मध्य प्रदेश के महू में चोरल नदी की उफनती रपट पर बच्चों की जान के साथ खिलवाड़ का मामला सामने आया है, जहाँ ग्रामीण तेज बहाव के बीच मासूम बच्चों को अपने कंधों पर बैठाकर रपट पार करा रहे हैं। स्कूल से लौट रहे इन बच्चों की जिंदगी हर कदम पर खतरे में रहती है, और बताया गया है कि एक चूक भी भारी पड़ सकती थी, जिससे फिलहाल एक बड़ा हादसा टल गया। ग्रामीणों के अनुसार, हर बारिश में यही स्थिति रहती है, लेकिन अब तक कोई सुरक्षित पुल नहीं बनाया गया है। पक्की सड़क के अभाव में बच्चों को कीचड़ और उफनती रपट के सहारे ही स्कूल जाने के लिए मजबूर होना पड़ता है। इस गंभीर स्थिति को लेकर ग्रामीणों ने प्रशासन की अनदेखी पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा है कि वे कब तक जान जोखिम में डालकर बच्चों को नदी पार कराते रहेंगे और प्रशासन से एक सुरक्षित पुल तथा सड़क के निर्माण की तत्काल मांग की है।
मध्य प्रदेश के महू में चोरल नदी की उफनती रपट पर बच्चों की जान के साथ खिलवाड़ का मामला सामने आया है, जहाँ ग्रामीण तेज बहाव के बीच मासूम बच्चों को अपने कंधों पर बैठाकर रपट पार करा रहे हैं। स्कूल से लौट रहे इन बच्चों की जिंदगी हर कदम पर खतरे में रहती है, और बताया गया है कि एक चूक भी भारी पड़ सकती थी, जिससे फिलहाल एक बड़ा हादसा टल गया। ग्रामीणों के अनुसार, हर बारिश में यही स्थिति रहती है, लेकिन अब तक कोई सुरक्षित पुल नहीं बनाया गया है। पक्की सड़क के अभाव में बच्चों को कीचड़ और उफनती रपट के सहारे ही स्कूल जाने के लिए मजबूर होना पड़ता है। इस गंभीर स्थिति को लेकर ग्रामीणों ने प्रशासन की अनदेखी पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा है कि वे कब तक जान जोखिम में डालकर बच्चों को नदी पार कराते रहेंगे और प्रशासन से एक सुरक्षित पुल तथा सड़क के निर्माण की तत्काल मांग की है।
- मध्य प्रदेश के पांढुर्ना में पिछले 36 घंटों से एक हाई वोल्टेज ड्रामा चल रहा है, जहाँ एक युवक टावर पर चढ़ गया है। उसे टावर से नीचे उतारने के प्रयास लगातार जारी हैं।1
- आज मंगलवार को छिंदवाड़ा कलेक्टर हरेंद्र नारायन ने कलेक्टर कार्यालय के सभाकक्ष में आयोजित जनसुनवाई में शहरी, ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों से आए आवेदकों की समस्याओं को गंभीरता से सुना। दोपहर 12 बजे शुरू हुई इस जनसुनवाई में, आवेदकों ने ज़मीन के सीमांकन, नक्शा दुरूस्त करने, अतिक्रमण हटाने, नाला गहरीकरण, प्रधानमंत्री आवास योजना, बिजली-पानी और सामाजिक सहायता जैसी विभिन्न शिकायतें रखीं। कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को इन सभी मामलों के त्वरित निवारण के निर्देश दिए। उन्होंने कई प्रकरणों को तत्काल नोट कर उनके समाधान का आदेश दिया, जबकि कुछ मामलों को समयसीमा समीक्षा के लिए चिह्नित किया ताकि उनका भी शीघ्र निराकरण सुनिश्चित किया जा सके।1
- नर्मदापुरम जिले के पिपरिया शहर में, विशेष रूप से रोग आनंद भूमि के सामने, सड़कों के बीचों-बीच गायों के बैठे होने के कारण एक गंभीर दुर्घटना की आशंका लगातार बनी हुई है। बीच सड़क पर गायों के काफिले के जमावड़े से किसी भी समय एक बड़ा हादसा हो सकता है।1
- आशा कार्यकर्ताओं और आशा पर्यवेक्षकों ने मिलकर मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन प्रस्तुत किया है। इस ज्ञापन में उन्होंने अपनी 18 सूत्रीय मांगों को विस्तार से उल्लेखित किया है।1
- छिंदवाड़ा जिले के बिछुआ विकासखंड के ग्राम खमरा में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत निर्मित मार्ग आज गड्ढों और पानी के तालाब में तब्दील हो गया है। इस मार्ग की मौजूदा स्थिति को देखकर यह सवाल उठ रहा है कि आखिर गड्ढे में रोड है या रोड में गड्ढा, और पानी में रोड है या रोड में पानी। यह समस्या विशेष रूप से खमरा से किशनपुर, डोला-पांजरा मार्ग पर केंद्रित है। ग्रामीणों के अनुसार, सड़क का निर्माण तो ठेकेदार द्वारा कर दिया गया, लेकिन पानी की उचित निकासी के लिए नालियों का निर्माण नहीं कराया गया। इसी के चलते हल्की बारिश में भी सड़क पर लगभग एक-एक फीट पानी भर जाता है, जिससे सड़क जगह-जगह से जर्जर होकर उखड़ गई है। इस बदहाल सड़क से रोजाना मिडिल स्कूल, हाई स्कूल और छात्रावास के सैकड़ों स्कूली बच्चे आते-जाते हैं। सड़क पर भरे गंदे पानी और कीचड़ के कारण जब भी कोई वाहन गुजरता है, तो पानी उछलकर बच्चों की ड्रेस खराब कर देता है, जिससे कई बार उन्हें वापस घर लौटना पड़ता है और उनकी पढ़ाई भी लगातार प्रभावित हो रही है। इसके अलावा, पानी में गड्ढों की गहराई का अंदाजा न लगने के कारण कई बाइक और अन्य वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो चुके हैं, जिससे हादसे अब आम बात हो गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार की इस घोर लापरवाही के कारण आम जनता को प्रतिदिन परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शर्म की बात यह भी है कि यह सड़क पर्यटन मार्ग भी है, जिससे पर्यटक कर्माझिरी और जमतरा की ओर जाते हैं। सरकारी कर्मचारी और नेता भी इसी मार्ग से गुजरते हैं, लेकिन किसी ने भी सड़क पर बने गड्ढों और जलभराव की ओर ध्यान नहीं दिया है। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि सड़क निर्माण के समय गुणवत्ता मानकों का बिल्कुल ध्यान नहीं रखा गया। नालियों के अभाव में पानी की निकासी न होने से सड़क धीरे-धीरे पूरी तरह से खत्म हो रही है। उन्होंने शासन-प्रशासन से तत्काल मांग की है कि इस PMGSY सड़क की मरम्मत कराई जाए, सड़क के दोनों ओर पानी निकासी के लिए नाली बनाई जाए, और ठेकेदार की लापरवाही की विस्तृत जांच कर उचित कार्रवाई की जाए।1
- मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले की गाडरवारा विधानसभा में स्थित गाडरवारा नगर पालिका के विवेकानंद वार्ड के नागरिक भीषण समस्याओं से जूझ रहे हैं। विशेषकर बारिश के महीनों में उन्हें आने-जाने, विद्युत व्यवस्था और पानी की निकासी को लेकर भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इन गंभीर मुद्दों को लेकर विवेकानंद वार्ड के नागरिकों ने गाडरवारा एसडीएम कार्यालय में एक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें उन्होंने प्रशासन से उनकी समस्याओं को तत्काल दूर करने की पुरजोर मांग की है।1
- सोहागपुर थाना क्षेत्र में एक 6 वर्षीय मासूम बालिका के साथ दुष्कर्म का मामला सामने आया है। यह घटना सोमवार दोपहर की बताई जा रही है, जब बच्ची अपने घर पर अकेली थी। दुष्कर्म करने वाला 16 वर्षीय नाबालिग आरोपी पीड़िता के ही मोहल्ले का निवासी है। मासूम की माँ के घर लौटने पर बच्ची ने उन्हें अपनी आपबीती सुनाई। इसके बाद माँ अपनी बच्ची को लेकर सोहागपुर थाने पहुँचीं और केस दर्ज कराया। पुलिस ने बताया कि दुष्कर्म की घटना के बाद आरोपी भाग गया था, लेकिन उन्होंने नाबालिग बाल अपचारी को हिरासत में लेकर बीती सोमवार रात पॉक्सो एक्ट और दुष्कर्म की धाराओं में मामला दर्ज किया। पुलिस ने मंगलवार दोपहर 12 बजे जानकारी दी कि आरोपी उसी मोहल्ले का निवासी है और उसे हिरासत में ले लिया गया है। पुलिस ने पीड़िता का मेडिकल परीक्षण और इलाज भी कराया है। इस मामले में आगे की कार्रवाई किशोर न्याय बोर्ड के माध्यम से की जाएगी।1
- मध्य प्रदेश के मोहखेड़ जनपद की ग्राम पंचायत देवगढ़ के कलकोट गांव में वर्ष 2020 में मनरेगा योजना के तहत निर्मित एक पुलिया पहली ही तेज बारिश में क्षतिग्रस्त होकर बह गई। करीब ₹12-13 लाख की लागत से बनी यह पुलिया बह जाने के कारण गांव दो हिस्सों में बंट गया, जिससे ग्रामीणों का संपर्क टूट गया। पुलिया टूटने के इस गंभीर परिणाम से स्कूली बच्चों, मरीजों और आम ग्रामीणों का आवागमन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इस घटना को लेकर ग्रामीणों ने पुलिया के निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाए हैं और मामले की विस्तृत जांच की मांग की है।1