रियाँ बड़ी : जाटावास क्षेत्र मे टीटहरी ने दिए अंडे: आने वाले मानसून को लेकर चर्चाएं तेज रियाँ बड़ी 15 अप्रैल 2026: ग्रामीण आंचल में मानसून की आहट के साथ ही 'प्राकृतिक मौसम विज्ञानी' कहे जाने वाले टीटहरी पक्षी के अंडों को लेकर कौतूहल बढ़ गया है। नागौर जिले के विभिन्न गांवों में इस बार टीटहरी पक्षी ने खेतों और जलस्रोतों के पास अंडे दिए हैं, जिन्हें देखकर बुजुर्गों ने आने वाले जमाने (बारिश के काल) का अनुमान लगाना शुरू कर दिया है। लोक मान्यता: अंडों की संख्या में छिपा है बारिश का राज पुरानी परंपराओं और बुजुर्गों के अनुभवों के अनुसार, टीटहरी के अंडों की संख्या बारिश के महीनों और तीव्रता का संकेत देती है। ग्रामीण क्षेत्र में माना जाता है कि यदि टीटहरी चार अंडे देती है, तो वर्षा ऋतु के चारों महीने अच्छी बारिश होगी और चारों दिशाओं में खुशहाली रहेगी।रियाँ बड़ी के जाटावास क्षेत्र में दो अंडे देखे गए हैं। बुजुर्गों के अनुसार, चार से अधिक अंडे मिलना 'अतिवृष्टि' यानी भयंकर बारिश का संकेत हो सकता है, जिससे फसलों पर भी गहरा प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है। ऊंचाई पर अंडे मतलब भारी बारिश टीटहरी कभी पेड़ों पर घोंसला नहीं बनाती, बल्कि जमीन पर ही कंकड़-पत्थरों के बीच सुरक्षित स्थान चुनती है। इस बार पक्षी ने जमीन की सतह पर कुछ ऊंचाई पर अंडे दिए हैं। *विज्ञान और विश्वास का संगम* हालांकि आधुनिक दौर में मौसम विभाग अपनी सैटेलाइट गणना से बारिश का पूर्वानुमान लगाता है, लेकिन राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में आज भी टीटहरी के अंडों को देखने की सदियों पुरानी परंपरा अटूट है। किसान इन्हीं संकेतों के आधार पर अपनी बुआई और फसलों की योजना तय करते हैं। फिलहाल, इन अंडों की सुरक्षा खुद पक्षी बड़ी मुस्तैदी से कर रहा है। आने वाले मानसून की पहली बारिश यह तय करेगी कि सदियों पुरानी यह लोक मान्यता इस साल कितनी सटीक बैठती है। अलग-अलग क्षेत्र में अलग-अलग अंडे दिए गए हैं कहीं पर दो कहीं पर तीन कही पर चार ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों में यह अंडे देखे गए हैं।
रियाँ बड़ी : जाटावास क्षेत्र मे टीटहरी ने दिए अंडे: आने वाले मानसून को लेकर चर्चाएं तेज रियाँ बड़ी 15 अप्रैल 2026: ग्रामीण आंचल में मानसून की आहट के साथ ही 'प्राकृतिक मौसम विज्ञानी' कहे जाने वाले टीटहरी पक्षी के अंडों को लेकर कौतूहल बढ़ गया है। नागौर जिले के विभिन्न गांवों में इस बार टीटहरी पक्षी ने खेतों और जलस्रोतों के पास अंडे दिए हैं, जिन्हें देखकर बुजुर्गों ने आने वाले जमाने (बारिश के काल) का अनुमान लगाना शुरू कर दिया है।
लोक मान्यता: अंडों की संख्या में छिपा है बारिश का राज पुरानी परंपराओं और बुजुर्गों के अनुभवों के अनुसार, टीटहरी के अंडों की संख्या बारिश के महीनों और तीव्रता का संकेत देती है। ग्रामीण क्षेत्र में माना जाता है कि यदि टीटहरी चार अंडे देती है, तो वर्षा ऋतु के चारों महीने अच्छी बारिश होगी और चारों दिशाओं में खुशहाली रहेगी।रियाँ बड़ी के जाटावास क्षेत्र में दो अंडे देखे गए हैं। बुजुर्गों के अनुसार, चार से अधिक अंडे मिलना 'अतिवृष्टि' यानी भयंकर बारिश
का संकेत हो सकता है, जिससे फसलों पर भी गहरा प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है। ऊंचाई पर अंडे मतलब भारी बारिश टीटहरी कभी पेड़ों पर घोंसला नहीं बनाती, बल्कि जमीन पर ही कंकड़-पत्थरों के बीच सुरक्षित स्थान चुनती है। इस बार पक्षी ने जमीन की सतह पर कुछ ऊंचाई पर अंडे दिए हैं। *विज्ञान और विश्वास का संगम* हालांकि आधुनिक दौर में मौसम विभाग अपनी सैटेलाइट गणना से बारिश का पूर्वानुमान लगाता है, लेकिन राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में आज भी टीटहरी के अंडों को
देखने की सदियों पुरानी परंपरा अटूट है। किसान इन्हीं संकेतों के आधार पर अपनी बुआई और फसलों की योजना तय करते हैं। फिलहाल, इन अंडों की सुरक्षा खुद पक्षी बड़ी मुस्तैदी से कर रहा है। आने वाले मानसून की पहली बारिश यह तय करेगी कि सदियों पुरानी यह लोक मान्यता इस साल कितनी सटीक बैठती है। अलग-अलग क्षेत्र में अलग-अलग अंडे दिए गए हैं कहीं पर दो कहीं पर तीन कही पर चार ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों में यह अंडे देखे गए हैं।
- ### 📰 अवैध बजरी परिवहन पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, डंपर जब्त, एक गिरफ्तार **नागौर, 13 अप्रैल 2026** जिले के थाना थांवला पुलिस ने अवैध बजरी खनन और परिवहन के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक डंपर जब्त किया है तथा एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, जिला पुलिस अधीक्षक **रोशन मीणा (IPS)** के निर्देशानुसार अवैध खनन के विरुद्ध लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में थांवला थाना पुलिस टीम ने गश्त के दौरान कोड गांव क्षेत्र में एक संदिग्ध डंपर को रोका। जांच में डंपर अवैध बजरी से भरा पाया गया। डंपर चालक ने पूछताछ में अपना नाम **राजेश कुमावत (36), निवासी गोविन्दगढ़, जिला अजमेर** बताया। उसके पास बजरी परिवहन का कोई वैध परमिट या रॉयल्टी नहीं मिली। इस पर पुलिस ने डंपर (नंबर RJ 02 GB 1687) को जब्त कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ थाना थांवला में प्रकरण संख्या 69/2026 दर्ज करते हुए **बीएनएस की धारा 303(2), 112(2) तथा एमएमडीआर एक्ट की धारा 4/21** के तहत मामला दर्ज किया है। यह कार्रवाई थाना प्रभारी **अशोक कुमार झाझड़िया** के नेतृत्व में पुलिस टीम द्वारा की गई। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि अवैध बजरी कहां से लाई गई थी। 👉 पुलिस का कहना है कि अवैध खनन और परिवहन के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा।1
- रियाँ बड़ी 15 अप्रैल 2026:ग्रामीण आंचल में मानसून की आहट के साथ ही 'प्राकृतिक मौसम विज्ञानी' कहे जाने वाले टीटहरी पक्षी के अंडों को लेकर कौतूहल बढ़ गया है। नागौर जिले के विभिन्न गांवों में इस बार टीटहरी पक्षी ने खेतों और जलस्रोतों के पास अंडे दिए हैं, जिन्हें देखकर बुजुर्गों ने आने वाले जमाने (बारिश के काल) का अनुमान लगाना शुरू कर दिया है। लोक मान्यता: अंडों की संख्या में छिपा है बारिश का राज पुरानी परंपराओं और बुजुर्गों के अनुभवों के अनुसार, टीटहरी के अंडों की संख्या बारिश के महीनों और तीव्रता का संकेत देती है। ग्रामीण क्षेत्र में माना जाता है कि यदि टीटहरी चार अंडे देती है, तो वर्षा ऋतु के चारों महीने अच्छी बारिश होगी और चारों दिशाओं में खुशहाली रहेगी।रियाँ बड़ी के जाटावास क्षेत्र में दो अंडे देखे गए हैं। बुजुर्गों के अनुसार, चार से अधिक अंडे मिलना 'अतिवृष्टि' यानी भयंकर बारिश का संकेत हो सकता है, जिससे फसलों पर भी गहरा प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है। ऊंचाई पर अंडे मतलब भारी बारिश टीटहरी कभी पेड़ों पर घोंसला नहीं बनाती, बल्कि जमीन पर ही कंकड़-पत्थरों के बीच सुरक्षित स्थान चुनती है। इस बार पक्षी ने जमीन की सतह पर कुछ ऊंचाई पर अंडे दिए हैं। *विज्ञान और विश्वास का संगम* हालांकि आधुनिक दौर में मौसम विभाग अपनी सैटेलाइट गणना से बारिश का पूर्वानुमान लगाता है, लेकिन राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में आज भी टीटहरी के अंडों को देखने की सदियों पुरानी परंपरा अटूट है। किसान इन्हीं संकेतों के आधार पर अपनी बुआई और फसलों की योजना तय करते हैं। फिलहाल, इन अंडों की सुरक्षा खुद पक्षी बड़ी मुस्तैदी से कर रहा है। आने वाले मानसून की पहली बारिश यह तय करेगी कि सदियों पुरानी यह लोक मान्यता इस साल कितनी सटीक बैठती है। अलग-अलग क्षेत्र में अलग-अलग अंडे दिए गए हैं कहीं पर दो कहीं पर तीन कही पर चार ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों में यह अंडे देखे गए हैं।4
- पुष्कर बाईपास पर सड़क हादसा एक बोलेरो और मोटरसाइकिल बिनेंट में दोनों सगे भाइयों की मौत की खबर सामने आ रही है।1
- Post by Kailash Fulwari1
- ब्यावर में बड़ा सड़क हादसा, पुलिया से नीचे गिरा बेकाबू ट्रेलरब्यावर के देलवाड़ा पुलिया1
- Post by नेमा गुर्जर1
- #NAGAURPOLICE #SP Office Nagaur • *श्री रोशन मीना SP नागौर के निर्देशन में ऑपरेशन संकल्प - नशा मुक्त नागौर के तहत नागौर पुलिस को मिली बड़ी सफलता।* • *अवैध एनडीपीएस घटक की नशीली टेबलेट/दवाईयां/इंजेक्शन रखने वालों के विरूद्ध शानदार कार्यवाही।* • *लगभग 22 लाख रूपये कीमतन अवैध नशीली 5270 टेबलेट, 90 दवाई की शीशीयाँ एवं 20 इंजेक्शन जब्त।* • डीएसटी टीम द्वारा बोगस ग्राहक बनकर किया नशीले पदार्थों के कारोबार का भण्डाफोड़। • दिनांक 14.04.2026 को कस्बा मेड़तासिटी स्थित सिलमंगरो का मोहल्ला में मोहम्मद आमीन मोदी के खण्डहरनुमा मकान पर दबिश देकर एनडीपीएस घटक की नशीली गोलियां/दवाईयां/इंजेक्शन जब्त किये गये। • *मौके से एक मोटरसाईकिल जब्त, आरोपी मोहम्मद आमीन मोदी फरार हो गया, जिसकी तलाश की जा रही है।* • जिला स्पेशल टीम मेड़ता एवं थाना मेड़तासिटी टीम की रही शानदार कार्यवाही। @IgpAjmer @PoliceRajasthan1
- रियाँ बड़ी 15 अप्रैल 2026: ग्रामीण आंचल में मानसून की आहट के साथ ही 'प्राकृतिक मौसम विज्ञानी' कहे जाने वाले टीटहरी पक्षी के अंडों को लेकर कौतूहल बढ़ गया है। नागौर जिले के विभिन्न गांवों में इस बार टीटहरी पक्षी ने खेतों और जलस्रोतों के पास अंडे दिए हैं, जिन्हें देखकर बुजुर्गों ने आने वाले जमाने (बारिश के काल) का अनुमान लगाना शुरू कर दिया है। लोक मान्यता: अंडों की संख्या में छिपा है बारिश का राज पुरानी परंपराओं और बुजुर्गों के अनुभवों के अनुसार, टीटहरी के अंडों की संख्या बारिश के महीनों और तीव्रता का संकेत देती है। ग्रामीण क्षेत्र में माना जाता है कि यदि टीटहरी चार अंडे देती है, तो वर्षा ऋतु के चारों महीने अच्छी बारिश होगी और चारों दिशाओं में खुशहाली रहेगी।रियाँ बड़ी के जाटावास क्षेत्र में दो अंडे देखे गए हैं। बुजुर्गों के अनुसार, चार से अधिक अंडे मिलना 'अतिवृष्टि' यानी भयंकर बारिश का संकेत हो सकता है, जिससे फसलों पर भी गहरा प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है। ऊंचाई पर अंडे मतलब भारी बारिश टीटहरी कभी पेड़ों पर घोंसला नहीं बनाती, बल्कि जमीन पर ही कंकड़-पत्थरों के बीच सुरक्षित स्थान चुनती है। इस बार पक्षी ने जमीन की सतह पर कुछ ऊंचाई पर अंडे दिए हैं। *विज्ञान और विश्वास का संगम* हालांकि आधुनिक दौर में मौसम विभाग अपनी सैटेलाइट गणना से बारिश का पूर्वानुमान लगाता है, लेकिन राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में आज भी टीटहरी के अंडों को देखने की सदियों पुरानी परंपरा अटूट है। किसान इन्हीं संकेतों के आधार पर अपनी बुआई और फसलों की योजना तय करते हैं। फिलहाल, इन अंडों की सुरक्षा खुद पक्षी बड़ी मुस्तैदी से कर रहा है। आने वाले मानसून की पहली बारिश यह तय करेगी कि सदियों पुरानी यह लोक मान्यता इस साल कितनी सटीक बैठती है। अलग-अलग क्षेत्र में अलग-अलग अंडे दिए गए हैं कहीं पर दो कहीं पर तीन कही पर चार ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों में यह अंडे देखे गए हैं।4
- Post by Kailash Fulwari1