Shuru
Apke Nagar Ki App…
बालोतरा जिले के गंगावास में महिलाओं ने एक 'मेट' (पर्यवेक्षक) पर तानाशाही के गंभीर आरोप लगाए हैं। महिलाओं का कहना है कि मेट के पास खराब फोन होने और उसे सही ढंग से फोटो खींचना न आने के कारण लगभग 40 से 50 लोगों की हाजिरी दर्ज नहीं हो पा रही है। इस स्थिति से गरीबों और अन्य लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। महिलाओं ने मांग की है कि मौजूदा मेट को बदलकर नया मेट नियुक्त किया जाए, अन्यथा 'मिस्टॉल' को वापस पंचायत समिति में जमा करा दिया जाए। इसी संदर्भ में, जीव रक्षा कमांडो टाइगर फोर्स के फरसा राम विश्नोई ने ग्राम विकास अधिकारी और वीडियो कल्याणपुर से निवेदन किया है कि इस समस्या का जल्द से जल्द समाधान किया जाए। विश्नोई ने मेट पर अवैध वसूली का भी आरोप लगाया है और अधिकारियों से इस पर तत्काल लगाम लगाने तथा त्वरित कार्रवाई करने की मांग की है।
पत्रकार खेत सिंह राजपुरोहित
बालोतरा जिले के गंगावास में महिलाओं ने एक 'मेट' (पर्यवेक्षक) पर तानाशाही के गंभीर आरोप लगाए हैं। महिलाओं का कहना है कि मेट के पास खराब फोन होने और उसे सही ढंग से फोटो खींचना न आने के कारण लगभग 40 से 50 लोगों की हाजिरी दर्ज नहीं हो पा रही है। इस स्थिति से गरीबों और अन्य लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। महिलाओं ने मांग की है कि मौजूदा मेट को बदलकर नया मेट नियुक्त किया जाए, अन्यथा 'मिस्टॉल' को वापस पंचायत समिति में जमा करा दिया जाए। इसी संदर्भ में, जीव रक्षा कमांडो टाइगर फोर्स के फरसा राम विश्नोई ने ग्राम विकास अधिकारी और वीडियो कल्याणपुर से निवेदन किया है कि इस समस्या का जल्द से जल्द समाधान किया जाए। विश्नोई ने मेट पर अवैध वसूली का भी आरोप लगाया है और अधिकारियों से इस पर तत्काल लगाम लगाने तथा त्वरित कार्रवाई करने की मांग की है।
More news from राजस्थान and nearby areas
- बालोतरा जिले के गंगावास में महिलाओं ने एक 'मेट' (पर्यवेक्षक) पर तानाशाही के गंभीर आरोप लगाए हैं। महिलाओं का कहना है कि मेट के पास खराब फोन होने और उसे सही ढंग से फोटो खींचना न आने के कारण लगभग 40 से 50 लोगों की हाजिरी दर्ज नहीं हो पा रही है। इस स्थिति से गरीबों और अन्य लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। महिलाओं ने मांग की है कि मौजूदा मेट को बदलकर नया मेट नियुक्त किया जाए, अन्यथा 'मिस्टॉल' को वापस पंचायत समिति में जमा करा दिया जाए। इसी संदर्भ में, जीव रक्षा कमांडो टाइगर फोर्स के फरसा राम विश्नोई ने ग्राम विकास अधिकारी और वीडियो कल्याणपुर से निवेदन किया है कि इस समस्या का जल्द से जल्द समाधान किया जाए। विश्नोई ने मेट पर अवैध वसूली का भी आरोप लगाया है और अधिकारियों से इस पर तत्काल लगाम लगाने तथा त्वरित कार्रवाई करने की मांग की है।1
- सोशल मीडिया पर पाटोदी JEN कार्यालय से जुड़ा एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। हालाँकि, हम इस वायरल वीडियो की सत्यता की पुष्टि नहीं करते हैं।1
- राजस्थान के सीमावर्ती जिले जैसलमेर से स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलने वाला और मानवता को शर्मसार करने वाला एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। यहां जोधपुर रेफर किए गए एक तड़पते हुए गंभीर मरीज की जान उस वक्त आफत में पड़ गई, जब उसे ले जा रही सरकारी '108' एम्बुलेंस का ड्राइवर ही शराब के नशे में पूरी तरह धुत पाया गया। गनीमत रही कि पुलिस ने समय रहते इस एम्बुलेंस को रोक लिया, वरना कोई बड़ा हादसा हो सकता था। इस घटना ने स्वास्थ्य सेवाओं में व्याप्त गंभीर लापरवाही पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसने सभी का खून खौला दिया है।1
- देचू उपखंड क्षेत्र की पीलवा ग्राम पंचायत में बदहाल सफाई व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों में भारी रोष व्याप्त है। कस्बे के आराध्य देव श्री बगतेश सिंह दादोसा मंदिर परिसर और सड़कों के किनारे जगह-जगह कचरे व गंदगी के ढेर लगे हुए हैं। नाले-नालियां चोक होने से गलियों में कीचड़ जमा है, जिससे मच्छरों से बीमारियाँ फैल रही हैं और राहगीरों को आवाजाही में परेशानी हो रही है। इस मुद्दे पर सियासत भी तेज हो गई है, जहाँ क्षेत्रीय भाजपा नेता अधिकारियों से सफाई व्यवस्था सुधारने की मांग कर रहे हैं, वहीं विभिन्न दलों के जनप्रतिनिधि, स्थानीय व्यापारी और ग्रामीण सोशल मीडिया के माध्यम से स्थानीय प्रशासन व ग्राम पंचायत पर सवाल उठा रहे हैं। ग्रामीणों ने देचू बीडीओ और ग्राम विकास अधिकारी से जल्द सफाई व्यवस्था सुधारने की गुहार लगाई है, लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं निकला है। हैरानी की बात यह है कि पंचायतीराज विभाग द्वारा हर महीने सफाई कार्य के लिए पंचायतों को ₹1 लाख का फंड दिया जाता है, लेकिन पीलवा पंचायत में सफाई के लिए कोई कर्मचारी नियुक्त नहीं किया गया है, जिसके कारण ग्रामीण खुद सफाई करने को मजबूर हैं। पीलवा को फलोदी जिले का सबसे बड़ा कस्बा बताया गया है, जहाँ बड़े सरकारी मुख्यालय और एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल भी है, इसके बावजूद सफाई का अभाव बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि अन्य पंचायतों में सफाई कार्य चल रहे हैं, लेकिन पीलवा कस्बे में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। इस बदहाल स्थिति और प्रशासन की चुप्पी ने स्थानीय लोगों की नाराजगी को और बढ़ा दिया है, जिससे इस संवेदनशील मुद्दे पर राजनीतिक गरमाहट भी बढ़ गई है।1
- जालौर जिले के चितलवाना थाना क्षेत्र के आकोली गांव में दर्ज एफआईआर संख्या 0007 से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि उसकी पुश्तैनी भूमि पर बने छप्पर, तारबंदी और बाड़े को कथित रूप से तोड़ा गया, संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया तथा जातिसूचक शब्दों से अपमानित किया गया। इन आरोपों के आधार पर एससी/एसटी एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। हालांकि, पीड़ित परिवार का कहना है कि घटना के वीडियो, गवाह और अन्य साक्ष्य उपलब्ध होने के बावजूद, पुलिस जांच में इस मामले को "गलत/झूठा" मानते हुए अंतिम रिपोर्ट लगा दी गई है। यह स्थिति न्याय व्यवस्था पर सवाल उठा रही है, खासकर जब एक गरीब, मजदूर, दलित या आदिवासी परिवार सबूत होने का दावा कर रहा हो, तब उसकी बात को पूरी गंभीरता से सुना जाना चाहिए। इस मामले में सरकार, जिला प्रशासन और उच्च पुलिस अधिकारियों से मांग की गई है कि प्रकरण की निष्पक्ष समीक्षा की जाए। यदि आवश्यक हो, तो उपलब्ध साक्ष्यों की दोबारा जांच कराई जानी चाहिए ताकि न्याय व्यवस्था पर जनता का विश्वास बना रहे। यह जोर दिया गया है कि न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि न्याय होता हुआ दिखाई भी देना चाहिए।1
- मीडिया द्वारा उठाए गए मुद्दे के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है। इस सक्रियता के फलस्वरूप, पणिहारी तालाब से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा रही है।1
- राजस्थान के जालौर जिले के चितलवाना क्षेत्र के आकोली गांव से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक गरीब परिवार ने न्याय के लिए कानून का दरवाजा खटखटाया है। एफआईआर संख्या 0007 के अनुसार, शिकायतकर्ता सालूराम भील ने आरोप लगाया कि 19 दिसंबर 2025 को उनकी पुश्तैनी भूमि पर बने आवासीय छप्पर, तारबंदी और धार्मिक आस्था स्थल को कई लोगों ने मिलकर ट्रैक्टरों से नुकसान पहुँचाया। शिकायत में यह भी कहा गया कि उन्हें जातिसूचक शब्दों से अपमानित किया गया। इन गंभीर आरोपों के आधार पर, एससी/एसटी एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। हालांकि, इस मामले ने अब एक बड़ा मोड़ ले लिया है, क्योंकि पुलिस जांच के बाद इसमें "FR-UNOCCURRED" (गलत/झूठा) रिपोर्ट लगा दी गई है। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद पीड़ित परिवार का संघर्ष और व्यवस्था पर सवाल दोनों शुरू हो गए हैं। पीड़ित पक्ष का दावा है कि उनके पास घटना से जुड़े वीडियो, गवाह और जमीन पर हुए नुकसान के स्पष्ट प्रमाण मौजूद हैं, बावजूद इसके उनकी बात को स्वीकार नहीं किया गया। इससे यह गंभीर सवाल खड़ा होता है कि पुलिस द्वारा उन साक्ष्यों की जांच किस प्रकार की गई, क्या गवाहों के बयान निष्पक्षता से दर्ज हुए, वीडियो की तकनीकी जांच हुई या घटना स्थल का सही मूल्यांकन किया गया। आकोली गांव का यह मामला अब सिर्फ एक परिवार तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि यह उन हजारों गरीब, मजदूर, दलित और आदिवासी परिवारों के न्याय के संघर्ष का प्रतीक बन गया है, जो न्याय की उम्मीद में थाने, तहसील और अदालतों के चक्कर लगाते रहते हैं। रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि सरकार और प्रशासन को यह समझना होगा कि न्याय केवल कागजों में नहीं, बल्कि पीड़ित व्यक्ति के विश्वास में भी होना चाहिए। जब एक पक्ष लगातार अपने पास वीडियो और गवाह होने का दावा कर रहा हो, तब मामले में पारदर्शिता और निष्पक्षता की मांग स्वाभाविक हो जाती है। यह रिपोर्ट किसी अधिकारी, पुलिसकर्मी या व्यक्ति पर आरोप सिद्ध नहीं कर रही है, क्योंकि यह अधिकार केवल न्यायालय का है, लेकिन लोकतंत्र में जनता के सवाल उठाना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसी संदर्भ में, राज्य सरकार, जिला प्रशासन, पुलिस विभाग और जनप्रतिनिधियों से कई सीधे सवाल पूछे गए हैं: क्या इस मामले की उच्चस्तरीय समीक्षा होगी? क्या पीड़ित परिवार को निष्पक्ष सुनवाई का अवसर प्रदान किया जाएगा? और, क्या जांच के सभी तथ्यों को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाएगा ताकि आम जनता का कानून पर भरोसा बना रहे? रिपोर्ट इस बात पर जोर देती है कि जब कोई गरीब व्यक्ति कहता है कि "मेरे पास सबूत हैं, फिर भी मेरी बात नहीं सुनी गई", तो यह केवल उसकी आवाज़ नहीं होती, बल्कि पूरी व्यवस्था से जवाब मांगता हुआ एक प्रश्न होता है। इसलिए, यदि जांच सही है, तो उसके आधार स्पष्ट होने चाहिए, और यदि कहीं कोई कमी रह गई है, तो उसे सुधारना न्याय व्यवस्था की ही जिम्मेदारी है। यह रिपोर्ट सरकार और जिम्मेदार अधिकारियों तक यह संदेश पहुँचाने का प्रयास है कि जनता न्याय और पारदर्शिता चाहती है, और कानून पर अपना भरोसा बनाए रखना चाहती है। यह एक गंभीर न्याय की गुहार है।1
- रविवार को पोकरण शहर में रामदेवरा जा रहे श्रद्धालुओं से भरी एक बस क्षतिग्रस्त सड़क में धंस जाने से अफरा-तफरी मच गई। घटना के बाद मौके पर हड़कंप की स्थिति पैदा हो गई। हालांकि, स्थानीय नागरिकों और आसपास के लोगों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए बस में सवार सभी श्रद्धालुओं को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। स्थानीय लोगों के अनुसार, लगभग दो माह पहले जलदाय विभाग ने यहाँ पाइपलाइन बिछाने का काम किया था, लेकिन काम पूरा होने के बाद सड़क की उचित मरम्मत नहीं की गई। इसी लापरवाही के कारण सड़क कमजोर होकर धंस गई और श्रद्धालुओं से भरी बस उसमें फंस गई। घटना के बाद मौके पर भारी संख्या में भीड़ जमा हो गई। लोगों ने प्रशासन और संबंधित विभागों पर घोर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि समय रहते सड़क की मरम्मत करवाई जाती तो यह हादसा टल सकता था। स्थानीय निवासी और पूर्व नगरपालिका उपाध्यक्ष गोपाल शर्मा ने जनप्रतिनिधियों और प्रशासन का ध्यान शहर की गंभीर समस्याओं की ओर आकर्षित किया। उन्होंने बताया कि आगामी दो माह बाद लोकदेवता बाबा रामदेवजी का विशाल मेला शुरू होगा, जिसमें लाखों श्रद्धालु पोकरण और रामदेवरा पहुंचेंगे। ऐसी स्थिति में, शहर की जर्जर सड़कें और बदहाल व्यवस्थाएं श्रद्धालुओं के बीच एक गलत संदेश दे रही हैं। उन्होंने प्रशासन से मेले से पहले सभी प्रमुख मार्गों की मरम्मत करवाने और आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने की मांग की।1