शिक्षकों खान सर और रौशन आनंद सर के बीच चल रही कथित प्रतिद्वंद्विता अब मात्र फीस या आरक्षण श्रेणी (BC) से जुड़ा मामला न होकर, 'MY समीकरण' (मुस्लिम-यादव समीकरण) से जुड़ी लड़ाई का रूप ले चुकी है। लेखक के अनुसार, खान सर को मुसलमान भी मुसलमान नहीं मानते, क्योंकि उनकी हरकतें ही ऐसी हैं। पोस्ट में स्पष्ट कहा गया है कि खान सर की सराहना नहीं की जा रही और उनके साथ जो कुछ हो रहा है, वह बिल्कुल सही और उनके हकदार हैं। वहीं, रौशन यादव सर की बात करें तो 'यादव वाद' विचारधारा से ग्रस्त लोग सोशल मीडिया पर पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ उनके समर्थन में खड़े हैं। फेसबुक और ट्विटर जैसे मंचों पर उनके समर्थन में लगातार पोस्ट किए जा रहे हैं, जिससे एक बड़ा कोहराम मचा हुआ है। इस संदर्भ में, पोस्ट 'मियां जी' (मुस्लिम समुदाय के लोगों) को सीधे तौर पर चेताते हुए कहती है कि उन्हें होश में रहना चाहिए। लेखक का कहना है कि जिस 'MY समीकरण' के लिए वे अपनी जवानी कुर्बान कर रहे हैं और 'लालू के लाल' के पीछे खड़े हैं, उन्हें यह समझना होगा कि इसी समीकरण में से 'Y' समाज के लोग और नेतागण उनके सबसे बड़े दुश्मन और कट्टर विरोधी हैं। लेखक की सलाह है कि इस बात को जितनी जल्दी समझा जाएगा, सियासी गलियारों में आगे बढ़ने में उतनी ही आसानी होगी। पोस्ट के अंत में लेखक ने स्पष्ट किया कि इस बात का कोई गलत अर्थ न निकाला जाए, बल्कि यह केवल कुछ 'मियां जी' को आईना दिखाने का प्रयास है।
शिक्षकों खान सर और रौशन आनंद सर के बीच चल रही कथित प्रतिद्वंद्विता अब मात्र फीस या आरक्षण श्रेणी (BC) से जुड़ा मामला न होकर, 'MY समीकरण' (मुस्लिम-यादव समीकरण) से जुड़ी लड़ाई का रूप ले चुकी है। लेखक के अनुसार, खान सर को मुसलमान भी मुसलमान नहीं मानते, क्योंकि उनकी हरकतें ही ऐसी हैं। पोस्ट में स्पष्ट कहा गया है कि खान सर की सराहना नहीं की जा रही और उनके साथ जो कुछ हो रहा है, वह बिल्कुल सही और उनके हकदार हैं। वहीं, रौशन यादव सर की बात करें तो 'यादव वाद' विचारधारा से ग्रस्त लोग सोशल मीडिया पर पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ उनके समर्थन में खड़े हैं। फेसबुक और ट्विटर जैसे मंचों पर उनके समर्थन में लगातार पोस्ट किए जा रहे हैं, जिससे एक बड़ा कोहराम मचा हुआ है। इस संदर्भ में, पोस्ट 'मियां जी' (मुस्लिम समुदाय के लोगों) को सीधे तौर पर चेताते हुए कहती है कि उन्हें होश में रहना चाहिए। लेखक का कहना है कि जिस 'MY समीकरण' के लिए वे अपनी जवानी कुर्बान कर रहे हैं और 'लालू के लाल' के पीछे खड़े हैं, उन्हें यह समझना होगा कि इसी समीकरण में से 'Y' समाज के लोग और नेतागण उनके सबसे बड़े दुश्मन और कट्टर विरोधी हैं। लेखक की सलाह है कि इस बात को जितनी जल्दी समझा जाएगा, सियासी गलियारों में आगे बढ़ने में उतनी ही आसानी होगी। पोस्ट के अंत में लेखक ने स्पष्ट किया कि इस बात का कोई गलत अर्थ न निकाला जाए, बल्कि यह केवल कुछ 'मियां जी' को आईना दिखाने का प्रयास है।
- शिक्षकों खान सर और रौशन आनंद सर के बीच चल रही कथित प्रतिद्वंद्विता अब मात्र फीस या आरक्षण श्रेणी (BC) से जुड़ा मामला न होकर, 'MY समीकरण' (मुस्लिम-यादव समीकरण) से जुड़ी लड़ाई का रूप ले चुकी है। लेखक के अनुसार, खान सर को मुसलमान भी मुसलमान नहीं मानते, क्योंकि उनकी हरकतें ही ऐसी हैं। पोस्ट में स्पष्ट कहा गया है कि खान सर की सराहना नहीं की जा रही और उनके साथ जो कुछ हो रहा है, वह बिल्कुल सही और उनके हकदार हैं। वहीं, रौशन यादव सर की बात करें तो 'यादव वाद' विचारधारा से ग्रस्त लोग सोशल मीडिया पर पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ उनके समर्थन में खड़े हैं। फेसबुक और ट्विटर जैसे मंचों पर उनके समर्थन में लगातार पोस्ट किए जा रहे हैं, जिससे एक बड़ा कोहराम मचा हुआ है। इस संदर्भ में, पोस्ट 'मियां जी' (मुस्लिम समुदाय के लोगों) को सीधे तौर पर चेताते हुए कहती है कि उन्हें होश में रहना चाहिए। लेखक का कहना है कि जिस 'MY समीकरण' के लिए वे अपनी जवानी कुर्बान कर रहे हैं और 'लालू के लाल' के पीछे खड़े हैं, उन्हें यह समझना होगा कि इसी समीकरण में से 'Y' समाज के लोग और नेतागण उनके सबसे बड़े दुश्मन और कट्टर विरोधी हैं। लेखक की सलाह है कि इस बात को जितनी जल्दी समझा जाएगा, सियासी गलियारों में आगे बढ़ने में उतनी ही आसानी होगी। पोस्ट के अंत में लेखक ने स्पष्ट किया कि इस बात का कोई गलत अर्थ न निकाला जाए, बल्कि यह केवल कुछ 'मियां जी' को आईना दिखाने का प्रयास है।1
- स्टेशन से ट्रेन छूट जाने के कारण कई यात्री उस पर नहीं चढ़ पाए। यात्रियों ने चलती हुई ट्रेन में चढ़ने के लिए जद्दोजहद करना मुनासिब नहीं समझा और अगली ट्रेन का इंतजार करने का फैसला किया है। मौके पर अरबाज, शाहबाज, अब्दुल, फैजुन, इरफान और समी नामक यात्री मौजूद दिखे, जिन्होंने बताया कि वे दूसरी ट्रेन आने पर अपनी यात्रा करेंगे।1
- बिहार के नालंदा जिले में स्थित ऐतिहासिक एवं धार्मिक नगरी राजगीर में प्रसिद्ध मलमास मेला 2026 इस वर्ष भी श्रद्धालुओं, पर्यटकों और मनोरंजन प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। प्रत्येक तीन वर्ष पर लगने वाला यह मेला अपनी धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन महत्व के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है, जहाँ देश के विभिन्न राज्यों से लाखों श्रद्धालु और पर्यटक मेले की भव्यता का आनंद लेने पहुँच रहे हैं। मेले का शुभारंभ 17 मई 2026 को राज्य सरकार के वरिष्ठ नेताओं एवं प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति में किया गया। इस दौरान दिल्ली से स्वतंत्र विचारक एवं समाजसेवी विजय प्रधान अपने परिवार के साथ राजगीर मलमास मेला देखने पहुँचे। उन्होंने बताया कि वर्षों से इस मेले को देखने की उनकी इच्छा इस बार पूरी हुई। विजय प्रधान ने अपने परिवार के साथ पूरे मेले का भ्रमण किया और वहाँ के धार्मिक व सांस्कृतिक वातावरण का भरपूर आनंद लिया। उन्होंने यह भी बताया कि राजगीर के चर्चित समाजसेवी मुन्ना लाल उनके साढ़ू हैं और उनकी पत्नी नूतन देवी जिला परिषद प्रतिनिधि हैं, जिनके मार्गदर्शन और आतिथ्य में उनके पूरे परिवार को मेले का भ्रमण करने का अवसर मिला। विजय प्रधान ने राजगीर की ऐतिहासिक विरासत, धार्मिक महत्व और मेले की शानदार व्यवस्था की सराहना की। मेले में धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ मनोरंजन के विविध साधन भी लोगों को खूब आकर्षित कर रहे हैं। शाम होते ही पूरा मेला रंग-बिरंगी रोशनी और लोगों की चहल-पहल से गुलजार हो उठता है। यहाँ लगे झूले, सर्कस, जादूघर, थिएटर और विशेष रूप से 'मौत का कुआं' मुख्य आकर्षण बने हुए हैं, जहाँ बाइक और कार चालकों के रोमांचक करतब दर्शकों को रोमांचित कर रहे हैं। जादूघर में जादूगरों के अद्भुत प्रदर्शन बच्चों और बड़ों को समान रूप से पसंद आ रहे हैं, वहीं थिएटर में प्रस्तुत रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम, नृत्य और संगीत की प्रस्तुतियों को देखने के लिए दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ रही है। खिलौनों की दुकानें, खानपान के स्टॉल और विभिन्न मनोरंजन साधन भी लोगों को खूब लुभा रहे हैं। मेले में परिवार और दोस्तों के साथ पहुँचे लोग उत्साहपूर्वक आनंद लेते दिखाई दे रहे हैं, खासकर बच्चों में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। प्रशासन द्वारा सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं ताकि श्रद्धालु एवं पर्यटक सुरक्षित वातावरण में मेले का लुत्फ उठा सकें। कुल मिलाकर, राजगीर मलमास मेला 2026 आस्था, संस्कृति, पर्यटन और मनोरंजन का एक अद्भुत संगम बनकर लोगों को अपनी ओर खींच रहा है, जो देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए एक यादगार अनुभव साबित हो रहा है।1
- अमेरिका से लौट रहे अभिजीत दीपके ने लोगों से एयरपोर्ट न आने के लिए कहा है, लेकिन इस अप्रत्याशित बदलाव के पीछे का कारण अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है कि आखिर उन्होंने अपना यह प्लान क्यों बदला।1
- ग्राम नीमचक के निवासी शंकर कुमार ने मसकौर पंचायत/प्रखंड के मुखिया/प्रखंड विकास पदाधिकारी को एक पत्र लिखकर नीमचक से पसारही तक जाने वाली सड़क की गंभीर स्थिति पर ध्यान आकर्षित कराया है। इस पत्र में तत्काल सड़क के निर्माण या मरम्मत की मांग की गई है, क्योंकि यह मार्ग अत्यंत जर्जर और कच्चा है। पत्र के अनुसार, बरसात के दिनों में इस सड़क पर चलना बेहद मुश्किल हो जाता है। इससे विद्यार्थियों, किसानों, मरीजों और आम ग्रामीणों को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा, कई स्थानों पर कीचड़ और बड़े-बड़े गड्ढों के कारण दुर्घटनाओं की आशंका लगातार बनी रहती है। जनहित को ध्यान में रखते हुए, शंकर कुमार ने मुखिया/प्रखंड विकास पदाधिकारी से इस महत्वपूर्ण सड़क का शीघ्र निर्माण या मरम्मत कराने का विनम्र अनुरोध किया है। ग्रामीणों ने यह भी कहा है कि इस कार्य के लिए वे सभी उनके आभारी रहेंगे। यह पत्र 05/06/2026 को लिखा गया है।1
- नवादा जिले के गोविंदपुर प्रखंड के हरनारायणपुर गांव में शुक्रवार दोपहर एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया, जब गांव निवासी उपेंद्र प्रसाद का दो मंजिला मकान अचानक भरभराकर गिर गया। इस घटना से पूरे गांव में अफरा-तफरी मच गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोपहर में जब उपेंद्र प्रसाद का परिवार घर के अंदर बैठा हुआ था, तभी मकान का एक हिस्सा अचानक टूटकर गिरने लगा। स्थिति को भांपते हुए परिवार के सभी सदस्य तुरंत घर से बाहर निकल गए और अपनी जान बचाने में सफल रहे। कुछ ही देर में पूरा दो मंजिला मकान देखते ही देखते पूरी तरह ध्वस्त हो गया। हालांकि, इस हादसे में परिवार के सभी सदस्य बाल-बाल बच गए, पर महिला और बच्चों सहित कुल चार लोगों को हल्की चोटें आई हैं। गृहस्वामी उपेंद्र प्रसाद ने बताया कि यदि यह घटना रात के समय होती तो कहीं बड़ा हादसा हो सकता था। मकान गिरने से बगल में स्थित इंद्रदेव यादव के अर्धनिर्मित मकान को भी काफी नुकसान पहुंचा है, जिसके मलबे की चपेट में आने से उसकी दीवारें और अन्य हिस्से क्षतिग्रस्त हो गए। घटना के बाद गांव में भारी भीड़ जुट गई और स्थानीय लोगों ने कोई जनहानि न होने पर राहत की सांस ली। मकान गिरने से उपेंद्र प्रसाद को लाखों रुपये की संपत्ति का नुकसान होने का अनुमान है, जिससे अब परिवार के सामने रहने और दैनिक जीवन की नई चुनौतियाँ खड़ी हो गई हैं।1
- कॉकरोच जनता पार्टी ने दिल्ली के जंतर मंतर पर 6 जून को एक बड़े धरना प्रदर्शन का ऐलान किया है। पार्टी की ओर से बताया गया है कि यह उनका अब तक का सबसे बड़ा धरना प्रदर्शन होगा।1
- नवादा जिले के नरहट थाना क्षेत्र के चैनपुरा गांव से मानवता को शर्मसार करने वाली एक घटना सामने आई है, जहाँ कुछ दबंग लोगों पर महिलाओं के साथ मारपीट और अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगा है। पीड़ित महिलाओं के मुताबिक, दबंग उनके घर में घुस आए और घर में पुरुष सदस्य न होने का फायदा उठाते हुए उनके साथ मारपीट की। आरोप है कि महिलाओं के बाल पकड़कर घसीटा गया, उनके साथ अभद्र व्यवहार और छेड़छाड़ की गई तथा राइफल के बट से उन पर हमला भी किया गया। इस क्रूर हमले में दो महिलाओं का सिर फट गया है, जबकि एक अन्य महिला गंभीर रूप से घायल बताई जा रही है। पीड़ित परिवार अब न्याय और सुरक्षा की मांग कर रहा है। यह घटना लगातार बढ़ती आपराधिक घटनाओं के बीच कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। अब यह देखना होगा कि नरहट पुलिस और नवादा प्रशासन इस मामले में आरोपियों पर क्या कार्रवाई करता है और पीड़ित परिवार को कब न्याय मिलता है। व्हाइट हाउस ऑफ नवादा ने इस मामले पर प्रशासन की कार्रवाई और पीड़ित परिवार की आवाज को लगातार उठाने का संकल्प लिया है, ताकि महिलाओं को न्याय मिल सके।1