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फरक्का जल संधि को लेकर जदयू का बड़ा अभियान, बिहार के हक की आवाज उठाने का दावा। फरक्का जल संधि को लेकर बिहार में सियासी हलचल तेज हो गई है। जनता दल यूनाइटेड यानी जदयू ने इस संधि के नवीनीकरण का विरोध करते हुए “फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद” अभियान शुरू किया है। पार्टी का कहना है कि इस संधि का सबसे ज्यादा असर बिहार के जल संसाधनों, किसानों और आम लोगों पर पड़ रहा है। शुक्रवार को जिला मुख्यालय में जदयू की ओर से प्रेसवार्ता आयोजित कर फरक्का जल संधि को लेकर पार्टी का पक्ष रखा गया। प्रेसवार्ता में बताया गया कि गंगा किनारे बसे बिहार के 12 जिलों में जदयू की ओर से जन-जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान की शुरुआत 5 सितंबर को बक्सर से हुई है और इसका समापन कटिहार में होगा। पार्टी नेताओं के मुताबिक, बक्सर से गंगा बिहार में प्रवेश करती है और कटिहार से निकलती है, इसलिए इन दोनों जिलों को अभियान के क्रम में विशेष रूप से जोड़ा गया है। जदयू का आरोप है कि 1996 में भारत और बांग्लादेश के बीच हुई फरक्का जल संधि बिहार के हित में नहीं है। पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने भी राज्यसभा में इस मुद्दे को उठाते हुए संधि के नवीनीकरण का विरोध किया है। जदयू का कहना है कि यदि भविष्य में कोई समझौता होता है, तो उसमें बिहार की वर्ष 2050 तक की जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए। पार्टी नेताओं के अनुसार, शुष्क मौसम में बक्सर के पास गंगा का प्रवाह काफी कम हो जाने के बावजूद फरक्का के जरिए बांग्लादेश के लिए पानी छोड़ा जाता है। जदयू का दावा है कि इसका असर बिहार की आंतरिक नदियों और यहां के जल प्रबंधन पर भी पड़ रहा है। वहीं, पार्टी का कहना है कि फरक्का बैराज के कारण गंगा में गाद जमा होने से नदी का तल ऊंचा हुआ है, जिससे उत्तर बिहार में हर साल बाढ़ की समस्या बढ़ती है। दूसरी ओर, शुष्क मौसम में पानी की कमी के कारण बिहार के कई इलाकों में सूखे जैसी स्थिति उत्पन्न होने का दावा भी जदयू ने किया है। जदयू नेताओं ने कहा कि यह मुद्दा सिर्फ राजनीति का विषय नहीं, बल्कि बिहार के किसानों, पेयजल, उद्योग, आजीविका और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा सवाल है। प्रेसवार्ता में मौजूद नेताओं ने कहा कि “फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद” अभियान को व्यापक जनसमर्थन मिल रहा है। बिहार के उपमुख्यमंत्री सह जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी के बयान का हवाला देते हुए पार्टी ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य राजनीतिक लाभ नहीं, बल्कि बिहार के हित और राज्य की आवाज को केंद्र तक पहुंचाना है। अब सवाल यह है कि फरक्का जल संधि के नवीनीकरण को लेकर बिहार की आपत्तियों पर केंद्र सरकार क्या रुख अपनाती है। जदयू ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय विमर्श में लाने और फरक्का जल संधि पर पुनर्विचार की मांग को और तेज करने का संकेत दिया है।

5 hrs ago
user_Raman kumar Darbhanga Tak
Raman kumar Darbhanga Tak
हयाघाट, दरभंगा, बिहार•
5 hrs ago

फरक्का जल संधि को लेकर जदयू का बड़ा अभियान, बिहार के हक की आवाज उठाने का दावा। फरक्का जल संधि को लेकर बिहार में सियासी हलचल तेज हो गई है। जनता दल यूनाइटेड यानी जदयू ने इस संधि के नवीनीकरण का विरोध करते हुए “फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद” अभियान शुरू किया है। पार्टी का कहना है कि इस संधि का सबसे ज्यादा असर बिहार के जल संसाधनों, किसानों और आम लोगों पर पड़ रहा है। शुक्रवार को जिला मुख्यालय में जदयू की ओर से प्रेसवार्ता आयोजित कर फरक्का जल संधि को लेकर पार्टी का पक्ष रखा गया। प्रेसवार्ता में बताया गया कि गंगा किनारे बसे बिहार के 12 जिलों में जदयू की ओर से जन-जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान की शुरुआत 5 सितंबर को बक्सर से हुई है और इसका समापन कटिहार में होगा। पार्टी नेताओं के मुताबिक, बक्सर से गंगा बिहार में प्रवेश करती है और कटिहार से निकलती है, इसलिए इन दोनों जिलों को अभियान के क्रम में विशेष रूप से जोड़ा गया है। जदयू का आरोप है कि 1996 में भारत और बांग्लादेश के बीच हुई फरक्का जल संधि बिहार के हित में नहीं है। पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने भी राज्यसभा में इस मुद्दे को उठाते हुए संधि के नवीनीकरण का विरोध किया है। जदयू का कहना है कि यदि भविष्य में कोई समझौता होता है, तो उसमें बिहार की वर्ष 2050 तक की जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए। पार्टी नेताओं के अनुसार, शुष्क मौसम में बक्सर के पास गंगा का प्रवाह काफी कम हो जाने के बावजूद फरक्का के जरिए बांग्लादेश के लिए पानी छोड़ा जाता है। जदयू का दावा है कि इसका असर बिहार की आंतरिक नदियों और यहां के जल प्रबंधन पर भी पड़ रहा है। वहीं, पार्टी का कहना है कि फरक्का बैराज के कारण गंगा में गाद जमा होने से नदी का तल ऊंचा हुआ है, जिससे उत्तर बिहार में हर साल बाढ़ की समस्या बढ़ती है। दूसरी ओर, शुष्क मौसम में पानी की कमी के कारण बिहार के कई इलाकों में सूखे जैसी स्थिति उत्पन्न होने का दावा भी जदयू ने किया है। जदयू नेताओं ने कहा कि यह मुद्दा सिर्फ राजनीति का विषय नहीं, बल्कि बिहार के किसानों, पेयजल, उद्योग, आजीविका और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा सवाल है। प्रेसवार्ता में मौजूद नेताओं ने कहा कि “फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद” अभियान को व्यापक जनसमर्थन मिल रहा है। बिहार के उपमुख्यमंत्री सह जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी के बयान का हवाला देते हुए पार्टी ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य राजनीतिक लाभ नहीं, बल्कि बिहार के हित और राज्य की आवाज को केंद्र तक पहुंचाना है। अब सवाल यह है कि फरक्का जल संधि के नवीनीकरण को लेकर बिहार की आपत्तियों पर केंद्र सरकार क्या रुख अपनाती है। जदयू ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय विमर्श में लाने और फरक्का जल संधि पर पुनर्विचार की मांग को और तेज करने का संकेत दिया है।

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  • दरभंगा में बंदरों से क्रूरता के मामले में कोर्ट सख्त, नगर थाना से मांगी रिपोर्ट। दरभंगा में बंदरों को कथित तौर पर क्रूर तरीके से पकड़कर रखने के मामले में अब न्यायालय ने सख्ती दिखाई है। समाज सुधारक एवं पूर्व मानद राज्य पशु कल्याण अधिकारी, भारत सरकार, सुजीत चौधरी की ओर से दरभंगा मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी न्यायालय में परिवाद दायर किया गया था। परिवाद पर 11 सितंबर 2026 को सुनवाई करते हुए न्यायालय ने नगर थाना, दरभंगा से रिपोर्ट तलब की है। परिवाद में आरोप लगाया गया है कि 26 अगस्त 2026 से दरभंगा में बंदरों को कथित रूप से बिना वैध अनुमति के पकड़ा जा रहा है। आरोप है कि इनमें छोटे बच्चे और गर्भवती बंदर भी शामिल हैं और उन्हें हाथ-पैर पीछे मोड़कर, गर्दन दबाकर तथा रस्सियों से बांधकर छोटे बांस के पिंजरों में रखा जा रहा है। शिकायतकर्ता का यह भी आरोप है कि पिंजरों में बड़ी संख्या में बंदरों को ठूंसकर रखने, पर्याप्त भोजन-पानी और चिकित्सा सुविधा नहीं मिलने के कारण कई बंदरों की मौत हुई है। सुजीत चौधरी के मुताबिक, मामले की सूचना पुलिस, एसएसपी, जिलाधिकारी, वन विभाग और पशुपालन विभाग समेत कई अधिकारियों को दी गई, लेकिन कार्रवाई नहीं होने के बाद 8 सितंबर को न्यायालय में परिवाद दायर किया गया। परिवाद में कुछ लोगों पर बंदरों को अवैध रूप से पकड़ने और रात के अंधेरे में आसपास के गांवों में छोड़ने का भी आरोप लगाया गया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है। शिकायतकर्ता ने न्यायालय से बंदरों को तत्काल सुरक्षित कराने, उनकी स्वास्थ्य जांच कराने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। साथ ही दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम और संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई की मांग की गई है। अब न्यायालय द्वारा नगर थाना से रिपोर्ट तलब किए जाने के बाद इस मामले में पुलिस और संबंधित विभाग की जांच रिपोर्ट पर सबकी नजर है। फिलहाल बड़ा सवाल यही है—दरभंगा में बंदरों को पकड़ने की अनुमति किसके आदेश से दी गई थी और उनके साथ कथित क्रूरता के आरोपों में सच्चाई कितनी है? इसका जवाब जांच और न्यायालय के समक्ष पेश होने वाली रिपोर्ट से सामने आएगा।
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    दरभंगा में बंदरों से क्रूरता के मामले में कोर्ट सख्त, नगर थाना से मांगी रिपोर्ट।
दरभंगा में बंदरों को कथित तौर पर क्रूर तरीके से पकड़कर रखने के मामले में अब न्यायालय ने सख्ती दिखाई है।
समाज सुधारक एवं पूर्व मानद राज्य पशु कल्याण अधिकारी, भारत सरकार, सुजीत चौधरी की ओर से दरभंगा मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी न्यायालय में परिवाद दायर किया गया था। परिवाद पर 11 सितंबर 2026 को सुनवाई करते हुए न्यायालय ने नगर थाना, दरभंगा से रिपोर्ट तलब की है।
परिवाद में आरोप लगाया गया है कि 26 अगस्त 2026 से दरभंगा में बंदरों को कथित रूप से बिना वैध अनुमति के पकड़ा जा रहा है। आरोप है कि इनमें छोटे बच्चे और गर्भवती बंदर भी शामिल हैं और उन्हें हाथ-पैर पीछे मोड़कर, गर्दन दबाकर तथा रस्सियों से बांधकर छोटे बांस के पिंजरों में रखा जा रहा है।
शिकायतकर्ता का यह भी आरोप है कि पिंजरों में बड़ी संख्या में बंदरों को ठूंसकर रखने, पर्याप्त भोजन-पानी और चिकित्सा सुविधा नहीं मिलने के कारण कई बंदरों की मौत हुई है।
सुजीत चौधरी के मुताबिक, मामले की सूचना पुलिस, एसएसपी, जिलाधिकारी, वन विभाग और पशुपालन विभाग समेत कई अधिकारियों को दी गई, लेकिन कार्रवाई नहीं होने के बाद 8 सितंबर को न्यायालय में परिवाद दायर किया गया।
परिवाद में कुछ लोगों पर बंदरों को अवैध रूप से पकड़ने और रात के अंधेरे में आसपास के गांवों में छोड़ने का भी आरोप लगाया गया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है।
शिकायतकर्ता ने न्यायालय से बंदरों को तत्काल सुरक्षित कराने, उनकी स्वास्थ्य जांच कराने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। साथ ही दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम और संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई की मांग की गई है।
अब न्यायालय द्वारा नगर थाना से रिपोर्ट तलब किए जाने के बाद इस मामले में पुलिस और संबंधित विभाग की जांच रिपोर्ट पर सबकी नजर है।
फिलहाल बड़ा सवाल यही है—दरभंगा में बंदरों को पकड़ने की अनुमति किसके आदेश से दी गई थी और उनके साथ कथित क्रूरता के आरोपों में सच्चाई कितनी है? इसका जवाब जांच और न्यायालय के समक्ष पेश होने वाली रिपोर्ट से सामने आएगा।
    user_Raman kumar Darbhanga Tak
    Raman kumar Darbhanga Tak
    हयाघाट, दरभंगा, बिहार•
    4 hrs ago
  • 🚨 गैटी गैलेक्सी थिएटर पर बड़ा एक्शन! फिल्म ‘हनुमान अंश’ की स्क्रीनिंग को लेकर उठे विवाद के बीच मुंबई पुलिस की कार्रवाई से मचा हड़कंप। थिएटर सील, नोटिस जारी और संचालकों के खिलाफ मामला दर्ज। आखिर क्या है पूरा मामला? 👀 पूरी खबर पढ़ें और अपनी राय कमेंट में बताएं।👇 #हनुमानअंश #मुंबईन्यूज #गैटीगैलेक्सी #फिल्मन्यूज #ब्रेकिंगन्यूज
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    🚨 गैटी गैलेक्सी थिएटर पर बड़ा एक्शन!

फिल्म ‘हनुमान अंश’ की स्क्रीनिंग को लेकर उठे विवाद के बीच मुंबई पुलिस की कार्रवाई से मचा हड़कंप। थिएटर सील, नोटिस जारी और संचालकों के खिलाफ मामला दर्ज।

आखिर क्या है पूरा मामला? 👀
पूरी खबर पढ़ें और अपनी राय कमेंट में बताएं।👇

#हनुमानअंश #मुंबईन्यूज #गैटीगैलेक्सी #फिल्मन्यूज #ब्रेकिंगन्यूज
    user_Mukesh Kumar
    Mukesh Kumar
    गोरा बौरम, दरभंगा, बिहार•
    6 min ago
  • सरकारी अधिकारी बनकर युवाओं को ठग रहे थे जीजा-साले! पटना पुलिस ने खोला फर्जी नौकरी रैकेट का राज बिहार की राजधानी पटना में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर चल रहे कथित फर्जीवाड़े का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। सचिवालय थाना पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिन पर खुद को सरकारी अधिकारी और पुलिसकर्मी बताकर नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को अपने जाल में फंसाने का आरोप है। गिरफ्तार आरोपियों में कटिहार के अजय कुमार शुक्ला और बांका के राजा कुमार शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, एक आरोपी खुद को स्वास्थ्य विभाग का प्रशाखा पदाधिकारी बताता था, जबकि दूसरा पुलिस की वर्दी पहनकर पुलिसकर्मी होने का दावा करता था। तलाशी के दौरान पुलिस ने मोबाइल फोन, लैपटॉप, पुलिस और सचिवालय की वर्दियां, फर्जी आई-कार्ड, सरकारी नौकरी से जुड़े जाली बैनर और फर्जी प्रशस्ति पत्र बरामद किए हैं। अब पुलिस मोबाइल और लैपटॉप की जांच कर पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है। सवाल यह है कि इस कथित फर्जीवाड़े में कितने युवाओं को निशाना बनाया गया और कितने लोगों से पैसे लिए गए?
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    सरकारी अधिकारी बनकर युवाओं को ठग रहे थे जीजा-साले! पटना पुलिस ने खोला फर्जी नौकरी रैकेट का राज
बिहार की राजधानी पटना में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर चल रहे कथित फर्जीवाड़े का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। सचिवालय थाना पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिन पर खुद को सरकारी अधिकारी और पुलिसकर्मी बताकर नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को अपने जाल में फंसाने का आरोप है।
गिरफ्तार आरोपियों में कटिहार के अजय कुमार शुक्ला और बांका के राजा कुमार शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, एक आरोपी खुद को स्वास्थ्य विभाग का प्रशाखा पदाधिकारी बताता था, जबकि दूसरा पुलिस की वर्दी पहनकर पुलिसकर्मी होने का दावा करता था।
तलाशी के दौरान पुलिस ने मोबाइल फोन, लैपटॉप, पुलिस और सचिवालय की वर्दियां, फर्जी आई-कार्ड, सरकारी नौकरी से जुड़े जाली बैनर और फर्जी प्रशस्ति पत्र बरामद किए हैं।
अब पुलिस मोबाइल और लैपटॉप की जांच कर पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है। सवाल यह है कि इस कथित फर्जीवाड़े में कितने युवाओं को निशाना बनाया गया और कितने लोगों से पैसे लिए गए?
    user_Janki news 24
    Janki news 24
    गोरा बौरम, दरभंगा, बिहार•
    36 min ago
  • JDU का ऐलान फरक्का जल संधी पर समझौता नहीं, पुनर्विचार होना चाहिये, बिहार की हकमारी अब और नहीं Darpan24 News JDU का ऐलान फरक्का जल संधी पर समझौता नहीं, पुनर्विचार होना चाहिये, बिहार की हकमारी अब और नहीं Darpan24 News
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    JDU का ऐलान फरक्का जल संधी पर समझौता नहीं, पुनर्विचार होना चाहिये, बिहार की हकमारी अब और नहीं

Darpan24 News
JDU का ऐलान फरक्का जल संधी पर समझौता नहीं, पुनर्विचार होना चाहिये, बिहार की हकमारी अब और नहीं
Darpan24 News
    user_Darpan24 News
    Darpan24 News
    Local News Reporter गोरा बौरम, दरभंगा, बिहार•
    6 hrs ago
  • नेपाल का बेत्रावती बाजार देखिये कैसे एक मिनट मे खतम हो गया भयाबह मंजर पहाड़ की ऊचाई से बनाया गया vidio
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    नेपाल का बेत्रावती बाजार देखिये कैसे एक मिनट मे खतम हो गया भयाबह मंजर पहाड़ की ऊचाई से बनाया गया vidio
    user_PTB gramin
    PTB gramin
    News Anchor Darbhanga, Bihar•
    7 hrs ago
  • यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के आह्वान पर आज राष्ट्रव्यापी बैंक हड़ताल है। समस्तीपुर :-UFBU के आह्वान पर हि आज सभी सदस्यों (सभी बैंक अधिकारी एवं कर्मचारी) ने समस्तीपुर में भी अपनी मांगों को लेकर बैंक हड़ताल मे शामिल हुये एवं यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के क्षेत्रीय कार्यालय से लेकर समस्तीपुर गोला रोड तक शांतिपूर्ण मार्च निकाला । हमारी मुख्य मांगें (Our Demands):- 1.*Five Days Work Week( 5-दिवसीय कार्य) तुरंत लागू किया जाए।* 2. समान PLI स्कीम लागू किया जय एवं भेदभावपूर्ण PLI स्कीम को वापस लिया जाए। 3. द्विपक्षीय वार्ता: यूनियनों के साथ द्विपक्षीय चर्चा के माध्यम से PLI योजना में संशोधन किया जाए। 4. शेष मुद्दों का समाधान:- सभी लंबित एवं अवशिष्ट मुद्दों (Residual Issues) का त्वरित समाधान किया जय। इस हड़ताल में सभी सरकारी बैंकों के सदस्यों ने भाग लिया, जिसमें आशुतोष कुमार, विकाश कुमार, अवध बिहारी, ब्रजेश कुमार, राजीव कुमार, ज्ञानप्रकाश कुमार, तारकेश्वर कुमार, राकेश कुमार, प्रिंस कुमार, अमित कुमार, शशि शेखर चंद्र एवं अन्य सैकड़ों बैंक अधिकारी एवं कर्मी शामिल हुये।
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    यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के आह्वान पर आज राष्ट्रव्यापी बैंक हड़ताल है।  



समस्तीपुर :-UFBU के आह्वान पर हि आज सभी सदस्यों (सभी बैंक अधिकारी एवं कर्मचारी) ने समस्तीपुर में भी अपनी मांगों को लेकर बैंक हड़ताल मे शामिल हुये एवं यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के क्षेत्रीय कार्यालय से लेकर समस्तीपुर गोला रोड तक शांतिपूर्ण मार्च निकाला ।  
हमारी मुख्य मांगें (Our Demands):-
1.*Five Days Work Week( 5-दिवसीय कार्य) तुरंत लागू किया जाए।*
 2. समान PLI स्कीम लागू किया जय एवं भेदभावपूर्ण PLI स्कीम को वापस लिया जाए।
3.  द्विपक्षीय वार्ता: यूनियनों के साथ द्विपक्षीय चर्चा के माध्यम से PLI योजना में संशोधन किया जाए।
4.  शेष मुद्दों का समाधान:- सभी लंबित एवं अवशिष्ट मुद्दों (Residual Issues) का त्वरित समाधान किया जय।
इस हड़ताल में सभी सरकारी बैंकों के सदस्यों ने भाग लिया, जिसमें  आशुतोष कुमार, विकाश कुमार,  अवध बिहारी,  ब्रजेश कुमार, राजीव कुमार, ज्ञानप्रकाश कुमार, तारकेश्वर कुमार, राकेश कुमार, प्रिंस कुमार, अमित कुमार, शशि शेखर चंद्र एवं अन्य सैकड़ों बैंक अधिकारी एवं कर्मी शामिल हुये।
    user_Arvind Kumar News 7 Samastipur
    Arvind Kumar News 7 Samastipur
    Farmer Samastipur, Bihar•
    8 hrs ago
  • समस्तीपुर में मुफ्फसिल थाना क्षेत्र के लगुनिया रघुकंठ मोहल्ले में गुरुवार रात एएलटीएफ ने गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी कर अंग्रेजी शराब के साथ एक धंधेबाज को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपित की पहचान लगुनिया रघुकंठ गांव निवासी जयकरण चौधरी के पुत्र मणिकांत चौधरी के रूप में हुई है। समस्तीपुर में मुफ्फसिल थाना क्षेत्र के लगुनिया रघुकंठ मोहल्ले में गुरुवार रात एएलटीएफ ने गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी कर अंग्रेजी शराब के साथ एक धंधेबाज को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपित की पहचान लगुनिया रघुकंठ गांव निवासी जयकरण चौधरी के पुत्र मणिकांत चौधरी के रूप में हुई है।
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    समस्तीपुर में मुफ्फसिल थाना क्षेत्र के लगुनिया रघुकंठ मोहल्ले में गुरुवार रात एएलटीएफ ने गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी कर अंग्रेजी शराब के साथ एक धंधेबाज को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपित की पहचान लगुनिया रघुकंठ गांव निवासी जयकरण चौधरी के पुत्र मणिकांत चौधरी के रूप में हुई है।
समस्तीपुर में मुफ्फसिल थाना क्षेत्र के लगुनिया रघुकंठ मोहल्ले में गुरुवार रात एएलटीएफ ने गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी कर अंग्रेजी शराब के साथ एक धंधेबाज को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपित की पहचान लगुनिया रघुकंठ गांव निवासी जयकरण चौधरी के पुत्र मणिकांत चौधरी के रूप में हुई है।
    user_Mritunjay Kumar Thakur
    Mritunjay Kumar Thakur
    समस्तीपुर पत्रकार समस्तीपुर, समस्तीपुर, बिहार•
    17 hrs ago
  • फरक्का जल संधि को लेकर जदयू का बड़ा अभियान, बिहार के हक की आवाज उठाने का दावा। फरक्का जल संधि को लेकर बिहार में सियासी हलचल तेज हो गई है। जनता दल यूनाइटेड यानी जदयू ने इस संधि के नवीनीकरण का विरोध करते हुए “फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद” अभियान शुरू किया है। पार्टी का कहना है कि इस संधि का सबसे ज्यादा असर बिहार के जल संसाधनों, किसानों और आम लोगों पर पड़ रहा है। शुक्रवार को जिला मुख्यालय में जदयू की ओर से प्रेसवार्ता आयोजित कर फरक्का जल संधि को लेकर पार्टी का पक्ष रखा गया। प्रेसवार्ता में बताया गया कि गंगा किनारे बसे बिहार के 12 जिलों में जदयू की ओर से जन-जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान की शुरुआत 5 सितंबर को बक्सर से हुई है और इसका समापन कटिहार में होगा। पार्टी नेताओं के मुताबिक, बक्सर से गंगा बिहार में प्रवेश करती है और कटिहार से निकलती है, इसलिए इन दोनों जिलों को अभियान के क्रम में विशेष रूप से जोड़ा गया है। जदयू का आरोप है कि 1996 में भारत और बांग्लादेश के बीच हुई फरक्का जल संधि बिहार के हित में नहीं है। पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने भी राज्यसभा में इस मुद्दे को उठाते हुए संधि के नवीनीकरण का विरोध किया है। जदयू का कहना है कि यदि भविष्य में कोई समझौता होता है, तो उसमें बिहार की वर्ष 2050 तक की जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए। पार्टी नेताओं के अनुसार, शुष्क मौसम में बक्सर के पास गंगा का प्रवाह काफी कम हो जाने के बावजूद फरक्का के जरिए बांग्लादेश के लिए पानी छोड़ा जाता है। जदयू का दावा है कि इसका असर बिहार की आंतरिक नदियों और यहां के जल प्रबंधन पर भी पड़ रहा है। वहीं, पार्टी का कहना है कि फरक्का बैराज के कारण गंगा में गाद जमा होने से नदी का तल ऊंचा हुआ है, जिससे उत्तर बिहार में हर साल बाढ़ की समस्या बढ़ती है। दूसरी ओर, शुष्क मौसम में पानी की कमी के कारण बिहार के कई इलाकों में सूखे जैसी स्थिति उत्पन्न होने का दावा भी जदयू ने किया है। जदयू नेताओं ने कहा कि यह मुद्दा सिर्फ राजनीति का विषय नहीं, बल्कि बिहार के किसानों, पेयजल, उद्योग, आजीविका और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा सवाल है। प्रेसवार्ता में मौजूद नेताओं ने कहा कि “फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद” अभियान को व्यापक जनसमर्थन मिल रहा है। बिहार के उपमुख्यमंत्री सह जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी के बयान का हवाला देते हुए पार्टी ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य राजनीतिक लाभ नहीं, बल्कि बिहार के हित और राज्य की आवाज को केंद्र तक पहुंचाना है। अब सवाल यह है कि फरक्का जल संधि के नवीनीकरण को लेकर बिहार की आपत्तियों पर केंद्र सरकार क्या रुख अपनाती है। जदयू ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय विमर्श में लाने और फरक्का जल संधि पर पुनर्विचार की मांग को और तेज करने का संकेत दिया है।
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    फरक्का जल संधि को लेकर जदयू का बड़ा अभियान, बिहार के हक की आवाज उठाने का दावा।

फरक्का जल संधि को लेकर बिहार में सियासी हलचल तेज हो गई है। जनता दल यूनाइटेड यानी जदयू ने इस संधि के नवीनीकरण का विरोध करते हुए “फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद” अभियान शुरू किया है। पार्टी का कहना है कि इस संधि का सबसे ज्यादा असर बिहार के जल संसाधनों, किसानों और आम लोगों पर पड़ रहा है।
शुक्रवार को जिला मुख्यालय में जदयू की ओर से प्रेसवार्ता आयोजित कर फरक्का जल संधि को लेकर पार्टी का पक्ष रखा गया। प्रेसवार्ता में बताया गया कि गंगा किनारे बसे बिहार के 12 जिलों में जदयू की ओर से जन-जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।
इस अभियान की शुरुआत 5 सितंबर को बक्सर से हुई है और इसका समापन कटिहार में होगा। पार्टी नेताओं के मुताबिक, बक्सर से गंगा बिहार में प्रवेश करती है और कटिहार से निकलती है, इसलिए इन दोनों जिलों को अभियान के क्रम में विशेष रूप से जोड़ा गया है।
जदयू का आरोप है कि 1996 में भारत और बांग्लादेश के बीच हुई फरक्का जल संधि बिहार के हित में नहीं है। पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने भी राज्यसभा में इस मुद्दे को उठाते हुए संधि के नवीनीकरण का विरोध किया है। जदयू का कहना है कि यदि भविष्य में कोई समझौता होता है, तो उसमें बिहार की वर्ष 2050 तक की जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
पार्टी नेताओं के अनुसार, शुष्क मौसम में बक्सर के पास गंगा का प्रवाह काफी कम हो जाने के बावजूद फरक्का के जरिए बांग्लादेश के लिए पानी छोड़ा जाता है। जदयू का दावा है कि इसका असर बिहार की आंतरिक नदियों और यहां के जल प्रबंधन पर भी पड़ रहा है।
वहीं, पार्टी का कहना है कि फरक्का बैराज के कारण गंगा में गाद जमा होने से नदी का तल ऊंचा हुआ है, जिससे उत्तर बिहार में हर साल बाढ़ की समस्या बढ़ती है। दूसरी ओर, शुष्क मौसम में पानी की कमी के कारण बिहार के कई इलाकों में सूखे जैसी स्थिति उत्पन्न होने का दावा भी जदयू ने किया है।
जदयू नेताओं ने कहा कि यह मुद्दा सिर्फ राजनीति का विषय नहीं, बल्कि बिहार के किसानों, पेयजल, उद्योग, आजीविका और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा सवाल है।
प्रेसवार्ता में मौजूद नेताओं ने कहा कि “फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद” अभियान को व्यापक जनसमर्थन मिल रहा है। बिहार के उपमुख्यमंत्री सह जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी के बयान का हवाला देते हुए पार्टी ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य राजनीतिक लाभ नहीं, बल्कि बिहार के हित और राज्य की आवाज को केंद्र तक पहुंचाना है।
अब सवाल यह है कि फरक्का जल संधि के नवीनीकरण को लेकर बिहार की आपत्तियों पर केंद्र सरकार क्या रुख अपनाती है। जदयू ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय विमर्श में लाने और फरक्का जल संधि पर पुनर्विचार की मांग को और तेज करने का संकेत दिया है।
    user_Raman kumar Darbhanga Tak
    Raman kumar Darbhanga Tak
    हयाघाट, दरभंगा, बिहार•
    5 hrs ago
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