उत्तर प्रदेश के बांदा जनपद स्थित नरैनी तहसील क्षेत्र के खलारी और जरर में केन नदी में अवैध खनन के गंभीर आरोप सामने आए हैं। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि खनन पट्टों पर निर्धारित नियमों का उल्लंघन करते हुए नदी की जलधारा के बीच तक भारी मशीनें उतारकर खनन कार्य कराया जा रहा है। इस अनियंत्रित गतिविधि से पर्यावरणीय नियमों का खुला उल्लंघन हो रहा है, जिससे नदी के जलीय जीव-जंतुओं के अस्तित्व पर भी मंडरा रहा खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि खदान संचालक निर्धारित सीमा क्षेत्र से बाहर भी खनन कार्य करा रहे हैं। उनकी शिकायत है कि केन नदी की मुख्य जलधारा में प्रतिबंधित भारी पोकलैंड मशीनों का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि विभिन्न पर्यावरणीय नियमों के तहत ऐसे कार्यों पर पूरी तरह प्रतिबंध है। लोगों ने इस मामले में प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं, यह कहते हुए कि लंबे समय से जारी इन अवैध खनन गतिविधियों के बावजूद संबंधित विभागों द्वारा कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है। जानकारी के अनुसार, खलारी खनन पट्टा 10 फरवरी 2026 से 9 फरवरी 2031 तक तथा जरर खनन पट्टा 11 मार्च 2026 से 10 दिसंबर 2026 तक वैध रूप से संचालित है। स्थानीय लोगों ने नरैनी एसडीएम, खनिज विभाग और जिला प्रशासन से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने की पुरजोर मांग की है। हालांकि, प्रशासनिक अधिकारियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
उत्तर प्रदेश के बांदा जनपद स्थित नरैनी तहसील क्षेत्र के खलारी और जरर में केन नदी में अवैध खनन के गंभीर आरोप सामने आए हैं। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि खनन पट्टों पर निर्धारित नियमों का उल्लंघन करते हुए नदी की जलधारा के बीच तक भारी मशीनें उतारकर खनन कार्य कराया जा रहा है। इस अनियंत्रित गतिविधि से पर्यावरणीय नियमों का खुला उल्लंघन हो रहा है, जिससे नदी के जलीय जीव-जंतुओं के अस्तित्व पर भी मंडरा रहा खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि खदान संचालक निर्धारित सीमा क्षेत्र से बाहर भी खनन कार्य करा रहे हैं। उनकी शिकायत है कि केन नदी की मुख्य जलधारा में प्रतिबंधित भारी पोकलैंड मशीनों का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि विभिन्न पर्यावरणीय नियमों के तहत ऐसे कार्यों पर पूरी तरह प्रतिबंध है। लोगों ने इस मामले में प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं, यह कहते हुए कि लंबे समय से जारी इन अवैध खनन गतिविधियों के बावजूद संबंधित विभागों द्वारा कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है। जानकारी के अनुसार, खलारी खनन पट्टा 10 फरवरी 2026 से 9 फरवरी 2031 तक तथा जरर खनन पट्टा 11 मार्च 2026 से 10 दिसंबर 2026 तक वैध रूप से संचालित है। स्थानीय लोगों ने नरैनी एसडीएम, खनिज विभाग और जिला प्रशासन से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने की पुरजोर मांग की है। हालांकि, प्रशासनिक अधिकारियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
- उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में एक रोडवेज की चलती बस में एक महिला के जेवर चोरी हो गए। इस घटना के बाद पीड़ितों ने सिविल लाइन पुलिस चौकी पहुँचकर प्रभारी से गुहार लगाई है।1
- बांदा में विकास की आड़ में शहर की पहचान बन चुके 80 वर्ष पुराने बरगद, पीपल और नीम के वृक्षों को काटने की तैयारी से जनता में भारी आक्रोश है। पल्हरी रोड पर पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलने की खबर फैलते ही शनिवार को छात्र, समाजसेवी और आम नागरिक घरों से निकलकर सड़कों पर उतर आए। छात्रों ने पेड़ों को बचाने के लिए मानव श्रृंखला बनाई, वहीं आम नागरिकों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन्हें 'विकास चाहिए, लेकिन विनाश की कीमत पर नहीं'। नागरिकों ने इस बात पर सवाल उठाया कि जब सड़क पहले से चौड़ी है और नाली व बिजली के खंभों के लिए पर्याप्त जगह मौजूद है, तब इन वृक्षों को आखिर क्यों निशाना बनाया जा रहा है। विरोध प्रदर्शन के दौरान तीखी प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं, जिसमें व्यंग्यात्मक ढंग से कहा गया कि शायद बरगद मुफ्त छाया देने, पीपल वर्षों से ऑक्सीजन बांटने या नीम धरती को मजबूती देने के कारण दोषी ठहराए जा रहे हैं। सबसे बड़ा व्यंग्य तो यह है कि अधिकारी कटान का कोई आदेश न होने की बात कह रहे हैं, जिस पर जनता ने पूछा कि फिर कुल्हाड़ी किसकी अनुमति से चली। वरिष्ठ पूर्व छात्र नेता रितेश त्रिपाठी ने शहर के बढ़ते तापमान पर चिंता जताते हुए पेड़ों को काटना 'आग पर घी डालने जैसा' बताया, और वातानुकूलित कमरों में बैठकर फैसले लेने वालों पर सवाल उठाए जिन्हें 48-50 डिग्री की तपिश महसूस नहीं होती। छात्र नेता अमित यादव और शमशेर यादव ने चेतावनी दी है कि यदि पेड़ों के कटान पर स्थायी रोक नहीं लगाई गई, तो छात्र सड़कों पर उतरकर व्यापक विरोध प्रदर्शन करेंगे। यह चेतावनी सिर्फ प्रशासन को नहीं, बल्कि उस सोच को भी है जो हरियाली को विकास की राह का रोड़ा मानती है। फिलहाल पल्हरी रोड पर पेड़ों के कटान पर अस्थायी रोक लगा दी गई है, लेकिन यह सवाल अभी भी कायम है कि क्या बांदा अपने बरगद बचा पाएगा, या फिर आने वाली पीढ़ियां केवल इतिहास की किताबों में पढ़ेंगी कि यहाँ कभी पेड़ हुआ करते थे। लोगों ने जोर देकर कहा कि पेड़ कटते हैं तो सिर्फ लकड़ी नहीं गिरती, बल्कि एक शहर की सांसें टूटती हैं, एक पीढ़ी की छांव छिनती है, और विकास के नाम पर इंसान अपनी ही कब्र के लिए धूप इकट्ठा करता है। इस दौरान पूरा बांदा कुल्हाड़ी के सामने दीवार बन गया और पल्हरी रोड पर बरगद और पीपल के पक्ष में जनसैलाब उमड़ पड़ा।1
- पुलिस अधीक्षक मृगांक शेखर पाठक के निर्देशन और कोतवाली प्रभारी संतोष सिंह की अध्यक्षता में मौदहा पुलिस ने कस्बे में कानून एवं शांति व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने के उद्देश्य से पैदल गश्त की। इस गश्त के दौरान पुलिस टीम ने मुख्य मार्गों, सार्वजनिक स्थलों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों का भ्रमण कर लोगों में सुरक्षा का भाव जागृत किया। यह विशेष गश्त मोहर्रम पर्व को देखते हुए की गई थी। पुलिस टीम ने विभिन्न इमामबाड़ों का निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लिया और आयोजकों से संवाद कर आवश्यक निर्देश दिए। इस दौरान पुलिस अधिकारियों ने लोगों से शांति एवं सौहार्द बनाए रखने की अपील भी की। पैदल गश्त में क्राइम इंस्पेक्टर चंद्रशेखर गौतम, वरिष्ठ उपनिरीक्षक अभिषेक त्रिवेदी सहित भारी संख्या में पुलिस बल मौजूद रहा। पुलिस की इस सक्रियता से क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लोगों में विश्वास का माहौल देखा गया।1
- बिहार के भोजपुर जिले में चर्चित भरत भूषण तिवारी के कथित फर्जी एनकाउंटर का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। इसी क्रम में सोमवार को हमीरपुर मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट परिसर में अखिल भारतीय ब्राह्मण एकता परिषद के बैनर तले ब्राह्मण समाज के लोगों ने एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने इस घटना की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग उठाई। प्रदर्शन के दौरान, बड़ी संख्या में एकत्र हुए परिषद के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने भरत भूषण तिवारी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए दो मिनट का मौन रखा। वक्ताओं ने घटना को संदिग्ध परिस्थितियों में हुई बताया और इसकी उच्चस्तरीय तथा निष्पक्ष जांच कराने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि सच्चाई सामने आ सके और पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके। प्रदर्शन के बाद, परिषद के एक प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा। इस ज्ञापन में मांग की गई कि मामले में शामिल दोषी अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए, साथ ही पीड़ित परिवार को सुरक्षा और उचित न्याय सुनिश्चित किया जाए। कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई तो संगठन एक व्यापक आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होगा। इस अवसर पर अखिल भारतीय ब्राह्मण एकता परिषद के पदाधिकारी, कार्यकर्ता और ब्राह्मण समाज के अनेक लोग उपस्थित रहे।2
- देशभर में सड़क और एक्सप्रेसवे नेटवर्क को मजबूत करने के उद्देश्य से कई परियोजनाओं पर लगातार काम जारी है। इन नए एक्सप्रेसवे के निर्माण से यात्रा के समय में कमी आने, कनेक्टिविटी में सुधार होने और व्यापारिक गतिविधियों को भी गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। विशेषज्ञ इस पहल को देश के बुनियादी ढाँचे के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं।1
- उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में चलती रोडवेज बस में चोरी की एक वारदात सामने आई है, जहाँ एक महिला के बैग से पचास हज़ार रुपये कीमत के चांदी के जेवरात पार कर दिए गए। दयाशंकर तिवारी अपनी बहू को फतेहपुर जनपद ले जा रहे थे, तभी चोरों ने चलती बस में यह घटना अंजाम दी। इस घटना के बाद, पीड़ित दयाशंकर तिवारी अपनी बहू के साथ सिविल लाइन पुलिस चौकी कार्यालय पहुँचे। उन्होंने सिविल लाइन पुलिस चौकी प्रभारी को लिखित शिकायत पत्र सौंपकर इस मामले में कार्रवाई करने और न्याय दिलाने की मांग की है।4
- दो बाइकों के बीच एक जोरदार आमने-सामने की टक्कर में कुल चार लोग घायल हो गए। हादसे में घायल हुए सभी व्यक्ति दोनों बाइकों पर सवार थे।1