लगातार बारिश और पानी निकासी की व्यवस्था न होने के कारण जतारा के ग्राम बैरवार में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क तालाब में तब्दील हो गई। सड़क पर भारी जलभराव होने और घरों में पानी घुस जाने से नाराज ग्रामीणों और महिलाओं ने सड़क जाम कर प्रदर्शन किया। घटना की सूचना मिलते ही तहसीलदार पलक जैन, जतारा थाना पुलिस और जनपद पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि महेश यादव मौके पर पहुंचे। अधिकारियों द्वारा करीब चार घंटे की समझाइश के बाद जेसीबी से पानी की निकासी कराई गई, जिसके बाद ग्रामीणों ने जाम समाप्त किया और यातायात बहाल हुआ। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण के समय नाली नहीं बनाई गई, जिससे हर बारिश में जलभराव की समस्या होती है। इस संबंध में सरपंच सुरेंद्र सिंह दांगी ने बताया कि विभाग और प्रशासन को कई बार शिकायत की गई, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। वहीं तहसीलदार पलक जैन ने बताया कि मौके पर पहुंचकर जल निकासी कराई गई और मार्ग पर आवागमन फिर से शुरू कराया गया।
लगातार बारिश और पानी निकासी की व्यवस्था न होने के कारण जतारा के ग्राम बैरवार में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क तालाब में तब्दील हो गई। सड़क पर भारी जलभराव होने और घरों में पानी घुस जाने से नाराज ग्रामीणों और महिलाओं ने
सड़क जाम कर प्रदर्शन किया। घटना की सूचना मिलते ही तहसीलदार पलक जैन, जतारा थाना पुलिस और जनपद पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि महेश यादव मौके पर पहुंचे। अधिकारियों द्वारा करीब चार घंटे की समझाइश के बाद जेसीबी से पानी की निकासी कराई
गई, जिसके बाद ग्रामीणों ने जाम समाप्त किया और यातायात बहाल हुआ। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण के समय नाली नहीं बनाई गई, जिससे हर बारिश में जलभराव की समस्या होती है। इस संबंध में सरपंच सुरेंद्र सिंह दांगी ने
बताया कि विभाग और प्रशासन को कई बार शिकायत की गई, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। वहीं तहसीलदार पलक जैन ने बताया कि मौके पर पहुंचकर जल निकासी कराई गई और मार्ग पर आवागमन फिर से शुरू कराया गया।
- Shyam lalKhargapur, Tikamgarh,14 hrs ago
- मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले में गौवंश की स्थिति बेहद दयनीय हो चुकी है और जिम्मेदार अधिकारी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। गौशालाओं की व्यवस्था न होने के कारण सैकड़ों की संख्या में गौमाता सड़कों पर रेन बसेरा बनाने को मजबूर हैं। इस बरसात के मौसम में भी भूखी-प्यासी गौमाता लाचार अवस्था में बारिश में भीगते हुए सड़कों पर रात बिता रही हैं। सड़कों पर बैठने के कारण आए दिन हो रहे सड़क हादसों में गौवंश की जान जा रही है। क्षेत्र में गौचर भूमि पर भू-माफियाओं ने अवैध कब्जा कर रखा है, जिसके खिलाफ समाजसेवी संगठनों और मीडिया के माध्यम से कई बार आवाज उठाई जा चुकी है। इसके बावजूद लापरवाह अधिकारी और राजनीतिक पार्टियां इस पर बिल्कुल ध्यान नहीं दे रही हैं। एक तरफ भाजपा सरकार राज्य में रामराज्य का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ सड़कों पर रोज हो रही गौवंश की दुर्दशा और मौतों के बीच राजनीतिक पार्टियां केवल अपना घर भरने में लगी हुई हैं।1
- मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ में फर्जी अनुशंसा पत्र का खुलासा हुआ है। यहाँ मंत्री कृष्णा गौर के नाम का इस्तेमाल करके ट्रांसफर रुकवाने की कोशिश की गई थी, लेकिन यह कोशिश पूरी तरह नाकाम रही।1
- टीकमगढ़ के बैरवार में जलभराव की समस्या को लेकर आदिवासियों और महिलाओं का गुस्सा फूट पड़ा है। आक्रोशित होकर प्रदर्शनकारियों ने जतारा-दिगौड़ा मार्ग पर चक्काजाम कर दिया।1
- मध्यप्रदेश के नौगांव में मुखबिर की सूचना पर नौगांव थाना पुलिस ने मऊसहानियां मछली मंडी के पास कार्रवाई करते हुए दो ई-रिक्शों से भारी मात्रा में अवैध शराब बरामद की है। पुलिस की इस कार्रवाई में खुलासा हुआ कि शराब को ई-रिक्शों की सीटों के नीचे छिपाकर रखा गया था। एक ओर मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा "नशा मुक्ति अभियान" चलाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर शराब तस्कर नए-नए तरीकों से गांव-गांव तक अवैध शराब पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। फिलहाल पुलिस ने बरामद शराब और दोनों ई-रिक्शों को अपने कब्जे में लेकर मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। अब यह देखना होगा कि इस मामले में पुलिस शराब तस्करों के खिलाफ क्या ठोस कार्रवाई करती है और इस अवैध नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक कब तक पहुंच पाती है।1
- बल्देवगढ़ की नवागत तहसीलदार प्राची जैन ने अहार नारायणपुर मार्ग पर लड़वारी के पास डस्ट से भरे एक बिना नंबर प्लेट वाले महिंद्रा ट्रैक्टर-ट्राली को रोककर दस्तावेजों की मांग की। चालक द्वारा डस्ट से संबंधित कोई भी वैध दस्तावेज या रॉयल्टी उपलब्ध न कराए जाने पर पुलिस को सूचना दी गई और वाहन को जप्त कर थाने में खड़ा करा दिया गया। इस कार्रवाई के बाद से संपूर्ण क्षेत्र के ट्रैक्टर चालकों और ठेकेदारों में हड़कंप और आक्रोश का माहौल है। ठेकेदारों का कहना है कि अधिकांश निर्माण कार्यों में डस्ट का ही उपयोग किया जा रहा है, ऐसे में डस्ट से भरे वाहनों पर कार्रवाई होने से अब निर्माण कार्य कराने को लेकर संकट खड़ा हो गया है। वहीं तहसीलदार प्राची जैन ने बताया कि ट्रैक्टर चालक के पास डस्ट से संबंधित कोई वैध दस्तावेज नहीं थे, जिस कारण बिना नंबर प्लेट की महिंद्रा ट्रैक्टर-ट्राली को जप्त किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि क्षेत्र में आगे भी अवैध उत्खनन और अवैध परिवहन करने वालों के खिलाफ इसी तरह कार्रवाई जारी रहेगी।3
- लगातार बारिश और पानी निकासी की व्यवस्था न होने के कारण जतारा के ग्राम बैरवार में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क तालाब में तब्दील हो गई। सड़क पर भारी जलभराव होने और घरों में पानी घुस जाने से नाराज ग्रामीणों और महिलाओं ने सड़क जाम कर प्रदर्शन किया। घटना की सूचना मिलते ही तहसीलदार पलक जैन, जतारा थाना पुलिस और जनपद पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि महेश यादव मौके पर पहुंचे। अधिकारियों द्वारा करीब चार घंटे की समझाइश के बाद जेसीबी से पानी की निकासी कराई गई, जिसके बाद ग्रामीणों ने जाम समाप्त किया और यातायात बहाल हुआ। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण के समय नाली नहीं बनाई गई, जिससे हर बारिश में जलभराव की समस्या होती है। इस संबंध में सरपंच सुरेंद्र सिंह दांगी ने बताया कि विभाग और प्रशासन को कई बार शिकायत की गई, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। वहीं तहसीलदार पलक जैन ने बताया कि मौके पर पहुंचकर जल निकासी कराई गई और मार्ग पर आवागमन फिर से शुरू कराया गया।4
- जतारा नगर की मुख्य सड़कों और चौराहों पर आवारा गौवंश के जमावड़े के कारण आम लोगों के लिए बड़ी परेशानी खड़ी हो गई है और दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बढ़ रहा है। दिन हो या रात, सड़कों पर बैठे और घूमते गौवंश के अचानक सामने आ जाने से आए दिन वाहन चालक हादसों का शिकार हो रहे हैं। इस समस्या से सबसे अधिक परेशानी दोपहिया वाहन चालकों और राहगीरों को उठानी पड़ रही है, लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदार विभाग इस गंभीर स्थिति की ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। नगरवासियों का कहना है कि इस संबंध में कई बार शिकायतें की जा चुकी हैं, फिर भी न तो गौवंश को सुरक्षित गौशालाओं तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई और न ही किसी स्थायी समाधान के लिए ठोस कदम उठाया गया। स्थानीय लोगों ने नगर परिषद और संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि आवारा गौवंश को तत्काल सड़कों से हटाकर गौशालाओं में भेजा जाए ताकि हादसों पर रोक लग सके। नगरवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते समाधान नहीं किया गया तो भविष्य में किसी बड़े हादसे की जिम्मेदारी सीधे तौर पर संबंधित विभाग और प्रशासन की होगी।1