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जनपद सुलतानपुर के विभिन्न क्षेत्रों में मुस्लिम समुदाय द्वारा मुहर्रम का पर्व पूरी अकीदत और गमगीन माहौल में मनाया गया। इस दौरान लोगों ने अपनी धार्मिक परंपरा और अटूट आस्था के अनुसार पारंपरिक जुलूस निकाले, जिससे पूरा माहौल "या अली" के नारों से गूंज उठा। शोक व्यक्त करने के लिए, कुछ स्थानों पर प्रतिभागियों ने अपनी आस्था के तहत स्वयं को लोहे की जंजीरों और धारदार वस्तुओं से चोट पहुँचाकर मातम भी मनाया। मुहर्रम इस्लामिक कैलेंडर (हिजरी संवत) का पहला महीना है और इस्लाम धर्म में इसे सबसे पवित्र महीनों में से एक माना जाता है। शिया और सुन्नी दोनों ही समुदायों के लिए इसका बेहद खास ऐतिहासिक महत्व है, हालांकि इसे याद करने और मनाने के तरीके अलग-अलग हैं। इस महीने के इतिहास का सबसे प्रमुख कारण इमाम हुसैन (अलैहिस्सलाम) और उनके 72 साथियों की महान शहादत है, जो सन 61 हिजरी (लगभग 680 ईस्वी) में इराक के ऐतिहासिक 'कर्बला' नामक स्थान पर हुई थी। यह पूरी परंपरा कर्बला की लड़ाई में हुई दर्दनाक घटनाओं और इमाम हुसैन अली की शहादत की याद से गहराई से जुड़ी हुई है, जिसे मुस्लिम समुदायों द्वारा शोक और स्मरण के रूप में मनाया जाता है। मुहर्रम के जुलूस और मातम के दौरान किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोकने के लिए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। पूरे जनपद में सुरक्षा के कड़े और पुख्ता इंतजाम किए गए थे, जिसके परिणामस्वरूप शांति व्यवस्था बनी रही।

11 hrs ago
user_पत्रकार पांडे
पत्रकार पांडे
Comedy club जयसिंहपुर, सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश•
11 hrs ago

जनपद सुलतानपुर के विभिन्न क्षेत्रों में मुस्लिम समुदाय द्वारा मुहर्रम का पर्व पूरी अकीदत और गमगीन माहौल में मनाया गया। इस दौरान लोगों ने अपनी धार्मिक परंपरा और अटूट आस्था के अनुसार पारंपरिक जुलूस निकाले, जिससे पूरा माहौल "या अली" के नारों से गूंज उठा। शोक व्यक्त करने के लिए, कुछ स्थानों पर प्रतिभागियों ने अपनी आस्था के तहत स्वयं को लोहे की जंजीरों और धारदार वस्तुओं से चोट पहुँचाकर मातम भी मनाया। मुहर्रम इस्लामिक कैलेंडर (हिजरी संवत) का पहला महीना है और इस्लाम धर्म में इसे सबसे पवित्र महीनों में से एक माना जाता है। शिया और सुन्नी दोनों ही समुदायों के लिए इसका बेहद खास ऐतिहासिक महत्व है, हालांकि इसे याद करने और मनाने के तरीके अलग-अलग हैं। इस महीने के इतिहास का सबसे प्रमुख कारण इमाम हुसैन (अलैहिस्सलाम) और उनके 72 साथियों की महान शहादत है, जो सन 61 हिजरी (लगभग 680 ईस्वी) में इराक के ऐतिहासिक 'कर्बला' नामक स्थान पर हुई थी। यह पूरी परंपरा कर्बला की लड़ाई में हुई दर्दनाक घटनाओं और इमाम हुसैन अली की शहादत की याद से गहराई से जुड़ी हुई है, जिसे मुस्लिम समुदायों द्वारा शोक और स्मरण के रूप में मनाया जाता है। मुहर्रम के जुलूस और मातम के दौरान किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोकने के लिए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। पूरे जनपद में सुरक्षा के कड़े और पुख्ता इंतजाम किए गए थे, जिसके परिणामस्वरूप शांति व्यवस्था बनी रही।

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  • उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में एक महिला सप्लाई इंस्पेक्टर ने एक पत्रकार को सीधे तौर पर 'दलाल' कहा, जिस पर पत्रकार ने तुरंत आपत्ति जताई। पत्रकार ने इंस्पेक्टर से पूछा कि उन्होंने कितनी बार उनसे 'दलाली' खाई है और इसका जवाब देने की मांग की। इस पूरी घटना के दौरान, वहीं कुर्सी पर बैठे SDM साहब मंद-मंद मुस्कुराते हुए नजर आए।
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    उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में एक महिला सप्लाई इंस्पेक्टर ने एक पत्रकार को सीधे तौर पर 'दलाल' कहा, जिस पर पत्रकार ने तुरंत आपत्ति जताई। पत्रकार ने इंस्पेक्टर से पूछा कि उन्होंने कितनी बार उनसे 'दलाली' खाई है और इसका जवाब देने की मांग की। इस पूरी घटना के दौरान, वहीं कुर्सी पर बैठे SDM साहब मंद-मंद मुस्कुराते हुए नजर आए।
    user_Lambhua express
    Lambhua express
    सुल्तानपुर, सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
  • उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले के करौंदीकला थाना क्षेत्र अंतर्गत खालिदपुर, गोपालपुर गांव में ताजिया के ढोल बजाने को लेकर दो पक्षों के बीच भीषण संघर्ष हो गया। दोनों ही पक्ष ताजियादार बताए जा रहे हैं, जिनके बीच मारपीट हुई। इस घटना में एक पक्ष के पांच बच्चे और कुछ बड़े लोग घायल हुए हैं, जिन्हें सी.एच.सी. करौंदीकला में उपचार दिया जा रहा है। इस मामले में गंभीर धाराओं के तहत अभियोग पंजीकृत कर लिया गया है। पुलिस ने एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। मामले में विधिक कार्रवाई की जा रही है। यह जानकारी क्षेत्राधिकारी कादीपुर श्री विनय गौतम द्वारा दी गई।
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    उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले के करौंदीकला थाना क्षेत्र अंतर्गत खालिदपुर, गोपालपुर गांव में ताजिया के ढोल बजाने को लेकर दो पक्षों के बीच भीषण संघर्ष हो गया। दोनों ही पक्ष ताजियादार बताए जा रहे हैं, जिनके बीच मारपीट हुई। इस घटना में एक पक्ष के पांच बच्चे और कुछ बड़े लोग घायल हुए हैं, जिन्हें सी.एच.सी. करौंदीकला में उपचार दिया जा रहा है।

इस मामले में गंभीर धाराओं के तहत अभियोग पंजीकृत कर लिया गया है। पुलिस ने एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। मामले में विधिक कार्रवाई की जा रही है। यह जानकारी क्षेत्राधिकारी कादीपुर श्री विनय गौतम द्वारा दी गई।
    user_राहुल कुमार सिंह
    राहुल कुमार सिंह
    Local News Reporter कादीपुर, सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
  • शिक्षक श्यामलाल निषाद ने स्पष्ट किया है कि बाबा साहब ने वोट का अधिकार चार किलो राशन के लिए नहीं दिया था, बल्कि इसका उद्देश्य अपना राजा चुनना है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मतदान का असली मकसद सत्ता में अपना प्रतिनिधि चुनना है।
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    शिक्षक श्यामलाल निषाद ने स्पष्ट किया है कि बाबा साहब ने वोट का अधिकार चार किलो राशन के लिए नहीं दिया था, बल्कि इसका उद्देश्य अपना राजा चुनना है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मतदान का असली मकसद सत्ता में अपना प्रतिनिधि चुनना है।
    user_Ashok verma
    Ashok verma
    Local News Reporter लंभुआ, सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश•
    3 hrs ago
  • उत्तर प्रदेश पुलिस का प्रबंध तंत्र पूरी तरह से भ्रष्टाचार में लिप्त है, जिसका एक स्पष्ट उदाहरण लखनऊ में देखने को मिला है। प्रदेश की राजधानी लखनऊ में ट्रैफिक विभाग से लेकर पुलिस विभाग तक भ्रष्टाचार बेरोकटोक जारी है, जहाँ हरियाणा की एक गाड़ी को वसूली का शिकार बनाया गया। वीडियो में देखा जा सकता है कि लखनऊ के सबसे व्यस्त माने जाने वाले हजरतगंज सचिवालय चौराहे पर ट्रैफिक सिपाही वसूली करने में व्यस्त थे। आरोप है कि उनकी इसी व्यस्तता के चलते उन्होंने चौराहे को पूरी तरह से लावारिस छोड़ दिया। यही नहीं, यह चौराहा एक तरफा होने के बावजूद दोनों तरफ से गाड़ियों की आवाजाही जारी थी, जिससे अव्यवस्था और भी बढ़ गई।
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    उत्तर प्रदेश पुलिस का प्रबंध तंत्र पूरी तरह से भ्रष्टाचार में लिप्त है, जिसका एक स्पष्ट उदाहरण लखनऊ में देखने को मिला है। प्रदेश की राजधानी लखनऊ में ट्रैफिक विभाग से लेकर पुलिस विभाग तक भ्रष्टाचार बेरोकटोक जारी है, जहाँ हरियाणा की एक गाड़ी को वसूली का शिकार बनाया गया।

वीडियो में देखा जा सकता है कि लखनऊ के सबसे व्यस्त माने जाने वाले हजरतगंज सचिवालय चौराहे पर ट्रैफिक सिपाही वसूली करने में व्यस्त थे। आरोप है कि उनकी इसी व्यस्तता के चलते उन्होंने चौराहे को पूरी तरह से लावारिस छोड़ दिया। यही नहीं, यह चौराहा एक तरफा होने के बावजूद दोनों तरफ से गाड़ियों की आवाजाही जारी थी, जिससे अव्यवस्था और भी बढ़ गई।
    user_Santosh Kumar yadav
    Santosh Kumar yadav
    सुल्तानपुर, सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश•
    11 hrs ago
  • विधान सभा लंभुआ से शिक्षक श्यामलाल निषाद ने एक गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि एक ऐसा गिरोह, जो पहले 'टोटी चोरी' जैसे तुच्छ आरोप लगाता था, उसने अब राम मंदिर के दान-दक्षिणा को भी लूट लिया है।
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    विधान सभा लंभुआ से शिक्षक श्यामलाल निषाद ने एक गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि एक ऐसा गिरोह, जो पहले 'टोटी चोरी' जैसे तुच्छ आरोप लगाता था, उसने अब राम मंदिर के दान-दक्षिणा को भी लूट लिया है।
    user_Umesh Nishad
    Umesh Nishad
    Local News Reporter सुल्तानपुर, सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश•
    11 hrs ago
  • सुल्तानपुर जनपद के थाना करौंदीकला क्षेत्र के खालिदपुर गोपालपुर गांव में ताजिया के दौरान ढोल बजाने को लेकर दो पक्षों के बीच हिंसक विवाद हो गया। देखते ही देखते यह विवाद खूनी संघर्ष में बदल गया, जिसमें दोनों पक्षों के लोगों ने एक-दूसरे पर जमकर मारपीट की। इस घटना में एक पक्ष के पांच बच्चों सहित कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें तत्काल सीएचसी करौंदीकला में भर्ती कराया गया है और उनका उपचार जारी है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया और दोनों पक्षों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, शेष अन्य आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है। क्षेत्राधिकारी कादीपुर विनय गौतम ने जानकारी दी कि मामले में विधिक कार्रवाई की जा रही है और फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं। गांव में किसी भी अप्रिय घटना से बचने और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है, जो स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए है।
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    सुल्तानपुर जनपद के थाना करौंदीकला क्षेत्र के खालिदपुर गोपालपुर गांव में ताजिया के दौरान ढोल बजाने को लेकर दो पक्षों के बीच हिंसक विवाद हो गया। देखते ही देखते यह विवाद खूनी संघर्ष में बदल गया, जिसमें दोनों पक्षों के लोगों ने एक-दूसरे पर जमकर मारपीट की। इस घटना में एक पक्ष के पांच बच्चों सहित कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें तत्काल सीएचसी करौंदीकला में भर्ती कराया गया है और उनका उपचार जारी है।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया और दोनों पक्षों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, शेष अन्य आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है।

क्षेत्राधिकारी कादीपुर विनय गौतम ने जानकारी दी कि मामले में विधिक कार्रवाई की जा रही है और फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं। गांव में किसी भी अप्रिय घटना से बचने और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है, जो स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए है।
    user_पत्रकार पांडे
    पत्रकार पांडे
    Comedy club जयसिंहपुर, सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश•
    17 hrs ago
  • जनपद सुलतानपुर के विभिन्न क्षेत्रों में मुस्लिम समुदाय द्वारा मुहर्रम का पर्व पूरी अकीदत और गमगीन माहौल में मनाया गया। इस दौरान लोगों ने अपनी धार्मिक परंपरा और अटूट आस्था के अनुसार पारंपरिक जुलूस निकाले, जिससे पूरा माहौल "या अली" के नारों से गूंज उठा। शोक व्यक्त करने के लिए, कुछ स्थानों पर प्रतिभागियों ने अपनी आस्था के तहत स्वयं को लोहे की जंजीरों और धारदार वस्तुओं से चोट पहुँचाकर मातम भी मनाया। मुहर्रम इस्लामिक कैलेंडर (हिजरी संवत) का पहला महीना है और इस्लाम धर्म में इसे सबसे पवित्र महीनों में से एक माना जाता है। शिया और सुन्नी दोनों ही समुदायों के लिए इसका बेहद खास ऐतिहासिक महत्व है, हालांकि इसे याद करने और मनाने के तरीके अलग-अलग हैं। इस महीने के इतिहास का सबसे प्रमुख कारण इमाम हुसैन (अलैहिस्सलाम) और उनके 72 साथियों की महान शहादत है, जो सन 61 हिजरी (लगभग 680 ईस्वी) में इराक के ऐतिहासिक 'कर्बला' नामक स्थान पर हुई थी। यह पूरी परंपरा कर्बला की लड़ाई में हुई दर्दनाक घटनाओं और इमाम हुसैन अली की शहादत की याद से गहराई से जुड़ी हुई है, जिसे मुस्लिम समुदायों द्वारा शोक और स्मरण के रूप में मनाया जाता है। मुहर्रम के जुलूस और मातम के दौरान किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोकने के लिए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। पूरे जनपद में सुरक्षा के कड़े और पुख्ता इंतजाम किए गए थे, जिसके परिणामस्वरूप शांति व्यवस्था बनी रही।
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    जनपद सुलतानपुर के विभिन्न क्षेत्रों में मुस्लिम समुदाय द्वारा मुहर्रम का पर्व पूरी अकीदत और गमगीन माहौल में मनाया गया। इस दौरान लोगों ने अपनी धार्मिक परंपरा और अटूट आस्था के अनुसार पारंपरिक जुलूस निकाले, जिससे पूरा माहौल "या अली" के नारों से गूंज उठा। शोक व्यक्त करने के लिए, कुछ स्थानों पर प्रतिभागियों ने अपनी आस्था के तहत स्वयं को लोहे की जंजीरों और धारदार वस्तुओं से चोट पहुँचाकर मातम भी मनाया।

मुहर्रम इस्लामिक कैलेंडर (हिजरी संवत) का पहला महीना है और इस्लाम धर्म में इसे सबसे पवित्र महीनों में से एक माना जाता है। शिया और सुन्नी दोनों ही समुदायों के लिए इसका बेहद खास ऐतिहासिक महत्व है, हालांकि इसे याद करने और मनाने के तरीके अलग-अलग हैं। इस महीने के इतिहास का सबसे प्रमुख कारण इमाम हुसैन (अलैहिस्सलाम) और उनके 72 साथियों की महान शहादत है, जो सन 61 हिजरी (लगभग 680 ईस्वी) में इराक के ऐतिहासिक 'कर्बला' नामक स्थान पर हुई थी। यह पूरी परंपरा कर्बला की लड़ाई में हुई दर्दनाक घटनाओं और इमाम हुसैन अली की शहादत की याद से गहराई से जुड़ी हुई है, जिसे मुस्लिम समुदायों द्वारा शोक और स्मरण के रूप में मनाया जाता है।

मुहर्रम के जुलूस और मातम के दौरान किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोकने के लिए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। पूरे जनपद में सुरक्षा के कड़े और पुख्ता इंतजाम किए गए थे, जिसके परिणामस्वरूप शांति व्यवस्था बनी रही।
    user_पत्रकार पांडे
    पत्रकार पांडे
    Comedy club जयसिंहपुर, सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश•
    11 hrs ago
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