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पहाड़ों से इश्क, शिखर तक पहुंचने का जुनून... सार्थक ने बढ़ा रहे टिहरी का मान सफलता की कहानी।टिहरी कुछ लोग पहाड़ों को दूर से निहारते हैं, कुछ उनकी खूबसूरती में खो जाते हैं और कुछ ऐसे भी होते हैं, जो उन्हीं पहाड़ों की दुर्गम चोटियों को अपना लक्ष्य बना लेते हैं। टिहरी के सार्थक कुड़ियाल इन्हीं जुनूनी लोगों में से एक हैं। जिन पहाड़ों को देखकर लोग उनकी विशालता और कठिनाइयों का अंदाजा लगाते हैं, सार्थक ने उन्हीं पहाड़ों को अपने सपनों की मंजिल बनाया। संकल्प, साहस और अदम्य इच्छाशक्ति के दम पर उन्होंने 6,137 मीटर ऊंची हिमालय की बेहद चुनौतीपूर्ण श्रीकंठ चोटी का सफल आरोहण कर एक नया कीर्तिमान भी स्थापित किया है। इस उपलब्धि के साथ वे दुनिया के सबसे युवा श्रीकंठ पर्वतारोही बने हैं। उनकी इस सफलता ने न केवल टिहरी गढ़वाल, बल्कि पूरे उत्तराखंड को गौरवान्वित किया है। *पहाड़ों की गोद में पला सपना, बना जीवन का लक्ष्य* जनपद टिहरी गढ़वाल के विकासखंड प्रतापनगर के ग्राम शुक्री निवासी सार्थक कुड़ियाल का जन्म अगस्त 2001 में नई टिहरी में हुआ। उनके पिता श्री रमेश कुड़ियाल पेशे से पत्रकार हैं, जबकि माता श्रीमती सरिता कुड़ियाल समाजसेविका हैं। वे पूर्व में भारत सरकार की महत्वपूर्ण परियोजना महिला समाख्या में जिला समन्वयक के पद पर भी कार्य कर चुकी हैं। सार्थक की प्रारंभिक शिक्षा ऑल सेंट्स कॉन्वेंट स्कूल एवं केंद्रीय विद्यालय, नई टिहरी में हुई। इसके बाद उन्होंने देहरादून से आगे की पढ़ाई पूरी की। शिक्षा के साथ-साथ प्रकृति और पहाड़ों के प्रति उनका आकर्षण गहराता गया। धीरे-धीरे यही आकर्षण उनके जीवन का उद्देश्य और पर्वतारोहण उनका करियर बन गया। *कठिन प्रशिक्षण से निखरी पर्वतारोहण की दक्षता* पर्वतारोहण केवल शारीरिक क्षमता का प्रदर्शन नहीं, बल्कि मानसिक दृढ़ता, अनुशासन, तकनीकी दक्षता और विपरीत परिस्थितियों में निर्णय लेने की क्षमता का भी कठिन परीक्षण है। इस चुनौती को समझते हुए सार्थक ने अपने हुनर को व्यवस्थित प्रशिक्षण के जरिए निखारा। उन्होंने नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (निम), उत्तरकाशी से बेसिक माउंटेनियरिंग कोर्स, सर्च एंड रेस्क्यू कोर्स तथा एमओआई कोर्स किया। इसके अतिरिक्त मनाली स्थित अभिमास (ABHIMAS) से एडवांस माउंटेनियरिंग कोर्स भी पूरा किया। प्रशिक्षण और निरंतर अभ्यास के जरिए उन्होंने पर्वतारोहण की तकनीकी बारीकियों को सीखा और कई चुनौतीपूर्ण चोटियों पर सफल आरोहण कर अपने अनुभव को विस्तार दिया। *श्रीकंठ चोटी : जहां हर कदम पर होती है हौसले की परीक्षा* समुद्र तल से 6,137 मीटर की ऊंचाई पर स्थित श्रीकंठ चोटी को तकनीकी दृष्टि से बेहद चुनौतीपूर्ण माना जाता है। यहां तक पहुंचने का रास्ता केवल ऊंचाई की चुनौती नहीं, बल्कि पर्वतारोहियों के धैर्य, कौशल और शारीरिक क्षमता की भी परीक्षा लेता है। कम ऑक्सीजन, खड़ी ढलानें और प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियां इस अभियान को और कठिन बना देती हैं। बताया जाता है कि अब तक इस चोटी पर केवल चार पर्वतारोहण दल ही सफलतापूर्वक आरोहण कर पाए हैं। ऐसे में सार्थक की सफलता पर्वतारोहण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उत्तराखंड सरकार की ओर से वर्ष 2022-23 में प्रायोजित श्रीकंठ चोटी पर्वतारोहण अभियान के लिए भी सार्थक का चयन हुआ था। अभियान में सफलता के बाद उन्हें माननीय मुख्यमंत्री द्वारा सम्मानित किया गया था। *पर्वत उनके लिए मंजिल नहीं, जीवन का हिस्सा हैं* सार्थक के लिए पर्वतारोहण महज किसी ऊंची चोटी को फतह करने का रोमांच नहीं है। यह पहाड़ों को करीब से जानने, प्रकृति के विस्तार को महसूस करने और मानव जीवन तथा प्रकृति के बीच गहरे संबंध को समझने का माध्यम है। पर्वतारोहण के साथ-साथ उन्होंने जल क्रीड़ा के क्षेत्र में भी प्रशिक्षण प्राप्त किया है। प्रकृति के प्रति उनका लगाव और पहाड़ों के प्रति समर्पण उनके व्यक्तित्व की विशिष्ट पहचान है। सार्थक कहते हैं, "पहाड़ मेरे लिए केवल पहाड़ नहीं हैं, बल्कि मेरा जीवन हैं। मैं हर ऊंचे से ऊंचे पहाड़ की चोटी पर पहुंचकर एक और पहाड़ देखना चाहता हूं। मेरे लिए पर्वतारोहण किसी चोटी को फतह करने तक सीमित नहीं है, बल्कि पहाड़ों के विस्तार, प्रकृति में उनके महत्व और मानव जीवन के साथ उनके अंतरसंबंध को समझने का एक माध्यम है। किसी ऊंची चोटी पर पहुंचकर दुनिया को देखने का नजरिया ही बदल जाता है।" उनके इस विचार में पर्वतारोहण के प्रति उनका जुनून ही नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति उनकी संवेदनशीलता भी झलकती है। *युवाओं के लिए प्रेरणा, टिहरी के लिए गौरव* सार्थक की यह उपलब्धि बताती है कि पहाड़ों की कठिन परिस्थितियों में पले-बढ़े युवाओं के सपने भी हिमालय की चोटियों की तरह ऊंचे हो सकते हैं। जरूरत है तो केवल अपने लक्ष्य के प्रति समर्पण, निरंतर अभ्यास और चुनौतियों से जूझने के साहस की। सार्थक के लिए श्रीकंठ चोटी का आरोहण कोई अंतिम पड़ाव नहीं, बल्कि हिमालय की अनगिनत ऊंचाइयों की ओर बढ़ते सफर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। पहाड़ों को अपना पहला प्रेम और जीवन का अभिन्न हिस्सा मानने वाले सार्थक की यह सफलता नई पीढ़ी के युवाओं को अपने सपनों को पहचानने, उन्हें लक्ष्य में बदलने और पूरे समर्पण के साथ उन्हें हासिल करने की प्रेरणा देती है। कहते हैं कि शिखर पर पहुंचने वाले कदमों के पीछे वर्षों का अभ्यास और अनगिनत संघर्ष छिपे होते हैं। सार्थक कुड़ियाल की कहानी भी इसी जुनून, समर्पण और हौसले की कहानी है, जिसने टिहरी की धरती से निकलकर हिमालय की ऊंचाइयों पर अपनी पहचान बनाई है।

1 hr ago
user_Arunabh Raturi
Arunabh Raturi
Local News Reporter ऋषिकेश, देहरादून, उत्तराखंड•
1 hr ago
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पहाड़ों से इश्क, शिखर तक पहुंचने का जुनून... सार्थक ने बढ़ा रहे टिहरी का मान सफलता की कहानी।टिहरी कुछ लोग पहाड़ों को दूर से निहारते हैं, कुछ उनकी खूबसूरती में खो जाते हैं और कुछ ऐसे भी होते हैं, जो उन्हीं पहाड़ों की दुर्गम चोटियों को अपना लक्ष्य बना लेते हैं। टिहरी के सार्थक कुड़ियाल इन्हीं जुनूनी लोगों में से एक हैं। जिन पहाड़ों को देखकर लोग उनकी विशालता और कठिनाइयों का अंदाजा लगाते हैं, सार्थक ने उन्हीं पहाड़ों को अपने सपनों की मंजिल बनाया। संकल्प, साहस और अदम्य इच्छाशक्ति के दम पर उन्होंने 6,137 मीटर ऊंची हिमालय की बेहद चुनौतीपूर्ण श्रीकंठ चोटी का सफल आरोहण कर एक नया कीर्तिमान भी स्थापित किया है। इस उपलब्धि के साथ वे दुनिया के सबसे युवा श्रीकंठ पर्वतारोही बने हैं। उनकी इस सफलता ने न केवल टिहरी गढ़वाल, बल्कि पूरे उत्तराखंड को गौरवान्वित किया है। *पहाड़ों की गोद में पला सपना, बना जीवन का लक्ष्य* जनपद टिहरी गढ़वाल के विकासखंड प्रतापनगर के ग्राम शुक्री निवासी सार्थक कुड़ियाल का जन्म अगस्त 2001 में नई टिहरी में हुआ। उनके पिता श्री रमेश कुड़ियाल पेशे से पत्रकार हैं, जबकि माता श्रीमती सरिता कुड़ियाल समाजसेविका हैं। वे पूर्व में भारत सरकार की महत्वपूर्ण परियोजना महिला समाख्या में जिला समन्वयक के पद पर भी कार्य कर चुकी हैं। सार्थक की प्रारंभिक शिक्षा ऑल सेंट्स कॉन्वेंट स्कूल एवं केंद्रीय विद्यालय, नई टिहरी में हुई। इसके बाद उन्होंने देहरादून से आगे की पढ़ाई पूरी की। शिक्षा के साथ-साथ प्रकृति और पहाड़ों के प्रति उनका आकर्षण गहराता गया। धीरे-धीरे यही आकर्षण उनके जीवन का उद्देश्य और पर्वतारोहण उनका करियर बन गया। *कठिन प्रशिक्षण से निखरी पर्वतारोहण की दक्षता* पर्वतारोहण केवल शारीरिक क्षमता का प्रदर्शन नहीं, बल्कि मानसिक दृढ़ता, अनुशासन, तकनीकी दक्षता और

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विपरीत परिस्थितियों में निर्णय लेने की क्षमता का भी कठिन परीक्षण है। इस चुनौती को समझते हुए सार्थक ने अपने हुनर को व्यवस्थित प्रशिक्षण के जरिए निखारा। उन्होंने नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (निम), उत्तरकाशी से बेसिक माउंटेनियरिंग कोर्स, सर्च एंड रेस्क्यू कोर्स तथा एमओआई कोर्स किया। इसके अतिरिक्त मनाली स्थित अभिमास (ABHIMAS) से एडवांस माउंटेनियरिंग कोर्स भी पूरा किया। प्रशिक्षण और निरंतर अभ्यास के जरिए उन्होंने पर्वतारोहण की तकनीकी बारीकियों को सीखा और कई चुनौतीपूर्ण चोटियों पर सफल आरोहण कर अपने अनुभव को विस्तार दिया। *श्रीकंठ चोटी : जहां हर कदम पर होती है हौसले की परीक्षा* समुद्र तल से 6,137 मीटर की ऊंचाई पर स्थित श्रीकंठ चोटी को तकनीकी दृष्टि से बेहद चुनौतीपूर्ण माना जाता है। यहां तक पहुंचने का रास्ता केवल ऊंचाई की चुनौती नहीं, बल्कि पर्वतारोहियों के धैर्य, कौशल और शारीरिक क्षमता की भी परीक्षा लेता है। कम ऑक्सीजन, खड़ी ढलानें और प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियां इस अभियान को और कठिन बना देती हैं। बताया जाता है कि अब तक इस चोटी पर केवल चार पर्वतारोहण दल ही सफलतापूर्वक आरोहण कर पाए हैं। ऐसे में सार्थक की सफलता पर्वतारोहण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उत्तराखंड सरकार की ओर से वर्ष 2022-23 में प्रायोजित श्रीकंठ चोटी पर्वतारोहण अभियान के लिए भी सार्थक का चयन हुआ था। अभियान में सफलता के बाद उन्हें माननीय मुख्यमंत्री द्वारा सम्मानित किया गया था। *पर्वत उनके लिए मंजिल नहीं, जीवन का हिस्सा हैं* सार्थक के लिए पर्वतारोहण महज किसी ऊंची चोटी को फतह करने का रोमांच नहीं है। यह पहाड़ों को करीब से जानने, प्रकृति के विस्तार को महसूस करने और मानव जीवन तथा प्रकृति के बीच गहरे संबंध को समझने का माध्यम है। पर्वतारोहण के साथ-साथ उन्होंने जल क्रीड़ा के क्षेत्र में भी प्रशिक्षण

प्राप्त किया है। प्रकृति के प्रति उनका लगाव और पहाड़ों के प्रति समर्पण उनके व्यक्तित्व की विशिष्ट पहचान है। सार्थक कहते हैं, "पहाड़ मेरे लिए केवल पहाड़ नहीं हैं, बल्कि मेरा जीवन हैं। मैं हर ऊंचे से ऊंचे पहाड़ की चोटी पर पहुंचकर एक और पहाड़ देखना चाहता हूं। मेरे लिए पर्वतारोहण किसी चोटी को फतह करने तक सीमित नहीं है, बल्कि पहाड़ों के विस्तार, प्रकृति में उनके महत्व और मानव जीवन के साथ उनके अंतरसंबंध को समझने का एक माध्यम है। किसी ऊंची चोटी पर पहुंचकर दुनिया को देखने का नजरिया ही बदल जाता है।" उनके इस विचार में पर्वतारोहण के प्रति उनका जुनून ही नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति उनकी संवेदनशीलता भी झलकती है। *युवाओं के लिए प्रेरणा, टिहरी के लिए गौरव* सार्थक की यह उपलब्धि बताती है कि पहाड़ों की कठिन परिस्थितियों में पले-बढ़े युवाओं के सपने भी हिमालय की चोटियों की तरह ऊंचे हो सकते हैं। जरूरत है तो केवल अपने लक्ष्य के प्रति समर्पण, निरंतर अभ्यास और चुनौतियों से जूझने के साहस की। सार्थक के लिए श्रीकंठ चोटी का आरोहण कोई अंतिम पड़ाव नहीं, बल्कि हिमालय की अनगिनत ऊंचाइयों की ओर बढ़ते सफर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। पहाड़ों को अपना पहला प्रेम और जीवन का अभिन्न हिस्सा मानने वाले सार्थक की यह सफलता नई पीढ़ी के युवाओं को अपने सपनों को पहचानने, उन्हें लक्ष्य में बदलने और पूरे समर्पण के साथ उन्हें हासिल करने की प्रेरणा देती है। कहते हैं कि शिखर पर पहुंचने वाले कदमों के पीछे वर्षों का अभ्यास और अनगिनत संघर्ष छिपे होते हैं। सार्थक कुड़ियाल की कहानी भी इसी जुनून, समर्पण और हौसले की कहानी है, जिसने टिहरी की धरती से निकलकर हिमालय की ऊंचाइयों पर अपनी पहचान बनाई है।

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    पहाड़ों से इश्क, शिखर तक पहुंचने का जुनून... सार्थक ने बढ़ा रहे टिहरी का मान

सफलता की कहानी।टिहरी कुछ लोग पहाड़ों को दूर से निहारते हैं, कुछ उनकी खूबसूरती में खो जाते हैं और कुछ ऐसे भी होते हैं, जो उन्हीं पहाड़ों की दुर्गम चोटियों को अपना लक्ष्य बना लेते हैं। टिहरी के सार्थक कुड़ियाल इन्हीं जुनूनी लोगों में से एक हैं। जिन पहाड़ों को देखकर लोग उनकी विशालता और कठिनाइयों का अंदाजा लगाते हैं, सार्थक ने उन्हीं पहाड़ों को अपने सपनों की मंजिल बनाया। संकल्प, साहस और अदम्य इच्छाशक्ति के दम पर उन्होंने 6,137 मीटर ऊंची हिमालय की बेहद चुनौतीपूर्ण श्रीकंठ चोटी का सफल आरोहण कर एक नया कीर्तिमान भी स्थापित किया है। इस उपलब्धि के साथ वे दुनिया के सबसे युवा श्रीकंठ पर्वतारोही बने हैं। उनकी इस सफलता ने न केवल टिहरी गढ़वाल, बल्कि पूरे उत्तराखंड को गौरवान्वित किया है।
*पहाड़ों की गोद में पला सपना, बना जीवन का लक्ष्य*
जनपद टिहरी गढ़वाल के विकासखंड प्रतापनगर के ग्राम शुक्री निवासी सार्थक कुड़ियाल का जन्म अगस्त 2001 में नई टिहरी में हुआ। उनके पिता श्री रमेश कुड़ियाल पेशे से पत्रकार हैं, जबकि माता श्रीमती सरिता कुड़ियाल समाजसेविका हैं। वे पूर्व में भारत सरकार की महत्वपूर्ण परियोजना महिला समाख्या में जिला समन्वयक के पद पर भी कार्य कर चुकी हैं।
सार्थक की प्रारंभिक शिक्षा ऑल सेंट्स कॉन्वेंट स्कूल एवं केंद्रीय विद्यालय, नई टिहरी में हुई। इसके बाद उन्होंने देहरादून से आगे की पढ़ाई पूरी की। शिक्षा के साथ-साथ प्रकृति और पहाड़ों के प्रति उनका आकर्षण गहराता गया। धीरे-धीरे यही आकर्षण उनके जीवन का उद्देश्य और पर्वतारोहण उनका करियर बन गया।
*कठिन प्रशिक्षण से निखरी पर्वतारोहण की दक्षता*
पर्वतारोहण केवल शारीरिक क्षमता का प्रदर्शन नहीं, बल्कि मानसिक दृढ़ता, अनुशासन, तकनीकी दक्षता और विपरीत परिस्थितियों में निर्णय लेने की क्षमता का भी कठिन परीक्षण है। इस चुनौती को समझते हुए सार्थक ने अपने हुनर को व्यवस्थित प्रशिक्षण के जरिए निखारा।
उन्होंने नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (निम), उत्तरकाशी से बेसिक माउंटेनियरिंग कोर्स, सर्च एंड रेस्क्यू कोर्स तथा एमओआई कोर्स किया। इसके अतिरिक्त मनाली स्थित अभिमास (ABHIMAS) से एडवांस माउंटेनियरिंग कोर्स भी पूरा किया। प्रशिक्षण और निरंतर अभ्यास के जरिए उन्होंने पर्वतारोहण की तकनीकी बारीकियों को सीखा और कई चुनौतीपूर्ण चोटियों पर सफल आरोहण कर अपने अनुभव को विस्तार दिया।
*श्रीकंठ चोटी : जहां हर कदम पर होती है हौसले की परीक्षा*
समुद्र तल से 6,137 मीटर की ऊंचाई पर स्थित श्रीकंठ चोटी को तकनीकी दृष्टि से बेहद चुनौतीपूर्ण माना जाता है। यहां तक पहुंचने का रास्ता केवल ऊंचाई की चुनौती नहीं, बल्कि पर्वतारोहियों के धैर्य, कौशल और शारीरिक क्षमता की भी परीक्षा लेता है। कम ऑक्सीजन, खड़ी ढलानें और प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियां इस अभियान को और कठिन बना देती हैं।
बताया जाता है कि अब तक इस चोटी पर केवल चार पर्वतारोहण दल ही सफलतापूर्वक आरोहण कर पाए हैं। ऐसे में सार्थक की सफलता पर्वतारोहण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
उत्तराखंड सरकार की ओर से वर्ष 2022-23 में प्रायोजित श्रीकंठ चोटी पर्वतारोहण अभियान के लिए भी सार्थक का चयन हुआ था। अभियान में सफलता के बाद उन्हें माननीय मुख्यमंत्री द्वारा सम्मानित किया गया था।
*पर्वत उनके लिए मंजिल नहीं, जीवन का हिस्सा हैं*
सार्थक के लिए पर्वतारोहण महज किसी ऊंची चोटी को फतह करने का रोमांच नहीं है। यह पहाड़ों को करीब से जानने, प्रकृति के विस्तार को महसूस करने और मानव जीवन तथा प्रकृति के बीच गहरे संबंध को समझने का माध्यम है। पर्वतारोहण के साथ-साथ उन्होंने जल क्रीड़ा के क्षेत्र में भी प्रशिक्षण प्राप्त किया है। प्रकृति के प्रति उनका लगाव और पहाड़ों के प्रति समर्पण उनके व्यक्तित्व की विशिष्ट पहचान है।
सार्थक कहते हैं, "पहाड़ मेरे लिए केवल पहाड़ नहीं हैं, बल्कि मेरा जीवन हैं। मैं हर ऊंचे से ऊंचे पहाड़ की चोटी पर पहुंचकर एक और पहाड़ देखना चाहता हूं। मेरे लिए पर्वतारोहण किसी चोटी को फतह करने तक सीमित नहीं है, बल्कि पहाड़ों के विस्तार, प्रकृति में उनके महत्व और मानव जीवन के साथ उनके अंतरसंबंध को समझने का एक माध्यम है। किसी ऊंची चोटी पर पहुंचकर दुनिया को देखने का नजरिया ही बदल जाता है।"
उनके इस विचार में पर्वतारोहण के प्रति उनका जुनून ही नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति उनकी संवेदनशीलता भी झलकती है।
*युवाओं के लिए प्रेरणा, टिहरी के लिए गौरव*
सार्थक की यह उपलब्धि बताती है कि पहाड़ों की कठिन परिस्थितियों में पले-बढ़े युवाओं के सपने भी हिमालय की चोटियों की तरह ऊंचे हो सकते हैं। जरूरत है तो केवल अपने लक्ष्य के प्रति समर्पण, निरंतर अभ्यास और चुनौतियों से जूझने के साहस की।
सार्थक के लिए श्रीकंठ चोटी का आरोहण कोई अंतिम पड़ाव नहीं, बल्कि हिमालय की अनगिनत ऊंचाइयों की ओर बढ़ते सफर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। पहाड़ों को अपना पहला प्रेम और जीवन का अभिन्न हिस्सा मानने वाले सार्थक की यह सफलता नई पीढ़ी के युवाओं को अपने सपनों को पहचानने, उन्हें लक्ष्य में बदलने और पूरे समर्पण के साथ उन्हें हासिल करने की प्रेरणा देती है।
कहते हैं कि शिखर पर पहुंचने वाले कदमों के पीछे वर्षों का अभ्यास और अनगिनत संघर्ष छिपे होते हैं। सार्थक कुड़ियाल की कहानी भी इसी जुनून, समर्पण और हौसले की कहानी है, जिसने टिहरी की धरती से निकलकर हिमालय की ऊंचाइयों पर अपनी पहचान बनाई है।
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    Arunabh Raturi
    Local News Reporter ऋषिकेश, देहरादून, उत्तराखंड•
    1 hr ago
  • *विशेष दिव्यांग शिविरों में 150 दिव्यांगजनों को जारी किए गए दिव्यांगता प्रमाण पत्र* *दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण उपलब्ध कराने के लिए भी किया गया चिह्नीकरण, यूडीआईडी कार्ड हेतु पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी* *देहरादून, 30 अक्टूबर 2026 (सू.वि.)* जिलाधिकारी डॉ आशीष चौहान की पहल पर दिव्यांगजनों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने तथा उन्हें आवश्यक सुविधाओं से जोड़ने के उद्देश्य से जनपद में आयोजित विशेष दिव्यांग शिविरों में 150 दिव्यांगजनों को दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं। साथ ही, पात्र दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण उपलब्ध कराने के लिए उनका चिह्नीकरण तथा यूडीआईडी कार्ड बनवाने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण भी किया गया। जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपांकर घिडियाल ने बताया कि अक्टूबर में देहरादून के विकासखंडों एवं क्षेत्रों में चार विशेष दिव्यांग शिविर आयोजित किए गए। इनमें 21 अक्टूबर को विकासखंड रायपुर के अंतर्गत गांधी शताब्दी अस्पताल में आयोजित शिविर में 31 व 22 अक्टूबर को विकासखंड डोईवाला परिसर में 39 तथा 23 अक्टूबर को राजकीय इंटर कॉलेज मेहूंवाला परिसर (शिमला बाईपास) में 26 और 26 अक्टूबर को रियांश रिजॉर्ट, शिमला बाईपास रोड, समीप सींगनिवाला, शेरपुर में आयोजित शिविर में 54 दिव्यांगजनों को दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी किए गए। जिला समाज कल्याण अधिकारी ने बताया कि शिविरों का आयोजन स्वास्थ्य विभाग एवं जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र के सहयोग से किया गया। शिविरों में दिव्यांगजनों का स्वास्थ्य परीक्षण कर दिव्यांगता की जांच की गई तथा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार प्रमाण पत्र जारी किए गए। इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री दिव्यांग सहायता केंद्र के माध्यम से स्वास्थ्य परीक्षण के उपरांत पात्र दिव्यांगजनों को आवश्यक सहायक उपकरण उपलब्ध कराने के लिए चिह्नित किया गया। दिव्यांगता प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए आवेदकों द्वारा यूडीआईडी पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण किया जाता है। इसके आधार पर संबंधित चिकित्सकों द्वारा दिव्यांगता की जांच की जाती है तथा चिकित्सकीय परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर मुख्य चिकित्साधिकारी द्वारा दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी किए जाते हैं। जिलाधिकारी के दिशा निर्देशन में विशेष शिविरों के माध्यम से दिव्यांगजनों को एक ही स्थान पर स्वास्थ्य परीक्षण, प्रमाण पत्र एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है।
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    *विशेष दिव्यांग शिविरों में 150 दिव्यांगजनों को जारी किए गए दिव्यांगता प्रमाण पत्र*
*दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण उपलब्ध कराने के लिए भी किया गया चिह्नीकरण, यूडीआईडी कार्ड हेतु पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी*
*देहरादून, 30 अक्टूबर 2026 (सू.वि.)*
जिलाधिकारी डॉ आशीष चौहान की पहल पर दिव्यांगजनों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने तथा उन्हें आवश्यक सुविधाओं से जोड़ने के उद्देश्य से जनपद में आयोजित विशेष दिव्यांग शिविरों में 150 दिव्यांगजनों को दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं। साथ ही, पात्र दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण उपलब्ध कराने के लिए उनका चिह्नीकरण तथा यूडीआईडी कार्ड बनवाने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण भी किया गया।
जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपांकर घिडियाल ने बताया कि अक्टूबर में देहरादून के विकासखंडों एवं क्षेत्रों में चार विशेष दिव्यांग शिविर आयोजित किए गए। इनमें 21 अक्टूबर को विकासखंड रायपुर के अंतर्गत गांधी शताब्दी अस्पताल में आयोजित शिविर में 31 व 22 अक्टूबर को विकासखंड डोईवाला परिसर में 39 तथा 23 अक्टूबर को राजकीय इंटर कॉलेज मेहूंवाला परिसर (शिमला बाईपास) में 26 और 26 अक्टूबर को रियांश रिजॉर्ट, शिमला बाईपास रोड, समीप सींगनिवाला, शेरपुर में आयोजित शिविर में 54 दिव्यांगजनों को दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी किए गए।
जिला समाज कल्याण अधिकारी ने बताया कि शिविरों का आयोजन स्वास्थ्य विभाग एवं जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र के सहयोग से किया गया। शिविरों में दिव्यांगजनों का स्वास्थ्य परीक्षण कर दिव्यांगता की जांच की गई तथा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार प्रमाण पत्र जारी किए गए। इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री दिव्यांग सहायता केंद्र के माध्यम से स्वास्थ्य परीक्षण के उपरांत पात्र दिव्यांगजनों को आवश्यक सहायक उपकरण उपलब्ध कराने के लिए चिह्नित किया गया।
दिव्यांगता प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए आवेदकों द्वारा यूडीआईडी पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण किया जाता है। इसके आधार पर संबंधित चिकित्सकों द्वारा दिव्यांगता की जांच की जाती है तथा चिकित्सकीय परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर मुख्य चिकित्साधिकारी द्वारा दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी किए जाते हैं।
जिलाधिकारी के दिशा निर्देशन में विशेष शिविरों के माध्यम से दिव्यांगजनों को एक ही स्थान पर स्वास्थ्य परीक्षण, प्रमाण पत्र एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है।
    user_Uma shankar Kukreti
    Uma shankar Kukreti
    Newspaper publisher ऋषिकेश, देहरादून, उत्तराखंड•
    3 hrs ago
  • **सर्प मित्र भारत भूषण पेले के इशारों पर चलता दिखा खतरनाक नाग!** 🐍 **The Aman Times | डोईवाला** **सर्प मित्र भारत भूषण पेले के इशारों पर चलता दिखा खतरनाक नाग!** डोईवाला के राजीव नगर निवासी सर्प मित्र भारत भूषण पेले अपनी जान जोखिम में डालकर लगातार खतरनाक सांपों का रेस्क्यू कर लोगों को भय से निजात दिला रहे हैं। पेले के रेस्क्यू करने के अनोखे अंदाज को देखकर ऐसा लगता है मानो सांप भी उनके इशारों को समझने लगे हैं। ताजा वीडियो में एक नाग उनके इशारों को समझकर धीरे-धीरे जंगल की ओर जाता दिखाई दे रहा है। **देखिए रोमांचक वीडियो, कैसे पेले के इशारे पर जंगल की ओर चला गया नाग!** सर्प मित्र की अपील है कि सांप दिखाई देने पर खुद जोखिम न उठाएं, बल्कि विशेषज्ञ की मदद लें।
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    **सर्प मित्र भारत भूषण पेले के इशारों पर चलता दिखा खतरनाक नाग!**

🐍 **The Aman Times | डोईवाला**
**सर्प मित्र भारत भूषण पेले के इशारों पर चलता दिखा खतरनाक नाग!**
डोईवाला के राजीव नगर निवासी सर्प मित्र भारत भूषण पेले अपनी जान जोखिम में डालकर लगातार खतरनाक सांपों का रेस्क्यू कर लोगों को भय से निजात दिला रहे हैं।
पेले के रेस्क्यू करने के अनोखे अंदाज को देखकर ऐसा लगता है मानो सांप भी उनके इशारों को समझने लगे हैं। ताजा वीडियो में एक नाग उनके इशारों को समझकर धीरे-धीरे जंगल की ओर जाता दिखाई दे रहा है।
**देखिए रोमांचक वीडियो, कैसे पेले के इशारे पर जंगल की ओर चला गया नाग!**
सर्प मित्र की अपील है कि सांप दिखाई देने पर खुद जोखिम न उठाएं, बल्कि विशेषज्ञ की मदद लें।
    user_राजकुमार अग्रवाल डोईवाला/देहरा
    राजकुमार अग्रवाल डोईवाला/देहरा
    Lawyer डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड•
    6 hrs ago
  • कनखल पुलिस कर रही पिल्ला गैंग पर प्रहार, फायरिंग कर हत्या की कोशिश करने वाले के 03 आरोपी गिरफ्तार सोशल मीडिया पर कमेंटबाजी को लेकर सतीघाट कनखल पर युवक पर झोका था फायर मुख्य आरोपी की तलाश जारी। पुलिस मुख्यालय द्वारा संचालित ऑपरेशन प्रहार के तहत वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हरिद्वार के निर्देश पर जनपद पुलिस द्वारा अपराधियों एवं असामाजिक तत्वों के विरुद्ध लगातार प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में कोतवाली कनखल पुलिस ने सतीघाट पर हुए विवाद के दौरान युवक पर तमंचे से फायरिंग कर हत्या का प्रयास करने के मामले में तीन आरोपियों को हिरासत में लिया। दिनांक 27 अक्टूबर 2026 की रात्रि को कोतवाली कनखल क्षेत्रांतर्गत सतीघाट पर कुछ युवकों के बीच सोशल मीडिया पर कमेंटबाजी को लेकर विवाद हो गया। देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और आरोपियों ने वादी के पुत्र के साथ मारपीट करते हुए उसे जान से मारने की नीयत से तमंचे से फायर कर दिया। गनीमत रही कि युवक इस हमले में बाल-बाल बच गया। वादी की तहरीर के आधार पर कोतवाली कनखल में मु0अ0सं0 414/2026 मुकदमा दर्ज किया गया। घटना की गंभीरता को देखते हुए प्रभारी निरीक्षक कोतवाली कनखल द्वारा आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम गठित की गई। पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दिनांक 28.10.2026 को तीन आरोपियों को दबोच लिया। हिरासत में लिये गये आरोपियों के विरुध्द आवश्यक वैधानिक की जा रही है। प्रकरण अन्य शेष आरोपियों की भूमिका की जांच की जा रही है। फरार आरोपी की तलाश में पुलिस टीम लगातार प्रयास कर रही है। *नाम पता आरोपित* 1. आर्यन राजपूत पुत्र रूपचन्द्र, निवासी लोधामंडी, राजघाट, कोतवाली कनखल, हरिद्वार 2. गौतम सिंह पुत्र महेन्द्र सिंह, निवासी बैरागी कैंप, कोतवाली कनखल, हरिद्वार 3. मनीष कुमार पुत्र महेन्द्र सिंह, निवासी कमल बस्ती, बैरागी कैंप, कोतवाली कनखल, हरिद्वार *पुलिस टीम* 1. प्रभारी निरीक्षक देवेन्द्र सिंह रावत 2. वरिष्ठ उपनिरीक्षक अनुज सिंह 3. उपनिरीक्षक नवल किशोर गुप्ता 4. उपनिरीक्षक प्रकाश चन्द्र 5. कांस्टेबल प्रलव चौहान 6. कांस्टेबल सुनील कुमार
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    कनखल पुलिस कर रही पिल्ला गैंग पर प्रहार, फायरिंग कर हत्या की कोशिश करने वाले के 03 आरोपी गिरफ्तार सोशल मीडिया पर कमेंटबाजी को लेकर सतीघाट कनखल पर युवक पर झोका था फायर मुख्य आरोपी की तलाश जारी। 
पुलिस मुख्यालय द्वारा संचालित ऑपरेशन प्रहार के तहत वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हरिद्वार के निर्देश पर जनपद पुलिस द्वारा अपराधियों एवं असामाजिक तत्वों के विरुद्ध लगातार प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में कोतवाली कनखल पुलिस ने सतीघाट पर हुए विवाद के दौरान युवक पर तमंचे से फायरिंग कर हत्या का प्रयास करने के मामले में तीन आरोपियों को हिरासत में लिया।
दिनांक 27 अक्टूबर 2026 की रात्रि को कोतवाली कनखल क्षेत्रांतर्गत सतीघाट पर कुछ युवकों के बीच सोशल मीडिया पर कमेंटबाजी को लेकर विवाद हो गया। देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और आरोपियों ने वादी के पुत्र के साथ मारपीट करते हुए उसे जान से मारने की नीयत से तमंचे से फायर कर दिया। गनीमत रही कि युवक इस हमले में बाल-बाल बच गया।
वादी की तहरीर के आधार पर कोतवाली कनखल में मु0अ0सं0 414/2026 मुकदमा दर्ज किया गया।
घटना की गंभीरता को देखते हुए प्रभारी निरीक्षक कोतवाली कनखल द्वारा आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम गठित की गई। पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दिनांक 28.10.2026 को तीन आरोपियों को दबोच लिया। हिरासत में लिये गये आरोपियों के विरुध्द आवश्यक वैधानिक की जा रही है।
प्रकरण अन्य शेष आरोपियों की भूमिका की जांच की जा रही है। फरार आरोपी की तलाश में पुलिस टीम लगातार प्रयास कर रही है। 
*नाम पता आरोपित*
1. आर्यन राजपूत पुत्र रूपचन्द्र, निवासी लोधामंडी, राजघाट, कोतवाली कनखल, हरिद्वार
2. गौतम सिंह पुत्र महेन्द्र सिंह, निवासी बैरागी कैंप, कोतवाली कनखल, हरिद्वार
3. मनीष कुमार पुत्र महेन्द्र सिंह, निवासी कमल बस्ती, बैरागी कैंप, कोतवाली कनखल, हरिद्वार
*पुलिस टीम*
1. प्रभारी निरीक्षक देवेन्द्र सिंह रावत
2. वरिष्ठ उपनिरीक्षक अनुज सिंह
3. उपनिरीक्षक नवल किशोर गुप्ता
4. उपनिरीक्षक प्रकाश चन्द्र
5. कांस्टेबल प्रलव चौहान
6. कांस्टेबल सुनील कुमार
    user_Dpk Chauhan
    Dpk Chauhan
    Farmer हरिद्वार, हरिद्वार, उत्तराखंड•
    20 hrs ago
  • हरिद्वार पुलिस की नशा तस्करो पर कार्यवाई, 600 अवैध नशीले कैप्सूल बरामद हरिद्वार पुलिस की नशा तस्करों पर कार्रवाई, 600 अवैध नशीले कैप्सूल बरामद, एक गिरफ्तार हरिद्वार। नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत हरिद्वार पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 600 अवैध नशीले कैप्सूल बरामद किए हैं। मामले में पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। एसएसपी हरिद्वार के आदेशानुसार जनपद में नशा तस्करों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जा रही है। पुलिस द्वारा नशे के अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने और युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। हरिद्वार पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि यदि किसी व्यक्ति को नशीले पदार्थों की अवैध खरीद-फरोख्त या नशा तस्करी से संबंधित कोई जानकारी मिलती है, तो इसकी सूचना तुरंत पुलिस को दें। सूचना देने वालों की जानकारी गोपनीय रखने के लिए पुलिस से संपर्क किया जा सकता है। नशे के खिलाफ जंग में हरिद्वार पुलिस प्रतिबद्ध है। #HaridwarPolice #नशेपरप्रहार #हरिद्वारपुलिस #नशामुक्तभारत #नशातस्करी #UttarakhandPolice
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    हरिद्वार पुलिस की नशा तस्करो पर कार्यवाई, 600 अवैध नशीले कैप्सूल बरामद 
हरिद्वार पुलिस की नशा तस्करों पर कार्रवाई, 600 अवैध नशीले कैप्सूल बरामद, एक गिरफ्तार
हरिद्वार। नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत हरिद्वार पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 600 अवैध नशीले कैप्सूल बरामद किए हैं। मामले में पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है।
एसएसपी हरिद्वार के आदेशानुसार जनपद में नशा तस्करों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जा रही है। पुलिस द्वारा नशे के अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने और युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए अभियान चलाया जा रहा है।
हरिद्वार पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि यदि किसी व्यक्ति को नशीले पदार्थों की अवैध खरीद-फरोख्त या नशा तस्करी से संबंधित कोई जानकारी मिलती है, तो इसकी सूचना तुरंत पुलिस को दें। सूचना देने वालों की जानकारी गोपनीय रखने के लिए पुलिस से संपर्क किया जा सकता है।
नशे के खिलाफ जंग में हरिद्वार पुलिस प्रतिबद्ध है।
#HaridwarPolice #नशेपरप्रहार #हरिद्वारपुलिस #नशामुक्तभारत #नशातस्करी #UttarakhandPolice
    user_A Bharat News 10
    A Bharat News 10
    Local News Reporter हरिद्वार, हरिद्वार, उत्तराखंड•
    22 hrs ago
  • दिनेश कश्यप नाथ जी बृजमोहन गुप्ता जिला महासचिव बजरंग सेना आज दिन शुक्रवार 30 अक्टूबर 2026 एक ताजा खबर और न्यूज़ आपको देनी है थेरेपी सेंटर सहसपुर विधानसभा एसबीआई के सामने एक्सचेंज गली के पास ही ब्रिज मोहन गुप्ता जी जोकि थेरेपी सेंटर निशुल्क चला रहे हैं इसमें हमारे बजरंग सेना के पति अधिकारी चौकी समाज सेना गांव के लिए करते रहते हैं आप सभी वहां जाकर संपर्क कर सकते हैं सहसपुर विधानसभा के प्रभारी अनुज बंसल जी भी शामिल है यह समाचार आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण है यह जानकारी आपको देनी है थेरेपी के लिए आपके नजदीक की सहसपुर विधानसभा एक्सचेंज वाली गली में थेरेपी सेंटर खुल चुका है जय श्री राम जी आज की ताजा खबर दिनेश कश्यप नाथ जी की तरफ से बजरंग सेना राष्ट्रीय मंत्री धर्म रक्षा दल प्रकोष्ठ आप सभी के लिए थेरेपी सेंटर निशुल्क है ज्यादा से चादर पहुंच कर सेवा का लाभ ले आप सभी का धन्यवाद
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    दिनेश कश्यप नाथ जी 
बृजमोहन गुप्ता 
जिला महासचिव 
बजरंग सेना 
आज दिन शुक्रवार 30 अक्टूबर 2026 
एक ताजा खबर और न्यूज़ आपको देनी है थेरेपी सेंटर सहसपुर विधानसभा एसबीआई के सामने एक्सचेंज गली के पास ही ब्रिज मोहन गुप्ता जी जोकि थेरेपी सेंटर निशुल्क चला रहे हैं इसमें हमारे बजरंग सेना के पति अधिकारी चौकी समाज सेना गांव के लिए करते रहते हैं आप सभी वहां जाकर संपर्क कर सकते हैं सहसपुर विधानसभा के प्रभारी अनुज बंसल जी भी शामिल है यह समाचार आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण है यह जानकारी आपको देनी है थेरेपी के लिए आपके नजदीक की सहसपुर विधानसभा एक्सचेंज वाली गली में थेरेपी सेंटर खुल चुका है जय श्री राम जी आज की ताजा खबर दिनेश कश्यप नाथ जी की तरफ से बजरंग सेना राष्ट्रीय मंत्री धर्म रक्षा दल प्रकोष्ठ 
आप सभी के लिए थेरेपी सेंटर निशुल्क है ज्यादा से चादर पहुंच कर सेवा का लाभ ले आप सभी का धन्यवाद
    user_दिनेश कश्यप नाथ जी
    दिनेश कश्यप नाथ जी
    विकास नगर, देहरादून, उत्तराखंड•
    1 hr ago
  • उत्तराखंड बेरोज़गार संघ के बैनरतले प्रदेश भर के युवा परेड ग्राउंड में पहुंचने शुरू हो गए हैं। उत्तराखंड बेरोज़गार संघ के बैनरतले प्रदेश भर के युवा परेड ग्राउंड में पहुंचने शुरू हो गए हैं।
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    उत्तराखंड बेरोज़गार संघ के बैनरतले प्रदेश भर के युवा परेड ग्राउंड में पहुंचने शुरू हो गए हैं। 
उत्तराखंड बेरोज़गार संघ के बैनरतले प्रदेश भर के युवा परेड ग्राउंड में पहुंचने शुरू हो गए हैं।
    user_Journalist Amit nautiyal
    Journalist Amit nautiyal
    Media house Tehri Garhwal, Uttarakhand•
    3 hrs ago
  • बर्फबारी के बीच भी बाबा केदारनाथ के दर्शन को उमड़ रहे श्रद्धालु बर्फबारी के बीच भी बाबा केदारनाथ के दर्शन को उमड़ रहे श्रद्धालु
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    बर्फबारी के बीच भी बाबा केदारनाथ के दर्शन को उमड़ रहे श्रद्धालु
बर्फबारी के बीच भी बाबा केदारनाथ के दर्शन को उमड़ रहे श्रद्धालु
    user_Arunabh Raturi
    Arunabh Raturi
    Local News Reporter ऋषिकेश, देहरादून, उत्तराखंड•
    2 hrs ago
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