रुपवास उपखंड क्षेत्र में बढ़ती गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान के कारण, बेजुबान पक्षियों की प्यास बुझाने के लिए करुणा जीव सेवा संस्था, रुपवास के युवाओं ने एक सराहनीय पहल शुरू की है। इस भीषण गर्मी में पानी की तलाश में भटकते हुए कई पक्षी दम तोड़ देते हैं, इसी गंभीर स्थिति को ध्यान में रखते हुए यह अभियान चलाया जा रहा है। भामाशाह अमरसिंह अंदाजा के सहयोग से रुपवास के रामचरण लाल राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, राजकीय उपजिला अस्पताल और अन्य सार्वजनिक स्थानों के साथ-साथ पेड़ों पर पक्षियों के लिए पानी के परिंडे लगाए गए हैं। इस अभियान के तहत पूरे प्रखंड में अब तक 500 परिंडे सफलतापूर्वक लगाए जा चुके हैं, जबकि कुल 1000 परिंडे लगाने का संकल्प लिया गया है। पहले चरण में रुपवास के मुख्य बाजारों के साथ-साथ खानुआ, इब्राहिमपुर, कांदौली, मैरथा, चांदौली और कस्बे के अन्य सार्वजनिक स्थानों पर परिंडे स्थापित किए गए। इन परिंडों को मुख्य रूप से घने पेड़ों की शाखाओं, सरकारी भवनों की छतों और मंदिर परिसरों में बांधा गया है, जो पक्षियों की आवाजाही वाले प्रमुख स्थान हैं। केवल परिंडे बांधना ही पर्याप्त नहीं मानते हुए, संस्था ने स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं और टोली नायकों की कमेटियां बनाई हैं। इन टोलियों को सुबह और शाम नियमित रूप से परिंडों में साफ पानी भरने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस पुनीत कार्य के दौरान उपस्थित गणमान्य लोगों ने आम जनता से भी इस अभियान में शामिल होने की अपील की है। उन्होंने प्रत्येक नागरिक से अपने घर की छत, बालकनी और आंगन में कम से कम एक परिंडा लगाकर उसमें नियमित रूप से दाना-पानी रखने का आग्रह किया है, ताकि भीषण गर्मी में बेजुबान पक्षियों को जीवन मिल सके।
रुपवास उपखंड क्षेत्र में बढ़ती गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान के कारण, बेजुबान पक्षियों की प्यास बुझाने के लिए करुणा जीव सेवा संस्था, रुपवास के युवाओं ने एक सराहनीय पहल शुरू की है। इस भीषण गर्मी में पानी की तलाश में भटकते हुए कई पक्षी दम तोड़ देते हैं, इसी गंभीर स्थिति को ध्यान में रखते हुए यह अभियान चलाया जा रहा है। भामाशाह अमरसिंह अंदाजा के सहयोग से रुपवास के रामचरण लाल राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, राजकीय उपजिला अस्पताल और अन्य सार्वजनिक स्थानों के साथ-साथ पेड़ों पर पक्षियों के लिए पानी के परिंडे लगाए गए हैं। इस अभियान के तहत पूरे प्रखंड में अब तक 500 परिंडे सफलतापूर्वक लगाए जा चुके हैं, जबकि कुल 1000 परिंडे लगाने का संकल्प लिया गया है। पहले चरण में रुपवास के मुख्य बाजारों के साथ-साथ खानुआ, इब्राहिमपुर, कांदौली, मैरथा, चांदौली और कस्बे के अन्य सार्वजनिक स्थानों पर परिंडे स्थापित किए गए। इन परिंडों को मुख्य रूप से घने पेड़ों की शाखाओं, सरकारी भवनों की छतों और मंदिर परिसरों में बांधा गया है, जो पक्षियों की आवाजाही वाले प्रमुख स्थान हैं। केवल परिंडे बांधना ही पर्याप्त नहीं मानते हुए, संस्था ने स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं और टोली नायकों की कमेटियां बनाई हैं। इन टोलियों को सुबह और शाम नियमित रूप से परिंडों में साफ पानी भरने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस पुनीत कार्य के दौरान उपस्थित गणमान्य लोगों ने आम जनता से भी इस अभियान में शामिल होने की अपील की है। उन्होंने प्रत्येक नागरिक से अपने घर की छत, बालकनी और आंगन में कम से कम एक परिंडा लगाकर उसमें नियमित रूप से दाना-पानी रखने का आग्रह किया है, ताकि भीषण गर्मी में बेजुबान पक्षियों को जीवन मिल सके।
- मानवता की सेवा, करुणा और निःस्वार्थ समर्पण से भरतपुर जिले के बझेरा गाँव स्थित अपना घर आश्रम ने वैश्विक पटल पर एक स्वर्णिम अध्याय लिखा है। आधिकारिक तौर पर यह आश्रम अब दुनिया का सबसे बड़ा महिला आश्रय गृह बन गया है, और इसका नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया है। गिनीज बुक के अधिकृत जज और रिकॉर्ड टीम के प्रमुख ऋषिनाथ की टीम ने दो दिनों तक आश्रम की व्यवस्थाओं, दस्तावेजों और भवन क्षमता का गहन जमीनी सत्यापन किया। ऑनलाइन स्क्रूटनी के छह महीने बाद हुए इस ऑफलाइन वेरिफिकेशन में आश्रम की व्यवस्थाएं अंतरराष्ट्रीय मानकों से भी बेहतर पाई गईं, जिसके बाद उसे विश्व रिकॉर्ड का आधिकारिक प्रमाण पत्र सौंपा गया। अपना घर आश्रम ने अमेरिका के मियामी स्थित 'लोटस हाउस वूमन शेल्टर' का रिकॉर्ड तोड़ दिया है, जिसे अब तक दुनिया का सबसे बड़ा महिला शेल्टर माना जाता था और जहाँ लगभग 1,500 महिलाओं, युवाओं और बच्चों को आश्रय मिलता था। इसके मुकाबले, भरतपुर के अपना घर आश्रम ने 3,295 निराश्रित एवं असहाय महिलाओं के प्रमाणित आंकड़े के साथ यह कीर्तिमान स्थापित किया है। जांच के समय आश्रम में महिला आवासियों की कुल संख्या 3,473 दर्ज की गई थी, जिसमें बच्चे और बुजुर्ग शामिल नहीं हैं। आश्रम 9.10 लाख वर्ग फीट में फैला है, जिसमें 5.22 लाख वर्ग फीट क्षेत्र में आधुनिक और सर्वसुविधायुक्त निर्माण किया गया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रति व्यक्ति 100 वर्ग फुट जगह का मानक है, जबकि यहाँ प्रत्येक महिला आवासी को 126 वर्ग फुट की खुली और सम्मानजनक जगह उपलब्ध है। यहाँ आवासियों के लिए स्वच्छता, नियमित चिकित्सा और पौष्टिक भोजन की व्यवस्था की गई है। संस्थापक डॉ. बीएम भारद्वाज ने इस उपलब्धि को ईंट-पत्थरों या संसाधनों की नहीं, बल्कि उस सेवा भावना की जीत बताया जो हर बेसहारा को 'प्रभुजी' मानकर सेवा देती है। सन 2000 में बझेरा में शुरू हुई इस संस्था ने पिछले ढाई दशक में 14,710 बेसहारा महिलाओं का सफल इलाज और पुनर्वास करवाकर उन्हें उनके परिवारों से दोबारा मिलवाया है। वर्तमान में देशभर में अपना घर के 57 आश्रम संचालित हैं, जिनमें 12,000 से अधिक आवासी आश्रय पा रहे हैं, जिनमें लगभग 6,500 महिला प्रभुजी हैं।1
- भरतपुर जिले के रूपवास कस्बे के देवरी गांव में सरकारी जमीन से अवैध कब्जा हटवाना एक परिवार को भारी पड़ गया। पीड़ित पृथ्वीराज लोधा के भाई श्रीराम को कुछ दबंगों ने 27 मई को लाठी-सरिया से बुरी तरह पीटा और घर में बंद कर दिया। जब परिवार के नौ सदस्य श्रीराम को छुड़ाने गए, तो उन्हें भी बेरहमी से पीटा गया और जान से मारने की धमकी दी गई। पृथ्वीराज लोधा ने बताया कि उन्होंने कुछ समय पहले सरकारी भूमि पर सरपंच द्वारा किए गए अतिक्रमण की शिकायत प्रशासनिक अधिकारियों और जिला कलेक्टर से की थी। इस शिकायत के बाद प्रशासन ने सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटवा दिया था। पीड़ितों का आरोप है कि यह हमला उन्हीं लोगों ने किया है, जिनके अवैध कब्जे को उनकी शिकायत पर हटाया गया था और तभी से वे रंजिश रखे हुए हैं। पीड़ित परिवार ने पुलिस प्रशासन पर सबसे बड़ा आरोप लगाते हुए कहा है कि उनकी शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हो रही, जिससे दबंगों के हौसले और बुलंद हो गए हैं। पीड़ितों ने इन हमलावरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।1
- डीग जिले की कृष्ण जन्मभूमि पर चल रही ब्रज 84 कोस यात्रा के दौरान, जल महल प्लस प्रेस क्लब के पत्रकार राजेश चौधरी ने सभी श्रद्धालुओं का स्वागत और अभिनंदन किया। इस पहल के तहत, पत्रकार चौधरी ने विशेष रूप से माता-बहनों, बुजुर्गों और भाइयों से उनकी स्वास्थ्य संबंधी तकलीफों के बारे में पूछा। उन्होंने सभी ज़रूरतमंद श्रद्धालुओं को मलम, पट्टियां और गोलियां वितरित कीं। इस सेवा भाव के लिए राजेश चौधरी ने सभी श्रद्धालुओं से आशीर्वाद भी प्राप्त किया।1
- वृन्दावन में आज शाम को आई तेज आंधी और बरसात से लोगों को भीषण गर्मी से बड़ी राहत मिली है। शाम के समय पहले हल्की बारिश हुई, जिसके बाद अचानक तेज आंधी शुरू हो गई। आंधी के साथ-साथ काफी तेज बारिश भी हुई, जिससे तापमान में गिरावट आई और मौसम सुहावना हो गया। गर्मी कम होने से स्थानीय निवासियों ने राहत की सांस ली और इस मौसम परिवर्तन के लिए ईश्वर का धन्यवाद किया।1
- एक पोस्ट में 'नाले से ईद मुबारक' का संदेश देते हुए मसानी नाले को बंद करने की पुरज़ोर मांग उठाई गई है। इसमें जनता से अपील की गई है कि वे अपनी राय 'हाँ' या 'ना' में कमेंट करके बताएं कि मसानी नाला बंद होना चाहिए या नहीं। यह अपील 'यमुना मिशन 2027' के संदर्भ में की गई है।1
- मुंबई की एक रिहायशी सोसाइटी में मुस्लिमों द्वारा कुर्बानी के लिए बकरे लाए जाने के बाद, स्थानीय हिंदू लोगों ने उसी सोसाइटी में एक सुअर लाकर जवाब दिया है। इस घटना को 'जैसे को तैसा' और 'ईंट का जवाब पत्थर से' बताते हुए, कहा गया है कि जो जिस भाषा को समझेगा, उसे उसी भाषा में समझाया जाएगा। यह पलटवार मुंबई की सोसाइटी में एक तीखी प्रतिक्रिया के रूप में सामने आया है।1
- बद्रीनाथ धाम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, बद्रीनाथ धाम में दर्शनों के लिए भारी संख्या में भक्तगण पहुँच रहे हैं।1
- रुपवास उपखंड क्षेत्र में बढ़ती गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान के कारण, बेजुबान पक्षियों की प्यास बुझाने के लिए करुणा जीव सेवा संस्था, रुपवास के युवाओं ने एक सराहनीय पहल शुरू की है। इस भीषण गर्मी में पानी की तलाश में भटकते हुए कई पक्षी दम तोड़ देते हैं, इसी गंभीर स्थिति को ध्यान में रखते हुए यह अभियान चलाया जा रहा है। भामाशाह अमरसिंह अंदाजा के सहयोग से रुपवास के रामचरण लाल राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, राजकीय उपजिला अस्पताल और अन्य सार्वजनिक स्थानों के साथ-साथ पेड़ों पर पक्षियों के लिए पानी के परिंडे लगाए गए हैं। इस अभियान के तहत पूरे प्रखंड में अब तक 500 परिंडे सफलतापूर्वक लगाए जा चुके हैं, जबकि कुल 1000 परिंडे लगाने का संकल्प लिया गया है। पहले चरण में रुपवास के मुख्य बाजारों के साथ-साथ खानुआ, इब्राहिमपुर, कांदौली, मैरथा, चांदौली और कस्बे के अन्य सार्वजनिक स्थानों पर परिंडे स्थापित किए गए। इन परिंडों को मुख्य रूप से घने पेड़ों की शाखाओं, सरकारी भवनों की छतों और मंदिर परिसरों में बांधा गया है, जो पक्षियों की आवाजाही वाले प्रमुख स्थान हैं। केवल परिंडे बांधना ही पर्याप्त नहीं मानते हुए, संस्था ने स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं और टोली नायकों की कमेटियां बनाई हैं। इन टोलियों को सुबह और शाम नियमित रूप से परिंडों में साफ पानी भरने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस पुनीत कार्य के दौरान उपस्थित गणमान्य लोगों ने आम जनता से भी इस अभियान में शामिल होने की अपील की है। उन्होंने प्रत्येक नागरिक से अपने घर की छत, बालकनी और आंगन में कम से कम एक परिंडा लगाकर उसमें नियमित रूप से दाना-पानी रखने का आग्रह किया है, ताकि भीषण गर्मी में बेजुबान पक्षियों को जीवन मिल सके।1