मैनपुरी जनपद में आज उस समय गहरा आक्रोश देखने को मिला, जब बिहार में हुए कथित एनकाउंटर में मारे गए युवा सामाजिक कार्यकर्ता भरत भूषण तिवारी (भरत तिवारी) की मौत को 'हत्या' करार दिया गया। 'समस्त ब्राह्मण समाज' और विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ताओं ने इस घटना के विरोध में कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचकर जोरदार नारेबाजी की और जिलाधिकारी मैनपुरी के माध्यम से अपनी मांगें रखीं। कलेक्ट्रेट परिसर में मीडिया से बात करते हुए एडवोकेट किशन दुबे ने भरत तिवारी की मौत को बिहार में हुआ "फर्जी एनकाउंटर" बताया। उन्होंने कहा कि भरत तिवारी केवल ब्राह्मणों के लिए नहीं, बल्कि समाज के शोषित, वंचित, मजलूम, गरीब और अंतिम व्यक्ति के हक की लड़ाई लड़ रहे थे, और उनकी इच्छा भ्रष्ट सिस्टम से लड़ने की थी। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे राष्ट्रीय अध्यक्ष रमेश चंद्र पांडे ने घटना का विस्तृत ब्यौरा देते हुए कहा कि भरत तिवारी समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चल रहे थे और उनके विकास की बात कर रहे थे। जब वहां के प्रशासन ने उनकी बात अनसुनी की, तो उन्होंने केवल अपनी आवाज उठाने के लिए कदम उठाया; उन्होंने किसी पर गोली नहीं चलाई, बल्कि अपनी रिवॉल्वर खुद फेंक दी थी। इसके बावजूद, पुलिस ने उन्हें गाड़ी में बैठाकर पहले पैरों में और बाद में दो गोलियां मारकर उनकी "हत्या" कर दी। प्रदर्शनकारियों ने जिलाधिकारी के माध्यम से अपनी प्रमुख मांगें रखीं, जिनमें इस मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषी पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा दिए जाने की मांग शामिल है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने पीड़ित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने और कम से कम ₹50 करोड़ रुपये का मुआवजा देने की भी मांग की, ताकि परिवार का भरण-पोषण हो सके। प्रदर्शन के दौरान कलेक्ट्रेट परिसर "क्रांतिकारी भरत तिवारी अमर रहें", "बिहार प्रशासन मुर्दाबाद" और "अभी तो यह अंगड़ाई है, आगे और लड़ाई है" जैसे नारों से गूंज उठा। एडवोकेट किशन दुबे ने चेतावनी दी कि यदि शीर्ष अधिकारियों ने अपने अधीनस्थों की कार्यशैली और भ्रष्ट बाबू कल्चर को नहीं सुधारा, तो आज एक भरत तिवारी शहीद हुआ है, मैनपुरी में 100 भरत तिवारी शहादत देने के लिए तैयार बैठे हैं। प्रदर्शनकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि देश के किसी भी राज्य में निरंकुश प्रशासन के खिलाफ जनता अब चुप नहीं बैठेगी और इस मांग को पूरे देश में उठाया जाएगा।
मैनपुरी जनपद में आज उस समय गहरा आक्रोश देखने को मिला, जब बिहार में हुए कथित एनकाउंटर में मारे गए युवा सामाजिक कार्यकर्ता भरत भूषण तिवारी (भरत तिवारी) की मौत को 'हत्या' करार दिया गया। 'समस्त ब्राह्मण समाज' और विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ताओं ने इस घटना के विरोध में कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचकर जोरदार नारेबाजी की और जिलाधिकारी मैनपुरी के माध्यम से अपनी मांगें रखीं। कलेक्ट्रेट परिसर में मीडिया से बात करते हुए एडवोकेट किशन दुबे ने भरत तिवारी की मौत को बिहार में हुआ "फर्जी एनकाउंटर" बताया। उन्होंने कहा कि भरत तिवारी केवल ब्राह्मणों के लिए नहीं, बल्कि समाज के शोषित, वंचित, मजलूम, गरीब और अंतिम व्यक्ति के हक की लड़ाई लड़ रहे थे, और उनकी इच्छा भ्रष्ट सिस्टम से लड़ने की थी। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे राष्ट्रीय अध्यक्ष रमेश चंद्र पांडे ने घटना का विस्तृत ब्यौरा देते हुए कहा कि भरत तिवारी समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चल रहे थे और उनके विकास की बात कर रहे थे। जब वहां के प्रशासन ने उनकी बात अनसुनी की, तो उन्होंने केवल अपनी आवाज उठाने के लिए कदम उठाया; उन्होंने किसी पर गोली नहीं चलाई, बल्कि अपनी रिवॉल्वर खुद फेंक दी थी। इसके बावजूद, पुलिस ने उन्हें गाड़ी में बैठाकर पहले पैरों में और बाद में दो गोलियां मारकर उनकी "हत्या" कर दी। प्रदर्शनकारियों ने जिलाधिकारी के माध्यम से अपनी प्रमुख मांगें रखीं, जिनमें इस मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषी पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा दिए जाने की मांग शामिल है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने पीड़ित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने और कम से कम ₹50 करोड़ रुपये का मुआवजा देने की भी मांग की, ताकि परिवार का भरण-पोषण हो सके। प्रदर्शन के दौरान कलेक्ट्रेट परिसर "क्रांतिकारी भरत तिवारी अमर रहें", "बिहार प्रशासन मुर्दाबाद" और "अभी तो यह अंगड़ाई है, आगे और लड़ाई है" जैसे नारों से गूंज उठा। एडवोकेट किशन दुबे ने चेतावनी दी कि यदि शीर्ष अधिकारियों ने अपने अधीनस्थों की कार्यशैली और भ्रष्ट बाबू कल्चर को नहीं सुधारा, तो आज एक भरत तिवारी शहीद हुआ है, मैनपुरी में 100 भरत तिवारी शहादत देने के लिए तैयार बैठे हैं। प्रदर्शनकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि देश के किसी भी राज्य में निरंकुश प्रशासन के खिलाफ जनता अब चुप नहीं बैठेगी और इस मांग को पूरे देश में उठाया जाएगा।
- मैनपुरी जनपद में आज उस समय गहरा आक्रोश देखने को मिला, जब बिहार में हुए कथित एनकाउंटर में मारे गए युवा सामाजिक कार्यकर्ता भरत भूषण तिवारी (भरत तिवारी) की मौत को 'हत्या' करार दिया गया। 'समस्त ब्राह्मण समाज' और विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ताओं ने इस घटना के विरोध में कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचकर जोरदार नारेबाजी की और जिलाधिकारी मैनपुरी के माध्यम से अपनी मांगें रखीं। कलेक्ट्रेट परिसर में मीडिया से बात करते हुए एडवोकेट किशन दुबे ने भरत तिवारी की मौत को बिहार में हुआ "फर्जी एनकाउंटर" बताया। उन्होंने कहा कि भरत तिवारी केवल ब्राह्मणों के लिए नहीं, बल्कि समाज के शोषित, वंचित, मजलूम, गरीब और अंतिम व्यक्ति के हक की लड़ाई लड़ रहे थे, और उनकी इच्छा भ्रष्ट सिस्टम से लड़ने की थी। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे राष्ट्रीय अध्यक्ष रमेश चंद्र पांडे ने घटना का विस्तृत ब्यौरा देते हुए कहा कि भरत तिवारी समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चल रहे थे और उनके विकास की बात कर रहे थे। जब वहां के प्रशासन ने उनकी बात अनसुनी की, तो उन्होंने केवल अपनी आवाज उठाने के लिए कदम उठाया; उन्होंने किसी पर गोली नहीं चलाई, बल्कि अपनी रिवॉल्वर खुद फेंक दी थी। इसके बावजूद, पुलिस ने उन्हें गाड़ी में बैठाकर पहले पैरों में और बाद में दो गोलियां मारकर उनकी "हत्या" कर दी। प्रदर्शनकारियों ने जिलाधिकारी के माध्यम से अपनी प्रमुख मांगें रखीं, जिनमें इस मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषी पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा दिए जाने की मांग शामिल है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने पीड़ित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने और कम से कम ₹50 करोड़ रुपये का मुआवजा देने की भी मांग की, ताकि परिवार का भरण-पोषण हो सके। प्रदर्शन के दौरान कलेक्ट्रेट परिसर "क्रांतिकारी भरत तिवारी अमर रहें", "बिहार प्रशासन मुर्दाबाद" और "अभी तो यह अंगड़ाई है, आगे और लड़ाई है" जैसे नारों से गूंज उठा। एडवोकेट किशन दुबे ने चेतावनी दी कि यदि शीर्ष अधिकारियों ने अपने अधीनस्थों की कार्यशैली और भ्रष्ट बाबू कल्चर को नहीं सुधारा, तो आज एक भरत तिवारी शहीद हुआ है, मैनपुरी में 100 भरत तिवारी शहादत देने के लिए तैयार बैठे हैं। प्रदर्शनकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि देश के किसी भी राज्य में निरंकुश प्रशासन के खिलाफ जनता अब चुप नहीं बैठेगी और इस मांग को पूरे देश में उठाया जाएगा।1
- भारतीय किसान यूनियन आज़ाद के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी नितिन बालियान ने दिल्ली के जंतर मंतर पर आयोजित एक महासम्मेलन में सरकार पर सीधा निशाना साधा है। यह दूसरी बार है जब संगठन ने इस तरह का महासम्मेलन आयोजित किया है, जिसमें अमेरिका-भारत व्यापार समझौते को आगे न बढ़ने देने के प्रति सरकार के खिलाफ अपनी असहमति व्यक्त की गई। चौधरी नितिन बालियान ने सरकार के रवैये को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए सीधे तौर पर निशाना साधा।1
- जनपद मैनपुरी के कस्बा बेवर में मंगलवार, 23 जून 2026 की रात मोहर्रम की उर्दू माह की 7 तारीख पर अलम का जुलूस श्रद्धा, अकीदत और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ निकाला गया। इस जुलूस में बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने हजरत इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हुए मातम किया। जुलूस नगर के विभिन्न मार्गों से शांतिपूर्ण और अनुशासित माहौल में गुजरा। मोहर्रम के अवसर पर सुरक्षा एवं कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए बेवर पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट और मुस्तैद रहा। थाना अध्यक्ष बेवर अनिल कुमार सिंह, क्षेत्राधिकारी भोगांव रामकृष्ण द्विवेदी और सिटी इंचार्ज शैलेश निगम ने पुलिस बल के साथ जुलूस मार्ग का दौरा किया और व्यवस्थाओं का जायजा लिया। अधिकारियों ने संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी रखते हुए अलम के जुलूस को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराया। पुलिस प्रशासन द्वारा आगामी शुक्रवार, 26 जून तक तथा उर्दू माह की 10 तारीख को निकलने वाले ताजिया एवं अन्य धार्मिक कार्यक्रमों को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया गया है। अधिकारियों ने क्षेत्रवासियों से आपसी भाईचारा, सौहार्द एवं शांति बनाए रखने तथा प्रशासन का सहयोग करने की अपील की है।2
- मुंबई के भांडुप में आयोजित एक रैली में शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने पार्टी के साथ हुए विश्वासघात पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, "मैं गद्दारों और उनके आकाओं का धन्यवाद करता हूं कि उन्होंने इन मशालों को फिर से जला दिया..." ठाकरे के अनुसार, इस विश्वासघात ने पार्टी कार्यकर्ताओं के संघर्ष और संकल्प को और भी मजबूत किया है। उद्धव ठाकरे ने अपनी बात रखते हुए यह भी बताया कि जहां-जहां उन्हें धोखा मिला, वे स्वयं उन स्थानों पर जाकर मतदाताओं से माफी मांग रहे हैं। इसके साथ ही, वे अपने पुराने वादों को पूरा करने की दिशा में सक्रिय रूप से कदम बढ़ा रहे हैं। महाराष्ट्र की मौजूदा राजनीतिक स्थिति में, उद्धव ठाकरे का यह बयान एक नए राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि उनका यह जनसंपर्क अभियान राज्य के आगामी राजनीतिक समीकरणों पर कितना गहरा प्रभाव डालता है।1
- मैनपुरी जिले के दन्नाहार थाना क्षेत्र के नगला सभा गांव से रिश्तों को शर्मसार करने वाला एक मामला सामने आया है। यहां एक पिता ने अपने ही बेटे प्रभाकर और उसके साले हलविलास पर घर में चोरी करने का गंभीर आरोप लगाया है। शिकायत के अनुसार, जब परिवार एक तिलक समारोह में शामिल होने के लिए बाहर गया हुआ था, तब प्रभाकर और हलविलास ने बंद घर का शीशा तोड़कर अंदर प्रवेश किया। आरोप है कि वे घर से जेवरात और नकदी लेकर फरार हो गए। इस सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और घटना स्थल का निरीक्षण कर मामले की जांच-पड़ताल शुरू कर दी है।1
- मैनपुरी पुलिस ने हाल ही में लूट की घटनाओं का सफलतापूर्वक खुलासा किया है। पुलिस ने कुल चार वारदातों में शामिल अनूप उर्फ ऋषि और नव्यांशु उर्फ बिट्टू नामक दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। उनके कब्जे से दो ई-रिक्शा और कुछ नगदी भी बरामद की गई है। इस पूरे ऑपरेशन को एसओजी और घिरोर पुलिस ने संयुक्त रूप से अंजाम दिया।1
- पश्चिमी उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों एक अनोखे वैवाहिक गठबंधन की खूब चर्चा हो रही है, जिसने समाज को एक सकारात्मक संदेश दिया है। यह गठबंधन बहुजन समाज पार्टी के पूर्व विधायक प्रदीप जाटव के पुत्र और पूर्व कैबिनेट मंत्री धर्मवीर अशोक की पौत्री के बीच तय हुआ है। यह रिश्ता केवल दो प्रभावशाली परिवारों का मिलन नहीं, बल्कि दहेज प्रथा के खिलाफ एक प्रेरणादायक पहल के रूप में देखा जा रहा है। सगाई समारोह के दौरान, वधू पक्ष ने परंपरा के अनुसार नकद धनराशि और अन्य उपहार भेंट करने का प्रयास किया। हालांकि, पूर्व विधायक प्रदीप जाटव ने स्पष्ट रूप से दहेज लेने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वे अपनी बहू को अपनी बेटी के समान सम्मान देंगे और उन्हें किसी भी प्रकार के धन, दहेज या भौतिक उपहार की आवश्यकता नहीं है। प्रदीप जाटव ने यह भी कहा कि वे अपनी बहू को केवल उसके पहने हुए वस्त्रों में ही सम्मानपूर्वक अपने घर लाएंगे। पूर्व कैबिनेट मंत्री धर्मवीर अशोक के परिवार ने भी इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे सामाजिक सरोकारों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण कदम बताया। दोनों परिवारों ने आपसी सहमति से दहेज-मुक्त विवाह का संकल्प लिया है, जिससे समाज के सामने एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत हुआ है। प्रदीप जाटव के राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहने के कारण, दोनों प्रतिष्ठित परिवारों द्वारा लिया गया यह निर्णय आमजन के बीच चर्चा का विषय बन गया है। सामाजिक संगठनों और क्षेत्रीय लोगों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे दहेज प्रथा के खिलाफ एक सकारात्मक संदेश करार दिया है।1
- उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था और अपराध के खात्मे के सरकारी दावों पर सवाल उठाते हुए, मैनपुरी जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहाँ करहल थाना क्षेत्र के एक गांव में जमीन के एक मामूली टुकड़े को लेकर विवाद इतना बढ़ गया कि लोग इंसानियत और कानून, दोनों को भूल गए। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे यह विवाद अचानक उग्र हो गया और पूरा इलाका एक जंग के मैदान में तब्दील हो गया, जहाँ कानून का कोई खौफ नजर नहीं आया। वीडियो में कई लोग खुलेआम लाठी, डंडे और कुल्हाड़ी जैसे धारदार हथियार लेकर एक-दूसरे की जान लेने के लिए दौड़ते दिखाई दिए। बिना किसी डर या हिचकिचाहट के ये दबंग हथियारों का प्रदर्शन कर रहे थे और दूसरे पक्ष पर हमला करने को आमादा थे। गांव के बीचो-बीच सरेआम हुई इस तरह की गुंडागर्दी और खूनी संघर्ष की कोशिश स्थानीय पुलिस की सतर्कता पर गंभीर सवाल खड़े करती है। इस घटना को लेकर स्थानीय जनता में भारी आक्रोश है और लोग राज्य सरकार की नीतियों पर उंगली उठा रहे हैं। आम जनता का कहना है कि सरकार एक तरफ प्रदेश को गुंडामुक्त और अपराधमुक्त बनाने का ढोल पीटती है, वहीं दूसरी तरफ ऐसे असामाजिक तत्व आज भी सरेआम हथियारों के साथ घूमकर कानून की धज्जियां उड़ा रहे हैं। इस पूरी घटना के बाद से गांव में दहशत का माहौल है और लोगों के मन में अपनी सुरक्षा को लेकर डर बैठ गया है, क्योंकि दिन-दहाड़े हाथ में कुल्हाड़ी लेकर घूमने वाले लोगों में पुलिस और प्रशासनिक कार्रवाई का कोई डर नहीं दिख रहा है। अब सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय प्रशासन और करहल थाना पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना लाज़मी है। यह देखना बाकी है कि कानून को अपने हाथ में लेने वाले इन दबंगों पर पुलिस प्रशासन क्या कार्रवाई करता है, और क्या उत्तर प्रदेश सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत इन पर कोई सख्त और मिसाल कायम करने वाला एक्शन लिया जाएगा, या यह मामला भी सिर्फ कागजी कार्रवाई और जांच के आश्वासन तक ही सीमित रह जाएगा।1