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उभाई चौराहे पर ग्राहक सेवा केंद्र में चोरी नगदी समेत सामान ले गए चोर हरैया----' थाना क्षेत्र के मुर्दाहवा घाट व उभाई चौराहे पर बीती रात अज्ञात चोरों ने ग्राहक सेवा केंद्र का ताला तोड़कर अंदर रखी नगदी समेत अन्य सामान चोरी कर लिया। घटना की सूचना मिलते ही हरैया फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाते हुए पुलिस चोरों की तलाश में जुटी----

14 hrs ago
user_आनंद धर द्विवेदी
आनंद धर द्विवेदी
Local News Reporter हर्रैया, बस्ती, उत्तर प्रदेश•
14 hrs ago
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उभाई चौराहे पर ग्राहक सेवा केंद्र में चोरी नगदी समेत सामान ले गए चोर हरैया----' थाना क्षेत्र के मुर्दाहवा घाट व उभाई चौराहे पर बीती रात अज्ञात चोरों ने ग्राहक सेवा केंद्र का ताला तोड़कर अंदर रखी नगदी समेत अन्य सामान चोरी कर लिया। घटना की सूचना मिलते ही हरैया फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाते हुए पुलिस चोरों की तलाश में जुटी----

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  • बिकता हुआ सच और झारखंड की अनसुनी चीखें ,,,,,,,,,,,,,,, आज के दौर में अगर लोकतंत्र का सबसे बड़ा कोई शोरूम है, तो वह है मीडिया का बाजार। यहाँ हर चीज बिकती है—बहस की सुइयां, स्टूडियो का तापमान और प्राइम टाइम की चीख-पुकार। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इस बाजार में आज भी कुछ चीजें "आउट ऑफ स्टॉक" हैं, और वह है झारखंड की अव्यवस्था पर एक अदद गंभीर चर्चा। जब तक फंडिंग नहीं, तब तक स्क्रीन पर झारखंड नहीं! जरा सोचिए, एक राज्य जिसकी नसों में खनिज संपदा दौड़ती है, जिसकी गोद में देश का पेट भरने वाले कोयले और स्टील के भंडार हैं, और जिसकी जमीन पर आदिवासियों की अस्मिता दांव पर लगी है... वहां की विफलताएं आज नेशनल न्यूज रूम्स के डस्टबिन में क्यों पड़ी हैं? इसका गणित बहुत सीधा और बाजारू है: जिधर फंडिंग, उधर हेडिंग: जिस मुद्दे पर विज्ञापनों का चौतरफा छप्परफाड़ अनुदान नहीं मिलता, उसे स्क्रीन पर जगह देना "बिजनेस के खिलाफ" माना जाता है। दलाली का सूखा: जिस खबर को चलाने से कोई "सौदा" या "राजनीतिक पैकेज" सेट नहीं होता, उस पर एंकरों के गले की नसें अचानक शांत क्यों पड़ जाती हैं? पत्रकारिता के तीन नए रंग: दरबारी, निष्पक्ष और इंफ्लूएंसर आज की इस चमकदार डिजिटल दुनिया में पत्रकारिता और विचारों के ठेकेदारों की तीन मुख्य प्रजातियां पाई जाती हैं: दरबारी पत्रकार: इनकी रीढ़ की हड्डी में ब्लूटूथ सॉफ्टवेयर इंस्टॉल होता है, जो ऊपर से आदेश मिलते ही अपने आप झुक जाती है। झारखंड में कुशासन हो, भ्रष्टाचार का नंगा नाच हो या प्रशासनिक नाकामी—इनकी नजरों में सब चकाचक रहता है। इन्हें बस इतना पता है कि सरकार की थाली में चम्मच कैसे बजाना है। "निष्पक्ष" मीडिया (ब्रांडेड न्यूट्रल): ये वो महाशय हैं जो दिनभर न्यूट्रॅलिटी का चोला पहनकर घूमते हैं, लेकिन इनका रिमोट किसी अदृश्य एसी कमरे से चलता है। झारखंड की बदहाली पर जब इनसे पूछो, तो ये बोलेंगे— "हम दोनों पक्षों की बात सुनेंगे।" अरे भाई, एक पक्ष जनता का है जो रो रहा है, और दूसरा पक्ष कुर्सी का है जो सो रहा है—इसमें बीच का रास्ता कौन सा होता है? सोशल मीडिया के आधुनिक "इंफ्लूएंसर": इनकी दुनिया रील्स और लाइक्स तक सीमित है। झारखंड के सुदूर गांवों में भुखमरी या बेरोजगारी पर वीडियो बनाने से ज्यादा रीच इन्हें किसी वायरल ट्रेंड पर ठुमके लगाने या सनसनीखेज मीम्स बनाने से मिलती है। जब तक किसी मुद्दे पर "हजार लाइक्स और ब्रांड स्पॉन्सरशिप" की गारंटी न हो, तब तक गरीबों के आंसू उनके एल्गोरिदम में फिट नहीं बैठते। सोशल मीडिया का कड़वा सच आज सोशल मीडिया वह मंच बन गया है जहां हर कोई अपनी जेब में एक अदद स्टूडियो लेकर घूम रहा है। हर कोई खुद को क्रांतिकारी समझता है, बशर्ते उसका मोबाइल कैमरा ऑन हो और पीछे कोई ट्रेंडिंग बैकग्राउंड म्यूजिक बज रहा हो। लेकिन जब बात झारखंड जैसे राज्यों की आती है, जहां की व्यवस्था की सांसे एम्बुलेंस के इंतजार में दम तोड़ रही हैं, तो सारे "डिजिटल योद्धा" अचानक मौन व्रत धारण कर लेते हैं। क्योंकि साहब, 'टीआरपी' और 'एंगेजमेंट' से पेट भरता है, और झारखंड के गांवों की बेबसी से सिर्फ धूल उड़ती है। अंत में... झारखंड की अव्यवस्था किसी पैकेज की मोहताज नहीं है, लेकिन मीडिया के बाजार ने तय कर लिया है कि बिना दाम के कोई पैगाम नहीं जाएगा। जब तक कुशासन के खिलाफ खड़े होने पर चेकबुक नहीं खुलेगी, तब तक स्टूडियो के एसी कमरों में झारखंड सिर्फ एक अदृश्य नक्शा बना रहेगा—जिसे न कोई देखना चाहता है, और न जिसके लिए किसी को कोई फंडिंग मिल रही है।
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    बिकता हुआ सच और झारखंड की अनसुनी चीखें
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आज के दौर में अगर लोकतंत्र का सबसे बड़ा कोई शोरूम है, तो वह है मीडिया का बाजार। यहाँ हर चीज बिकती है—बहस की सुइयां, स्टूडियो का तापमान और प्राइम टाइम की चीख-पुकार। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इस बाजार में आज भी कुछ चीजें "आउट ऑफ स्टॉक" हैं, और वह है झारखंड की अव्यवस्था पर एक अदद गंभीर चर्चा।
जब तक फंडिंग नहीं, तब तक स्क्रीन पर झारखंड नहीं!
जरा सोचिए, एक राज्य जिसकी नसों में खनिज संपदा दौड़ती है, जिसकी गोद में देश का पेट भरने वाले कोयले और स्टील के भंडार हैं, और जिसकी जमीन पर आदिवासियों की अस्मिता दांव पर लगी है... वहां की विफलताएं आज नेशनल न्यूज रूम्स के डस्टबिन में क्यों पड़ी हैं?
इसका गणित बहुत सीधा और बाजारू है:
जिधर फंडिंग, उधर हेडिंग: जिस मुद्दे पर विज्ञापनों का चौतरफा छप्परफाड़ अनुदान नहीं मिलता, उसे स्क्रीन पर जगह देना "बिजनेस के खिलाफ" माना जाता है।
दलाली का सूखा: जिस खबर को चलाने से कोई "सौदा" या "राजनीतिक पैकेज" सेट नहीं होता, उस पर एंकरों के गले की नसें अचानक शांत क्यों पड़ जाती हैं?
पत्रकारिता के तीन नए रंग: दरबारी, निष्पक्ष और इंफ्लूएंसर
आज की इस चमकदार डिजिटल दुनिया में पत्रकारिता और विचारों के ठेकेदारों की तीन मुख्य प्रजातियां पाई जाती हैं:
दरबारी पत्रकार:
इनकी रीढ़ की हड्डी में ब्लूटूथ सॉफ्टवेयर इंस्टॉल होता है, जो ऊपर से आदेश मिलते ही अपने आप झुक जाती है। झारखंड में कुशासन हो, भ्रष्टाचार का नंगा नाच हो या प्रशासनिक नाकामी—इनकी नजरों में सब चकाचक रहता है। इन्हें बस इतना पता है कि सरकार की थाली में चम्मच कैसे बजाना है।
"निष्पक्ष" मीडिया (ब्रांडेड न्यूट्रल):
ये वो महाशय हैं जो दिनभर न्यूट्रॅलिटी का चोला पहनकर घूमते हैं, लेकिन इनका रिमोट किसी अदृश्य एसी कमरे से चलता है। झारखंड की बदहाली पर जब इनसे पूछो, तो ये बोलेंगे— "हम दोनों पक्षों की बात सुनेंगे।" अरे भाई, एक पक्ष जनता का है जो रो रहा है, और दूसरा पक्ष कुर्सी का है जो सो रहा है—इसमें बीच का रास्ता कौन सा होता है?
सोशल मीडिया के आधुनिक "इंफ्लूएंसर":
इनकी दुनिया रील्स और लाइक्स तक सीमित है। झारखंड के सुदूर गांवों में भुखमरी या बेरोजगारी पर वीडियो बनाने से ज्यादा रीच इन्हें किसी वायरल ट्रेंड पर ठुमके लगाने या सनसनीखेज मीम्स बनाने से मिलती है। जब तक किसी मुद्दे पर "हजार लाइक्स और ब्रांड स्पॉन्सरशिप" की गारंटी न हो, तब तक गरीबों के आंसू उनके एल्गोरिदम में फिट नहीं बैठते।
सोशल मीडिया का कड़वा सच
आज सोशल मीडिया वह मंच बन गया है जहां हर कोई अपनी जेब में एक अदद स्टूडियो लेकर घूम रहा है। हर कोई खुद को क्रांतिकारी समझता है, बशर्ते उसका मोबाइल कैमरा ऑन हो और पीछे कोई ट्रेंडिंग बैकग्राउंड म्यूजिक बज रहा हो।
लेकिन जब बात झारखंड जैसे राज्यों की आती है, जहां की व्यवस्था की सांसे एम्बुलेंस के इंतजार में दम तोड़ रही हैं, तो सारे "डिजिटल योद्धा" अचानक मौन व्रत धारण कर लेते हैं।
क्योंकि साहब, 'टीआरपी' और 'एंगेजमेंट' से पेट भरता है, और झारखंड के गांवों की बेबसी से सिर्फ धूल उड़ती है।
अंत में...
झारखंड की अव्यवस्था किसी पैकेज की मोहताज नहीं है, लेकिन मीडिया के बाजार ने तय कर लिया है कि बिना दाम के कोई पैगाम नहीं जाएगा। जब तक कुशासन के खिलाफ खड़े होने पर चेकबुक नहीं खुलेगी, तब तक स्टूडियो के एसी कमरों में झारखंड सिर्फ एक अदृश्य नक्शा बना रहेगा—जिसे न कोई देखना चाहता है, और न जिसके लिए किसी को कोई फंडिंग मिल रही है।
    user_अजीत मिश्रा (खोजी)
    अजीत मिश्रा (खोजी)
    बस्ती, बस्ती, उत्तर प्रदेश•
    5 hrs ago
  • गुरु पूर्णिमा पर बाबा भदेश्वर नाथ मंदिर पहुंचे भाजपा के असम प्रभारी हरीश द्विवेदी, गुरुओं का लिया आशीर्वाद। गुरु पूर्णिमा पर बाबा भदेश्वर नाथ मंदिर पहुंचे भाजपा के असम प्रभारी हरीश द्विवेदी, गुरुओं का लिया आशीर्वाद। बस्ती- गुरु पूर्णिमा के अवसर पर सोमवार को बस्ती पहुंचे पूर्व सांसद एवं असम प्रदेश भाजपा प्रभारी हरीश द्विवेदी ने बाबा भदेश्वर नाथ शिव मंदिर में दर्शन-पूजन किया। मंदिर परिसर में उन्होंने गुरुओं को सम्मानित कर उनका आशीर्वाद लिया। पूजा के दौरान उन्होंने प्रदेश और देश की सुख-समृद्धि की कामना की। इस अवसर पर उनके साथ बस्ती सदर ब्लॉक प्रमुख राकेश श्रीवास्तव, भाजपा नेता प्रमोद पांडेय , वरिष्ठ भाजपा नेता जगदीश शुक्ला, विद्यामणि सिंह, प्रिंस शुक्ला, दिलीप कुमार पांडेय , अश्वनी उपाध्याय, सुरेंद्र चौधरी, अर्जुन उपाध्याय, विशुद्धानंद त्रिपाठी मंडल अध्यक्ष बस्ती सदर, आजाद पुरी, अमित चौधरी और राजन चौहान मौजूद रहे। हरीश द्विवेदी ने कहा कि गुरु का स्थान सबसे ऊंचा है। गुरु के मार्गदर्शन से ही समाज और राष्ट्र आगे बढ़ता है। गुरु पूर्णिमा हमें अपने गुरुओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर देती है।
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    गुरु पूर्णिमा पर बाबा भदेश्वर नाथ मंदिर पहुंचे भाजपा के असम प्रभारी हरीश द्विवेदी, गुरुओं का लिया आशीर्वाद।
गुरु पूर्णिमा पर बाबा भदेश्वर नाथ मंदिर पहुंचे भाजपा के असम प्रभारी हरीश द्विवेदी, गुरुओं का लिया आशीर्वाद।
बस्ती- गुरु पूर्णिमा के अवसर पर सोमवार को बस्ती पहुंचे पूर्व सांसद एवं असम प्रदेश भाजपा प्रभारी हरीश द्विवेदी ने बाबा भदेश्वर नाथ शिव मंदिर में दर्शन-पूजन किया।
मंदिर परिसर में उन्होंने गुरुओं को सम्मानित कर उनका आशीर्वाद लिया। पूजा के दौरान उन्होंने प्रदेश और देश की सुख-समृद्धि की कामना की।
इस अवसर पर उनके साथ बस्ती सदर ब्लॉक प्रमुख राकेश श्रीवास्तव, भाजपा नेता प्रमोद पांडेय , वरिष्ठ भाजपा नेता जगदीश शुक्ला, विद्यामणि सिंह, प्रिंस शुक्ला, दिलीप कुमार पांडेय , अश्वनी उपाध्याय, सुरेंद्र चौधरी, अर्जुन उपाध्याय, विशुद्धानंद त्रिपाठी मंडल अध्यक्ष बस्ती सदर, आजाद पुरी, अमित चौधरी और राजन चौहान मौजूद रहे।
हरीश द्विवेदी ने कहा कि गुरु का स्थान सबसे ऊंचा है। गुरु के मार्गदर्शन से ही समाज और राष्ट्र आगे बढ़ता है। गुरु पूर्णिमा हमें अपने गुरुओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर देती है।
    user_सुनील दूबे
    सुनील दूबे
    Local News Reporter बस्ती, बस्ती, उत्तर प्रदेश•
    19 hrs ago
  • समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद और पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव की आलोचना करते हुए कहा कि सनातन समाज ऐसे कृत्यों को स्वीकार नहीं करेगा , महंत दिवाकराचार्य महाराज ने भी इस पूरे घटनाक्रम की निंदा करते हुए कहा कि संसद में भगवान राम की तस्वीर रखकर जिस प्रकार प्रदर्शन किया गया, वह सनातन, साधु-संतों, भक्तों और ब्राह्मण समाज का अपमान है। उन्होंने समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद और पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव की आलोचना करते हुए कहा कि सनातन समाज ऐसे कृत्यों को स्वीकार नहीं करेगा।
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    समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद और पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव की आलोचना करते हुए कहा कि सनातन समाज ऐसे कृत्यों को स्वीकार नहीं करेगा
, महंत दिवाकराचार्य महाराज ने भी इस पूरे घटनाक्रम की निंदा करते हुए कहा कि संसद में भगवान राम की तस्वीर रखकर जिस प्रकार प्रदर्शन किया गया, वह सनातन, साधु-संतों, भक्तों और ब्राह्मण समाज का अपमान है। उन्होंने समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद और पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव की आलोचना करते हुए कहा कि सनातन समाज ऐसे कृत्यों को स्वीकार नहीं करेगा।
    user_Ashwani Sonkar
    Ashwani Sonkar
    Court reporter फैजाबाद, अयोध्या, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
  • पप्पू यादव बने साधु, राहुल गांधी ने चंदा पेटी में डाले पैसे! संसद में राम मंदिर दान घोटाले पर विपक्ष का अनोखा प्रदर्शन संसद के मानसून सत्र के दौरान राम मंदिर दान घोटाले के मुद्दे पर विपक्ष ने अनोखे अंदाज़ में सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। सांसद पप्पू यादव साधु के वेश में चंदा पेटी लेकर संसद परिसर पहुंचे और इस मुद्दे को लेकर सरकार से जवाब मांगा। इस प्रदर्शन के दौरान लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी भी शामिल हुए और प्रतीकात्मक रूप से चंदा पेटी में पैसे डालकर विरोध प्रदर्शन का समर्थन किया। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और INDIA गठबंधन के कई सांसदों ने इस प्रदर्शन में भाग लिया और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। इस वीडियो में देखें: • पप्पू यादव का साधु अवतार और चंदा पेटी के साथ प्रदर्शन • राहुल गांधी ने चंदा पेटी में पैसे क्यों डाले? • राम मंदिर दान घोटाले को लेकर विपक्ष के आरोप • संसद परिसर से पूरा घटनाक्रम और नेताओं के बयान • सरकार और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर सियासी टकराव
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    पप्पू यादव बने साधु, राहुल गांधी ने चंदा पेटी में डाले पैसे! संसद में राम मंदिर दान घोटाले पर विपक्ष का अनोखा प्रदर्शन
संसद के मानसून सत्र के दौरान राम मंदिर दान घोटाले के मुद्दे पर विपक्ष ने अनोखे अंदाज़ में सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। सांसद पप्पू यादव साधु के वेश में चंदा पेटी लेकर संसद परिसर पहुंचे और इस मुद्दे को लेकर सरकार से जवाब मांगा।
इस प्रदर्शन के दौरान लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी भी शामिल हुए और प्रतीकात्मक रूप से चंदा पेटी में पैसे डालकर विरोध प्रदर्शन का समर्थन किया। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और INDIA गठबंधन के कई सांसदों ने इस प्रदर्शन में भाग लिया और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई।
इस वीडियो में देखें: • पप्पू यादव का साधु अवतार और चंदा पेटी के साथ प्रदर्शन
• राहुल गांधी ने चंदा पेटी में पैसे क्यों डाले?
• राम मंदिर दान घोटाले को लेकर विपक्ष के आरोप
• संसद परिसर से पूरा घटनाक्रम और नेताओं के बयान
• सरकार और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर सियासी टकराव
    user_Nation 7 TV
    Nation 7 TV
    Local News Reporter फैजाबाद, अयोध्या, उत्तर प्रदेश•
    7 hrs ago
  • Post by आपकी ताकत अयोध्या
    1
    Post by आपकी ताकत अयोध्या
    user_आपकी ताकत अयोध्या
    आपकी ताकत अयोध्या
    Local News Reporter Faizabad, Ayodhya•
    7 hrs ago
  • बृज किशोर होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज पहुंचे विधायक, अस्पताल की व्यवस्थाओं का लिया जायजा। प्राचार्य ने विधायक निधि से सुविधाएं बढ़ाने की रखी मांग। मोनू अयोध्या देवकाली स्थित बृज किशोर होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में नशा मुक्ति अभियान के तहत शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में स्थानीय विधायक मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने अस्पताल परिसर का निरीक्षण कर विभिन्न व्यवस्थाओं का जायजा लिया तथा परिसर में आंवले का पौधा लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया। विधायक ने कॉलेज की व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए संस्थान के कार्यों पर संतोष व्यक्त किया। कार्यक्रम के दौरान बृज किशोर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ.आशीष सिंह ने विधायक को अस्पताल और छात्रावास से जुड़ी प्रमुख समस्याओं से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि अस्पताल के मुख्य प्रवेश द्वार के सामने सड़क नीची होने के कारण बारिश के दिनों में जलभराव की गंभीर समस्या उत्पन्न हो जाती है। वहीं छात्रावास के पास नालियों की सफाई और मरम्मत न होने से गंदगी फैल रही है, जिससे छात्र-छात्राओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्राचार्य ने विधायक से सड़क और नाली निर्माण कराने का अनुरोध किया। डॉ.आशीष सिंह ने बताया कि मरीजों को बेहतर और त्वरित जांच सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए पैथोलॉजी विभाग में आधुनिक उपकरणों की आवश्यकता है। उन्होंने विधायक निधि से ऑटो एनालाइजर और बायोकेमिस्ट्री मशीन उपलब्ध कराने की मांग भी रखी, ताकि मरीजों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें। मीडिया से बातचीत में प्राचार्य ने कहा कि सरकार और आयुष विभाग की मंशा के अनुरूप अंतिम व्यक्ति तक होम्योपैथिक एवं आयुष चिकित्सा सेवाएं पहुंचाने के लिए संस्थान लगातार कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग के साथ अस्पताल में सुविधाओं का विस्तार भी आवश्यक है। नशा मुक्ति अभियान के अवसर पर डॉ. आशीष सिंह ने युवाओं और आमजन से नशे से दूर रहने की अपील करते हुए कहा, "नशा एक धीमा ज़हर है। नशे का कोई इलाज नहीं है, इसका अंत केवल मौत है। इसलिए सभी लोग नशे से दूर रहें और स्वस्थ जीवन अपनाएं। विधायक ने प्राचार्य एवं छात्रों द्वारा उठाई गई मांगों और समस्याओं का संज्ञान लेते हुए उनके शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि अस्पताल में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए हरसंभव सहयोग किया जाएगा।
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    बृज किशोर होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज पहुंचे विधायक, अस्पताल की व्यवस्थाओं का लिया जायजा।


प्राचार्य ने विधायक निधि से सुविधाएं बढ़ाने की रखी मांग।
मोनू 
अयोध्या 
देवकाली स्थित बृज किशोर होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में नशा मुक्ति अभियान के तहत शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में स्थानीय विधायक मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने अस्पताल परिसर का निरीक्षण कर विभिन्न व्यवस्थाओं का जायजा लिया तथा परिसर में आंवले का पौधा लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया। विधायक ने कॉलेज की व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए संस्थान के कार्यों पर संतोष व्यक्त किया। कार्यक्रम के दौरान बृज किशोर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ.आशीष सिंह ने विधायक को अस्पताल और छात्रावास से जुड़ी प्रमुख समस्याओं से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि अस्पताल के मुख्य प्रवेश द्वार के सामने सड़क नीची होने के कारण बारिश के दिनों में जलभराव की गंभीर समस्या उत्पन्न हो जाती है। वहीं छात्रावास के पास नालियों की सफाई और मरम्मत न होने से गंदगी फैल रही है, जिससे छात्र-छात्राओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्राचार्य ने विधायक से सड़क और नाली निर्माण कराने का अनुरोध किया। डॉ.आशीष सिंह ने बताया कि मरीजों को बेहतर और त्वरित जांच सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए पैथोलॉजी विभाग में आधुनिक उपकरणों की आवश्यकता है। उन्होंने विधायक निधि से ऑटो एनालाइजर और बायोकेमिस्ट्री मशीन उपलब्ध कराने की मांग भी रखी, ताकि मरीजों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें। मीडिया से बातचीत में प्राचार्य ने कहा कि सरकार और आयुष विभाग की मंशा के अनुरूप अंतिम व्यक्ति तक होम्योपैथिक एवं आयुष चिकित्सा सेवाएं पहुंचाने के लिए संस्थान लगातार कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग के साथ अस्पताल में सुविधाओं का विस्तार भी आवश्यक है। नशा मुक्ति अभियान के अवसर पर डॉ. आशीष सिंह ने युवाओं और आमजन से नशे से दूर रहने की अपील करते हुए कहा, "नशा एक धीमा ज़हर है। नशे का कोई इलाज नहीं है, इसका अंत केवल मौत है। इसलिए सभी लोग नशे से दूर रहें और स्वस्थ जीवन अपनाएं। विधायक ने प्राचार्य एवं छात्रों द्वारा उठाई गई मांगों और समस्याओं का संज्ञान लेते हुए उनके शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि अस्पताल में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए हरसंभव सहयोग किया जाएगा।
    user_Tvnews Media
    Tvnews Media
    Media company फैजाबाद, अयोध्या, उत्तर प्रदेश•
    9 hrs ago
  • सोनम वांगचुक के अनशन तोड़ते ही राहुल गांधी के तोते उड़ गये, केजरीवाल,वामपंथी , विपक्षी हैरान परेशान। इन पार्टियों के गुंडों ने 200 से अधिक पुलिसजनों को बर्बर तरीक़े से पीटा और कुछ को लिंच करने का प्रयास किया। इन पार्टियों के गुंडों ने पुलिस को उकसा कर गोली चलवाने का प्रयास किया जिससे इन्हें देश में अराजकता फैला सकें। पुलिस जनों के धैर्य की प्रशंसा करता हूँ वे प्रताड़ना सह कर भी गुंडों के आकाओ के जाल में नहीं फंसे। हद तो तब जो गई जब अपनी जेबों में संविधान लेकर चलने वालों के गुंडों ने प्रजातंत्र के चौथे स्तंभ, पत्रकारों जिसमें महिला पत्रकार भी थी, हिंसा का शिकार बनाया और कैमरे, चैन, पर्स तक छीन लिए । दुर्भाग्य की बात यह है कि इन गुंडों के आकावों ने पत्रकारों की पिटाई पर अपने ओठों को फेवीकॉल लगा लिए। शर्म करो-राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रियंका गांधी वाड्रा, अरविंद केजरीवाल , अखिलेश यादव और वामपंथियो। याद रखना तुम्हारे पाले हुए गुंडों पर ऐसे कार्यवाही होगी कि वे जंतर मंतर की तरफ़ देखने की हिम्मत नहीं करेंगे । जो कल प्रोटेस्ट में फड़फड़ा रहे थे आजकल सोशल मीडिया में आकर क्षमा याचना मांग रहे हैं, रो रहे हैं। जितने विपक्षी इस प्रोटेस्ट में भागीदार बनें थे वह केरल नहीं जा रहे हैं वहां भी छात्रों का अनसंन महीनों से चल रहा है बच्चे केले के पत्ते पर मिट्टी खाने को मजबूर हैं विपक्ष की दोहरी मानसिकता यह बंया करती है कि इनकी नियत में खोट है
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    सोनम वांगचुक के अनशन तोड़ते ही राहुल गांधी के तोते उड़ गये, केजरीवाल,वामपंथी , विपक्षी हैरान परेशान। इन पार्टियों के गुंडों ने 200 से अधिक पुलिसजनों को बर्बर तरीक़े से पीटा और कुछ को लिंच करने का प्रयास किया। 
    इन पार्टियों के गुंडों ने पुलिस को उकसा कर गोली चलवाने का प्रयास किया जिससे इन्हें देश में अराजकता फैला सकें।  पुलिस जनों के धैर्य की प्रशंसा करता हूँ वे प्रताड़ना सह कर भी गुंडों के आकाओ  के जाल में नहीं फंसे।
     हद तो तब जो गई जब अपनी जेबों में संविधान लेकर चलने वालों के गुंडों ने प्रजातंत्र के चौथे स्तंभ, पत्रकारों जिसमें महिला पत्रकार भी थी, हिंसा का शिकार बनाया और कैमरे, चैन, पर्स तक छीन लिए ।    
   दुर्भाग्य की बात यह है कि इन गुंडों के आकावों ने पत्रकारों की पिटाई पर अपने ओठों को फेवीकॉल लगा लिए।
      शर्म करो-राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रियंका गांधी वाड्रा, अरविंद केजरीवाल , अखिलेश यादव और वामपंथियो।
    याद रखना तुम्हारे पाले हुए गुंडों पर ऐसे कार्यवाही होगी कि वे जंतर 
मंतर की तरफ़ देखने की हिम्मत नहीं करेंगे । जो कल प्रोटेस्ट में फड़फड़ा रहे थे आजकल सोशल मीडिया में आकर क्षमा याचना मांग रहे हैं, रो रहे हैं। जितने विपक्षी इस प्रोटेस्ट में भागीदार बनें थे वह केरल नहीं जा रहे हैं वहां भी छात्रों का अनसंन महीनों से चल रहा है बच्चे केले के पत्ते पर मिट्टी खाने को मजबूर हैं विपक्ष की दोहरी मानसिकता यह बंया करती है कि इनकी नियत में खोट है
    user_जुर्म की दुनिया समाचार
    जुर्म की दुनिया समाचार
    Local News Reporter फैजाबाद, अयोध्या, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
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