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उत्तर प्रदेश पुलिस का प्रबंध तंत्र पूरी तरह से भ्रष्टाचार में लिप्त है, जिसका एक स्पष्ट उदाहरण लखनऊ में देखने को मिला है। प्रदेश की राजधानी लखनऊ में ट्रैफिक विभाग से लेकर पुलिस विभाग तक भ्रष्टाचार बेरोकटोक जारी है, जहाँ हरियाणा की एक गाड़ी को वसूली का शिकार बनाया गया। वीडियो में देखा जा सकता है कि लखनऊ के सबसे व्यस्त माने जाने वाले हजरतगंज सचिवालय चौराहे पर ट्रैफिक सिपाही वसूली करने में व्यस्त थे। आरोप है कि उनकी इसी व्यस्तता के चलते उन्होंने चौराहे को पूरी तरह से लावारिस छोड़ दिया। यही नहीं, यह चौराहा एक तरफा होने के बावजूद दोनों तरफ से गाड़ियों की आवाजाही जारी थी, जिससे अव्यवस्था और भी बढ़ गई।
Santosh Kumar yadav
उत्तर प्रदेश पुलिस का प्रबंध तंत्र पूरी तरह से भ्रष्टाचार में लिप्त है, जिसका एक स्पष्ट उदाहरण लखनऊ में देखने को मिला है। प्रदेश की राजधानी लखनऊ में ट्रैफिक विभाग से लेकर पुलिस विभाग तक भ्रष्टाचार बेरोकटोक जारी है, जहाँ हरियाणा की एक गाड़ी को वसूली का शिकार बनाया गया। वीडियो में देखा जा सकता है कि लखनऊ के सबसे व्यस्त माने जाने वाले हजरतगंज सचिवालय चौराहे पर ट्रैफिक सिपाही वसूली करने में व्यस्त थे। आरोप है कि उनकी इसी व्यस्तता के चलते उन्होंने चौराहे को पूरी तरह से लावारिस छोड़ दिया। यही नहीं, यह चौराहा एक तरफा होने के बावजूद दोनों तरफ से गाड़ियों की आवाजाही जारी थी, जिससे अव्यवस्था और भी बढ़ गई।
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- उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में एक महिला सप्लाई इंस्पेक्टर ने एक पत्रकार को सीधे तौर पर 'दलाल' कहा, जिस पर पत्रकार ने तुरंत आपत्ति जताई। पत्रकार ने इंस्पेक्टर से पूछा कि उन्होंने कितनी बार उनसे 'दलाली' खाई है और इसका जवाब देने की मांग की। इस पूरी घटना के दौरान, वहीं कुर्सी पर बैठे SDM साहब मंद-मंद मुस्कुराते हुए नजर आए।1
- उत्तर प्रदेश पुलिस का प्रबंध तंत्र पूरी तरह से भ्रष्टाचार में लिप्त है, जिसका एक स्पष्ट उदाहरण लखनऊ में देखने को मिला है। प्रदेश की राजधानी लखनऊ में ट्रैफिक विभाग से लेकर पुलिस विभाग तक भ्रष्टाचार बेरोकटोक जारी है, जहाँ हरियाणा की एक गाड़ी को वसूली का शिकार बनाया गया। वीडियो में देखा जा सकता है कि लखनऊ के सबसे व्यस्त माने जाने वाले हजरतगंज सचिवालय चौराहे पर ट्रैफिक सिपाही वसूली करने में व्यस्त थे। आरोप है कि उनकी इसी व्यस्तता के चलते उन्होंने चौराहे को पूरी तरह से लावारिस छोड़ दिया। यही नहीं, यह चौराहा एक तरफा होने के बावजूद दोनों तरफ से गाड़ियों की आवाजाही जारी थी, जिससे अव्यवस्था और भी बढ़ गई।2
- विधान सभा लंभुआ से शिक्षक श्यामलाल निषाद ने एक गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि एक ऐसा गिरोह, जो पहले 'टोटी चोरी' जैसे तुच्छ आरोप लगाता था, उसने अब राम मंदिर के दान-दक्षिणा को भी लूट लिया है।1
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- सुल्तानपुर जिले के कुड़ेभार ब्लॉक स्थित दिवाकर पट्टी ग्राम सभा के प्रधान सुनील मोरिया पर सूचना के अधिकार (RTI) अधिनियम के उल्लंघन का गंभीर आरोप लगा है। इस मामले में, ब्लॉक से संबंधित सभी अधिकारियों से निवेदन किया गया है कि वे संज्ञान लें। विशेष रूप से, सुल्तानपुर के जिलाधिकारी (DM) इंद्रजीत सिंह से इस प्रकरण की जाँच कर उचित कार्रवाई करने की कृपा करने की अपील की गई है।1
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- जनपद सुलतानपुर के विभिन्न क्षेत्रों में मुस्लिम समुदाय द्वारा मुहर्रम का पर्व पूरी अकीदत और गमगीन माहौल में मनाया गया। इस दौरान लोगों ने अपनी धार्मिक परंपरा और अटूट आस्था के अनुसार पारंपरिक जुलूस निकाले, जिससे पूरा माहौल "या अली" के नारों से गूंज उठा। शोक व्यक्त करने के लिए, कुछ स्थानों पर प्रतिभागियों ने अपनी आस्था के तहत स्वयं को लोहे की जंजीरों और धारदार वस्तुओं से चोट पहुँचाकर मातम भी मनाया। मुहर्रम इस्लामिक कैलेंडर (हिजरी संवत) का पहला महीना है और इस्लाम धर्म में इसे सबसे पवित्र महीनों में से एक माना जाता है। शिया और सुन्नी दोनों ही समुदायों के लिए इसका बेहद खास ऐतिहासिक महत्व है, हालांकि इसे याद करने और मनाने के तरीके अलग-अलग हैं। इस महीने के इतिहास का सबसे प्रमुख कारण इमाम हुसैन (अलैहिस्सलाम) और उनके 72 साथियों की महान शहादत है, जो सन 61 हिजरी (लगभग 680 ईस्वी) में इराक के ऐतिहासिक 'कर्बला' नामक स्थान पर हुई थी। यह पूरी परंपरा कर्बला की लड़ाई में हुई दर्दनाक घटनाओं और इमाम हुसैन अली की शहादत की याद से गहराई से जुड़ी हुई है, जिसे मुस्लिम समुदायों द्वारा शोक और स्मरण के रूप में मनाया जाता है। मुहर्रम के जुलूस और मातम के दौरान किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोकने के लिए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। पूरे जनपद में सुरक्षा के कड़े और पुख्ता इंतजाम किए गए थे, जिसके परिणामस्वरूप शांति व्यवस्था बनी रही।1