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केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा का नाम बदलकर 'विकसित ग्राम जी' करने और इसमें नए प्रावधान लागू करने पर हिमाचल प्रदेश सरकार ने कड़ा विरोध जताया है। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने आरोप लगाया है कि केंद्र ने राज्यों से राय लिए बिना यह फैसला एकतरफा तरीके से थोप दिया है। मंत्री अनिरुद्ध सिंह के अनुसार, पहले मनरेगा का पूरा खर्च केंद्र सरकार उठाती थी, लेकिन अब इसे हिमाचल जैसे विशेष राज्यों के लिए 90:10 और अन्य राज्यों के लिए 60:40 कर दिया गया है। इस बदलाव के कारण हिमाचल प्रदेश पर हर साल ₹164.63 करोड़ का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा, जिससे मौजूदा रोजगार पर ₹12.54 करोड़ का वार्षिक अतिरिक्त खर्च आएगा। कुल मिलाकर, राज्य की वार्षिक देनदारी ₹800 से ₹1000 करोड़ तक पहुंच सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि मजदूरों की दिहाड़ी ₹320 से घटाकर ₹247 कर दी गई है, जो देश के इतिहास में पहली बार मजदूरी बढ़ाने की बजाय घटाई जा रही है। अब टॉप-अप के लिए भी केंद्र की अनुमति लेनी पड़ेगी। इसके अलावा, मांग आधारित योजना खत्म कर डिमांड ड्रिवन और सॉफ्टवेयर आधारित सिस्टम लागू किया जा रहा है, जिससे पहाड़ी राज्य में काम करना मुश्किल होगा। अनिरुद्ध सिंह ने बताया कि फरवरी से मनरेगा स्टाफ, जिसमें जीआरएस, कंप्यूटर ऑपरेटर और जूनियर अकाउंटेंट शामिल हैं, उनका ₹20 करोड़ का बकाया केंद्र सरकार पर है। योजना की प्रक्रिया में भी बदलाव किया गया है, जहां पहले पंचायत, बीडीसी और जिला परिषद से प्लान पास होता था, वहीं अब 'विकसित ग्राम पंचायत प्लान' बनाना अनिवार्य है, जिसे पीएम गति शक्ति से जोड़ा जाएगा। मंत्री ने मनरेगा को गरीब का सहारा बताते हुए यह भी स्मरण कराया कि यह योजना सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मनमोहन सिंह के कार्यकाल में शुरू हुई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिमाचल सरकार को मजबूरी में इन नए प्रावधानों को अपनाना पड़ेगा, अन्यथा राज्य को इस महत्वपूर्ण योजना से बाहर कर दिया जाएगा।

20 hrs ago
user_Roshan Sharma
Roshan Sharma
Local News Reporter Shimla (Urban), Himachal Pradesh•
20 hrs ago

केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा का नाम बदलकर 'विकसित ग्राम जी' करने और इसमें नए प्रावधान लागू करने पर हिमाचल प्रदेश सरकार ने कड़ा विरोध जताया है। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने आरोप लगाया है कि केंद्र ने राज्यों से राय लिए बिना यह फैसला एकतरफा तरीके से थोप दिया है। मंत्री अनिरुद्ध सिंह के अनुसार, पहले मनरेगा का पूरा खर्च केंद्र सरकार उठाती थी, लेकिन अब इसे हिमाचल जैसे विशेष राज्यों के लिए 90:10 और अन्य राज्यों के लिए 60:40 कर दिया गया है। इस बदलाव के कारण हिमाचल प्रदेश पर हर साल ₹164.63 करोड़ का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा, जिससे मौजूदा

रोजगार पर ₹12.54 करोड़ का वार्षिक अतिरिक्त खर्च आएगा। कुल मिलाकर, राज्य की वार्षिक देनदारी ₹800 से ₹1000 करोड़ तक पहुंच सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि मजदूरों की दिहाड़ी ₹320 से घटाकर ₹247 कर दी गई है, जो देश के इतिहास में पहली बार मजदूरी बढ़ाने की बजाय घटाई जा रही है। अब टॉप-अप के लिए भी केंद्र की अनुमति लेनी पड़ेगी। इसके अलावा, मांग आधारित योजना खत्म कर डिमांड ड्रिवन और सॉफ्टवेयर आधारित सिस्टम लागू किया जा रहा है, जिससे पहाड़ी राज्य में काम करना मुश्किल होगा। अनिरुद्ध सिंह ने बताया कि फरवरी से मनरेगा स्टाफ, जिसमें जीआरएस, कंप्यूटर ऑपरेटर और जूनियर अकाउंटेंट

शामिल हैं, उनका ₹20 करोड़ का बकाया केंद्र सरकार पर है। योजना की प्रक्रिया में भी बदलाव किया गया है, जहां पहले पंचायत, बीडीसी और जिला परिषद से प्लान पास होता था, वहीं अब 'विकसित ग्राम पंचायत प्लान' बनाना अनिवार्य है, जिसे पीएम गति शक्ति से जोड़ा जाएगा। मंत्री ने मनरेगा को गरीब का सहारा बताते हुए यह भी स्मरण कराया कि यह योजना सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मनमोहन सिंह के कार्यकाल में शुरू हुई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिमाचल सरकार को मजबूरी में इन नए प्रावधानों को अपनाना पड़ेगा, अन्यथा राज्य को इस महत्वपूर्ण योजना से बाहर कर दिया जाएगा।

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  • केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा का नाम बदलकर 'विकसित ग्राम जी' करने और इसमें नए प्रावधान लागू करने पर हिमाचल प्रदेश सरकार ने कड़ा विरोध जताया है। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने आरोप लगाया है कि केंद्र ने राज्यों से राय लिए बिना यह फैसला एकतरफा तरीके से थोप दिया है। मंत्री अनिरुद्ध सिंह के अनुसार, पहले मनरेगा का पूरा खर्च केंद्र सरकार उठाती थी, लेकिन अब इसे हिमाचल जैसे विशेष राज्यों के लिए 90:10 और अन्य राज्यों के लिए 60:40 कर दिया गया है। इस बदलाव के कारण हिमाचल प्रदेश पर हर साल ₹164.63 करोड़ का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा, जिससे मौजूदा रोजगार पर ₹12.54 करोड़ का वार्षिक अतिरिक्त खर्च आएगा। कुल मिलाकर, राज्य की वार्षिक देनदारी ₹800 से ₹1000 करोड़ तक पहुंच सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि मजदूरों की दिहाड़ी ₹320 से घटाकर ₹247 कर दी गई है, जो देश के इतिहास में पहली बार मजदूरी बढ़ाने की बजाय घटाई जा रही है। अब टॉप-अप के लिए भी केंद्र की अनुमति लेनी पड़ेगी। इसके अलावा, मांग आधारित योजना खत्म कर डिमांड ड्रिवन और सॉफ्टवेयर आधारित सिस्टम लागू किया जा रहा है, जिससे पहाड़ी राज्य में काम करना मुश्किल होगा। अनिरुद्ध सिंह ने बताया कि फरवरी से मनरेगा स्टाफ, जिसमें जीआरएस, कंप्यूटर ऑपरेटर और जूनियर अकाउंटेंट शामिल हैं, उनका ₹20 करोड़ का बकाया केंद्र सरकार पर है। योजना की प्रक्रिया में भी बदलाव किया गया है, जहां पहले पंचायत, बीडीसी और जिला परिषद से प्लान पास होता था, वहीं अब 'विकसित ग्राम पंचायत प्लान' बनाना अनिवार्य है, जिसे पीएम गति शक्ति से जोड़ा जाएगा। मंत्री ने मनरेगा को गरीब का सहारा बताते हुए यह भी स्मरण कराया कि यह योजना सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मनमोहन सिंह के कार्यकाल में शुरू हुई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिमाचल सरकार को मजबूरी में इन नए प्रावधानों को अपनाना पड़ेगा, अन्यथा राज्य को इस महत्वपूर्ण योजना से बाहर कर दिया जाएगा।
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    केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा का नाम बदलकर 'विकसित ग्राम जी' करने और इसमें नए प्रावधान लागू करने पर हिमाचल प्रदेश सरकार ने कड़ा विरोध जताया है। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने आरोप लगाया है कि केंद्र ने राज्यों से राय लिए बिना यह फैसला एकतरफा तरीके से थोप दिया है।

मंत्री अनिरुद्ध सिंह के अनुसार, पहले मनरेगा का पूरा खर्च केंद्र सरकार उठाती थी, लेकिन अब इसे हिमाचल जैसे विशेष राज्यों के लिए 90:10 और अन्य राज्यों के लिए 60:40 कर दिया गया है। इस बदलाव के कारण हिमाचल प्रदेश पर हर साल ₹164.63 करोड़ का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा, जिससे मौजूदा रोजगार पर ₹12.54 करोड़ का वार्षिक अतिरिक्त खर्च आएगा। कुल मिलाकर, राज्य की वार्षिक देनदारी ₹800 से ₹1000 करोड़ तक पहुंच सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि मजदूरों की दिहाड़ी ₹320 से घटाकर ₹247 कर दी गई है, जो देश के इतिहास में पहली बार मजदूरी बढ़ाने की बजाय घटाई जा रही है। अब टॉप-अप के लिए भी केंद्र की अनुमति लेनी पड़ेगी। इसके अलावा, मांग आधारित योजना खत्म कर डिमांड ड्रिवन और सॉफ्टवेयर आधारित सिस्टम लागू किया जा रहा है, जिससे पहाड़ी राज्य में काम करना मुश्किल होगा।

अनिरुद्ध सिंह ने बताया कि फरवरी से मनरेगा स्टाफ, जिसमें जीआरएस, कंप्यूटर ऑपरेटर और जूनियर अकाउंटेंट शामिल हैं, उनका ₹20 करोड़ का बकाया केंद्र सरकार पर है। योजना की प्रक्रिया में भी बदलाव किया गया है, जहां पहले पंचायत, बीडीसी और जिला परिषद से प्लान पास होता था, वहीं अब 'विकसित ग्राम पंचायत प्लान' बनाना अनिवार्य है, जिसे पीएम गति शक्ति से जोड़ा जाएगा। मंत्री ने मनरेगा को गरीब का सहारा बताते हुए यह भी स्मरण कराया कि यह योजना सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मनमोहन सिंह के कार्यकाल में शुरू हुई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिमाचल सरकार को मजबूरी में इन नए प्रावधानों को अपनाना पड़ेगा, अन्यथा राज्य को इस महत्वपूर्ण योजना से बाहर कर दिया जाएगा।
    user_Roshan Sharma
    Roshan Sharma
    Local News Reporter Shimla (Urban), Himachal Pradesh•
    20 hrs ago
  • घुमारवीं उपमंडल की ग्राम पंचायत दधोल में शुक्रवार को पंचायत भवन परिसर में एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में गाहर वार्ड से जिला परिषद सदस्य रक्षा कपिल ने मुख्य अतिथि के तौर पर हिस्सा लिया, जबकि पंचायत प्रधान परसोतम शर्मा और उपप्रधान पवन गौतम ने संयुक्त रूप से इसकी अध्यक्षता की। कार्यक्रम के दौरान, पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने जिला परिषद सदस्य रक्षा कपिल को सम्मानित किया। इस अवसर पर, रक्षा कपिल ने केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी प्रदान की और लोगों से इन योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने का आग्रह किया। प्रधान परसोतम शर्मा ने भी ग्रामीणों को विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी दी और पात्र लोगों से समय पर आवेदन कर इन योजनाओं का लाभ लेने की अपील की। इस कार्यक्रम में पूर्व उपप्रधान ओम प्रकाश, डॉ. एल.आर. शर्मा, बबीता शर्मा, विश्वजीत, विनोद, राजेश कपिल, सुरेंद्र शर्मा, राजेंद्र जगौता, संदीप शर्मा, और जगरनाथ सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
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    घुमारवीं उपमंडल की ग्राम पंचायत दधोल में शुक्रवार को पंचायत भवन परिसर में एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में गाहर वार्ड से जिला परिषद सदस्य रक्षा कपिल ने मुख्य अतिथि के तौर पर हिस्सा लिया, जबकि पंचायत प्रधान परसोतम शर्मा और उपप्रधान पवन गौतम ने संयुक्त रूप से इसकी अध्यक्षता की। कार्यक्रम के दौरान, पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने जिला परिषद सदस्य रक्षा कपिल को सम्मानित किया। इस अवसर पर, रक्षा कपिल ने केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी प्रदान की और लोगों से इन योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने का आग्रह किया। प्रधान परसोतम शर्मा ने भी ग्रामीणों को विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी दी और पात्र लोगों से समय पर आवेदन कर इन योजनाओं का लाभ लेने की अपील की।

इस कार्यक्रम में पूर्व उपप्रधान ओम प्रकाश, डॉ. एल.आर. शर्मा, बबीता शर्मा, विश्वजीत, विनोद, राजेश कपिल, सुरेंद्र शर्मा, राजेंद्र जगौता, संदीप शर्मा, और जगरनाथ सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
    user_रिपोर्टर राकेशशर्मा पंजाबकेसरी
    रिपोर्टर राकेशशर्मा पंजाबकेसरी
    Local News Reporter घुमारवीं, बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश•
    6 hrs ago
  • कांग्रेसनेत्री सुप्रिया ने मोदी सरकार पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि यदि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है, तो फिर आखिर नागरिकता का असली प्रमाण क्या है। उन्होंने मोदी सरकार के इस बयान पर अपनी आपत्ति व्यक्त की है कि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जा सकता। इस संदर्भ में, सुप्रिया ने कई तीखे सवाल उठाए हैं, जिनमें पूछा गया है कि क्या हिंदुस्तान का पासपोर्ट ग़ैर-हिंदुस्तानियों को भी दिया जाता है और पासपोर्ट जारी करने से पहले पुलिस किस तरह की जाँच करती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आधार, पासपोर्ट, पैन और वोटर आईडी को नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जाता है। इसके बाद व्यंग्यात्मक लहजे में पूछा गया कि फिर क्या मोदी का चरणवंदन, बीजेपी का आईडी या आरएसएस की टोपी नागरिकता का प्रमाण है।
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    कांग्रेसनेत्री सुप्रिया ने मोदी सरकार पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि यदि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है, तो फिर आखिर नागरिकता का असली प्रमाण क्या है। उन्होंने मोदी सरकार के इस बयान पर अपनी आपत्ति व्यक्त की है कि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

इस संदर्भ में, सुप्रिया ने कई तीखे सवाल उठाए हैं, जिनमें पूछा गया है कि क्या हिंदुस्तान का पासपोर्ट ग़ैर-हिंदुस्तानियों को भी दिया जाता है और पासपोर्ट जारी करने से पहले पुलिस किस तरह की जाँच करती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आधार, पासपोर्ट, पैन और वोटर आईडी को नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जाता है। इसके बाद व्यंग्यात्मक लहजे में पूछा गया कि फिर क्या मोदी का चरणवंदन, बीजेपी का आईडी या आरएसएस की टोपी नागरिकता का प्रमाण है।
    user_खबर आज
    खबर आज
    Local News Reporter पंचकूला, पंचकूला, हरियाणा•
    6 hrs ago
  • एचपीएससी अभ्यर्थियों का आमरण अनशन नौवें दिन भी जारी है। इस दौरान हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा अभ्यर्थियों से मिलने पहुंचे। हुड्डा ने प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों से उनका आमरण अनशन समाप्त करने का आग्रह किया। उन्होंने आश्वासन दिया कि वे उनकी मांगों को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाएंगे।
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    एचपीएससी अभ्यर्थियों का आमरण अनशन नौवें दिन भी जारी है। इस दौरान हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा अभ्यर्थियों से मिलने पहुंचे। हुड्डा ने प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों से उनका आमरण अनशन समाप्त करने का आग्रह किया। उन्होंने आश्वासन दिया कि वे उनकी मांगों को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाएंगे।
    user_देश खबरनामा
    देश खबरनामा
    पंचकूला, पंचकूला, हरियाणा•
    8 hrs ago
  • रामपुर के विधायक और सातवें वित्त आयोग के अध्यक्ष नंद लाल ने आज रामपुर में लोगों की जनसमस्याएं सुनीं। इस दौरान उन्होंने देलठ क्षेत्र से जुड़े लोगों की समस्याओं पर संबंधित विभागों से उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके साथ ही, नंद लाल ने नगर परिषद रामपुर के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनाव के संबंध में भी अपनी राय व्यक्त की, जिसमें उन्होंने कांग्रेस समर्थित परिषद के गठन का दावा किया।
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    रामपुर के विधायक और सातवें वित्त आयोग के अध्यक्ष नंद लाल ने आज रामपुर में लोगों की जनसमस्याएं सुनीं। इस दौरान उन्होंने देलठ क्षेत्र से जुड़े लोगों की समस्याओं पर संबंधित विभागों से उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके साथ ही, नंद लाल ने नगर परिषद रामपुर के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनाव के संबंध में भी अपनी राय व्यक्त की, जिसमें उन्होंने कांग्रेस समर्थित परिषद के गठन का दावा किया।
    user_Him News Update
    Him News Update
    रामपुर, शिमला, हिमाचल प्रदेश•
    10 hrs ago
  • नेरचौक में ऐतिहासिक कुम्मी घट्टा मेला अपने भव्य समापन के साथ संपन्न हो गया, जहाँ पहलवानों का अद्वितीय जोश और दम-खम बारिश के बावजूद देखने को मिला। कुश्ती के इस महाकुंभ में प्रतिभागियों ने ज़बरदस्त रोमांच और शक्ति का प्रदर्शन किया, जिससे यह आयोजन बेहद यादगार रहा। कुश्ती के इस शानदार दंगल में अजय लोहारा ने विजेता का खिताब अपने नाम किया। कुम्मी घट्टा मेला 2026 के इस रोमांचक कुश्ती आयोजन में सभी विजेता पहलवानों को उनके शानदार प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया।
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    नेरचौक में ऐतिहासिक कुम्मी घट्टा मेला अपने भव्य समापन के साथ संपन्न हो गया, जहाँ पहलवानों का अद्वितीय जोश और दम-खम बारिश के बावजूद देखने को मिला। कुश्ती के इस महाकुंभ में प्रतिभागियों ने ज़बरदस्त रोमांच और शक्ति का प्रदर्शन किया, जिससे यह आयोजन बेहद यादगार रहा।

कुश्ती के इस शानदार दंगल में अजय लोहारा ने विजेता का खिताब अपने नाम किया। कुम्मी घट्टा मेला 2026 के इस रोमांचक कुश्ती आयोजन में सभी विजेता पहलवानों को उनके शानदार प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया।
    user_BHK News Himachal
    BHK News Himachal
    Local News Reporter Rewalsar, Mandi•
    8 hrs ago
  • भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आज देशभर में 1975 में लगाए गए आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ को 'संविधान हत्या दिवस' के रूप में मनाया। इस अवसर पर शिमला में भी विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनका मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को आपातकाल के दौरान लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों पर पड़े प्रभाव से अवगत कराना था। कार्यक्रमों की श्रृंखला में, मॉल रोड स्थित रोटरी टाउन हॉल के सामने आपातकाल पर आधारित एक विशेष प्रदर्शनी का आयोजन किया गया, जिसका उद्घाटन भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने किया। इस प्रदर्शनी में आपातकाल के दौरान लोकतंत्र पर हुए असर, प्रेस सेंसरशिप, लोगों के संघर्ष तथा ऐतिहासिक दस्तावेजों एवं चित्रों को प्रदर्शित किया गया। इसके उपरांत कालीबाड़ी हॉल, शिमला में एक सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसकी अध्यक्षता भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री श्री सुरेश भारद्वाज ने की। इस कार्यक्रम में वर्ष 1975 के आपातकाल के दौरान जेल गए लोकतंत्र सेनानियों एवं उनके परिजनों को सम्मानित कर उनके संघर्ष और बलिदान को नमन किया गया। इस अवसर पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने कहा कि 25 जून 1975 भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता बचाने के लिए तत्कालीन सरकार ने पूरे देश पर आपातकाल थोप दिया, जिसके परिणामस्वरूप लाखों लोगों, विपक्षी नेताओं, पत्रकारों और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ताओं को जेलों में डाल दिया गया तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को पूरी तरह से दबाया गया। डॉ. बिंदल ने आगे कहा कि आज हम सौभाग्यशाली हैं कि 19 महीनों के लंबे संघर्ष के बाद देश में पुनः लोकतंत्र की स्थापना हुई, जो उन लाखों देशभक्तों के त्याग, तपस्या और संघर्ष का परिणाम है जिन्होंने जेलों में अमानवीय यातनाएं सहते हुए भी लोकतंत्र की रक्षा का संकल्प नहीं छोड़ा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आज की युवा पीढ़ी को आपातकाल के इतिहास से अवगत कराना समय की आवश्यकता है, क्योंकि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा केवल कानूनों से नहीं बल्कि जागरूक नागरिकों से होती है। इसलिए आपातकाल की घटनाओं, लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष और उनके बलिदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी का दायित्व है।
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    भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आज देशभर में 1975 में लगाए गए आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ को 'संविधान हत्या दिवस' के रूप में मनाया। इस अवसर पर शिमला में भी विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनका मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को आपातकाल के दौरान लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों पर पड़े प्रभाव से अवगत कराना था।

कार्यक्रमों की श्रृंखला में, मॉल रोड स्थित रोटरी टाउन हॉल के सामने आपातकाल पर आधारित एक विशेष प्रदर्शनी का आयोजन किया गया, जिसका उद्घाटन भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने किया। इस प्रदर्शनी में आपातकाल के दौरान लोकतंत्र पर हुए असर, प्रेस सेंसरशिप, लोगों के संघर्ष तथा ऐतिहासिक दस्तावेजों एवं चित्रों को प्रदर्शित किया गया। इसके उपरांत कालीबाड़ी हॉल, शिमला में एक सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसकी अध्यक्षता भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री श्री सुरेश भारद्वाज ने की। इस कार्यक्रम में वर्ष 1975 के आपातकाल के दौरान जेल गए लोकतंत्र सेनानियों एवं उनके परिजनों को सम्मानित कर उनके संघर्ष और बलिदान को नमन किया गया।

इस अवसर पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने कहा कि 25 जून 1975 भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता बचाने के लिए तत्कालीन सरकार ने पूरे देश पर आपातकाल थोप दिया, जिसके परिणामस्वरूप लाखों लोगों, विपक्षी नेताओं, पत्रकारों और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ताओं को जेलों में डाल दिया गया तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को पूरी तरह से दबाया गया।

डॉ. बिंदल ने आगे कहा कि आज हम सौभाग्यशाली हैं कि 19 महीनों के लंबे संघर्ष के बाद देश में पुनः लोकतंत्र की स्थापना हुई, जो उन लाखों देशभक्तों के त्याग, तपस्या और संघर्ष का परिणाम है जिन्होंने जेलों में अमानवीय यातनाएं सहते हुए भी लोकतंत्र की रक्षा का संकल्प नहीं छोड़ा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आज की युवा पीढ़ी को आपातकाल के इतिहास से अवगत कराना समय की आवश्यकता है, क्योंकि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा केवल कानूनों से नहीं बल्कि जागरूक नागरिकों से होती है। इसलिए आपातकाल की घटनाओं, लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष और उनके बलिदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी का दायित्व है।
    user_Roshan Sharma
    Roshan Sharma
    Local News Reporter Shimla (Urban), Himachal Pradesh•
    20 hrs ago
  • हिमाचल प्रदेश के रामपुर बुशैहर में मॉनसून शुरू होने से पहले ही हुई थोड़ी सी बारिश के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) पर मलबा गिरने लगा है। इस स्थिति से इलाके में आवागमन संबंधी मुश्किलें बढ़ सकती हैं, जैसा कि स्थानीय लोग पहले से ही चिंतित हैं।
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    हिमाचल प्रदेश के रामपुर बुशैहर में मॉनसून शुरू होने से पहले ही हुई थोड़ी सी बारिश के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) पर मलबा गिरने लगा है। इस स्थिति से इलाके में आवागमन संबंधी मुश्किलें बढ़ सकती हैं, जैसा कि स्थानीय लोग पहले से ही चिंतित हैं।
    user_Dev Raj  Thakur
    Dev Raj Thakur
    Farmer निरमंड, कुल्लू, हिमाचल प्रदेश•
    18 hrs ago
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