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जनपद ललितपुर में मौसम ने ली करवट, अन्नदाता किसानों की बढ़ी चिंता, ललितपुर में हुई ओलावृष्टि से किसानों की फसल हुई नष्ट, जनपद ललितपुर में मौसम ने ली करवट, अन्नदाता किसानों की बढ़ी चिंता, ललितपुर में हुई ओलावृष्टि से किसानों की फसल हुई नष्ट, ब्लाक बार के करमई, बरोदिया राईन, बछलापुर से ओलावृष्टि के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, किसानों ने प्रशासन से सर्वे कराकर पीड़ितों को उचित मुआवजे की मांग, ललितपुर से रामजी तिवारी मड़ावरा की रिपोर्ट
पत्रकार रामजी तिवारी मड़ावरा
जनपद ललितपुर में मौसम ने ली करवट, अन्नदाता किसानों की बढ़ी चिंता, ललितपुर में हुई ओलावृष्टि से किसानों की फसल हुई नष्ट, जनपद ललितपुर में मौसम ने ली करवट, अन्नदाता किसानों की बढ़ी चिंता, ललितपुर में हुई ओलावृष्टि से किसानों की फसल हुई नष्ट, ब्लाक बार के करमई, बरोदिया राईन, बछलापुर से ओलावृष्टि के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, किसानों ने प्रशासन से सर्वे कराकर पीड़ितों को उचित मुआवजे की मांग, ललितपुर से रामजी तिवारी मड़ावरा की रिपोर्ट
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- बुंदेलखण्ड #झाँसी के बबीना फील्ड फायरिंग रेंज में 12 दिवसीय सैन्य अभ्यास 'अमोध ज्वाला' का बुधवार को समापन हो गया। इसमें आधुनिक युद्ध तकनीकों के परीक्षण के साथ थल और वायु सेना के संयुक्त ऑपरेशन का प्रदर्शन हुआ। सेना ने लड़ाकू हेलीकॉप्टरों, टैंक, ड्रोन, मानव रहित हवाई प्रणाली की मदद से अपना पराक्रम दिखाया। जवाबी ड्रोन सिस्टम के साथ मजबूत एयर डिफेंस को भी परखा गया। सैन्य अभ्यास 6 मार्च से 18 मार्च तक चला। बबीना फील्ड फायरिंग रेंज में 6 मार्च को अमोध ज्वाला सैन्य अभ्यास शुरू हुआ। 18 मार्च तक चले सैन्य अभ्यास में भारतीय सेना की दक्षिणी कमान ने हिस्सा लिया। जिसमें नई परिचालन अवधारणा, बल संरचना समेत उसके प्रोटोकॉल की विभिन्न श्रेणियों का परीक्षण किया गया। सैन्य अभ्यास में यूएएस ड्रोन एवं जवाबी यूएएस अभियान के लिए हवाई क्षेत्र प्रबंधन को शामिल किया गया। इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर, एयर डिफेंस और रात्रि युद्ध क्षमता के साथ खुफिया, निगरानी और टोही संसाधनों के प्रभावी समन्वय को परखा गया। आखिरी दिन सभी के बीच तालमेल का परीक्षण हुआ। सेना के सीनियर अफसरों ने जायजा लिया दक्षिणी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ समेत अन्य वरिष्ठ सैन्य अफसर भी अभ्यास सत्र के दौरान मौजूद रहे। उन्होंने सैनिकों को उनकी दक्षता एवं युद्ध तत्परता के लिए बधाई दी। सैन्य अफसरों ने युद्ध मैदान के बदलते परिदृश्य को देखते हुए तकनीकी के इस्तेमाल पर जोर देते हुए कहा कि तकनीकी के साथ थल, वायु, साइबर, अंतरिक्ष, खुफिया निगरानी एवं टोही (आईएसआर) तथा इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (ईडब्ल्यू) क्षमताओं का समन्वित उपयोग करने की जरूरत है। #हिन्दी_खबर #हिन्दी_न्यूज #viralpost #latestnews #upnews #झाँसी @Jaybajnibabakhadowara subscribe/share करें1
- बेमौसम खराब मौसम ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। क्षेत्र में तेज गर्जना के साथ चली आंधी, बारिश और ओलावृष्टि ने रबी की खड़ी फसलों को भारी नुकसान पाली ।पाली तहसील में बेमौसम खराब मौसम ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। क्षेत्र में तेज गर्जना के साथ चली आंधी, बारिश और ओलावृष्टि ने रबी की खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। घटना के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिनमें खेतों में बिछी फसलें और गिरते ओले साफ देखे जा सकते हैं। अचानक बदला मौसम, मची अफरा-तफरी शुक्रवार को दोपहर बाद मौसम ने अचानक करवट ली। पहले तेज हवाएं चलीं, इसके बाद काले बादल छा गए और देखते ही देखते गरज-चमक के साथ तेज बारिश शुरू हो गई। कुछ ही देर में ओलावृष्टि होने लगी, जिससे खेतों में खड़ी फसलें बुरी तरह प्रभावित हुईं। रबी फसल पर सबसे ज्यादा असर इस समय क्षेत्र में गेहूं, राई सहित अन्य रबी फसलें पकने की अवस्था में हैं। तेज हवा और ओलों के कारण फसलें खेतों में गिर गईं, जिससे उत्पादन में भारी गिरावट की आशंका है। कई किसानों ने बताया कि फसल कटाई के करीब थी, ऐसे में यह नुकसान उनके लिए बड़ा झटका है। फलदार पेड़ों को भी नुकसान केवल अनाज ही नहीं, बल्कि आम और जामुन जैसे फलदार पेड़ों को भी इस बेमौसम मार का सामना करना पड़ा है। तेज हवा और ओलों की वजह से पेड़ों पर लगे कच्चे फल टूटकर गिर गए, जिससे आने वाले सीजन की पैदावार प्रभावित हो सकती है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो घटना के कई वीडियो स्थानीय लोगों द्वारा मोबाइल में रिकॉर्ड किए गए, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। इन वीडियो में ओलों की तेज बौछार, हवा की रफ्तार और खेतों में बिछी फसलें साफ देखी जा सकती हैं। किसानों ने जताई चिंता स्थानीय किसानों का कहना है कि इस प्राकृतिक आपदा ने उनकी महीनों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। उन्होंने प्रशासन से सर्वे कराकर उचित मुआवजा देने की मांग की है। प्रशासन से मदद की उम्मीद किसान अब जिला प्रशासन की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं। यदि जल्द सर्वे कर नुकसान का आकलन किया जाता है, तो प्रभावित किसानों को राहत मिल सकती है। इस बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने एक बार फिर मौसम की अनिश्चितता को उजागर कर दिया है, जिससे किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।1
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- Post by Jamil khan1
- Post by अखंड भारत न्यूज जिला संवाददाता1
- Post by ललित दुबे (न्यूज दिगौड़ा)1
- बेमौसम बारिश ने खेतों में खड़ी और कटी फसलों को भारी नुकसान पाली। पाली में शुक्रवार दोपहर अचानक बदले मौसम ने किसानों की चिंताएं बढ़ा दीं। तेज आंधी के साथ करीब आधे घंटे तक हुई बेमौसम बारिश ने खेतों में खड़ी और कटी फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। जानकारी के अनुसार दोपहर बाद अचानक मौसम ने करवट ली और देखते ही देखते आसमान में काले बादल छा गए। इसके बाद तेज हवाओं के साथ झमाझम बारिश शुरू हो गई। इस अप्रत्याशित बारिश से सबसे ज्यादा असर उन किसानों पर पड़ा, जिनकी फसल कटाई के अंतिम चरण में थी या कटकर खेतों में पड़ी थी। किसानों ने बताया कि गेहूं, चना और सरसों जैसी रबी फसलें इस समय पूरी तरह पक चुकी हैं। कई जगहों पर कटाई भी हो चुकी थी और फसल को सुखाने के लिए खेतों में ही रखा गया था। अचानक हुई बारिश से यह फसल भीग गई, जिससे दानों के खराब होने और फसल के सड़ने का खतरा बढ़ गया है। वहीं, खड़ी फसलें तेज हवा और पानी के कारण खेतों में गिर गईं, जिससे उत्पादन पर सीधा असर पड़ने की आशंका है। ग्रामीण क्षेत्रों से मिली सूचनाओं के अनुसार कई किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। फसल की गुणवत्ता खराब होने पर बाजार में उचित दाम मिलने की संभावना भी कम हो जाती है, जिससे किसानों की आय प्रभावित होगी। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की बेमौसम बारिश रबी फसलों के लिए बेहद नुकसानदायक होती है। उन्होंने किसानों को सलाह दी है कि मौसम साफ होते ही फसल को जल्द से जल्द सुखाने की व्यवस्था करें, ताकि नुकसान को कुछ हद तक कम किया जा सके। मौसम में आए इस अचानक बदलाव ने एक बार फिर यह संकेत दिया है कि बदलती जलवायु परिस्थितियां किसानों के लिए नई चुनौतियां लेकर आ रही हैं, जिनसे निपटने के लिए दीर्घकालिक रणनीति की आवश्यकता है।1