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भोपाल में चंचल एंटरप्राइजेज द्वारा प्रस्तुत "ग्लैमरश सीजन-1, 2026" का भव्य आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। यह कार्यक्रम भोपाल के प्रसिद्ध होटल जालसा रिट्रीट, नीलबड़ में आयोजित किया गया था, जिसकी आयोजक शहर की जानी-मानी समाजसेविका एवं फैशन डिज़ाइनर चंचल सरवैया थीं। आयोजक के अनुसार, प्रतियोगिता को पांच विभिन्न श्रेणियों में बाँटा गया था, जिसमें मध्यप्रदेश के अलग-अलग शहरों से आए प्रतिभागियों ने बड़े उत्साह के साथ भाग लिया। इस आयोजन को सफल बनाने में भोपाल के साथ-साथ अन्य शहरों से आए कई ब्यूटी पेजेंट विजेताओं और फैशन डिज़ाइनर्स ने भी अपनी सहभागिता और महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया।
K K D NEWS MP/CG
भोपाल में चंचल एंटरप्राइजेज द्वारा प्रस्तुत "ग्लैमरश सीजन-1, 2026" का भव्य आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। यह कार्यक्रम भोपाल के प्रसिद्ध होटल जालसा रिट्रीट, नीलबड़ में आयोजित किया गया था, जिसकी आयोजक शहर की जानी-मानी समाजसेविका एवं फैशन डिज़ाइनर चंचल सरवैया थीं। आयोजक के अनुसार, प्रतियोगिता को पांच विभिन्न श्रेणियों में बाँटा गया था, जिसमें मध्यप्रदेश के अलग-अलग शहरों से आए प्रतिभागियों ने बड़े उत्साह के साथ भाग लिया। इस आयोजन को सफल बनाने में भोपाल के साथ-साथ अन्य शहरों से आए कई ब्यूटी पेजेंट विजेताओं और फैशन डिज़ाइनर्स ने भी अपनी सहभागिता और महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया।
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- मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में वनरक्षक और जेल प्रहरी की भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए एनएसयूआई ने व्यापम के बाहर सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया और जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि भाजपा सरकार युवाओं का भविष्य बर्बाद कर रही है। एनएसयूआई कार्यकर्ताओं के अनुसार, वनरक्षक और जेल प्रहरी जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाओं में परीक्षार्थियों को तीन घंटे तक कैद करके रखा गया, जिसके बाद परीक्षा को रद्द कर दिया गया। इसे सरकार की नाकामी करार देते हुए कार्यकर्ताओं ने कहा कि यह युवाओं का भविष्य बर्बाद करने जैसा है। एनएसयूआई ने सरकार से दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और परीक्षार्थियों की फीस वापस करने की मांग की है। एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने चेतावनी दी है कि यदि छात्रों को न्याय नहीं मिला, तो पूरे प्रदेश में उग्र आंदोलन किया जाएगा।4
- मध्य प्रदेश में वनरक्षक और जेल प्रहरी की भर्ती परीक्षा में कथित गड़बड़ी सामने आने के बाद एनएसयूआई ने व्यापम के बाहर सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने जमकर नारेबाजी करते हुए आरोप लगाया कि राज्य की भाजपा सरकार युवाओं का भविष्य बर्बाद कर रही है। एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने बताया कि वनरक्षक और जेल प्रहरी जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा में विद्यार्थियों को तीन घंटे तक कैद करके रखा गया और उसके बाद परीक्षा को निरस्त कर दिया गया। उनके अनुसार, यह सरकार की नाकामी है और युवाओं के भविष्य को बर्बाद करने जैसा कृत्य है। एनएसयूआई ने सरकार से मांग की है कि इस गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और परीक्षार्थियों की फीस वापस की जाए। एनएसयूआई प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार सहित प्रदर्शनकारी कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि छात्रों को न्याय नहीं मिला, तो पूरे प्रदेश भर में उग्र आंदोलन किया जाएगा।1
- भोपाल में चंचल एंटरप्राइजेज द्वारा प्रस्तुत "ग्लैमरश सीजन-1, 2026" का भव्य आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। यह कार्यक्रम भोपाल के प्रसिद्ध होटल जालसा रिट्रीट, नीलबड़ में आयोजित किया गया था, जिसकी आयोजक शहर की जानी-मानी समाजसेविका एवं फैशन डिज़ाइनर चंचल सरवैया थीं। आयोजक के अनुसार, प्रतियोगिता को पांच विभिन्न श्रेणियों में बाँटा गया था, जिसमें मध्यप्रदेश के अलग-अलग शहरों से आए प्रतिभागियों ने बड़े उत्साह के साथ भाग लिया। इस आयोजन को सफल बनाने में भोपाल के साथ-साथ अन्य शहरों से आए कई ब्यूटी पेजेंट विजेताओं और फैशन डिज़ाइनर्स ने भी अपनी सहभागिता और महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया।1
- भोपाल में एक आम महोत्सव का आयोजन किया गया। यह महोत्सव 4 जून से शुरू होकर 8 जून तक चला।1
- भोपाल में सोमवार शाम को तेज़ आधी के साथ झमाझम बारिश हुई।1
- भोपाल में पुलिस के मानवीय चेहरे का प्रदर्शन करते हुए एक अनमोल जान बचाई गई। यह घटना पुलिस कमिश्नर कार्यालय में हुई, जहाँ देवेंद्र सक्सेना को अचानक दिल का दौरा पड़ा। आरक्षक मुकेश साहू और रंजीत रघुवंशी ने तुरंत सीपीआर देकर उनकी जान बचाई, जिसके कारण पाँच मिनट के भीतर उन्हें नई जिंदगी मिल गई। इस त्वरित मदद के बाद, आरआई जयसिंह तोमर ने अपने वाहन से देवेंद्र सक्सेना को आगे के उपचार के लिए अनंत हॉस्पिटल पहुँचाया।1
- मध्यप्रदेश से राज्यसभा के प्रत्याशी श्री महेश केवट ने सोमवार को विधानसभा पहुंचकर अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। इस महत्वपूर्ण अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष व विधायक श्री हेमंत खण्डेलवाल, और प्रदेश प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह सहित कोर कमेटी एवं पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। नामांकन दाखिल करते समय उपमुख्यमंत्री श्री जगदीश देवडा और श्री राजेन्द्र शुक्ल भी मौजूद थे। इनके साथ ही, भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व सांसद श्री विष्णुदत्त शर्मा तथा प्रदेश शासन के कई मंत्री जैसे श्री कैलाश विजयवर्गीय, श्री प्रहलाद पटेल, श्री राकेश सिंह, श्री तुलसी सिलावट, श्री उदय प्रताप सिंह, श्री विश्वास सारंग, श्री चैतन्य काश्यप, श्री इंदर सिंह परमार, सुश्री निर्मला भूरिया, श्रीमती संपतिया उइके, श्री नारायण सिंह पंवार, श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल, श्री लखन पटेल, श्रीमती कृष्णा गौर, और श्री दिलीप जायसवाल भी मौजूद रहे। पार्टी के अन्य प्रमुख पदाधिकारियों में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष व विधायक श्री सीतासरन शर्मा, मध्यप्रदेश वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स कॉरपोरेशन के अध्यक्ष श्री संजय नगाईच, प्रदेश उपाध्यक्ष श्री शैलेन्द्र बरूआ और श्री सुरेन्द्र शर्मा, प्रदेश महामंत्री श्री राहुल कोठारी, राज्यसभा के एक अन्य प्रत्याशी श्री रजनीश अग्रवाल, विधायक श्री शैलेन्द्र जैन, श्रीमती रीति पाठक, श्री हरीशंकर खटीक, उमाकांत शर्मा, श्री रामेश्वर शर्मा, श्री सिद्धार्थ तिवारी, श्री नरेन्द्र प्रजपाति, पूर्व मंत्री श्री जालम सिंह पटेल, प्रदेश कार्यालय मंत्री श्री श्याम महाजन, प्रदेश मीडिया प्रभारी श्री आशीष उषा अग्रवाल, और जिला अध्यक्ष श्री रविन्द्र यति शामिल थे। इस दौरान कई अन्य पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी उपस्थित थे।1
- कवि राजेंद्र सिंह जादौन अपने व्यंग्यपूर्ण लेख में एक तीखा सवाल उठाते हैं कि 'आखिर देश किसका है?' वे कटाक्ष करते हुए कहते हैं कि 'मोदी भारत का, भारत आरएसएस का, आरएसएस भाजपा की, भाजपा मोदी की', जिससे यह भ्रम पैदा होता है कि भारत संविधान या संसद का है या किसी 'खास किस्म' का। लेखक इस विचार को चुनौती देते हैं कि भारत एक व्यक्ति या संगठन की जागीर है, और जोर देते हैं कि यह उन करोड़ों लोगों का है जिनकी मेहनत इसकी तकदीर है। लेख में 'एक पेड़ माँ के नाम' जैसे अभियानों पर भी व्यंग्य किया गया है, जहाँ कैमरों के सामने एक पौधा लगाया जाता है, जबकि विकास के नाम पर हजारों पेड़ काटे जाते हैं, पहाड़ उजड़ते हैं और जंगल अपनी साँसें गिनते हैं। लेखक सवाल करते हैं कि नदियाँ किस विकास में शामिल हैं और जल, जंगल, ज़मीन पर सदियों से अधिकार रखने वालों को विस्थापन क्यों सहना पड़ा। इसे 'सेल्फी आधारित पर्यावरण संरक्षण' बताते हुए, जहाँ नेता फोटो खिंचवाते हैं और पौधा सूख जाता है, यह सवाल उठाया गया है कि लाखों पेड़ काटकर बनाई जा रही सड़कों, खदानों और परियोजनाओं का हिसाब कौन रखेगा। जानवरों के माध्यम से भी 'विकास' को उनके घरों का उजड़ना बताया गया है, और चेतावनी दी गई है कि जंगल कटने से वर्षा रूठती है, नदियाँ सूखती हैं और सभ्यता टूटती है। लेखक लोकतंत्र की स्थिति पर भी चिंता व्यक्त करते हैं, जहाँ सवालों से डर लगता है और तर्कों पर पहरा लगता है। सत्ता से असहमत होने वालों को अक्सर 'ठहरा' दिया जाता है। वे कॉर्पोरेट और राजनीति के बीच बढ़ती 'गहरी दोस्ती' पर सवाल उठाते हैं, जहाँ जनता के लिए कोई जगह नहीं बचती। जनता को लोकतंत्र का मालिक होने के बावजूद सरकार तक पहुँचने के लिए 'अपॉइंटमेंट' लेने पड़ते हैं। गरीबों की दुर्दशा पर भी प्रकाश डाला गया है, जिन्हें हर चुनाव में वादे मिलते हैं, लेकिन वे राशन, अस्पताल और नौकरी की लाइनों में ही लगे रहते हैं। 'राष्ट्रभक्ति के निजीकरण' का भी उल्लेख है, जहाँ सवाल पूछने वालों को राष्ट्रविरोधी, विकास विरोधी या नकारात्मक सोचने वाला ठहरा दिया जाता है, और चुप रहने को सहमति मान लिया जाता है। निष्कर्ष में, लेखक स्पष्ट करते हैं कि यह सवाल किसी दल, व्यक्ति या उद्योगपति का नहीं, बल्कि उस धरती का है जो हर प्राणी का घर है। वे जोर देते हैं कि भारत किसी एक व्यक्ति या संगठन की संपत्ति नहीं, बल्कि उन 140 करोड़ लोगों का है जो देश के भविष्य का निर्माण करते हैं। यह आह्वान किया जाता है कि पेड़ भी लगाएं और जंगल भी बचाएं, तथा जल, जंगल और ज़मीन के प्रश्नों को लोकतंत्र में उठाया जाए, क्योंकि भारत का भविष्य नारों से नहीं, बल्कि धरती, प्रकृति और इंसान के सम्मान से बनेगा।1