*नियत अवधि रोजगार को वैध करना, 12 घंटे का कार्यदिवस मजदूरों को गुलाम बनाने, युवाओं के भविष्य को नष्ट करने और बुज़ुर्गों के जीवन को असुरक्षित करने की साज़िश को बेनकाब करें - रवीन्द्र कुमार 'रवि'* ट्रेड यूनियन सेंटर ऑफ इंडिया (टीयूसीआई) के जिला कमिटी की ओर से शहीद स्मारक से एक विशाल जुलूस, चार लेबर कोड के विरोध में निकाला गया। जुलूस समाहरणालय के गेट के पास एक सभा में तब्दील हो गया।सभा स्थल पर चार संहिता काला कानून की प्रतियाँ जलाई गयी। सभा को संबोधित करते हुये टीयूसीआई के केन्द्रीय कमिटी सदस्य सह भाकपा (माले) रेड फ्लैग के राज्य सचिव कॉमरेड रवीन्द्र कुमार 'रवि' ने कहा कि प्रधानमंत्री का यह दावा कि श्रम संहिताएँ सभी श्रमिकों को न्यूनतम वेतन और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करती हैं, पूरी तरह बेबुनियाद है। आगे उन्होंने कहा कि 90% से अधिक मजदूर जो असंगठित क्षेत्र में हैं, श्रम संहिताओं के दायरे से बाहर हैं। अब श्रम संहिताओं ने संगठित क्षेत्र के 90% मजदूरों को भी कानूनी संरक्षण से बाहर कर दिया है। इंडस्ट्रियल रिलेशन्स कोड अब 300 से कम श्रमिकों वाले यूनिट्स को छंटनी, सेवा समाप्ति और बंदी के लिए पहले से सरकारी अनुमति लेने से सामान्यतः मुक्त कर देता है। जबकि पहले यह सीमा 100 श्रमिक थी। इसी तरह 20 या 40 से कम श्रमिकों वाले (बिजली उपयोग के आधार पर) उद्योग व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थितियाँ (OSHWC) कोड के कई प्रावधानों एवं कारखाने के रूप में पंजीकरण से मुक्त हैं, जो पहले 10 और 20 थें। वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण (ASI) 2021–22 के आंकड़ों के अनुसार 100 से कम श्रमिकों को रोजगार देने वाले कारखाने सभी कारखानों का 79.2% हिस्सा हैं।असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन या सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कोई प्रवर्तन तंत्र मौजूद नहीं है। केंद्र सरकार ट्रेड यूनियनों की ₹26,000 प्रति माह न्यूनतम वेतन की मांग स्वीकार करने को तैयार नहीं है। टीयूसीआई यह मांग करता है कि सरकार स्पष्ट करे कि वर्तमान में न्यूनतम वेतन क्या है ? कितने श्रमिकों को मिलता है, और देश भर में इसके प्रवर्तन की क्या व्यवस्था है? आगे रवीन्द्र कुमार 'रवि' ने कहा श्रम संहिताएँ मजदूरों के ट्रेड यूनियन बनाने और हड़ताल करने के अधिकार को भी नकार देती हैं। 60 दिन पहले अनिवार्य नोटिस की शर्त और समझौता प्रक्रिया चलने के दौरान हड़ताल पर प्रतिबंध मिलकर हड़ताल को लगभग असंभव कर देते हैं और संघ बनाने की स्वतंत्रता छीन लेते हैं। आगे रवीन्द्र ने जोर देकर कहा कि मोदी सरकार की कॉरपोरेट वर्ग के आगे पूर्ण सरेंडर है और श्रमिकों के विधिक अधिकारों के विरुद्ध है। देश की जनता इसे स्वीकार नहीं करेगी।भाजपा, RSS के नेतृत्व को स्पष्ट करना होगा कि वे कॉरपोरेट के साथ खड़े हैं या भारत की जनता के साथ ? मोदी सरकार ने कॉरपोरेट एकाधिकारों के दबाव में कामकाजी जनता और नौजवान पीढ़ी के साथ धोखा किया है। श्रम संहिताओं ने स्थायी रोजगार और सुरक्षा के अधिकार की जगह नियत अवधि रोजगार को वैध बना दिया है और 1970 के ठेका श्रम उन्मूलन अधिनियम को अप्रभावी कर दिया है। टीयूसीआई के जिला संयोजक हरिशंकर प्रसाद ने कहा कि सरकार ने 8 घंटे के कार्यदिवस जो श्रमिकों का सार्वभौमिक अधिकार है को खत्म कर 12 घंटे के कार्यदिवस को वैध कर दिया है जो भारतीय संविधान के अनुच्छेद 42 में उल्लेखित न्यायपूर्ण और मानवीय कार्य परिस्थितियों के विपरीत है। भाकपा (माले) रेड फ्लैग के जिला कमिटी सदस्य व पूर्व निगम पार्षद रीता रवि ने कहा कि श्रम संहिताएँ मजदूरों को पूँजी के गुलाम बनाने, युवाओं का भविष्य नष्ट करने और बुज़ुर्ग मजदूरों को सेवानिवृत्ति लाभों से वंचित कर दुखद जीवन की ओर धकेल देने के लिए बनाई गई हैं। इन्हें रद्द करना ही होगा। आगे उन्होंने कहा कि श्रम संहिताओं को अंतिम रूप देने से पहले ट्रेड यूनियनों के सुझाव और सिफारिशें बिल्कुल नहीं मानी गईं।आगे उन्होंने कहा कि कामकाजी जनता पर कॉरपोरेट वर्चस्व थोपने का यह बेहद अलोकतांत्रिक तरीका कभी भी स्वीकार्य नहीं है। सभा को अवधेश राम, रसुल मियां, राजू राम, भगेलू राम,महंथ राम,चंदा देवी, आदि नेताओं ने भी संबोधित कियें।
*नियत अवधि रोजगार को वैध करना, 12 घंटे का कार्यदिवस मजदूरों को गुलाम बनाने, युवाओं के भविष्य को नष्ट करने और बुज़ुर्गों के जीवन को असुरक्षित करने की साज़िश को बेनकाब करें - रवीन्द्र कुमार 'रवि'* ट्रेड यूनियन सेंटर ऑफ इंडिया (टीयूसीआई) के जिला कमिटी की ओर से शहीद स्मारक से एक विशाल जुलूस, चार लेबर कोड के विरोध में निकाला गया। जुलूस समाहरणालय के गेट के पास एक सभा में तब्दील हो गया।सभा स्थल पर चार संहिता काला कानून की प्रतियाँ जलाई गयी। सभा को संबोधित करते हुये टीयूसीआई के केन्द्रीय कमिटी सदस्य सह भाकपा (माले) रेड फ्लैग के राज्य सचिव कॉमरेड रवीन्द्र कुमार 'रवि' ने कहा कि प्रधानमंत्री का यह दावा कि श्रम संहिताएँ सभी श्रमिकों को न्यूनतम वेतन और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करती हैं, पूरी तरह बेबुनियाद है। आगे उन्होंने कहा कि 90% से अधिक मजदूर जो असंगठित क्षेत्र में हैं, श्रम संहिताओं के दायरे से बाहर हैं। अब श्रम संहिताओं ने संगठित क्षेत्र के 90% मजदूरों को भी कानूनी संरक्षण से बाहर कर दिया है। इंडस्ट्रियल रिलेशन्स कोड अब 300 से कम श्रमिकों वाले यूनिट्स को छंटनी, सेवा समाप्ति और बंदी के लिए पहले से सरकारी अनुमति लेने से सामान्यतः मुक्त कर देता है। जबकि पहले यह सीमा 100 श्रमिक थी। इसी तरह 20 या 40 से कम श्रमिकों वाले (बिजली उपयोग के आधार पर) उद्योग
व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थितियाँ (OSHWC) कोड के कई प्रावधानों एवं कारखाने के रूप में पंजीकरण से मुक्त हैं, जो पहले 10 और 20 थें। वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण (ASI) 2021–22 के आंकड़ों के अनुसार 100 से कम श्रमिकों को रोजगार देने वाले कारखाने सभी कारखानों का 79.2% हिस्सा हैं।असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन या सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कोई प्रवर्तन तंत्र मौजूद नहीं है। केंद्र सरकार ट्रेड यूनियनों की ₹26,000 प्रति माह न्यूनतम वेतन की मांग स्वीकार करने को तैयार नहीं है। टीयूसीआई यह मांग करता है कि सरकार स्पष्ट करे कि वर्तमान में न्यूनतम वेतन क्या है ? कितने श्रमिकों को मिलता है, और देश भर में इसके प्रवर्तन की क्या व्यवस्था है? आगे रवीन्द्र कुमार 'रवि' ने कहा श्रम संहिताएँ मजदूरों के ट्रेड यूनियन बनाने और हड़ताल करने के अधिकार को भी नकार देती हैं। 60 दिन पहले अनिवार्य नोटिस की शर्त और समझौता प्रक्रिया चलने के दौरान हड़ताल पर प्रतिबंध मिलकर हड़ताल को लगभग असंभव कर देते हैं और संघ बनाने की स्वतंत्रता छीन लेते हैं। आगे रवीन्द्र ने जोर देकर कहा कि मोदी सरकार की कॉरपोरेट वर्ग के आगे पूर्ण सरेंडर है और श्रमिकों के विधिक अधिकारों के विरुद्ध है। देश की जनता इसे स्वीकार नहीं करेगी।भाजपा, RSS के नेतृत्व को स्पष्ट करना होगा कि वे कॉरपोरेट के साथ खड़े हैं
या भारत की जनता के साथ ? मोदी सरकार ने कॉरपोरेट एकाधिकारों के दबाव में कामकाजी जनता और नौजवान पीढ़ी के साथ धोखा किया है। श्रम संहिताओं ने स्थायी रोजगार और सुरक्षा के अधिकार की जगह नियत अवधि रोजगार को वैध बना दिया है और 1970 के ठेका श्रम उन्मूलन अधिनियम को अप्रभावी कर दिया है। टीयूसीआई के जिला संयोजक हरिशंकर प्रसाद ने कहा कि सरकार ने 8 घंटे के कार्यदिवस जो श्रमिकों का सार्वभौमिक अधिकार है को खत्म कर 12 घंटे के कार्यदिवस को वैध कर दिया है जो भारतीय संविधान के अनुच्छेद 42 में उल्लेखित न्यायपूर्ण और मानवीय कार्य परिस्थितियों के विपरीत है। भाकपा (माले) रेड फ्लैग के जिला कमिटी सदस्य व पूर्व निगम पार्षद रीता रवि ने कहा कि श्रम संहिताएँ मजदूरों को पूँजी के गुलाम बनाने, युवाओं का भविष्य नष्ट करने और बुज़ुर्ग मजदूरों को सेवानिवृत्ति लाभों से वंचित कर दुखद जीवन की ओर धकेल देने के लिए बनाई गई हैं। इन्हें रद्द करना ही होगा। आगे उन्होंने कहा कि श्रम संहिताओं को अंतिम रूप देने से पहले ट्रेड यूनियनों के सुझाव और सिफारिशें बिल्कुल नहीं मानी गईं।आगे उन्होंने कहा कि कामकाजी जनता पर कॉरपोरेट वर्चस्व थोपने का यह बेहद अलोकतांत्रिक तरीका कभी भी स्वीकार्य नहीं है। सभा को अवधेश राम, रसुल मियां, राजू राम, भगेलू राम,महंथ राम,चंदा देवी, आदि नेताओं ने भी संबोधित कियें।
- Post by Manish Kumar Social Worker1
- बलिया। एकात्म मानववाद के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर जनपद में “समर्पण सप्ताह” के तहत कार्यक्रम आयोजित1
- ट्रेड यूनियन सेंटर ऑफ इंडिया (टीयूसीआई) के जिला कमिटी की ओर से शहीद स्मारक से एक विशाल जुलूस, चार लेबर कोड के विरोध में निकाला गया। जुलूस समाहरणालय के गेट के पास एक सभा में तब्दील हो गया।सभा स्थल पर चार संहिता काला कानून की प्रतियाँ जलाई गयी। सभा को संबोधित करते हुये टीयूसीआई के केन्द्रीय कमिटी सदस्य सह भाकपा (माले) रेड फ्लैग के राज्य सचिव कॉमरेड रवीन्द्र कुमार 'रवि' ने कहा कि प्रधानमंत्री का यह दावा कि श्रम संहिताएँ सभी श्रमिकों को न्यूनतम वेतन और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करती हैं, पूरी तरह बेबुनियाद है। आगे उन्होंने कहा कि 90% से अधिक मजदूर जो असंगठित क्षेत्र में हैं, श्रम संहिताओं के दायरे से बाहर हैं। अब श्रम संहिताओं ने संगठित क्षेत्र के 90% मजदूरों को भी कानूनी संरक्षण से बाहर कर दिया है। इंडस्ट्रियल रिलेशन्स कोड अब 300 से कम श्रमिकों वाले यूनिट्स को छंटनी, सेवा समाप्ति और बंदी के लिए पहले से सरकारी अनुमति लेने से सामान्यतः मुक्त कर देता है। जबकि पहले यह सीमा 100 श्रमिक थी। इसी तरह 20 या 40 से कम श्रमिकों वाले (बिजली उपयोग के आधार पर) उद्योग व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थितियाँ (OSHWC) कोड के कई प्रावधानों एवं कारखाने के रूप में पंजीकरण से मुक्त हैं, जो पहले 10 और 20 थें। वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण (ASI) 2021–22 के आंकड़ों के अनुसार 100 से कम श्रमिकों को रोजगार देने वाले कारखाने सभी कारखानों का 79.2% हिस्सा हैं।असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन या सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कोई प्रवर्तन तंत्र मौजूद नहीं है। केंद्र सरकार ट्रेड यूनियनों की ₹26,000 प्रति माह न्यूनतम वेतन की मांग स्वीकार करने को तैयार नहीं है। टीयूसीआई यह मांग करता है कि सरकार स्पष्ट करे कि वर्तमान में न्यूनतम वेतन क्या है ? कितने श्रमिकों को मिलता है, और देश भर में इसके प्रवर्तन की क्या व्यवस्था है? आगे रवीन्द्र कुमार 'रवि' ने कहा श्रम संहिताएँ मजदूरों के ट्रेड यूनियन बनाने और हड़ताल करने के अधिकार को भी नकार देती हैं। 60 दिन पहले अनिवार्य नोटिस की शर्त और समझौता प्रक्रिया चलने के दौरान हड़ताल पर प्रतिबंध मिलकर हड़ताल को लगभग असंभव कर देते हैं और संघ बनाने की स्वतंत्रता छीन लेते हैं। आगे रवीन्द्र ने जोर देकर कहा कि मोदी सरकार की कॉरपोरेट वर्ग के आगे पूर्ण सरेंडर है और श्रमिकों के विधिक अधिकारों के विरुद्ध है। देश की जनता इसे स्वीकार नहीं करेगी।भाजपा, RSS के नेतृत्व को स्पष्ट करना होगा कि वे कॉरपोरेट के साथ खड़े हैं या भारत की जनता के साथ ? मोदी सरकार ने कॉरपोरेट एकाधिकारों के दबाव में कामकाजी जनता और नौजवान पीढ़ी के साथ धोखा किया है। श्रम संहिताओं ने स्थायी रोजगार और सुरक्षा के अधिकार की जगह नियत अवधि रोजगार को वैध बना दिया है और 1970 के ठेका श्रम उन्मूलन अधिनियम को अप्रभावी कर दिया है। टीयूसीआई के जिला संयोजक हरिशंकर प्रसाद ने कहा कि सरकार ने 8 घंटे के कार्यदिवस जो श्रमिकों का सार्वभौमिक अधिकार है को खत्म कर 12 घंटे के कार्यदिवस को वैध कर दिया है जो भारतीय संविधान के अनुच्छेद 42 में उल्लेखित न्यायपूर्ण और मानवीय कार्य परिस्थितियों के विपरीत है। भाकपा (माले) रेड फ्लैग के जिला कमिटी सदस्य व पूर्व निगम पार्षद रीता रवि ने कहा कि श्रम संहिताएँ मजदूरों को पूँजी के गुलाम बनाने, युवाओं का भविष्य नष्ट करने और बुज़ुर्ग मजदूरों को सेवानिवृत्ति लाभों से वंचित कर दुखद जीवन की ओर धकेल देने के लिए बनाई गई हैं। इन्हें रद्द करना ही होगा। आगे उन्होंने कहा कि श्रम संहिताओं को अंतिम रूप देने से पहले ट्रेड यूनियनों के सुझाव और सिफारिशें बिल्कुल नहीं मानी गईं।आगे उन्होंने कहा कि कामकाजी जनता पर कॉरपोरेट वर्चस्व थोपने का यह बेहद अलोकतांत्रिक तरीका कभी भी स्वीकार्य नहीं है। सभा को अवधेश राम, रसुल मियां, राजू राम, भगेलू राम,महंथ राम,चंदा देवी, आदि नेताओं ने भी संबोधित कियें।3
- डुमरिया के विधालय में निकासी के बाद भी विकास राशि खर्च नहीं, एक भवन में तीन स्कूल संचालित एक ही कमरे में कक्षा 1 से 5 तक पढ़ाई, किचन शेड का अभाव बैरिया। राजकीय प्राथमिक विद्यालय नया टोला डुमरिया की स्थिति काफी दयनीय बनी हुई है। छह कमरों वाले इस भवन में तीन विद्यालयों और एक आंगनबाड़ी केंद्र का संचालन किया जा रहा है। तीनों स्कूलों को मर्ज कर एक साथ चलाया जा रहा है, जबकि दो विद्यालयों का कार्यालय भी इसी परिसर में संचालित है। कुल 153 छात्र नामांकित हैं और 15 शिक्षक पदस्थापित हैं, लेकिन संसाधनों के अभाव में एक ही कमरे में कक्षा एक से पांच तक की पढ़ाई कराई जा रही है। किचन शेड नहीं होने से मध्यान्ह भोजन व्यवस्था भी प्रभावित है। बुधवार के दोपहर करीब तीन बजे प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी उपेंद्र कुमार सिंह बताया की प्रधानाध्यापक द्वारा विकास मद की राशि की निकासी तो कर ली गई, पर खर्च नहीं की गई। उन्होंने प्रधानाध्यापक अरुण कुमार को 10 दिनों में आय-व्यय विवरण देने का निर्देश दिया है, अन्यथा कार्रवाई की चेतावनी दी है।1
- वित्तीय साक्षरता सप्ताह 2026 (9 फरवरी से 13 फरवरी) के अवसर पर अग्रणी जिला प्रबंधक, पश्चिम चम्पारण के नेतृत्व में जिले के विभिन्न स्थानों पर वित्तीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। 11.02.2026.1
- Post by Sadhana national News1
- इरफान आलम हत्या कांड का प्रशासन ने महज 6 घंटे के भीतर ही किया खुलासा, प्रेम प्रसंग में हुई थी हत्या, दो गिरफ़्तार आज दिनांक 12 फरवरी 2026 को यातायात डीएसपी अतनु दत्ता ने बेतिया मुफस्सिल थाना में प्रेस कॉन्डेंस कर बताया कि 9 फरवरी को सूचना मिली थी कि मुफस्सिल थाना क्षेत्र के मझौलिया स्थित महना नहर के समीप पोखर में एक युवक का शव मिला है। सूचना मिलते ही पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर विशेष टीम का गठन कर जांच शुरू की गई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए महज 6 घंटे के अंदर सफीना खातून को गिरफ्तार कर कर लिया गया घटना स्थल से बरामद चप्पल की पहचान के आधार पर वसी अहमद के गिरफ्तारी हेतु लगातार छापे मारी की जा रही थी वही आज वसी अहमद ने आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि प्रेम प्रसंग को लेकर युवक इरफान आलम की हत्या की गई थी। हत्या के बाद शव को ठिकाने लगाने के उद्देश्य से महना नहर के समीप स्थित पोखरा में फेंक दिया गया था। फिलहाल पुलिस मामले में अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है।1
- *फाइलेरिया उन्मूलन हेतु मेगा कैंप का शुभारंभ – 8 लाख लोगों को दवा खिलाने का लक्ष्य* बेतिया।आज फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत बिहार के माननीय स्वास्थ्य मंत्री श्री मंगल पांडेय जी द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्यव्यापी फाइलेरिया मेगा कैंप का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर पश्चिमी चंपारण जिले में प्रखंड बेतिया एवं चनपटिया के आंगनवाड़ी केंद्रों पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिला पदाधिकारी महोदय द्वारा बेतिया नगर क्षेत्र के वार्ड संख्या–32, मंशा टोला स्थित आंगनवाड़ी केंद्र संख्या–45 पर स्वयं उपस्थित होकर फाइलेरिया रोधी दवा डी.ई.सी. (Diethylcarbamazine) एवं अल्बेंडाज़ोल का सेवन कर तथा अन्य लाभुकों को दवा खिलाकर मेगा कैंप का विधिवत शुभारंभ किया गया। इस पहल के माध्यम से आमजन को यह संदेश दिया गया कि फाइलेरिया से बचाव हेतु निर्धारित दवा का सेवन पूर्णतः सुरक्षित एवं आवश्यक है। जिले में आयोजित इस मेगा अभियान के अंतर्गत कुल 4100 आंगनवाड़ी केंद्रों पर विशेष कैंप लगाए गए हैं। अभियान को सफलतापूर्वक क्रियान्वित करने हेतु 2200 ड्रग एडमिनिस्ट्रेटर्स की प्रतिनियुक्ति की गई है। जिले की लगभग 8 लाख आबादी को फाइलेरिया रोधी दवा खिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह व्यापक जनभागीदारी आधारित प्रयास गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज किए जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसमें पश्चिमी चंपारण जिले की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है। जिला पदाधिकारी ने आमजन से अपील करते हुए कहा कि फाइलेरिया एक गंभीर परंतु रोके जा सकने वाला रोग है। सभी पात्र नागरिक निर्धारित तिथि पर दवा का सेवन अवश्य करें तथा अपने परिवार एवं आसपास के लोगों को भी दवा लेने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि दवा स्वास्थ्यकर्मियों/ड्रग एडमिनिस्ट्रेटर्स की निगरानी में ही सेवन की जानी है। मेगा कैंप के अवसर पर सिविल सर्जन श्री विजय कुमार, अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी श्री रमेश चंद्रा, एनसीडीओ श्री मुर्तजा अंसारी, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (आईसीडीएस) श्रीमती कविता रानी, जीविका डीपीएम श्री निखिल कुमार, डीवीबीडीसीओ श्री हरेंद्र कुमार, पिरामल फाउंडेशन से डीएम राजू सिंह, एसपीएल दिव्यांक श्रीवास्तव, एलएस दीपमाला तथा गांधी फेलो दुर्गा एवं नंदनी सहित स्वास्थ्य, आईसीडीएस एवं सहयोगी संस्थाओं के अन्य पदाधिकारी एवं कर्मी सक्रिय रूप से उपस्थित रहे। जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा संयुक्त रूप से संचालित यह अभियान जनस्वास्थ्य संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसका उद्देश्य फाइलेरिया उन्मूलन कर जिले को रोगमुक्त बनाना है।1