लम्भुआ में 6 साल बाद भी अधूरा अग्निशमन केंद्र, निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवाल लम्भुआ, सुलतानपुर। जनपद सुलतानपुर की 190 लम्भुआ विधानसभा क्षेत्र में प्रस्तावित अग्निशमन केंद्र का निर्माण कार्य पिछले छह वर्षों से अधूरा पड़ा है। वर्ष 2020 में बड़े स्तर पर शिलान्यास के साथ शुरू हुआ यह महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट अब तक पूरा नहीं हो सका है, जिससे क्षेत्रीय लोगों में नाराजगी और चिंता बढ़ती जा रही है। बताया जाता है कि 29 जनवरी 2020 को लम्भुआ में अग्निशमन केंद्र के निर्माण के लिए विधिवत भूमि पूजन और शिलान्यास कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस दौरान सांसद संजय मेनका गांधी, उस समय के विधायक देवमणि द्विवेदी, मुख्य सामान अधिकारी राजेश वर्मा, पुलिस अधीक्षक शिवहरि मीना, तथा तत्कालीन जिलाधिकारी इंदुमती समेत कई अधिकारियों की मौजूदगी में शिलापट्ट लगाकर निर्माण कार्य की शुरुआत की गई थी। शिलान्यास के समय उम्मीद जताई गई थी कि जल्द ही लम्भुआ क्षेत्र को अपना अग्निशमन केंद्र मिल जाएगा, जिससे आगजनी की घटनाओं में तुरंत राहत और बचाव कार्य संभव हो सकेगा। लेकिन करीब छह वर्ष बीत जाने के बाद भी यह निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया है, जिससे परियोजना की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। जानकारी के अनुसार शुरुआत में जिस कार्यदायी संस्था को निर्माण की जिम्मेदारी दी गई थी, उसके खिलाफ कार्य में शिथिलता और शिकायतों के चलते उसे ब्लैकलिस्ट कर दिया गया था। इसके बाद कुछ समय बाद दूसरी फर्म को निर्माण कार्य की जिम्मेदारी सौंपी गई। हालांकि स्थानीय लोगों का आरोप है कि वर्तमान में भी निर्माण कार्य में मानक के अनुरूप सामग्री का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। लोगों का कहना है कि भवन निर्माण में कच्ची गिट्टी और भस्सी (गिट्टी का चूरा) जैसी सामग्री का प्रयोग किया जा रहा है, जिससे भवन की मजबूती पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि यदि निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की स्वतंत्र लैब से जांच नहीं कराई गई तो भविष्य में यह भवन किसी भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकता है। विशेषज्ञों का भी मानना है कि कमजोर निर्माण सामग्री का इस्तेमाल होने से भूकंप जैसी आपदा की स्थिति में भवन को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है, जिससे बड़ी अनहोनी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। उधर, लम्भुआ क्षेत्र में अभी तक स्थायी अग्निशमन केंद्र न होने के कारण आगजनी की घटनाओं के समय दमकल वाहनों को अन्य स्थानों से बुलाना पड़ता है, जिससे राहत कार्य में देरी हो जाती है। ऐसे में यदि क्षेत्र में कोई बड़ी घटना हो जाए तो भारी नुकसान होने की आशंका बनी रहती है। स्थानीय जिम्मेदार नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच कराई जाए और जल्द से जल्द अग्निशमन केंद्र का निर्माण पूरा कराया जाए, ताकि क्षेत्र की जनता को आवश्यक सुरक्षा सुविधा मिल सके। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस परियोजना पर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह महत्वपूर्ण योजना भी अन्य अधूरी योजनाओं की तरह कागजों तक ही सीमित रह सकती है। इसलिए प्रशासन से अपील की जा रही है कि वैकल्पिक व्यवस्था करते हुए लम्भुआ विधानसभा क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाए।
लम्भुआ में 6 साल बाद भी अधूरा अग्निशमन केंद्र, निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवाल लम्भुआ, सुलतानपुर। जनपद सुलतानपुर की 190 लम्भुआ विधानसभा क्षेत्र में प्रस्तावित अग्निशमन केंद्र का निर्माण कार्य पिछले छह वर्षों से अधूरा पड़ा है। वर्ष 2020 में बड़े स्तर पर शिलान्यास के साथ शुरू हुआ यह महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट अब तक पूरा नहीं हो सका है, जिससे क्षेत्रीय लोगों में नाराजगी और चिंता बढ़ती जा रही है। बताया जाता है कि 29 जनवरी 2020 को लम्भुआ में अग्निशमन केंद्र के निर्माण के लिए विधिवत भूमि पूजन और शिलान्यास कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस दौरान सांसद संजय मेनका गांधी, उस समय के विधायक देवमणि द्विवेदी, मुख्य सामान अधिकारी राजेश वर्मा, पुलिस अधीक्षक शिवहरि मीना, तथा तत्कालीन जिलाधिकारी इंदुमती समेत कई अधिकारियों की मौजूदगी में शिलापट्ट लगाकर निर्माण कार्य की शुरुआत की गई थी। शिलान्यास के समय उम्मीद जताई गई थी कि जल्द ही लम्भुआ क्षेत्र को अपना अग्निशमन केंद्र मिल जाएगा, जिससे आगजनी की घटनाओं में तुरंत राहत और बचाव कार्य संभव हो सकेगा। लेकिन करीब छह वर्ष बीत जाने के बाद
भी यह निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया है, जिससे परियोजना की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। जानकारी के अनुसार शुरुआत में जिस कार्यदायी संस्था को निर्माण की जिम्मेदारी दी गई थी, उसके खिलाफ कार्य में शिथिलता और शिकायतों के चलते उसे ब्लैकलिस्ट कर दिया गया था। इसके बाद कुछ समय बाद दूसरी फर्म को निर्माण कार्य की जिम्मेदारी सौंपी गई। हालांकि स्थानीय लोगों का आरोप है कि वर्तमान में भी निर्माण कार्य में मानक के अनुरूप सामग्री का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। लोगों का कहना है कि भवन निर्माण में कच्ची गिट्टी और भस्सी (गिट्टी का चूरा) जैसी सामग्री का प्रयोग किया जा रहा है, जिससे भवन की मजबूती पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि यदि निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की स्वतंत्र लैब से जांच नहीं कराई गई तो भविष्य में यह भवन किसी भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकता है। विशेषज्ञों का भी मानना है कि कमजोर निर्माण सामग्री का इस्तेमाल होने से भूकंप जैसी आपदा की स्थिति में भवन को गंभीर नुकसान
पहुंच सकता है, जिससे बड़ी अनहोनी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। उधर, लम्भुआ क्षेत्र में अभी तक स्थायी अग्निशमन केंद्र न होने के कारण आगजनी की घटनाओं के समय दमकल वाहनों को अन्य स्थानों से बुलाना पड़ता है, जिससे राहत कार्य में देरी हो जाती है। ऐसे में यदि क्षेत्र में कोई बड़ी घटना हो जाए तो भारी नुकसान होने की आशंका बनी रहती है। स्थानीय जिम्मेदार नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच कराई जाए और जल्द से जल्द अग्निशमन केंद्र का निर्माण पूरा कराया जाए, ताकि क्षेत्र की जनता को आवश्यक सुरक्षा सुविधा मिल सके। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस परियोजना पर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह महत्वपूर्ण योजना भी अन्य अधूरी योजनाओं की तरह कागजों तक ही सीमित रह सकती है। इसलिए प्रशासन से अपील की जा रही है कि वैकल्पिक व्यवस्था करते हुए लम्भुआ विधानसभा क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाए।
- लम्भुआ, सुलतानपुर। जनपद सुलतानपुर की 190 लम्भुआ विधानसभा क्षेत्र में प्रस्तावित अग्निशमन केंद्र का निर्माण कार्य पिछले छह वर्षों से अधूरा पड़ा है। वर्ष 2020 में बड़े स्तर पर शिलान्यास के साथ शुरू हुआ यह महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट अब तक पूरा नहीं हो सका है, जिससे क्षेत्रीय लोगों में नाराजगी और चिंता बढ़ती जा रही है। बताया जाता है कि 29 जनवरी 2020 को लम्भुआ में अग्निशमन केंद्र के निर्माण के लिए विधिवत भूमि पूजन और शिलान्यास कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस दौरान सांसद संजय मेनका गांधी, उस समय के विधायक देवमणि द्विवेदी, मुख्य सामान अधिकारी राजेश वर्मा, पुलिस अधीक्षक शिवहरि मीना, तथा तत्कालीन जिलाधिकारी इंदुमती समेत कई अधिकारियों की मौजूदगी में शिलापट्ट लगाकर निर्माण कार्य की शुरुआत की गई थी। शिलान्यास के समय उम्मीद जताई गई थी कि जल्द ही लम्भुआ क्षेत्र को अपना अग्निशमन केंद्र मिल जाएगा, जिससे आगजनी की घटनाओं में तुरंत राहत और बचाव कार्य संभव हो सकेगा। लेकिन करीब छह वर्ष बीत जाने के बाद भी यह निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया है, जिससे परियोजना की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। जानकारी के अनुसार शुरुआत में जिस कार्यदायी संस्था को निर्माण की जिम्मेदारी दी गई थी, उसके खिलाफ कार्य में शिथिलता और शिकायतों के चलते उसे ब्लैकलिस्ट कर दिया गया था। इसके बाद कुछ समय बाद दूसरी फर्म को निर्माण कार्य की जिम्मेदारी सौंपी गई। हालांकि स्थानीय लोगों का आरोप है कि वर्तमान में भी निर्माण कार्य में मानक के अनुरूप सामग्री का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। लोगों का कहना है कि भवन निर्माण में कच्ची गिट्टी और भस्सी (गिट्टी का चूरा) जैसी सामग्री का प्रयोग किया जा रहा है, जिससे भवन की मजबूती पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि यदि निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की स्वतंत्र लैब से जांच नहीं कराई गई तो भविष्य में यह भवन किसी भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकता है। विशेषज्ञों का भी मानना है कि कमजोर निर्माण सामग्री का इस्तेमाल होने से भूकंप जैसी आपदा की स्थिति में भवन को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है, जिससे बड़ी अनहोनी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। उधर, लम्भुआ क्षेत्र में अभी तक स्थायी अग्निशमन केंद्र न होने के कारण आगजनी की घटनाओं के समय दमकल वाहनों को अन्य स्थानों से बुलाना पड़ता है, जिससे राहत कार्य में देरी हो जाती है। ऐसे में यदि क्षेत्र में कोई बड़ी घटना हो जाए तो भारी नुकसान होने की आशंका बनी रहती है। स्थानीय जिम्मेदार नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच कराई जाए और जल्द से जल्द अग्निशमन केंद्र का निर्माण पूरा कराया जाए, ताकि क्षेत्र की जनता को आवश्यक सुरक्षा सुविधा मिल सके। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस परियोजना पर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह महत्वपूर्ण योजना भी अन्य अधूरी योजनाओं की तरह कागजों तक ही सीमित रह सकती है। इसलिए प्रशासन से अपील की जा रही है कि वैकल्पिक व्यवस्था करते हुए लम्भुआ विधानसभा क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाए।3
- “प्रतापगढ़ में पुलिस का सख्त एक्शन देखने को मिला है। पुलिस अधीक्षक दीपक भूकर के निर्देश पर चलाए जा रहे अभियान के तहत थाना आसपुर देवसरा पुलिस ने गोवध निवारण अधिनियम के वांछित अभियुक्त को गिरफ्तार कर लिया है। थाना प्रभारी राकेश कुमार चौरसिया के नेतृत्व में पुलिस टीम ने मुखबिर की सूचना पर ग्राम बिनैका के पास बंद कोल्ड स्टोर के नजदीक से रामसुन्दर नाम के अभियुक्त को दबोच लिया। बताया जा रहा है कि साल 2021 में करीब साढ़े सात कुंतल गोवंशीय मांस बरामदगी के मामले में यह आरोपी लंबे समय से फरार चल रहा था। गिरफ्तार अभियुक्त पर आर्म्स एक्ट, हत्या के प्रयास और डकैती के प्रयास जैसे कई गंभीर मुकदमे पहले से दर्ज हैं। पुलिस का कहना है कि अपराधियों के खिलाफ अभियान आगे भी इसी तरह जारी रहेगा।”1
- Post by Raju.u.p.441
- Post by अनिल कुमार (पत्रकार) ✍️✍️1
- मौरावां सुगमेश्वर मंदिर में धूमधाम से हुआ होली मिलन समारोह भक्तों ने गुलाल लगाकर दी शुभकामनाएं खबरें उत्तर प्रदेश को #khabreinuttarpradeshki khabrein Uttar Pradesh ki1
- Post by Dharmendra Mishra1
- प्रतापगढ़ जनपद के दिलीपपुर थाना क्षेत्र में सोमवार को उस समय सनसनी फैल गई जब चौखड़ा जंगल के पास एक बाइक सवार युवक का शव संदिग्ध हालत में पड़ा मिला। युवक को अज्ञात बदमाशों ने गोली मार दी। जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई। बताया जा रहा है कि चौखड़ा जंगल के रास्ते से गुजर रहे ग्रामीणों ने सड़क किनारे एक युवक को बाइक के पास मृत अवस्था में पड़ा देखा। शरीर पर गोली लगने के निशान होने पर लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही दिलीपपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंच गई और घटनास्थल का निरीक्षण शुरू किया। मृतक की पहचान आशिक अली निवासी अचलपुर के रूप में हुई है। घटना की जानकारी मिलते ही इलाके में हड़कंप मच गया और आसपास के लोग मौके पर जुटने लगे। घटनास्थल पर थाना अध्यक्ष दिलीपपुर बलराम सिंह, उपनिरीक्षक रमिल कुमार समेत भारी पुलिस बल मौजूद रहा और मामले की बारीकी से जांच की जा रही है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। मौके पर शाम करीब 6:00 बजे एसपी प्रतापगढ़ दीपक होकर भी पहुंचे हुए हैं मृतक आर्टिका कार चालक था उसके भाई सद्दाम से पूछताछ की जा रही है।1
- होली मिलन समारोह में शामिल हुए विधायक अनिल सिंह** #उन्नाव खबरें उत्तर प्रदेश की khabrein Uttar Pradesh ki1