जनपद सीतापुर के इमलिया थाना क्षेत्र के सोहाई नकारहिया गांव में डॉ. भीमराव अंबेडकर के प्रतीक 'जय भीम' झंडे को लेकर विवाद खड़ा हो गया है, जिसके चलते तनाव की स्थिति है। भीम आर्मी कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर भारी नाराजगी है। आरोप है कि गांव के एक व्यक्ति ने अपने निजी पेड़ पर जय भीम का झंडा लगाया था, जिसका कुछ लोगों ने विरोध किया और विवाद उत्पन्न हो गया। ग्रामीणों और भीम आर्मी समर्थकों का आरोप है कि घटना के समय पुलिस मौके पर मौजूद थी, लेकिन विवाद को रोकने या दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय केवल तमाशबीन बनी रही। पुलिस की इस भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं, जिससे दलित समाज और भीम आर्मी कार्यकर्ताओं में गहरा आक्रोश व्याप्त है। इस मामले पर भीम आर्मी पदाधिकारियों ने कड़ा रुख अपनाया है, उनका कहना है कि बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर करोड़ों लोगों की आस्था और सम्मान के प्रतीक हैं, और उनके नाम व विचारधारा से जुड़े झंडे का अपमान किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। संगठन ने यह सवाल भी उठाया है कि यदि किसी व्यक्ति ने अपनी निजी संपत्ति या पेड़ पर जय भीम का झंडा लगाया है, तो इसे अपराध की तरह क्यों देखा जा रहा है। भीम आर्मी ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है और चेतावनी दी है कि यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी। फिलहाल, घटना के बाद गांव और आसपास के क्षेत्रों में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि, पुलिस प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, और मामले की सत्यता व विवाद के वास्तविक कारणों की जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
जनपद सीतापुर के इमलिया थाना क्षेत्र के सोहाई नकारहिया गांव में डॉ. भीमराव अंबेडकर के प्रतीक 'जय भीम' झंडे को लेकर विवाद खड़ा हो गया है, जिसके चलते तनाव की स्थिति है। भीम आर्मी कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर भारी नाराजगी है। आरोप है कि गांव के एक व्यक्ति ने अपने निजी पेड़ पर जय भीम का झंडा लगाया था, जिसका कुछ लोगों ने विरोध किया और विवाद उत्पन्न हो गया। ग्रामीणों और भीम आर्मी समर्थकों का आरोप है कि घटना के समय पुलिस मौके पर मौजूद थी, लेकिन विवाद को रोकने या दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय केवल तमाशबीन बनी रही। पुलिस की इस भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं, जिससे दलित समाज और भीम आर्मी कार्यकर्ताओं में गहरा आक्रोश व्याप्त है। इस मामले पर भीम आर्मी पदाधिकारियों ने कड़ा रुख अपनाया है, उनका कहना है कि बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर करोड़ों लोगों
की आस्था और सम्मान के प्रतीक हैं, और उनके नाम व विचारधारा से जुड़े झंडे का अपमान किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। संगठन ने यह सवाल भी उठाया है कि यदि किसी व्यक्ति ने अपनी निजी संपत्ति या पेड़ पर जय भीम का झंडा लगाया है, तो इसे अपराध की तरह क्यों देखा जा रहा है। भीम आर्मी ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है और चेतावनी दी है कि यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी। फिलहाल, घटना के बाद गांव और आसपास के क्षेत्रों में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि, पुलिस प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, और मामले की सत्यता व विवाद के वास्तविक कारणों की जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
- जनपद सीतापुर के इमलिया थाना क्षेत्र के सोहाई नकारहिया गांव में डॉ. भीमराव अंबेडकर के प्रतीक 'जय भीम' झंडे को लेकर विवाद खड़ा हो गया है, जिसके चलते तनाव की स्थिति है। भीम आर्मी कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर भारी नाराजगी है। आरोप है कि गांव के एक व्यक्ति ने अपने निजी पेड़ पर जय भीम का झंडा लगाया था, जिसका कुछ लोगों ने विरोध किया और विवाद उत्पन्न हो गया। ग्रामीणों और भीम आर्मी समर्थकों का आरोप है कि घटना के समय पुलिस मौके पर मौजूद थी, लेकिन विवाद को रोकने या दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय केवल तमाशबीन बनी रही। पुलिस की इस भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं, जिससे दलित समाज और भीम आर्मी कार्यकर्ताओं में गहरा आक्रोश व्याप्त है। इस मामले पर भीम आर्मी पदाधिकारियों ने कड़ा रुख अपनाया है, उनका कहना है कि बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर करोड़ों लोगों की आस्था और सम्मान के प्रतीक हैं, और उनके नाम व विचारधारा से जुड़े झंडे का अपमान किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। संगठन ने यह सवाल भी उठाया है कि यदि किसी व्यक्ति ने अपनी निजी संपत्ति या पेड़ पर जय भीम का झंडा लगाया है, तो इसे अपराध की तरह क्यों देखा जा रहा है। भीम आर्मी ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है और चेतावनी दी है कि यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी। फिलहाल, घटना के बाद गांव और आसपास के क्षेत्रों में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि, पुलिस प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, और मामले की सत्यता व विवाद के वास्तविक कारणों की जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।2
- सीतापुर के बिसवां स्थित प्रसिद्ध बड़े हनुमान मंदिर में हनुमान जी की मूर्ति खंडित अवस्था में मिलने से श्रद्धालुओं में भारी आक्रोश व्याप्त हो गया है, जिससे पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। यह घटना तब सामने आई जब सुबह मंदिर के पुजारी नियमित पूजा-अर्चना के लिए मंदिर का दरवाजा खोलने पहुंचे और मूर्ति को खंडित पाया। इसके बाद मंदिर परिसर में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी और घटना की सूचना तत्काल पुलिस व प्रशासन को दी गई। इस घटना के बाद मंदिर परिसर का एक सीसीटीवी वीडियो भी सामने आया है, जो स्थानीय स्तर पर काफी चर्चा का विषय बना हुआ है। वीडियो में मंदिर का गर्भगृह और परिसर दिखाई दे रहा है। हालांकि, इस वीडियो के आधार पर घटना के वास्तविक कारणों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। पुलिस और प्रशासन इस मामले की जांच में गंभीरता से जुटे हुए हैं और सीसीटीवी फुटेज की भी बारीकी से पड़ताल की जा रही है। मूर्ति खंडित होने की खबर फैलते ही श्रद्धालुओं में गहरा रोष व्याप्त हो गया है। लोगों ने घटना की निष्पक्ष जांच कराने और इसमें शामिल दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। वहीं, प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील करते हुए यह स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने के बाद ही घटना के वास्तविक कारण सामने आ सकेंगे। फिलहाल, पूरे क्षेत्र में इस घटना को लेकर चर्चा का माहौल गर्म है और श्रद्धालु जल्द से जल्द सच्चाई सामने आने की मांग कर रहे हैं।2
- दिल्ली से मीनाक्षी नटराजन जी पर राज्यसभा नामांकन के फॉर्म 26 में जानकारी छिपाने का आरोप लगाया गया है। इस आरोप के जवाब में, उन्होंने स्पष्ट किया है कि उन्होंने कोई भी जानकारी नहीं छिपाई है। उन्होंने बताया कि फॉर्म 26 में राजनीतिक दल की जानकारी, मतदाता सूची में उम्मीदवार का क्रमांक, फोन नंबर, ई-मेल, पैन और इनकम टैक्स रिटर्न की जानकारी, तथा संपत्ति और अन्य चीजों का विवरण मांगा जाता है। हालाँकि, विवाद उन बिंदुओं पर केंद्रित है जहाँ उम्मीदवार के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों और किसी दंडनीय अपराध के लिए दोषी ठहराए जाने संबंधी मामलों का विवरण मांगा जाता है। मीनाक्षी नटराजन जी ने कहा कि उन्होंने फॉर्म 26 में यह जानकारी दी थी कि उन पर ऐसा कुछ भी लागू नहीं है, क्योंकि उन पर केवल एक 'लीगल नोटिस' है, जिसका अदालत ने अभी तक संज्ञान तक नहीं लिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसी 'प्राइवेट कंप्लेंट' की जानकारी देने के लिए फॉर्म 26 में कोई विशेष कॉलम नहीं था। उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि ऐसा कोई कॉलम होता, तो वे निश्चित रूप से यह सूचना देतीं। नटराजन जी के अनुसार, यह बिल्कुल स्पष्ट है कि न तो फॉर्म में कोई कमी थी और न ही कोई मांगी गई जानकारी छिपाई गई; जो भी जानकारी मांगी गई, वह फॉर्म 26 के तहत पूर्ण रूप से दी गई थी।1
- लखनऊ की डीसीपी यातायात रवीना त्यागी का जमीनी अभियान लगातार जारी है, जिसके तहत वह राजधानी की यातायात व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने में जुटी हुई हैं। इसी क्रम में, हजरतगंज चौराहे पर एक विशेष चेकिंग अभियान चलाया गया। इस अभियान के दौरान हजारों ई-रिक्शा चालकों का सत्यापन कराया गया, वहीं चेकिंग के क्रम में यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले कई ई-रिक्शा को सीज भी किया गया। डीसीपी ने स्पष्ट किया कि यातायात नियमों का पालन सभी के लिए आवश्यक है। यह सख्त कदम ऑटो रिक्शा में महिलाओं के साथ हुई घटनाओं को ध्यान में रखते हुए उठाए गए हैं। राजधानी में प्रत्येक ई-रिक्शा और ऑटो रिक्शा चालकों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है, ताकि महिलाएं व युवतियां इन वाहनों में खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें।1
- उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के एक जवान ने पुलिस विभाग में पोस्टिंग को लेकर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। जवान के मुताबिक, विभाग में 'जैसा पैसा, वैसी पोस्टिंग' का चलन है, यानी पोस्टिंग के लिए पैसे देना अनिवार्य है। उसने स्पष्ट रूप से कहा कि अगर 'साहब' को रिश्वत नहीं दी जाती, तो उन्हें बाथरूम धोने जैसे अवांछित काम करने पड़ते हैं। यह बयान पुलिस अधिकारियों के रवैये पर सीधा सवाल उठाता है और पूछ रहा है कि क्या वे वाकई 'काले अंग्रेज' हैं।1
- सीतापुर जिले के लहरपुर में मोहर्रम के संबंध में एक अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें कानून व्यवस्था बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया।1
- सीतापुर के बिसवां कस्बे में स्थित एक ऐतिहासिक हनुमान मंदिर में स्थापित लगभग 150 वर्ष पुरानी हनुमान जी की प्रतिमा के खंडित होने से क्षेत्र में सनसनी फैल गई है। मिट्टी से निर्मित यह प्राचीन प्रतिमा सुबह पूजा-अर्चना के दौरान अचानक आधी टूट गई, जिससे इसका एक हिस्सा नीचे गिर गया। इस घटना की जानकारी मिलते ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का भारी सैलाब उमड़ पड़ा और पूरे इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं होने लगीं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, वर्षों पुरानी प्रतिमा का ऊपरी हिस्सा टूटकर नीचे गिरा, जिस पर श्रद्धालुओं ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए मंदिर की सुरक्षा और संरक्षण को लेकर चिंता जताई। घटना के बाद किसी भी प्रकार की अफवाह या तनाव की स्थिति को देखते हुए पुलिस प्रशासन तुरंत मौके पर पहुंचा। पुलिस अधिकारियों ने मंदिर परिसर का निरीक्षण किया और मामले की गंभीरता को देखते हुए फॉरेंसिक टीम को भी बुलाया, जिसने प्रतिमा के टूटने के कारणों की जांच शुरू कर दी है। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और शांति बनाए रखने की अपील की है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रथम दृष्टया यह मामला प्रतिमा के पुराने और जर्जर होने से जुड़ा प्रतीत हो रहा है, हालांकि सभी पहलुओं की गहनता से जांच की जा रही है और जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी। इस घटना के बाद क्षेत्र के श्रद्धालुओं में भावनात्मक माहौल है, और मंदिर समिति व स्थानीय प्रशासन द्वारा प्रतिमा के संरक्षण तथा पुनर्स्थापन को लेकर विचार-विमर्श किया जा रहा है।1
- सीतापुर जनपद के महमूदाबाद के अंतर्गत सहजनी गांव में सफाई न होने के कारण एक महामारी फैल गई है। इस स्थिति के लिए नगर पालिका प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है, और यह सवाल उठ रहा है कि इस गंभीर समस्या का जिम्मेदार कौन है।2