अयोध्या जनपद की मिल्कीपुर तहसील में सोमवार को आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में एक स्थानीय विधायक ने किसानों की समस्याओं को सुना और उनके समाधान का आश्वासन दिया। इस दौरान किसानों ने तहसील परिसर से फ़ाइल चोरी और राजस्व से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामलों को उठाया। हालाँकि, इस घटना को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि यह केवल एक आश्वासन बनकर रह जाएगा या वास्तव में समस्याओं का समाधान होगा, क्योंकि प्रशासनिक अधिकारियों की जगह अब विधायक जी किसानों की समस्याएँ सुन रहे हैं और चुनाव नज़दीक हैं। लेख में नेताओं के इस व्यवहार पर तीखा कटाक्ष किया गया है, जिसमें कहा गया है कि यदि जनप्रतिनिधि पहले से ही किसानों की समस्याओं पर ध्यान देते, तो उन्हें इतनी मुश्किलों का सामना नहीं करना पड़ता। इसे इस बात का प्रमाण बताया गया है कि आजकल कोई भी जनप्रतिनिधि जनता को अपने परिवार का सदस्य नहीं समझता, बल्कि केवल अपने स्वार्थ सिद्ध करने में लगा रहता है। नेता केवल वाहवाही लूटने के लिए अधिकारियों पर दिखावटी दबाव बनाते हैं, ताकि जनता उन्हें समय-समय पर वोट देती रहे, और जनता भी ऐसी दिखावटी लहरों में बह जाती है। लेख में कड़वा सच बताते हुए कहा गया है कि मतदान हमेशा दो चरणों में होता है: पहला, नेता जी जनता के चरणों में, और दूसरा, अगले पाँच साल तक जनता नेता जी के चरणों में। इसके साथ ही, यह भी एक कड़वा सच है कि यदि कोई जानकार व्यक्ति या पत्रकार नेताओं के विरुद्ध आवाज़ उठाता है या लिखता है, तो उसे या तो फ़र्ज़ी मुकदमों का शिकार बनाया जाता है या किसी अन्य तरीके से उसकी आवाज़ को दबा दिया जाता है। ऐसे में, जब जनहित में काम करने वाले जागरूक व्यक्ति या पत्रकार को जान का ख़तरा होता है, तो वही जनता उनसे इस कदर दूर हो जाती है, जैसे उन्हें जानती ही न हो, जिसके कारण अब पत्रकार भी बहुत सोच-समझकर अपनी लेखनी का प्रयोग करते हैं। अंत में, यह निष्कर्ष निकाला गया है कि जनप्रतिनिधि यदि पहले से ही जनसमस्याओं को समझते, तो किसानों को समस्याग्रस्त नहीं होना पड़ता, और यदि जनप्रतिनिधि सही हों, तो ज़िम्मेदार अधिकारी व कर्मचारी भी सही रहते हैं।
अयोध्या जनपद की मिल्कीपुर तहसील में सोमवार को आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में एक स्थानीय विधायक ने किसानों की समस्याओं को सुना और उनके समाधान का आश्वासन दिया। इस दौरान किसानों ने तहसील परिसर से फ़ाइल चोरी और राजस्व से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामलों को उठाया। हालाँकि, इस घटना को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि यह केवल एक आश्वासन बनकर रह जाएगा या वास्तव में समस्याओं का समाधान होगा, क्योंकि प्रशासनिक अधिकारियों की जगह अब विधायक जी किसानों की समस्याएँ सुन रहे हैं और चुनाव नज़दीक हैं। लेख में नेताओं के इस व्यवहार पर तीखा कटाक्ष किया गया है, जिसमें कहा गया है कि यदि जनप्रतिनिधि पहले से ही किसानों की समस्याओं पर ध्यान देते, तो उन्हें इतनी मुश्किलों का सामना नहीं करना पड़ता। इसे इस बात का प्रमाण बताया गया है कि आजकल कोई भी जनप्रतिनिधि जनता को अपने परिवार का सदस्य नहीं समझता, बल्कि केवल अपने स्वार्थ सिद्ध करने में लगा रहता है। नेता केवल वाहवाही लूटने के लिए अधिकारियों पर दिखावटी दबाव बनाते हैं, ताकि जनता उन्हें समय-समय पर वोट देती रहे, और जनता भी ऐसी दिखावटी लहरों में बह जाती है। लेख में कड़वा सच बताते हुए कहा गया है कि मतदान हमेशा दो चरणों में होता है: पहला, नेता जी जनता के चरणों में, और दूसरा, अगले पाँच साल तक जनता नेता जी के चरणों में। इसके साथ ही, यह भी एक कड़वा सच है कि यदि कोई जानकार व्यक्ति या पत्रकार नेताओं के विरुद्ध आवाज़ उठाता है या लिखता है, तो उसे या तो फ़र्ज़ी मुकदमों का शिकार बनाया जाता है या किसी अन्य तरीके से उसकी आवाज़ को दबा दिया जाता है। ऐसे में, जब जनहित में काम करने वाले जागरूक व्यक्ति या पत्रकार को जान का ख़तरा होता है, तो वही जनता उनसे इस कदर दूर हो जाती है, जैसे उन्हें जानती ही न हो, जिसके कारण अब पत्रकार भी बहुत सोच-समझकर अपनी लेखनी का प्रयोग करते हैं। अंत में, यह निष्कर्ष निकाला गया है कि जनप्रतिनिधि यदि पहले से ही जनसमस्याओं को समझते, तो किसानों को समस्याग्रस्त नहीं होना पड़ता, और यदि जनप्रतिनिधि सही हों, तो ज़िम्मेदार अधिकारी व कर्मचारी भी सही रहते हैं।
- अयोध्या। योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या के बढ़ते आकर्षण को लेकर विपक्ष, विशेषकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि आज अयोध्या हर एक को आकर्षित करती है, और यही विपक्ष की सबसे बड़ी पीड़ा है। योगी आदित्यनाथ ने आरोप लगाया कि विपक्ष एक कथित चोरी की घटना को बढ़ा-चढ़ाकर हिंदुओं को अपमानित करने और उनकी आस्था पर प्रहार करने का काम कर रहा है। योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी से सवाल किया कि वे अयोध्या में कथित चोरी को लेकर हिंदू आस्था से खिलवाड़ कर रहे हैं, लेकिन वक़्फ़ के नाम पर प्रदेश और देश में हजारों हेक्टेयर गरीब और कमजोर की जमीन बेची गई, तब उन्होंने एक बार भी क्यों नहीं बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि इन जमीनों को कुछ चुनिंदा लोगों ने कब्जा करवाकर बेचा और उनका वारा-न्यारा किया, जिस पर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पूरी तरह चुप रहीं। योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या रामजन्मभूमि न्यास द्वारा एसआईटी गठन की बात का भी जिक्र किया, जिस पर उन्होंने कहा था कि दूध का दूध पानी का पानी होगा और साक्ष्य मिलने पर कार्रवाई भी हुई। इसके विपरीत, उन्होंने पूछा कि वक़्फ़ के नाम पर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के लोगों के मुंह पर फेविकोल क्यों लग जाता है। योगी आदित्यनाथ ने आगे कहा कि जब विपक्ष के लोग हिंदू धार्मिक स्थलों के विकास के लिए मिले पैसों का दुरुपयोग कब्रिस्तान की बाउंड्री बनाने के नाम पर करते थे, तब उनकी आस्था आहत नहीं होती थी। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब ये लोग अवैध बूचड़खाने चलाते थे और गौमाता को तस्करों के हाथों बिकवाते व हत्या करवाते थे, तब क्या हिंदू आस्था को चोट नहीं पहुँच रही थी। उन्होंने अपनी बात दोहराते हुए कहा कि आज अयोध्या हर एक को अपनी ओर खींचती है, और यही बात विपक्ष को सबसे ज्यादा परेशान करती है।1
- मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम जी के मंदिर में चढ़ावे की चोरी अब प्रमाणित हो चुकी है, जिसके तथ्य और प्रमाण अयोध्यावासियों सहित देशवासियों के सामने आ चुके हैं। इस प्रकरण में चोर पकड़े गए, जेल गए, ट्रस्टी बर्खास्त हुए और जिन लोगों पर संरक्षण देने के आरोप लगे, उन्हें भी ट्रस्ट से बाहर होना पड़ा। इन सब के बावजूद, भारतीय जनता पार्टी, संघ और विहिप के पास इस घटना को लेकर उठ रहे सवालों का कोई जवाब नहीं है। जब पूरे देश में इस घटना को लेकर उनकी किरकिरी हो चुकी है, तब मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए समाजवादी पार्टी के माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष आदरणीय श्री अखिलेश यादव जी एवं श्री टुन्नु यादव जी को लेकर फर्जी दुष्प्रचार किया जा रहा है। इसमें यह दावा किया जा रहा है कि श्री टुन्नु यादव जी की श्री अखिलेश यादव जी से कई बार फोन पर बातचीत हुई थी। इस दुष्प्रचार के जवाब में एक खुली चुनौती दी गई है कि जिस तरह मंदिर में चढ़ावा चोरी साबित हुई और चोर पकड़े गए व कार्रवाई हुई, उसी तरह भारतीय जनता पार्टी, संघ और विहिप को यह प्रमाणित करना चाहिए कि माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष आदरणीय श्री अखिलेश यादव जी और श्री टुन्नु यादव जी के बीच वह बातचीत हुई थी, जिसका वे दावा कर रहे हैं। यदि वे अपने आरोपों के समर्थन में कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सकते, तो उन्हें सार्वजनिक रूप से हाथ जोड़कर माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष आदरणीय श्री अखिलेश यादव जी से माफी मांगनी चाहिए, क्योंकि राजनीति तथ्य और प्रमाणों के आधार पर होनी चाहिए, न कि झूठे आरोपों और दुष्प्रचार के आधार पर।1
- उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले में खाद्य एवं रसद विभाग की घोर लापरवाही का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां विकास खंड मवई क्षेत्र के पूरे नया मजरे रेछ निवासी चंद्रजीत यादव को सरकारी अभिलेखों में 'मृत' घोषित कर उनका नाम राशन कार्ड से काट दिया गया है, जबकि वह पूरी तरह जीवित हैं। इस गंभीर त्रुटि के चलते चंद्रजीत को नया राशन कार्ड बनवाने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, और उन्होंने खाद्य एवं रसद विभाग पर मनमानी व गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। चंद्रजीत यादव के अनुसार, उन्होंने पारिवारिक विवाद के कारण स्वयं तहसील रुदौली स्थित खाद्य एवं रसद विभाग में अपना नाम राशन कार्ड से हटवाने के लिए प्रार्थना पत्र दिया था। हालांकि, विभाग के कर्मचारियों ने नाम हटाने के लिए उन्हें 'मृतक' दर्शाते हुए रिकॉर्ड में दर्ज कर दिया। जीवित होने के बावजूद सरकारी कागजों में मृत दिखाए जाने से चंद्रजीत को लगातार मुश्किलें आ रही हैं। उन्होंने बताया कि कई बार विभागीय अधिकारियों से इस गलती को सुधारने और यूनिट डिलीट का सही कारण दर्ज करने की गुहार लगाने के बावजूद उन्हें हर बार 'आज-कल' कहकर टाल दिया जाता है। इस पूरे प्रकरण ने खाद्य एवं रसद विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि एक जीवित व्यक्ति को कागजों में मृत घोषित करना न केवल प्रशासनिक लापरवाही है, बल्कि यह सीधे तौर पर आम नागरिक के अधिकारों का उल्लंघन भी है। पीड़ित चंद्रजीत ने विभाग से स्पष्टीकरण मांगा है कि आखिर उनका नाम राशन कार्ड से किस आधार पर काटा गया और इस गंभीर गलती को तत्काल सुधारा जाए। वहीं, मवई सप्लाई राम वृक्ष यादव ने इन आरोपों को वेबुनियाद बताया है, उनका कहना है कि यह तकनीकी दिक्कत लखनऊ से है और वेबसाइट पर नाम कटने के बाद व्यक्ति 'मृतक' ही शो करता है, इसमें उनकी ओर से कोई गलती नहीं की जाती है। अब देखना यह है कि 'जिंदा आदमी को ‘स्वर्गवास’ भेजने में माहिर' इस सिस्टम में चंद्रजीत यादव अपनी जिंदगी का सबूत ढूंढने में कब तक सफल होते हैं और जिम्मेदार अधिकारी इस चूक पर क्या कार्रवाई करते हैं।1
- अयोध्या के रुदौली कोतवाली क्षेत्र स्थित रौजागांव में एक कंपोजिट शराब ठेके पर आबकारी विभाग ने छापा मारा, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया। सूत्रों के अनुसार, इस कार्रवाई के दौरान ठेके से भारी मात्रा में संदिग्ध मिलावटी शराब बरामद हुई। हालाँकि, मीडिया के मौके पर पहुँचने से पहले ही छापेमारी करने वाली टीम और ठेका संचालक वहाँ से जा चुके थे। रात 8:55 बजे तक ठेका बंद मिला, जिसकी पुष्टि मोबाइल कैमरे में कैद की गई। सूत्रों का दावा है कि इस पूरे मामले को 'मैनेज' करने की कोशिशें चल रही हैं। इस संबंध में आबकारी निरीक्षक और अन्य संबंधित अधिकारियों ने फोन उठाना उचित नहीं समझा, जबकि स्थानीय पुलिस को भी इस कार्रवाई के बारे में अनभिज्ञ बताया जा रहा है। विभाग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, जिसके चलते यह पूरा प्रकरण क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।1
- अयोध्या में राम मंदिर से जुड़े चढ़ावा चोरी के विवाद को लेकर मंगलवार को एक महत्वपूर्ण बात सामने आई है। इस पूरे कांड के साथ किसी का भी कोई चारित्रिक संबंध नहीं हो सकता है, ऐसा साफ तौर पर कहा गया है।1
- बीकापुर क्षेत्र में मंगलवार भोर से चली तेज पुरवा हवाओं के साथ मौसम का मिजाज बदल गया है, जहाँ झमाझम बारिश की आहट से मौसम सुहाना हो गया है। मानसून की इस पहली आहट ने अन्नदाताओं के चेहरे पर खुशी ला दी है, जिसके चलते किसान धान की रोपाई के काम में तेजी से जुट गए हैं। मंगलवार दोपहर बाद शुरू हुई रुक-रुक कर बूंदाबांदी उन किसानों के लिए बड़ी राहत लेकर आई है, जिनकी धान की रोपाई पहले ही हो चुकी थी और जिनकी फसल सिंचाई के अभाव में सूख रही थी। इस समय खेतों में चारों तरफ किसान धान की रोपाई करते दिखाई दे रहे हैं। एक तरफ जहाँ यह बारिश किसानों के लिए राहत लेकर आई है, वहीं दूसरी तरफ अन्नदाता उर्वरक (खाद) के गहरे संकट से जूझ रहे हैं। बाजार में यूरिया की भारी किल्लत है और किसानों का आरोप है कि उन्हें मानक से कम वजन के यूरिया पैकेट दिए जा रहे हैं, जिससे उनमें गहरा असंतोष व्याप्त है। तमाम प्रशासनिक कमियों और संकटों को झेलते हुए भी, किसान उम्मीद की आस में आसमान की तरफ देख रहे हैं।1
- अयोध्या में राम मंदिर दान चोरी मामले को लेकर उठे आरोपों के बाद, समाजवादी पार्टी (सपा) नेता पवन पांडे ने दावा किया है कि यह प्रमाणित हो चुका है कि मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम जी के मंदिर में चढ़ावा चोरी हुआ था। उन्होंने जोर देकर कहा कि चोरी करने वाले कौन थे, उनके संबंध किन लोगों से थे और उन्हें किसका संरक्षण प्राप्त था, ये सभी तथ्य और प्रमाण अयोध्यावासियों सहित देश के सामने आ चुके हैं। पांडे के अनुसार, इस मामले में चोर पकड़े गए, जेल गए, एक ट्रस्टी को बर्खास्त किया गया और जिन लोगों पर संरक्षण देने का आरोप था, उन्हें भी ट्रस्ट से बाहर होना पड़ा। उन्होंने सवाल उठाया कि इन सबके बावजूद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), संघ और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के पास इन सवालों का कोई जवाब नहीं है। सपा नेता पवन पांडे ने आरोप लगाया कि पूरे देश में इस घटना को लेकर अपनी किरकिरी होने के बाद, भाजपा, संघ और विहिप अब मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए सपा के माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष आदरणीय श्री अखिलेश यादव जी एवं श्री टुन्नु यादव जी को लेकर फर्जी दुष्प्रचार कर रहे हैं। इस दुष्प्रचार में यह दावा किया जा रहा है कि श्री टुन्नु यादव जी की श्री अखिलेश यादव जी से कई बार फोन पर बातचीत हुई थी। पांडे ने भाजपा, संघ और विहिप को खुली चुनौती दी कि वे प्रमाणित करें कि ऐसी कोई बातचीत हुई थी, जैसा कि वे दावा कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि वे अपने आरोपों के समर्थन में कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सकते, तो उन्हें सार्वजनिक रूप से हाथ जोड़कर माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष आदरणीय श्री अखिलेश यादव जी से माफी मांगनी चाहिए। पवन पांडे ने अंत में कहा कि राजनीति तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर होनी चाहिए, न कि झूठे आरोपों और दुष्प्रचार पर।1
- अयोध्या जनपद की मिल्कीपुर तहसील में सोमवार को आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में एक स्थानीय विधायक ने किसानों की समस्याओं को सुना और उनके समाधान का आश्वासन दिया। इस दौरान किसानों ने तहसील परिसर से फ़ाइल चोरी और राजस्व से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामलों को उठाया। हालाँकि, इस घटना को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि यह केवल एक आश्वासन बनकर रह जाएगा या वास्तव में समस्याओं का समाधान होगा, क्योंकि प्रशासनिक अधिकारियों की जगह अब विधायक जी किसानों की समस्याएँ सुन रहे हैं और चुनाव नज़दीक हैं। लेख में नेताओं के इस व्यवहार पर तीखा कटाक्ष किया गया है, जिसमें कहा गया है कि यदि जनप्रतिनिधि पहले से ही किसानों की समस्याओं पर ध्यान देते, तो उन्हें इतनी मुश्किलों का सामना नहीं करना पड़ता। इसे इस बात का प्रमाण बताया गया है कि आजकल कोई भी जनप्रतिनिधि जनता को अपने परिवार का सदस्य नहीं समझता, बल्कि केवल अपने स्वार्थ सिद्ध करने में लगा रहता है। नेता केवल वाहवाही लूटने के लिए अधिकारियों पर दिखावटी दबाव बनाते हैं, ताकि जनता उन्हें समय-समय पर वोट देती रहे, और जनता भी ऐसी दिखावटी लहरों में बह जाती है। लेख में कड़वा सच बताते हुए कहा गया है कि मतदान हमेशा दो चरणों में होता है: पहला, नेता जी जनता के चरणों में, और दूसरा, अगले पाँच साल तक जनता नेता जी के चरणों में। इसके साथ ही, यह भी एक कड़वा सच है कि यदि कोई जानकार व्यक्ति या पत्रकार नेताओं के विरुद्ध आवाज़ उठाता है या लिखता है, तो उसे या तो फ़र्ज़ी मुकदमों का शिकार बनाया जाता है या किसी अन्य तरीके से उसकी आवाज़ को दबा दिया जाता है। ऐसे में, जब जनहित में काम करने वाले जागरूक व्यक्ति या पत्रकार को जान का ख़तरा होता है, तो वही जनता उनसे इस कदर दूर हो जाती है, जैसे उन्हें जानती ही न हो, जिसके कारण अब पत्रकार भी बहुत सोच-समझकर अपनी लेखनी का प्रयोग करते हैं। अंत में, यह निष्कर्ष निकाला गया है कि जनप्रतिनिधि यदि पहले से ही जनसमस्याओं को समझते, तो किसानों को समस्याग्रस्त नहीं होना पड़ता, और यदि जनप्रतिनिधि सही हों, तो ज़िम्मेदार अधिकारी व कर्मचारी भी सही रहते हैं।1
- अयोध्या के मिल्कीपुर क्षेत्र में स्थित विकासखंड हैरिंग्टनगंज की ग्राम पंचायत जोहन में प्राथमिक विद्यालय से काली माता मंदिर होते हुए टिकुरैया संपर्क मार्ग तक जाने वाला कच्चा रास्ता वर्षों से जर्जर हालत में है। बारिश के मौसम में यह मार्ग कीचड़ और जलभराव से भर जाता है, जिससे स्थानीय ग्रामीणों, स्कूली बच्चों और किसानों को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि इसी मार्ग से प्रतिदिन दर्जनों किसान अपने खेतों तक पहुँचते हैं, वहीं काली माता मंदिर में दर्शन के लिए भी श्रद्धालु आते-जाते हैं। प्राथमिक विद्यालय के छात्र-छात्राएं भी इसी रास्ते से स्कूल जाते हैं, लेकिन बरसात के दौरान फिसलन और कीचड़ के कारण वे कई बार गिरकर चोटिल हो जाते हैं और कई बार रास्ते की खराब स्थिति के कारण विद्यालय तक नहीं पहुँच पाते। ग्रामीणों का कहना है कि यदि इस मार्ग पर इंटरलॉकिंग या खड़ंजा का निर्माण करा दिया जाए तो आवागमन सुगम हो जाएगा और दुर्घटनाओं का खतरा भी कम होगा। इस समस्या को लेकर ग्रामीणों ने 20 मई 2026 को खंड विकास अधिकारी आर.एन. भारती को लिखित शिकायत दी थी, जिसमें मार्ग के निर्माण की मांग की गई थी। हालांकि, ग्रामीणों के अनुसार अब तक इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं की गई है। परशुराम, अमित, भानु प्रताप, सुनील कुमार, घनश्याम पांडे, वीरेंद्र कुमार, संजीव कुमार, विजय कुमार, मंजीत कुमार, अमन मौर्य, पवन कुमार, राजेश कुमार और अंशु विश्वकर्मा सहित अन्य ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल सड़क निर्माण कराने की मांग दोहराई है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया तो वे उच्च अधिकारियों से शिकायत करने को बाध्य होंगे।1