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नर्मदापुरम जिले के पिपरिया शहर में, विशेष रूप से रोग आनंद भूमि के सामने, सड़कों के बीचों-बीच गायों के बैठे होने के कारण एक गंभीर दुर्घटना की आशंका लगातार बनी हुई है। बीच सड़क पर गायों के काफिले के जमावड़े से किसी भी समय एक बड़ा हादसा हो सकता है।
हीरालाल गढ़वाल नर्मदापुरम बनखेड़ी
नर्मदापुरम जिले के पिपरिया शहर में, विशेष रूप से रोग आनंद भूमि के सामने, सड़कों के बीचों-बीच गायों के बैठे होने के कारण एक गंभीर दुर्घटना की आशंका लगातार बनी हुई है। बीच सड़क पर गायों के काफिले के जमावड़े से किसी भी समय एक बड़ा हादसा हो सकता है।
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- नरसिंहपुर जिले की गाडरवारा तहसील के भौरझिर गाँव से एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है, जहाँ स्थानीय निवासियों ने प्रधानमंत्री आवास योजना के क्रियान्वयन में व्यापक भ्रष्टाचार और मनमानी के गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि इस महत्वपूर्ण योजना में अनियमितताएँ बरती जा रही हैं।1
- बाबा खाटू श्याम के प्रति श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का एक अद्भुत नजारा नरसिंहपुर में देखने को मिला, जहाँ महाराष्ट्र के गोंदिया से शुरू हुई बाबा खाटू श्याम की पदयात्रा आ पहुँची है। नरसिंहपुर पहुँचने पर स्थानीय नागरिकों ने पदयात्रियों का गर्मजोशी से स्वागत किया। इस पदयात्रा में शामिल भक्तों ने बताया कि यह उनकी गहरी श्रद्धा का परिणाम है और उनका लक्ष्य बाबा खाटू श्याम की नगरी राजस्थान तक पहुँचना है। उन्होंने जानकारी दी कि वे प्रतिदिन लगभग 35 से 40 किलोमीटर की पैदल दूरी तय कर रहे हैं, और इस पूरी यात्रा को पूरा करने में लगभग 35 से 40 दिन का समय लगेगा। यात्रा में शामिल कुणाल पांडे ने साझा किया कि यह उनकी दूसरी पदयात्रा है और वे बाबा की कृपा से ही इस कठिन मार्ग को तय कर पा रहे हैं। इस पैदल यात्रा में कुल चार लोग शामिल हैं, जिनमें से एक मुख्य पदयात्री हैं और अन्य सेवा कार्यों में सहयोग कर रहे हैं। श्रद्धालुओं का दृढ़ विश्वास है कि धूप, बारिश या तूफान जैसी कोई भी बाधा उन्हें रोक नहीं सकती, क्योंकि बाबा की शक्ति ही उन्हें निरंतर आगे बढ़ा रही है। इस पदयात्रा का मुख्य उद्देश्य बाबा खाटू श्याम के दर्शन करना और अपनी श्रद्धा अर्पित करना है। श्रद्धालुओं का यह जत्था बाबा का आशीर्वाद और अटूट विश्वास लेकर अपनी मंजिल की ओर अग्रसर है।4
- नरसिंहपुर स्थित पटेल कॉलोनी में गंभीर बदहाली का सामना कर रहे वार्डवासी सीवर लाइन और स्ट्रीट लाइट जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।1
- नरसिंहपुर जिले के गोटेगांव में मटर उत्पादक किसानों के साथ करोड़ों रुपए की धोखाधड़ी का एक बड़ा मामला सामने आया है। भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया है कि गोटेगांव कृषि उपज मंडी क्षेत्र के लगभग 150 किसानों ने अपनी मटर की फसल गोपाल एंड कंपनी को बेची थी, जिसके बाद किसानों की करोड़ों रुपए की मेहनत की कमाई का गबन कर लिया गया है। इस धोखाधड़ी के खिलाफ पीड़ित किसानों ने पिछले 5 महीनों पहले FIR दर्ज करवाई थी, लेकिन उस पर कोई कार्यवाही नहीं हुई। पिछले हफ्ते SDM ने FIR दर्ज करने का आश्वासन दिया था, लेकिन प्रशासन अपने इस वादे से मुकर गया है। इसी के विरोध में, किसान भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले कलेक्ट्रेट परिसर में धरने पर बैठ गए हैं। उन्होंने जिला कलेक्टर के नाम SDM को एक ज्ञापन सौंपा है और गोपाल एंड कंपनी पर तुरंत FIR दर्ज करने, साथ ही इसमें संलिप्त अधिकारियों के ऊपर जांच की मांग की है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों पर तत्काल FIR दर्ज नहीं की गई तो उनका यह धरना जारी रहेगा।1
- कोनी के डंपर संचालकों ने 14 घंटे के प्रतिबंधात्मक आदेश पर अपना कड़ा विरोध जताया है। संचालकों का कहना है कि इस आदेश के कारण उनका व्यापार पूरी तरह ठप हो रहा है।1
- सुहागपुर विधानसभा में पुष्पराज सिंह पटेल अन्नदाताओं की छोटी-बड़ी समस्याओं को लेकर लगातार संघर्ष कर रहे हैं। विशेष रूप से मूंग खरीदी के मुद्दे पर उनके नेतृत्व में जगह-जगह रैलियाँ, प्रदर्शन और पुतला दहन कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। दादा पुष्पराज सिंह पटेल ने सरकार पर अन्नदाताओं के साथ अन्याय और अत्याचार करने का आरोप लगाया है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि सरकार किसानों की बात नहीं मानती है, तो वे सड़कों को जाम कर देंगे। उन्होंने बताया कि अन्नदाता किसान हर जगह परेशान हैं और उनका शोषण हो रहा है। ऐसे समय में, पुष्पराज सिंह पटेल ही एकमात्र ऐसे व्यक्ति हैं जो अन्नदाताओं की आवाज को बुलंद कर रहे हैं, जबकि अन्य जन प्रतिनिधियों ने चुप्पी साध रखी है। श्री पटेल ने जोर दिया कि आम जनता भी इस बात को बखूबी समझ गई है। उन्होंने कहा कि आने वाले चुनावों में आम जनता वोट के माध्यम से इसका करारा जवाब देगी। पुष्पराज सिंह पटेल को सुहागपुर विधानसभा की बुलंद आवाज बताया गया है, जो लगातार किसानों के हितों के लिए आवाज़ उठा रहे हैं।1
- मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले में 14 घंटे की 'नो-एंट्री' व्यवस्था के कारण निर्माण कार्य ठप्प पड़ गए हैं। इस प्रतिबंध से रेत और गिट्टी व्यापारियों में गहरा असंतोष है, जिन्होंने अब आंदोलन की चेतावनी दी है। 'नो-एंट्री' के विरोध में रेत व्यापारी यूनियन और डंपर-ट्रक चालक संघ ने कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपकर इस व्यवस्था को तत्काल हटाने की मांग की है। उनका कहना है कि इस रोक के कारण जिले में विकास कार्यों पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है और आवश्यक सामग्री की आपूर्ति भी प्रभावित हो रही है।1
- नरसिंहपुर जिले के मुशरान वार्ड स्थित पटेल कॉलोनी की गली नंबर 2 के निवासी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। अपनी इस बदहाली को लेकर वार्डवासियों ने आज जिला कलेक्टर कार्यालय में आयोजित 'जनसुनवाई' में एक ज्ञापन सौंपकर त्वरित कार्रवाई की मांग की है। निवासियों का आरोप है कि उनके मोहल्ले में सीवर लाइन बिछाने का कार्य पूर्ण हुए पांच महीने बीत चुके हैं, लेकिन ठेकेदार ने इसे अभी तक चालू नहीं किया है। इसके चलते घरों के सीवर कनेक्शन मुख्य लाइन से नहीं जोड़े जा सके हैं, जिससे गंदे पानी की निकासी की कोई उचित व्यवस्था नहीं है। वार्डवासियों ने चिंता जताई है कि इस जलभराव और गंदगी के कारण क्षेत्र में गंभीर बीमारियों के फैलने का खतरा बना हुआ है। सीवर की समस्या के अलावा, पटेल कॉलोनी गली नंबर 2 के निवासियों ने बिजली के खंभे न होने पर भी नाराजगी व्यक्त की है। उनका कहना है कि स्ट्रीट लाइट के अभाव में रात के समय आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है और आए दिन दुर्घटनाओं का डर बना रहता है। स्थानीय निवासियों ने कलेक्टर महोदय से मांग की है कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों को तत्काल निर्देश दिए जाएं ताकि सीवर लाइन कनेक्शन को चालू किया जा सके और कॉलोनी में बिजली के खंभे लगाकर स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके, क्योंकि मूलभूत सुविधाओं के लिए वार्डवासी दर-दर भटकने को मजबूर हैं।2
- मध्य प्रदेश के महू में चोरल नदी की उफनती रपट पर बच्चों की जान के साथ खिलवाड़ का मामला सामने आया है, जहाँ ग्रामीण तेज बहाव के बीच मासूम बच्चों को अपने कंधों पर बैठाकर रपट पार करा रहे हैं। स्कूल से लौट रहे इन बच्चों की जिंदगी हर कदम पर खतरे में रहती है, और बताया गया है कि एक चूक भी भारी पड़ सकती थी, जिससे फिलहाल एक बड़ा हादसा टल गया। ग्रामीणों के अनुसार, हर बारिश में यही स्थिति रहती है, लेकिन अब तक कोई सुरक्षित पुल नहीं बनाया गया है। पक्की सड़क के अभाव में बच्चों को कीचड़ और उफनती रपट के सहारे ही स्कूल जाने के लिए मजबूर होना पड़ता है। इस गंभीर स्थिति को लेकर ग्रामीणों ने प्रशासन की अनदेखी पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा है कि वे कब तक जान जोखिम में डालकर बच्चों को नदी पार कराते रहेंगे और प्रशासन से एक सुरक्षित पुल तथा सड़क के निर्माण की तत्काल मांग की है।1