पांच किलोमीटर का सफर, लेकिन सड़क पर हर कदम खतरे से खाली नहीं! आखिर कब जागेंगे जिम्मेदार? गड्ढों में गुम हुआ विकास का दावा मनेन्द्रगढ़/एमसीबी। मनेन्द्रगढ़ से नई लेदरी की ओर जाने वाला लगभग पांच किलोमीटर का सड़क मार्ग आज अपनी बदहाली पर आंसू बहाता नजर आ रहा है। झगराखाण्ड क्षेत्र में प्रवेश करते ही सड़क की हालत ऐसी बिगड़ती है कि नई लेदरी तक पहुंचते-पहुंचते जगह-जगह गड्ढे, उखड़ी हुई सड़क और जर्जर रास्ते राहगीरों के लिए मुसीबत बन जाते हैं। लगभग चार किलोमीटर का यह हिस्सा मानो सड़क कम और गड्ढों का रास्ता अधिक बन चुका है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इस सड़क की सुध लेने वाला कौन है? क्या जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को इस मार्ग की बदहाली दिखाई नहीं देती, या फिर इस रास्ते से गुजरने के बावजूद उन्हें आम नागरिकों की परेशानी महसूस नहीं होती? हैरानी की बात यह है कि इसी मार्ग से छत्तीसगढ़ के बड़े-बड़े नेता, मंत्री, अधिकारी, पदाधिकारी और एसईसीएल के स्थानीय यूनियन नेता भी अक्सर आवागमन करते हैं। इसके बावजूद सड़क की दशा सुधारने के लिए अब तक कोई ठोस पहल नजर नहीं आती। जब बड़े-बड़े जिम्मेदार लोग इसी रास्ते से गुजरते हैं, तो क्या उनकी गाड़ियों के पहिए इन गड्ढों से नहीं टकराते? क्या उन्हें हिचकोले खाते इस सफर में आम जनता की तकलीफ का एहसास नहीं होता? इस सड़क पर रोजाना दोपहिया वाहन चालक, चारपहिया वाहन, स्कूली बच्चे, नौकरीपेशा लोग और ग्रामीण आवागमन करते हैं। गड्ढों से बचने के प्रयास में वाहन चालकों को कभी इस तरफ तो कभी उस तरफ जाना पड़ता है। जरा सी चूक दुर्घटना का कारण बन जाती है। ऐसे कई दुर्घटनाएं इन गड्ढों से बचाने के चक्कर में हो चुके हैं। बरसात के दिनों में गड्ढों में पानी भर जाने से उनकी गहराई का अंदाजा लगाना भी मुश्किल हो जाता है। सबसे अधिक चिंता उन मरीजों और उनके परिजनों की है, जिन्हें इलाज के लिए एंबुलेंस या निजी वाहन से मनेन्द्रगढ़ अथवा अन्य अस्पतालों तक पहुंचना पड़ता है। सामान्य राहगीर का इस सड़क पर सफर करना मुश्किल है, तो गंभीर मरीज की पीड़ा का अंदाजा लगाना भी कठिन है। जिस समय मरीज को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाने की जरूरत होती है, उस समय जर्जर सड़क उसकी परेशानी और बढ़ाता है। लोकतंत्र में विकास केवल मंचों से दिए जाने वाले भाषणों, चुनावी घोषणाओं और बड़े-बड़े दावों से नहीं मापा जाता। विकास की असली तस्वीर तो उन सड़कों पर दिखाई देती है, जिनसे आम जनता रोज गुजरती है। चुनाव के समय यही नेता जनता के उत्थान, क्षेत्र के विकास और बेहतर सुविधाओं के बड़े-बड़े वादे करते हैं। लेकिन चुनाव बीतने के बाद क्या जनता की बुनियादी समस्याएं भी भुला दी जाती हैं? आखिर पांच किलोमीटर के इस छोटे से मार्ग की बदहाली दूर करने के लिए कितने वर्षों तक इंतजार करना पड़ेगा? क्या इस सड़क की मरम्मत के लिए किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार किया जा रहा है? क्या जिम्मेदार विभाग किसी हादसे के बाद ही जागेगा? जनता को आश्वासन नहीं, सड़क पर काम चाहिए। निरीक्षण की औपचारिकता नहीं, स्थायी समाधान चाहिए। संबंधित विभाग, जनप्रतिनिधि और प्रशासन को चाहिए कि इस मार्ग का तत्काल निरीक्षण कराकर मरम्मत अथवा आवश्यकतानुसार नवीनीकरण की ठोस कार्ययोजना तैयार करें और काम शुरू कराएं। क्योंकि सड़क केवल आने-जाने का रास्ता नहीं होती, यह आम आदमी की जिंदगी, मरीज की उम्मीद और क्षेत्र के विकास की बुनियादी जरूरत होती है। सवाल सिर्फ सड़क के गड्ढों का नहीं, बल्कि उन जिम्मेदारियों का भी है जो लंबे समय से इन गड्ढों में कहीं खोती नजर आ रही हैं।
पांच किलोमीटर का सफर, लेकिन सड़क पर हर कदम खतरे से खाली नहीं! आखिर कब जागेंगे जिम्मेदार? गड्ढों में गुम हुआ विकास का दावा मनेन्द्रगढ़/एमसीबी। मनेन्द्रगढ़ से नई लेदरी की ओर जाने वाला लगभग पांच किलोमीटर का सड़क मार्ग आज अपनी बदहाली पर आंसू बहाता नजर आ रहा है। झगराखाण्ड क्षेत्र में प्रवेश करते ही सड़क की हालत ऐसी बिगड़ती है कि नई लेदरी तक पहुंचते-पहुंचते जगह-जगह गड्ढे, उखड़ी हुई सड़क और जर्जर रास्ते राहगीरों के लिए मुसीबत बन जाते हैं। लगभग चार किलोमीटर का यह हिस्सा मानो सड़क कम और गड्ढों का रास्ता अधिक बन चुका है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इस सड़क की सुध लेने वाला कौन है? क्या जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को इस मार्ग की बदहाली दिखाई नहीं देती, या फिर इस रास्ते से गुजरने के बावजूद उन्हें आम नागरिकों की परेशानी महसूस नहीं होती? हैरानी की बात यह है कि इसी मार्ग से छत्तीसगढ़ के बड़े-बड़े नेता, मंत्री, अधिकारी, पदाधिकारी और एसईसीएल के स्थानीय यूनियन नेता भी अक्सर आवागमन करते हैं। इसके बावजूद सड़क की दशा सुधारने के लिए अब तक कोई ठोस पहल नजर नहीं आती। जब बड़े-बड़े जिम्मेदार लोग इसी रास्ते से गुजरते हैं, तो क्या उनकी गाड़ियों के पहिए इन गड्ढों से नहीं टकराते? क्या उन्हें हिचकोले खाते इस सफर में आम जनता की तकलीफ का एहसास नहीं होता? इस सड़क पर रोजाना दोपहिया वाहन चालक, चारपहिया वाहन, स्कूली बच्चे, नौकरीपेशा लोग और ग्रामीण आवागमन करते हैं। गड्ढों से बचने के प्रयास में वाहन चालकों को कभी इस तरफ तो कभी उस तरफ जाना पड़ता है। जरा सी चूक दुर्घटना का कारण बन जाती है। ऐसे कई दुर्घटनाएं इन गड्ढों से बचाने के चक्कर में हो चुके हैं। बरसात के दिनों में गड्ढों में पानी भर जाने से उनकी गहराई का अंदाजा लगाना भी मुश्किल हो जाता है। सबसे अधिक चिंता उन मरीजों और उनके परिजनों की है, जिन्हें इलाज के लिए एंबुलेंस या निजी वाहन से मनेन्द्रगढ़ अथवा अन्य अस्पतालों तक पहुंचना पड़ता है। सामान्य राहगीर का इस सड़क पर सफर करना मुश्किल है, तो गंभीर मरीज की पीड़ा का अंदाजा लगाना भी कठिन है। जिस समय मरीज को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाने की जरूरत होती है, उस समय जर्जर सड़क उसकी परेशानी और बढ़ाता है। लोकतंत्र में विकास केवल मंचों से दिए जाने वाले भाषणों, चुनावी घोषणाओं और बड़े-बड़े दावों से नहीं मापा जाता। विकास की असली तस्वीर तो उन सड़कों पर दिखाई देती है, जिनसे आम जनता रोज गुजरती है। चुनाव के समय यही नेता जनता के उत्थान, क्षेत्र के विकास और बेहतर सुविधाओं के बड़े-बड़े वादे करते हैं। लेकिन चुनाव बीतने के बाद क्या जनता की बुनियादी समस्याएं भी भुला दी जाती हैं? आखिर पांच किलोमीटर के इस छोटे से मार्ग की बदहाली दूर करने के लिए कितने वर्षों तक इंतजार करना पड़ेगा? क्या इस सड़क की मरम्मत के लिए किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार किया जा रहा है? क्या जिम्मेदार विभाग किसी हादसे के बाद ही जागेगा? जनता को आश्वासन नहीं, सड़क पर काम चाहिए। निरीक्षण की औपचारिकता नहीं, स्थायी समाधान चाहिए। संबंधित विभाग, जनप्रतिनिधि और प्रशासन को चाहिए कि इस मार्ग का तत्काल निरीक्षण कराकर मरम्मत अथवा आवश्यकतानुसार नवीनीकरण की ठोस कार्ययोजना तैयार करें और काम शुरू कराएं। क्योंकि सड़क केवल आने-जाने का रास्ता नहीं होती, यह आम आदमी की जिंदगी, मरीज की उम्मीद और क्षेत्र के विकास की बुनियादी जरूरत होती है। सवाल सिर्फ सड़क के गड्ढों का नहीं, बल्कि उन जिम्मेदारियों का भी है जो लंबे समय से इन गड्ढों में कहीं खोती नजर आ रही हैं।
- पांच किलोमीटर का सफर, लेकिन सड़क पर हर कदम खतरे से खाली नहीं! आखिर कब जागेंगे जिम्मेदार? गड्ढों में गुम हुआ विकास का दावा मनेन्द्रगढ़/एमसीबी। मनेन्द्रगढ़ से नई लेदरी की ओर जाने वाला लगभग पांच किलोमीटर का सड़क मार्ग आज अपनी बदहाली पर आंसू बहाता नजर आ रहा है। झगराखाण्ड क्षेत्र में प्रवेश करते ही सड़क की हालत ऐसी बिगड़ती है कि नई लेदरी तक पहुंचते-पहुंचते जगह-जगह गड्ढे, उखड़ी हुई सड़क और जर्जर रास्ते राहगीरों के लिए मुसीबत बन जाते हैं। लगभग चार किलोमीटर का यह हिस्सा मानो सड़क कम और गड्ढों का रास्ता अधिक बन चुका है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इस सड़क की सुध लेने वाला कौन है? क्या जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को इस मार्ग की बदहाली दिखाई नहीं देती, या फिर इस रास्ते से गुजरने के बावजूद उन्हें आम नागरिकों की परेशानी महसूस नहीं होती? हैरानी की बात यह है कि इसी मार्ग से छत्तीसगढ़ के बड़े-बड़े नेता, मंत्री, अधिकारी, पदाधिकारी और एसईसीएल के स्थानीय यूनियन नेता भी अक्सर आवागमन करते हैं। इसके बावजूद सड़क की दशा सुधारने के लिए अब तक कोई ठोस पहल नजर नहीं आती। जब बड़े-बड़े जिम्मेदार लोग इसी रास्ते से गुजरते हैं, तो क्या उनकी गाड़ियों के पहिए इन गड्ढों से नहीं टकराते? क्या उन्हें हिचकोले खाते इस सफर में आम जनता की तकलीफ का एहसास नहीं होता? इस सड़क पर रोजाना दोपहिया वाहन चालक, चारपहिया वाहन, स्कूली बच्चे, नौकरीपेशा लोग और ग्रामीण आवागमन करते हैं। गड्ढों से बचने के प्रयास में वाहन चालकों को कभी इस तरफ तो कभी उस तरफ जाना पड़ता है। जरा सी चूक दुर्घटना का कारण बन जाती है। ऐसे कई दुर्घटनाएं इन गड्ढों से बचाने के चक्कर में हो चुके हैं। बरसात के दिनों में गड्ढों में पानी भर जाने से उनकी गहराई का अंदाजा लगाना भी मुश्किल हो जाता है। सबसे अधिक चिंता उन मरीजों और उनके परिजनों की है, जिन्हें इलाज के लिए एंबुलेंस या निजी वाहन से मनेन्द्रगढ़ अथवा अन्य अस्पतालों तक पहुंचना पड़ता है। सामान्य राहगीर का इस सड़क पर सफर करना मुश्किल है, तो गंभीर मरीज की पीड़ा का अंदाजा लगाना भी कठिन है। जिस समय मरीज को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाने की जरूरत होती है, उस समय जर्जर सड़क उसकी परेशानी और बढ़ाता है। लोकतंत्र में विकास केवल मंचों से दिए जाने वाले भाषणों, चुनावी घोषणाओं और बड़े-बड़े दावों से नहीं मापा जाता। विकास की असली तस्वीर तो उन सड़कों पर दिखाई देती है, जिनसे आम जनता रोज गुजरती है। चुनाव के समय यही नेता जनता के उत्थान, क्षेत्र के विकास और बेहतर सुविधाओं के बड़े-बड़े वादे करते हैं। लेकिन चुनाव बीतने के बाद क्या जनता की बुनियादी समस्याएं भी भुला दी जाती हैं? आखिर पांच किलोमीटर के इस छोटे से मार्ग की बदहाली दूर करने के लिए कितने वर्षों तक इंतजार करना पड़ेगा? क्या इस सड़क की मरम्मत के लिए किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार किया जा रहा है? क्या जिम्मेदार विभाग किसी हादसे के बाद ही जागेगा? जनता को आश्वासन नहीं, सड़क पर काम चाहिए। निरीक्षण की औपचारिकता नहीं, स्थायी समाधान चाहिए। संबंधित विभाग, जनप्रतिनिधि और प्रशासन को चाहिए कि इस मार्ग का तत्काल निरीक्षण कराकर मरम्मत अथवा आवश्यकतानुसार नवीनीकरण की ठोस कार्ययोजना तैयार करें और काम शुरू कराएं। क्योंकि सड़क केवल आने-जाने का रास्ता नहीं होती, यह आम आदमी की जिंदगी, मरीज की उम्मीद और क्षेत्र के विकास की बुनियादी जरूरत होती है। सवाल सिर्फ सड़क के गड्ढों का नहीं, बल्कि उन जिम्मेदारियों का भी है जो लंबे समय से इन गड्ढों में कहीं खोती नजर आ रही हैं।1
- पुरे छत्तीसगढ़ समेत कोरिया जिले में 26 वा राज्योंउत्स्व मनेगा1
- तुमसा झूठा कोई बेईमान नहीं है देश कि बपौती हिंदुस्तान नहीं है।1
- गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सम्मानीय जयनाथ सिंह केराम जी का उद्बोधन हम बिकने वाले नहीं,कोई ऐसा कागज का नोट नहीं बना जो हीरा जैसे विचार को किसी से समझौता कर सकता है1
- अनूपपुर के संसाधनों का बेहतर उपयोग कर विकास और रोजगार के अवसर बढ़ाएं – दिलीप जायसवाल मध्यप्रदेश स्थापना दिवस समारोह हर्षोल्लास से मनाया गया अनूपपुर : - मध्यप्रदेश स्थापना दिवस 1 नवंबर के अवसर पर जिला स्तरीय समारोह का आयोजन ऑडिटोरियम हॉल, एकलव्य आवासीय विद्यालय अनूपपुर में हर्षोल्लास के साथ आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मध्यप्रदेश शासन के कुटीर एवं ग्रामोद्योग राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिलीप जायसवाल रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन, वंदे मातरम् एवं मध्यप्रदेश गान के गान से हुआ। राज्यमंत्री दिलीप जायसवाल ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश स्थापना दिवस प्रदेश की गौरवशाली विरासत, समृद्ध संस्कृति, इतिहास और विकास यात्रा को स्मरण करने के साथ उनसे प्रेरणा लेकर वर्तमान को बेहतर बनाने तथा उज्ज्वल भविष्य के निर्माण का अवसर है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए देश के 140 करोड़ नागरिकों की सहभागिता आवश्यक है। इसमें युवा, महिलाएं, किसान, श्रमिक, व्यापारी और अधिकारी-कर्मचारी सहित समाज के प्रत्येक वर्ग की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि अनूपपुर जिला नर्मदा, सोन और जोहिला जैसी नदियों, खनिज संपदा तथा समृद्ध वन संपदा से परिपूर्ण है। जिले में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए विकास और रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में प्रयास किए जाने चाहिए। कृषि एवं सिंचाई सुविधाओं को मजबूत बनाने के साथ पशुपालन, मत्स्य पालन और कुक्कुट पालन जैसी गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। जिले में स्थानीय संभावनाओं के अनुरूप कृषि उत्पादों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। दारसागर में टमाटर उत्पादन की सफलता का उल्लेख करते हुए उन्होंने स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराकर प्रोत्साहित करने पर जोर दिया। उन्होंने युवाओं को कौशल विकास एवं रोजगार से जोड़ने तथा अधोसंरचना, बिजली, सड़क, उद्योग और शिक्षा के क्षेत्र में विकास कार्यों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया। मध्यप्रदेश अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष श्री रामलाल रौतेल ने अपने उद्बोधन में कहा कि मध्यप्रदेश स्थापना दिवस प्रदेश की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और विकास यात्रा का स्मरण करने का अवसर है। जनजातीय संस्कृति एवं परंपराएं हमारी विशिष्ट पहचान हैं। इनका संरक्षण एवं संवर्धन करते हुए आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना हम सभी का दायित्व है। उन्होंने जनजातीय समाज को शिक्षा, रोजगार और विकास के अवसरों से जोड़ने तथा उनकी सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखते हुए विकास की मुख्यधारा में सहभागिता सुनिश्चित करने पर बल दिया। समारोह में विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के विद्यार्थियों एवं कलाकारों द्वारा मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं। कन्या शिक्षा परिसर अनूपपुर की छात्राओं ने मध्यप्रदेश की संस्कृति पर आधारित लोक नृत्य प्रस्तुत किया। एकलव्य आवासीय विद्यालय, आदर्श विद्यालय एवं तुलसी विद्यालय के विद्यार्थियों ने नृत्य एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया। सविता रैदास ने देशभक्ति गीत 'ऐ मेरे वतन के लोगों' की भावपूर्ण प्रस्तुति दी। गुदुमबाजा दल ने पारंपरिक लोकवाद्य की प्रस्तुति दी, वहीं पसान नगर पालिका क्षेत्र की पूजा कशयप ने सांस्कृतिक शोलो नृत्य प्रस्तुति तथा कोतमा के लोकप्रिय गायक संदीप शिवहरे एवं दल ने ने देशभक्ति गीत एवं भजनों की प्रस्तुति से समारोह में देशभक्ति और लोक संस्कृति के रंग बिखेरे। कार्यक्रम का सफल संचालन जिला पंचायत के जनसंपर्क अधिकारी अमित श्रीवास्तव द्वारा किया गया। समारोह में किया गया सम्मान, पुरस्कार व हित लाभ का वितरण समारोह में लोकतंत्र सेनानी मूलचंद अग्रवाल का शॉल एवं श्रीफल भेंटकर सम्मान किया गया। भगवान श्रीकृष्ण मेधावी छात्रवृत्ति प्रतियोगिता में अनूपपुर जिले के कोतमा कॉलेज की छात्रा सुश्री काजल केवट को मध्य प्रदेश शासन संस्कृति स्वराज संस्थान के कृष्ण पाथेय न्यास द्वारा प्रेषित एक लाख रुपये की पुरस्कार राशि का चेक एवं प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। इसके साथ ही चार पात्र अभ्यर्थी को अनुकंपा नियुक्ति आदेश पत्र प्रदान किए गए। दिव्यांगजनों को सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से श्रीमती जुगुन्ती चौधरी (अनूपपुर), नरेन्द्र रौतेल (जमुड़ी), मोहम्मद शब्बीर (बिजुरी) एवं रामचरण साहू (कोतमा) को मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल वितरित की गईं। हाथियों के विचरण वाले क्षेत्रों में निगरानी एवं सतर्कता बढ़ाने के उद्देश्य से 10 व्यक्तियों को टॉर्च वितरित की गईं। वहीं, कृषक कल्याण स्वाभिमान पर्व के अंतर्गत आयोजित कृषि क्विज प्रतियोगिता के विजेताओं को प्रथम पुरस्कार के रूप में ट्रैक्टर, द्वितीय पुरस्कार के रूप में बुलेट मोटरसाइकिल तथा तृतीय पुरस्कार के रूप में ई-स्कूटी प्रदान की गई। प्रतियोगिता में चंदन सिंह/कल्याण सिंह ने प्रथम, तेजू सिंह/सुरेश सिंह ने द्वितीय तथा नत्थूलाल यादव/स्व. वेसाहन लाल ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती प्रीति रमेश, कलेक्टर रत्नाकर झा, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्रीमती अर्चना कुमारी, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्रीमती पार्वती राठौर, अपर कलेक्टर श्री बलवीर रमन, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व सुश्री प्राशी अग्रवाल, जनप्रतिनिधि रामदास पुरी, प्रेमचंद यादव सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी, कर्मचारी,पत्रकार , स्वयं सहायता समूह की दीदी सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी तथा नागरिकगण उपस्थित रहे।1
- ग्राम पंचायत महुली ब्लॉक ओडगी जिला सूरजपुर छत्तीसगढ़1
- गांव की देहाती सैला टीम द्वारा सैला नृत्य किया गया बहुत ही सुन्दर है आप लोग देख कर आनन्द अनुभव कर सकते है । ग्राम कमछ पोस्ट कमछ तहसील कुसमी जिला सीधी म प्र1
- अमरकंटक ओपन फुटबॉल टूर्नामेंट में महोरा और कोहका के बीच रोमांचक मुकाबला मुख्य अतिथि रज्जू सिंह नेताम ने खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त कर टॉस कराया, खेल भावना के साथ खेलने के लिए किया प्रेरित अमरकंटक - प्रदेश के प्रमुख धार्मिक एवं आध्यात्मिक तीर्थ स्थल तथा पर्यटन केंद्र पवित्र नगरी अमरकंटक में आयोजित ओपन फुटबॉल टूर्नामेंट प्रतियोगिता के अंतर्गत महोरा और कोहका की टीमों के बीच रोमांचक मुकाबला खेला जा रहा है। प्रतियोगिता को लेकर खिलाड़ियों के साथ-साथ खेल प्रेमियों में भी खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। मैच के शुभारंभ अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में अमरकंटक नगर परिषद के उपाध्यक्ष रज्जू सिंह नेताम उपस्थित रहे। उन्होंने फुटबॉल मैदान पहुंचकर दोनों टीमों के खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त किया तथा टॉस कराकर मुकाबले का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि खेल में जीत और हार से अधिक महत्वपूर्ण खेल भावना, अनुशासन और आपसी भाईचारा है। उन्होंने सभी खिलाड़ियों से पूरे उत्साह और खेल भावना के साथ बेहतर प्रदर्शन करने का आह्वान किया। इस अवसर पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अमरकंटक के चिकित्सक डॉ. रानू प्रताप सारीवान , साहिल अग्रवाल अवधेश बंटी , सेंट्रल बैंक के मिथिलेश मानिकपुरी, समीर मानिकपुरी एवं दीपचंद जैन सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। अमरकंटक में आयोजित इस ओपन फुटबॉल प्रतियोगिता से स्थानीय एवं ग्रामीण क्षेत्र के खिलाड़ियों को अपनी खेल प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिल रहा है। वहीं विभिन्न टीमों के बीच हो रहे मुकाबलों को देखने के लिए खेल प्रेमियों की भी अच्छी उपस्थिति बनी हुई है।1