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नेत्र शिविर 10 APR ग्राम पंचायत भवन शाहपुर और जल गंगा संवर्धन अभियान विशाल नेत्र शिविर का आयोजन 10 अप्रैल को शाहपुर ग्राम पंचायत भवन पर किया जा रहा है अतः जनता जनार्दन से हमारी अपील है कि लोग अपने नेत्र का इलाज कराए और लाभ प्राप्त करें। हमारा संपर्क नंबर है 7354 896 479
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नेत्र शिविर 10 APR ग्राम पंचायत भवन शाहपुर और जल गंगा संवर्धन अभियान विशाल नेत्र शिविर का आयोजन 10 अप्रैल को शाहपुर ग्राम पंचायत भवन पर किया जा रहा है अतः जनता जनार्दन से हमारी अपील है कि लोग अपने नेत्र का इलाज कराए और लाभ प्राप्त करें। हमारा संपर्क नंबर है 7354 896 479
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- ✍️रीवा ब्यरो चीफ रिप्पू पाण्डेय✍️ 📌 बड़ी खबर : रीवा में शिक्षा माफिया का तांडव: NCERT तो बस झांकी है, असली खेल तो 'कमीशन' वाली प्राइवेट किताबों का बाकी है! रीवा। मध्य प्रदेश सरकार के 'सस्ती शिक्षा' के दावे विंध्य की धरती पर दम तोड़ते नजर आ रहे हैं। कागजों पर NCERT का आदेश चलता है, लेकिन हकीकत में बुक डिपो की रसीदें अभिभावकों का गला रेत रही हैं। रीवा के निजी स्कूलों और पुस्तक विक्रेताओं के बीच ऐसा 'अपवित्र गठबंधन' हुआ है, जिसने शिक्षा को ज्ञान का मंदिर नहीं, बल्कि लूट का अड्डा बना दिया है। 📌 बजट पर भारी 'बस्ता': रीवा के स्कूलों में पढ़ाई नहीं, अभिभावकों की जेब की 'सर्जरी' हो रही है! 📉 दावों की पोल खोलती 'लूट वाली रसीद' हाल ही में कक्षा नर्सरी से 12वीं के विद्यार्थियों की जो रसीदें सामने आई हैं, वे जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े करती हैं: दिखावे की NCERT: रसीद में मात्र एक-दो किताबें NCERT की हैं, ताकि कागजी कार्रवाई पूरी रहे। निजी प्रकाशकों का बोलबाला: अंग्रेजी, गणित और सामाजिक विज्ञान जैसे मुख्य विषयों के लिए निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें थोपी गई हैं, जिनकी कीमत सरकारी किताबों से कई गुना अधिक है। हजारों का बिल: बिना कॉपी, रफ रजिस्टर और स्टेशनरी के ही बिल का आंकड़ा 3,000 से 5,000 रुपये के पार जा रहा है। 🤝 स्कूल और बुक डिपो का 'कमीशन वाला खेल' सरकारी नियमों को धता बताते हुए स्कूलों ने कुछ खास बुक डिपो को ही अधिकृत कर रखा है। अभिभावकों के पास कोई विकल्प नहीं बचता; या तो वे भारी भरकम बिल चुकाएं या अपने बच्चे का भविष्य दांव पर लगा दें। "नियम केवल भाषणों में हैं, हकीकत में तो शिक्षा एक महंगा सौदा बन चुकी है। शासन की चुप्पी इस मिलीभगत को और बल दे रही है।" अंधेर नगरी, चौपट राजा: रसीदें चिल्ला रही हैं लूट की कहानी, क्या रीवा का शिक्षा विभाग बेच चुका है अपनी नैतिकता? ❓ सुलगते सवाल: जब शासन का स्पष्ट निर्देश है कि स्कूल केवल NCERT की किताबें ही चलाएंगे, तो निजी प्रकाशकों की एंट्री कैसे हुई? क्या शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारी इन रसीदों को देखने के बाद भी 'कुंभकर्णी नींद' में सोए रहेंगे? क्या रीवा का जिला प्रशासन इन मनमाने पुस्तक विक्रेताओं पर बुलडोजर वाली कार्रवाई करेगा या अभिभावक यूं ही लुटते रहेंगे? विंध्य युग की चेतावनी: अगर वक्त रहते इस 'किताब माफिया' पर लगाम नहीं कसी गई, तो आम आदमी के लिए अपने बच्चों को पढ़ाना एक सपना बनकर रह जाएगा। नियम किताबों में बंद हैं और लूट खुले बाजार में जारी है। अब देखना यह है कि प्रशासन जागता है या लूट का यह सिलसिला ऐसे ही चलता रहेगा। सरकारी दावे 'हवा-हवाई': रीवा में बुक डिपो बने 'वसूली केंद्र', शिक्षा के नाम पर सरेआम डकैती!1
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