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हापुड़ के गोहर गांव में विवाद का VIDEO वायरल, दो पक्षों में झड़प का मामला उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले के थाना बाबूगढ़ क्षेत्र के गोहर गांव से एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में दो पक्षों के बीच विवाद और झड़प का मामला सामने आया है। सूचना मिलने पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया और मामले की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल प्रशासन द्वारा शांति बनाए रखने की अपील की जा रही है।
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हापुड़ के गोहर गांव में विवाद का VIDEO वायरल, दो पक्षों में झड़प का मामला उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले के थाना बाबूगढ़ क्षेत्र के गोहर गांव से एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में दो पक्षों के बीच विवाद और झड़प का मामला सामने आया है। सूचना मिलने पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया और मामले की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल प्रशासन द्वारा शांति बनाए रखने की अपील की जा रही है।
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- हापुड़ के गोहर गांव में विवाद का VIDEO वायरल, दो पक्षों में झड़प का मामला उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले के थाना बाबूगढ़ क्षेत्र के गोहर गांव से एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में दो पक्षों के बीच विवाद और झड़प का मामला सामने आया है। सूचना मिलने पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया और मामले की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल प्रशासन द्वारा शांति बनाए रखने की अपील की जा रही है।1
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- 1857 की लड़ाई लड़ी थी रानी लक्ष्मीबाई की जगह क्योंकि रानी लक्ष्मीबाई की हमशक्ल थी वीरांगना झलकारी बाई कोरी वीरांगना झलकारी बाई अमर रहे 💐💐🙏🙏1
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- गाज़ियाबाद की आग: हादसा या सुनियोजित साज़िश,आसपास के CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं और हालिया गिरफ्तारियों के साथ किसी संभावित कनेक्शन को भी परखा जा रहा है। कबाड़ियों के गोदाम एवं झुग्गी-झोपड़ियों में विशेष रिपोर्ट: इंडिया न्यूज़ 7 पवन सूर्यवंशी ब्यूरो चीफ ऑल एनसीआर गाज़ियाबाद के इंदिरापुरम थाना क्षेत्र के अंतर्गत कनावनी गांव के पास स्थित कबाड़े के गोदाम झुग्गी-झोपड़ियों में लगी हालिया भीषण आग ने एक बार फिर OGW नेटवर्क और झुग्गी क्लस्टर पर उठते गंभीर सवाल,उन सवालों को जिंदा कर दिया है, जो पिछले कई वर्षों से दबे हुए थे, लेकिन हर नई घटना के साथ फिर सतह पर आ जाते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार यह कोई पहली घटना नहीं है, बल्कि एक ऐसा सिलसिला है जो समय-समय पर दोहराया जाता रहा है और हर बार कारण अलग-अलग बताकर मामला ठंडा कर दिया जाता है। कभी इसे शॉर्ट सर्किट कहा जाता है, कभी सिलेंडर ब्लास्ट, तो कभी गर्मी का असर, लेकिन लगातार दोहराती घटनाएं अब संयोग से ज्यादा कुछ प्रतीत होने लगी हैं। जिलाधिकारी महोदय श्री रविन्द्र कुमार मॉंदड़ द्वारा 150 लगभग झुकी झोपड़िया में समान लग जा रहा है। डीसीपी श्री धवल जायसवाल एवं समस्त पुलिस प्रशासन द्वारा जलकल पुलिस द्वारा आंख पर काबू करने की मस्कट जारी है। कनावनी, इंदिरापुरम, कौशांबी से लेकर गाजीपुर मंडी और आसपास के डेरी क्षेत्रों तक फैले झुग्गी क्लस्टर्स को अगर एक साथ जोड़कर देखा जाए, तो एक ऐसा भूगोल सामने आता है जहां आबादी घनी है, निगरानी सीमित है और पहचान सत्यापन की प्रक्रिया कमजोर मानी जाती है। ऐसे क्षेत्रों में किसी भी बाहरी व्यक्ति के लिए लंबे समय तक बिना ध्यान आकर्षित किए रहना अपेक्षाकृत आसान हो जाता है। यही वह बिंदु है जहां से सुरक्षा एजेंसियों की चिंता शुरू होती है, खासकर तब जब हाल के दिनों में कौशांबी क्षेत्र से कुछ संदिग्ध गतिविधियों में शामिल लोगों की गिरफ्तारी की खबरें सामने आई हों और “ओवर ग्राउंड वर्कर” यानी OGW नेटवर्क की चर्चा तेज हुई हो।OGW शब्द आमतौर पर उन लोगों के लिए इस्तेमाल होता है जो किसी बड़े नेटवर्क के लिए जमीन पर रहकर सहायता प्रदान करते हैं—चाहे वह लॉजिस्टिक सपोर्ट हो, सूचना जुटाना हो या अस्थायी ठिकाने उपलब्ध कराना। हालांकि गाज़ियाबाद की इन घटनाओं को सीधे किसी ऐसे नेटवर्क से जोड़ना अभी जांच का विषय है, लेकिन स्थानीय स्तर पर उठ रहे सवालों को पूरी तरह नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता। खासतौर पर तब, जब इन कबाड़ा के गोदाम एवं झुग्गी क्लस्टर्स के आसपास CRPF और PAC जैसे सुरक्षा बलों के कैंप मौजूद हों, जो इन इलाकों को रणनीतिक दृष्टि से संवेदनशील बनाते हैं।स्थानीय चर्चाओं में एक और पहलू सामने आता है—तकनीक का उपयोग। कुछ लोगों का दावा है कि संदिग्ध तत्व छोटे सोलर उपकरणों या कैमरों का इस्तेमाल कर सकते हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फिर भी, आधुनिक दौर में निगरानी के साधनों के छोटे और सस्ते हो जाने के कारण इस संभावना को पूरी तरह खारिज भी नहीं किया जा सकता। यदि इस दिशा में कोई ठोस तथ्य सामने आते हैं, तो यह मामला केवल स्थानीय अपराध की सीमा से बाहर निकलकर एक बड़े सुरक्षा आयाम में प्रवेश कर सकता है।इन सभी सवालों के बीच सबसे महत्वपूर्ण और चिंताजनक पहलू बार-बार लगने वाली आग है। हर घटना के बाद झुग्गियां पूरी तरह जलकर खाक हो जाती हैं, जिससे वहां रहने वाले लोगों के दस्तावेज, पहचान पत्र और अन्य साक्ष्य भी नष्ट हो जाते हैं। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या यह केवल दुर्घटना है, या फिर अनजाने में या जानबूझकर ऐसी स्थिति बन रही है जहां हर बार सब कुछ “रीसेट” हो जाता है। यह केवल एक संदेह है, लेकिन जांच के लिए एक महत्वपूर्ण दिशा जरूर हो सकती है।हाल ही में लखनऊ में सामने आए एक जासूसी से जुड़े मामले के बाद वहां भी झुग्गी क्षेत्र में आग लगने की घटना ने कई लोगों को चौंकाया था। अब गाज़ियाबाद में इसी तरह की घटना के बाद कुछ लोग इन दोनों को जोड़कर देखने लगे हैं, हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले ठोस साक्ष्य जरूरी हैं और केवल समानता के आधार पर पैटर्न तय करना जल्दबाजी होगी।इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ी चुनौती प्रशासन के सामने है, जिसे एक साथ दो मोर्चों पर काम करना होता है—एक ओर मानवीय संकट है, जहां झुग्गियों में रहने वाले लोग हर बार आग में अपना सब कुछ खो देते हैं और पुनर्वास की मांग करते हैं, वहीं दूसरी ओर सुरक्षा का प्रश्न है, जहां इन अनियंत्रित बस्तियों के कारण संभावित खतरे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। स्थानीय निवासी भी इसी द्वंद्व में हैं—वे न तो किसी निर्दोष को नुकसान पहुंचते देखना चाहते हैं और न ही अपने आसपास किसी संभावित खतरे को अनदेखा करना चाहते हैं। प्रशासन ने इस बार घटना के बाद जांच तेज करने की बात कही है। फॉरेंसिक टीमों को लगाया गया है, आसपास के CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं और हालिया गिरफ्तारियों के साथ किसी संभावित कनेक्शन को भी परखा जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि हर एंगल से जांच की जाएगी और बिना साक्ष्य के किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जाएगा।फिलहाल, गाज़िया बाद की यह आग एक बार फिर कई अनुत्तरित सवाल छोड़ गई है। क्या यह केवल एक और दुर्घटना है, जिसे समय के साथ भुला दिया जाएगा, या फिर यह किसी गहरे और लंबे समय से चल रहे तंत्र की एक झलक है? सच्चाई जो भी हो, वह जांच के बाद ही सामने आएगी, लेकिन इतना तय है कि इस तरह की लगातार घटनाएं अब केवल स्थानीय मुद्दा नहीं रह गई हैं, बल्कि शहरी सुरक्षा, प्रशासनिक व्यवस्था और सामाजिक संतुलन—तीनों पर एक साथ सवाल खड़े कर रही हैं।4
- महराजगंज। जनपद पुलिस ने साइबर अपराध के विरुद्ध एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए एक ऐसे शातिर अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो गांवों में फेरी लगाकर पुराने मोबाइल इकट्ठा करता था और फिर उनका इस्तेमाल साइबर ठगी के लिए किया जाता था। पुलिस ने इस मामले में गिरोह के 5 सदस्यों को गिरफ्तार किया है। ऐसे देते थे वारदात को अंजाम यह गिरोह गांवों में फेरी लगाकर बर्तन और कंबल बेचने के बहाने जाता था। वहां ये लोग भोले-भाले ग्रामीणों को लुभावने ऑफर देकर उनके पुराने और चालू मोबाइल फोन ले लेते थे। इन मोबाइलों और उनके मदरबोर्ड का उपयोग भविष्य में ओटीपी फ्रॉड, फिशिंग और अन्य साइबर अपराधों के लिए किया जाना था। भारी मात्रा में बरामदगी पुलिस ने आरोपियों के पास से जो सामान बरामद किया है, उसकी अनुमानित बाजार कीमत लगभग 80 लाख रुपये बताई जा रही है: 318 एंड्रॉयड मोबाइल फोन 110 मोबाइल मदरबोर्ड 05 मोटरसाइकिलें फर्जी दस्तावेज और नकदी बिहार से जुड़े हैं तार गिरफ्तार किए गए पांचों आरोपी मूल रूप से बिहार (पूर्वी चंपारण और मोतिहारी) के रहने वाले हैं। पूछताछ में सामने आया है कि ये लोग इन मोबाइलों को इकट्ठा कर पश्चिम बंगाल (कोलकाता) में बैठे अपने एक साथी को भेजने वाले थे, जहाँ से इन्हें साइबर अपराध के 'हॉटस्पॉट्स' पर सप्लाई किया जाना था। पुलिस की सक्रियता से टला बड़ा खतरा पुलिस अधिकारियों के अनुसार, साइबर अपराध में इस्तेमाल होने वाले मोबाइल का आईएमईआई (IMEI) अक्सर ब्लॉक कर दिया जाता है, इसलिए अपराधियों को नए आईएमईआई वाले मोबाइलों की तलाश रहती है। इस गिरोह की गिरफ्तारी से भविष्य में होने वाली कई बड़ी साइबर ठगी की घटनाओं को रोकने में मदद मिली है। पुलिस अब इस गिरोह के मास्टरमाइंड और बंगाल कनेक्शन की तलाश में जुटी है।1
- Post by पत्रकार धीरेंद्र त्रिपाठी1
- हापुड़ के गढ़मुक्तेश्वर क्षेत्र में भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती बड़े ही हर्षोल्लास और उत्साह के साथ मनाई गई। क्षेत्र के दर्जनों गांवों में आयोजित कार्यक्रमों में भारी संख्या में लोगों ने भाग लिया और माहौल पूरी तरह उत्सवमय नजर आया। सुरक्षा के मद्देनज़र जगह-जगह पुलिस बल भी तैनात रहा, जिससे कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके। थाना बहादुरगढ़ क्षेत्र के गांव भदस्याना में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधीर चौहान मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे। उन्होंने फीता काटकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया और बाबा साहब की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। अपने संबोधन में सुधीर चौहान ने कहा कि बाबा साहब द्वारा रचित संविधान हर नागरिक के अधिकारों की रक्षा करता है और हमें उनके बताए मार्ग पर चलकर समाज में समानता और न्याय स्थापित करना चाहिए। इसके बाद उन्होंने भदस्याना, पसवाड़ा, चित्तौड़ा और अठसैनी सहित कई गांवों का दौरा कर बाबा साहब को नमन किया। कार्यक्रम के दौरान सामाजिक एकता और भाईचारे की झलक साफ देखने को मिली।1