्ष प्रमाण सामने नहीं आया है। इसलिए किसी व्यक्ति या वाहन पर अवैध काम का सीधा आरोप लगाना उचित नहीं होगा। लेकिन सवाल यह जरूर है कि सरकारी पहचान वाले अनुबंधित वाहन का उपयोग निर्धारित शासकीय कार्यों से बाहर तो नहीं हो रहा? यदि वाहन रात में अधिकारी की गैरमौजूदगी में घूम रहा है, तो विभागीय रिकॉर्ड से यह जांचना जरूरी है कि वह किस काम पर था। क्योंकि यदि वाहन सरकारी अनुबंध पर है और उसके किराये का भुगतान सरकारी धन से होता है, तो उसके उपयोग का उद्देश्य भी शासकीय कार्य से संबंधित और रिकॉर्ड में दर्ज होना चाहिए। --- ईई के जवाब से भी नहीं थमा मामला जब इस मामले को लेकर जल संसाधन विभाग बाड़ी के कार्यपालन यंत्री (ईई) से बातचीत कर जानकारी मांगी गई तो उन्होंने कहा कि वे कार्यालय से जानकारी लेकर बताएंगे। अब यही जवाब कई सवाल छोड़ गया है। अगर वाहन विभाग के अनुबंध में है तो उसकी जानकारी विभागीय रिकॉर्ड में होनी चाहिए। अनुबंध है तो उसकी प्रति सामने आए। ड्यूटी है तो आदेश सामने आए। यात्रा है तो लॉगबुक सामने आए। भुगतान है तो बिल सामने आए। मामला जितना सीधा है, जवाब भी उतना ही सीधा होना चाहिए। --- सरकारी खजाने से भुगतान, तो हर किलोमीटर का हिसाब अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल सरकारी भुगतान का है। यदि MP 04 TB 2393 को जल संसाधन विभाग में अनुबंध के तहत लगाया गया है और उसके बदले सरकारी खजाने से प्रतिमाह भुगतान किया जा रहा है, तो विभाग को यह स्पष्ट करना होगा कि— वाहन का मासिक किराया कितना है? भुगतान किस मद से होता है? भुगतान किस अवधि से किया जा रहा है? वाहन की ड्यूटी किस अधिकारी के लिए निर्धारित है? प्रतिदिन कितने किलोमीटर चलने की अनुमति है? ईंधन का खर्च किसके जिम्मे है? लॉगबुक कौन प्रमाणित करता है? महीने के बिल का सत्यापन कौन करता है? वाहन के उपयोग की निगरानी कौन करता है? इन सवालों के जवाब आने के बाद ही पता चलेगा कि वाहन व्यवस्था वास्तव में कितनी पारदर्शी है। --- अब जांच सिर्फ गाड़ी की नहीं, पूरे रिकॉर्ड की होनी चाहिए मामले में केवल सड़क पर वाहन देखने से निष्कर्ष निकालना पर्याप्त नहीं होगा। वास्तविक जांच के लिए विभागीय दस्तावेज खंगालने होंगे। जांच के दायरे में होना चाहिए— 1. अनुबंध MP 04 TB 2393 किस निविदा/अनुबंध के तहत विभाग में लगा है? 2. अनुबंध अवधि वाहन की अनुबंध अवधि कब शुरू हुई और कब समाप्त होगी? 3. अधिकृत उपयोग वाहन किस अधिकारी अथवा कार्यालय के उपयोग के लिए निर्धारित है? 4. लॉगबुक 27 अगस्त की पूरी लॉगबुक और वाहन मूवमेंट रिकॉर्ड की जांच हो। 5. ड्राइवर ड्राइवर की नियुक्ति, अधिकृत ड्यूटी और उसे वाहन चलाने के निर्देश की जानकारी सामने आए। 6. भुगतान अब तक वाहन मालिक को सरकारी खजाने से कितना भुगतान किया गया? 7. वाहन की पहचान निजी वाहन पर “मध्य प्रदेश शासन” लिखने की अनुमति किस आधार पर है? 8. रात की ड्यूटी 27 अगस्त को शाम 7:30 बजे वाहन किस शासकीय कार्य पर था? 9. अधिकारी की मौजूदगी उस समय अधिकारी वाहन में क्यों मौजूद नहीं थीं और ड्राइवर किस निर्देश पर वाहन चला रहा था? 10. अनुबंध की शर्तें क्या वाहन का उपयोग केवल निर्धारित शासकीय कार्य के लिए किया जा सकता है और क्या उसके बाहर उपयोग की कोई अनुमति है? --- आरटीओ और विभागीय अधिकारियों के लिए भी सवाल मामला सामने आने के बाद परिवहन विभाग के स्तर पर भी वाहन के दस्तावेज और उसकी श्रेणी की स्थिति स्पष्ट की जा सकती है। वहीं जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को यह देखना चाहिए कि अनुबंधित वाहन वास्तव में निर्धारित शर्तों के अनुसार ही संचालित हो रहा है या नहीं। अगर सब कुछ नियमों के तहत है तो विभाग के पास जवाब देने के लिए पर्याप्त दस्तावेज होने चाहिए। लेकिन यदि रिकॉर्ड और मौके की स्थिति में अंतर निकलता है तो फिर जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। --- “सरकारी” लिख देने से कोई वाहन सरकारी नहीं हो जाता—लेकिन सवाल जरूर पैदा होते हैं यहां एक महत्वपूर्ण बात भी साफ होना जरूरी है। किसी निजी वाहन का सरकारी विभाग के साथ अनुबंधित होना उसे स्वामित्व की दृष्टि से सरकारी वाहन नहीं बना देता। इसलिए “प्राइवेट नंबर” और “सरकारी अनुबंध” दोनों एक साथ होना संभव है। लेकिन जब उसी वाहन पर “मध्य प्रदेश शासन” लिखा हो, तब उसकी अनुमति और उपयोग की स्थिति स्पष्ट करना जरूरी हो जाता है। यही इस खबर का मूल सवाल है। --- अब जवाबदेही तय करने का समय मामला किसी व्यक्ति विशेष को दोषी ठहराने का नहीं है। मामला है सरकारी अनुबंध पर चल रहे वाहन के उपयोग और सरकारी पहचान की पारदर्शिता का। वीडियो में वाहन दिखाई देता है। समय करीब 7:30 बजे शाम का है। वाहन ड्राइवर चला रहा है। एसडीओ वाहन में मौजूद नहीं थीं। ड्राइवर से पूछताछ हुई। उसका जवाब सामने आया— “वो तो हट गई है, ये भी निकालना है।” और विभाग के ईई ने कार्यालय से जानकारी लेकर जवाब देने की बात कही। अब इससे आगे की कहानी दस्तावेज बताएंगे। --- सबसे बड़ा सवाल फिर वही— “अगर गाड़ी विभाग से हट गई है तो ‘मध्य प्रदेश शासन’ क्यों नहीं हटा?” और अगर गाड़ी अभी भी सरकारी अनुबंध पर विभाग में लगी है तो— “27 अगस्त की शाम 7:30 बजे एसडीओ की गैरमौजूदगी में ड्राइवर उसे किस शासकीय काम से चला रहा था?” अब नजर जल संसाधन विभाग के आधिकारिक जवाब, अनुबंध की शर्तों, वाहन की लॉगबुक और भुगतान रिकॉर्ड पर है। क्योंकि सरकारी अनुबंध पर लगी प्राइवेट बोलेरो हो सकती है, लेकिन सरकारी पैसे और सरकारी पहचान से जुड़े वाहन का हिसाब भी उतना ही साफ होना चाहिए। बाड़ी में उठे ये सवाल अब केवल एक बोलेरो तक सीमित नहीं हैं—ये सवाल जल संसाधन विभाग की पूरी वाहन व्यवस्था की पारदर्शिता और निगरानी पर हैं।3
- नेपाल में भोटेकोशी नदी की भीषण बाढ़ से तबाही, खौफनाक वीडियो ने दिखाया जलप्रलय का मंजर नेपाल में भोटेकोशी नदी की भीषण बाढ़ से तबाही, खौफनाक वीडियो ने दिखाया जलप्रलय का मंजर काठमांडू/रसुवा। बाढ़ का ऐसा खौफनाक मंजर शायद ही किसी ने देखा हो। नेपाल के रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी में आई अचानक भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी। तेज रफ्तार पानी और मलबे के सैलाब ने देखते ही देखते घरों, सड़कों, पुलों, वाहनों और नदी किनारे बने ढांचों को अपनी चपेट में ले लिया। सामने आए वीडियो में पानी का रौद्र रूप देखकर तबाही की भयावहता का अंदाजा लगाया जा सकता है। सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में टिमुरे और स्याफ्रुबेसी शामिल हैं। बाढ़ ने बाजारों, पुलों, सड़क मार्गों और जलविद्युत परियोजनाओं को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। कई इलाकों का संपर्क टूट गया और राहत-बचाव अभियान में भी मुश्किलें सामने आ रही हैं। कुछ ही मिनटों में मच गई तबाही रिपोर्टों के मुताबिक 26 अगस्त की सुबह भोटेकोशी नदी में अचानक पानी का सैलाब आया। नदी का पानी मलबे के साथ इतनी तेजी से नीचे की ओर बढ़ा कि लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। टिमुरे से लेकर स्याफ्रुबेसी और आगे के इलाकों तक कई स्थानों पर भारी नुकसान दर्ज किया गया है। नेपाल के अधिकारियों के अनुसार 27 अगस्त तक मृतकों की संख्या 157 तक पहुंच गई है और बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं। बचाव और राहत अभियान लगातार जारी है, जबकि खराब मौसम और क्षतिग्रस्त संपर्क मार्ग अभियान में बाधा बन रहे हैं। सेना और सुरक्षा बल राहत अभियान में जुटे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में नेपाल सेना, पुलिस और सशस्त्र सुरक्षा बलों की टीमें खोज एवं बचाव अभियान में लगी हैं। कई स्थानों पर सड़क और संचार व्यवस्था क्षतिग्रस्त होने के कारण प्रभावित लोगों तक पहुंचना चुनौती बना हुआ है। प्रशासन ने नदी किनारे और संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की अपील की है। भोटेकोशी नदी का यह जलप्रलय नेपाल के लिए बड़ी प्राकृतिक आपदा बनकर सामने आया है। वीडियो में दिखाई दे रहा मंजर इस बात की गवाही दे रहा है कि पानी का बहाव कितना विनाशकारी था—जहां कुछ समय पहले घर, सड़कें और पुल मौजूद थे, वहां अब मलबे और तबाही के निशान दिखाई दे रहे हैं।2
- जर्दे का गुटखा नहीं देने पर किसान पर जानलेवा हमला, गंभीर हालत में भोपाल रेफर रायसेन जिले के बेगमगंज थाना क्षेत्र के ग्राम कस्बा चौका में जर्दे का गुटखा नहीं देने की बात को लेकर एक किसान पर हसिए से हमला किए जाने का मामला सामने आया है। हमले में किसान गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे प्राथमिक उपचार के बाद भोपाल रेफर किया गया है। जानकारी के अनुसार किसान शारिक मंसूरी खेत से चारा काटने के बाद नमाज पढ़ने के लिए गांव लौट रहा था। इसी दौरान गांव के ही सुनील महाराज ने उससे जर्दे का गुटखा मांगा। किसान ने गुटखा नहीं खाने और अपने पास नहीं होने की बात कही। बताया जा रहा है कि इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद हो गया। आरोप है कि विवाद बढ़ने पर सुनील महाराज ने किसान के हाथ से हसिया छीन लिया और उसके सिर व हाथ पर वार कर दिए। हमले में किसान गंभीर रूप से घायल हो गया। परिजन घायल4 किसान को तत्काल बेगमगंज के सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर हालत को देखते हुए भोपाल रेफर कर दिया। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।4