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राजस्थान के जालौर जिले के चितलवाना क्षेत्र के आकोली गांव से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक गरीब परिवार ने न्याय के लिए कानून का दरवाजा खटखटाया है। एफआईआर संख्या 0007 के अनुसार, शिकायतकर्ता सालूराम भील ने आरोप लगाया कि 19 दिसंबर 2025 को उनकी पुश्तैनी भूमि पर बने आवासीय छप्पर, तारबंदी और धार्मिक आस्था स्थल को कई लोगों ने मिलकर ट्रैक्टरों से नुकसान पहुँचाया। शिकायत में यह भी कहा गया कि उन्हें जातिसूचक शब्दों से अपमानित किया गया। इन गंभीर आरोपों के आधार पर, एससी/एसटी एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। हालांकि, इस मामले ने अब एक बड़ा मोड़ ले लिया है, क्योंकि पुलिस जांच के बाद इसमें "FR-UNOCCURRED" (गलत/झूठा) रिपोर्ट लगा दी गई है। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद पीड़ित परिवार का संघर्ष और व्यवस्था पर सवाल दोनों शुरू हो गए हैं। पीड़ित पक्ष का दावा है कि उनके पास घटना से जुड़े वीडियो, गवाह और जमीन पर हुए नुकसान के स्पष्ट प्रमाण मौजूद हैं, बावजूद इसके उनकी बात को स्वीकार नहीं किया गया। इससे यह गंभीर सवाल खड़ा होता है कि पुलिस द्वारा उन साक्ष्यों की जांच किस प्रकार की गई, क्या गवाहों के बयान निष्पक्षता से दर्ज हुए, वीडियो की तकनीकी जांच हुई या घटना स्थल का सही मूल्यांकन किया गया। आकोली गांव का यह मामला अब सिर्फ एक परिवार तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि यह उन हजारों गरीब, मजदूर, दलित और आदिवासी परिवारों के न्याय के संघर्ष का प्रतीक बन गया है, जो न्याय की उम्मीद में थाने, तहसील और अदालतों के चक्कर लगाते रहते हैं। रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि सरकार और प्रशासन को यह समझना होगा कि न्याय केवल कागजों में नहीं, बल्कि पीड़ित व्यक्ति के विश्वास में भी होना चाहिए। जब एक पक्ष लगातार अपने पास वीडियो और गवाह होने का दावा कर रहा हो, तब मामले में पारदर्शिता और निष्पक्षता की मांग स्वाभाविक हो जाती है। यह रिपोर्ट किसी अधिकारी, पुलिसकर्मी या व्यक्ति पर आरोप सिद्ध नहीं कर रही है, क्योंकि यह अधिकार केवल न्यायालय का है, लेकिन लोकतंत्र में जनता के सवाल उठाना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसी संदर्भ में, राज्य सरकार, जिला प्रशासन, पुलिस विभाग और जनप्रतिनिधियों से कई सीधे सवाल पूछे गए हैं: क्या इस मामले की उच्चस्तरीय समीक्षा होगी? क्या पीड़ित परिवार को निष्पक्ष सुनवाई का अवसर प्रदान किया जाएगा? और, क्या जांच के सभी तथ्यों को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाएगा ताकि आम जनता का कानून पर भरोसा बना रहे? रिपोर्ट इस बात पर जोर देती है कि जब कोई गरीब व्यक्ति कहता है कि "मेरे पास सबूत हैं, फिर भी मेरी बात नहीं सुनी गई", तो यह केवल उसकी आवाज़ नहीं होती, बल्कि पूरी व्यवस्था से जवाब मांगता हुआ एक प्रश्न होता है। इसलिए, यदि जांच सही है, तो उसके आधार स्पष्ट होने चाहिए, और यदि कहीं कोई कमी रह गई है, तो उसे सुधारना न्याय व्यवस्था की ही जिम्मेदारी है। यह रिपोर्ट सरकार और जिम्मेदार अधिकारियों तक यह संदेश पहुँचाने का प्रयास है कि जनता न्याय और पारदर्शिता चाहती है, और कानून पर अपना भरोसा बनाए रखना चाहती है। यह एक गंभीर न्याय की गुहार है।

15 hrs ago
user_बी आर राणा
बी आर राणा
Aadhar center चितलवाना, जालोर, राजस्थान•
15 hrs ago

राजस्थान के जालौर जिले के चितलवाना क्षेत्र के आकोली गांव से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक गरीब परिवार ने न्याय के लिए कानून का दरवाजा खटखटाया है। एफआईआर संख्या 0007 के अनुसार, शिकायतकर्ता सालूराम भील ने आरोप लगाया कि 19 दिसंबर 2025 को उनकी पुश्तैनी भूमि पर बने आवासीय छप्पर, तारबंदी और धार्मिक आस्था स्थल को कई लोगों ने मिलकर ट्रैक्टरों से नुकसान पहुँचाया। शिकायत में यह भी कहा गया कि उन्हें जातिसूचक शब्दों से अपमानित किया गया। इन गंभीर आरोपों के आधार पर, एससी/एसटी एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। हालांकि, इस मामले ने अब एक बड़ा मोड़ ले लिया है, क्योंकि पुलिस जांच के बाद इसमें "FR-UNOCCURRED" (गलत/झूठा) रिपोर्ट लगा दी गई है। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद पीड़ित परिवार का संघर्ष और व्यवस्था पर सवाल दोनों शुरू हो गए हैं। पीड़ित पक्ष का दावा है कि उनके पास घटना से जुड़े वीडियो, गवाह और जमीन पर हुए नुकसान के स्पष्ट प्रमाण मौजूद हैं, बावजूद इसके उनकी बात को स्वीकार नहीं किया गया। इससे यह गंभीर सवाल खड़ा होता है कि पुलिस द्वारा उन साक्ष्यों की जांच किस प्रकार की गई, क्या गवाहों के बयान निष्पक्षता से दर्ज हुए, वीडियो की तकनीकी जांच हुई या घटना स्थल का सही मूल्यांकन किया गया। आकोली गांव का यह मामला अब सिर्फ एक परिवार तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि यह उन हजारों गरीब, मजदूर, दलित और आदिवासी परिवारों के न्याय के संघर्ष का प्रतीक बन गया है, जो न्याय की उम्मीद में थाने, तहसील और अदालतों के चक्कर लगाते रहते हैं। रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि सरकार और प्रशासन को यह समझना होगा कि न्याय केवल कागजों में नहीं, बल्कि पीड़ित व्यक्ति के विश्वास में भी होना चाहिए। जब एक पक्ष लगातार अपने पास वीडियो और गवाह होने का दावा कर रहा हो, तब मामले में पारदर्शिता और निष्पक्षता की मांग स्वाभाविक हो जाती है। यह रिपोर्ट किसी अधिकारी, पुलिसकर्मी या व्यक्ति पर आरोप सिद्ध नहीं कर रही है, क्योंकि यह अधिकार केवल न्यायालय का है, लेकिन लोकतंत्र में जनता के सवाल उठाना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसी संदर्भ में, राज्य सरकार, जिला प्रशासन, पुलिस विभाग और जनप्रतिनिधियों से कई सीधे सवाल पूछे गए हैं: क्या इस मामले की उच्चस्तरीय समीक्षा होगी? क्या पीड़ित परिवार को निष्पक्ष सुनवाई का अवसर प्रदान किया जाएगा? और, क्या जांच के सभी तथ्यों को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाएगा ताकि आम जनता का कानून पर भरोसा बना रहे? रिपोर्ट इस बात पर जोर देती है कि जब कोई गरीब व्यक्ति कहता है कि "मेरे पास सबूत हैं, फिर भी मेरी बात नहीं सुनी गई", तो यह केवल उसकी आवाज़ नहीं होती, बल्कि पूरी व्यवस्था से जवाब मांगता हुआ एक प्रश्न होता है। इसलिए, यदि जांच सही है, तो उसके आधार स्पष्ट होने चाहिए, और यदि कहीं कोई कमी रह गई है, तो उसे सुधारना न्याय व्यवस्था की ही जिम्मेदारी है। यह रिपोर्ट सरकार और जिम्मेदार अधिकारियों तक यह संदेश पहुँचाने का प्रयास है कि जनता न्याय और पारदर्शिता चाहती है, और कानून पर अपना भरोसा बनाए रखना चाहती है। यह एक गंभीर न्याय की गुहार है।

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  • जालौर जिले के चितलवाना थाना क्षेत्र के आकोली गांव में दर्ज एफआईआर संख्या 0007 से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि उसकी पुश्तैनी भूमि पर बने छप्पर, तारबंदी और बाड़े को कथित रूप से तोड़ा गया, संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया तथा जातिसूचक शब्दों से अपमानित किया गया। इन आरोपों के आधार पर एससी/एसटी एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। हालांकि, पीड़ित परिवार का कहना है कि घटना के वीडियो, गवाह और अन्य साक्ष्य उपलब्ध होने के बावजूद, पुलिस जांच में इस मामले को "गलत/झूठा" मानते हुए अंतिम रिपोर्ट लगा दी गई है। यह स्थिति न्याय व्यवस्था पर सवाल उठा रही है, खासकर जब एक गरीब, मजदूर, दलित या आदिवासी परिवार सबूत होने का दावा कर रहा हो, तब उसकी बात को पूरी गंभीरता से सुना जाना चाहिए। इस मामले में सरकार, जिला प्रशासन और उच्च पुलिस अधिकारियों से मांग की गई है कि प्रकरण की निष्पक्ष समीक्षा की जाए। यदि आवश्यक हो, तो उपलब्ध साक्ष्यों की दोबारा जांच कराई जानी चाहिए ताकि न्याय व्यवस्था पर जनता का विश्वास बना रहे। यह जोर दिया गया है कि न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि न्याय होता हुआ दिखाई भी देना चाहिए।
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    जालौर जिले के चितलवाना थाना क्षेत्र के आकोली गांव में दर्ज एफआईआर संख्या 0007 से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि उसकी पुश्तैनी भूमि पर बने छप्पर, तारबंदी और बाड़े को कथित रूप से तोड़ा गया, संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया तथा जातिसूचक शब्दों से अपमानित किया गया। इन आरोपों के आधार पर एससी/एसटी एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था।

हालांकि, पीड़ित परिवार का कहना है कि घटना के वीडियो, गवाह और अन्य साक्ष्य उपलब्ध होने के बावजूद, पुलिस जांच में इस मामले को "गलत/झूठा" मानते हुए अंतिम रिपोर्ट लगा दी गई है। यह स्थिति न्याय व्यवस्था पर सवाल उठा रही है, खासकर जब एक गरीब, मजदूर, दलित या आदिवासी परिवार सबूत होने का दावा कर रहा हो, तब उसकी बात को पूरी गंभीरता से सुना जाना चाहिए।

इस मामले में सरकार, जिला प्रशासन और उच्च पुलिस अधिकारियों से मांग की गई है कि प्रकरण की निष्पक्ष समीक्षा की जाए। यदि आवश्यक हो, तो उपलब्ध साक्ष्यों की दोबारा जांच कराई जानी चाहिए ताकि न्याय व्यवस्था पर जनता का विश्वास बना रहे। यह जोर दिया गया है कि न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि न्याय होता हुआ दिखाई भी देना चाहिए।
    user_बी आर राणा
    बी आर राणा
    Aadhar center चितलवाना, जालोर, राजस्थान•
    15 hrs ago
  • सोशल मीडिया पर पाटोदी JEN कार्यालय से जुड़ा एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। हालाँकि, हम इस वायरल वीडियो की सत्यता की पुष्टि नहीं करते हैं।
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    सोशल मीडिया पर पाटोदी JEN कार्यालय से जुड़ा एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। हालाँकि, हम इस वायरल वीडियो की सत्यता की पुष्टि नहीं करते हैं।
    user_खीयाराम पालीवाल बायतु
    खीयाराम पालीवाल बायतु
    बायतू, बाड़मेर, राजस्थान•
    3 hrs ago
  • राजस्थान के सिरोही जिले की पिण्डवाड़ा तहसील के झाड़ोली गांव की प्रतिभाशाली बेटी सृष्टि राजपुरोहित ने अपनी मधुर आवाज और अथक मेहनत के दम पर संगीत के क्षेत्र में एक अलग मुकाम हासिल किया है। उन्होंने अनेक कठिन परिस्थितियों और सीमित संसाधनों को मात देते हुए यह विशिष्ट पहचान बनाई है। सृष्टि का गायन का सफर चौथी कक्षा में शुरू हुआ था, जो अब प्रदेश के विभिन्न मंचों तक पहुंच चुका है। कई चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपने सपनों को साकार करने का दृढ़ संकल्प नहीं छोड़ा। विद्यालय स्तर से लेकर राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं तक अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए सृष्टि ने लगातार सफलता के नए आयाम स्थापित किए हैं। वर्तमान में वह राजकीय महाविद्यालय सिरोही में अध्ययनरत हैं। अपनी लोकगीतों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से सृष्टि राजपुरोहित राजस्थान की लोक संस्कृति को एक नई पहचान दिला रही हैं। उनके गीतों को सोशल मीडिया पर भी व्यापक सराहना मिल रही है, जिससे उन्हें प्रदेशभर में प्रशंसा मिल रही है।
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    राजस्थान के सिरोही जिले की पिण्डवाड़ा तहसील के झाड़ोली गांव की प्रतिभाशाली बेटी सृष्टि राजपुरोहित ने अपनी मधुर आवाज और अथक मेहनत के दम पर संगीत के क्षेत्र में एक अलग मुकाम हासिल किया है। उन्होंने अनेक कठिन परिस्थितियों और सीमित संसाधनों को मात देते हुए यह विशिष्ट पहचान बनाई है।

सृष्टि का गायन का सफर चौथी कक्षा में शुरू हुआ था, जो अब प्रदेश के विभिन्न मंचों तक पहुंच चुका है। कई चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपने सपनों को साकार करने का दृढ़ संकल्प नहीं छोड़ा। विद्यालय स्तर से लेकर राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं तक अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए सृष्टि ने लगातार सफलता के नए आयाम स्थापित किए हैं। वर्तमान में वह राजकीय महाविद्यालय सिरोही में अध्ययनरत हैं।

अपनी लोकगीतों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से सृष्टि राजपुरोहित राजस्थान की लोक संस्कृति को एक नई पहचान दिला रही हैं। उनके गीतों को सोशल मीडिया पर भी व्यापक सराहना मिल रही है, जिससे उन्हें प्रदेशभर में प्रशंसा मिल रही है।
    user_Tushar Purohit News Midea
    Tushar Purohit News Midea
    Local News Reporter सिरोही, सिरोही, राजस्थान•
    4 hrs ago
  • रविवार को आबूरोड शहर में 'संडे ऑन साइकिल' अभियान के तहत पुलिस विभाग ने एक साइकिल रैली का आयोजन किया। रेलवे स्टेशन से शुरू हुई इस रैली में पुलिस अधिकारियों और जवानों ने साइकिल चलाकर आमजन को स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण का महत्वपूर्ण संदेश दिया। इस अभियान का नेतृत्व शहर थाना अधिकारी हरचंद देवासी और जीआरपी थाना अधिकारी मनोज कुमार चौहान ने किया। 'फिट बनेगा हर नागरिक, स्वस्थ बनेगा भारत' के नारे के साथ, पुलिसकर्मी रेलवे स्टेशन से साइकिलिंग करते हुए शहर के विभिन्न मार्गों से गुजरे, जिसमें शहर थाना, जीआरपी थाना और रीको थाना पुलिस का स्टाफ भी शामिल रहा। पुलिस अधिकारियों ने लोगों से नियमित रूप से साइकिल चलाने, स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और पर्यावरण संरक्षण में योगदान देने की अपील की। पुलिस विभाग के अनुसार, ऐसे अभियान न केवल स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाते हैं, बल्कि लोगों को फिटनेस के लिए भी प्रेरित करते हैं, जिससे आमजन को साइकिलिंग अपनाने का संदेश प्रभावी ढंग से दिया गया।
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    रविवार को आबूरोड शहर में 'संडे ऑन साइकिल' अभियान के तहत पुलिस विभाग ने एक साइकिल रैली का आयोजन किया। रेलवे स्टेशन से शुरू हुई इस रैली में पुलिस अधिकारियों और जवानों ने साइकिल चलाकर आमजन को स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण का महत्वपूर्ण संदेश दिया।

इस अभियान का नेतृत्व शहर थाना अधिकारी हरचंद देवासी और जीआरपी थाना अधिकारी मनोज कुमार चौहान ने किया। 'फिट बनेगा हर नागरिक, स्वस्थ बनेगा भारत' के नारे के साथ, पुलिसकर्मी रेलवे स्टेशन से साइकिलिंग करते हुए शहर के विभिन्न मार्गों से गुजरे, जिसमें शहर थाना, जीआरपी थाना और रीको थाना पुलिस का स्टाफ भी शामिल रहा। पुलिस अधिकारियों ने लोगों से नियमित रूप से साइकिल चलाने, स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और पर्यावरण संरक्षण में योगदान देने की अपील की। पुलिस विभाग के अनुसार, ऐसे अभियान न केवल स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाते हैं, बल्कि लोगों को फिटनेस के लिए भी प्रेरित करते हैं, जिससे आमजन को साइकिलिंग अपनाने का संदेश प्रभावी ढंग से दिया गया।
    user_Reporter Patrakar
    Reporter Patrakar
    Voice of people सिरोही, सिरोही, राजस्थान•
    9 hrs ago
  • बालोतरा जिले के गंगावास में महिलाओं ने एक 'मेट' (पर्यवेक्षक) पर तानाशाही के गंभीर आरोप लगाए हैं। महिलाओं का कहना है कि मेट के पास खराब फोन होने और उसे सही ढंग से फोटो खींचना न आने के कारण लगभग 40 से 50 लोगों की हाजिरी दर्ज नहीं हो पा रही है। इस स्थिति से गरीबों और अन्य लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। महिलाओं ने मांग की है कि मौजूदा मेट को बदलकर नया मेट नियुक्त किया जाए, अन्यथा 'मिस्टॉल' को वापस पंचायत समिति में जमा करा दिया जाए। इसी संदर्भ में, जीव रक्षा कमांडो टाइगर फोर्स के फरसा राम विश्नोई ने ग्राम विकास अधिकारी और वीडियो कल्याणपुर से निवेदन किया है कि इस समस्या का जल्द से जल्द समाधान किया जाए। विश्नोई ने मेट पर अवैध वसूली का भी आरोप लगाया है और अधिकारियों से इस पर तत्काल लगाम लगाने तथा त्वरित कार्रवाई करने की मांग की है।
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    बालोतरा जिले के गंगावास में महिलाओं ने एक 'मेट' (पर्यवेक्षक) पर तानाशाही के गंभीर आरोप लगाए हैं। महिलाओं का कहना है कि मेट के पास खराब फोन होने और उसे सही ढंग से फोटो खींचना न आने के कारण लगभग 40 से 50 लोगों की हाजिरी दर्ज नहीं हो पा रही है। इस स्थिति से गरीबों और अन्य लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

महिलाओं ने मांग की है कि मौजूदा मेट को बदलकर नया मेट नियुक्त किया जाए, अन्यथा 'मिस्टॉल' को वापस पंचायत समिति में जमा करा दिया जाए। इसी संदर्भ में, जीव रक्षा कमांडो टाइगर फोर्स के फरसा राम विश्नोई ने ग्राम विकास अधिकारी और वीडियो कल्याणपुर से निवेदन किया है कि इस समस्या का जल्द से जल्द समाधान किया जाए। विश्नोई ने मेट पर अवैध वसूली का भी आरोप लगाया है और अधिकारियों से इस पर तत्काल लगाम लगाने तथा त्वरित कार्रवाई करने की मांग की है।
    user_पत्रकार खेत सिंह राजपुरोहित
    पत्रकार खेत सिंह राजपुरोहित
    शेओ, बाड़मेर, राजस्थान•
    5 hrs ago
  • नेहरू नगर में गलियों में पानी भर गया है, जिससे वहां के निवासियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यह समस्या विशेष रूप से बगीचे के पास और गुरुद्वारे के दोनों ओर की गलियों में देखी जा रही है, जहां पानी भरने से लोगों का जीवन बेहद मुश्किल हो गया है। शिकायतकर्ता ने बताया है कि इस मामले में कोई सुनवाई नहीं हो रही है। प्रशासन से यह निवेदन किया गया है कि वे इस स्थिति पर तत्काल कार्रवाई करें और जल्द से जल्द इसका समाधान करें।
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    नेहरू नगर में गलियों में पानी भर गया है, जिससे वहां के निवासियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यह समस्या विशेष रूप से बगीचे के पास और गुरुद्वारे के दोनों ओर की गलियों में देखी जा रही है, जहां पानी भरने से लोगों का जीवन बेहद मुश्किल हो गया है। शिकायतकर्ता ने बताया है कि इस मामले में कोई सुनवाई नहीं हो रही है। प्रशासन से यह निवेदन किया गया है कि वे इस स्थिति पर तत्काल कार्रवाई करें और जल्द से जल्द इसका समाधान करें।
    user_Ishwar Jit
    Ishwar Jit
    शिवगंज, सिरोही, राजस्थान•
    17 hrs ago
  • राजस्थान के जालौर जिले के चितलवाना क्षेत्र के आकोली गांव से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक गरीब परिवार ने न्याय के लिए कानून का दरवाजा खटखटाया है। एफआईआर संख्या 0007 के अनुसार, शिकायतकर्ता सालूराम भील ने आरोप लगाया कि 19 दिसंबर 2025 को उनकी पुश्तैनी भूमि पर बने आवासीय छप्पर, तारबंदी और धार्मिक आस्था स्थल को कई लोगों ने मिलकर ट्रैक्टरों से नुकसान पहुँचाया। शिकायत में यह भी कहा गया कि उन्हें जातिसूचक शब्दों से अपमानित किया गया। इन गंभीर आरोपों के आधार पर, एससी/एसटी एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। हालांकि, इस मामले ने अब एक बड़ा मोड़ ले लिया है, क्योंकि पुलिस जांच के बाद इसमें "FR-UNOCCURRED" (गलत/झूठा) रिपोर्ट लगा दी गई है। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद पीड़ित परिवार का संघर्ष और व्यवस्था पर सवाल दोनों शुरू हो गए हैं। पीड़ित पक्ष का दावा है कि उनके पास घटना से जुड़े वीडियो, गवाह और जमीन पर हुए नुकसान के स्पष्ट प्रमाण मौजूद हैं, बावजूद इसके उनकी बात को स्वीकार नहीं किया गया। इससे यह गंभीर सवाल खड़ा होता है कि पुलिस द्वारा उन साक्ष्यों की जांच किस प्रकार की गई, क्या गवाहों के बयान निष्पक्षता से दर्ज हुए, वीडियो की तकनीकी जांच हुई या घटना स्थल का सही मूल्यांकन किया गया। आकोली गांव का यह मामला अब सिर्फ एक परिवार तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि यह उन हजारों गरीब, मजदूर, दलित और आदिवासी परिवारों के न्याय के संघर्ष का प्रतीक बन गया है, जो न्याय की उम्मीद में थाने, तहसील और अदालतों के चक्कर लगाते रहते हैं। रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि सरकार और प्रशासन को यह समझना होगा कि न्याय केवल कागजों में नहीं, बल्कि पीड़ित व्यक्ति के विश्वास में भी होना चाहिए। जब एक पक्ष लगातार अपने पास वीडियो और गवाह होने का दावा कर रहा हो, तब मामले में पारदर्शिता और निष्पक्षता की मांग स्वाभाविक हो जाती है। यह रिपोर्ट किसी अधिकारी, पुलिसकर्मी या व्यक्ति पर आरोप सिद्ध नहीं कर रही है, क्योंकि यह अधिकार केवल न्यायालय का है, लेकिन लोकतंत्र में जनता के सवाल उठाना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसी संदर्भ में, राज्य सरकार, जिला प्रशासन, पुलिस विभाग और जनप्रतिनिधियों से कई सीधे सवाल पूछे गए हैं: क्या इस मामले की उच्चस्तरीय समीक्षा होगी? क्या पीड़ित परिवार को निष्पक्ष सुनवाई का अवसर प्रदान किया जाएगा? और, क्या जांच के सभी तथ्यों को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाएगा ताकि आम जनता का कानून पर भरोसा बना रहे? रिपोर्ट इस बात पर जोर देती है कि जब कोई गरीब व्यक्ति कहता है कि "मेरे पास सबूत हैं, फिर भी मेरी बात नहीं सुनी गई", तो यह केवल उसकी आवाज़ नहीं होती, बल्कि पूरी व्यवस्था से जवाब मांगता हुआ एक प्रश्न होता है। इसलिए, यदि जांच सही है, तो उसके आधार स्पष्ट होने चाहिए, और यदि कहीं कोई कमी रह गई है, तो उसे सुधारना न्याय व्यवस्था की ही जिम्मेदारी है। यह रिपोर्ट सरकार और जिम्मेदार अधिकारियों तक यह संदेश पहुँचाने का प्रयास है कि जनता न्याय और पारदर्शिता चाहती है, और कानून पर अपना भरोसा बनाए रखना चाहती है। यह एक गंभीर न्याय की गुहार है।
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    राजस्थान के जालौर जिले के चितलवाना क्षेत्र के आकोली गांव से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक गरीब परिवार ने न्याय के लिए कानून का दरवाजा खटखटाया है। एफआईआर संख्या 0007 के अनुसार, शिकायतकर्ता सालूराम भील ने आरोप लगाया कि 19 दिसंबर 2025 को उनकी पुश्तैनी भूमि पर बने आवासीय छप्पर, तारबंदी और धार्मिक आस्था स्थल को कई लोगों ने मिलकर ट्रैक्टरों से नुकसान पहुँचाया। शिकायत में यह भी कहा गया कि उन्हें जातिसूचक शब्दों से अपमानित किया गया। इन गंभीर आरोपों के आधार पर, एससी/एसटी एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था।

हालांकि, इस मामले ने अब एक बड़ा मोड़ ले लिया है, क्योंकि पुलिस जांच के बाद इसमें "FR-UNOCCURRED" (गलत/झूठा) रिपोर्ट लगा दी गई है। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद पीड़ित परिवार का संघर्ष और व्यवस्था पर सवाल दोनों शुरू हो गए हैं। पीड़ित पक्ष का दावा है कि उनके पास घटना से जुड़े वीडियो, गवाह और जमीन पर हुए नुकसान के स्पष्ट प्रमाण मौजूद हैं, बावजूद इसके उनकी बात को स्वीकार नहीं किया गया। इससे यह गंभीर सवाल खड़ा होता है कि पुलिस द्वारा उन साक्ष्यों की जांच किस प्रकार की गई, क्या गवाहों के बयान निष्पक्षता से दर्ज हुए, वीडियो की तकनीकी जांच हुई या घटना स्थल का सही मूल्यांकन किया गया।

आकोली गांव का यह मामला अब सिर्फ एक परिवार तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि यह उन हजारों गरीब, मजदूर, दलित और आदिवासी परिवारों के न्याय के संघर्ष का प्रतीक बन गया है, जो न्याय की उम्मीद में थाने, तहसील और अदालतों के चक्कर लगाते रहते हैं। रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि सरकार और प्रशासन को यह समझना होगा कि न्याय केवल कागजों में नहीं, बल्कि पीड़ित व्यक्ति के विश्वास में भी होना चाहिए। जब एक पक्ष लगातार अपने पास वीडियो और गवाह होने का दावा कर रहा हो, तब मामले में पारदर्शिता और निष्पक्षता की मांग स्वाभाविक हो जाती है। यह रिपोर्ट किसी अधिकारी, पुलिसकर्मी या व्यक्ति पर आरोप सिद्ध नहीं कर रही है, क्योंकि यह अधिकार केवल न्यायालय का है, लेकिन लोकतंत्र में जनता के सवाल उठाना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

इसी संदर्भ में, राज्य सरकार, जिला प्रशासन, पुलिस विभाग और जनप्रतिनिधियों से कई सीधे सवाल पूछे गए हैं: क्या इस मामले की उच्चस्तरीय समीक्षा होगी? क्या पीड़ित परिवार को निष्पक्ष सुनवाई का अवसर प्रदान किया जाएगा? और, क्या जांच के सभी तथ्यों को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाएगा ताकि आम जनता का कानून पर भरोसा बना रहे? रिपोर्ट इस बात पर जोर देती है कि जब कोई गरीब व्यक्ति कहता है कि "मेरे पास सबूत हैं, फिर भी मेरी बात नहीं सुनी गई", तो यह केवल उसकी आवाज़ नहीं होती, बल्कि पूरी व्यवस्था से जवाब मांगता हुआ एक प्रश्न होता है। इसलिए, यदि जांच सही है, तो उसके आधार स्पष्ट होने चाहिए, और यदि कहीं कोई कमी रह गई है, तो उसे सुधारना न्याय व्यवस्था की ही जिम्मेदारी है। यह रिपोर्ट सरकार और जिम्मेदार अधिकारियों तक यह संदेश पहुँचाने का प्रयास है कि जनता न्याय और पारदर्शिता चाहती है, और कानून पर अपना भरोसा बनाए रखना चाहती है। यह एक गंभीर न्याय की गुहार है।
    user_बी आर राणा
    बी आर राणा
    Aadhar center चितलवाना, जालोर, राजस्थान•
    15 hrs ago
  • सिरोही जिले के आबूरोड सदर थाना क्षेत्र के गिरवर गांव में एक युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले ने शनिवार को तूल पकड़ लिया। मृतक का शव शुक्रवार रात खेत में संदिग्ध अवस्था में मिला था, जिस पर चोट और खून के निशान थे। परिजनों ने शुरू से ही हत्या की आशंका जताई थी और आरोप लगाया कि आपसी विवाद के चलते युवक की हत्या की गई है, जिसके बाद से गांव में तनाव का माहौल बना हुआ था। शनिवार सुबह से ही बड़ी संख्या में परिजन और ग्रामीण गांव में एकत्रित होने लगे। दोपहर करीब 1:30 बजे, आक्रोशित भीड़ संदिग्ध आरोपियों के घर पहुंच गई और वहां हमला कर दिया। गुस्साए लोगों ने लाठी, डंडों और धारदार हथियारों से आरोपियों के घर में जमकर तोड़फोड़ की। गनीमत रही कि उस समय घर पर कोई मौजूद नहीं था, अन्यथा कोई बड़ा हादसा हो सकता था। इस तोड़फोड़ से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस प्रशासन तुरंत हरकत में आया। आबूरोड सदर, आबूरोड शहर, आबूरोड रीको, स्वरूपगंज और रेवदर सहित कई थानों से भारी पुलिस बल गांव में तैनात किया गया। माउंट आबू वृत्ताधिकारी गोमाराम, आबूरोड सदर थानाधिकारी प्रदीप डांगा, रीको थानाधिकारी लक्ष्मण सिंह और शहर थानाधिकारी हरचंद देवासी सहित कई अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित करने में जुटे रहे। माउंट आबू सीओ गोमाराम ने बताया कि युवक की मौत के मामले को गंभीरता से लिया गया है और पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि परिजनों की ओर से फिलहाल कोई मामला दर्ज नहीं करवाया गया है, लेकिन पुलिस हर पहलू से जांच कर रही है। पुलिस ने लोगों से कानून हाथ में न लेने और शांति बनाए रखने की अपील की है।
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    सिरोही जिले के आबूरोड सदर थाना क्षेत्र के गिरवर गांव में एक युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले ने शनिवार को तूल पकड़ लिया। मृतक का शव शुक्रवार रात खेत में संदिग्ध अवस्था में मिला था, जिस पर चोट और खून के निशान थे। परिजनों ने शुरू से ही हत्या की आशंका जताई थी और आरोप लगाया कि आपसी विवाद के चलते युवक की हत्या की गई है, जिसके बाद से गांव में तनाव का माहौल बना हुआ था।

शनिवार सुबह से ही बड़ी संख्या में परिजन और ग्रामीण गांव में एकत्रित होने लगे। दोपहर करीब 1:30 बजे, आक्रोशित भीड़ संदिग्ध आरोपियों के घर पहुंच गई और वहां हमला कर दिया। गुस्साए लोगों ने लाठी, डंडों और धारदार हथियारों से आरोपियों के घर में जमकर तोड़फोड़ की। गनीमत रही कि उस समय घर पर कोई मौजूद नहीं था, अन्यथा कोई बड़ा हादसा हो सकता था। इस तोड़फोड़ से इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

घटना की सूचना मिलने पर पुलिस प्रशासन तुरंत हरकत में आया। आबूरोड सदर, आबूरोड शहर, आबूरोड रीको, स्वरूपगंज और रेवदर सहित कई थानों से भारी पुलिस बल गांव में तैनात किया गया। माउंट आबू वृत्ताधिकारी गोमाराम, आबूरोड सदर थानाधिकारी प्रदीप डांगा, रीको थानाधिकारी लक्ष्मण सिंह और शहर थानाधिकारी हरचंद देवासी सहित कई अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित करने में जुटे रहे। माउंट आबू सीओ गोमाराम ने बताया कि युवक की मौत के मामले को गंभीरता से लिया गया है और पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि परिजनों की ओर से फिलहाल कोई मामला दर्ज नहीं करवाया गया है, लेकिन पुलिस हर पहलू से जांच कर रही है। पुलिस ने लोगों से कानून हाथ में न लेने और शांति बनाए रखने की अपील की है।
    user_Lokesh Soni
    Lokesh Soni
    आबू रोड, सिरोही, राजस्थान•
    14 hrs ago
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