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विधान सभा लंभुआ से शिक्षक श्यामलाल निषाद ने एक गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि एक ऐसा गिरोह, जो पहले 'टोटी चोरी' जैसे तुच्छ आरोप लगाता था, उसने अब राम मंदिर के दान-दक्षिणा को भी लूट लिया है।

11 hrs ago
user_Umesh Nishad
Umesh Nishad
Local News Reporter सुल्तानपुर, सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश•
11 hrs ago

विधान सभा लंभुआ से शिक्षक श्यामलाल निषाद ने एक गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि एक ऐसा गिरोह, जो पहले 'टोटी चोरी' जैसे तुच्छ आरोप लगाता था, उसने अब राम मंदिर के दान-दक्षिणा को भी लूट लिया है।

More news from उत्तर प्रदेश and nearby areas
  • उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में एक महिला सप्लाई इंस्पेक्टर ने एक पत्रकार को सीधे तौर पर 'दलाल' कहा, जिस पर पत्रकार ने तुरंत आपत्ति जताई। पत्रकार ने इंस्पेक्टर से पूछा कि उन्होंने कितनी बार उनसे 'दलाली' खाई है और इसका जवाब देने की मांग की। इस पूरी घटना के दौरान, वहीं कुर्सी पर बैठे SDM साहब मंद-मंद मुस्कुराते हुए नजर आए।
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    उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में एक महिला सप्लाई इंस्पेक्टर ने एक पत्रकार को सीधे तौर पर 'दलाल' कहा, जिस पर पत्रकार ने तुरंत आपत्ति जताई। पत्रकार ने इंस्पेक्टर से पूछा कि उन्होंने कितनी बार उनसे 'दलाली' खाई है और इसका जवाब देने की मांग की। इस पूरी घटना के दौरान, वहीं कुर्सी पर बैठे SDM साहब मंद-मंद मुस्कुराते हुए नजर आए।
    user_Lambhua express
    Lambhua express
    सुल्तानपुर, सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
  • उत्तर प्रदेश पुलिस का प्रबंध तंत्र पूरी तरह से भ्रष्टाचार में लिप्त है, जिसका एक स्पष्ट उदाहरण लखनऊ में देखने को मिला है। प्रदेश की राजधानी लखनऊ में ट्रैफिक विभाग से लेकर पुलिस विभाग तक भ्रष्टाचार बेरोकटोक जारी है, जहाँ हरियाणा की एक गाड़ी को वसूली का शिकार बनाया गया। वीडियो में देखा जा सकता है कि लखनऊ के सबसे व्यस्त माने जाने वाले हजरतगंज सचिवालय चौराहे पर ट्रैफिक सिपाही वसूली करने में व्यस्त थे। आरोप है कि उनकी इसी व्यस्तता के चलते उन्होंने चौराहे को पूरी तरह से लावारिस छोड़ दिया। यही नहीं, यह चौराहा एक तरफा होने के बावजूद दोनों तरफ से गाड़ियों की आवाजाही जारी थी, जिससे अव्यवस्था और भी बढ़ गई।
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    उत्तर प्रदेश पुलिस का प्रबंध तंत्र पूरी तरह से भ्रष्टाचार में लिप्त है, जिसका एक स्पष्ट उदाहरण लखनऊ में देखने को मिला है। प्रदेश की राजधानी लखनऊ में ट्रैफिक विभाग से लेकर पुलिस विभाग तक भ्रष्टाचार बेरोकटोक जारी है, जहाँ हरियाणा की एक गाड़ी को वसूली का शिकार बनाया गया।

वीडियो में देखा जा सकता है कि लखनऊ के सबसे व्यस्त माने जाने वाले हजरतगंज सचिवालय चौराहे पर ट्रैफिक सिपाही वसूली करने में व्यस्त थे। आरोप है कि उनकी इसी व्यस्तता के चलते उन्होंने चौराहे को पूरी तरह से लावारिस छोड़ दिया। यही नहीं, यह चौराहा एक तरफा होने के बावजूद दोनों तरफ से गाड़ियों की आवाजाही जारी थी, जिससे अव्यवस्था और भी बढ़ गई।
    user_Santosh Kumar yadav
    Santosh Kumar yadav
    सुल्तानपुर, सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश•
    11 hrs ago
  • विधान सभा लंभुआ से शिक्षक श्यामलाल निषाद ने एक गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि एक ऐसा गिरोह, जो पहले 'टोटी चोरी' जैसे तुच्छ आरोप लगाता था, उसने अब राम मंदिर के दान-दक्षिणा को भी लूट लिया है।
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    विधान सभा लंभुआ से शिक्षक श्यामलाल निषाद ने एक गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि एक ऐसा गिरोह, जो पहले 'टोटी चोरी' जैसे तुच्छ आरोप लगाता था, उसने अब राम मंदिर के दान-दक्षिणा को भी लूट लिया है।
    user_Umesh Nishad
    Umesh Nishad
    Local News Reporter सुल्तानपुर, सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश•
    11 hrs ago
  • उत्तर प्रदेश के आगरा में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पार्षद किशन नायक ने नाले में खड़े होकर अपना जन्मदिन मनाया। यह अनोखा प्रदर्शन नालों की अब तक सफाई न होने के विरोध में किया गया है, जबकि बारिश का मौसम नजदीक है। पार्षद नायक ने दावा किया कि उन्होंने नाले की सफाई के संबंध में 12 बार शिकायत की थी, लेकिन उनकी शिकायतों पर कोई सुनवाई नहीं हुई।
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    उत्तर प्रदेश के आगरा में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पार्षद किशन नायक ने नाले में खड़े होकर अपना जन्मदिन मनाया। यह अनोखा प्रदर्शन नालों की अब तक सफाई न होने के विरोध में किया गया है, जबकि बारिश का मौसम नजदीक है। पार्षद नायक ने दावा किया कि उन्होंने नाले की सफाई के संबंध में 12 बार शिकायत की थी, लेकिन उनकी शिकायतों पर कोई सुनवाई नहीं हुई।
    user_Amarjeet Panday
    Amarjeet Panday
    Security Guard सुल्तानपुर, सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश•
    12 hrs ago
  • सुल्तानपुर जिले के कुड़ेभार ब्लॉक स्थित दिवाकर पट्टी ग्राम सभा के प्रधान सुनील मोरिया पर सूचना के अधिकार (RTI) अधिनियम के उल्लंघन का गंभीर आरोप लगा है। इस मामले में, ब्लॉक से संबंधित सभी अधिकारियों से निवेदन किया गया है कि वे संज्ञान लें। विशेष रूप से, सुल्तानपुर के जिलाधिकारी (DM) इंद्रजीत सिंह से इस प्रकरण की जाँच कर उचित कार्रवाई करने की कृपा करने की अपील की गई है।
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    सुल्तानपुर जिले के कुड़ेभार ब्लॉक स्थित दिवाकर पट्टी ग्राम सभा के प्रधान सुनील मोरिया पर सूचना के अधिकार (RTI) अधिनियम के उल्लंघन का गंभीर आरोप लगा है। इस मामले में, ब्लॉक से संबंधित सभी अधिकारियों से निवेदन किया गया है कि वे संज्ञान लें। विशेष रूप से, सुल्तानपुर के जिलाधिकारी (DM) इंद्रजीत सिंह से इस प्रकरण की जाँच कर उचित कार्रवाई करने की कृपा करने की अपील की गई है।
    user_Suneel Kuamr
    Suneel Kuamr
    Farmer सुल्तानपुर, सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश•
    14 hrs ago
  • उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहाँ परिवार द्वारा मृत मानकर अंतिम संस्कार और तेरहवीं कर दिए जाने के ठीक बाद, एक व्यक्ति जिंदा अपने घर लौट आया। गिरधर सिंह बिष्ट नामक इस व्यक्ति को पुलिस ने 16 मई को शांतिभंग करने के आरोप में जेल भेजा था। 21 मई को गिरधर सिंह बिष्ट जमानत पर जेल से बाहर आ गए, लेकिन इसके बाद वे अपने घर नहीं पहुँचे। परिवार ने उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट थाने में दर्ज कराई थी। लगभग एक महीने बाद, 13 जून को गंगनहर में एक अज्ञात शव मिला, जिसकी पहचान परिवार ने गिरधारी बिष्ट के रूप में की। इसके बाद, परिवार ने मृत मानकर उस शव का अंतिम संस्कार कर दिया और 24 जून को उनकी तेरहवीं की रस्म भी पूरी कर दी। लेकिन, इस पूरी घटना में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब 25 जून की सुबह गिरधारी सिंह बिष्ट खुद जिंदा अपने घर वापस आ गए। इस अविश्वसनीय घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनमें प्रमुख है कि परिवार ने लाश को पहचानने में इतनी बड़ी भूल कैसे की, और यदि वह लाश गिरधारी बिष्ट की नहीं थी, तो आखिर वह शव किसका था।
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    उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहाँ परिवार द्वारा मृत मानकर अंतिम संस्कार और तेरहवीं कर दिए जाने के ठीक बाद, एक व्यक्ति जिंदा अपने घर लौट आया। गिरधर सिंह बिष्ट नामक इस व्यक्ति को पुलिस ने 16 मई को शांतिभंग करने के आरोप में जेल भेजा था।

21 मई को गिरधर सिंह बिष्ट जमानत पर जेल से बाहर आ गए, लेकिन इसके बाद वे अपने घर नहीं पहुँचे। परिवार ने उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट थाने में दर्ज कराई थी। लगभग एक महीने बाद, 13 जून को गंगनहर में एक अज्ञात शव मिला, जिसकी पहचान परिवार ने गिरधारी बिष्ट के रूप में की। इसके बाद, परिवार ने मृत मानकर उस शव का अंतिम संस्कार कर दिया और 24 जून को उनकी तेरहवीं की रस्म भी पूरी कर दी।

लेकिन, इस पूरी घटना में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब 25 जून की सुबह गिरधारी सिंह बिष्ट खुद जिंदा अपने घर वापस आ गए। इस अविश्वसनीय घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनमें प्रमुख है कि परिवार ने लाश को पहचानने में इतनी बड़ी भूल कैसे की, और यदि वह लाश गिरधारी बिष्ट की नहीं थी, तो आखिर वह शव किसका था।
    user_Amarjeet Panday
    Amarjeet Panday
    Security Guard सुल्तानपुर, सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश•
    12 hrs ago
  • जनपद सुलतानपुर के विभिन्न क्षेत्रों में मुस्लिम समुदाय द्वारा मुहर्रम का पर्व पूरी अकीदत और गमगीन माहौल में मनाया गया। इस दौरान लोगों ने अपनी धार्मिक परंपरा और अटूट आस्था के अनुसार पारंपरिक जुलूस निकाले, जिससे पूरा माहौल "या अली" के नारों से गूंज उठा। शोक व्यक्त करने के लिए, कुछ स्थानों पर प्रतिभागियों ने अपनी आस्था के तहत स्वयं को लोहे की जंजीरों और धारदार वस्तुओं से चोट पहुँचाकर मातम भी मनाया। मुहर्रम इस्लामिक कैलेंडर (हिजरी संवत) का पहला महीना है और इस्लाम धर्म में इसे सबसे पवित्र महीनों में से एक माना जाता है। शिया और सुन्नी दोनों ही समुदायों के लिए इसका बेहद खास ऐतिहासिक महत्व है, हालांकि इसे याद करने और मनाने के तरीके अलग-अलग हैं। इस महीने के इतिहास का सबसे प्रमुख कारण इमाम हुसैन (अलैहिस्सलाम) और उनके 72 साथियों की महान शहादत है, जो सन 61 हिजरी (लगभग 680 ईस्वी) में इराक के ऐतिहासिक 'कर्बला' नामक स्थान पर हुई थी। यह पूरी परंपरा कर्बला की लड़ाई में हुई दर्दनाक घटनाओं और इमाम हुसैन अली की शहादत की याद से गहराई से जुड़ी हुई है, जिसे मुस्लिम समुदायों द्वारा शोक और स्मरण के रूप में मनाया जाता है। मुहर्रम के जुलूस और मातम के दौरान किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोकने के लिए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। पूरे जनपद में सुरक्षा के कड़े और पुख्ता इंतजाम किए गए थे, जिसके परिणामस्वरूप शांति व्यवस्था बनी रही।
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    जनपद सुलतानपुर के विभिन्न क्षेत्रों में मुस्लिम समुदाय द्वारा मुहर्रम का पर्व पूरी अकीदत और गमगीन माहौल में मनाया गया। इस दौरान लोगों ने अपनी धार्मिक परंपरा और अटूट आस्था के अनुसार पारंपरिक जुलूस निकाले, जिससे पूरा माहौल "या अली" के नारों से गूंज उठा। शोक व्यक्त करने के लिए, कुछ स्थानों पर प्रतिभागियों ने अपनी आस्था के तहत स्वयं को लोहे की जंजीरों और धारदार वस्तुओं से चोट पहुँचाकर मातम भी मनाया।

मुहर्रम इस्लामिक कैलेंडर (हिजरी संवत) का पहला महीना है और इस्लाम धर्म में इसे सबसे पवित्र महीनों में से एक माना जाता है। शिया और सुन्नी दोनों ही समुदायों के लिए इसका बेहद खास ऐतिहासिक महत्व है, हालांकि इसे याद करने और मनाने के तरीके अलग-अलग हैं। इस महीने के इतिहास का सबसे प्रमुख कारण इमाम हुसैन (अलैहिस्सलाम) और उनके 72 साथियों की महान शहादत है, जो सन 61 हिजरी (लगभग 680 ईस्वी) में इराक के ऐतिहासिक 'कर्बला' नामक स्थान पर हुई थी। यह पूरी परंपरा कर्बला की लड़ाई में हुई दर्दनाक घटनाओं और इमाम हुसैन अली की शहादत की याद से गहराई से जुड़ी हुई है, जिसे मुस्लिम समुदायों द्वारा शोक और स्मरण के रूप में मनाया जाता है।

मुहर्रम के जुलूस और मातम के दौरान किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोकने के लिए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। पूरे जनपद में सुरक्षा के कड़े और पुख्ता इंतजाम किए गए थे, जिसके परिणामस्वरूप शांति व्यवस्था बनी रही।
    user_पत्रकार पांडे
    पत्रकार पांडे
    Comedy club जयसिंहपुर, सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश•
    11 hrs ago
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