*गंगरार टोल पर किसानों से मनमानी वसूली का आरोप, ट्रैक्टर चालक से पहले नकद मांग, फिर काटी ₹200 की रसीद* गंगरार टोल प्लाजा। चित्तौड़गढ़ जिले के गंगरार टोल प्लाजा पर किसानों के साथ कथित अवैध वसूली का मामला सामने आने के बाद क्षेत्र में नाराजगी का माहौल बन गया है। गुरुवार, 26 फरवरी को सुबह करीब 7 बजे भीलवाड़ा की ओर से चित्तौड़गढ़ जा रहे एक किसान के ट्रैक्टर चालक को टोल कर्मियों द्वारा रोक लिया गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार टोल कर्मचारियों ने पहले चालक से ₹100 नकद देने की मांग की। जब चालक ने बिना रसीद पैसे देने से मना किया, तो कर्मचारियों ने कथित रूप से कहा कि अब वाहन का पूरा टोल लगेगा। इसके बाद ट्रैक्टर को टोल बूथ के अंदर ले जाकर ₹210 की रसीद काट दी गई। नियमों पर उठे सवाल किसानों का कहना है कि कृषि कार्य में उपयोग होने वाले ट्रैक्टरों पर सामान्य परिस्थितियों में टोल शुल्क नहीं लिया जाता, विशेष रूप से जब वाहन व्यावसायिक परिवहन में उपयोग नहीं हो रहा हो। ऐसे में ट्रैक्टर से टोल वसूली को लेकर किसानों ने नियमों की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं। किसानों में आक्रोश घटना की जानकारी फैलते ही आसपास के किसानों में नाराजगी बढ़ गई। किसानों का आरोप है कि टोल पर अक्सर ट्रैक्टर चालकों को परेशान किया जाता है और मौके पर नकद वसूली का दबाव बनाया जाता है। उनका कहना है कि यह सीधे-सीधे किसानों के साथ अन्याय है और उनकी आजीविका पर अतिरिक्त बोझ डालने जैसा है। प्रशासन से जांच की मांग ग्रामीणों और किसान प्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही टोल प्रबंधन को ट्रैक्टरों से संबंधित स्पष्ट नियम सार्वजनिक करने और यदि अवैध वसूली हुई है तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की भी मांग की गई है।
*गंगरार टोल पर किसानों से मनमानी वसूली का आरोप, ट्रैक्टर चालक से पहले नकद मांग, फिर काटी ₹200 की रसीद* गंगरार टोल प्लाजा। चित्तौड़गढ़ जिले के गंगरार टोल प्लाजा पर किसानों के साथ कथित अवैध वसूली का मामला सामने आने के बाद क्षेत्र में नाराजगी का माहौल बन गया है। गुरुवार, 26 फरवरी को सुबह करीब 7 बजे भीलवाड़ा की ओर से चित्तौड़गढ़ जा रहे एक किसान के ट्रैक्टर चालक को टोल कर्मियों द्वारा रोक लिया गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार टोल कर्मचारियों ने पहले चालक से ₹100 नकद देने की मांग की। जब चालक ने बिना रसीद पैसे देने से मना किया, तो कर्मचारियों ने कथित रूप से कहा कि अब वाहन का पूरा टोल लगेगा। इसके बाद ट्रैक्टर को टोल बूथ के अंदर ले जाकर ₹210 की रसीद काट दी गई। नियमों पर उठे सवाल किसानों का कहना है कि कृषि कार्य में उपयोग होने वाले ट्रैक्टरों पर सामान्य
परिस्थितियों में टोल शुल्क नहीं लिया जाता, विशेष रूप से जब वाहन व्यावसायिक परिवहन में उपयोग नहीं हो रहा हो। ऐसे में ट्रैक्टर से टोल वसूली को लेकर किसानों ने नियमों की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं। किसानों में आक्रोश घटना की जानकारी फैलते ही आसपास के किसानों में नाराजगी बढ़ गई। किसानों का आरोप है कि टोल पर अक्सर ट्रैक्टर चालकों को परेशान किया जाता है और मौके पर नकद वसूली का दबाव बनाया जाता है। उनका कहना है कि यह सीधे-सीधे किसानों के साथ अन्याय है और उनकी आजीविका पर अतिरिक्त बोझ डालने जैसा है। प्रशासन से जांच की मांग ग्रामीणों और किसान प्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही टोल प्रबंधन को ट्रैक्टरों से संबंधित स्पष्ट नियम सार्वजनिक करने और यदि अवैध वसूली हुई है तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की भी मांग की गई है।
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- भीलवाड़ा = राजस्थान विधानसभा में पंचायतीराज एवं ग्रामीण विकास विषय पर चर्चा के दौरान भीलवाड़ा विधायक अशोक कोठारी ने राज्य में चरागाह एवं शमलात भूमि के संरक्षण, पुनर्जीवन और समग्र विकास को लेकर विस्तृत प्रस्ताव प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि राजस्थान तभी प्रगतिशील बनेगा जब किसान और पशुधन समृद्ध होंगे, और इसकी आधारशिला मजबूत चरागाह व्यवस्था है। विधायक कोठारी ने कहा कि रियासत काल में गोचर भूमि गौवंश संरक्षण के उद्देश्य से आरक्षित की गई थी, ताकि प्रत्येक गांव का पशुधन चारे और पानी की उपलब्धता से सुरक्षित रह सके। किंतु वर्तमान में अनेक स्थानों पर अतिक्रमण, जल संकट तथा अंग्रेजी बबूल और लेन्टाना जैसी विदेशी प्रजातियों के फैलाव के कारण चरागाह भूमि बंजर होती जा रही है, जिससे पशुपालकों और किसानों की आय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा बजट में की गई घोषणाओं का स्वागत करते हुए कहा कि चरागाह, बंजर, बीहड़, श्मशान एवं अन्य सरकारी भूमि के सीमांकन और अतिक्रमण मुक्ति हेतु जीआईएस (GIS) आधारित डिजिटल रिकॉर्ड तैयार कर “मरुधरा राजभूमि डिजिटल एटलस” बनाने की घोषणा सराहनीय कदम है। साथ ही लगभग 5 हजार करोड़ रुपये की राशि से पर्यावरण संरक्षण, वर्षा जल संचयन एवं चरागाह विकास जैसे कार्यों को बढ़ावा देने की योजना ग्रामीण विकास की दिशा में महत्वपूर्ण सिद्ध होगी। विधायक कोठारी ने सदन को अवगत कराया कि प्रदेश में 20 लाख हेक्टेयर से अधिक शमलात भूमि उपलब्ध है, जिसमें गोचर, नाड़ी, तालाबों की पाल, ओरण, देवबनी, चारणोट आदि क्षेत्र शामिल हैं। लंबे समय से उपेक्षा और अतिक्रमण के कारण इन क्षेत्रों की उत्पादकता घटती गई है, जिसका सीधा प्रभाव पशुधन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ा है। उन्होंने बताया कि अब सरकार के प्रयासों से सकारात्मक परिवर्तन दिखाई देने लगे हैं। बीज बैंक की पहल के माध्यम से गांव-गांव में देशी घास एवं पौधों के बीज एकत्र कर वर्षा ऋतु में चरागाहों और जल स्रोतों के आसपास रोपण किया जा रहा है। ग्राम पंचायतों, स्थानीय समुदायों और युवाओं की सक्रिय भागीदारी से कई स्थानों पर हरियाली लौटने लगी है। उन्होंने कहा कि भीलवाडा में लगभग 200 चरागाह विकास कार्य पंचायतों और सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से प्रगति पर हैं। जिले के मांडलगढ़ तहसील के अमरतिया गांव का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा की वहा पर भूमिगत जलस्तर, जो पहले 100 फीट से नीचे चला गया था, अब 20-25 फीट पर स्थिर है। पिछले 25 वर्षों से गांव में नई बोरिंग की आवश्यकता नहीं पड़ी है। इससे न केवल जल संकट कम हुआ है, बल्कि पशुपालकों की आय और दुग्ध उत्पादन में भी वृद्धि हुई है। विधायक कोठारी ने मांग की कि चरागाह विकास एवं जल संरक्षण कार्यों को ग्रामीण पारिस्थितिकी आधारभूत संरचना के रूप में मान्यता दी जाए तथा इन्हें राज्य स्तरीय अभियान का रूप दिया जाए। इसी संदर्भ में उन्होंने “दीनदयाल चरागाह विकास योजना” प्रारंभ करने का प्रस्ताव रखा। योजना के अंतर्गत गोचर एवं शमलात भूमि का संरक्षण, देशी चारा प्रजातियों का संवर्धन, नाड़ी-तालाब-बावड़ी संरक्षण, वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण तथा ग्रामीण समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित करने का सुझाव दिया गया। प्रथम चरण में राज्य के 10 हजार गांवों का चयन कर चरणबद्ध कार्ययोजना लागू करने की मांग की गई। उन्होंने कहा कि यह पहल केवल भूमि सुधार का विषय नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ पर्यावरण, सुरक्षित जल स्रोत और सशक्त ग्रामीण अर्थव्यवस्था का संकल्प है। यदि संगठित और निरंतर प्रयास किए जाएं तो राजस्थान की भूमि पुनः हरी-भरी हो सकती है और किसान-पशुपालकों की आय में स्थायी वृद्धि की जा सकती है।1
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- हिंदू प्रीमियर लीग चैम्पियंस ट्रॉफी -2 का आयोजन शाहपुरा भैरू लाल लक्षकार कस्बे में पहली बार हो रहे हिंदू प्रीमियर लीग का आयोजन श्री प्रताप सिंह बारहठ राजकीय महाविद्यालय के खेल प्रांगण में दिनांक 19 मार्च 2026 से किया जा रहा है। शाहपुरा स्पोर्ट्स क्लब से अवधेश शर्मा (राधे) ने बताया कि शाहपुरा स्पोर्ट्स क्लब के तत्वाधान में आयोजित हो रहे पहली बार हिंदू प्रीमियर लीग को लेकर लोगों में खुशी एवं उत्साह का माहौल है। हिंदू प्रीमियर लीग के तहत आवेदन प्रक्रिया जारी है, इस टूर्नामेंट में भीलवाड़ा जिले के लगभग 150 खिलाड़ी भाग लेने जा रहे हैं । प्रत्येक लीग मैच 12 ओवर का होगा, सेमीफाइनल व फाइनल मुकाबले 15 ओवर के होंगे। विजेता को 51 000 रुपए एवं उपविजेता को 31000 रुपए एवं ट्रॉफी के साथ सम्मानित किया जाएगा। प्रत्येक मैच में मैन ऑफ द मैच। टूर्नामेंट में मैन ऑफ द सीरीज ओर भी कही आकर्षक इनाम दिये जायेंगे।इस भव्य आयोजन में कही धर्म गुरुओं ओर संतो का भी आशीर्वाद प्राप्त होगा ।1
- Post by Lucky sukhwal1
- आयुष हॉस्पिटल, चित्तौड़गढ़ – समर्पित आयुर्वेदिक स्वास्थ्य सेवा का विश्वसनीय केंद्र चित्तौड़गढ़। शहर के आकाशवाणी चौराहा, गांधी नगर स्थित आयुष हॉस्पिटल आज क्षेत्र में समग्र (होलिस्टिक) आयुर्वेदिक चिकित्सा सेवाओं के लिए एक विश्वसनीय नाम बन चुका है। आधुनिक सुविधाओं एवं पारंपरिक आयुर्वेदिक सिद्धांतों के समन्वय से यह अस्पताल रोगियों को सुरक्षित, प्रभावी और स्थायी उपचार प्रदान कर रहा है। आयुष हॉस्पिटल एक NABH सर्टिफाइड आयुर्वेदिक अस्पताल है, जहाँ अनुभवी आयुर्वेदाचार्यों की टीम द्वारा रोग की जड़ तक पहुँचकर उपचार किया जाता है। यहाँ पंचकर्म चिकित्सा विशेष रूप से की जाती है, जो शरीर की शुद्धि, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और पुराने रोगों में लाभकारी सिद्ध हो रही है। 🏥 अस्पताल की प्रमुख सेवाएँ: • पंचकर्म थेरेपी (वमन, विरेचन, बस्ती, नस्य, रक्तमोक्षण) • जोड़ों का दर्द, सर्वाइकल, स्लिप डिस्क एवं सायटिका उपचार • मोटापा, थायरॉइड एवं डायबिटीज प्रबंधन • त्वचा रोग एवं एलर्जी उपचार • माइग्रेन, अनिद्रा एवं मानसिक तनाव प्रबंधन • स्त्री एवं पुरुष रोगों की आयुर्वेदिक चिकित्सा • आवासीय (IPD) एवं ओपीडी सुविधा • बॉडी डिटॉक्स एवं लाइफस्टाइल करेक्शन प्रोग्राम अस्पताल में स्वच्छ, शांत एवं प्राकृतिक वातावरण में मरीजों की देखभाल की जाती है। व्यक्तिगत प्रकृति (प्रकृति परीक्षा) के आधार पर आहार-विहार एवं औषधि परामर्श दिया जाता है, जिससे रोगों की पुनरावृत्ति को रोका जा सके। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल रोग का उपचार करना नहीं, बल्कि व्यक्ति को संपूर्ण रूप से स्वस्थ बनाना है। “स्वस्थ शरीर ही स्वस्थ समाज की नींव है” – इसी संकल्प के साथ आयुष हॉस्पिटल निरंतर जनसेवा में कार्यरत है। 📍 पता: आकाशवाणी चौराहा, गांधी नगर, चित्तौड़गढ़ (राजस्थान) 📞 संपर्क: 94618 08623 | 83020 83835 स्वास्थ्य संबंधी किसी भी समस्या के लिए आयुष हॉस्पिटल से संपर्क कर परामर्श लिया जा सकता है1
- Post by Narendra kumar Regar1