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राष्ट्रीय पत्रकार संघ भारत का शपथग्रहण समारोह मऊ मधुवन में संपन्न हुआ। इस आयोजन में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, दिल्ली और बिहार सहित कई राज्यों के लोग शामिल हुए।

1 hr ago
user_Bhupendra lahare
Bhupendra lahare
Farmer मलखरोदा, सक्ती, छत्तीसगढ़•
1 hr ago

राष्ट्रीय पत्रकार संघ भारत का शपथग्रहण समारोह मऊ मधुवन में संपन्न हुआ। इस आयोजन में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, दिल्ली और बिहार सहित कई राज्यों के लोग शामिल हुए।

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  • राष्ट्रीय पत्रकार संघ भारत का शपथग्रहण समारोह मऊ मधुवन में संपन्न हुआ। इस आयोजन में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, दिल्ली और बिहार सहित कई राज्यों के लोग शामिल हुए।
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    राष्ट्रीय पत्रकार संघ भारत का शपथग्रहण समारोह मऊ मधुवन में संपन्न हुआ। इस आयोजन में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, दिल्ली और बिहार सहित कई राज्यों के लोग शामिल हुए।
    user_Bhupendra lahare
    Bhupendra lahare
    Farmer मलखरोदा, सक्ती, छत्तीसगढ़•
    1 hr ago
  • कोरबा जिले में भारी वाहनों की अव्यवस्था को दर्शाने वाला एक वीडियो कुछ समय पहले काफी वायरल हुआ था। अब उसी स्थान पर कुछ ही दिनों के भीतर एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया है, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और दो अन्य लोग घायल हो गए हैं। यह घटना उसी जगह पर हुई है, जहाँ पहले भारी वाहनों के कारण उत्पन्न अव्यवस्था को लेकर सवाल उठाए गए थे।
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    कोरबा जिले में भारी वाहनों की अव्यवस्था को दर्शाने वाला एक वीडियो कुछ समय पहले काफी वायरल हुआ था। अब उसी स्थान पर कुछ ही दिनों के भीतर एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया है, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और दो अन्य लोग घायल हो गए हैं। यह घटना उसी जगह पर हुई है, जहाँ पहले भारी वाहनों के कारण उत्पन्न अव्यवस्था को लेकर सवाल उठाए गए थे।
    user_Dhananajy jangde
    Dhananajy jangde
    Advertising agency करतला, कोरबा, छत्तीसगढ़•
    28 min ago
  • कोरबा जिला मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर दूर लेमरू में पहाड़ी कोरवा समुदाय के लोग पहाड़ पर बसे हुए हैं।
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    कोरबा जिला मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर दूर लेमरू में पहाड़ी कोरवा समुदाय के लोग पहाड़ पर बसे हुए हैं।
    user_SK Kashyapपत्रकार रींवापार
    SK Kashyapपत्रकार रींवापार
    Farmer बारपाली, कोरबा, छत्तीसगढ़•
    13 hrs ago
  • चंद्रपुर में माँ चंद्रहासिनी के दर्शन के लिए आए एक युवक और युवती की टिमारलगा गाँव के पास मुख्य सड़क पर हुए एक भीषण सड़क हादसे में मौके पर ही मौत हो गई। उन्हें एक अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी थी। यह दर्दनाक घटना सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र में हुई। मृतक युवक की पहचान घरघोड़ा क्षेत्र के टेंडा नावापारा निवासी सूरज राठिया के रूप में हुई है, वहीं मृत युवती बिलाईगढ़ क्षेत्र के धौराभाठा की रहने वाली बताई जा रही है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस तुरंत मौके पर पहुँची और दोनों मृत शरीरों को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल ले गई। फिलहाल, पुलिस इस पूरे हादसे की जाँच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि आखिर यह घटना कैसे और किसके कारण हुई।
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    चंद्रपुर में माँ चंद्रहासिनी के दर्शन के लिए आए एक युवक और युवती की टिमारलगा गाँव के पास मुख्य सड़क पर हुए एक भीषण सड़क हादसे में मौके पर ही मौत हो गई। उन्हें एक अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी थी। यह दर्दनाक घटना सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र में हुई।

मृतक युवक की पहचान घरघोड़ा क्षेत्र के टेंडा नावापारा निवासी सूरज राठिया के रूप में हुई है, वहीं मृत युवती बिलाईगढ़ क्षेत्र के धौराभाठा की रहने वाली बताई जा रही है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस तुरंत मौके पर पहुँची और दोनों मृत शरीरों को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल ले गई। फिलहाल, पुलिस इस पूरे हादसे की जाँच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि आखिर यह घटना कैसे और किसके कारण हुई।
    user_पत्रकारिकता
    पत्रकारिकता
    Local News Reporter सारंगढ़, सारंगढ़ बिलाईगढ़, छत्तीसगढ़•
    1 hr ago
  • छत्तीसगढ़ कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर टीएस सिंहदेव और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के बीच चल रही सियासी खींचतान और ‘युवा बनाम बाबा’ बहस के बीच, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे टीएस सिंहदेव के किसी भी बयान पर प्रतिक्रिया नहीं देते हैं। रायपुर में मीडिया से चर्चा के दौरान भूपेश बघेल ने बताया कि दीपक बैज पिछले साढ़े तीन वर्षों से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में संगठन का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि नेता प्रतिपक्ष और प्रदेश अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति का निर्णय केवल पार्टी हाईकमान द्वारा ही लिया जाता है। बघेल ने साफ शब्दों में कहा, "किसे नेता प्रतिपक्ष बनाना है और किसे प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी देनी है, यह पार्टी हाईकमान तय करता है। मैं इसमें अपनी बुद्धि नहीं लगाता।" उनके इस बयान को कांग्रेस के भीतर चल रही ‘युवा बनाम बाबा’ बहस और प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर उठ रहे सवालों के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में इसे संगठनात्मक मुद्दों पर हाईकमान के फैसले को सर्वोपरि मानने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
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    छत्तीसगढ़ कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर टीएस सिंहदेव और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के बीच चल रही सियासी खींचतान और ‘युवा बनाम बाबा’ बहस के बीच, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे टीएस सिंहदेव के किसी भी बयान पर प्रतिक्रिया नहीं देते हैं।

रायपुर में मीडिया से चर्चा के दौरान भूपेश बघेल ने बताया कि दीपक बैज पिछले साढ़े तीन वर्षों से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में संगठन का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि नेता प्रतिपक्ष और प्रदेश अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति का निर्णय केवल पार्टी हाईकमान द्वारा ही लिया जाता है।

बघेल ने साफ शब्दों में कहा, "किसे नेता प्रतिपक्ष बनाना है और किसे प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी देनी है, यह पार्टी हाईकमान तय करता है। मैं इसमें अपनी बुद्धि नहीं लगाता।" उनके इस बयान को कांग्रेस के भीतर चल रही ‘युवा बनाम बाबा’ बहस और प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर उठ रहे सवालों के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में इसे संगठनात्मक मुद्दों पर हाईकमान के फैसले को सर्वोपरि मानने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
    user_Kaniya Soni
    Kaniya Soni
    कोरबा, कोरबा, छत्तीसगढ़•
    5 hrs ago
  • देश में लगातार बढ़ती महंगाई अब हर मध्यम वर्गीय परिवार, किसान और मज़दूर की जिंदगी का सबसे कड़वा सच बन चुकी है। कुछ वर्षों पहले सिनेमाघरों में जिस लोकगीत 'सखी सईयां तो खूब ही कमात हैं, महंगाई डायन खाए जात है' पर तालियाँ बजती थीं, वह आज व्यवस्था पर एक करारा व्यंग्य बनकर रह गया है, क्योंकि बढ़ती कीमतों ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है। अब गांव की चौपालों से लेकर शहर की तंग गलियों तक, राजनीति से ज्यादा 'राशन के दाम' चर्चा का मुख्य विषय बन गए हैं। बाजारों में हरी सब्जियां और दालें खरीदना आम आदमी के लिए किसी लग्जरी से कम नहीं है। खाद्य तेलों, मसालों और रोजमर्रा के राशन की कीमतों में आए उछाल ने रसोई का पूरा गणित बिगाड़ दिया है, जिससे जिस थाली में कभी चार चीजें सजा करती थीं, वह अब केवल पेट भरने का साधन मात्र रह गई है। गृहिणियाँ महीने के अंत तक खर्च चलाने के लिए अपनी छोटी-मोटी जरूरतों में भी कटौती करने को मजबूर हैं। आज का यथार्थ इससे भी ज्यादा भयावह है क्योंकि एक तरफ जहाँ रोजगार और आमदनी के साधन सीमित हुए हैं, वहीं वेतन वृद्धि या तो रुकी हुई है या महंगाई दर के मुकाबले बेहद मामूली है। शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवहन के खर्च आसमान छू रहे हैं, जिसके कारण महीने की पहली तारीख को मिलने वाली कमाई हफ्ते भर के भीतर ही बिलों और उधारों को चुकाने में खत्म हो जाती है, और बचत का कॉलम लोगों की डायरी से लगभग मिट चुका है। शहरों में लोग किसी तरह अतिरिक्त काम करके गुज़ारा कर रहे हैं, लेकिन ग्रामीण अंचलों और कस्बों में स्थिति ज्यादा गंभीर है, जहाँ किसानी की लागत (खाद, बीज, डीजल) महंगी हो गई है और उपज का सही मोल आज भी एक बड़ा संघर्ष है। दिहाड़ी मज़दूरों के लिए तो दो वक्त की रोटी का जुगाड़ भी किसी जंग से कम नहीं है। यह केवल एक आर्थिक आँकड़ा नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर एक गंभीर सवाल है जहाँ विकास के दावों के बीच आम नागरिक अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहा है। जनता आज केवल राहत की उम्मीद में है कि कोई ऐसी व्यवस्था बने जो इस 'महंगाई डायन' के प्रकोप से उन्हें आज़ाद कर सके, क्योंकि जब तक नीतियाँ 'जमीनी हकीकत' और 'आम आदमी की क्रय शक्ति' को ध्यान में रखकर नहीं बनेंगी, तब तक 'महंगाई डायन' इसी तरह लोगों की मेहनत की कमाई को निगलती रहेगी।
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    देश में लगातार बढ़ती महंगाई अब हर मध्यम वर्गीय परिवार, किसान और मज़दूर की जिंदगी का सबसे कड़वा सच बन चुकी है। कुछ वर्षों पहले सिनेमाघरों में जिस लोकगीत 'सखी सईयां तो खूब ही कमात हैं, महंगाई डायन खाए जात है' पर तालियाँ बजती थीं, वह आज व्यवस्था पर एक करारा व्यंग्य बनकर रह गया है, क्योंकि बढ़ती कीमतों ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है। अब गांव की चौपालों से लेकर शहर की तंग गलियों तक, राजनीति से ज्यादा 'राशन के दाम' चर्चा का मुख्य विषय बन गए हैं।

बाजारों में हरी सब्जियां और दालें खरीदना आम आदमी के लिए किसी लग्जरी से कम नहीं है। खाद्य तेलों, मसालों और रोजमर्रा के राशन की कीमतों में आए उछाल ने रसोई का पूरा गणित बिगाड़ दिया है, जिससे जिस थाली में कभी चार चीजें सजा करती थीं, वह अब केवल पेट भरने का साधन मात्र रह गई है। गृहिणियाँ महीने के अंत तक खर्च चलाने के लिए अपनी छोटी-मोटी जरूरतों में भी कटौती करने को मजबूर हैं।

आज का यथार्थ इससे भी ज्यादा भयावह है क्योंकि एक तरफ जहाँ रोजगार और आमदनी के साधन सीमित हुए हैं, वहीं वेतन वृद्धि या तो रुकी हुई है या महंगाई दर के मुकाबले बेहद मामूली है। शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवहन के खर्च आसमान छू रहे हैं, जिसके कारण महीने की पहली तारीख को मिलने वाली कमाई हफ्ते भर के भीतर ही बिलों और उधारों को चुकाने में खत्म हो जाती है, और बचत का कॉलम लोगों की डायरी से लगभग मिट चुका है। शहरों में लोग किसी तरह अतिरिक्त काम करके गुज़ारा कर रहे हैं, लेकिन ग्रामीण अंचलों और कस्बों में स्थिति ज्यादा गंभीर है, जहाँ किसानी की लागत (खाद, बीज, डीजल) महंगी हो गई है और उपज का सही मोल आज भी एक बड़ा संघर्ष है। दिहाड़ी मज़दूरों के लिए तो दो वक्त की रोटी का जुगाड़ भी किसी जंग से कम नहीं है।

यह केवल एक आर्थिक आँकड़ा नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर एक गंभीर सवाल है जहाँ विकास के दावों के बीच आम नागरिक अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहा है। जनता आज केवल राहत की उम्मीद में है कि कोई ऐसी व्यवस्था बने जो इस 'महंगाई डायन' के प्रकोप से उन्हें आज़ाद कर सके, क्योंकि जब तक नीतियाँ 'जमीनी हकीकत' और 'आम आदमी की क्रय शक्ति' को ध्यान में रखकर नहीं बनेंगी, तब तक 'महंगाई डायन' इसी तरह लोगों की मेहनत की कमाई को निगलती रहेगी।
    user_RM24 News
    RM24 News
    Local News Reporter Raigarh, Chhattisgarh•
    9 hrs ago
  • कोरबा पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए 104 चालान काटे हैं। इस अभियान के दौरान पुलिस ने 19 शराबी चालकों को पकड़ा, जिनसे कुल ₹53,400 का जुर्माना वसूला गया।
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    कोरबा पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए 104 चालान काटे हैं। इस अभियान के दौरान पुलिस ने 19 शराबी चालकों को पकड़ा, जिनसे कुल ₹53,400 का जुर्माना वसूला गया।
    user_Durgesh maravi
    Durgesh maravi
    कोरबा, कोरबा, छत्तीसगढ़•
    13 hrs ago
  • जांजगीर की अमिता श्रीवास ने विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट को फतह कर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने 8848 मीटर ऊंची इस चोटी पर सफलतापूर्वक तिरंगा फहराया, जिससे देश का गौरव बढ़ा। हालांकि, एवरेस्ट फतह करने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई, जिसके कारण उन्हें काठमांडू के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस संबंध में मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया का भी उल्लेख किया गया है।
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    जांजगीर की अमिता श्रीवास ने विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट को फतह कर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने 8848 मीटर ऊंची इस चोटी पर सफलतापूर्वक तिरंगा फहराया, जिससे देश का गौरव बढ़ा।

हालांकि, एवरेस्ट फतह करने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई, जिसके कारण उन्हें काठमांडू के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस संबंध में मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया का भी उल्लेख किया गया है।
    user_Bhupendra lahare
    Bhupendra lahare
    Farmer मलखरोदा, सक्ती, छत्तीसगढ़•
    8 hrs ago
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