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महिला की हत्या के दो अभियुक्तो ससुर और जेठ को पुलिस ने भेजा जेल
इंडिया न्यूज यूपी एक्सप्रेस
महिला की हत्या के दो अभियुक्तो ससुर और जेठ को पुलिस ने भेजा जेल
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- राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के तहत पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए एचआईवी-एड्स विषय पर आयोजित जागरूकता कार्यशाला।1
- *डीएम-एसपी ने समस्या सुन किया निस्तारण* रिपोर्ट-अल्तमश हुसैन-7054881233 बबेरू/बांदा। बबेरू तहसील में संपूर्ण समाधान दिवस का आयोजन डीएम व एसपी की अध्यक्षता पर संपन्न हुआ। तहसील सभागार में सोमवार को तहसील संपूर्ण समाधान दिवस का आयोजन बांदा जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल की अध्यक्षता पर संपन्न किया गया। जिसमें तहसील क्षेत्र अंतर्गत अलग-अलग गांव से फरियादियों ने अपनी अपनी समस्याओं को लेकर प्रार्थना पत्र सौंपा है। जिसमें ज्यादातर प्रार्थना पत्र जमीनी विवाद पुलिस से संबंधित एवं ब्लॉक से संबंधित प्रार्थना पत्र आए हैं। जिसमें कुल 60 प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए, जिसमें 7 प्रार्थना पत्र का मौके पर निस्तारण कराया गया है, शेष प्रार्थना पत्र संबंधित अधिकारी को भेज कर एक सप्ताह के अंदर निस्तारण करने के निर्देश दिए हैं। इस तहसील संपूर्ण समाधान दिवस पर बबेरू उप जिलाधिकारी अवनीश कुमार तहसीलदार हेमराज सिंह बोनल नया तहसीलदार मनोहर सिंह, खंड विकास अधिकारी गरिमा अग्रवाल ,ओमप्रकाश द्विवेदी, सहित जिले से लेकर तहसील ब्लाक स्तर तक के अधिकारी व कर्मचारी गण मौजूद रहे।1
- #Apkiawajdigital गोरखपुर | सोमवार, 23 मार्च 2026 भूमिका: उत्तर प्रदेश की सियासत में कल एक ऐसा मंजर देखने को मिला जिसने समर्थकों को हैरान और विरोधियों को हमलावर कर दिया है। मुख्यमंत्री के गृह जनपद गोरखपुर में, जहाँ 'सुशासन' का डंका बजता है, वहाँ कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद भरे मंच पर बच्चों की तरह फूट-फूटकर रो पड़े। उनके शब्द और उनके आंसू सीधे तौर पर व्यवस्था की विफलता की ओर इशारा कर रहे थे। मंच पर छलका दर्द: रविवार की दोपहर जब जनसभा को संबोधित करने की बारी आई, तो मंत्री जी का गला रुंध गया। उन्होंने भरी महफ़िल में कहा— "हमारी बहन-बेटियों की इज्जत लूटी जा रही है, हमारे लोगों का वोट छीना जा रहा है।" एक कैबिनेट मंत्री का यह बयान केवल एक भावुक भाषण नहीं, बल्कि अपनी ही सरकार के तंत्र पर एक 'अविश्वास प्रस्ताव' जैसा प्रतीत हुआ। जनता का सवाल: संवेदना या असक्षमता? एक तरफ जहाँ निषाद समाज के लोग अपने नेता के आंसुओं से आहत हैं, वहीं दूसरी ओर जागरूक जनता और राजनीतिक विश्लेषकों के बीच एक नई बहस छिड़ गई है। सवाल यह उठ रहा है कि: "अगर सरकार का एक कैबिनेट मंत्री, जिसके पास शक्ति और संसाधन हैं, वह न्याय के लिए रोएगा, तो आम जनता किसके पास जाएगी? यदि आप व्यवस्था सुधारने में असक्षम हैं, तो मंच पर रोने के बजाय 'इस्तीफा' देकर संघर्ष की राह क्यों नहीं चुनते?" निष्कर्ष: मंत्री के आंसुओं ने जनता को 'हतोत्साहित' किया है। सत्ता की कुर्सी पर बैठकर रोना सहानुभूति तो दिला सकता है, लेकिन समाधान नहीं। अब देखना यह है कि इन आंसुओं के बाद व्यवस्था में कोई बदलाव आता है या यह केवल चुनावी राजनीति का एक और भावुक अध्याय बनकर रह जाएगा।1
- छतरपुर से सामने आया एक चौंकाने वाला मामला, जहां एक बाबा पर्ची निकालकर लोगों की समस्या बताने का दावा करता है। क्या यह सच में कोई चमत्कार है या लोगों की आस्था के साथ खेल? हम पहुंचे ग्राउंड पर और किया इस बाबा से सीधा सवाल-जवाब। कैमरे के सामने क्या सच निकला, आप खुद देखिए इस वीडियो में। 👉 क्या आपको लगता है ये सच है या धोखा? कमेंट में अपनी राय जरूर दें।1
- वीरांगना रानी अवंती बाई लोधी जी के बलिदान दिवस पर भव्य कार्यक्रम, जनसमुदाय ने अर्पित की श्रद्धांजलि पन्ना जिले के अजयगढ़ क्षेत्र अंतर्गत ग्राम चंदौरा में 1857 की क्रांति की महान नायिका रानी अवंती बाई लोधी जी के बलिदान दिवस के अवसर पर एक भव्य एवं प्रेरणादायक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, गणमान्य नागरिकों एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने उपस्थित होकर वीरांगना को श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि बड़ा मलहरा की विधायिका सुश्री राम सिंह भारती जी रहीं, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता सुश्री कुसुम सिंह महदेले द्वारा की गई। विशिष्ट अतिथियों के रूप में भाजपा बांदा के जिला अध्यक्ष कल्लू राजपूत जी, जिला कमांडर छतरपुर करण सिंह राजपूत जी, विधानसभा प्रत्याशी बांदा धीरज राजपूत जी, वरिष्ठ अधिवक्ता शारदा प्रसाद सिंगरौल जी, पूर्व सैनिक एवं सरपंच राम शिरोमणि लोधी जी तथा प्राचार्य रामकिशोर अहिरवार जी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने वीरांगना रानी अवंती बाई लोधी जी के साहस, त्याग और देशभक्ति को याद करते हुए उनके जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। उपस्थित जनसमुदाय में देशभक्ति का उत्साह स्पष्ट रूप से देखा गया और सभी ने उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया। यह आयोजन अत्यंत सफल, उत्साहवर्धक एवं प्रेरणादायक रहा। कार्यक्रम की सफलता के पीछे आयोजन समिति की कड़ी मेहनत, समर्पण और समाज सेवा की भावना स्पष्ट रूप से झलकती है। अंत में सभी अतिथियों एवं उपस्थित जनों ने आयोजन समिति के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें इस सफल आयोजन के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। वीरांगना रानी अवंती बाई लोधी जी को श्रद्धा-सुमन अर्पित करते हुए सभी ने उनके बलिदान को नमन किया। कार्यक्रम का सफल संचालन राष्ट्रीय लोधी युवा महासभा के जिला अध्यक्ष चंद्रशेखर सिंह लोधी जी ने किया। कार्यक्रम को सफल बनाने वालों में मुख्य रूप से युवा नेता बीपी सिंह लोधी राजेश सिंह राजपूत लक्ष्य शिक्षा एवं राहत कोष फाउंडेशन जिला अध्यक्ष दिनेश बाबूजी, बाबू सिंह लोधी जी दिनेश सिंह राजपूत विपणन, राजन सिंह लोधी जी, का सराहनीय योगदान रहा। कार्यक्रम में यह रहे उपस्थित- डॉ केपी राजपूत पूर्व बीएमओ अजयगढ़, चंद्र पाल सिंह लोधी जी छतरपुर, उमरी सरपंच बाला प्रसाद लोधी,नंदपाल सिंह सहित कई अन्य उपस्थित रहे।4
- Post by Mamta chaurasiya1
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- क्रिकेट टूर्नामेंट में खेल भावना ही असली जीत है : श्याम मोहन धुरिया ।1
- #Apkiawajdigital ● बिना अनुमति बैनर लगाने पर हिरासत, बीच-बचाव करने पहुंचे पत्रकारों से RPF की अभद्रता ! ● महिला पत्रकार से दुर्व्यवहार ने खड़े किए गंभीर सवाल: क्या RPF भूल गई अपनी मर्यादा ? ● बड़ा सवाल: आधी रात की कार्रवाई में कहाँ थीं महिला पुलिसकर्मी ? नियमों की धज्जियां उड़ीं ! बांदा। रेलवे सुरक्षा बल (RPF) अपनी कार्यशैली को लेकर एक बार फिर विवादों के घेरे में है। रविवार-सोमवार की दरमियानी रात करीब 1-2 बजे बांदा रेलवे स्टेशन परिसर उस समय अखाड़ा बन गया, जब RPF के जवानों ने न केवल युवकों को हिरासत में लिया, बल्कि कवरेज और जानकारी लेने पहुंचे पत्रकारों के साथ भी 'गुंडई' पर उतारू हो गए। आरोप है कि एएसआई संतोष कुमार और उनकी टीम ने पत्रकारों के साथ धक्का-मुक्की की और अमर्यादित भाषा का प्रयोग कर खाकी की धौंस जमाई। बैनर का बहाना, पत्रकारों पर निशाना! मिली जानकारी के अनुसार, दो युवक स्टेशन परिसर में बिना अनुमति बैनर लगा रहे थे। नियमों के उल्लंघन पर RPF ने उन्हें हिरासत में लिया, जो कानूनी रूप से सही हो सकता है। लेकिन मामला तब बिगड़ा जब युवा जिला अध्यक्ष व पत्रकार नीरज निगम (RPASP) मौके पर पहुंचे। आरोप है कि वर्दी के नशे में चूर कर्मियों ने उन्हें भी जबरन बैठा लिया और अपमानित किया। मर्यादा तार-तार: महिला पत्रकार के साथ अभद्रता इस पूरे घटनाक्रम का सबसे शर्मनाक पहलू तब सामने आया जब मौके पर मौजूद एक महिला पत्रकार श्रीमति रूपा गोयल जी के साथ बदसलूकी की गई। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि RPF कर्मियों ने उनके साथ न केवल धक्का-मुक्की की, बल्कि ऐसी भाषा का प्रयोग किया जो किसी भी सभ्य समाज और अनुशासित बल के लिए कलंक है। सवालों के घेरे में RPF: कहाँ थीं महिला पुलिस ? इस घटना ने रेलवे प्रशासन की पोल खोल कर रख दी है। कानून कहता है कि किसी भी कार्रवाई या पूछताछ के दौरान, जहाँ महिलाएं शामिल हों या संवेदनशील स्थिति हो, महिला पुलिस की उपस्थिति अनिवार्य है। बड़ा सवाल यह है कि क्या बांदा RPF में महिला पुलिस की तैनाती नहीं है ? या फिर नियमों को ताक पर रखकर रात के अंधेरे में अपनी मनमानी चलाना ही इनका पेशा बन गया है ? पत्रकार समुदाय में भारी उबाल, जांच की मांग घटना के बाद जिले के पत्रकारों में गहरा रोष है। पत्रकारों का स्पष्ट कहना है कि यदि प्रशासन ने दोषी एएसआई और टीम पर तत्काल सख्त कार्रवाई नहीं की, तो यह मामला बड़े आंदोलन का रूप लेगा। स्थानीय पत्रकारों ने रेलवे के उच्चाधिकारियों से मांग की है कि सीसीटीवी फुटेज खंगालकर सच सामने लाया जाए। आपके सवाल का जवाब: क्या RPF में महिला पुलिस नहीं होती ? जी नहीं, रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के नियमों के अनुसार महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती अनिवार्य है। नियम: रेलवे बोर्ड के स्पष्ट निर्देश हैं कि हर प्रमुख स्टेशन और RPF पोस्ट पर महिला कांस्टेबल/अधिकारी की उपस्थिति होनी चाहिए, विशेषकर तब जब किसी महिला से पूछताछ करनी हो या रात के समय कोई कार्रवाई हो रही हो। हकीकत: बांदा जैसी महत्वपूर्ण पोस्ट पर महिला पुलिस की गैर-मौजूदगी या उनकी अनुपस्थिति में महिला पत्रकार से अभद्रता करना सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों (DK Basu vs State of West Bengal) का भी उल्लंघन है।4