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सड़क नहीं, भ्रष्टाचार की पटरी! आमला में निर्माण कार्य बना लूट का जरिया — अब प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल सड़क नहीं, भ्रष्टाचार की पटरी! आमला में निर्माण कार्य बना लूट का जरिया अब प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल बैतूल जिले के आमला विकासखंड अंतर्गत बोरदेही के समीप बामला–सोनार गोंदी मार्ग पर चल रहा सड़क निर्माण कार्य अब सीधे-सीधे प्रशासनिक लापरवाही और संभावित भ्रष्टाचार की ओर इशारा कर रहा है। ग्रामीणों की शिकायतों के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे, जिससे पूरे मामले में उनकी भूमिका संदेह के घेरे में आ गई है। स्थानीय लोगों के अनुसार ठेकेदार द्वारा बिना कंप्रेसर के ही सड़क पर गिट्टी बिछाई जा रही है। यह निर्माण मानकों का खुला उल्लंघन है। विशेषज्ञों का कहना है कि बिना कंप्रेसर सड़क की मजबूती संभव नहीं, ऐसे में यह सड़क पहली बारिश में ही जवाब दे सकती है। सबसे गंभीर सवाल उस तथाकथित पुल निर्माण को लेकर उठ रहा है, जो पूरी तरह समतल जमीन पर बना दिया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि यह अतिरिक्त भुगतान निकालने का तरीका है। आखिर जब जल निकासी या नाले का कोई अस्तित्व ही नहीं, तो पुल किस जरूरत के तहत बनाया गया? ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण स्थल पर न तो किसी विभागीय इंजीनियर की नियमित उपस्थिति दिखाई दे रही है और न ही गुणवत्ता की जांच। इससे स्पष्ट होता है कि या तो अधिकारियों ने आंख मूंद रखी है या फिर पूरा खेल उनकी मौन सहमति से चल रहा है। अब सवाल यह है कि करोड़ों रुपये के इस निर्माण कार्य की मॉनिटरिंग किस अधिकारी के जिम्मे है? क्या बिना तकनीकी स्वीकृति पुल बना दिया गया? क्या मटेरियल टेस्ट हुआ? और यदि नहीं हुआ, तो जिम्मेदार कौन? ग्रामीणों ने बैतूल जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे सड़क निर्माण की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, तकनीकी ऑडिट कराया जाए और दोषी ठेकेदार के साथ-साथ संबंधित अधिकारियों पर भी कड़ी कार्रवाई हो। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन और धरना प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे। यह मामला केवल सरकारी धन के दुरुपयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि आम जनता की जान–माल की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस “भ्रष्टाचार की सड़क” पर ब्रेक लगाता है या फिर हमेशा की तरह फाइलों में मामला दबा दिया जाएगा। जिले के आमला विकासखंड अंतर्गत बोरदेही के समीप बामला–सोनार गोंदी मार्ग पर चल रहा सड़क निर्माण कार्य अब सीधे-सीधे प्रशासनिक लापरवाही और संभावित भ्रष्टाचार की ओर इशारा कर रहा है। ग्रामीणों की शिकायतों के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे, जिससे पूरे मामले में उनकी भूमिका संदेह के घेरे में आ गई है। स्थानीय लोगों के अनुसार ठेकेदार द्वारा बिना कंप्रेसर के ही सड़क पर गिट्टी बिछाई जा रही है। यह निर्माण मानकों का खुला उल्लंघन है। विशेषज्ञों का कहना है कि बिना कंप्रेसर सड़क की मजबूती संभव नहीं, ऐसे में यह सड़क पहली बारिश में ही जवाब दे सकती है। सबसे गंभीर सवाल उस तथाकथित पुल निर्माण को लेकर उठ रहा है, जो पूरी तरह समतल जमीन पर बना दिया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि यह अतिरिक्त भुगतान निकालने का तरीका है। आखिर जब जल निकासी या नाले का कोई अस्तित्व ही नहीं, तो पुल किस जरूरत के तहत बनाया गया? ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण स्थल पर न तो किसी विभागीय इंजीनियर की नियमित उपस्थिति दिखाई दे रही है और न ही गुणवत्ता की जांच। इससे स्पष्ट होता है कि या तो अधिकारियों ने आंख मूंद रखी है या फिर पूरा खेल उनकी मौन सहमति से चल रहा है। अब सवाल यह है कि करोड़ों रुपये के इस निर्माण कार्य की मॉनिटरिंग किस अधिकारी के जिम्मे है? क्या बिना तकनीकी स्वीकृति पुल बना दिया गया? क्या मटेरियल टेस्ट हुआ? और यदि नहीं हुआ, तो जिम्मेदार कौन? ग्रामीणों ने बैतूल जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे सड़क निर्माण की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, तकनीकी ऑडिट कराया जाए और दोषी ठेकेदार के साथ-साथ संबंधित अधिकारियों पर भी कड़ी कार्रवाई हो। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन और धरना प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे। यह मामला केवल सरकारी धन के दुरुपयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि आम जनता की जान–माल की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस “भ्रष्टाचार की सड़क” पर ब्रेक लगाता है या फिर हमेशा की तरह फाइलों में मामला दबा दिया जाएगा।

7 hrs ago
user_जिला ब्यूरो बैतूल
जिला ब्यूरो बैतूल
Classified ads newspaper publisher बैतूल नगर, बैतूल, मध्य प्रदेश•
7 hrs ago
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सड़क नहीं, भ्रष्टाचार की पटरी! आमला में निर्माण कार्य बना लूट का जरिया — अब प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल सड़क नहीं, भ्रष्टाचार की पटरी! आमला में निर्माण कार्य बना लूट का जरिया अब प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल बैतूल जिले के आमला विकासखंड अंतर्गत बोरदेही के समीप बामला–सोनार गोंदी मार्ग पर चल रहा सड़क निर्माण कार्य अब सीधे-सीधे प्रशासनिक लापरवाही और संभावित भ्रष्टाचार की ओर इशारा कर रहा है। ग्रामीणों की शिकायतों के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे, जिससे पूरे मामले में उनकी भूमिका संदेह के घेरे में आ गई है। स्थानीय लोगों के अनुसार ठेकेदार द्वारा बिना कंप्रेसर के ही सड़क पर गिट्टी बिछाई जा रही है। यह निर्माण मानकों का खुला उल्लंघन है। विशेषज्ञों का कहना है कि बिना कंप्रेसर सड़क की मजबूती संभव नहीं, ऐसे में यह सड़क पहली बारिश में ही जवाब दे सकती है। सबसे गंभीर सवाल उस तथाकथित पुल निर्माण को लेकर उठ रहा है, जो पूरी तरह समतल जमीन पर बना दिया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि यह अतिरिक्त भुगतान निकालने का तरीका है। आखिर जब जल निकासी या नाले

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का कोई अस्तित्व ही नहीं, तो पुल किस जरूरत के तहत बनाया गया? ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण स्थल पर न तो किसी विभागीय इंजीनियर की नियमित उपस्थिति दिखाई दे रही है और न ही गुणवत्ता की जांच। इससे स्पष्ट होता है कि या तो अधिकारियों ने आंख मूंद रखी है या फिर पूरा खेल उनकी मौन सहमति से चल रहा है। अब सवाल यह है कि करोड़ों रुपये के इस निर्माण कार्य की मॉनिटरिंग किस अधिकारी के जिम्मे है? क्या बिना तकनीकी स्वीकृति पुल बना दिया गया? क्या मटेरियल टेस्ट हुआ? और यदि नहीं हुआ, तो जिम्मेदार कौन? ग्रामीणों ने बैतूल जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे सड़क निर्माण की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, तकनीकी ऑडिट कराया जाए और दोषी ठेकेदार के साथ-साथ संबंधित अधिकारियों पर भी कड़ी कार्रवाई हो। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन और धरना प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे। यह मामला केवल सरकारी धन के दुरुपयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि आम जनता की जान–माल की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। अब देखना यह है कि प्रशासन

इस “भ्रष्टाचार की सड़क” पर ब्रेक लगाता है या फिर हमेशा की तरह फाइलों में मामला दबा दिया जाएगा। जिले के आमला विकासखंड अंतर्गत बोरदेही के समीप बामला–सोनार गोंदी मार्ग पर चल रहा सड़क निर्माण कार्य अब सीधे-सीधे प्रशासनिक लापरवाही और संभावित भ्रष्टाचार की ओर इशारा कर रहा है। ग्रामीणों की शिकायतों के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे, जिससे पूरे मामले में उनकी भूमिका संदेह के घेरे में आ गई है। स्थानीय लोगों के अनुसार ठेकेदार द्वारा बिना कंप्रेसर के ही सड़क पर गिट्टी बिछाई जा रही है। यह निर्माण मानकों का खुला उल्लंघन है। विशेषज्ञों का कहना है कि बिना कंप्रेसर सड़क की मजबूती संभव नहीं, ऐसे में यह सड़क पहली बारिश में ही जवाब दे सकती है। सबसे गंभीर सवाल उस तथाकथित पुल निर्माण को लेकर उठ रहा है, जो पूरी तरह समतल जमीन पर बना दिया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि यह अतिरिक्त भुगतान निकालने का तरीका है। आखिर जब जल निकासी या नाले का कोई अस्तित्व ही नहीं, तो पुल किस जरूरत के तहत बनाया गया? ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण स्थल पर

न तो किसी विभागीय इंजीनियर की नियमित उपस्थिति दिखाई दे रही है और न ही गुणवत्ता की जांच। इससे स्पष्ट होता है कि या तो अधिकारियों ने आंख मूंद रखी है या फिर पूरा खेल उनकी मौन सहमति से चल रहा है। अब सवाल यह है कि करोड़ों रुपये के इस निर्माण कार्य की मॉनिटरिंग किस अधिकारी के जिम्मे है? क्या बिना तकनीकी स्वीकृति पुल बना दिया गया? क्या मटेरियल टेस्ट हुआ? और यदि नहीं हुआ, तो जिम्मेदार कौन? ग्रामीणों ने बैतूल जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे सड़क निर्माण की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, तकनीकी ऑडिट कराया जाए और दोषी ठेकेदार के साथ-साथ संबंधित अधिकारियों पर भी कड़ी कार्रवाई हो। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन और धरना प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे। यह मामला केवल सरकारी धन के दुरुपयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि आम जनता की जान–माल की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस “भ्रष्टाचार की सड़क” पर ब्रेक लगाता है या फिर हमेशा की तरह फाइलों में मामला दबा दिया जाएगा।

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  • बैतूल जिले के आमला विकासखंड अंतर्गत बोरदेही के समीप बामला–सोनार गोंदी मार्ग पर चल रहा सड़क निर्माण कार्य अब सीधे-सीधे प्रशासनिक लापरवाही और संभावित भ्रष्टाचार की ओर इशारा कर रहा है। ग्रामीणों की शिकायतों के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे, जिससे पूरे मामले में उनकी भूमिका संदेह के घेरे में आ गई है। स्थानीय लोगों के अनुसार ठेकेदार द्वारा बिना कंप्रेसर के ही सड़क पर गिट्टी बिछाई जा रही है। यह निर्माण मानकों का खुला उल्लंघन है। विशेषज्ञों का कहना है कि बिना कंप्रेसर सड़क की मजबूती संभव नहीं, ऐसे में यह सड़क पहली बारिश में ही जवाब दे सकती है। सबसे गंभीर सवाल उस तथाकथित पुल निर्माण को लेकर उठ रहा है, जो पूरी तरह समतल जमीन पर बना दिया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि यह अतिरिक्त भुगतान निकालने का तरीका है। आखिर जब जल निकासी या नाले का कोई अस्तित्व ही नहीं, तो पुल किस जरूरत के तहत बनाया गया? ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण स्थल पर न तो किसी विभागीय इंजीनियर की नियमित उपस्थिति दिखाई दे रही है और न ही गुणवत्ता की जांच। इससे स्पष्ट होता है कि या तो अधिकारियों ने आंख मूंद रखी है या फिर पूरा खेल उनकी मौन सहमति से चल रहा है। अब सवाल यह है कि करोड़ों रुपये के इस निर्माण कार्य की मॉनिटरिंग किस अधिकारी के जिम्मे है? क्या बिना तकनीकी स्वीकृति पुल बना दिया गया? क्या मटेरियल टेस्ट हुआ? और यदि नहीं हुआ, तो जिम्मेदार कौन? ग्रामीणों ने बैतूल जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे सड़क निर्माण की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, तकनीकी ऑडिट कराया जाए और दोषी ठेकेदार के साथ-साथ संबंधित अधिकारियों पर भी कड़ी कार्रवाई हो। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन और धरना प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे। यह मामला केवल सरकारी धन के दुरुपयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि आम जनता की जान–माल की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस “भ्रष्टाचार की सड़क” पर ब्रेक लगाता है या फिर हमेशा की तरह फाइलों में मामला दबा दिया जाएगा। जिले के आमला विकासखंड अंतर्गत बोरदेही के समीप बामला–सोनार गोंदी मार्ग पर चल रहा सड़क निर्माण कार्य अब सीधे-सीधे प्रशासनिक लापरवाही और संभावित भ्रष्टाचार की ओर इशारा कर रहा है। ग्रामीणों की शिकायतों के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे, जिससे पूरे मामले में उनकी भूमिका संदेह के घेरे में आ गई है। स्थानीय लोगों के अनुसार ठेकेदार द्वारा बिना कंप्रेसर के ही सड़क पर गिट्टी बिछाई जा रही है। यह निर्माण मानकों का खुला उल्लंघन है। विशेषज्ञों का कहना है कि बिना कंप्रेसर सड़क की मजबूती संभव नहीं, ऐसे में यह सड़क पहली बारिश में ही जवाब दे सकती है। सबसे गंभीर सवाल उस तथाकथित पुल निर्माण को लेकर उठ रहा है, जो पूरी तरह समतल जमीन पर बना दिया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि यह अतिरिक्त भुगतान निकालने का तरीका है। आखिर जब जल निकासी या नाले का कोई अस्तित्व ही नहीं, तो पुल किस जरूरत के तहत बनाया गया? ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण स्थल पर न तो किसी विभागीय इंजीनियर की नियमित उपस्थिति दिखाई दे रही है और न ही गुणवत्ता की जांच। इससे स्पष्ट होता है कि या तो अधिकारियों ने आंख मूंद रखी है या फिर पूरा खेल उनकी मौन सहमति से चल रहा है। अब सवाल यह है कि करोड़ों रुपये के इस निर्माण कार्य की मॉनिटरिंग किस अधिकारी के जिम्मे है? क्या बिना तकनीकी स्वीकृति पुल बना दिया गया? क्या मटेरियल टेस्ट हुआ? और यदि नहीं हुआ, तो जिम्मेदार कौन? ग्रामीणों ने बैतूल जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे सड़क निर्माण की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, तकनीकी ऑडिट कराया जाए और दोषी ठेकेदार के साथ-साथ संबंधित अधिकारियों पर भी कड़ी कार्रवाई हो। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन और धरना प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे। यह मामला केवल सरकारी धन के दुरुपयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि आम जनता की जान–माल की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस “भ्रष्टाचार की सड़क” पर ब्रेक लगाता है या फिर हमेशा की तरह फाइलों में मामला दबा दिया जाएगा।
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    बैतूल जिले के आमला विकासखंड अंतर्गत बोरदेही के समीप बामला–सोनार गोंदी मार्ग पर चल रहा सड़क निर्माण कार्य अब सीधे-सीधे प्रशासनिक लापरवाही और संभावित भ्रष्टाचार की ओर इशारा कर रहा है। ग्रामीणों की शिकायतों के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे, जिससे पूरे मामले में उनकी भूमिका संदेह के घेरे में आ गई है।
स्थानीय लोगों के अनुसार ठेकेदार द्वारा बिना कंप्रेसर के ही सड़क पर गिट्टी बिछाई जा रही है। यह निर्माण मानकों का खुला उल्लंघन है। विशेषज्ञों का कहना है कि बिना कंप्रेसर सड़क की मजबूती संभव नहीं, ऐसे में यह सड़क पहली बारिश में ही जवाब दे सकती है।
सबसे गंभीर सवाल उस तथाकथित पुल निर्माण को लेकर उठ रहा है, जो पूरी तरह समतल जमीन पर बना दिया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि यह अतिरिक्त भुगतान निकालने का तरीका है। आखिर जब जल निकासी या नाले का कोई अस्तित्व ही नहीं, तो पुल किस जरूरत के तहत बनाया गया?
ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण स्थल पर न तो किसी विभागीय इंजीनियर की नियमित उपस्थिति दिखाई दे रही है और न ही गुणवत्ता की जांच। इससे स्पष्ट होता है कि या तो अधिकारियों ने आंख मूंद रखी है या फिर पूरा खेल उनकी मौन सहमति से चल रहा है।
अब सवाल यह है कि करोड़ों रुपये के इस निर्माण कार्य की मॉनिटरिंग किस अधिकारी के जिम्मे है? क्या बिना तकनीकी स्वीकृति पुल बना दिया गया? क्या मटेरियल टेस्ट हुआ? और यदि नहीं हुआ, तो जिम्मेदार कौन?
ग्रामीणों ने बैतूल जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे सड़क निर्माण की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, तकनीकी ऑडिट कराया जाए और दोषी ठेकेदार के साथ-साथ संबंधित अधिकारियों पर भी कड़ी कार्रवाई हो। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन और धरना प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।
यह मामला केवल सरकारी धन के दुरुपयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि आम जनता की जान–माल की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस “भ्रष्टाचार की सड़क” पर ब्रेक लगाता है या फिर हमेशा की तरह फाइलों में मामला दबा दिया जाएगा। जिले के आमला विकासखंड अंतर्गत बोरदेही के समीप बामला–सोनार गोंदी मार्ग पर चल रहा सड़क निर्माण कार्य अब सीधे-सीधे प्रशासनिक लापरवाही और संभावित भ्रष्टाचार की ओर इशारा कर रहा है। ग्रामीणों की शिकायतों के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे, जिससे पूरे मामले में उनकी भूमिका संदेह के घेरे में आ गई है।
स्थानीय लोगों के अनुसार ठेकेदार द्वारा बिना कंप्रेसर के ही सड़क पर गिट्टी बिछाई जा रही है। यह निर्माण मानकों का खुला उल्लंघन है। विशेषज्ञों का कहना है कि बिना कंप्रेसर सड़क की मजबूती संभव नहीं, ऐसे में यह सड़क पहली बारिश में ही जवाब दे सकती है।
सबसे गंभीर सवाल उस तथाकथित पुल निर्माण को लेकर उठ रहा है, जो पूरी तरह समतल जमीन पर बना दिया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि यह अतिरिक्त भुगतान निकालने का तरीका है। आखिर जब जल निकासी या नाले का कोई अस्तित्व ही नहीं, तो पुल किस जरूरत के तहत बनाया गया?
ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण स्थल पर न तो किसी विभागीय इंजीनियर की नियमित उपस्थिति दिखाई दे रही है और न ही गुणवत्ता की जांच। इससे स्पष्ट होता है कि या तो अधिकारियों ने आंख मूंद रखी है या फिर पूरा खेल उनकी मौन सहमति से चल रहा है।
अब सवाल यह है कि करोड़ों रुपये के इस निर्माण कार्य की मॉनिटरिंग किस अधिकारी के जिम्मे है? क्या बिना तकनीकी स्वीकृति पुल बना दिया गया? क्या मटेरियल टेस्ट हुआ? और यदि नहीं हुआ, तो जिम्मेदार कौन?
ग्रामीणों ने बैतूल जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे सड़क निर्माण की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, तकनीकी ऑडिट कराया जाए और दोषी ठेकेदार के साथ-साथ संबंधित अधिकारियों पर भी कड़ी कार्रवाई हो। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन और धरना प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।
यह मामला केवल सरकारी धन के दुरुपयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि आम जनता की जान–माल की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस “भ्रष्टाचार की सड़क” पर ब्रेक लगाता है या फिर हमेशा की तरह फाइलों में मामला दबा दिया जाएगा।
    user_जिला ब्यूरो बैतूल
    जिला ब्यूरो बैतूल
    Classified ads newspaper publisher बैतूल नगर, बैतूल, मध्य प्रदेश•
    7 hrs ago
  • डब्लू सीएल कर्मचारी की मौत ट्रक ने मारी टक्कर सोमवार रात की घटना
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    डब्लू सीएल कर्मचारी की मौत ट्रक ने मारी टक्कर सोमवार रात की घटना
    user_Namdev gujre Khabar bhart news
    Namdev gujre Khabar bhart news
    पत्रकार घोड़ा डोंगरी, बैतूल, मध्य प्रदेश•
    7 hrs ago
  • आमला तहसील के वार्ड क्रमांक 2 तिलक वार्ड में वार्ड वासियो को मुलभुत की सुविधा नहीं मिल पा रही हैं. जिससे नाराज होकर वार्ड वासी ने आमला सीएमओ को ज्ञापन सौपा हैं। सुविधा देने की मांग की हैं ताकि वार्ड वासी सुविधा मिल सके।
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    आमला तहसील के वार्ड क्रमांक 2 तिलक वार्ड में वार्ड वासियो को मुलभुत की सुविधा नहीं मिल पा रही हैं. जिससे नाराज होकर वार्ड वासी ने आमला सीएमओ को ज्ञापन सौपा हैं। सुविधा देने की मांग की हैं ताकि वार्ड वासी सुविधा मिल सके।
    user_AMLA NEWS
    AMLA NEWS
    पत्रकार आमला, बैतूल, मध्य प्रदेश•
    19 hrs ago
  • बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के ग्रह नगर में टिचिंग ग्राउंड विवाद, वार्डवासियो नें सड़क जाम कर किया प्रदर्शन। मध्यप्रदेश बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के ग्रह नगर बैतूल में टिंचिंग ग्राउंड का मामला तूल पकड़ रहा है,बैतूल के गऊठाना इलाके में बने टिंचिंग ग्राउंड की बदबू और प्रदूषण से परेशान वार्डवासियो नें सड़क जाम कर जोरदार प्रदर्शन किया। बताया जा रहा है टिंचिंग ग्राउंड से परेशान वार्डवासियों नें कचरा वाहन के जाने वाले मार्ग कों अवरुद्ध कर जोरदार विरोध प्रदर्शन करते हुए,आंदोलन तेज करने के संकेत दिए है। प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि जब तक नगर पालिका यहाँ से पूरी तरह से कचरा नहीं हटाती तब तक समस्या का समाधान नहीं होगा। टिंचिंग ग्राउंड का विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि पूरे शहर का कचरा लाकर यहाँ डाला जा रहा है, जिसकी बदबू और प्रदुषण से बीमारिया फैल रही है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष और बैतूल विधायक हेमंत खंडेलवाल ने पूर्व में कचरे के निष्पादन और अपशिष्ट प्रबंधन के लिए करीब तीन करोड़ रुपए के ठेके की जांच के निर्देश दिए थे, जिसके बाद कचरा उठाने की प्रक्रिया प्रारम्भ हुई थी लेकिन यहाँ से पूरा कचरा नहीं उठाया गया न ही जांच रिपोर्ट कों सार्वजनिक किया गया।
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    बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के ग्रह नगर में टिचिंग ग्राउंड विवाद, वार्डवासियो नें सड़क जाम कर किया प्रदर्शन।
मध्यप्रदेश बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के ग्रह नगर बैतूल में टिंचिंग ग्राउंड का मामला तूल पकड़ रहा है,बैतूल के गऊठाना इलाके में बने टिंचिंग ग्राउंड की बदबू और प्रदूषण से परेशान वार्डवासियो नें सड़क जाम कर जोरदार प्रदर्शन किया।
बताया जा रहा है टिंचिंग ग्राउंड से परेशान वार्डवासियों नें कचरा वाहन के जाने वाले मार्ग कों अवरुद्ध कर जोरदार विरोध प्रदर्शन करते हुए,आंदोलन तेज करने के संकेत दिए है।
प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि जब तक नगर पालिका यहाँ से पूरी तरह से कचरा नहीं हटाती तब तक समस्या का  समाधान नहीं होगा।
टिंचिंग ग्राउंड का विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि पूरे शहर का कचरा लाकर यहाँ डाला जा रहा है, जिसकी बदबू और प्रदुषण से बीमारिया फैल रही है।
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष और बैतूल विधायक हेमंत खंडेलवाल ने पूर्व में कचरे के निष्पादन और अपशिष्ट प्रबंधन के लिए करीब तीन करोड़ रुपए के ठेके की जांच के निर्देश दिए थे, जिसके बाद कचरा उठाने की प्रक्रिया प्रारम्भ हुई थी लेकिन यहाँ से पूरा कचरा नहीं उठाया गया न ही 
जांच रिपोर्ट कों सार्वजनिक किया गया।
    user_M. Afsar khan
    M. Afsar khan
    Local News Reporter मुलताई, बैतूल, मध्य प्रदेश•
    3 hrs ago
  • हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर ग्रहण की भोजन महाप्रसादी । भैंसदेही भैंसदेही ब्लॉक अंतर्गत ग्राम गुदगांव (चिल्कापुर) के प्रसिद्ध रामेश्वरम शिव धाम मंदिर में गत 11 फरवरी 2026 से शुरू हुई शिवपुराण एवं रुद्र महायज्ञ सप्ताह का समापन हर्षोल्लास के वातावरण में हवन, पूजन एवं भोजन महाप्रसादी के साथ संपन्न हुआ। जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भोजन महाप्रसादी ग्रहण की। पूरे सप्ताह पं. अविनाश खंडाग्रे जी के मुखारबिंद से शिवपुराण की कथा का बड़ी संख्या में श्रद्धालुओ ने पूरे मन से श्रवण कर अपने जीवन को सार्थक बनाने हेतू कार्यक्रम में बढ़ चढ़कर भाग लिया। इस दौरान संपूर्ण क्षेत्र धर्ममय बना रहा। रामेश्वरम शिवधाम मंदीर समिति चिल्कापुर के सभी सदस्यों ने ग्राम वासियों के सहयोग से कार्यक्रम को सफलता प्रदान करने में अहम भूमिका अदा की। सप्ताह भर चले इस धार्मिक अनुष्ठान में प्रतिदिन कथा प्रवचन श्रवण करने हेतू ग्राम चिल्कापुर व गुदगांव के ग्रामवासियों सहित आसपास क्षेत्र के श्रद्धालुओं ने भी बड़ी संख्या में भाग लेकर पुण्य लाभ अर्जित किया। रामेश्वरम शिवधाम मंदिर समिति के सभी सदस्यों ने इस धार्मिक अनुष्ठान को सफल बनाने हेतु दिए गए सहयोग एवं समयदान के लिए समस्त ग्रामवासियों एवं क्षेत्रवासियों के प्रति आभार जताया। हर्ष और उल्लास के वातावरण में हवन, पूजन एवं भोजन महाप्रसादी के साथ सफलता पूर्वक कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।
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    हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर ग्रहण की भोजन महाप्रसादी ।
भैंसदेही
भैंसदेही ब्लॉक अंतर्गत ग्राम गुदगांव (चिल्कापुर) के प्रसिद्ध रामेश्वरम शिव धाम मंदिर में गत 11 फरवरी 2026 से शुरू हुई शिवपुराण एवं रुद्र महायज्ञ सप्ताह का समापन हर्षोल्लास के वातावरण में  हवन, पूजन एवं भोजन महाप्रसादी के साथ संपन्न हुआ। जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भोजन महाप्रसादी ग्रहण की। पूरे सप्ताह पं. अविनाश खंडाग्रे जी के मुखारबिंद से शिवपुराण की कथा का बड़ी संख्या में श्रद्धालुओ ने पूरे मन से श्रवण कर अपने जीवन को सार्थक बनाने हेतू कार्यक्रम में बढ़ चढ़कर भाग लिया। इस दौरान संपूर्ण क्षेत्र धर्ममय बना रहा। रामेश्वरम  शिवधाम मंदीर समिति चिल्कापुर के सभी सदस्यों ने ग्राम वासियों के सहयोग से कार्यक्रम को सफलता प्रदान करने में अहम भूमिका अदा की। सप्ताह भर चले इस धार्मिक अनुष्ठान में प्रतिदिन कथा प्रवचन श्रवण करने हेतू ग्राम चिल्कापुर व गुदगांव के ग्रामवासियों सहित आसपास क्षेत्र के श्रद्धालुओं ने भी बड़ी संख्या में भाग लेकर पुण्य लाभ अर्जित किया। रामेश्वरम शिवधाम मंदिर समिति के सभी सदस्यों ने इस धार्मिक अनुष्ठान को सफल बनाने हेतु दिए गए सहयोग एवं समयदान के लिए समस्त ग्रामवासियों एवं क्षेत्रवासियों के प्रति आभार जताया। हर्ष और उल्लास के वातावरण में हवन, पूजन एवं भोजन महाप्रसादी के साथ सफलता पूर्वक कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।
    user_MANISH RATHORE mp news
    MANISH RATHORE mp news
    पत्रकार Bhainsdehi, Betul•
    3 hrs ago
  • आठनेर विकासखण्ड क्षेत्र के ग्राम सावंगी से दर्जन भर ग्रामीण थाना आठनेर पहुंचे जहां उन्होंने ग्राम की शासकीय भूमि पर अवैध निर्माण को रोकने और कड़ी कार्रवाई करने थाना प्रभारी को ज्ञापन सौंपा। दरअसल ग्रामीणों ने बताया कि महिला माकोडे की निजी भूमि होते हुए पंचायत को ग़लत जानकारी देते हुए शासकीय भूमि का पट्टा बनाकर वहां प्रधानमंत्री आवास योजना अंतर्गत मकान बना रही है ग्रामीणों ने आपत्ति जताते हुए कहा कि ग्राम की शासकीय भूमि अन्य निर्माण कार्यों के लिए है उन्होंने अधिकारियों और थाना प्रभारी को आवेदन सौंपकर निर्माण कार्य रूकवाने की मांग कि है।
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    आठनेर विकासखण्ड क्षेत्र के ग्राम सावंगी से दर्जन भर ग्रामीण थाना आठनेर पहुंचे जहां उन्होंने ग्राम की शासकीय भूमि पर अवैध निर्माण को रोकने और कड़ी कार्रवाई करने थाना प्रभारी को ज्ञापन सौंपा। दरअसल ग्रामीणों ने बताया कि महिला माकोडे की निजी भूमि होते हुए पंचायत को ग़लत जानकारी देते हुए शासकीय भूमि का पट्टा बनाकर वहां प्रधानमंत्री आवास योजना अंतर्गत मकान बना रही है ग्रामीणों ने आपत्ति जताते हुए कहा कि ग्राम की शासकीय भूमि अन्य निर्माण कार्यों के लिए है उन्होंने अधिकारियों और थाना प्रभारी को आवेदन सौंपकर निर्माण कार्य रूकवाने की मांग कि है।
    user_Vinod Kanathe
    Vinod Kanathe
    पत्रकारिता आठनेर, बैतूल, मध्य प्रदेश•
    18 hrs ago
  • मैक्रों और मोदी गेटवे ऑफ इंडिया पर, वीर सावरकर का क़िस्सा सुनाया मोदीजी ने, हरदीप पुरी किसे बचा रहे पूछा पवन खेड़ा ने, नेटफ्लिक्स हो, यूट्यूब हो, फेसबुक हो या व्हाट्सएप भारत के कानून का पालन करना ही पड़ेगा और शिवपाल का आरोप फॉर्म 7 सरकार ही छपवाकर बंटवा रही... देखिए देश दुनिया की छ बड़ी खबरें राजपथ न्यूज़ पर....
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    मैक्रों और मोदी गेटवे ऑफ इंडिया पर, वीर सावरकर का क़िस्सा सुनाया मोदीजी ने, हरदीप पुरी किसे बचा रहे पूछा पवन खेड़ा ने, नेटफ्लिक्स हो, यूट्यूब हो, फेसबुक हो या व्हाट्सएप भारत के कानून का पालन करना ही पड़ेगा और शिवपाल का आरोप फॉर्म 7 सरकार ही छपवाकर बंटवा रही... देखिए देश दुनिया की छ बड़ी खबरें राजपथ न्यूज़ पर....
    user_Rajpath News
    Rajpath News
    पत्रकार Prabhatpattan, Betul•
    6 hrs ago
  • बैतूल के कोठी बाजार क्षेत्र में स्थापित राष्ट्रीय प्रतीक अशोक स्तंभ को नगर पालिका द्वारा बिना किसी लिखित आदेश और स्वीकृति के हटाए जाने से विवाद खड़ा हो गया है। इसे लेकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि अशोक स्तंभ राष्ट्रीय अस्मिता और जनभावना का प्रतीक है, वहीं स्थानीय लोगों ने इसे क्षेत्र का ऐतिहासिक केंद्र बिंदु बताया। कांग्रेस ने इस कार्रवाई को असंवैधानिक बताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।
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    बैतूल के कोठी बाजार क्षेत्र में स्थापित राष्ट्रीय प्रतीक अशोक स्तंभ को नगर पालिका द्वारा बिना किसी लिखित आदेश और स्वीकृति के हटाए जाने से विवाद खड़ा हो गया है। इसे लेकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि अशोक स्तंभ राष्ट्रीय अस्मिता और जनभावना का प्रतीक है, वहीं स्थानीय लोगों ने इसे क्षेत्र का ऐतिहासिक केंद्र बिंदु बताया। कांग्रेस ने इस कार्रवाई को असंवैधानिक बताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।
    user_जिला ब्यूरो बैतूल
    जिला ब्यूरो बैतूल
    Classified ads newspaper publisher बैतूल नगर, बैतूल, मध्य प्रदेश•
    8 hrs ago
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