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सागवाड़ा स्थित पुनर्वास कोलिनी सीनियर स्कूल में वार्षिक उत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य ने बताया कि भामाशाहों और दानदाताओं के सहयोग से स्कूल का कायाकल्प हो गया है, जिसके परिणामस्वरूप बच्चों को अब बेहतरीन से बेहतरीन सुविधाएँ मिलेंगी। प्रधानाचार्य ने दृढ़ता से कहा कि इस विद्यालय से पढ़कर आगे बढ़ने वाले बच्चे देश और दुनिया में अपना तथा अपने क्षेत्र का नाम रोशन करेंगे।
समाज सेवी दिनेश चंद्र अहारी
सागवाड़ा स्थित पुनर्वास कोलिनी सीनियर स्कूल में वार्षिक उत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य ने बताया कि भामाशाहों और दानदाताओं के सहयोग से स्कूल का कायाकल्प हो गया है, जिसके परिणामस्वरूप बच्चों को अब बेहतरीन से बेहतरीन सुविधाएँ मिलेंगी। प्रधानाचार्य ने दृढ़ता से कहा कि इस विद्यालय से पढ़कर आगे बढ़ने वाले बच्चे देश और दुनिया में अपना तथा अपने क्षेत्र का नाम रोशन करेंगे।
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- "रूणीचा के रणबांकुरे की जय-जयकार से गूंजा गांगी, बाबा रामदेव मंदिर का 20वां पाटोत्सव श्रद्धा और भक्ति के रंग में सराबोर " सीमलवाड़ा। ग्राम पंचायत शिथल के गांगी स्थित बाबा रामदेव मंदिर का 20वां पाटोत्सव रविवार रात श्रद्धा, आस्था और भक्ति के माहौल में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। पाटोत्सव के अवसर पर मंदिर परिसर को आकर्षक रोशनी एवं रंग-बिरंगी सजावट से सजाया गया, जहां देर रात तक श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। कार्यक्रम की शुरुआत धुनी मगरी धाम के प्रेम गिरी महाराज के सानिध्य में विधि-विधान से पाठ पूजन के साथ हुई। वैदिक मंत्रोच्चार एवं धार्मिक अनुष्ठानों के बीच मुख्य यजमान वसराम भाई बंजारा सहित परिवारजनों ने पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि एवं क्षेत्र की खुशहाली की कामना की। पाठ पूजन के दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं ने बाबा रामदेव के जयकारों से पूरे मंदिर परिसर को भक्तिमय बना दिया। इसके बाद आयोजित भजन संध्या में पूरी रात बाबा रामदेव के भजनों की मधुर प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया। भक्तगण देर रात तक झूमते हुए भजनों का आनंद लेते रहे। वातावरण "ओ रूणीचे रा धणी रामापीर..., थाने खम्मा घणी बाबा रामदेव..., रामसा पीर म्हारा, आवो जी म्हारे अंगणा..." जैसे लोकप्रिय भजनों से गुंजायमान रहा। श्रद्धालु भजनों पर नाचते-गाते बाबा के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा व्यक्त करते नजर आए। पाटोत्सव में आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर बाबा रामदेव के दर्शन किए और पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। पूरे आयोजन के दौरान मंदिर परिसर में धार्मिक उल्लास और भाईचारे का वातावरण बना रहा। आयोजन समिति की ओर से सभी श्रद्धालुओं के लिए प्रसादी की व्यवस्था की गई। श्रद्धालुओं ने इसे आस्था, सेवा और सामाजिक समरसता का सुंदर संगम बताते हुए आयोजन की सराहना की। बाबा रामदेव के जयकारों के साथ संपन्न हुआ यह पाटोत्सव क्षेत्रवासियों के लिए लंबे समय तक यादगार बना रहा।3
- डूंगरपुर में जिला कलक्टर देशलदान की अध्यक्षता में जिला परिषद के ईडीपी सभागार में एक साप्ताहिक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में पेयजल वितरण, विद्युत आपूर्ति, पीएम सूर्य घर बिजली कनेक्शन, कृषि कनेक्शन, और स्मार्ट मीटर जैसे विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से जानकारी ली गई। समीक्षा के बाद, जिला कलक्टर ने उपस्थित समस्त जिला स्तरीय अधिकारियों को इन सभी क्षेत्रों के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए।2
- कुशलगढ़ क्षेत्र में सोमवार को वट सावित्री व्रत अत्यंत श्रद्धा, आस्था और धार्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। विवाहित महिलाओं ने अपने पतियों की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य की कामना करते हुए यह व्रत रखा और वटवृक्ष (बरगद) का विधि-विधान से पूजन किया। सुबह से ही सुहागिनें सोलह श्रृंगार कर पूजा की थाल के साथ बरगद के वृक्ष के नीचे पहुंचीं, जहाँ उन्होंने जल, अक्षत और कुमकुम अर्पित कर पूजा-अर्चना की। इसके पश्चात, महिलाओं ने लाल मौली धागे से वटवृक्ष की सात परिक्रमाएं कीं और अपने परिवार के सुख-समृद्धि के साथ-साथ लंबे सुहाग की मंगल कामना की। दोपहर करीब 3 बजे, व्रत करने वाली इन महिलाओं ने सामूहिक रूप से वट सावित्री की कथा का श्रवण भी किया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वटवृक्ष में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का वास माना जाता है, और सत्यवान-सावित्री की कथा के माध्यम से महिलाओं ने अखंड सौभाग्य और दांपत्य जीवन की मंगल कामना की। यह धार्मिक उल्लास कुशलगढ़ के अलावा छोटी सरवा, मोहकमपुरा, डूंगरा और आसपास के अन्य क्षेत्रों में भी देखा गया, जहाँ महिलाओं ने विधि-विधान से व्रत रखकर बरगद की पूजा और परिक्रमा करते हुए इस प्राचीन परंपरा का पूरी निष्ठा से निर्वहन किया। इस वट सावित्री व्रत पर सुहागिनों की गहरी आस्था उमड़ पड़ी, जिसके तहत उन्होंने अखंड सौभाग्य और अपने पति की दीर्घायु के लिए यह विशेष पूजन संपन्न किया।1
- धरियावद क्षेत्र के जूना बोरिया गांव में वन विभाग द्वारा एक गरीब परिवार के मकान को ध्वस्त किए जाने के विरोध में ग्रामीणों में गहरा आक्रोश व्याप्त हो गया है। विधायक थावरचंद डामोर के नेतृत्व में सैकड़ों किसानों और ग्रामीणों ने सोमवार को वन विभाग की इस कार्रवाई के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन करते हुए एक रैली निकाली। इस दौरान उन्होंने सरकार और वन विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए उपखंड कार्यालय पहुंचकर एक ज्ञापन सौंपा और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की। विधायक डामोर ने आरोप लगाया कि जूना बोरिया गांव में जिस मकान को वन विभाग ने अवैध अतिक्रमण बताकर ध्वस्त किया, वह असल में ग्राम पंचायत की भूमि पर निर्मित था। उन्होंने स्पष्ट किया कि भूमि सीमांकन की सही जानकारी के अभाव में विभाग ने यह कार्रवाई की, जिसके चलते एक गरीब परिवार बेघर हो गया। डामोर ने बताया कि इस मकान के टूटने से परिवार की महिला सहित दो मासूम बच्चों का आशियाना उजड़ गया है। विधायक ने वन विभाग की कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए राज्य सरकार को भी इस स्थिति के लिए जिम्मेदार ठहराया और पीड़ित परिवार को शीघ्र आवास निर्माण तथा आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की। विधायक डामोर ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही पीड़ित परिवार को राहत नहीं मिली तो वे ग्रामीणों और किसानों के साथ मिलकर एक बड़ा आंदोलन करेंगे। इस विरोध-प्रदर्शन के दौरान गुस्साए ग्रामीणों ने थोड़ी देर के लिए सड़क को भी जाम कर दिया, जिसे प्रशासन द्वारा समझाइश के बाद कुछ देर में खोल दिया गया। हालांकि, अपनी मांगें पूरी न होने पर विधायक डामोर सहित सैकड़ों ग्रामीण वन विभाग के कार्यालय में धरने पर बैठ गए। इस अवसर पर बड़ी संख्या में ग्रामीण, किसान और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।1
- शिक्षा को 'शेरनी का दूध' बताते हुए, जिसे पीकर लोग दहाड़ते हैं, समाज सेवी दिनेश चंद्र अहारी ने सभी से अपने बच्चों का दाखिला सरकारी विद्यालयों में करवाने की अपील की है। उन्होंने बताया कि सरकारी विद्यालय 29 जून से फिर से खुल गए हैं। अहारी ने निवेदन किया कि अभिभावक अपने बच्चों को नियमित रूप से स्कूल भेजें, जिससे वे बड़े होकर अपना भविष्य उज्ज्वल बना सकें और अपने क्षेत्र व समाज का नाम रोशन कर सकें।1
- प्रतापगढ़ जिले में स्थित कार्यालय क्रय विक्रय सरकारी समिति लिमिटेड में यूरिया खाद प्राप्त करने के लिए किसानों और महिलाओं की बड़ी संख्या में कतारें देखी गईं। पिछले साल, यूरिया खाद दुकानों पर अधिक दाम में मिली थी, जिसके कारण इस बार बारिश के पहले किसानों ने यूरिया खाद के लिए लंबी कतारें लगाईं। इस दौरान किसानों ने अपनी आवश्यकता के अनुसार यूरिया खाद प्राप्त किया।1
- दृश्युद्वीयुग को भी दे दिया जाए क्या तरह काम नहीं याद है आप सभी तक1