बुंदेलखण्ड झाँसी के बबीना फील्ड फायरिंग रेंज में 12 दिवसीय सैन्य अभ्यास बुंदेलखण्ड #झाँसी के बबीना फील्ड फायरिंग रेंज में 12 दिवसीय सैन्य अभ्यास 'अमोध ज्वाला' का बुधवार को समापन हो गया। इसमें आधुनिक युद्ध तकनीकों के परीक्षण के साथ थल और वायु सेना के संयुक्त ऑपरेशन का प्रदर्शन हुआ। सेना ने लड़ाकू हेलीकॉप्टरों, टैंक, ड्रोन, मानव रहित हवाई प्रणाली की मदद से अपना पराक्रम दिखाया। जवाबी ड्रोन सिस्टम के साथ मजबूत एयर डिफेंस को भी परखा गया। सैन्य अभ्यास 6 मार्च से 18 मार्च तक चला। बबीना फील्ड फायरिंग रेंज में 6 मार्च को अमोध ज्वाला सैन्य अभ्यास शुरू हुआ। 18 मार्च तक चले सैन्य अभ्यास में भारतीय सेना की दक्षिणी कमान ने हिस्सा लिया। जिसमें नई परिचालन अवधारणा, बल संरचना समेत उसके प्रोटोकॉल की विभिन्न श्रेणियों का परीक्षण किया गया। सैन्य अभ्यास में यूएएस ड्रोन एवं जवाबी यूएएस अभियान के लिए हवाई क्षेत्र प्रबंधन को शामिल किया गया। इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर, एयर डिफेंस और रात्रि युद्ध क्षमता के साथ खुफिया, निगरानी और टोही संसाधनों के प्रभावी समन्वय को परखा गया। आखिरी दिन सभी के बीच तालमेल का परीक्षण हुआ। सेना के सीनियर अफसरों ने जायजा लिया दक्षिणी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ समेत अन्य वरिष्ठ सैन्य अफसर भी अभ्यास सत्र के दौरान मौजूद रहे। उन्होंने सैनिकों को उनकी दक्षता एवं युद्ध तत्परता के लिए बधाई दी। सैन्य अफसरों ने युद्ध मैदान के बदलते परिदृश्य को देखते हुए तकनीकी के इस्तेमाल पर जोर देते हुए कहा कि तकनीकी के साथ थल, वायु, साइबर, अंतरिक्ष, खुफिया निगरानी एवं टोही (आईएसआर) तथा इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (ईडब्ल्यू) क्षमताओं का समन्वित उपयोग करने की जरूरत है। #हिन्दी_खबर #हिन्दी_न्यूज #viralpost #latestnews #upnews #Jhansi @Jaybajnibabakhadowara subscribe/share करें
बुंदेलखण्ड झाँसी के बबीना फील्ड फायरिंग रेंज में 12 दिवसीय सैन्य अभ्यास बुंदेलखण्ड #झाँसी के बबीना फील्ड फायरिंग रेंज में 12 दिवसीय सैन्य अभ्यास 'अमोध ज्वाला' का बुधवार को समापन हो गया। इसमें आधुनिक युद्ध तकनीकों के परीक्षण के साथ थल और वायु सेना के संयुक्त ऑपरेशन का प्रदर्शन हुआ। सेना ने लड़ाकू हेलीकॉप्टरों, टैंक, ड्रोन, मानव रहित हवाई प्रणाली की मदद से अपना पराक्रम दिखाया। जवाबी ड्रोन सिस्टम के साथ मजबूत एयर डिफेंस को भी परखा गया। सैन्य अभ्यास 6 मार्च से 18 मार्च तक चला। बबीना फील्ड फायरिंग रेंज में 6 मार्च को अमोध ज्वाला सैन्य अभ्यास शुरू हुआ। 18 मार्च तक चले सैन्य अभ्यास में भारतीय सेना की दक्षिणी कमान ने हिस्सा लिया। जिसमें नई परिचालन अवधारणा, बल संरचना समेत उसके प्रोटोकॉल की विभिन्न श्रेणियों का परीक्षण किया गया। सैन्य अभ्यास में यूएएस ड्रोन एवं जवाबी यूएएस अभियान के लिए हवाई क्षेत्र प्रबंधन को शामिल किया गया। इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर, एयर डिफेंस और रात्रि युद्ध क्षमता के साथ खुफिया, निगरानी और टोही संसाधनों के प्रभावी समन्वय को परखा गया। आखिरी दिन सभी के बीच तालमेल का परीक्षण हुआ। सेना के सीनियर अफसरों ने जायजा लिया दक्षिणी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ समेत अन्य वरिष्ठ सैन्य अफसर भी अभ्यास सत्र के दौरान मौजूद रहे। उन्होंने सैनिकों को उनकी दक्षता एवं युद्ध तत्परता के लिए बधाई दी। सैन्य अफसरों ने युद्ध मैदान के बदलते परिदृश्य को देखते हुए तकनीकी के इस्तेमाल पर जोर देते हुए कहा कि तकनीकी के साथ थल, वायु, साइबर, अंतरिक्ष, खुफिया निगरानी एवं टोही (आईएसआर) तथा इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (ईडब्ल्यू) क्षमताओं का समन्वित उपयोग करने की जरूरत है। #हिन्दी_खबर #हिन्दी_न्यूज #viralpost #latestnews #upnews #Jhansi @Jaybajnibabakhadowara subscribe/share करें
- बुंदेलखण्ड #झाँसी के बबीना फील्ड फायरिंग रेंज में 12 दिवसीय सैन्य अभ्यास 'अमोध ज्वाला' का बुधवार को समापन हो गया। इसमें आधुनिक युद्ध तकनीकों के परीक्षण के साथ थल और वायु सेना के संयुक्त ऑपरेशन का प्रदर्शन हुआ। सेना ने लड़ाकू हेलीकॉप्टरों, टैंक, ड्रोन, मानव रहित हवाई प्रणाली की मदद से अपना पराक्रम दिखाया। जवाबी ड्रोन सिस्टम के साथ मजबूत एयर डिफेंस को भी परखा गया। सैन्य अभ्यास 6 मार्च से 18 मार्च तक चला। बबीना फील्ड फायरिंग रेंज में 6 मार्च को अमोध ज्वाला सैन्य अभ्यास शुरू हुआ। 18 मार्च तक चले सैन्य अभ्यास में भारतीय सेना की दक्षिणी कमान ने हिस्सा लिया। जिसमें नई परिचालन अवधारणा, बल संरचना समेत उसके प्रोटोकॉल की विभिन्न श्रेणियों का परीक्षण किया गया। सैन्य अभ्यास में यूएएस ड्रोन एवं जवाबी यूएएस अभियान के लिए हवाई क्षेत्र प्रबंधन को शामिल किया गया। इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर, एयर डिफेंस और रात्रि युद्ध क्षमता के साथ खुफिया, निगरानी और टोही संसाधनों के प्रभावी समन्वय को परखा गया। आखिरी दिन सभी के बीच तालमेल का परीक्षण हुआ। सेना के सीनियर अफसरों ने जायजा लिया दक्षिणी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ समेत अन्य वरिष्ठ सैन्य अफसर भी अभ्यास सत्र के दौरान मौजूद रहे। उन्होंने सैनिकों को उनकी दक्षता एवं युद्ध तत्परता के लिए बधाई दी। सैन्य अफसरों ने युद्ध मैदान के बदलते परिदृश्य को देखते हुए तकनीकी के इस्तेमाल पर जोर देते हुए कहा कि तकनीकी के साथ थल, वायु, साइबर, अंतरिक्ष, खुफिया निगरानी एवं टोही (आईएसआर) तथा इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (ईडब्ल्यू) क्षमताओं का समन्वित उपयोग करने की जरूरत है। #हिन्दी_खबर #हिन्दी_न्यूज #viralpost #latestnews #upnews #Jhansi @Jaybajnibabakhadowara subscribe/share करें1
- जनपद ललितपुर में मौसम ने ली करवट, अन्नदाता किसानों की बढ़ी चिंता, ललितपुर में हुई ओलावृष्टि से किसानों की फसल हुई नष्ट, ब्लाक बार के करमई, बरोदिया राईन, बछलापुर से ओलावृष्टि के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, किसानों ने प्रशासन से सर्वे कराकर पीड़ितों को उचित मुआवजे की मांग, ललितपुर से रामजी तिवारी मड़ावरा की रिपोर्ट1
- पाली में सुबह से छाए बादल, कोहरे की चादर, मौसम हुआ ठंडा पाली। पाली व तहसील क्षेत्र में मौसम ने अचानक करवट ले ली है। कल दोपहर बाद क्षेत्र में बेमौसम बारिश हुई, जिसके साथ तेज हवाएं चलीं और बड़ी मात्रा में ओलावृष्टि भी दर्ज की गई। कई स्थानों पर बड़े आकार के ओले गिरने से जनजीवन प्रभावित हुआ और फसलों को भी नुकसान की आशंका जताई जा रही है। बारिश और ओलावृष्टि के बाद तापमान में गिरावट दर्ज की गई, जिससे मौसम में ठंडक बढ़ गई है। आज सुबह से ही आसमान में घने बादल छाए हुए हैं और क्षेत्र कोहरे की चादर में लिपटा हुआ है। कोहरे के कारण सूर्य के दर्शन नहीं हो पाए, जिससे दिन की शुरुआत भी ठिठुरन भरी रही। सुबह के समय दृश्यता कम होने से राहगीरों और वाहन चालकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। ठंडी हवाओं और नमी के चलते लोगों ने गर्म कपड़ों का सहारा लेना शुरू कर दिया है। स्थानीय लोगों के अनुसार, अचानक बदले इस मौसम ने जनजीवन की रफ्तार धीमी कर दी है। वहीं किसानों के लिए यह स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है, क्योंकि ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान पहुंचने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले कुछ समय तक बादल छाए रहने और हल्की ठंड बनी रहने की संभावना है। प्रशासन ने लोगों से सावधानी बरतने और आवश्यक होने पर ही घर से बाहर निकलने की अपील की है।1
- GROWTH CENTRE CHIRGAON TALAB PURA HANUMAN CHALISA JI KI BAGIYA MOBILE 9559736206 PHONE 88402557061
- Post by Jamil khan1
- Post by अखंड भारत न्यूज जिला संवाददाता1
- Post by ललित दुबे (न्यूज दिगौड़ा)1
- बेमौसम खराब मौसम ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। क्षेत्र में तेज गर्जना के साथ चली आंधी, बारिश और ओलावृष्टि ने रबी की खड़ी फसलों को भारी नुकसान पाली ।पाली तहसील में बेमौसम खराब मौसम ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। क्षेत्र में तेज गर्जना के साथ चली आंधी, बारिश और ओलावृष्टि ने रबी की खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। घटना के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिनमें खेतों में बिछी फसलें और गिरते ओले साफ देखे जा सकते हैं। अचानक बदला मौसम, मची अफरा-तफरी शुक्रवार को दोपहर बाद मौसम ने अचानक करवट ली। पहले तेज हवाएं चलीं, इसके बाद काले बादल छा गए और देखते ही देखते गरज-चमक के साथ तेज बारिश शुरू हो गई। कुछ ही देर में ओलावृष्टि होने लगी, जिससे खेतों में खड़ी फसलें बुरी तरह प्रभावित हुईं। रबी फसल पर सबसे ज्यादा असर इस समय क्षेत्र में गेहूं, राई सहित अन्य रबी फसलें पकने की अवस्था में हैं। तेज हवा और ओलों के कारण फसलें खेतों में गिर गईं, जिससे उत्पादन में भारी गिरावट की आशंका है। कई किसानों ने बताया कि फसल कटाई के करीब थी, ऐसे में यह नुकसान उनके लिए बड़ा झटका है। फलदार पेड़ों को भी नुकसान केवल अनाज ही नहीं, बल्कि आम और जामुन जैसे फलदार पेड़ों को भी इस बेमौसम मार का सामना करना पड़ा है। तेज हवा और ओलों की वजह से पेड़ों पर लगे कच्चे फल टूटकर गिर गए, जिससे आने वाले सीजन की पैदावार प्रभावित हो सकती है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो घटना के कई वीडियो स्थानीय लोगों द्वारा मोबाइल में रिकॉर्ड किए गए, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। इन वीडियो में ओलों की तेज बौछार, हवा की रफ्तार और खेतों में बिछी फसलें साफ देखी जा सकती हैं। किसानों ने जताई चिंता स्थानीय किसानों का कहना है कि इस प्राकृतिक आपदा ने उनकी महीनों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। उन्होंने प्रशासन से सर्वे कराकर उचित मुआवजा देने की मांग की है। प्रशासन से मदद की उम्मीद किसान अब जिला प्रशासन की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं। यदि जल्द सर्वे कर नुकसान का आकलन किया जाता है, तो प्रभावित किसानों को राहत मिल सकती है। इस बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने एक बार फिर मौसम की अनिश्चितता को उजागर कर दिया है, जिससे किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।1