विदिशा जिले के पीपलखेड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की गंभीर लापरवाही सामने आई है। एक युवक, जिसने जहरीला पदार्थ पी लिया था, उसे जब परिजन अस्पताल लेकर पहुंचे तो वहां कोई भी ड्यूटी डॉक्टर मौजूद नहीं था। मरीज लगभग आधे घंटे तक अस्पताल में तड़पता रहा और उसके इलाज की जिम्मेदारी केवल दो नर्सों के भरोसे रही, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यह मामला पीपलखेड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का है, जहां पीपलखेड़ा निवासी सत्यम केवट, पिता सेवाराम केवट, ने अज्ञात कारणों से जहरीला पदार्थ पी लिया था। उसकी हालत बिगड़ने पर परिजन उसे तत्काल अस्पताल ले गए, लेकिन वहां कोई भी डॉक्टर ड्यूटी पर नहीं मिला। अस्पताल में मौजूद दो नर्सों ने युवक को प्राथमिक उपचार दिया, लेकिन डॉक्टर की अनुपस्थिति के कारण उसे समय पर विशेषज्ञ इलाज नहीं मिल पाया। परिजनों ने आरोप लगाया है कि युवक करीब आधे घंटे तक अस्पताल में दर्द से कराहता रहा, जबकि डॉक्टर का कमरा और कुर्सियां खाली पड़ी थीं। जब इस मामले में अस्पताल स्टाफ से डॉक्टर की अनुपस्थिति पर सवाल किया गया, तो पहले उन्होंने जवाब देने से इनकार कर दिया, लेकिन बाद में बताया गया कि ड्यूटी डॉक्टर डॉ. जया अधिकारी खाना खाने गई हैं। फोन पर संपर्क करने पर भी डॉक्टर ने यही जानकारी दी। प्राथमिक उपचार के बाद युवक की गंभीर हालत को देखते हुए उसे 108 एंबुलेंस की मदद से विदिशा जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर गहरा आक्रोश है। लोगों का कहना है कि यदि आपातकालीन स्थिति में भी डॉक्टर अस्पताल में उपलब्ध नहीं होंगे, तो मरीजों की जान खतरे में पड़ सकती है। पीपलखेड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर की यह अनुपस्थिति स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े करती है, और अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हुए जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई करता है।
विदिशा जिले के पीपलखेड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की गंभीर लापरवाही सामने आई है। एक युवक, जिसने जहरीला पदार्थ पी लिया था, उसे जब परिजन अस्पताल लेकर पहुंचे तो वहां कोई भी ड्यूटी डॉक्टर मौजूद नहीं था। मरीज लगभग आधे घंटे तक अस्पताल में तड़पता रहा और उसके इलाज की जिम्मेदारी केवल दो नर्सों के भरोसे रही, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यह मामला पीपलखेड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का है, जहां पीपलखेड़ा निवासी सत्यम केवट, पिता सेवाराम केवट, ने अज्ञात कारणों से जहरीला पदार्थ पी लिया था। उसकी हालत बिगड़ने पर परिजन उसे तत्काल अस्पताल ले गए, लेकिन वहां कोई भी डॉक्टर ड्यूटी पर नहीं मिला। अस्पताल में मौजूद दो नर्सों ने युवक को प्राथमिक उपचार दिया, लेकिन डॉक्टर की अनुपस्थिति के कारण उसे समय पर विशेषज्ञ इलाज नहीं मिल पाया। परिजनों ने आरोप लगाया है कि युवक करीब आधे घंटे तक अस्पताल में दर्द से कराहता रहा, जबकि डॉक्टर का कमरा और कुर्सियां खाली पड़ी थीं। जब इस मामले में अस्पताल स्टाफ से डॉक्टर की अनुपस्थिति पर सवाल किया गया, तो पहले उन्होंने जवाब देने से इनकार कर दिया, लेकिन बाद में बताया गया कि ड्यूटी डॉक्टर डॉ. जया अधिकारी खाना खाने गई हैं। फोन पर संपर्क करने पर भी डॉक्टर ने यही जानकारी दी। प्राथमिक उपचार के बाद युवक की गंभीर हालत को देखते हुए उसे 108 एंबुलेंस की मदद से विदिशा जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर गहरा आक्रोश है। लोगों का कहना है कि यदि आपातकालीन स्थिति में भी डॉक्टर अस्पताल में उपलब्ध नहीं होंगे, तो मरीजों की जान खतरे में पड़ सकती है। पीपलखेड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर की यह अनुपस्थिति स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े करती है, और अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हुए जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई करता है।
- विदिशा जिले के पीपलखेड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की गंभीर लापरवाही सामने आई है। एक युवक, जिसने जहरीला पदार्थ पी लिया था, उसे जब परिजन अस्पताल लेकर पहुंचे तो वहां कोई भी ड्यूटी डॉक्टर मौजूद नहीं था। मरीज लगभग आधे घंटे तक अस्पताल में तड़पता रहा और उसके इलाज की जिम्मेदारी केवल दो नर्सों के भरोसे रही, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यह मामला पीपलखेड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का है, जहां पीपलखेड़ा निवासी सत्यम केवट, पिता सेवाराम केवट, ने अज्ञात कारणों से जहरीला पदार्थ पी लिया था। उसकी हालत बिगड़ने पर परिजन उसे तत्काल अस्पताल ले गए, लेकिन वहां कोई भी डॉक्टर ड्यूटी पर नहीं मिला। अस्पताल में मौजूद दो नर्सों ने युवक को प्राथमिक उपचार दिया, लेकिन डॉक्टर की अनुपस्थिति के कारण उसे समय पर विशेषज्ञ इलाज नहीं मिल पाया। परिजनों ने आरोप लगाया है कि युवक करीब आधे घंटे तक अस्पताल में दर्द से कराहता रहा, जबकि डॉक्टर का कमरा और कुर्सियां खाली पड़ी थीं। जब इस मामले में अस्पताल स्टाफ से डॉक्टर की अनुपस्थिति पर सवाल किया गया, तो पहले उन्होंने जवाब देने से इनकार कर दिया, लेकिन बाद में बताया गया कि ड्यूटी डॉक्टर डॉ. जया अधिकारी खाना खाने गई हैं। फोन पर संपर्क करने पर भी डॉक्टर ने यही जानकारी दी। प्राथमिक उपचार के बाद युवक की गंभीर हालत को देखते हुए उसे 108 एंबुलेंस की मदद से विदिशा जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर गहरा आक्रोश है। लोगों का कहना है कि यदि आपातकालीन स्थिति में भी डॉक्टर अस्पताल में उपलब्ध नहीं होंगे, तो मरीजों की जान खतरे में पड़ सकती है। पीपलखेड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर की यह अनुपस्थिति स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े करती है, और अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हुए जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई करता है।1
- क्षेत्र में कई ई-रिक्शा चालकों ने शिकायत की है कि उनके वाहन चलते-चलते अचानक बंद हो जा रहे हैं। चालकों का कहना है कि इस समस्या के कारण यात्रियों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। तकनीकी विशेषज्ञों ने इस परेशानी के पीछे कई प्रमुख कारण बताए हैं, जिनमें बैटरी की खराबी, ढीले वायर कनेक्शन, कंट्रोलर में खराबी, मोटर का ओवरहीट होना या चार्जिंग सिस्टम की समस्या शामिल हो सकती है। विशेषज्ञों ने ई-रिक्शा चालकों को सलाह दी है कि वे अपने वाहन की नियमित सर्विसिंग करवाएं, बैटरी और वायरिंग की समय-समय पर जांच करें और किसी भी छोटी-मोटी खराबी को नजरअंदाज न करें। उन्होंने जोर दिया कि यदि यह समस्या बार-बार आती है, तो सड़क पर दुर्घटना या अन्य किसी बड़ी परेशानी से बचने के लिए वाहन को किसी अधिकृत सर्विस सेंटर पर जांच करवाना अत्यंत आवश्यक है।1
- सुरक्षा के मद्देनजर, यह स्पष्ट संदेश दिया गया है कि सीसीटीवी कैमरे अवश्य लगाए जाने चाहिए। इस पहल को सुरक्षा उपायों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया गया है।1
- विदिशा के सिरोंज में जिला कुशवाहा समाज ने एक निजी क्लीनिक, संजीवनी हॉस्पिटल, के कथित अवैध संचालन पर कड़ी कार्रवाई करते हुए उसे पर बुलडोजर चलाने की जोरदार मांग की है। समाज के लोगों ने कलेक्टर और एसपी को एक लिखित ज्ञापन सौंपकर बताया कि इस अस्पताल के संचालक डॉक्टर संजीव माथुर पर उनकी समाज की एक बेटी के साथ 'गलत काम' करने का आरोप है, जिसके संबंध में एफआईआर भी दर्ज की गई थी और आरोपी डॉक्टर को गिरफ्तार भी किया जा चुका है। इसके बावजूद, यह हॉस्पिटल अभी भी संचालित हो रहा है, जिसे समाज अवैध करार दे रहा है। कुशवाहा समाज ने आरोप लगाया कि आरोपी डॉक्टर के लोगों द्वारा शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने प्रशासन से इस अवैध अस्पताल की बारीकी से जांच करने, आयुष्मान योजना में संभावित गड़बड़ी समेत अन्य विषयों पर गौर करने और अंततः इसे बुलडोजर चलाकर 'जमींदोज' करने की अपील की है। समाज ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो वे 'उग्र आंदोलन' करेंगे। इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए संयुक्त कलेक्टर नितिन जैन ने जानकारी दी है कि मामले की जांच की जा रही है और प्राप्त ज्ञापन को वरिष्ठ अधिकारियों के पास भेजा जाएगा।4
- विदिशा जिले के गंजबासौदा स्थित बेदनखेड़ी में श्री जगदीश स्वामी चतोर मंदिर में जीर्णोद्धार का कार्य तेज बारिश के बावजूद लगातार जारी है। मंदिर के वार्ड नंबर 23 में स्थित इस स्थल पर जीर्णोद्धार का काम प्रगति पर है।1
- गंजबासौदा पुलिस ने ग्राम गमाकर में हुए जानलेवा हमले और लूट की गंभीर वारदात का 24 घंटे के भीतर सफलतापूर्वक खुलासा किया है। पुलिस अधीक्षक श्री रोहित काशवानी के निर्देशन और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. प्रशांत चौबे तथा एसडीओपी श्रीमती शिखा भलावी के मार्गदर्शन में देहात थाना पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से ₹10,000 नगद, एक सोने की नाक की लौंग और सोने के कान के टॉप्स सहित कुल अनुमानित ₹35,000 का मशरूका जब्त किया गया। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान ग्राम गमाकर निवासी 26 वर्षीय छोटू कुशवाह (पिता बृजेश कुशवाह), धूसरपुरा, जैन मंदिर के पास, गंजबासौदा निवासी 22 वर्षीय रानू जैन (पिता स्व. सुभाष जैन), और धूसरपुरा, जैन मंदिर के पास निवासी 27 वर्षीय शैलेन्द्र जैन (पिता सुभाष जैन) के रूप में हुई है। इन सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें जेल भेज दिया गया।1
- भोपाल में मात्र 30 मिनट की बारिश ने आफत ला दी है, जिससे नगर निगम भोपाल के सफाई संबंधी दावों की पोल खुल गई है। वर्षा से पहले नालों की उचित सफाई न होने और मिट्टी न हटाए जाने के कारण लालघाटी गुफा मंदिर के सामने स्थित जैन नगर कॉलोनी में पानी भर गया है। इस जलभराव के कारण जैन नगर के लोग अपने घरों में कैद होने को मजबूर हो गए हैं।1