लखीसराय के रामगढ़ चौक प्रखंड स्थित शर्मा पंचायत के महादलित टोला में एक विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। यह शिविर राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकार (नालसा) नई दिल्ली और बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (बालसा) पटना के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा लगाया गया था। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य केंद्र और राज्य सरकार द्वारा अनुसूचित जाति (SC) एवं अनुसूचित जनजाति (ST) के शैक्षणिक उत्थान के लिए चलाई जा रही योजनाओं के क्रियान्वयन के बारे में जानकारी देना था। शिविर का आयोजन जिला विधिक सेवा प्राधिकार के अध्यक्ष सह प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सैयद मोहम्मद शब्बीर आलम और सचिव सह अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी विधानंद सागर के नेतृत्व में हुआ। इसकी अध्यक्षता प्राधिकार के पैनल अधिवक्ता सीतेश सुधांशु ने की, जबकि संचालन पारा विधिक स्वयंसेवक सुप्रिया कुमारी ने किया। पैनल अधिवक्ता सीतेश सुधांशु ने बताया कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति विभाग के तहत निदेशालय, बिहार राज्य अनुसूचित जाति सहकारिता विकास निगम लिमिटेड, बिहार महादलित विकास मिशन, बिहार राज्य अनुसूचित जनजाति शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान और समेकित थरूहट विकास अभिकरण के माध्यम से इन योजनाओं का क्रियान्वयन किया जाता है। विभाग SC-ST के सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक विकास के लिए अनेक योजनाएं संचालित करता है। श्री सुधांशु ने प्रमुख योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी, जिनमें प्रवेशिकोत्तर छात्रवृत्ति, विद्यालय छात्रवृत्ति, मुख्यमंत्री SC-ST मेधावृत्ति योजना, परीक्षा शुल्क प्रतिपूर्ति योजना, आवासीय विद्यालय छात्रावास योजना, मुख्यमंत्री SC-ST छात्रावास अनुदान योजना, छात्रावासों में खाद्यान्न आपूर्ति योजना, प्राक परीक्षा प्रशिक्षण केंद्र, मुख्यमंत्री सिविल सेवा प्रोत्साहन योजना, अत्याचार राहत, प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना, महादलित विकास योजना, धारा 275(1) के तहत आधारभूत संरचना विकास योजना, विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के विकास की योजना, धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान और थरूहट क्षेत्र विकास योजना शामिल हैं। उन्होंने विशेष रूप से प्रवेशिकोत्तर छात्रवृत्ति योजना पर प्रकाश डाला, जिसके तहत मान्यता प्राप्त कॉलेज, विश्वविद्यालय या संस्थान में पढ़ाई कर रहे SC-ST छात्र-छात्राओं को केंद्र सरकार के मापदंडों के अनुसार अनिवार्य शिक्षण शुल्क और शैक्षणिक भत्ता दिया जाता है। इस जागरूकता शिविर में महादलित परिवार के कई स्त्री, पुरुष और बच्चे मौजूद थे, जिन्होंने इन योजनाओं के बारे में जानकारी प्राप्त की। सभी ने यह संकल्प लिया कि वे पढ़-लिखकर इन योजनाओं का लाभ उठाएंगे और अपने जीवन में आगे बढ़ेंगे।
लखीसराय के रामगढ़ चौक प्रखंड स्थित शर्मा पंचायत के महादलित टोला में एक विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। यह शिविर राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकार (नालसा) नई दिल्ली और बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (बालसा) पटना के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा लगाया गया था। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य केंद्र और राज्य सरकार द्वारा अनुसूचित जाति (SC) एवं अनुसूचित जनजाति (ST) के शैक्षणिक उत्थान के लिए चलाई जा रही योजनाओं के क्रियान्वयन के बारे में जानकारी देना था। शिविर का आयोजन जिला विधिक सेवा प्राधिकार के अध्यक्ष सह प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सैयद मोहम्मद शब्बीर आलम और सचिव सह अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी विधानंद सागर के नेतृत्व में हुआ। इसकी अध्यक्षता प्राधिकार के पैनल अधिवक्ता सीतेश सुधांशु ने की, जबकि संचालन पारा विधिक स्वयंसेवक सुप्रिया कुमारी ने किया। पैनल अधिवक्ता सीतेश सुधांशु ने बताया कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति विभाग के तहत निदेशालय, बिहार राज्य अनुसूचित जाति सहकारिता विकास निगम लिमिटेड, बिहार महादलित विकास मिशन, बिहार राज्य अनुसूचित जनजाति शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान और समेकित थरूहट विकास अभिकरण के माध्यम से इन योजनाओं का क्रियान्वयन किया जाता है। विभाग SC-ST के सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक विकास के लिए अनेक योजनाएं संचालित करता है। श्री सुधांशु ने प्रमुख योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी, जिनमें प्रवेशिकोत्तर छात्रवृत्ति, विद्यालय छात्रवृत्ति, मुख्यमंत्री SC-ST मेधावृत्ति योजना, परीक्षा शुल्क प्रतिपूर्ति योजना, आवासीय विद्यालय छात्रावास योजना, मुख्यमंत्री SC-ST छात्रावास अनुदान योजना, छात्रावासों में खाद्यान्न आपूर्ति योजना, प्राक परीक्षा प्रशिक्षण केंद्र, मुख्यमंत्री सिविल सेवा प्रोत्साहन योजना, अत्याचार राहत, प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना, महादलित विकास योजना, धारा 275(1) के तहत आधारभूत संरचना विकास योजना, विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के विकास की योजना, धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान और थरूहट क्षेत्र विकास योजना शामिल हैं। उन्होंने विशेष रूप से प्रवेशिकोत्तर छात्रवृत्ति योजना पर प्रकाश डाला, जिसके तहत मान्यता प्राप्त कॉलेज, विश्वविद्यालय या संस्थान में पढ़ाई कर रहे SC-ST छात्र-छात्राओं को केंद्र सरकार के मापदंडों के अनुसार अनिवार्य शिक्षण शुल्क और शैक्षणिक भत्ता दिया जाता है। इस जागरूकता शिविर में महादलित परिवार के कई स्त्री, पुरुष और बच्चे मौजूद थे, जिन्होंने इन योजनाओं के बारे में जानकारी प्राप्त की। सभी ने यह संकल्प लिया कि वे पढ़-लिखकर इन योजनाओं का लाभ उठाएंगे और अपने जीवन में आगे बढ़ेंगे।
- रामगढ़ चौक प्रखंड में बुधवार को बकरीद का त्योहार शांतिपूर्ण और उत्साहपूर्ण ढंग से मनाया गया। प्रखंड के तेतरहाट, गुलनी, नवाडीह, रायडीह, नोनगढ़, रामगढ़ चौक, नंदनामा, सुरारी, इमामनगर, बरतारा, बड़हरा, बिहटा जैसे कई अल्पसंख्यक बहुल स्थानों पर सुबह 7:00 बजे या 7:30 बजे इमाम मुफ्ती अरशद की अगुवाई में नमाज अदा की गई। नमाज के बाद सभी लोगों ने अपने-अपने घरों में पशु, मुख्य रूप से बकरे की कुर्बानी दी। इस त्योहार के सफल आयोजन की जानकारी गुलनी गांव निवासी चेतरहाट पंचायत के सरपंच मोहम्मद आफताब आलम, मोहम्मद महफूज आलम, मोहम्मद अफरोज, मोहम्मद हसन, बिहटा गांव निवासी मोहम्मद ताजुद्दीन, नंदनामा के मोहम्मद खुर्शीद आलम और रामगढ़ चौक के मोहम्मद अब्बास आलम सहित दर्जनों अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों ने दी। बकरीद, जिसे ईद उल जुहा या कुर्बानी की ईद भी कहा जाता है, इस्लाम के प्रमुख त्योहारों में से एक है और इसका इतिहास पैगंबर इब्राहीम अलैहिस्सलाम से जुड़ा है। इस्लामी मान्यता के अनुसार, अल्लाह ने पैगंबर इब्राहीम की परीक्षा लेने के लिए उन्हें सपने में अपनी सबसे प्यारी चीज की कुर्बानी देने का हुक्म दिया था। इब्राहीम ने अपने बेटे इस्माइल को सबसे प्यारा मानते हुए अल्लाह के हुक्म का पालन करने का फैसला किया। जब पैगंबर इब्राहीम अपने बेटे इस्माइल की कुर्बानी देने के लिए तैयार हुए और छुरी चलाने लगे, तब अल्लाह ने उनकी निष्ठा को देखकर जिब्राईल फरिश्ते के हाथों जन्नत से एक दुम्बा भेजा, जिसकी इस्माइल की जगह कुर्बानी हुई और इस तरह अल्लाह ने इस्माइल की जान बचा ली। इसी घटना की याद में हर साल जिलहिज्ज महीने की 10 तारीख को बकरीद मनाई जाती है, जो हज यात्रा के पूरा होने के अगले दिन होती है। मुसलमान पैगंबर इब्राहीम की इस सुन्नत को निभाते हुए बकरे की कुर्बानी देते हैं। कुरान में बताया गया है कि कुर्बानी का उद्देश्य केवल जानवर काटना नहीं है, बल्कि अल्लाह तक नियत और तकवा पहुंचता है, खून नहीं। यह अल्लाह के प्रति समर्पण, त्याग और आज्ञापालन का प्रतीक है। कुर्बानी के मांस को तीन हिस्सों में बांटा जाता है: एक हिस्सा गरीबों और जरूरतमंदों के लिए, एक हिस्सा रिश्तेदारों और दोस्तों के लिए, और एक हिस्सा अपने परिवार के लिए रखा जाता है। भारत में इसे मुख्य रूप से बकरीद कहा जाता है क्योंकि यहां बकरे की कुर्बानी सबसे अधिक दी जाती है, जबकि अरब देशों में इसे ईद उल अजहा के नाम से जाना जाता है। इस त्योहार की तारीख चांद दिखने पर तय होती है, जिसके कारण यह हर साल अंग्रेजी कैलेंडर में 10-11 दिन पहले आ जाती है। यह त्योहार त्याग, इंसानियत और बराबरी का गहरा संदेश देता है।1
- लखीसराय जिले के रामगढ़ चौक बाजार में 'महावीर जांच घर' का विधिवत शुभारंभ किया गया है। इसका उद्घाटन रामगढ़ चौक बाजार स्थित विजय राय सेवा सदन में हुआ। जानकारी के अनुसार, इस नए जांच घर के खुलने से पहले रामगढ़ चौक में गंभीर बीमारियों की जांच के लिए कोई सुविधा उपलब्ध नहीं थी। पूर्व में स्थानीय लोगों को मलेरिया, टाइफाइड, शुगर और डेंगू जैसी गंभीर बीमारियों की जांच कराने के लिए पटना, भागलपुर या अन्य बड़े शहरों की यात्रा करनी पड़ती थी, जिससे उन्हें काफी असुविधा होती थी। इन्हीं समस्याओं को देखते हुए, रामगढ़ चौक के ब्लॉक रोड में 'महावीर जांच घर' खोला गया है, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में कम पैसों में गंभीर बीमारियों की जांच की जा सकेगी।1
- लखीसराय जिले के रामगढ़ चौक प्रखंड अंतर्गत बरतारा गांव में समस्त ग्रामीणों द्वारा 16 जून से श्री श्री 1008 श्री सीताराम महायज्ञ का शुभारंभ किया जाएगा। यह महायज्ञ 24 जून तक चलेगा। ग्रामीणों ने जानकारी दी है कि बरतारा गांव स्थित सूर्य मंदिर में सूर्य भगवान की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर इस यज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। महायज्ञ की सभी तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं। आयोजकों ने बताया कि यज्ञ में आने वाले सभी श्रद्धालुओं के लिए प्रतिदिन महाप्रसाद का विशेष आयोजन किया जाएगा, और जितने भी भक्तजन वहाँ आएंगे, उन सभी को महाप्रसाद ग्रहण करके ही जाना होगा।1
- झाझा विधानसभा क्षेत्र के जदयू विधायक दामोदर रावत को बिहार सरकार में परिवहन मंत्री बनाए जाने के उपलक्ष्य में गुरुवार को झाझा रेलवे स्टेशन क्लब में एक नागरिक अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया। इस भव्य कार्यक्रम में बड़ी संख्या में एनडीए कार्यकर्ताओं, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों ने हिस्सा लेकर मंत्री का उत्साहपूर्वक स्वागत किया। समारोह की अध्यक्षता जदयू नगर अध्यक्ष बबलू सिन्हा ने की, जबकि मंच संचालन मुकेश राजहंस ने किया। कार्यक्रम के दौरान प्रो. रामोतार सिंह, बरनवाल समाज के अध्यक्ष गोपाल बरनवाल, जदयू प्रखंड अध्यक्ष राकेश दास, डॉ. राजेंद्र रावत, भाजपा नेत्री कंचन देवी और प्रफुलचंद्र त्रिवेदी सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने दामोदर रावत के राजनीतिक सफर का उल्लेख करते हुए उन्हें पार्टी का समर्पित और कर्मठ कार्यकर्ता बताया। उन्होंने कहा कि विधायक रहते हुए उन्होंने क्षेत्र में कई विकास कार्य किए हैं और अब मंत्री के रूप में भी वे राज्य स्तर पर जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने का प्रयास कर रहे हैं। अपने संबोधन में परिवहन मंत्री दामोदर रावत ने समारोह आयोजित करने के लिए उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि झाझा विधानसभा क्षेत्र की जनता ने हमेशा उन पर भरोसा जताया है, जिसे वह एक बड़ी जिम्मेदारी मानते हैं। मंत्री ने जोर देकर कहा कि झाझा क्षेत्र से उनका पुराना लगाव रहा है और यहां के विकास को गति देना उनकी शीर्ष प्राथमिकता होगी। उन्होंने यह भी बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार को विकास की नई दिशा दी है और वर्तमान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी उनके मार्गदर्शन में राज्य को आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं। पूरे समारोह के दौरान, समर्थकों ने मंत्री का फूल-मालाओं और तालियों के साथ भव्य स्वागत किया, जिससे पूरे कार्यक्रम में उत्साह और जश्न का माहौल बना रहा।1
- गायक राजेश रसीला ने अपनी संगीत प्रस्तुति के माध्यम से लालू जी का गुणगान किया। इस प्रस्तुति के दौरान, उन्होंने विशेष रूप से 1990 से पहले की स्थितियों को याद कराते हुए दर्शकों का ध्यान उस समय की ओर आकर्षित किया।1
- जैविक एवं प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से नीरज होटल में जैविक और प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में किसानों को पर्यावरण संरक्षण के महत्व के प्रति जागरूक किया गया।1
- शेखोपुरसराय प्रखंड के डोवाडीह गाँव के ग्रामीणों ने उत्पाद विभाग के उदासीन रवैया को लेकर सड़क जाम कर दिया। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि उत्पाद विभाग की मनमानी अब अपने चरम पर पहुँच चुकी है, जिसके विरोध में उन्हें यह कदम उठाना पड़ा है।1
- लखीसराय के रामगढ़ चौक प्रखंड स्थित शर्मा पंचायत के महादलित टोला में एक विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। यह शिविर राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकार (नालसा) नई दिल्ली और बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (बालसा) पटना के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा लगाया गया था। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य केंद्र और राज्य सरकार द्वारा अनुसूचित जाति (SC) एवं अनुसूचित जनजाति (ST) के शैक्षणिक उत्थान के लिए चलाई जा रही योजनाओं के क्रियान्वयन के बारे में जानकारी देना था। शिविर का आयोजन जिला विधिक सेवा प्राधिकार के अध्यक्ष सह प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सैयद मोहम्मद शब्बीर आलम और सचिव सह अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी विधानंद सागर के नेतृत्व में हुआ। इसकी अध्यक्षता प्राधिकार के पैनल अधिवक्ता सीतेश सुधांशु ने की, जबकि संचालन पारा विधिक स्वयंसेवक सुप्रिया कुमारी ने किया। पैनल अधिवक्ता सीतेश सुधांशु ने बताया कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति विभाग के तहत निदेशालय, बिहार राज्य अनुसूचित जाति सहकारिता विकास निगम लिमिटेड, बिहार महादलित विकास मिशन, बिहार राज्य अनुसूचित जनजाति शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान और समेकित थरूहट विकास अभिकरण के माध्यम से इन योजनाओं का क्रियान्वयन किया जाता है। विभाग SC-ST के सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक विकास के लिए अनेक योजनाएं संचालित करता है। श्री सुधांशु ने प्रमुख योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी, जिनमें प्रवेशिकोत्तर छात्रवृत्ति, विद्यालय छात्रवृत्ति, मुख्यमंत्री SC-ST मेधावृत्ति योजना, परीक्षा शुल्क प्रतिपूर्ति योजना, आवासीय विद्यालय छात्रावास योजना, मुख्यमंत्री SC-ST छात्रावास अनुदान योजना, छात्रावासों में खाद्यान्न आपूर्ति योजना, प्राक परीक्षा प्रशिक्षण केंद्र, मुख्यमंत्री सिविल सेवा प्रोत्साहन योजना, अत्याचार राहत, प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना, महादलित विकास योजना, धारा 275(1) के तहत आधारभूत संरचना विकास योजना, विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के विकास की योजना, धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान और थरूहट क्षेत्र विकास योजना शामिल हैं। उन्होंने विशेष रूप से प्रवेशिकोत्तर छात्रवृत्ति योजना पर प्रकाश डाला, जिसके तहत मान्यता प्राप्त कॉलेज, विश्वविद्यालय या संस्थान में पढ़ाई कर रहे SC-ST छात्र-छात्राओं को केंद्र सरकार के मापदंडों के अनुसार अनिवार्य शिक्षण शुल्क और शैक्षणिक भत्ता दिया जाता है। इस जागरूकता शिविर में महादलित परिवार के कई स्त्री, पुरुष और बच्चे मौजूद थे, जिन्होंने इन योजनाओं के बारे में जानकारी प्राप्त की। सभी ने यह संकल्प लिया कि वे पढ़-लिखकर इन योजनाओं का लाभ उठाएंगे और अपने जीवन में आगे बढ़ेंगे।1