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ममता सरकार अगर जनता की हितैषी है तो पेट्रोल दिल्ली से महँगा क्यूँ

3 hrs ago
user_Manish Kumar Social Worker
Manish Kumar Social Worker
Insurance Agent बेतिया, पश्चिम चंपारण, बिहार•
3 hrs ago

ममता सरकार अगर जनता की हितैषी है तो पेट्रोल दिल्ली से महँगा क्यूँ

More news from बिहार and nearby areas
  • बेतिया में सड़क हादसा: दवा लेकर लौट रहे युवक की मौत, घर में शादी की खुशियाँ मातम में बदलीं
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    बेतिया में सड़क हादसा: दवा लेकर लौट रहे युवक की मौत, घर में शादी की खुशियाँ मातम में बदलीं
    user_A9Bharat News
    A9Bharat News
    बेतिया, पश्चिम चंपारण, बिहार•
    21 min ago
  • 09.02.2026. महानगनी पोखर में एक व्यक्ति की लाश मिली थी। पुलिस द्वारा इस कांड का उद्भेदन किया गया। ट्राफिक डीएसपी श्री अतनु दत्ता ने प्रेस कांफ्रेंस कर मीडिया प्रतिनिधियों को दी जानकारी। 12.02.2026.
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    09.02.2026. महानगनी पोखर में एक व्यक्ति की लाश मिली थी। पुलिस द्वारा इस कांड का उद्भेदन किया गया। ट्राफिक डीएसपी श्री अतनु दत्ता ने प्रेस कांफ्रेंस कर मीडिया प्रतिनिधियों को दी जानकारी।  12.02.2026.
    user_Vivek Shrivastava.
    Vivek Shrivastava.
    Teacher बेतिया, पश्चिम चंपारण, बिहार•
    1 hr ago
  • Post by Manish Kumar Social Worker
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    Post by Manish Kumar Social Worker
    user_Manish Kumar Social Worker
    Manish Kumar Social Worker
    Insurance Agent बेतिया, पश्चिम चंपारण, बिहार•
    3 hrs ago
  • ट्रेड यूनियन सेंटर ऑफ इंडिया (टीयूसीआई) के जिला कमिटी की ओर से शहीद स्मारक से एक विशाल जुलूस, चार लेबर कोड के विरोध में निकाला गया। जुलूस समाहरणालय के गेट के पास एक सभा में तब्दील हो गया।सभा स्थल पर चार संहिता काला कानून की प्रतियाँ जलाई गयी। सभा को संबोधित करते हुये टीयूसीआई के केन्द्रीय कमिटी सदस्य सह भाकपा (माले) रेड फ्लैग के राज्य सचिव कॉमरेड रवीन्द्र कुमार 'रवि' ने कहा कि प्रधानमंत्री का यह दावा कि श्रम संहिताएँ सभी श्रमिकों को न्यूनतम वेतन और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करती हैं, पूरी तरह बेबुनियाद है। आगे उन्होंने कहा कि 90% से अधिक मजदूर जो असंगठित क्षेत्र में हैं, श्रम संहिताओं के दायरे से बाहर हैं। अब श्रम संहिताओं ने संगठित क्षेत्र के 90% मजदूरों को भी कानूनी संरक्षण से बाहर कर दिया है। इंडस्ट्रियल रिलेशन्स कोड अब 300 से कम श्रमिकों वाले यूनिट्स को छंटनी, सेवा समाप्ति और बंदी के लिए पहले से सरकारी अनुमति लेने से सामान्यतः मुक्त कर देता है। जबकि पहले यह सीमा 100 श्रमिक थी। इसी तरह 20 या 40 से कम श्रमिकों वाले (बिजली उपयोग के आधार पर) उद्योग व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थितियाँ (OSHWC) कोड के कई प्रावधानों एवं कारखाने के रूप में पंजीकरण से मुक्त हैं, जो पहले 10 और 20 थें। वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण (ASI) 2021–22 के आंकड़ों के अनुसार 100 से कम श्रमिकों को रोजगार देने वाले कारखाने सभी कारखानों का 79.2% हिस्सा हैं।असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन या सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कोई प्रवर्तन तंत्र मौजूद नहीं है। केंद्र सरकार ट्रेड यूनियनों की ₹26,000 प्रति माह न्यूनतम वेतन की मांग स्वीकार करने को तैयार नहीं है। टीयूसीआई यह मांग करता है कि सरकार स्पष्ट करे कि वर्तमान में न्यूनतम वेतन क्या है ? कितने श्रमिकों को मिलता है, और देश भर में इसके प्रवर्तन की क्या व्यवस्था है? आगे रवीन्द्र कुमार 'रवि' ने कहा श्रम संहिताएँ मजदूरों के ट्रेड यूनियन बनाने और हड़ताल करने के अधिकार को भी नकार देती हैं। 60 दिन पहले अनिवार्य नोटिस की शर्त और समझौता प्रक्रिया चलने के दौरान हड़ताल पर प्रतिबंध मिलकर हड़ताल को लगभग असंभव कर देते हैं और संघ बनाने की स्वतंत्रता छीन लेते हैं। आगे रवीन्द्र ने जोर देकर कहा कि मोदी सरकार की कॉरपोरेट वर्ग के आगे पूर्ण सरेंडर है और श्रमिकों के विधिक अधिकारों के विरुद्ध है। देश की जनता इसे स्वीकार नहीं करेगी।भाजपा, RSS के नेतृत्व को स्पष्ट करना होगा कि वे कॉरपोरेट के साथ खड़े हैं या भारत की जनता के साथ ? मोदी सरकार ने कॉरपोरेट एकाधिकारों के दबाव में कामकाजी जनता और नौजवान पीढ़ी के साथ धोखा किया है। श्रम संहिताओं ने स्थायी रोजगार और सुरक्षा के अधिकार की जगह नियत अवधि रोजगार को वैध बना दिया है और 1970 के ठेका श्रम उन्मूलन अधिनियम को अप्रभावी कर दिया है। टीयूसीआई के जिला संयोजक हरिशंकर प्रसाद ने कहा कि सरकार ने 8 घंटे के कार्यदिवस जो श्रमिकों का सार्वभौमिक अधिकार है को खत्म कर 12 घंटे के कार्यदिवस को वैध कर दिया है जो भारतीय संविधान के अनुच्छेद 42 में उल्लेखित न्यायपूर्ण और मानवीय कार्य परिस्थितियों के विपरीत है। भाकपा (माले) रेड फ्लैग के जिला कमिटी सदस्य व पूर्व निगम पार्षद रीता रवि ने कहा कि श्रम संहिताएँ मजदूरों को पूँजी के गुलाम बनाने, युवाओं का भविष्य नष्ट करने और बुज़ुर्ग मजदूरों को सेवानिवृत्ति लाभों से वंचित कर दुखद जीवन की ओर धकेल देने के लिए बनाई गई हैं। इन्हें रद्द करना ही होगा। आगे उन्होंने कहा कि श्रम संहिताओं को अंतिम रूप देने से पहले ट्रेड यूनियनों के सुझाव और सिफारिशें बिल्कुल नहीं मानी गईं।आगे उन्होंने कहा कि कामकाजी जनता पर कॉरपोरेट वर्चस्व थोपने का यह बेहद अलोकतांत्रिक तरीका कभी भी स्वीकार्य नहीं है। सभा को अवधेश राम, रसुल मियां, राजू राम, भगेलू राम,महंथ राम,चंदा देवी, आदि नेताओं ने भी संबोधित कियें।
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    ट्रेड यूनियन सेंटर ऑफ इंडिया (टीयूसीआई) के जिला कमिटी की ओर से शहीद स्मारक से एक विशाल जुलूस, चार लेबर कोड के विरोध में निकाला गया। जुलूस समाहरणालय के गेट के पास एक सभा में तब्दील हो गया।सभा स्थल पर चार संहिता काला कानून की प्रतियाँ जलाई गयी। सभा को संबोधित करते हुये टीयूसीआई के केन्द्रीय कमिटी सदस्य सह भाकपा (माले) रेड फ्लैग के राज्य सचिव कॉमरेड रवीन्द्र कुमार 'रवि' ने कहा कि प्रधानमंत्री का यह दावा कि श्रम संहिताएँ सभी श्रमिकों को न्यूनतम वेतन और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करती हैं, पूरी तरह बेबुनियाद है। आगे उन्होंने कहा कि 90% से अधिक मजदूर जो असंगठित क्षेत्र में हैं, श्रम संहिताओं के दायरे से बाहर हैं। अब श्रम संहिताओं ने संगठित क्षेत्र के 90% मजदूरों को भी कानूनी संरक्षण से बाहर कर दिया है। इंडस्ट्रियल रिलेशन्स कोड अब 300 से कम श्रमिकों वाले यूनिट्स को छंटनी, सेवा समाप्ति और बंदी के लिए पहले से सरकारी अनुमति लेने से सामान्यतः मुक्त कर देता है। जबकि पहले यह सीमा 100 श्रमिक थी। इसी तरह 20 या 40 से कम श्रमिकों वाले (बिजली उपयोग के आधार पर) उद्योग व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थितियाँ (OSHWC) कोड के कई प्रावधानों एवं कारखाने के रूप में पंजीकरण से मुक्त हैं, जो पहले 10 और 20 थें।
वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण (ASI) 2021–22 के आंकड़ों के अनुसार 100 से कम श्रमिकों को रोजगार देने वाले कारखाने सभी कारखानों का 79.2% हिस्सा हैं।असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन या सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कोई प्रवर्तन तंत्र मौजूद नहीं है। केंद्र सरकार ट्रेड यूनियनों की ₹26,000 प्रति माह न्यूनतम वेतन की मांग स्वीकार करने को तैयार नहीं है। टीयूसीआई यह मांग करता है कि सरकार स्पष्ट करे कि वर्तमान में न्यूनतम वेतन क्या है ? कितने श्रमिकों को मिलता है, और देश भर में इसके प्रवर्तन की क्या व्यवस्था है? आगे रवीन्द्र कुमार 'रवि' ने कहा श्रम संहिताएँ मजदूरों के ट्रेड यूनियन बनाने और हड़ताल करने के अधिकार को भी नकार देती हैं। 60 दिन पहले अनिवार्य नोटिस की शर्त और समझौता प्रक्रिया चलने के दौरान हड़ताल पर प्रतिबंध मिलकर हड़ताल को लगभग असंभव कर देते हैं और संघ बनाने की स्वतंत्रता छीन लेते हैं। आगे रवीन्द्र ने जोर देकर कहा कि मोदी सरकार की कॉरपोरेट वर्ग के आगे पूर्ण सरेंडर है और श्रमिकों के विधिक अधिकारों के विरुद्ध है। देश की जनता इसे स्वीकार नहीं करेगी।भाजपा, RSS के नेतृत्व को स्पष्ट करना होगा कि वे कॉरपोरेट के साथ खड़े हैं या भारत की जनता के साथ ? मोदी सरकार ने कॉरपोरेट एकाधिकारों के दबाव में कामकाजी जनता और नौजवान पीढ़ी के साथ धोखा किया है। श्रम संहिताओं ने स्थायी रोजगार और सुरक्षा के अधिकार की जगह नियत अवधि रोजगार को वैध बना दिया है और 1970 के ठेका श्रम उन्मूलन अधिनियम को अप्रभावी कर दिया है। टीयूसीआई के जिला संयोजक हरिशंकर प्रसाद ने कहा कि सरकार ने 8 घंटे के कार्यदिवस जो श्रमिकों का सार्वभौमिक अधिकार है को खत्म कर 12 घंटे के कार्यदिवस को वैध कर दिया है जो भारतीय संविधान के अनुच्छेद 42 में उल्लेखित न्यायपूर्ण और मानवीय कार्य परिस्थितियों के विपरीत है। भाकपा (माले) रेड फ्लैग के जिला कमिटी सदस्य व पूर्व निगम पार्षद रीता रवि ने कहा कि श्रम संहिताएँ मजदूरों को पूँजी के गुलाम बनाने, युवाओं का भविष्य नष्ट करने और बुज़ुर्ग मजदूरों को सेवानिवृत्ति लाभों से वंचित कर दुखद जीवन की ओर धकेल देने के लिए बनाई गई हैं। इन्हें रद्द करना ही होगा। आगे उन्होंने कहा कि श्रम संहिताओं को अंतिम रूप देने से पहले ट्रेड यूनियनों के सुझाव और सिफारिशें बिल्कुल नहीं मानी गईं।आगे उन्होंने कहा कि कामकाजी जनता पर कॉरपोरेट वर्चस्व थोपने का यह बेहद अलोकतांत्रिक तरीका कभी भी स्वीकार्य नहीं है। सभा को अवधेश राम, रसुल मियां, राजू राम, भगेलू राम,महंथ राम,चंदा देवी, आदि नेताओं ने भी संबोधित कियें।
    user_RAVI PANDEY
    RAVI PANDEY
    Majhaulia, Pashchim Champaran•
    4 hrs ago
  • डुमरिया के विधालय में निकासी के बाद भी विकास राशि खर्च नहीं, एक भवन में तीन स्कूल संचालित एक ही कमरे में कक्षा 1 से 5 तक पढ़ाई, किचन शेड का अभाव बैरिया। राजकीय प्राथमिक विद्यालय नया टोला डुमरिया की स्थिति काफी दयनीय बनी हुई है। छह कमरों वाले इस भवन में तीन विद्यालयों और एक आंगनबाड़ी केंद्र का संचालन किया जा रहा है। तीनों स्कूलों को मर्ज कर एक साथ चलाया जा रहा है, जबकि दो विद्यालयों का कार्यालय भी इसी परिसर में संचालित है। कुल 153 छात्र नामांकित हैं और 15 शिक्षक पदस्थापित हैं, लेकिन संसाधनों के अभाव में एक ही कमरे में कक्षा एक से पांच तक की पढ़ाई कराई जा रही है। किचन शेड नहीं होने से मध्यान्ह भोजन व्यवस्था भी प्रभावित है। बुधवार के दोपहर करीब तीन बजे प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी उपेंद्र कुमार सिंह बताया की प्रधानाध्यापक द्वारा विकास मद की राशि की निकासी तो कर ली गई, पर खर्च नहीं की गई। उन्होंने प्रधानाध्यापक अरुण कुमार को 10 दिनों में आय-व्यय विवरण देने का निर्देश दिया है, अन्यथा कार्रवाई की चेतावनी दी है।
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    डुमरिया के विधालय में निकासी के बाद भी विकास राशि खर्च नहीं, एक भवन में तीन स्कूल संचालित
एक ही कमरे में कक्षा 1 से 5 तक पढ़ाई, किचन शेड का अभाव
बैरिया। राजकीय प्राथमिक विद्यालय नया टोला डुमरिया की स्थिति काफी दयनीय बनी हुई है। छह कमरों वाले इस भवन में तीन विद्यालयों और एक आंगनबाड़ी केंद्र का संचालन किया जा रहा है। तीनों स्कूलों को मर्ज कर एक साथ चलाया जा रहा है, जबकि दो विद्यालयों का कार्यालय भी इसी परिसर में संचालित है। कुल 153 छात्र नामांकित हैं और 15 शिक्षक पदस्थापित हैं, लेकिन संसाधनों के अभाव में एक ही कमरे में कक्षा एक से पांच तक की पढ़ाई कराई जा रही है। किचन शेड नहीं होने से मध्यान्ह भोजन व्यवस्था भी प्रभावित है। बुधवार के दोपहर करीब तीन बजे प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी उपेंद्र कुमार सिंह बताया की प्रधानाध्यापक द्वारा विकास मद की राशि की निकासी तो कर ली गई, पर खर्च नहीं की गई। उन्होंने प्रधानाध्यापक अरुण कुमार को 10 दिनों में आय-व्यय विवरण देने का निर्देश दिया है, अन्यथा कार्रवाई की चेतावनी दी है।
    user_Makhan Kumar
    Makhan Kumar
    पत्रकार Bettiah, Pashchim Champaran•
    13 hrs ago
  • इरफान आलम हत्या कांड का प्रशासन ने महज 6 घंटे के भीतर ही किया खुलासा, प्रेम प्रसंग में हुई थी हत्या, दो गिरफ़्तार आज दिनांक 12 फरवरी 2026 को यातायात डीएसपी अतनु दत्ता ने बेतिया मुफस्सिल थाना में प्रेस कॉन्डेंस कर बताया कि 9 फरवरी को सूचना मिली थी कि मुफस्सिल थाना क्षेत्र के मझौलिया स्थित महना नहर के समीप पोखर में एक युवक का शव मिला है। सूचना मिलते ही पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर विशेष टीम का गठन कर जांच शुरू की गई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए महज 6 घंटे के अंदर सफीना खातून को गिरफ्तार कर कर लिया गया घटना स्थल से बरामद चप्पल की पहचान के आधार पर वसी अहमद के गिरफ्तारी हेतु लगातार छापे मारी की जा रही थी वही आज वसी अहमद ने आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि प्रेम प्रसंग को लेकर युवक इरफान आलम की हत्या की गई थी। हत्या के बाद शव को ठिकाने लगाने के उद्देश्य से महना नहर के समीप स्थित पोखरा में फेंक दिया गया था। फिलहाल पुलिस मामले में अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है।
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    इरफान आलम हत्या कांड का प्रशासन ने महज 6 घंटे के भीतर ही किया खुलासा, प्रेम प्रसंग में हुई थी हत्या, दो गिरफ़्तार 
आज दिनांक 12 फरवरी 2026 को यातायात डीएसपी अतनु दत्ता ने बेतिया मुफस्सिल थाना में प्रेस कॉन्डेंस कर बताया कि 9 फरवरी को सूचना मिली थी कि मुफस्सिल थाना क्षेत्र के मझौलिया स्थित महना नहर के समीप पोखर में एक युवक का शव मिला है। सूचना मिलते ही पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर विशेष टीम का गठन कर जांच शुरू की गई।
पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए महज 6 घंटे के अंदर सफीना खातून को गिरफ्तार कर कर लिया गया घटना स्थल से बरामद चप्पल की पहचान के आधार पर वसी अहमद के गिरफ्तारी हेतु लगातार छापे मारी की जा रही थी वही आज वसी अहमद ने आत्मसमर्पण कर दिया।
पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि प्रेम प्रसंग को लेकर युवक इरफान आलम की हत्या की गई थी। हत्या के बाद शव को ठिकाने लगाने के उद्देश्य से महना नहर के समीप स्थित पोखरा में फेंक दिया गया था।
फिलहाल पुलिस मामले में अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है।
    user_Akash Kumar
    Akash Kumar
    TV News Anchor नौतन, पश्चिम चंपारण, बिहार•
    1 hr ago
  • केंद्र सरकार के द्वारा लागू चार श्रम कानून सहित अन्य के विरोध में केंद्रीय श्रम संगठन और स्थानीय सीपीएम ने उच्च पथ को घंटे भर किया जाम।
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    केंद्र सरकार के द्वारा लागू चार श्रम कानून सहित अन्य के विरोध में केंद्रीय श्रम संगठन और स्थानीय सीपीएम ने उच्च पथ को घंटे भर किया जाम।
    user_Shambhu sharan
    Shambhu sharan
    पत्रकार सुगौली, पूर्वी चंपारण, बिहार•
    3 hrs ago
  • बेतिया समाहरणालय गेट पर प्रदर्शन, पुतला दहन; राष्ट्रव्यापी हड़ताल में हजारों श्रमिक-किसान शामिल
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    बेतिया समाहरणालय गेट पर प्रदर्शन, पुतला दहन; राष्ट्रव्यापी हड़ताल में हजारों श्रमिक-किसान शामिल
    user_A9Bharat News
    A9Bharat News
    बेतिया, पश्चिम चंपारण, बिहार•
    24 min ago
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