मध्य प्रदेश के डबरा (ग्वालियर) स्थित बिलौआ के क्रेशर मार्केट में एक मुनीम के साथ मारपीट और पिस्टल लगाकर धमकाने का मामला सामने आया है। पीड़ित कमलेश जाटव ने आरोप लगाया है कि ग्वालियर निवासी गगन कमरिया नामक व्यक्ति ने उसके साथ मारपीट की और पिस्टल से धमकाया। यह घटना बीती रात को हुई, जब मुनीम कमलेश पुत्र जगन्नाथ जाटव खदान में था और मशीन खराब होने पर गगन कमरिया ने उसके साथ मारपीट की। बाद में जब कमलेश सनी ग्रेनाइट पर पहुंचा, तो गगन वहां भी आया और पिस्टल दिखाकर उसे धमकाया। अन्य लोगों के आने पर आरोपी वहां से चला गया। बिलौआ क्षेत्र काली गिट्टी के अवैध खनन के लिए पूरे जिले में जाना जाता है, जहां एक सौ से अधिक वैध और अवैध खदानें संचालित होती हैं और अक्सर वर्चस्व को लेकर विवाद होते रहते हैं। यह घटना भी इसी पृष्ठभूमि में हुई है। पीड़ित ने घटना की जानकारी अपने मालिक को दी, जिसके बाद वे उसे लेकर बिलौआ थाने पहुंचे। पुलिस ने उसका मेडिकल तो कराया, लेकिन पीड़ित का आरोप है कि वह तीन घंटे से अधिक समय तक थाने में बैठा रहा और पुलिस ने न तो उसकी कोई सुनवाई की और न ही कोई अपराध दर्ज किया। इस संबंध में, एडिशनल एसपी देहात जय राज कुबेर ने बताया है कि खदान पर हुई घटना की जानकारी ली जा रही है और मामले की जांच की जा रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जांच के बाद जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
मध्य प्रदेश के डबरा (ग्वालियर) स्थित बिलौआ के क्रेशर मार्केट में एक मुनीम के साथ मारपीट और पिस्टल लगाकर धमकाने का मामला सामने आया है। पीड़ित कमलेश जाटव ने आरोप लगाया है कि ग्वालियर निवासी गगन कमरिया नामक व्यक्ति ने उसके साथ मारपीट की और पिस्टल से धमकाया। यह घटना बीती रात को हुई, जब मुनीम कमलेश पुत्र जगन्नाथ जाटव खदान में था और मशीन खराब होने पर गगन कमरिया ने उसके साथ मारपीट की। बाद में जब कमलेश सनी ग्रेनाइट पर पहुंचा, तो
गगन वहां भी आया और पिस्टल दिखाकर उसे धमकाया। अन्य लोगों के आने पर आरोपी वहां से चला गया। बिलौआ क्षेत्र काली गिट्टी के अवैध खनन के लिए पूरे जिले में जाना जाता है, जहां एक सौ से अधिक वैध और अवैध खदानें संचालित होती हैं और अक्सर वर्चस्व को लेकर विवाद होते रहते हैं। यह घटना भी इसी पृष्ठभूमि में हुई है। पीड़ित ने घटना की जानकारी अपने मालिक को दी, जिसके बाद वे उसे लेकर बिलौआ थाने पहुंचे। पुलिस ने उसका मेडिकल तो
कराया, लेकिन पीड़ित का आरोप है कि वह तीन घंटे से अधिक समय तक थाने में बैठा रहा और पुलिस ने न तो उसकी कोई सुनवाई की और न ही कोई अपराध दर्ज किया। इस संबंध में, एडिशनल एसपी देहात जय राज कुबेर ने बताया है कि खदान पर हुई घटना की जानकारी ली जा रही है और मामले की जांच की जा रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जांच के बाद जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
- मध्य प्रदेश के डबरा (ग्वालियर) स्थित बिलौआ के क्रेशर मार्केट में एक मुनीम के साथ मारपीट और पिस्टल लगाकर धमकाने का मामला सामने आया है। पीड़ित कमलेश जाटव ने आरोप लगाया है कि ग्वालियर निवासी गगन कमरिया नामक व्यक्ति ने उसके साथ मारपीट की और पिस्टल से धमकाया। यह घटना बीती रात को हुई, जब मुनीम कमलेश पुत्र जगन्नाथ जाटव खदान में था और मशीन खराब होने पर गगन कमरिया ने उसके साथ मारपीट की। बाद में जब कमलेश सनी ग्रेनाइट पर पहुंचा, तो गगन वहां भी आया और पिस्टल दिखाकर उसे धमकाया। अन्य लोगों के आने पर आरोपी वहां से चला गया। बिलौआ क्षेत्र काली गिट्टी के अवैध खनन के लिए पूरे जिले में जाना जाता है, जहां एक सौ से अधिक वैध और अवैध खदानें संचालित होती हैं और अक्सर वर्चस्व को लेकर विवाद होते रहते हैं। यह घटना भी इसी पृष्ठभूमि में हुई है। पीड़ित ने घटना की जानकारी अपने मालिक को दी, जिसके बाद वे उसे लेकर बिलौआ थाने पहुंचे। पुलिस ने उसका मेडिकल तो कराया, लेकिन पीड़ित का आरोप है कि वह तीन घंटे से अधिक समय तक थाने में बैठा रहा और पुलिस ने न तो उसकी कोई सुनवाई की और न ही कोई अपराध दर्ज किया। इस संबंध में, एडिशनल एसपी देहात जय राज कुबेर ने बताया है कि खदान पर हुई घटना की जानकारी ली जा रही है और मामले की जांच की जा रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जांच के बाद जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।3
- कानपुर में मोबाइल चोरी के आरोप में पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर दो युवकों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी के बाद पुलिस इन दोनों युवकों के साथ फोटो और वीडियो बनवाने लगी। इसी दौरान एक युवक ने डिब्बा पकड़ने से इनकार करते हुए कहा, "जब मैंने चोरी ही नहीं की, तो डिब्बा कैसे पकड़ लें?" हालांकि, एसीएन भारत इस वीडियो की पुष्टि नहीं करता है।1
- ग्वालियर के थाना जनकगंज में तैनात एक सहायक उपनिरीक्षक (ASI) का एक संदिग्ध वीडियो वायरल हुआ है। इस वीडियो में ASI कैमरे से बचते हुए कुछ रुपए गिनते नजर आ रहे हैं, जिस पर पुलिस के आला अधिकारियों ने कड़ा संज्ञान लिया है। इस पूरे मामले पर पुलिस महानिरीक्षक (IG) ग्वालियर रेंज ने स्पष्ट किया है कि किसी भी स्तर का अधिकारी हो, यदि उसका संदिग्ध आचरण उसके कार्यक्षेत्र में दिखता है और गुपचुप लेन-देन की आशंका होती है, तो उसे बिल्कुल भी नहीं बख्शा जाएगा, चाहे वह किसी भी रैंक का क्यों न हो। उन्होंने संबंधित नगर पुलिस अधीक्षक को इस मामले में निष्पक्ष और विस्तृत जांच करने के निर्देश दिए हैं, ताकि ऐसी किसी भी प्रवृत्ति को कतई बर्दाश्त न किया जा सके।1
- दतिया जिले के पंडोखर थाना पुलिस ने अपराधियों के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई की है।1
- दतिया जिले में मंगलवार, 23 जून 2026 को न्यू कलेक्ट्रेट के सभाकक्ष में जनसुनवाई आयोजित की गई, जहाँ कलेक्टर श्री स्वप्निल वानखड़े ने विभिन्न अंचलों से आए 170 से अधिक आवेदकों की समस्याओं को सुना। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को त्वरित निराकरण के निर्देश दिए, और अनिर्णित आवेदनों के लिए समय-सीमा निर्धारित की। जनसुनवाई में पलोथर निवासी ठाकुरदास पुत्र बदली यादव ने गांव के आम रास्ते पर सिरोवन यादव द्वारा अतिक्रमण करने की शिकायत की, जिस पर कलेक्टर ने तहसीलदार दतिया को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए। वहीं, ग्राम सनाई निवासी जसमंत सिंह पुत्र गुलान सिंह ने अपने नाती की पढ़ाई के लिए जमा एफडी तुड़वाने संबंधी आवेदन दिया। जनसुनवाई के दौरान रास्ता अवरुद्ध करने, नाली के पानी की निकासी, वृद्धावस्था पेंशन, सीमांकन, नामांतरण, बटवारा, बीपीएल सूची में नाम जुड़वाने, सड़क निर्माण, साफ-सफाई व्यवस्था, खाद्यान वितरण, आर्थिक सहायता और छात्रवृत्ति जैसे कई अन्य आवेदन भी प्राप्त हुए। कलेक्टर ने इनमें से कुछ समस्याओं का मौके पर ही निराकरण किया और शेष के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए। इस जनसुनवाई में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत दतिया श्री अक्षय कुमार तेम्रवाल और अपर कलेक्टर श्री महेन्द्र सिंह कवचे सहित सभी जिला अधिकारी मौजूद रहे। इसी क्रम में, दतिया जिले के ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती प्रदान करते हुए दुरसड़ा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) के नव स्थापित डिलीवरी पॉइंट पर 26 साल बाद पहली बार सफल प्रसव कराया गया। इसमें एक स्वस्थ बच्ची का जन्म हुआ और जच्चा-बच्चा दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं। यह उपलब्धि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल नेतृत्व में राज्य शासन की जनकल्याणकारी स्वास्थ्य नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन का परिणाम मानी जा रही है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं सशक्त हुई हैं। दुरसड़ा पीएचसी में डिलीवरी पॉइंट का शुभारंभ 5 जून 2026 को कलेक्टर श्री स्वप्निल वानखड़े और एसडीएम श्री लोकेन्द्र सरल द्वारा किया गया था, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र की गर्भवती महिलाओं को उनके नजदीक सुरक्षित, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण प्रसूति सेवाएं उपलब्ध कराना है। इस सफल प्रसव के बाद अब क्षेत्र की महिलाओं को प्रसव के लिए दूरस्थ अस्पतालों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। दुरसड़ा पीएचसी के अंतर्गत 9 सब सेंटर संचालित हैं, जो लगभग 70 गांवों की 40 हजार आबादी को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करते हैं। यहां प्रतिवर्ष लगभग 880 गर्भवती महिलाओं और 800 बच्चों को स्वास्थ्य सेवाओं से लाभान्वित करने का लक्ष्य है, और वर्तमान में 144 गर्भवती महिलाओं का पंजीयन अनमोल पोर्टल पर किया जा चुका है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य संरक्षण हेतु विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं, जिसमें मॉडरेट एनीमिया से प्रभावित गर्भवती महिलाओं को आयरन सुक्रोज उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। कलेक्टर श्री स्वप्निल वानखड़े के निर्देशानुसार, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. बी.के. वर्मा ने क्षेत्रीय नागरिकों से संस्थागत प्रसव को प्राथमिकता देने और दुरसड़ा पीएचसी में उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं का अधिकतम लाभ उठाने की अपील की है, क्योंकि सुरक्षित मातृत्व और स्वस्थ शिशु ही स्वस्थ समाज की मजबूत नींव हैं।1
- मध्य प्रदेश के दतिया जिले की भांडेर तहसील के ग्राम बड़ेरा सोपान से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सरकारी योजनाओं और जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्राम बड़ेरा सोपान का एक गरीब युवक वर्षों से पक्के मकान की आस लगाए बैठा है, लेकिन रहने के लिए सुरक्षित मकान न होने के कारण वह दर-दर भटकने को मजबूर है। युवक का आरोप है कि उसने कई बार संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई है, लेकिन आज तक उसकी समस्या का समाधान नहीं हो सका। उसकी आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर है कि वह स्वयं मकान बनवाने में भी सक्षम नहीं है। बरसात और गर्मी के मौसम में उसे भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है, और आवेदन देने तथा अधिकारियों के चक्कर लगाने के बावजूद उसे कोई राहत नहीं मिली है। उसने प्रधानमंत्री आवास योजना और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने की मांग को लेकर ग्राम पंचायत से लेकर जनपद पंचायत और तहसील स्तर तक अपील की, पर समस्या जस की तस बनी हुई है। इस स्थिति को देखते हुए ग्रामीणों का कहना है कि सरकार भले ही गरीबों को आवास उपलब्ध कराने के बड़े-बड़े दावे करती हो, लेकिन जमीनी स्तर पर कई पात्र हितग्राही आज भी ऐसी योजनाओं के लाभ से वंचित हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर जिम्मेदार अधिकारी और पंचायत प्रतिनिधि इस मामले में कब तक चुप्पी साधे रहेंगे। यह युवक अब अपने आशियाने की उम्मीद लगाए प्रशासन की ओर देख रहा है, और खबर प्रसारित होने के बाद यह देखना होगा कि प्रशासन उसकी समस्या को कितनी गंभीरता से लेता है और उसे मकान उपलब्ध कराने की दिशा में क्या कदम उठाता है। जरूरत इस बात की है कि जिम्मेदार अधिकारी मामले की जांच कर पात्रता के अनुसार शीघ्र मदद सुनिश्चित करें।1
- ग्वालियर के निवासियों को एक महत्वपूर्ण चेतावनी जारी की गई है, जिसमें भीख देने से पहले व्यक्ति की पहचान सुनिश्चित करने पर ज़ोर दिया गया है। इस सलाह के तहत, लोगों से विशेष रूप से यह आग्रह किया गया है कि वे नशे की लत वाले व्यक्तियों को पैसे न दें। इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दान की गई मदद केवल सही और सच्चे ज़रूरतमंदों तक ही पहुँचे, ताकि उनका अधिकार किसी भी तरह से छिनने न पाए। सभी से ऐसे लोगों से सावधान रहने की हिदायत दी गई है।1
- इंदरगढ़ क्षेत्र में ग्वालियर रोड पर स्थित राजीव नगर मोड़ के आगे सड़क पर फैली गिट्टी और रेत लोगों की जान के लिए एक बड़ा खतरा बन गई है। यह स्थिति पिछले लगभग एक सप्ताह से बनी हुई है, लेकिन संबंधित विभाग ने इसे हटाने या इस ओर ध्यान देने के लिए अब तक कोई कदम नहीं उठाया है। गोराघाट और उचाड़ की दिशा से आने वाले दोपहिया वाहन चालकों को रोजाना इस गंभीर समस्या का सामना करना पड़ रहा है। सड़क के मोड़ पर बिखरी इस गिट्टी और रेत के कारण बाइक सवारों का संतुलन बिगड़ रहा है, जिससे कई लोग दुर्घटनाओं का शिकार हो चुके हैं। दुर्घटनाग्रस्त लोगों का स्पष्ट कहना है कि यही कारण है कि उनके वाहन असंतुलित हो रहे हैं और लगातार हादसे हो रहे हैं। इस समस्या से स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और दोपहिया वाहन चालकों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। लोगों ने प्रशासन से तत्काल सड़क से गिट्टी और रेत को हटाने की मांग की है, ताकि किसी बड़े और गंभीर हादसे को होने से रोका जा सके। फिलहाल, यह सवाल जस का तस बना हुआ है कि प्रशासन इस जानलेवा समस्या पर कब ध्यान देगा और लोगों को इस खतरे से कब मुक्ति मिलेगी।1