कैंचीमोड़ टनल की समानांतर टनल बनकर तैयार, जल्द इस टनल में दौड़ेंगे वाहन कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन पर कैंचीमोड़ टनल-1 में समानांतर टनल बनकर पूरी तरह से तैयार हो गई है। जल्द ही इस समानांतर टनल में भी वाहनों की आवाजाही होगी। नेशनल हाईवे ऑथरिटी ऑफ इंडिया की ओर से 15 दिनों के भीतर इस टनल पर वाहनों की आवाजाही शुरू करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसका कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन से गुजरने वाले प्रदेश के अलावा अन्य बाहरी राज्यों के वाहन चालकों को भी मिलेगा। इस टनल की समानांतर टनल शुरू होने के चलते वाहन चालकों को बड़ी राहत मिली है। नेशनल हाईवे ऑथरिटी ऑफ इंडिया के अधिकारियों ने मंगलवार को फोरलेन का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उच्च अधिकारियों द्वारा संबधित अधिकारियों को निर्देश भी दिए। वहीं, बताया जा रहा है कि कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन पर कैंचीमोड़ टनल नंबर-1 की समानांतर टनल करीब 1800 मीटर लंबी है। इस टनल पर करीब 280 करोड़ की राशि खर्च की गई है। अधिकतर यहां पर सिंगल टनल होने के चलते जहां कई दफा हादसे घटित होते थे, वहीं हादसे के चलते जाम की स्थिति भी बन जाती थी। लेकिन इस तरह के झंझट से वाहन चालकों को यहां पर राहत मिलेगी। नेशनल हाईवे ऑथरिटी ऑफ इंडिया द्वारा इस समानांतर टनल के निर्माण को लेकर लगातार प्रयास किए गए। जिसके चलते यह प्रयास सराहनीय रहे हैं। अब यहां पर दूसरी समानांतर टनल के शुरू होने से एक टनल से वाहन एक दिशा में जाएंगे, जबकि दूसरी टनल से विपरीत दिशा में आवाजाही होगी। इससे ट्रैफिक का दबाव कम होगा और सफर भी फोरलेन पर ज्यादा सुरक्षित होगा। नेशनल हाईवे ऑथरिटी ऑफ इंडिया के अधिकारियों की मानें तो इस टनल को आधुनिक सुरक्षा मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है, जिसमें वेंटिलेशन सिस्टम, फायर सेफ्टी, लाइटिंग और इमरजेंसी एग्जिट जैसी सुविधाएं शामिल हैं। हालांकि वर्तमान में कैंचीमोड़ की इस टनल से गुजरना वाहन चालकों के लिए किसी समस्या से कम नहीं है। इस टनल में वेंटिलेनशन नहीं होने के चलते यहां पर धूल मिट्टी से वाहन चालकों को परेशानी भी झेलनी पड़ती है। लेकिन अब समानांतर टनल शुरू होने के बाद इससे भी वाहन चालकों को राहत मिलेगी। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश को जोडऩे वाला महत्वपूर्ण मार्ग है। टनल नंबर-1 की दूसरी लेन शुरू होने से पर्यटन, व्यापार और मालवाहक वाहनों की आवाजाही को बड़ा लाभ मिलेगा। खासकर मंडी, कुल्लू, मनाली और लाहौल-स्पीति जाने वाले वाहन चालकों को अब अधिक सुगम और सुरक्षित सफर मिल सकेगा। एनएचएआई द्वारा तकनीकी और सुरक्षा जांच पूरी होने के बाद इस टनल को खोल दिया जाएगा।
कैंचीमोड़ टनल की समानांतर टनल बनकर तैयार, जल्द इस टनल में दौड़ेंगे वाहन कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन पर कैंचीमोड़ टनल-1 में समानांतर टनल बनकर पूरी तरह से तैयार हो गई है। जल्द ही इस समानांतर टनल में भी वाहनों की आवाजाही होगी। नेशनल हाईवे ऑथरिटी ऑफ इंडिया की ओर से 15 दिनों के भीतर इस टनल पर वाहनों की आवाजाही शुरू करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसका कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन से गुजरने वाले प्रदेश के अलावा अन्य बाहरी राज्यों के वाहन चालकों को भी मिलेगा। इस टनल की समानांतर टनल शुरू होने के चलते वाहन चालकों को बड़ी राहत मिली है। नेशनल हाईवे ऑथरिटी ऑफ इंडिया के अधिकारियों ने मंगलवार को फोरलेन का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उच्च अधिकारियों द्वारा संबधित अधिकारियों को निर्देश भी दिए। वहीं, बताया जा रहा है कि कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन पर कैंचीमोड़ टनल नंबर-1 की समानांतर टनल करीब 1800 मीटर लंबी है। इस टनल पर करीब 280 करोड़ की राशि खर्च की गई है। अधिकतर यहां पर सिंगल टनल होने के चलते जहां कई दफा हादसे घटित होते थे, वहीं हादसे के चलते जाम की स्थिति भी बन जाती थी। लेकिन इस तरह के झंझट से वाहन चालकों को यहां पर राहत मिलेगी। नेशनल हाईवे ऑथरिटी ऑफ इंडिया द्वारा इस समानांतर टनल के निर्माण को लेकर लगातार प्रयास किए गए। जिसके चलते यह प्रयास सराहनीय रहे हैं। अब यहां पर दूसरी समानांतर टनल के शुरू होने से एक टनल से वाहन एक दिशा में जाएंगे, जबकि दूसरी टनल से विपरीत दिशा में आवाजाही होगी। इससे ट्रैफिक का दबाव कम होगा और सफर भी फोरलेन पर ज्यादा सुरक्षित होगा। नेशनल हाईवे ऑथरिटी ऑफ इंडिया के अधिकारियों की मानें तो इस टनल को आधुनिक सुरक्षा मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है, जिसमें वेंटिलेशन सिस्टम, फायर सेफ्टी, लाइटिंग और इमरजेंसी एग्जिट जैसी सुविधाएं शामिल हैं। हालांकि वर्तमान में कैंचीमोड़ की इस टनल से गुजरना वाहन चालकों के लिए किसी समस्या से कम नहीं है। इस टनल में वेंटिलेनशन नहीं होने के चलते यहां पर धूल मिट्टी से वाहन चालकों को परेशानी भी झेलनी पड़ती है। लेकिन अब समानांतर टनल शुरू होने के बाद इससे भी वाहन चालकों को राहत मिलेगी। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश को जोडऩे वाला महत्वपूर्ण मार्ग है। टनल नंबर-1 की दूसरी लेन शुरू होने से पर्यटन, व्यापार और मालवाहक वाहनों की आवाजाही को बड़ा लाभ मिलेगा। खासकर मंडी, कुल्लू, मनाली और लाहौल-स्पीति जाने वाले वाहन चालकों को अब अधिक सुगम और सुरक्षित सफर मिल सकेगा। एनएचएआई द्वारा तकनीकी और सुरक्षा जांच पूरी होने के बाद इस टनल को खोल दिया जाएगा।
- हमीरपुर भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेत्री उषा बिरला ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा कि इन दिनों आरडीजी (Revenue Deficit Grant – राजस्व घाटा अनुदान) को लेकर अनावश्यक भ्रम फैलाया जा रहा है। आरडीजी वह राशि होती है, जो केंद्र सरकार राज्यों की आय और खर्चों के बीच अंतर की भरपाई के लिए जारी करती है। उन्होंने कहा कि जब देश में नए राज्यों का गठन हुआ था, तब उनके पास आय के पर्याप्त संसाधन नहीं थे। ऐसे में केंद्र सरकार ने वित्त आयोग के माध्यम से इन राज्यों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से आरडीजी की व्यवस्था की। यह एक अल्पकालिक व्यवस्था थी, जिसे लंबे समय तक जारी नहीं रखा जा सकता। उषा बिरला ने कहा कि 16वें वित्त आयोग ने हिमाचल प्रदेश सहित देश के 15 राज्यों की आरडीजी समाप्त कर दी है। इनमें से अधिकांश राज्य भाजपा शासित हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी हमेशा राष्ट्रहित में निर्णय लेते हैं, न कि किसी विशेष पार्टी के पक्ष या विपक्ष में। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश को छोड़कर इन सभी 15 राज्यों ने अपने-अपने प्रदेशों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ठोस प्रयास शुरू कर दिए हैं, जबकि हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार आज भी केवल रोना रोने और कानूनी पहलुओं पर विचार करने तक सीमित है। उषा बिरला ने कहा कि कांग्रेस सरकार एक ओर यह दावा कर रही है कि उसने अपनी 10 गारंटियां पूरी कर दी हैं— हर महिला को ₹1500 प्रतिमाह, ₹2 किलो गोबर की खरीद, ₹100 लीटर दूध की खरीद, और हर वर्ष युवाओं को एक लाख रोजगार। अगर ये सभी दावे सही हैं, तो इससे यही सिद्ध होता है कि हिमाचल प्रदेश पहले से ही आत्मनिर्भर बन चुका है। लेकिन वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है। उन्होंने आरोप लगाया कि 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस सरकार अपनी तथाकथित गारंटियों को केंद्र सरकार के खर्च पर पूरा करना चाहती है। आज हिमाचल प्रदेश की जनता कांग्रेस सरकार के कुप्रबंधन से बेहद परेशान है। उषा बिरला ने हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार को सलाह दी कि वह अपने फालतू खर्चों में कटौती करे और प्रदेश को वास्तव में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में गंभीर प्रयास करे। अंत में उन्होंने कहा, “मैं प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का धन्यवाद करती हूं, जो सदैव राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हैं।”1
- टैक्स डेवोल्यूशन में ₹14 हजार करोड़, रेलवे विस्तार को ₹3 हजार करोड़, फोरलेन व सड़क परियोजनाओं में ऐतिहासिक निवेश : भाजपा प्रदेश अध्यक्ष शिमला। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री और मंत्रीगण केंद्रीय बजट को लेकर हिमाचल की जनता के समक्ष गलत आंकड़े प्रस्तुत कर उन्हें बरगलाने का जो प्रयास कर रहे हैं, वह अत्यंत निंदनीय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र की मोदी सरकार ने केंद्रीय बजट में हिमाचल प्रदेश के विकास को सुनिश्चित करने के लिए बेहतरीन प्रावधान किए हैं और प्रदेश को लगातार बढ़ती सहायता प्रदान की जा रही है। डॉ. बिंदल ने कहा कि इस वर्ष हिमाचल को टैक्स डेवोल्यूशन के तहत लगभग ₹14 हजार करोड़ की राशि दी गई है, जो पिछले बजट की तुलना में लगभग ₹2500 करोड़ अधिक है। यह हिमाचल की जनता को प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाने वाला कदम है। उन्होंने बताया कि हिमाचल में इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती देने हेतु लगभग ₹3 हजार करोड़ रेलवे विस्तार के लिए स्वीकृत किए गए हैं। इसके अतिरिक्त हिमाचल प्रदेश में 2700 किलोमीटर फोरलेन हाईवे का निर्माण केंद्रीय बजट के माध्यम से किया जा रहा है, जिस पर लगभग ₹40 हजार करोड़ का कार्य चल रहा है। डॉ. बिंदल ने कहा कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, सीआरएफ और बीआरओ द्वारा बनाई जा रही सड़कों के लिए अलग से लगभग ₹10 हजार करोड़ का अतिरिक्त प्रावधान है। स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्रों के लिए भी अलग बजट सुनिश्चित किया गया है। वर्ष 2020 से 2026 तक हिमाचल को लगभग ₹8 हजार करोड़ की विशेष सहायता दी गई, जिसमें से ₹1200 करोड़ गत वर्ष उपलब्ध करवाए गए। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि प्रदेश सरकार पिछले सवा तीन–साढ़े तीन वर्षों से कार्य रोक कर बैठी है और अपनी नाकामियों का दोष केंद्र सरकार पर डालने में जुटी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने अब नया नेरेटिव गढ़ना शुरू कर दिया है—“रात को सपना आता है और सुबह ₹50 हजार करोड़ की मांग खड़ी हो जाती है।” डॉ. बिंदल ने सवाल किया कि आपदा के समय प्रदेश सरकार को लगभग ₹6 हजार करोड़ मिले, वह कहां गया? एक लाख के लगभग पक्के मकान मिले, उसमें बंदरबांट हुई—प्रदेश की जनता इसका जवाब चाहती है। उन्होंने कहा कि क्या प्रदेश सरकार धरना प्रदर्शन और भूख हड़ताल करने के लिए सत्ता में बैठी है? उन्होंने बताया कि वबी-जीराम जी योजना में ₹95 हजार करोड़ का प्रावधान किया गया है, जो मनरेगा के प्रावधान से लगभग ₹15 हजार करोड़ अधिक है। मनरेगा की पिछली देनदारियों के लिए ₹30 हजार करोड़ का प्रावधान किया गया है, लेकिन प्रदेश सरकार मनरेगा कार्यों पर कुंडली मारकर बैठी है और अपना हिस्सा नहीं दे रही। डॉ. बिंदल ने कहा कि ग्रामीण विकास, पंचायती राज और शहरी विकास के लिए केंद्रीय बजट में अलग से धन का व्यापक प्रावधान है, इसके बावजूद प्रदेश सरकार केवल यही कहकर पल्ला झाड़ रही है कि केंद्र ने पैसा नहीं दिया। उन्होंने कहा कि इस बजट में केंद्र सरकार ने हिमाचल को फार्मा हब बनाने की घोषणा की है, जो रोजगार और उद्योग के लिए बड़ा अवसर है, लेकिन प्रदेश सरकार इसका स्वागत करने की बजाय नकारात्मक रवैया अपना रही है। बल्क ड्रग पार्क मोदी सरकार ने दिया, कांग्रेस सरकार ने उसे ठुकराया। डॉ. बिंदल ने कहा कि केवल नकारात्मक दृष्टिकोण से प्रदेश का हित नहीं होने वाला। प्रदेश सरकार को समझना चाहिए कि केंद्र सरकार हिमाचल को हर क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए निरंतर सहायता प्रदान कर रही है और जनता को गुमराह करना कांग्रेस की विफल राजनीति है।1
- ऊना। एकल नारी कृषि सहकारी सभा घालुवाल की ओर से मंगलवार को एमसी पार्क ऊना में एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता संगठन की प्रधान कांता शर्मा ने की। बैठक में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आईं एकल नारियों ने बढ़-चढक़र हिस्सा लिया और अपनी सामाजिक, आर्थिक व पारिवारिक समस्याओं को लेकर खुलकर विचार-विमर्श किया। बैठक के दौरान एकल नारियों की समस्याओं और उनके समाधान को लेकर चर्चा की गई। इस अवसर पर संस्था की ओर से अपनी मांगों के समर्थन में उपायुक्त ऊना जतिन लाल को एक ज्ञापन सौंपा गया। प्रधान कांता शर्मा ने कहा कि एकल नारियां समाज में अनेक प्रकार की चुनौतियों का सामना कर रही हैं। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता ही इन समस्याओं से बाहर निकलने का सशक्त माध्यम है। जीवन के लंबे अनुभवों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यदि महिलाएं स्वावलंबी बनें तो कठिन से कठिन परिस्थितियों का सामना करना आसान हो जाता है। संस्था की पदाधिकारियों ने एकमत होकर मांग उठाई कि एकल नारियों के डीसी कार्ड बनाए जाएं, ताकि जिन महिलाओं की दो बेटियां हैं उन्हें सरकारी सहायता का लाभ मिल सके। इसके साथ ही जिन पात्र महिलाओं के पास बीपीएल कार्ड नहीं हैं, लेकिन उन्हें सिलाई कढ़ाई कार्य के लिए मशीनों की आवश्यकता है, उनके लिए आय प्रमाण पत्र के आधार पर सुविधाएं प्रदान की जाएं।1
- बीजेपी ने चुनाव जीतने के लिए हिंदू–मुस्लिम का ज़हर घोला, और सत्ता में आते ही नीति के नाम पर सौदेबाज़ी शुरू कर दी। एक तरफ़ हज़ारों करोड़ की योजनाओं का बँटवारा, दूसरी तरफ़ सवर्ण/सामान्य समाज के बच्चों के गले में UGC Act की फाँस। ये न सुधार है, न न्याय— ये वोट लेकर भविष्य गिरवी रखने की राजनीति है। मेहनत करने वालों को कानून, और तुष्टिकरण को खज़ाना— यही है बीजेपी का दोहरा चेहरा। मोदी है तो मुमकिन है… एक ही समाज से बार-बार वोट, और उसी समाज पर बार-बार वार। अब सवाल साफ़ है— चुप रहोगे या जवाब दोगे? हिमाचल जागेगा, तभी UGC गिरेगा। — रूमीत सिंह ठाकुर अध्यक्ष, राष्ट्रीय देवभूमि पार्टी #BiasThakur #UGCRollBack #HimachalPradesh #Himachal #शिक्षा_पर_वार_नहीं_सहेगा_हिमाचल #समान_नीति_समान_न्याय1
- सुजानपुर चौकी जमवाला में निर्माणाधीन वर्षाशालिका के कार्य में सामने आई गंभीर अनियमितताओं ने सरकारी तंत्र और ठेकेदारी व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। माननीय विधायक कैप्टन रणजीत सिंह ने मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य का औचक निरीक्षण किया, जहां गुणवत्ता में भारी कमी पाए जाने पर उनका आक्रोश साफ तौर पर देखने को मिला। निरीक्षण के दौरान यह खुलासा हुआ कि ठेकेदार द्वारा निर्माण में पुरानी और पहले से इस्तेमाल की जा चुकी टीन का प्रयोग किया जा रहा था, जो न केवल निर्माण मानकों का उल्लंघन है बल्कि सरकारी धन के खुलेआम दुरुपयोग का भी प्रमाण है। विधायक ने मौके पर ही अधिकारीयों से बात कर ऐसे घटिया निर्माण को तुरंत उखाड़ने के सख्त निर्देश जारी किए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जनता की गाढ़ी कमाई से बनने वाले कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही, भ्रष्टाचार या धोखाधड़ी को उनके कार्यकाल में बिल्कुल भी सहन नहीं किया जाएगा। विधायक का कहना था कि वर्षाशालिका जैसी बुनियादी सुविधा ग्रामीण जनता की आवश्यकता है और इसमें गुणवत्ता से समझौता करना सीधे-सीधे जनता के अधिकारों पर हमला है। निरीक्षण के दौरान विधायक कैप्टन रणजीत सिंह ने कहा कि सरकारी पैसा किसी ठेकेदार की निजी संपत्ति नहीं है, बल्कि यह जनता की अमानत है। उन्होंने दो टूक कहा, “सरकारी धन की एक-एक पाई का सही उपयोग होना चाहिए। जो भी व्यक्ति या ठेकेदार इस धन का दुरुपयोग करेगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, चाहे वह कितना ही प्रभावशाली क्यों न हो।” विधायक के इस बयान से यह साफ हो गया कि अब ठेकेदारी व्यवस्था में मनमानी और मिलीभगत को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। विधायक ने यह भी कहा कि पूर्व में सत्ता के संरक्षण में कई ठेकेदार घटिया सामग्री का इस्तेमाल कर सरकारी धन की लूट करते रहे हैं, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। जनता ने उन्हें सुजानपुर विधानसभा क्षेत्र की जिम्मेदारी पारदर्शिता, ईमानदारी और जवाबदेही के लिए सौंपी है, न कि भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के लिए। उन्होंने साफ कहा कि यदि कोई ठेकेदार पुराने ढर्रे पर काम करने की कोशिश करेगा तो उसे परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना होगा। इस दौरान विधायक ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि निर्माण कार्यों की नियमित निगरानी की जाए। विधायक ने कहा कि केवल ठेकेदार ही नहीं, बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी अनियमितताओं की पुनरावृत्ति न हो। स्थानीय जनता ने विधायक के इस सख्त और आक्रामक रुख का स्वागत किया। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय बाद किसी जनप्रतिनिधि ने मौके पर आकर निर्माण कार्य की वास्तविक स्थिति देखी और घटिया काम के खिलाफ खुलकर आवाज उठाई। लोगों में इस बात को लेकर संतोष है कि अब विकास कार्य केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि उनकी गुणवत्ता पर भी सख्त नजर रखी जाएगी। विधायक कैप्टन रणजीत सिंह ने अंत में दोहराया कि सुजानपुर विधानसभा क्षेत्र में चल रहे सभी विकास कार्यों में गुणवत्ता सर्वोपरि होगी। उन्होंने कहा कि जनता के हितों से समझौता करने वालों के लिए अब कोई जगह नहीं है। चाहे सड़क हो, पुल हो, वर्षाशालिका हो या कोई अन्य विकास कार्य—हर परियोजना में तय मानकों का पालन अनिवार्य होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में ऐसे निरीक्षण लगातार जारी रहेंगे, ताकि सरकारी धन का सही उपयोग सुनिश्चित किया जा सके और जनता को मजबूत, टिकाऊ व गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं मिल सकें।1
- ऊपरी शिमला ठियोग कुफरी में बर्फबारी के बाद सुंदर नज़ारा ,पर्यटकों खूब ले रहे बरबरी का आनंद1
- कीरतपुर नेरचौक फोरलेन को लेकर जानकारी देते रीजनल ऑफिसर एनएचएआई हिमाचल प्रदेश कर्नल अजय बरगोटी व प्रोजेक्ट डायरेक्टर, पीआईयू मंडी, एनएचएआई वरुण चारी1
- Post by Roshan Sharma1
- ऊना। जिले में सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मृत्यु दर और स्थायी दिव्यांगता के मामलों को कम करने के उद्देश्य से क्षेत्रीय अस्पताल ऊना में रोड सेफ्टी एवं ट्रॉमा केयर विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम मुख्य चिकित्सा अधिकारी ऊना डॉ. संजीव कुमार वर्मा के निर्देशन में आयोजित हुआ, जिसमें लगभग 50 मेडिकल ऑफिसर्स, स्टाफ नर्सों तथा पैरामेडिकल कर्मियों ने भाग लेकर आपातकालीन उपचार से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की। कार्यशाला के दौरान सड़क दुर्घटना पीड़ितों के त्वरित उपचार, गोल्डन आवर मैनेजमेंट और ट्रॉमा केयर के मानक उपचार प्रोटोकॉल पर विस्तार से प्रशिक्षण दिया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि दुर्घटना के बाद का पहला घंटा, जिसे गोल्डन आवर कहा जाता है, जीवन बचाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। यदि इस दौरान घायल को सही प्राथमिक उपचार और शीघ्र अस्पताल सुविधा मिल जाए तो मृत्यु की संभावना काफी हद तक कम की जा सकती है। प्रशिक्षण सत्र में रिसोर्स पर्सन के रूप में डॉक्टर नितिन वर्मा, हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. पुनीत बंसल, डॉ. राहुल टंडन और जिला चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुखदीप सिंह सिद्धू ने विभिन्न विषयों पर विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने हेड इंजरी, चेस्ट इंजरी, फ्रैक्चर, एब्डोमिनल और लंग्स इंजरी के त्वरित प्रबंधन के साथ-साथ सीपीआर और हेड इंजरी मैनेजमेंट का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया। जनरल सर्जरी और ऑर्थोपेडिक विभाग के चिकित्सकों ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए आपातकालीन स्थितियों से निपटने के तरीके बताए। कार्यशाला के दूसरे सत्र में आरटीओ ऊना अशोक कलसी ने सड़क सुरक्षा, यातायात नियमों, दुर्घटना रोकथाम उपायों तथा आपातकालीन सेवाओं के प्रभावी उपयोग पर जानकारी दी। आयोजकों ने बताया कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम आगे भी जारी रहेंगे ताकि ट्रॉमा केयर सेवाओं की गुणवत्ता में निरंतर सुधार हो सके। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजीव कुमार वर्मा ने कहा कि सड़क हादसों में होने वाली अधिकांश मौतें समय पर उपचार से रोकी जा सकती हैं। उन्होंने स्वास्थ्य कर्मियों को संवेदनशीलता और तत्परता के साथ कार्य करने पर जोर दिया।2