पीलीभीत: स्मार्ट मीटर के खिलाफ व्यापारियों का हल्लाबोल; सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा ज्ञापन पीलीभीत जिले में स्मार्ट मीटरों की कार्यप्रणाली और तकनीकी खामियों को लेकर व्यापारियों का आक्रोश फूट पड़ा है। मंगलवार को युवा उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के बैनर तले बड़ी संख्या में व्यापारियों ने कलेक्ट्रेट परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। व्यापारियों ने बिजली विभाग के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा और इस समस्या के तत्काल समाधान की मांग की। "बिना तैयारी के थोपे गए मीटर": अफरोज जिलानी प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे प्रमुख व्यापारी नेता अफरोज जिलानी ने विद्युत विभाग की कार्यशैली पर कड़े सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा: "प्रशासन और विद्युत विभाग ने बिना किसी पूर्व तैयारी या जन-जागरूकता के जनता पर प्रीपेड स्मार्ट मीटर थोप दिए हैं। न तो आम जनता को रिचार्ज की प्रक्रिया पता है और न ही तकनीकी खराबी आने पर किससे संपर्क करना है, इसकी जानकारी दी गई है।" व्यापारियों की मुख्य शिकायतें और मांगें व्यापारियों ने ज्ञापन के माध्यम से अपनी समस्याओं को विस्तार से रखा, जिनमें मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं: तेज रीडिंग का आरोप: व्यापारियों का दावा है कि नए स्मार्ट मीटर पुराने डिजिटल मीटरों की तुलना में काफी तेज चल रहे हैं, जिससे बिजली बिलों में अचानक भारी बढ़ोतरी हुई है। सर्वर की समस्या: रिचार्ज खत्म होते ही बिजली तुरंत काट दी जाती है, लेकिन सर्वर डाउन होने की वजह से पैसा कटने के बाद भी घंटों तक बिजली बहाल नहीं होती। इससे व्यापारिक प्रतिष्ठानों का काम ठप हो जाता है। जबरन बदलाव पर रोक: मांग की गई है कि जो पुराने मीटर सही तरीके से काम कर रहे हैं, उन्हें उपभोक्ताओं की सहमति के बिना न बदला जाए। बफर टाइम की मांग: संगठन ने मांग की है कि जब तक विभाग पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं करता, तब तक रिचार्ज खत्म होने पर कनेक्शन काटने के लिए कम से कम एक महीने का समय दिया जाए। निष्पक्ष जांच: व्यापारियों ने स्मार्ट मीटरों की तकनीकी शुद्धता की जांच किसी निष्पक्ष कमेटी से कराने की मांग भी उठाई है। प्रशासन का आश्वासन व्यापारियों की समस्याओं को सुनने के बाद सिटी मजिस्ट्रेट ने ज्ञापन स्वीकार किया। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को आश्वस्त किया कि उनकी जायज मांगों और शिकायतों को शासन के साथ-साथ बिजली विभाग के उच्चाधिकारियों तक प्राथमिकता के आधार पर पहुंचाया जाएगा।
पीलीभीत: स्मार्ट मीटर के खिलाफ व्यापारियों का हल्लाबोल; सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा ज्ञापन पीलीभीत जिले में स्मार्ट मीटरों की कार्यप्रणाली और तकनीकी खामियों को लेकर व्यापारियों का आक्रोश फूट पड़ा है। मंगलवार को युवा उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के बैनर तले बड़ी संख्या में व्यापारियों ने कलेक्ट्रेट परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। व्यापारियों ने बिजली विभाग के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा और इस समस्या के तत्काल समाधान की मांग की। "बिना तैयारी के थोपे गए मीटर": अफरोज जिलानी प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे प्रमुख व्यापारी नेता अफरोज जिलानी ने विद्युत विभाग की कार्यशैली पर कड़े सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा: "प्रशासन और विद्युत विभाग ने बिना किसी पूर्व तैयारी या जन-जागरूकता के जनता पर प्रीपेड स्मार्ट मीटर थोप दिए हैं। न तो आम जनता को रिचार्ज की प्रक्रिया पता है और न ही तकनीकी खराबी आने पर किससे संपर्क करना है, इसकी जानकारी दी गई है।" व्यापारियों की मुख्य शिकायतें और मांगें व्यापारियों ने ज्ञापन के माध्यम से अपनी समस्याओं को विस्तार से रखा, जिनमें मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं: तेज रीडिंग का आरोप: व्यापारियों का दावा है कि नए स्मार्ट मीटर पुराने डिजिटल मीटरों की तुलना में काफी तेज चल रहे हैं, जिससे बिजली बिलों में अचानक भारी बढ़ोतरी हुई है। सर्वर की समस्या: रिचार्ज खत्म होते ही बिजली तुरंत काट दी जाती है, लेकिन सर्वर डाउन होने की वजह से पैसा कटने के बाद भी घंटों तक बिजली बहाल नहीं होती। इससे व्यापारिक प्रतिष्ठानों का काम ठप हो जाता है। जबरन बदलाव पर रोक: मांग की गई है कि जो पुराने मीटर सही तरीके से काम कर रहे हैं, उन्हें उपभोक्ताओं की सहमति के बिना न बदला जाए। बफर टाइम की मांग: संगठन ने मांग की है कि जब तक विभाग पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं करता, तब तक रिचार्ज खत्म होने पर कनेक्शन काटने के लिए कम से कम एक महीने का समय दिया जाए। निष्पक्ष जांच: व्यापारियों ने स्मार्ट मीटरों की तकनीकी शुद्धता की जांच किसी निष्पक्ष कमेटी से कराने की मांग भी उठाई है। प्रशासन का आश्वासन व्यापारियों की समस्याओं को सुनने के बाद सिटी मजिस्ट्रेट ने ज्ञापन स्वीकार किया। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को आश्वस्त किया कि उनकी जायज मांगों और शिकायतों को शासन के साथ-साथ बिजली विभाग के उच्चाधिकारियों तक प्राथमिकता के आधार पर पहुंचाया जाएगा।
- पीलीभीत /नई दिल्ली: चुनावी दौर में राजनीतिक दलों द्वारा किए जाने वाले लोकलुभावन वादों और 'मुफ्त की रेवड़ी' संस्कृति पर अमृतलाल जी ने गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि चुनाव से ठीक पहले सत्ताधारी दलों द्वारा किए जाने वाले अनगिनत वादे न केवल चुनाव की निष्पक्षता को भंग करते हैं, बल्कि विपक्षी दलों के लिए समान अवसर (Level Playing Field) को भी समाप्त कर देते हैं। विकास कार्यों पर पड़ रहा है बुरा असर अमृतलाल जी ने कर्नाटक, हिमाचल, दिल्ली और हरियाणा जैसे राज्यों का उदाहरण देते हुए कहा कि इन मुफ्त की घोषणाओं के कारण जीतने के बाद सरकारों के लिए प्रशासन चलाना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि स्थिति इतनी गंभीर है कि राज्यों के पास विकास कार्यों के लिए बजट नहीं बचा है और कर्मचारियों को वेतन देने तक में परेशानी आ रही है। सुप्रीम कोर्ट से तत्काल रोक की मांग उन्होंने माननीय सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) से अपील की है कि: चुनाव से पूर्व राजनीतिक दलों द्वारा की जाने वाली लोकलुभावन घोषणाओं पर तत्काल संज्ञान लिया जाए। निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए ऐसी प्रथाओं पर कानूनी रोक लगाई जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि चुनावी वादों का बोझ भविष्य में राज्य की अर्थव्यवस्था और प्रशासनिक ढांचे को न बिगाड़े। "चाहे पक्ष हो या विपक्ष, किसी को इस बात की चिंता नहीं है कि इन वादों का राज्य की वित्तीय स्थिति पर क्या प्रभाव पड़ेगा। अब समय आ गया है कि सुप्रीम कोर्ट इस प्रथा को बंद करने के लिए कड़े कदम उठाए।" — अमृतलाल1
- गन्ना कृषक स्नातकोत्तर महाविद्यालय पूरनपुर में आयोजित प्रथम अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन टेक्नोलॉजिकल सत्र में बोलते हुए प्रोफेसर विपिन नीरज ने कहा कि आज शहरीकरण के प्रचलन से वृक्ष कट रहे हैं। आवासीय व्यवस्था के लिए कॉलोनी का प्रचलन बढ़ रहा है। इसीलिए जंगलों का दोहन हो रहा है। पेड़ों से ऊर्जा मिलती है।हमें आज पर्यावरण की प्रति जागरूक रहने की जरूरत है।प्रकृति की पूजा हम कर रहे हैं लेकिन फिर भी हम प्रकृति का दोहन कर रहे हैं।उन्होंने परामर्श दिया कि जब हम प्रकृति के साथ कंसर्न करेंगे उसके नजदीक जाएंगे तभी हम सस्टेनेबल विकास कर सकते हैं । टेक्निकल सेशन के चेयरपर्सन प्रोफ़ेसर वीर बहादुर महतो ने कहा कि यदि हमें संयमित जीवन जीना है तो हमें प्रकृति के साथ भी संयमित होना पड़ेगा। हमें आने वाली पीढियों के लिए प्रकृति से संतुलन बनाना होगा। अटल बिहारी वाजपेई विश्वविद्यालय छत्तीसगढ़ के कुलपति प्रोफेसर ए डी एन बाजपेई ने ऑनलाइन जुड़ कर सब को अपना आशीष प्रदान किया। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय के प्राचार्य डॉक्टर सुधीर कुमार शर्मा महाविद्यालय के अस्तित्व को स्थापित कर रहे हैं। पर्यावरण की समस्या पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि आज जलवायु, कृषि या सस्टेनेबल डेवलपमेंट इन सब चीजों को एक साथ लेकर चलने की आवश्यकता है। भारत की अपनी जीवन शैली है। भारतीय ज्ञान परम्परा को अपनाना होगा जिस का सारांश परोपकार है। टेक्निकल सेशन में बोलते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य डॉक्टर सुधीर कुमार शर्मा ने महाविद्यालय के विषय में जानकारी देते हुए कहा कि वह महाविद्यालय को केवल डिग्री प्राप्त करने का केन्द्र ना बनाकर टेक्निकल शिक्षा, विभिन्न सेमिनारों के माध्यम से छात्रों के ज्ञान की वृद्धि, रोजगार मेलो का आयोजन, उन के कौशल विकास की वृद्धि ,उनको रोजगार देने वाला बनाने के योग्य बनना चाहते हैं। अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी के मुख्य विषय *भारतीय अर्थव्यवस्था में पर्यावरण वैश्विक जलवायु परिवर्तन और कृषिगत सतत् विकास* शीर्षक पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि पर्यावरण सुरक्षा के लिए हमें पॉजिटिव काम करना होगा। रासायनिक खादों एवं केमिकल युक्त खादो से हम भारत माता को दूषित कर रहे हैं ।हमें मात्र उत्पादन की चिंता है हमें स्वास्थ्य की चिंता नहीं है। खाद्य सुरक्षा,गरीबी उन्मूलन आदि योजनाओं पर काम करना होगा। उन्होंने परामर्श दिया कि हमें समाज के आर्थिक रूप शोषित वर्ग के लिए काम करना होगा। अरुण कुमार जी विषय विशेषज्ञ गन्ना संस्थान लखनऊ ने ऑनलाइन जुड़ कर मार्गदर्शन किया। उन्होंने जैव विविधता एवं पारस्परिक तंत्र में संबंधन में जानकारी उपलब्ध कराई। उन्होंने कहा कि जैव विविधता का मतलब हमारे पर्यावरण में पारस्परिक तंत्र में जो जीव जंतु एवं सूक्ष्म जीवाणु है उनका संरक्षण एवं संतुलन स्थापित करना है। संतुलन का सरल अर्थ है सबसे अधिक संख्या में सूक्ष्म जीवाणु, उससे कम संख्या में पेड़ पौधे और सबसे कम संख्या में मनुष्य होना चाहिए। परन्तु आज ये संतुलन बिगड़ रहा है । अपर गन्ना आयुक्त डॉक्टर वी बी सिंह ने ऑनलाइन ने जुड़ कर मार्गदर्शन किया। उन्होंने कहा कि उन्हें प्रसन्नता है कि गन्ना कृषक स्नातकोत्तर महाविद्यालय लगातार छात्र हित में आयोजन करा रहा है। उन्होंने गन्ना विभाग के सहयोग का पूरा आश्वासन दिया। छात्र समृद्ध हो, ऐसी उनकी अभिलाषा है।उन्होंने कहा कि रासायनिक खादों का प्रयोग कम करें । जैविक खेती करें क्योंकि जैविक खेती पर्यावरण हितैषी है। प्रोफेसर मनोज कुमार मिश्रा जी ने इथोपिया से ऑनलाइन जुड़ कर मार्गदर्शन किया। उन्होंने सनातन इकोनॉमिक्स फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट विषय पर विस्तार से चर्चा करी।उन्होंने वतर्मान वैश्विक विकास परिदृश्य (Present Global deveploment scenario) पर भी चर्चा करी।डॉक्टर सरिता द्विवेदी ने ग्रामीण और शहरी सभ्यता का संबंध में जानकारी देते आदि काल से वर्तमान समय तक की सभ्यता का विश्लेषण किया । उन्होंने कहा कि आज हम शहरी जीवन की ओर पलायन कर रहे हैं ग्रामीण संस्कृति विलुप्त हो रही हैं। उन्होंने संतुलित जीवन शैली अपनाने पर जोर दिया। डॉक्टर नरेन्द्र कुमार ने हेल्थ रिस्क एंड वेस्ट मैनेजमेंट पर जानकारी उपलब्ध कराई। उन्होंने कहा कि वेस्ट मैनेजमेंट पर ध्यान देना आवश्यक है। क्योंकि इस का सीधा प्रभाव हमारे स्वास्थ्य पर पड़ता है। हर प्रकार का वेस्ट चाहे वो इंडस्ट्रियल वेस्ट हो, या बायोगैस तो या घरेलू वेस्ट हो ___हर प्रकार का वेस्ट हमारे जीवन को प्रभावित करता है। वेस्ट के लिए लापरवाही बीमारियों को उत्पन्न करती है। प्रोफेसर अनुपम पांडेय ने ऑनलाइन जुड़ कर मार्गदर्शन किया। उन्होंने कहा कि कोरोना काल के बाद से बहुत परिवर्तन आया है । करोना के बाद से कुछ चुनौतियां सामने है कुछ अब समाधान निकल रहे हैं। टेक्निकल सेशंस समाप्त होने के पश्चात् द्वितीय सत्र में समापन समारोह सम्पन्न हुआ। समापन समारोह के अध्यक्ष प्रोफेसर बी आर कुकरेती , मुख्य अतिथि प्रोफ़ेसर सुमित्रा कुकरेती , विशिष्ट अतिथि प्रोफ़ेसर वीर बहादुर महतो एवं प्रोफेसर विनोद श्रीवास्तव ने मां सरस्वती के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित किया । अतिथियों को महाविद्यालय स्टॉफ द्वारा पटका उड़ाकर एवं स्मृति चिन्ह दे कर स्वागत किया गया। अतिथियों का स्वागत करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य डॉक्टर सुधीर कुमार शर्मा ने महाविद्यालय स्थापना के उद्देश्य की जानकारी उपलब्ध कराई।साथ ही उन्होंने गन्ना कृषको को इस पवित्र अनुष्ठान के लिए कटौती एवं भूमि दान करने के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया। साथ ही उन्होंने युवा पीढ़ी से कहा कि उनको महाविद्यालय विकास के लिए काम करना है ।समापन समारोह की मुख्य अतिथि प्रोफ़ेसर सुमित्रा कुकरेती ने कहा पर्यावरण की समस्या से पूरा विश्व प्रभावित है। एनवायरमेंट अर्थात क्लाइमेट चेंज,ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव से विश्व जूझ रहा है। प्रत्येक वर्ष मौसम का पैटर्न बदल रहा है।क्लाइमेट चेंज, वायु प्रदूषण से जल संकट लगातार गहरा रहा है। ग्लेशियर पिघल रहे हैं। प्लास्टिक कचरा जो कि बायोडिग्रेडेबल नहीं है वो वातावर्ण को दूषित कर रहा हैं। उन्होंने कहा कि धरती हम सब की आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम है ।लेकिन हमारी बढ़ती हुई इच्छा इसको दूषित कर रही है। उन्होंने परामर्श दिया कि प्रकृति से उतना ही लीजिए जितनी जरूरत है। उन्होंने अधिक से अधिक वृक्ष लगाने , नदियों को दूषित होने से बचाने और सुरक्षित रखने पर बल दिया।समापन समारोह के अध्यक्ष प्रोफ़ेसर बी आर कुकरेती ने कहा कि जल जीवनदाता है । यह हमारी धरोहर है।इस का संरक्षण हमारा दायित्व है। उन्होंने अवगत कराया कि ग्लेशियर पिघल रहे हैं जो हानिकारक है। ग्लेशियर पिघलने से समुन्द्र का पानी का लेवल बढ़ेगा जिस से समुन्द्र के पास वाले देश और इलाके डूब जाएंगे। पानी की अधिकता भी नुकसानदेह है दूसरी ओर पानी की कमी भी हानिकारक है। उन्होंने कहा कि सरकार तो कम कर रही है ।हमें इकाई के रूप में इस पर काम करना होगा । हमें अपने समाज में, अपने परिवार में पर्यावरण के लिए पॉजिटिव थिंकिंग लेकर आनी होगी। उन्होंने कहा कि पर्यावरण की सुरक्षा हमें व्यक्तिगत स्तर पर करनी होगी।हमें संवेदनशीलता लानी होगी ।लोगों को समझना होगा।तब ही पर्यावरण सुरक्षित होगा। राष्ट्रगान के साथ गन्ना कृषक स्नातकोत्तर महाविद्यालय की प्रथम अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन सम्पन्न हुआ।1
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- डी एम ने देवीपुरा गौशाला का किया औचक निरीक्षण दिए साफ सफाई के निर्देश पीलीभीत सूचना विभाग मंगलवार को जिलाधिकारी ज्ञानेन्द्र सिंह ने आज देवीपुरा गौशाला का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने गौशाला में निराश्रित गौवंशों हेतु भूसा, पीने योग्य पानी, हरा चारा, साफ-सफाई व्यवस्था सहित अन्य व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने अवगत कराया गया कि पशु चिकित्सक द्वारा गोवंशों की देखभाल की जा रही है। देवीपुरा गौशाला के निरीक्षण के दौरान उन्होंने निमार्णाधीन नाले के कार्य की गुणवत्ता परखी। उन्होंने कहा कि गौशाला के तालाब को विकसित कर मत्स्य पालन कराया जाएगा। गौशाला में मोरिंगा मॉडल को अपनाया जाएगा,1
- पूरनपुर। गन्ना कृषक स्नातकोत्तर महाविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय प्रथम अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आज राष्ट्रगान के साथ समापन हुआ। अंतिम दिन तकनीकी सत्रों में विशेषज्ञों ने बढ़ते शहरीकरण, कचरा प्रबंधन और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों पर मंथन किया। प्राचार्य डॉ. सुधीर कुमार शर्मा ने महाविद्यालय को कौशल विकास का केंद्र बनाने का संकल्प दोहराया। समापन समारोह में प्रो. सुमित्रा कुकरेती और प्रो. बी.आर. कुकरेती ने पर्यावरण सुरक्षा को व्यक्तिगत स्तर पर अपनाने का आह्वान किया। इस अवसर पर देश-विदेश के शिक्षाविदों ने ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से सहभागिता की। रिपोर्ट: सरफराज अहमद खान, UPNewsTV241
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- बरखेड़ा। नगर के शिवानी मैरिज लॉन में शान्ति कुंज हरिद्वार। से आए गायत्री परिजन जयप्रकाश भाई साहब एवं उनकी टोली द्वारा 29 मार्च से चल रहे नौ कुण्डीय गायत्री महायज्ञ एवं पावन प्रज्ञा पुराण कथा कथा के साथ आज तीसरा दिन नव दंपत्ति सम्मेलन का आयोजन हुआ जिसमें सैंकड़ों नवदंपत्तियों ने भाग लिया जिससे पूरे क्षेत्र से आए हुए लोगों में आस्था, संस्कार और सामाजिक जागरूकता की शपथ दिलाई गई। कार्यक्रम में प्रतिदिन बड़ी संख्या में पूरे क्षेत्र से गायत्री परिजनों ने कार्यक्रम में पहुंचकर यज्ञ एवं कथा का लाभ उठा रहे हैं। इसी क्रम में नगर पंचायत अध्यक्ष श्री श्याम बिहारी भोजवाल जी ने अपनी धर्मपत्नी श्रीमती ममता भोजवाल जी के साथ आज विधि-विधान से यज्ञ पूजन कर नगर एवं क्षेत्रवासियों की सुख-समृद्धि, शांति और उज्ज्वल भविष्य की कामना की। यज्ञ के दौरान वातावरण वेद मंत्रों और भक्ति भाव से गुंजायमान हो उठा। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण नवदम्पत्ति युवा सम्मेलन रहा, जिसमें युवाओं को आदर्श वैवाहिक जीवन, संस्कारयुक्त पारिवारिक व्यवस्था तथा जीवन को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाने की महत्वपूर्ण सीख दी गई। वक्ताओं ने बताया कि संस्कार, संयम और सहयोग से ही सफल एवं सुखी जीवन का निर्माण संभव है। इस अवसर पर उपस्थित गायत्री परिजनों ने कथा के माध्यम से आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त किया और यज्ञ में आहुति देकर अपने जीवन को धर्ममय बनाने का संकल्प लिया। आयोजन में नगर के गणमान्य नागरिकों, समाजसेवियों एवं युवाओं की विशेष भागीदारी देखने को मिली। कार्यक्रम का समापन प्रतिदिन भव्य आरती एवं प्रसाद वितरण के साथ किया जा रहा है, जिससे पूरे क्षेत्र में धार्मिक और सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो रहा है।4