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गिरिडीह जिले में रविवार को हुई तेज बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिसके चलते कई इलाकों में गंभीर जलजमाव की स्थिति उत्पन्न हो गई। सुबह से ही आसमान में घने बादल छाए रहे और कई घंटों तक लगातार बारिश होती रही। इस मूसलाधार बारिश के कारण शहर और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों की सड़कों पर पानी भर गया, जिससे लोगों को आवागमन में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। बारिश की वजह से बाजारों में भीड़ भी कम रही और कई स्थानों पर नालियों का पानी सड़कों पर बहने लगा। हालांकि, किसानों ने इस बारिश को खरीफ फसलों के लिए लाभदायक बताया है। वहीं, कुछ निचले इलाकों में पानी भर जाने से वहां के निवासियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में भी जिले में बारिश की संभावना बनी हुई है। इसे देखते हुए प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और जलभराव वाले क्षेत्रों में विशेष सावधानी बरतने की अपील की है।

6 hrs ago
user_Gramin News Giridih
Gramin News Giridih
Jamua, Giridih•
6 hrs ago

गिरिडीह जिले में रविवार को हुई तेज बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिसके चलते कई इलाकों में गंभीर जलजमाव की स्थिति उत्पन्न हो गई। सुबह से ही आसमान में घने बादल छाए रहे और कई घंटों तक लगातार बारिश होती रही। इस मूसलाधार बारिश के कारण शहर और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों की सड़कों पर पानी भर गया, जिससे लोगों को आवागमन में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। बारिश की वजह से बाजारों में भीड़ भी कम रही और कई स्थानों पर नालियों का पानी सड़कों पर बहने लगा। हालांकि, किसानों ने इस बारिश को खरीफ फसलों के लिए लाभदायक बताया है। वहीं, कुछ निचले इलाकों में पानी भर जाने से वहां के निवासियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में भी जिले में बारिश की संभावना बनी हुई है। इसे देखते हुए प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और जलभराव वाले क्षेत्रों में विशेष सावधानी बरतने की अपील की है।

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  • गिरिडीह जिले में रविवार को हुई तेज बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिसके चलते कई इलाकों में गंभीर जलजमाव की स्थिति उत्पन्न हो गई। सुबह से ही आसमान में घने बादल छाए रहे और कई घंटों तक लगातार बारिश होती रही। इस मूसलाधार बारिश के कारण शहर और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों की सड़कों पर पानी भर गया, जिससे लोगों को आवागमन में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। बारिश की वजह से बाजारों में भीड़ भी कम रही और कई स्थानों पर नालियों का पानी सड़कों पर बहने लगा। हालांकि, किसानों ने इस बारिश को खरीफ फसलों के लिए लाभदायक बताया है। वहीं, कुछ निचले इलाकों में पानी भर जाने से वहां के निवासियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में भी जिले में बारिश की संभावना बनी हुई है। इसे देखते हुए प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और जलभराव वाले क्षेत्रों में विशेष सावधानी बरतने की अपील की है।
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    गिरिडीह जिले में रविवार को हुई तेज बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिसके चलते कई इलाकों में गंभीर जलजमाव की स्थिति उत्पन्न हो गई। सुबह से ही आसमान में घने बादल छाए रहे और कई घंटों तक लगातार बारिश होती रही। इस मूसलाधार बारिश के कारण शहर और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों की सड़कों पर पानी भर गया, जिससे लोगों को आवागमन में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। बारिश की वजह से बाजारों में भीड़ भी कम रही और कई स्थानों पर नालियों का पानी सड़कों पर बहने लगा।

हालांकि, किसानों ने इस बारिश को खरीफ फसलों के लिए लाभदायक बताया है। वहीं, कुछ निचले इलाकों में पानी भर जाने से वहां के निवासियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में भी जिले में बारिश की संभावना बनी हुई है। इसे देखते हुए प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और जलभराव वाले क्षेत्रों में विशेष सावधानी बरतने की अपील की है।
    user_Gramin News Giridih
    Gramin News Giridih
    Jamua, Giridih•
    6 hrs ago
  • गिरिडीह जिले के जमखोखरो पंचायत के अंतर्गत आने वाले बाकरगंज गांव में फाइबर ब्लॉक सड़क निर्माण कार्य का शुभारंभ किया गया है। यह सड़क हीरोडीह थाना क्षेत्र में बनाई जा रही है, जिससे स्थानीय ग्रामीणों को आवागमन की बेहतर सुविधाएँ मिलेंगी। इस परियोजना से ग्रामीण विकास और सार्वजनिक कल्याण को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
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    गिरिडीह जिले के जमखोखरो पंचायत के अंतर्गत आने वाले बाकरगंज गांव में फाइबर ब्लॉक सड़क निर्माण कार्य का शुभारंभ किया गया है। यह सड़क हीरोडीह थाना क्षेत्र में बनाई जा रही है, जिससे स्थानीय ग्रामीणों को आवागमन की बेहतर सुविधाएँ मिलेंगी। इस परियोजना से ग्रामीण विकास और सार्वजनिक कल्याण को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
    user_Samachar times
    Samachar times
    Journalist Jamua, Giridih•
    11 hrs ago
  • हाल ही में एक घर में रोजमर्रा के काम के तहत फ्रिज साफ कर रही एक महिला को अपनी लापरवाही का खौफनाक अंजाम भुगतना पड़ा। यह पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई, जिसमें दिख रहा है कि महिला ने बिना किसी खतरे के बारे में सोचे चालू फ्रिज की सफाई करना शुरू कर दिया। सफाई के दौरान महिला को अचानक एक जोरदार बिजली का झटका लगा, जो इतना तीव्र था कि वह संभल नहीं पाई और तुरंत वहीं गिर पड़ी। इस हादसे ने हर घर की महिलाओं को सोचने पर मजबूर कर दिया है, क्योंकि बिजली से चलने वाली चीजों को अक्सर मामूली समझा जाता है, जबकि फ्रिज, वॉशिंग मशीन, मिक्सर या कोई भी इलेक्ट्रिक अप्लायंस चालू अवस्था में फॉल्ट या लीकेज होने पर जानलेवा झटका दे सकता है। यह वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने सुरक्षा को लेकर अपनी अहम सलाह दी है। ज्यादातर लोगों ने इस बात पर सहमति जताई कि बिजली और पानी का मेल खतरनाक होता है, इसलिए सफाई शुरू करने से पहले उपकरणों का स्विच ऑफ करना और प्लग निकालना सबसे जरूरी कदम है। कई यूजर्स ने सुरक्षा को सबसे बड़ा फर्ज बताया और कहा कि चालू बिजली के उपकरणों की सफाई करते समय जरा सी भी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। लोगों ने एक सुर में समझाया कि किसी भी बिजली से चलने वाले उपकरण को कभी चालू हालत में साफ नहीं करना चाहिए।
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    हाल ही में एक घर में रोजमर्रा के काम के तहत फ्रिज साफ कर रही एक महिला को अपनी लापरवाही का खौफनाक अंजाम भुगतना पड़ा। यह पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई, जिसमें दिख रहा है कि महिला ने बिना किसी खतरे के बारे में सोचे चालू फ्रिज की सफाई करना शुरू कर दिया।

सफाई के दौरान महिला को अचानक एक जोरदार बिजली का झटका लगा, जो इतना तीव्र था कि वह संभल नहीं पाई और तुरंत वहीं गिर पड़ी। इस हादसे ने हर घर की महिलाओं को सोचने पर मजबूर कर दिया है, क्योंकि बिजली से चलने वाली चीजों को अक्सर मामूली समझा जाता है, जबकि फ्रिज, वॉशिंग मशीन, मिक्सर या कोई भी इलेक्ट्रिक अप्लायंस चालू अवस्था में फॉल्ट या लीकेज होने पर जानलेवा झटका दे सकता है।

यह वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने सुरक्षा को लेकर अपनी अहम सलाह दी है। ज्यादातर लोगों ने इस बात पर सहमति जताई कि बिजली और पानी का मेल खतरनाक होता है, इसलिए सफाई शुरू करने से पहले उपकरणों का स्विच ऑफ करना और प्लग निकालना सबसे जरूरी कदम है। कई यूजर्स ने सुरक्षा को सबसे बड़ा फर्ज बताया और कहा कि चालू बिजली के उपकरणों की सफाई करते समय जरा सी भी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। लोगों ने एक सुर में समझाया कि किसी भी बिजली से चलने वाले उपकरण को कभी चालू हालत में साफ नहीं करना चाहिए।
    user_Rupali singh
    Rupali singh
    Giridih, Jharkhand•
    19 hrs ago
  • डुमरी विधायक जयराम महतो ने सोमवार को डुमरी प्रखंड-सह-अंचल कार्यालय के सभागार में जनता दरबार का आयोजन किया, जहाँ उन्होंने लोगों की समस्याओं को सुना। डुमरी सहित विभिन्न प्रखंडों से आए लोगों ने विधायक के समक्ष अपनी निजी और सार्वजनिक समस्याओं के संबंध में आवेदन देकर समाधान की गुहार लगाई। इस दौरान, विधायक ने कई समस्याओं का मौके पर ही समाधान किया, जबकि अन्य मामलों में उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों और दूसरे पक्ष से फोन पर बात कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। जनता दरबार में, भावनंद से आईं देवंती देवी ने बताया कि 2019 में जमीन खरीदने के बावजूद उनका दाखिल-खारिज अब तक नहीं हुआ है, जबकि उसी जमीन के अन्य प्लॉटों का दाखिल-खारिज हो चुका है। करमा टोंगरी के वीरेंद्र प्रसाद ने शिकायत की कि चार बार आवेदन देने के बाद भी उनकी जमीन ऑनलाइन नहीं की गई है। इन दोनों मामलों में विधायक ने तत्काल संबंधित कर्मचारियों को फोन कर आवश्यक निर्देश दिए। चंद्रपुरा प्रखंड के करमा टांड़ से आईं विमली देवी ने जानकारी दी कि उनके पति की पहली पत्नी की पुत्री के बेटे ने गलत वंशावली बनाकर जमीन के आधार पर नौकरी हासिल कर ली है, और इस संबंध में कई बार विभाग को पत्र लिखने के बावजूद कोई समाधान नहीं हुआ है। वहीं, हजारीबाग के बड़कागांव से आईं सीता देवी ने आरोप लगाया कि भूमाफिया और थाना प्रभारी की साजिश के तहत सावित्री देवी के आवेदन पर उनके पति और भैंसुर को जेल भेज दिया गया है, जिस पर उन्होंने विधायक से जांच कमेटी गठित कर मामले की जाँच कराने की मांग की। प्रखंड के धनहरा गांव से आईं झरिया देवी और यशोदा देवी सहित अन्य महिलाओं ने विधायक को चापाकल लगवाने के लिए आवेदन दिया। इस अवसर पर रामेश्वर महतो, मुखिया सुबोध यादव, रविंद्र पांडेय, रोहित चौधरी, जितेंद्र मोहली, मुकेश मंडल, नकुल महतो, भोला महतो और संजय महतो सहित दर्जनों लोग मौजूद थे।
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    डुमरी विधायक जयराम महतो ने सोमवार को डुमरी प्रखंड-सह-अंचल कार्यालय के सभागार में जनता दरबार का आयोजन किया, जहाँ उन्होंने लोगों की समस्याओं को सुना। डुमरी सहित विभिन्न प्रखंडों से आए लोगों ने विधायक के समक्ष अपनी निजी और सार्वजनिक समस्याओं के संबंध में आवेदन देकर समाधान की गुहार लगाई। इस दौरान, विधायक ने कई समस्याओं का मौके पर ही समाधान किया, जबकि अन्य मामलों में उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों और दूसरे पक्ष से फोन पर बात कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

जनता दरबार में, भावनंद से आईं देवंती देवी ने बताया कि 2019 में जमीन खरीदने के बावजूद उनका दाखिल-खारिज अब तक नहीं हुआ है, जबकि उसी जमीन के अन्य प्लॉटों का दाखिल-खारिज हो चुका है। करमा टोंगरी के वीरेंद्र प्रसाद ने शिकायत की कि चार बार आवेदन देने के बाद भी उनकी जमीन ऑनलाइन नहीं की गई है। इन दोनों मामलों में विधायक ने तत्काल संबंधित कर्मचारियों को फोन कर आवश्यक निर्देश दिए। चंद्रपुरा प्रखंड के करमा टांड़ से आईं विमली देवी ने जानकारी दी कि उनके पति की पहली पत्नी की पुत्री के बेटे ने गलत वंशावली बनाकर जमीन के आधार पर नौकरी हासिल कर ली है, और इस संबंध में कई बार विभाग को पत्र लिखने के बावजूद कोई समाधान नहीं हुआ है। वहीं, हजारीबाग के बड़कागांव से आईं सीता देवी ने आरोप लगाया कि भूमाफिया और थाना प्रभारी की साजिश के तहत सावित्री देवी के आवेदन पर उनके पति और भैंसुर को जेल भेज दिया गया है, जिस पर उन्होंने विधायक से जांच कमेटी गठित कर मामले की जाँच कराने की मांग की।

प्रखंड के धनहरा गांव से आईं झरिया देवी और यशोदा देवी सहित अन्य महिलाओं ने विधायक को चापाकल लगवाने के लिए आवेदन दिया। इस अवसर पर रामेश्वर महतो, मुखिया सुबोध यादव, रविंद्र पांडेय, रोहित चौधरी, जितेंद्र मोहली, मुकेश मंडल, नकुल महतो, भोला महतो और संजय महतो सहित दर्जनों लोग मौजूद थे।
    user_Ajay Kumar Rajak
    Ajay Kumar Rajak
    Local News Reporter डुमरी, गिरिडीह, झारखंड•
    9 hrs ago
  • बगोदर के औंरा स्थित मस्जिद और मदरसा से जुड़ी जमीन तथा अनुदान राशि में कथित गड़बड़ी के आरोपों के बाद, अंजुमन कमेटी और मुस्लिम समुदाय खुलकर सामने आया है। समुदाय के प्रतिनिधियों ने इन आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताते हुए दस्तावेज़ पेश किए हैं और इन्हें मस्जिद-मदरसा की छवि धूमिल करने तथा समाज को बांटने की एक साजिश करार दिया है। अंजुमन कमेटी औंरा के सदर सरफराज अहमद ने मीडिया को बताया कि मस्जिद और मदरसा की 37 डिसमिल जमीन को लेकर लगाए जा रहे आरोप तथ्यों से परे हैं। उन्होंने संबंधित दस्तावेज दिखाते हुए स्पष्ट किया कि करीब 45 वर्ष पूर्व यह जमीन मौलाना मो. युनूस रसीदी के नाम रजिस्ट्री हुई थी, लेकिन दस्तावेजों में यह साफ लिखा है कि जमीन का उपयोग मस्जिद और मदरसा के लिए ही होगा। इसलिए, मौलाना युनूस रसीदी या उनके वारिसों का इस जमीन पर कोई व्यक्तिगत स्वामित्व या अधिकार नहीं है। मदरसा अनुदान राशि के कथित गबन के आरोपों पर कमेटी ने अपना पक्ष रखते हुए बताया कि मौलाना मो. युनूस रसीदी लगभग 10 वर्ष पूर्व सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जबकि जिस अनुदान राशि को लेकर आरोप लगाए जा रहे हैं, वह तीन वर्ष पहले प्राप्त हुई थी। ऐसे में उनकी सेवानिवृत्ति के बाद मिली राशि के गबन का सवाल ही नहीं उठता। अंजुमन कमेटी और मुस्लिम समुदाय के लोगों ने आरोप लगाने वालों पर पलटवार करते हुए कहा कि जिन लोगों द्वारा यह मुद्दा उठाया जा रहा है, उनका मस्जिद और मदरसा के संचालन से कोई संबंध नहीं है। समुदाय का आरोप है कि पहले भी इसी तरह के प्रयास कर सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने और लोगों को बांटने की कोशिश की गई थी, जिसका समुदाय ने एकजुट होकर जवाब दिया था। कमेटी सदस्यों ने मौलाना मो. युनूस रसीदी को एक सम्मानित और नेकदिल व्यक्ति बताया, जिन्होंने पूर्व में भी उन्हें बदनाम कर मदरसा से अलग करने के प्रयास के बावजूद समुदाय के आग्रह पर दोबारा जिम्मेदारी संभाली थी। समुदाय ने स्पष्ट किया है कि मस्जिद और मदरसा से जुड़े मामलों को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम और आरोपों का जवाब तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर दिया जाएगा और किसी भी साजिश को सफल नहीं होने दिया जाएगा।
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    बगोदर के औंरा स्थित मस्जिद और मदरसा से जुड़ी जमीन तथा अनुदान राशि में कथित गड़बड़ी के आरोपों के बाद, अंजुमन कमेटी और मुस्लिम समुदाय खुलकर सामने आया है। समुदाय के प्रतिनिधियों ने इन आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताते हुए दस्तावेज़ पेश किए हैं और इन्हें मस्जिद-मदरसा की छवि धूमिल करने तथा समाज को बांटने की एक साजिश करार दिया है।

अंजुमन कमेटी औंरा के सदर सरफराज अहमद ने मीडिया को बताया कि मस्जिद और मदरसा की 37 डिसमिल जमीन को लेकर लगाए जा रहे आरोप तथ्यों से परे हैं। उन्होंने संबंधित दस्तावेज दिखाते हुए स्पष्ट किया कि करीब 45 वर्ष पूर्व यह जमीन मौलाना मो. युनूस रसीदी के नाम रजिस्ट्री हुई थी, लेकिन दस्तावेजों में यह साफ लिखा है कि जमीन का उपयोग मस्जिद और मदरसा के लिए ही होगा। इसलिए, मौलाना युनूस रसीदी या उनके वारिसों का इस जमीन पर कोई व्यक्तिगत स्वामित्व या अधिकार नहीं है।

मदरसा अनुदान राशि के कथित गबन के आरोपों पर कमेटी ने अपना पक्ष रखते हुए बताया कि मौलाना मो. युनूस रसीदी लगभग 10 वर्ष पूर्व सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जबकि जिस अनुदान राशि को लेकर आरोप लगाए जा रहे हैं, वह तीन वर्ष पहले प्राप्त हुई थी। ऐसे में उनकी सेवानिवृत्ति के बाद मिली राशि के गबन का सवाल ही नहीं उठता। अंजुमन कमेटी और मुस्लिम समुदाय के लोगों ने आरोप लगाने वालों पर पलटवार करते हुए कहा कि जिन लोगों द्वारा यह मुद्दा उठाया जा रहा है, उनका मस्जिद और मदरसा के संचालन से कोई संबंध नहीं है। समुदाय का आरोप है कि पहले भी इसी तरह के प्रयास कर सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने और लोगों को बांटने की कोशिश की गई थी, जिसका समुदाय ने एकजुट होकर जवाब दिया था। कमेटी सदस्यों ने मौलाना मो. युनूस रसीदी को एक सम्मानित और नेकदिल व्यक्ति बताया, जिन्होंने पूर्व में भी उन्हें बदनाम कर मदरसा से अलग करने के प्रयास के बावजूद समुदाय के आग्रह पर दोबारा जिम्मेदारी संभाली थी।

समुदाय ने स्पष्ट किया है कि मस्जिद और मदरसा से जुड़े मामलों को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम और आरोपों का जवाब तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर दिया जाएगा और किसी भी साजिश को सफल नहीं होने दिया जाएगा।
    user_BITTU JOURNALIST
    BITTU JOURNALIST
    Local News Reporter बगोदर, गिरिडीह, झारखंड•
    10 hrs ago
  • बिहार के बांका जिले में नए जिलाधिकारी (डीएम) ने अपना पहला आधिकारिक संबोधन दिया है।
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    बिहार के बांका जिले में नए जिलाधिकारी (डीएम) ने अपना पहला आधिकारिक संबोधन दिया है।
    user_Upendra Yadav Prass % U.K.Y रिपोर्टर
    Upendra Yadav Prass % U.K.Y रिपोर्टर
    Court reporter चानन, बांका, बिहार•
    6 hrs ago
  • अबकी बार चलानी है श्रवनी मेला देवघर अबकी बार चलानी है श्रवनी मेला देवघर.... अबकी बार चलानी है श्रवनी मेला देवघर
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    अबकी बार चलानी है श्रवनी मेला देवघर
अबकी बार चलानी है श्रवनी मेला देवघर....
अबकी बार चलानी है श्रवनी मेला देवघर
    user_BaरKaट्ठा Ki आwaज
    BaरKaट्ठा Ki आwaज
    Court reporter Barkatha, Hazaribagh•
    7 hrs ago
  • जामताड़ा जिला प्रशासन ने नेशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल के आदेश और केंद्र सरकार की सस्टेनेबल सैंड माइनिंग गाइडलाइन के तहत 10 जून, 2026 से 15 अक्टूबर, 2026 तक सभी नदी बालूघाटों से बालू उठाव पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। उपायुक्त आलोक कुमार ने अनुमंडल पदाधिकारी, जिला खनन पदाधिकारी और सभी अंचल अधिकारियों को अवैध बालू उठाव रोकने के लिए सख्त निगरानी और कार्रवाई सुनिश्चित करने के स्पष्ट निर्देश भी जारी किए थे। हालांकि, जमीनी हकीकत इन प्रशासनिक आदेशों से बिल्कुल उलट है, जहाँ अवैध बालू खनन का कारोबार बदस्तूर जारी है। नाला थाना क्षेत्र का पथरघाटा घाट, जो पहले से अवैध बालू खनन और भंडारण के लिए चर्चित रहा है, वहाँ दुर्गा मंदिर के सामने भारी मात्रा में बालू अवैध बिक्री के लिए खुलेआम स्टॉक किया गया है। इसके अलावा, बंखेत घाट पर बड़े मशीनों से लगातार बालू का अवैध खनन हो रहा है, जिसे हाईवा, डंपर और ट्रैक्टर के माध्यम से बंगाल सीमा तक पहुंचाया जा रहा है। गंभीर बात यह है कि सीमावर्ती बंखेत घाट पर बंगाल की ओर से खनन करते हुए माफिया झारखंड सीमा में प्रवेश कर बालू निकाल रहे हैं, लेकिन स्थानीय प्रशासन की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं दिख रही है। इससे सवाल उठ रहे हैं कि जब जिले में बालू खनन पर पूर्ण प्रतिबंध लागू है, तो आखिर किसकी शह पर यह अवैध कारोबार जारी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासनिक अधिकारियों की निष्क्रियता और लापरवाही के कारण बालू माफियाओं के हौसले बुलंद हैं, और सरकारी आदेश केवल कागजों तक ही सीमित होकर रह गए हैं, जबकि धरातल पर नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। इस मामले पर उपायुक्त आलोक कुमार ने अवैध बालू खनन के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही है। अब देखना यह होगा कि यह कार्रवाई वास्तव में जमीन पर उतरती है या फिर पिछले आदेशों की तरह सिर्फ एक बयान बनकर रह जाती है।
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    जामताड़ा जिला प्रशासन ने नेशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल के आदेश और केंद्र सरकार की सस्टेनेबल सैंड माइनिंग गाइडलाइन के तहत 10 जून, 2026 से 15 अक्टूबर, 2026 तक सभी नदी बालूघाटों से बालू उठाव पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। उपायुक्त आलोक कुमार ने अनुमंडल पदाधिकारी, जिला खनन पदाधिकारी और सभी अंचल अधिकारियों को अवैध बालू उठाव रोकने के लिए सख्त निगरानी और कार्रवाई सुनिश्चित करने के स्पष्ट निर्देश भी जारी किए थे। हालांकि, जमीनी हकीकत इन प्रशासनिक आदेशों से बिल्कुल उलट है, जहाँ अवैध बालू खनन का कारोबार बदस्तूर जारी है।

नाला थाना क्षेत्र का पथरघाटा घाट, जो पहले से अवैध बालू खनन और भंडारण के लिए चर्चित रहा है, वहाँ दुर्गा मंदिर के सामने भारी मात्रा में बालू अवैध बिक्री के लिए खुलेआम स्टॉक किया गया है। इसके अलावा, बंखेत घाट पर बड़े मशीनों से लगातार बालू का अवैध खनन हो रहा है, जिसे हाईवा, डंपर और ट्रैक्टर के माध्यम से बंगाल सीमा तक पहुंचाया जा रहा है। गंभीर बात यह है कि सीमावर्ती बंखेत घाट पर बंगाल की ओर से खनन करते हुए माफिया झारखंड सीमा में प्रवेश कर बालू निकाल रहे हैं, लेकिन स्थानीय प्रशासन की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं दिख रही है। इससे सवाल उठ रहे हैं कि जब जिले में बालू खनन पर पूर्ण प्रतिबंध लागू है, तो आखिर किसकी शह पर यह अवैध कारोबार जारी है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासनिक अधिकारियों की निष्क्रियता और लापरवाही के कारण बालू माफियाओं के हौसले बुलंद हैं, और सरकारी आदेश केवल कागजों तक ही सीमित होकर रह गए हैं, जबकि धरातल पर नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। इस मामले पर उपायुक्त आलोक कुमार ने अवैध बालू खनन के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही है। अब देखना यह होगा कि यह कार्रवाई वास्तव में जमीन पर उतरती है या फिर पिछले आदेशों की तरह सिर्फ एक बयान बनकर रह जाती है।
    user_Gramin News Giridih
    Gramin News Giridih
    Jamua, Giridih•
    21 hrs ago
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