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विधानसभा में विधायक अशोक कोठारी ने रखी “दीनदयाल चरागाह विकास योजना” प्रारंभ करने की मांग भीलवाड़ा 26 फरवरी। राजस्थान विधानसभा में पंचायतीराज एवं ग्रामीण विकास विषय पर चर्चा के दौरान भीलवाड़ा विधायक अशोक कोठारी ने राज्य में चरागाह एवं शमलात भूमि के संरक्षण, पुनर्जीवन और समग्र विकास को लेकर विस्तृत प्रस्ताव प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि राजस्थान तभी प्रगतिशील बनेगा जब किसान और पशुधन समृद्ध होंगे, और इसकी आधारशिला मजबूत चरागाह व्यवस्था है। विधायक कोठारी ने कहा कि रियासत काल में गोचर भूमि गौवंश संरक्षण के उद्देश्य से आरक्षित की गई थी, ताकि प्रत्येक गांव का पशुधन चारे और पानी की उपलब्धता से सुरक्षित रह सके। किंतु वर्तमान में अनेक स्थानों पर अतिक्रमण, जल संकट तथा अंग्रेजी बबूल और लेन्टाना जैसी विदेशी प्रजातियों के फैलाव के कारण चरागाह भूमि बंजर होती जा रही है, जिससे पशुपालकों और किसानों की आय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा बजट में की गई घोषणाओं का स्वागत करते हुए कहा कि चरागाह, बंजर, बीहड़, श्मशान एवं अन्य सरकारी भूमि के सीमांकन और अतिक्रमण मुक्ति हेतु जीआईएस (GIS) आधारित डिजिटल रिकॉर्ड तैयार कर “मरुधरा राजभूमि डिजिटल एटलस” बनाने की घोषणा सराहनीय कदम है। साथ ही लगभग 5 हजार करोड़ रुपये की राशि से पर्यावरण संरक्षण, वर्षा जल संचयन एवं चरागाह विकास जैसे कार्यों को बढ़ावा देने की योजना ग्रामीण विकास की दिशा में महत्वपूर्ण सिद्ध होगी। विधायक कोठारी ने सदन को अवगत कराया कि प्रदेश में 20 लाख हेक्टेयर से अधिक शमलात भूमि उपलब्ध है, जिसमें गोचर, नाड़ी, तालाबों की पाल, ओरण, देवबनी, चारणोट आदि क्षेत्र शामिल हैं। लंबे समय से उपेक्षा और अतिक्रमण के कारण इन क्षेत्रों की उत्पादकता घटती गई है, जिसका सीधा प्रभाव पशुधन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ा है। उन्होंने बताया कि अब सरकार के प्रयासों से सकारात्मक परिवर्तन दिखाई देने लगे हैं। बीज बैंक की पहल के माध्यम से गांव-गांव में देशी घास एवं पौधों के बीज एकत्र कर वर्षा ऋतु में चरागाहों और जल स्रोतों के आसपास रोपण किया जा रहा है। ग्राम पंचायतों, स्थानीय समुदायों और युवाओं की सक्रिय भागीदारी से कई स्थानों पर हरियाली लौटने लगी है। उन्होंने कहा कि भीलवाडा में लगभग 200 चरागाह विकास कार्य पंचायतों और सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से प्रगति पर हैं। जिले के मांडलगढ़ तहसील के अमरतिया गांव का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा की वहा पर भूमिगत जलस्तर, जो पहले 100 फीट से नीचे चला गया था, अब 20-25 फीट पर स्थिर है। पिछले 25 वर्षों से गांव में नई बोरिंग की आवश्यकता नहीं पड़ी है। इससे न केवल जल संकट कम हुआ है, बल्कि पशुपालकों की आय और दुग्ध उत्पादन में भी वृद्धि हुई है। विधायक कोठारी ने मांग की कि चरागाह विकास एवं जल संरक्षण कार्यों को ग्रामीण पारिस्थितिकी आधारभूत संरचना के रूप में मान्यता दी जाए तथा इन्हें राज्य स्तरीय अभियान का रूप दिया जाए। इसी संदर्भ में उन्होंने “दीनदयाल चरागाह विकास योजना” प्रारंभ करने का प्रस्ताव रखा। योजना के अंतर्गत गोचर एवं शमलात भूमि का संरक्षण, देशी चारा प्रजातियों का संवर्धन, नाड़ी-तालाब-बावड़ी संरक्षण, वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण तथा ग्रामीण समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित करने का सुझाव दिया गया। प्रथम चरण में राज्य के 10 हजार गांवों का चयन कर चरणबद्ध कार्ययोजना लागू करने की मांग की गई। उन्होंने कहा कि यह पहल केवल भूमि सुधार का विषय नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ पर्यावरण, सुरक्षित जल स्रोत और सशक्त ग्रामीण अर्थव्यवस्था का संकल्प है। यदि संगठित और निरंतर प्रयास किए जाएं तो राजस्थान की भूमि पुनः हरी-भरी हो सकती है और किसान-पशुपालकों की आय में स्थायी वृद्धि की जा सकती है।

3 hrs ago
user_Narendra kumar Regar
Narendra kumar Regar
Physiotherapist भीलवाड़ा, भीलवाड़ा, राजस्थान•
3 hrs ago

विधानसभा में विधायक अशोक कोठारी ने रखी “दीनदयाल चरागाह विकास योजना” प्रारंभ करने की मांग भीलवाड़ा 26 फरवरी। राजस्थान विधानसभा में पंचायतीराज एवं ग्रामीण विकास विषय पर चर्चा के दौरान भीलवाड़ा विधायक अशोक कोठारी ने राज्य में चरागाह एवं शमलात भूमि के संरक्षण, पुनर्जीवन और समग्र विकास को लेकर विस्तृत प्रस्ताव प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि राजस्थान तभी प्रगतिशील बनेगा जब किसान और पशुधन समृद्ध होंगे, और इसकी आधारशिला मजबूत चरागाह व्यवस्था है। विधायक कोठारी ने कहा कि रियासत काल में गोचर भूमि गौवंश संरक्षण के उद्देश्य से आरक्षित की गई थी, ताकि प्रत्येक गांव का पशुधन चारे और पानी की उपलब्धता से सुरक्षित रह सके। किंतु वर्तमान में अनेक स्थानों पर अतिक्रमण, जल संकट तथा अंग्रेजी बबूल और लेन्टाना जैसी विदेशी प्रजातियों के फैलाव के कारण चरागाह भूमि बंजर होती जा रही है, जिससे पशुपालकों और किसानों की आय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा बजट में की गई घोषणाओं का स्वागत करते हुए कहा कि चरागाह, बंजर, बीहड़, श्मशान एवं अन्य सरकारी भूमि के सीमांकन और अतिक्रमण मुक्ति हेतु जीआईएस (GIS) आधारित डिजिटल रिकॉर्ड तैयार कर “मरुधरा राजभूमि डिजिटल एटलस” बनाने की घोषणा सराहनीय कदम है। साथ ही लगभग 5 हजार करोड़ रुपये की राशि से पर्यावरण संरक्षण, वर्षा जल संचयन एवं चरागाह विकास जैसे कार्यों को बढ़ावा देने की योजना ग्रामीण विकास की दिशा में महत्वपूर्ण सिद्ध होगी। विधायक कोठारी ने सदन को अवगत कराया कि प्रदेश में 20 लाख हेक्टेयर से अधिक शमलात भूमि उपलब्ध है, जिसमें गोचर, नाड़ी, तालाबों की पाल, ओरण, देवबनी, चारणोट आदि क्षेत्र शामिल हैं। लंबे समय से उपेक्षा और अतिक्रमण के कारण इन क्षेत्रों की उत्पादकता घटती गई है, जिसका सीधा प्रभाव पशुधन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ा है। उन्होंने बताया कि अब सरकार के प्रयासों से सकारात्मक परिवर्तन दिखाई देने लगे हैं। बीज बैंक की पहल के माध्यम से गांव-गांव में देशी घास एवं पौधों के बीज एकत्र कर वर्षा ऋतु में चरागाहों और जल स्रोतों के आसपास रोपण किया जा रहा है। ग्राम पंचायतों, स्थानीय समुदायों और युवाओं की सक्रिय भागीदारी से कई स्थानों पर हरियाली लौटने लगी है। उन्होंने कहा कि भीलवाडा में लगभग 200 चरागाह विकास कार्य पंचायतों और सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से प्रगति पर हैं। जिले के मांडलगढ़ तहसील के अमरतिया गांव का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा की वहा पर भूमिगत जलस्तर, जो पहले 100 फीट से नीचे चला गया था, अब 20-25 फीट पर स्थिर है। पिछले 25 वर्षों से गांव में नई बोरिंग की आवश्यकता नहीं पड़ी है। इससे न केवल जल संकट कम हुआ है, बल्कि पशुपालकों की आय और दुग्ध उत्पादन में भी वृद्धि हुई है। विधायक कोठारी ने मांग की कि चरागाह विकास एवं जल संरक्षण कार्यों को ग्रामीण पारिस्थितिकी आधारभूत संरचना के रूप में मान्यता दी जाए तथा इन्हें राज्य स्तरीय अभियान का रूप दिया जाए। इसी संदर्भ में उन्होंने “दीनदयाल चरागाह विकास योजना” प्रारंभ करने का प्रस्ताव रखा। योजना के अंतर्गत गोचर एवं शमलात भूमि का संरक्षण, देशी चारा प्रजातियों का संवर्धन, नाड़ी-तालाब-बावड़ी संरक्षण, वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण तथा ग्रामीण समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित करने का सुझाव दिया गया। प्रथम चरण में राज्य के 10 हजार गांवों का चयन कर चरणबद्ध कार्ययोजना लागू करने की मांग की गई। उन्होंने कहा कि यह पहल केवल भूमि सुधार का विषय नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ पर्यावरण, सुरक्षित जल स्रोत और सशक्त ग्रामीण अर्थव्यवस्था का संकल्प है। यदि संगठित और निरंतर प्रयास किए जाएं तो राजस्थान की भूमि पुनः हरी-भरी हो सकती है और किसान-पशुपालकों की आय में स्थायी वृद्धि की जा सकती है।

More news from राजस्थान and nearby areas
  • Post by Dev karan Mali
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    Post by Dev karan Mali
    user_Dev karan Mali
    Dev karan Mali
    भीलवाड़ा, भीलवाड़ा, राजस्थान•
    14 hrs ago
  • Post by Jalampura AC morcha adhyaks D.s.
    1
    Post by Jalampura AC morcha adhyaks D.s.
    user_Jalampura AC morcha adhyaks D.s.
    Jalampura AC morcha adhyaks D.s.
    करेड़ा, भीलवाड़ा, राजस्थान•
    13 hrs ago
  • चित्तौड़गढ़। शहर के बाइपास रेलवे फाटक के पास स्थित दक्ष हॉस्पिटल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है, जिसमे पेशेंट के परिजन के साथ स्टाफ द्वारा बत्तमीजी एव बिल में धांधली का मामला सामने आ रहा रहा, यह बुधवार को दिनभर चर्चा का विषय रहा। जानकारी में सामने आया कि दक्ष हॉस्पिटल में एक पेशेंट के इलाज के बाद परिजनों को बिल थमाया गया, जिसमे काफी अंतर होने पर पूछने पर बताने ओर बिल सही करने के बजाय उल्टा एक महिला चिकित्सक वीडियो बनाती हुई परिजन के साथ बत्तमीजी करती हुई, पुलिस को बुलाने की धौंस देने लगी तो माहौल ओर गरमा गया जिस पर वरिष्ठ चिकित्सक डॉ अरविंद सनाढ्य समझाइस कर मामले को बैठकर निपटाने का प्रयास करते नजर आए। मामले की वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया पर वायरल हुआ मामला चर्चा का विषय बन गया, लोगो का कहना ही कि डॉक्टर को भगवान का दर्जा दिया जाता है और वो ही लोगो के साथ ऐसा व्यवहार कैसे कर सकते है, साथ ही बिल में गड़बड़ी भी बड़ा विषय बन गया। इधर मामले को लेकर कोतवाली सीआई तुलसीराम से जानकारी चाही तो उन्होंने बताया इस सम्बंध में किसी ने कोई रिपोर्ट अभी तक नही दी है है। दूसरी ओर मामले पर सीएमएचओ डॉ ताराचंद गुप्ता ने बताया अभी तक मुझे मामले की जानकारी नही है ऐसा हुआ है तो पता करवाते है।
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    चित्तौड़गढ़। शहर के बाइपास रेलवे फाटक के पास स्थित दक्ष हॉस्पिटल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है, जिसमे पेशेंट के परिजन के साथ स्टाफ द्वारा बत्तमीजी एव बिल में धांधली का मामला सामने आ रहा रहा, यह बुधवार को दिनभर चर्चा का विषय रहा।
जानकारी में सामने आया कि दक्ष हॉस्पिटल में एक पेशेंट के इलाज के बाद परिजनों को बिल थमाया गया, जिसमे काफी अंतर होने पर पूछने पर बताने ओर बिल सही करने के बजाय उल्टा एक महिला चिकित्सक वीडियो बनाती हुई परिजन के साथ बत्तमीजी करती हुई, पुलिस को बुलाने की धौंस देने लगी तो माहौल ओर गरमा गया जिस पर वरिष्ठ चिकित्सक डॉ अरविंद सनाढ्य समझाइस कर मामले को बैठकर निपटाने का प्रयास करते नजर आए।
मामले की वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया पर वायरल हुआ मामला चर्चा का विषय बन गया, लोगो का कहना ही कि डॉक्टर को भगवान का दर्जा दिया जाता है और वो ही लोगो के साथ ऐसा व्यवहार कैसे कर सकते है, साथ ही बिल में गड़बड़ी भी बड़ा विषय बन गया।
इधर मामले को लेकर कोतवाली सीआई तुलसीराम से जानकारी चाही तो उन्होंने बताया इस सम्बंध में किसी ने कोई रिपोर्ट अभी तक नही दी है है।
दूसरी ओर मामले पर सीएमएचओ डॉ ताराचंद गुप्ता ने बताया अभी तक मुझे मामले की जानकारी नही है ऐसा हुआ है तो पता करवाते है।
    user_(ND NEWS CHITTORGARH)Laxman Si
    (ND NEWS CHITTORGARH)Laxman Si
    Local News Reporter चित्तौड़गढ़, चित्तौड़गढ़, राजस्थान•
    13 hrs ago
  • बेगूं । बेगूं में बुधवार को कार्यालय समय पर एसडीएम अंकित सामरिया द्वारा सरकारी कार्यालयों का औचक निरीक्षण किया गया, जिसमें कर्मचारियों की अनुपस्थिति, फाइलों के रख-रखाव और साफ सफाई व्यवस्था की जांच की गई। निरीक्षण के दौरान अनुपस्थित कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं और कार्यप्रणाली में सुधार लाने व समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं । एसडीएम अंकित सामरिया ने उपखंड कार्यालय बेगूं , पंचायत समिति, तहसील कार्यालय, निर्वाचन शाखा , नगरपालिका,जलदाय विभाग, बिजली विभाग के कार्यालयों का विस्तृत निरीक्षण किया गया। एसडीएम द्वारा किए गए निरीक्षण के दौरान 7 कार्यालयों में 68 कर्मचारी गैर हाजिर पाये गए। एवीवीएनएल बेगूं में निरीक्षण के दौरान 10 कार्मिक,जलदाय विभाग में 4 कार्मिक गैर हाजिर पाये गए। इसी के साथ कार्यालय अधिशाषी अधिकारी नगरपालिका बेगूं में मुख्यमंत्री शहरी रोजगार गारण्टी योजना में कार्यरत 2 कार्मिक एवं नगरपालिका बेगूं में 21 कार्मिक, पंचायत समिति में 11 कार्मिक गैर हाजिर पाये गये। एसडीएम सामरिया द्वारा विकास अधिकारी पंचायत समिति बेगूं को एन.एफ.एस.ए के तहत लंबित प्रकरणों का समय पर निस्तारण हेतु निर्देश दिये। तहसील कार्यालय बेगूं में निरीक्षण के दौरान 4 कार्मिक , एल.आर शाखा में 07 कार्मिक , निर्वाचन शाखा में 09 कार्मिक गैर हाजिर पाये गये एवं उपखण्ड कार्यालय बेगूं में समस्त कार्मिक उपस्थित पाये गये। गैर हाजिर पाये गए अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध अनुशासनहीनता तथा समयबद्ध कार्य निष्पादन में गंभीर लापरवाही मानते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं तथा तीन दिन में उपखंड कार्यालय में उपस्थित होकर जवाब मांगा गया है । प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सरकारी कार्यालयों में समय पर उपस्थिति और आमजन को सेवाएं उपलब्ध कराना प्राथमिक जिम्मेदारी है, इसमें किसी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रशासन की इस कार्रवाई से सरकारी कार्यालयों में हड़कंप की स्थिति रही और कर्मचारियों में अनुशासन को लेकर स्पष्ट संदेश गया है। निरीक्षण के दौरान तहसीलदार गोपाल जीनगर भी मौजूद रहे।
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    बेगूं  । बेगूं में बुधवार को कार्यालय समय पर  एसडीएम अंकित सामरिया द्वारा सरकारी कार्यालयों का औचक निरीक्षण किया गया, जिसमें कर्मचारियों की अनुपस्थिति, फाइलों के रख-रखाव और साफ सफाई व्यवस्था की जांच की गई। निरीक्षण के दौरान अनुपस्थित कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं और कार्यप्रणाली में सुधार लाने व समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं । 
एसडीएम अंकित सामरिया ने उपखंड कार्यालय बेगूं , पंचायत समिति, तहसील कार्यालय, निर्वाचन शाखा , नगरपालिका,जलदाय विभाग, बिजली विभाग के कार्यालयों का विस्तृत निरीक्षण किया गया।
एसडीएम द्वारा किए गए निरीक्षण के दौरान 7 कार्यालयों में 68 कर्मचारी गैर हाजिर पाये गए।
एवीवीएनएल बेगूं में निरीक्षण के दौरान 10 कार्मिक,जलदाय विभाग में  4 कार्मिक गैर हाजिर पाये गए। 
इसी के साथ कार्यालय अधिशाषी अधिकारी नगरपालिका बेगूं में मुख्यमंत्री शहरी रोजगार गारण्टी योजना में कार्यरत 2 कार्मिक एवं नगरपालिका बेगूं में 21 कार्मिक, 
पंचायत समिति में 11 कार्मिक गैर हाजिर पाये गये। एसडीएम सामरिया द्वारा विकास अधिकारी पंचायत समिति बेगूं को एन.एफ.एस.ए के तहत लंबित प्रकरणों का समय पर निस्तारण हेतु निर्देश दिये।
तहसील कार्यालय बेगूं में निरीक्षण के दौरान 4 कार्मिक , एल.आर शाखा में 07 कार्मिक , निर्वाचन शाखा में  09 कार्मिक गैर हाजिर पाये गये एवं उपखण्ड कार्यालय बेगूं में समस्त कार्मिक उपस्थित पाये गये।
गैर हाजिर पाये गए अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध अनुशासनहीनता तथा समयबद्ध कार्य निष्पादन में गंभीर लापरवाही मानते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं तथा तीन दिन में उपखंड कार्यालय में उपस्थित होकर जवाब मांगा गया है । प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सरकारी कार्यालयों में समय पर उपस्थिति और आमजन को सेवाएं उपलब्ध कराना प्राथमिक जिम्मेदारी है, इसमें किसी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। 
प्रशासन की इस कार्रवाई से सरकारी कार्यालयों में हड़कंप की स्थिति रही और कर्मचारियों में अनुशासन को लेकर स्पष्ट संदेश गया है।
निरीक्षण के दौरान तहसीलदार गोपाल जीनगर भी मौजूद रहे।
    user_The fact khabar
    The fact khabar
    बेगूं, चित्तौड़गढ़, राजस्थान•
    23 hrs ago
  • आप देख रहे हैं क्षेत्रीय न्यूज़। आज हम बात कर रहे हैं एक ऐसे गांव की जहाँ स्कूल की घंटी नहीं, बल्कि वहां लगा ताला चीख-चीख कर अपनी बदहाली सुना रहा है।मामला है राजाजी का करेड़ा (काला जी) गांव का। यहाँ का सरकारी स्कूल बंद होने की वजह से आज बच्चों के हाथों में किताबों की जगह मजबूरी है। जो बच्चे कल का भविष्य हैं, उन्हें मीलों दूर दूसरे गांवों में भटकना पड़ रहा है।
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    आप देख रहे हैं क्षेत्रीय न्यूज़। आज हम बात कर रहे हैं एक ऐसे गांव की जहाँ स्कूल की घंटी नहीं, बल्कि वहां लगा ताला चीख-चीख कर अपनी बदहाली सुना रहा है।मामला है राजाजी का करेड़ा (काला जी) गांव का। यहाँ का सरकारी स्कूल बंद होने की वजह से आज बच्चों के हाथों में किताबों की जगह मजबूरी है। जो बच्चे कल का भविष्य हैं, उन्हें मीलों दूर दूसरे गांवों में भटकना पड़ रहा है।
    user_Kanhaiya Lal Gurjar
    Kanhaiya Lal Gurjar
    Asind, Bhilwara•
    23 hrs ago
  • बेटे का ब्रेकअप हुआ तो पिता ने करवाया पेचअप
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    बेटे का ब्रेकअप हुआ तो पिता ने करवाया पेचअप
    user_Ashok Kumar Regar
    Ashok Kumar Regar
    Auto market फूलिया कलां, भीलवाड़ा, राजस्थान•
    2 hrs ago
  • गंगरार टोल प्लाजा। चित्तौड़गढ़ जिले के गंगरार टोल प्लाजा पर किसानों के साथ कथित अवैध वसूली का मामला सामने आने के बाद क्षेत्र में नाराजगी का माहौल बन गया है। गुरुवार, 26 फरवरी को सुबह करीब 7 बजे भीलवाड़ा की ओर से चित्तौड़गढ़ जा रहे एक किसान के ट्रैक्टर चालक को टोल कर्मियों द्वारा रोक लिया गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार टोल कर्मचारियों ने पहले चालक से ₹100 नकद देने की मांग की। जब चालक ने बिना रसीद पैसे देने से मना किया, तो कर्मचारियों ने कथित रूप से कहा कि अब वाहन का पूरा टोल लगेगा। इसके बाद ट्रैक्टर को टोल बूथ के अंदर ले जाकर ₹210 की रसीद काट दी गई। नियमों पर उठे सवाल किसानों का कहना है कि कृषि कार्य में उपयोग होने वाले ट्रैक्टरों पर सामान्य परिस्थितियों में टोल शुल्क नहीं लिया जाता, विशेष रूप से जब वाहन व्यावसायिक परिवहन में उपयोग नहीं हो रहा हो। ऐसे में ट्रैक्टर से टोल वसूली को लेकर किसानों ने नियमों की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं। किसानों में आक्रोश घटना की जानकारी फैलते ही आसपास के किसानों में नाराजगी बढ़ गई। किसानों का आरोप है कि टोल पर अक्सर ट्रैक्टर चालकों को परेशान किया जाता है और मौके पर नकद वसूली का दबाव बनाया जाता है। उनका कहना है कि यह सीधे-सीधे किसानों के साथ अन्याय है और उनकी आजीविका पर अतिरिक्त बोझ डालने जैसा है। प्रशासन से जांच की मांग ग्रामीणों और किसान प्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही टोल प्रबंधन को ट्रैक्टरों से संबंधित स्पष्ट नियम सार्वजनिक करने और यदि अवैध वसूली हुई है तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की भी मांग की गई है।
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    गंगरार टोल प्लाजा। चित्तौड़गढ़ जिले के गंगरार टोल प्लाजा पर किसानों के साथ कथित अवैध वसूली का मामला सामने आने के बाद क्षेत्र में नाराजगी का माहौल बन गया है। गुरुवार, 26 फरवरी को सुबह करीब 7 बजे भीलवाड़ा की ओर से चित्तौड़गढ़ जा रहे एक किसान के ट्रैक्टर चालक को टोल कर्मियों द्वारा रोक लिया गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार टोल कर्मचारियों ने पहले चालक से ₹100 नकद देने की मांग की। जब चालक ने बिना रसीद पैसे देने से मना किया, तो कर्मचारियों ने कथित रूप से कहा कि अब वाहन का पूरा टोल लगेगा। इसके बाद ट्रैक्टर को टोल बूथ के अंदर ले जाकर ₹210 की रसीद काट दी गई।
नियमों पर उठे सवाल
किसानों का कहना है कि कृषि कार्य में उपयोग होने वाले ट्रैक्टरों पर सामान्य परिस्थितियों में टोल शुल्क नहीं लिया जाता, विशेष रूप से जब वाहन व्यावसायिक परिवहन में उपयोग नहीं हो रहा हो। ऐसे में ट्रैक्टर से टोल वसूली को लेकर किसानों ने नियमों की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं।
किसानों में आक्रोश
घटना की जानकारी फैलते ही आसपास के किसानों में नाराजगी बढ़ गई। किसानों का आरोप है कि टोल पर अक्सर ट्रैक्टर चालकों को परेशान किया जाता है और मौके पर नकद वसूली का दबाव बनाया जाता है। उनका कहना है कि यह सीधे-सीधे किसानों के साथ अन्याय है और उनकी आजीविका पर अतिरिक्त बोझ डालने जैसा है।
प्रशासन से जांच की मांग
ग्रामीणों और किसान प्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही टोल प्रबंधन को ट्रैक्टरों से संबंधित स्पष्ट नियम सार्वजनिक करने और यदि अवैध वसूली हुई है तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की भी मांग की गई है।
    user_Dev karan Mali
    Dev karan Mali
    भीलवाड़ा, भीलवाड़ा, राजस्थान•
    14 hrs ago
  • भीलवाड़ा, 26 फरवरी। भीलवाड़ा विधायक अशोक कुमार कोठारी द्वारा राजस्थान विधानसभा में अमृत-2 योजना के तहत चल रहे सीवरेज कार्यों को लेकर सदन के पटल पर गंभीर प्रश्न उठाते ही प्रशासन हरकत में आ गया और क्षतिग्रस्त सड़कों के पुनर्निर्माण का कार्य प्रारंभ कर दिया गया। लंबे समय से जर्जर पड़ी सड़कों को लेकर आमजन में रोष व्याप्त था, जिस पर विधायक द्वारा सदन में आवाज उठाए जाने के बाद संबंधित विभागों ने मौके पर पहुंचकर कार्यवाही शुरू की। विधानसभा में स्थगन प्रस्ताव पर बोलते हुए विधायक कोठारी ने अमृत-2 योजना के तहत भीलवाड़ा शहर में चल रहे सीवरेज कार्यों को लेकर गंभीर सवाल उठाए थे। उन्होंने शहर की क्षतिग्रस्त सड़कों, बढ़ती दुर्घटनाओं और जनहानि की घटनाओं पर सरकार से जवाब मांगा। विधायक कोठारी ने कहा कि अमृत-2 योजना के अंतर्गत सीवरेज कार्य करवाने वाली कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा सड़कों को खोदने के बाद समय पर पुनर्निर्माण नहीं किया गया। नियमानुसार 45 दिनों में सड़कों की मरम्मत हो जानी चाहिए थी, लेकिन आठ माह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद कई प्रमुख मार्ग अब भी जर्जर अवस्था में हैं। उन्होंने जिन प्रमुख सड़कों की दुर्दशा का उल्लेख किया, उनमें मिर्ची मंडी रोड, पुराना आरटीओ रोड, गांधीनगर गणेश मंदिर रोड, सुखाड़िया सर्कल, शारदा चौराहा से चारभुजा रोड तथा 100 फीट रोड शामिल हैं। विशेष रूप से 100 फीट रोड की स्थिति अत्यंत खराब बताई गई, जहां एक ओर की सड़क पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने से आवागमन एक ही दिशा में हो रहा है। इससे आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं और जनहानि तक की घटनाएं सामने आई हैं। विधायक कोठारी ने बताया कि इस संबंध में नगर निगम आयुक्त से चर्चा करने पर उन्हें जानकारी दी गई कि सीवरेज कार्यों से जुड़ी पत्रावली SIP वेरिफिकेशन के लिए डीएलबी में लंबित है। उन्होंने सवाल उठाया कि जो कार्य 45 दिन में पूर्ण होना था, वह आठ माह बाद भी अधूरा क्यों है और इसके लिए जिम्मेदार कौन है - नगर निगम के अधिकारी या संबंधित कंस्ट्रक्शन कंपनी? उन्होंने दोषी अधिकारियों या कंपनी पर तत्काल कार्रवाई करने की मांग की वहीं आज उक्त प्रस्ताव के बाद प्रशासन द्वारा सड़कों का पुनर्निर्माण प्रारंभ हो गया है ।
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    भीलवाड़ा, 26 फरवरी।
भीलवाड़ा विधायक अशोक कुमार कोठारी द्वारा राजस्थान विधानसभा में अमृत-2 योजना के तहत चल रहे सीवरेज कार्यों को लेकर सदन के पटल पर  गंभीर प्रश्न उठाते ही प्रशासन हरकत में आ गया और क्षतिग्रस्त सड़कों के पुनर्निर्माण का कार्य प्रारंभ कर दिया गया। लंबे समय से जर्जर पड़ी सड़कों को लेकर आमजन में रोष व्याप्त था, जिस पर विधायक द्वारा सदन में आवाज उठाए जाने के बाद संबंधित विभागों ने मौके पर पहुंचकर कार्यवाही शुरू की।
विधानसभा में स्थगन प्रस्ताव पर बोलते हुए विधायक कोठारी ने अमृत-2 योजना के तहत भीलवाड़ा शहर में चल रहे सीवरेज कार्यों को लेकर गंभीर सवाल उठाए थे। उन्होंने शहर की क्षतिग्रस्त सड़कों, बढ़ती दुर्घटनाओं और जनहानि की घटनाओं पर सरकार से जवाब मांगा।
विधायक कोठारी ने कहा कि अमृत-2 योजना के अंतर्गत सीवरेज कार्य करवाने वाली कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा सड़कों को खोदने के बाद समय पर पुनर्निर्माण नहीं किया गया। नियमानुसार 45 दिनों में सड़कों की मरम्मत हो जानी चाहिए थी, लेकिन आठ माह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद कई प्रमुख मार्ग अब भी जर्जर अवस्था में हैं।
उन्होंने जिन प्रमुख सड़कों की दुर्दशा का उल्लेख किया, उनमें मिर्ची मंडी रोड, पुराना आरटीओ रोड, गांधीनगर गणेश मंदिर रोड, सुखाड़िया सर्कल, शारदा चौराहा से चारभुजा रोड तथा 100 फीट रोड शामिल हैं। विशेष रूप से 100 फीट रोड की स्थिति अत्यंत खराब बताई गई, जहां एक ओर की सड़क पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने से आवागमन एक ही दिशा में हो रहा है। इससे आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं और जनहानि तक की घटनाएं सामने आई हैं।
विधायक कोठारी ने बताया कि इस संबंध में नगर निगम आयुक्त से चर्चा करने पर उन्हें जानकारी दी गई कि सीवरेज कार्यों से जुड़ी पत्रावली SIP वेरिफिकेशन के लिए डीएलबी में लंबित है। उन्होंने सवाल उठाया कि जो कार्य 45 दिन में पूर्ण होना था, वह आठ माह बाद भी अधूरा क्यों है और इसके लिए जिम्मेदार कौन है - नगर निगम के अधिकारी या संबंधित कंस्ट्रक्शन कंपनी?
उन्होंने दोषी अधिकारियों या कंपनी पर तत्काल कार्रवाई करने की मांग की वहीं आज उक्त प्रस्ताव के बाद  प्रशासन  द्वारा सड़कों का पुनर्निर्माण प्रारंभ हो गया है ।
    user_Narendra kumar Regar
    Narendra kumar Regar
    Physiotherapist भीलवाड़ा, भीलवाड़ा, राजस्थान•
    16 hrs ago
  • Post by Jalampura AC morcha adhyaks D.s.
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    Post by Jalampura AC morcha adhyaks D.s.
    user_Jalampura AC morcha adhyaks D.s.
    Jalampura AC morcha adhyaks D.s.
    करेड़ा, भीलवाड़ा, राजस्थान•
    14 hrs ago
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