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चंद्रपुर में माँ चंद्रहासिनी के दर्शन के लिए आए एक युवक और युवती की टिमारलगा गाँव के पास मुख्य सड़क पर हुए एक भीषण सड़क हादसे में मौके पर ही मौत हो गई। उन्हें एक अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी थी। यह दर्दनाक घटना सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र में हुई। मृतक युवक की पहचान घरघोड़ा क्षेत्र के टेंडा नावापारा निवासी सूरज राठिया के रूप में हुई है, वहीं मृत युवती बिलाईगढ़ क्षेत्र के धौराभाठा की रहने वाली बताई जा रही है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस तुरंत मौके पर पहुँची और दोनों मृत शरीरों को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल ले गई। फिलहाल, पुलिस इस पूरे हादसे की जाँच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि आखिर यह घटना कैसे और किसके कारण हुई।

1 hr ago
user_पत्रकारिकता
पत्रकारिकता
Local News Reporter सारंगढ़, सारंगढ़ बिलाईगढ़, छत्तीसगढ़•
1 hr ago

चंद्रपुर में माँ चंद्रहासिनी के दर्शन के लिए आए एक युवक और युवती की टिमारलगा गाँव के पास मुख्य सड़क पर हुए एक भीषण सड़क हादसे में मौके पर ही मौत हो गई। उन्हें एक अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी थी। यह दर्दनाक घटना सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र में हुई। मृतक युवक की पहचान घरघोड़ा क्षेत्र के टेंडा नावापारा निवासी सूरज राठिया के रूप में हुई है, वहीं मृत युवती बिलाईगढ़ क्षेत्र के धौराभाठा की रहने वाली बताई जा रही है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस तुरंत मौके पर पहुँची और दोनों मृत शरीरों को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल ले गई। फिलहाल, पुलिस इस पूरे हादसे की जाँच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि आखिर यह घटना कैसे और किसके कारण हुई।

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  • जांजगीर की अमिता श्रीवास ने विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट को फतह कर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने 8848 मीटर ऊंची इस चोटी पर सफलतापूर्वक तिरंगा फहराया, जिससे देश का गौरव बढ़ा। हालांकि, एवरेस्ट फतह करने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई, जिसके कारण उन्हें काठमांडू के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस संबंध में मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया का भी उल्लेख किया गया है।
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    जांजगीर की अमिता श्रीवास ने विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट को फतह कर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने 8848 मीटर ऊंची इस चोटी पर सफलतापूर्वक तिरंगा फहराया, जिससे देश का गौरव बढ़ा।

हालांकि, एवरेस्ट फतह करने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई, जिसके कारण उन्हें काठमांडू के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस संबंध में मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया का भी उल्लेख किया गया है।
    user_Bhupendra lahare
    Bhupendra lahare
    Farmer मलखरोदा, सक्ती, छत्तीसगढ़•
    8 hrs ago
  • केराकछार में आयोजित समाधान शिविर के दौरान रोजगार सहायक के खिलाफ कई शिकायतें सामने आईं। ग्रामीणों द्वारा दर्ज कराई गई इन शिकायतों पर जब रोजगार सहायक से जवाब मांगा गया, तो वे सवालों से बचते नजर आए और कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी।
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    केराकछार में आयोजित समाधान शिविर के दौरान रोजगार सहायक के खिलाफ कई शिकायतें सामने आईं। ग्रामीणों द्वारा दर्ज कराई गई इन शिकायतों पर जब रोजगार सहायक से जवाब मांगा गया, तो वे सवालों से बचते नजर आए और कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी।
    user_SK Kashyapपत्रकार रींवापार
    SK Kashyapपत्रकार रींवापार
    Farmer बारपाली, कोरबा, छत्तीसगढ़•
    14 hrs ago
  • रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ वनमंडल में आमामुड़ा तालाब में एक हाथी शावक की मृत्यु और वनमंडल क्षेत्र में कुल तीन शावकों की मौत की घटनाओं के बाद वन विभाग ने भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति रोकने के लिए एक विशेष कार्ययोजना पर काम शुरू कर दिया है। विभाग का मुख्य उद्देश्य हाथियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व को मजबूत करना है, जिसके लिए संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी और प्रबंधन व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया जा रहा है। वन विभाग हाथियों के नियमित विचरण वाले क्षेत्रों, तालाबों और जल स्रोतों का चिन्हांकन कर उनकी सतत निगरानी कर रहा है। विशेष रूप से ऐसे जलाशयों की पहचान की जा रही है जहाँ छोटे हाथी शावकों के फंसने अथवा दुर्घटना होने की आशंका हो सकती है। आवश्यकतानुसार ऐसे स्थलों पर सुरक्षित ढलान, पहुंच मार्ग और अन्य सुरक्षा उपाय विकसित किए जाएंगे ताकि हाथियों को जल स्रोतों तक सुरक्षित पहुंच मिल सके। धरमजयगढ़ के वनमंडलाधिकारी जितेंद्र उपाध्याय ने जानकारी देते हुए आमामुड़ा तालाब में हुई हाथी शावक की मृत्यु को अत्यंत संवेदनशील एवं दुखद घटना बताया। उन्होंने कहा कि सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और पूरी रात स्थिति की निगरानी की गई, साथ ही वरिष्ठ अधिकारियों एवं विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपस्थिति में सभी आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित की गई। शावक की मृत्यु के वैज्ञानिक कारणों का पता लगाने के लिए राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों को सैंपल भेजे गए हैं, और रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। श्री उपाध्याय ने यह भी बताया कि हाथियों के विचरण वाले संवेदनशील क्षेत्रों एवं जल स्रोतों का तकनीकी परीक्षण कराया जाएगा, और रात्रिकालीन गश्त व्यवस्था को और अधिक मजबूत किया जा रहा है। हाथी मित्र दल, ट्रैकर एवं वन अमले की संयुक्त टीमें लगातार मॉनिटरिंग कर रही हैं। हाथियों की गतिविधियों पर निगरानी रखने के लिए ट्रैप कैमरा, ड्रोन एवं थर्मल ड्रोन तकनीक का उपयोग बढ़ाया गया है, जिससे किसी भी असामान्य गतिविधि की समय पर जानकारी प्राप्त हो सके और तत्काल आवश्यक कार्रवाई की जा सके। वन विभाग ने राष्ट्रीय स्तर के वन्यजीव एवं पशु चिकित्सा विशेषज्ञों के साथ समन्वय बढ़ाकर वैज्ञानिक अध्ययन एवं निगरानी प्रणाली को भी मजबूत करने की पहल की है। विभाग हाथियों के व्यवहार, विचरण मार्ग एवं संवेदनशील स्थलों का वैज्ञानिक विश्लेषण कर दीर्घकालिक संरक्षण रणनीति तैयार कर रहा है। वनमंडलाधिकारी श्री उपाध्याय ने कहा कि वन विभाग हाथियों की सुरक्षा एवं संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए विशेषज्ञ संस्थानों के साथ समन्वय स्थापित कर दीर्घकालिक संरक्षण योजना पर कार्य कर रहा है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। विभाग ने आमजन से भी अपील की है कि हाथियों की मौजूदगी वाले क्षेत्रों में सतर्कता बनाए रखें तथा किसी भी गतिविधि की जानकारी तत्काल वन अमले को दें, ताकि वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। धर्मजयगढ़ वनमंडल खासकर शावक हाथियों की सुरक्षा को लेकर अलर्ट हो गया है।
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    रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ वनमंडल में आमामुड़ा तालाब में एक हाथी शावक की मृत्यु और वनमंडल क्षेत्र में कुल तीन शावकों की मौत की घटनाओं के बाद वन विभाग ने भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति रोकने के लिए एक विशेष कार्ययोजना पर काम शुरू कर दिया है। विभाग का मुख्य उद्देश्य हाथियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व को मजबूत करना है, जिसके लिए संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी और प्रबंधन व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया जा रहा है।

वन विभाग हाथियों के नियमित विचरण वाले क्षेत्रों, तालाबों और जल स्रोतों का चिन्हांकन कर उनकी सतत निगरानी कर रहा है। विशेष रूप से ऐसे जलाशयों की पहचान की जा रही है जहाँ छोटे हाथी शावकों के फंसने अथवा दुर्घटना होने की आशंका हो सकती है। आवश्यकतानुसार ऐसे स्थलों पर सुरक्षित ढलान, पहुंच मार्ग और अन्य सुरक्षा उपाय विकसित किए जाएंगे ताकि हाथियों को जल स्रोतों तक सुरक्षित पहुंच मिल सके।

धरमजयगढ़ के वनमंडलाधिकारी जितेंद्र उपाध्याय ने जानकारी देते हुए आमामुड़ा तालाब में हुई हाथी शावक की मृत्यु को अत्यंत संवेदनशील एवं दुखद घटना बताया। उन्होंने कहा कि सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और पूरी रात स्थिति की निगरानी की गई, साथ ही वरिष्ठ अधिकारियों एवं विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपस्थिति में सभी आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित की गई। शावक की मृत्यु के वैज्ञानिक कारणों का पता लगाने के लिए राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों को सैंपल भेजे गए हैं, और रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

श्री उपाध्याय ने यह भी बताया कि हाथियों के विचरण वाले संवेदनशील क्षेत्रों एवं जल स्रोतों का तकनीकी परीक्षण कराया जाएगा, और रात्रिकालीन गश्त व्यवस्था को और अधिक मजबूत किया जा रहा है। हाथी मित्र दल, ट्रैकर एवं वन अमले की संयुक्त टीमें लगातार मॉनिटरिंग कर रही हैं। हाथियों की गतिविधियों पर निगरानी रखने के लिए ट्रैप कैमरा, ड्रोन एवं थर्मल ड्रोन तकनीक का उपयोग बढ़ाया गया है, जिससे किसी भी असामान्य गतिविधि की समय पर जानकारी प्राप्त हो सके और तत्काल आवश्यक कार्रवाई की जा सके।

वन विभाग ने राष्ट्रीय स्तर के वन्यजीव एवं पशु चिकित्सा विशेषज्ञों के साथ समन्वय बढ़ाकर वैज्ञानिक अध्ययन एवं निगरानी प्रणाली को भी मजबूत करने की पहल की है। विभाग हाथियों के व्यवहार, विचरण मार्ग एवं संवेदनशील स्थलों का वैज्ञानिक विश्लेषण कर दीर्घकालिक संरक्षण रणनीति तैयार कर रहा है। वनमंडलाधिकारी श्री उपाध्याय ने कहा कि वन विभाग हाथियों की सुरक्षा एवं संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए विशेषज्ञ संस्थानों के साथ समन्वय स्थापित कर दीर्घकालिक संरक्षण योजना पर कार्य कर रहा है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। विभाग ने आमजन से भी अपील की है कि हाथियों की मौजूदगी वाले क्षेत्रों में सतर्कता बनाए रखें तथा किसी भी गतिविधि की जानकारी तत्काल वन अमले को दें, ताकि वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। धर्मजयगढ़ वनमंडल खासकर शावक हाथियों की सुरक्षा को लेकर अलर्ट हो गया है।
    user_Reporter sheikh Aalam Sheikh aalam
    Reporter sheikh Aalam Sheikh aalam
    उदयपुर (धरमजयगढ़), रायगढ़, छत्तीसगढ़•
    23 min ago
  • छत्तीसगढ़ कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर टीएस सिंहदेव और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के बीच चल रही सियासी खींचतान और ‘युवा बनाम बाबा’ बहस के बीच, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे टीएस सिंहदेव के किसी भी बयान पर प्रतिक्रिया नहीं देते हैं। रायपुर में मीडिया से चर्चा के दौरान भूपेश बघेल ने बताया कि दीपक बैज पिछले साढ़े तीन वर्षों से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में संगठन का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि नेता प्रतिपक्ष और प्रदेश अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति का निर्णय केवल पार्टी हाईकमान द्वारा ही लिया जाता है। बघेल ने साफ शब्दों में कहा, "किसे नेता प्रतिपक्ष बनाना है और किसे प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी देनी है, यह पार्टी हाईकमान तय करता है। मैं इसमें अपनी बुद्धि नहीं लगाता।" उनके इस बयान को कांग्रेस के भीतर चल रही ‘युवा बनाम बाबा’ बहस और प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर उठ रहे सवालों के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में इसे संगठनात्मक मुद्दों पर हाईकमान के फैसले को सर्वोपरि मानने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
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    छत्तीसगढ़ कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर टीएस सिंहदेव और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के बीच चल रही सियासी खींचतान और ‘युवा बनाम बाबा’ बहस के बीच, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे टीएस सिंहदेव के किसी भी बयान पर प्रतिक्रिया नहीं देते हैं।

रायपुर में मीडिया से चर्चा के दौरान भूपेश बघेल ने बताया कि दीपक बैज पिछले साढ़े तीन वर्षों से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में संगठन का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि नेता प्रतिपक्ष और प्रदेश अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति का निर्णय केवल पार्टी हाईकमान द्वारा ही लिया जाता है।

बघेल ने साफ शब्दों में कहा, "किसे नेता प्रतिपक्ष बनाना है और किसे प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी देनी है, यह पार्टी हाईकमान तय करता है। मैं इसमें अपनी बुद्धि नहीं लगाता।" उनके इस बयान को कांग्रेस के भीतर चल रही ‘युवा बनाम बाबा’ बहस और प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर उठ रहे सवालों के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में इसे संगठनात्मक मुद्दों पर हाईकमान के फैसले को सर्वोपरि मानने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
    user_Kaniya Soni
    Kaniya Soni
    कोरबा, कोरबा, छत्तीसगढ़•
    5 hrs ago
  • बलौदाबाजार-भाटापारा पुलिस के बेड़े में एक अत्याधुनिक 'चलता-फिरता फॉरेंसिक लैब' शामिल हो गई है, जिससे अब अपराध स्थल पर ही तुरंत वैज्ञानिक जांच शुरू की जा सकेगी। यह हाईटेक 'मोबाइल फॉरेंसिक वैन' घटनास्थल को ही एक चलती-फिरती लैब में बदल देगी, जिससे सबूतों के लिए लैब रिपोर्ट का हफ्तों इंतजार नहीं करना पड़ेगा। पुलिस अधीक्षक (SP) श्री ओ.पी. शर्मा ने शनिवार, 23 मई 2026 को पुलिस लाइन बलौदाबाजार में एक कार्यक्रम के दौरान इस हाईटेक वैन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस मौके पर उनके साथ एडिशनल एसपी श्री अभिषेक सिंह, वैज्ञानिक अधिकारी श्री राजीव कुमार, रक्षित निरीक्षक उषा ठाकुर और साइबर सेल प्रभारी प्रणाली वैद्य सहित पूरा पुलिस अमला उपस्थित रहा। यह 'सुपर वैन' पहियों पर दौड़ती एक आधुनिक वैज्ञानिक लैब है, जो गंभीर अपराधों और मर्ग जैसे मामलों में घटनास्थल पर ही ऑन-द-स्पॉट सैंपलिंग और टेस्टिंग करने में सक्षम है। इसमें जैविक साक्ष्यों जैसे खून के धब्बे और डीएनए सैंपलों को गुणवत्ता खराब होने से पहले सुरक्षित करने की सुविधा है। वैन में अत्याधुनिक कैमरे और माइक्रोस्कोप लगे हैं, जो सूक्ष्म से सूक्ष्म सबूतों को भी पकड़ सकते हैं, साथ ही डिजिटल अपराधों के लिए डेटा एनालिसिस और डिलीटेड डेटा को रिकवर करने की भी सुविधा मौजूद है। पुलिस का मानना है कि अक्सर वैज्ञानिक साक्ष्यों की कमी या देरी के कारण शातिर अपराधी बच निकलते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। इस नई तकनीक से जांच की रफ्तार दोगुनी होगी और सबूतों की विश्वसनीयता भी बढ़ेगी। बलौदाबाजार-भाटापारा पुलिस की यह नई 'तीसरी आंख' अपराधियों के पसीने छुड़ाने और पीड़ितों को न्याय दिलाने में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगी, जिससे क्राइम सीन पर अब अपराधियों का खेल खत्म हो जाएगा।
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    बलौदाबाजार-भाटापारा पुलिस के बेड़े में एक अत्याधुनिक 'चलता-फिरता फॉरेंसिक लैब' शामिल हो गई है, जिससे अब अपराध स्थल पर ही तुरंत वैज्ञानिक जांच शुरू की जा सकेगी। यह हाईटेक 'मोबाइल फॉरेंसिक वैन' घटनास्थल को ही एक चलती-फिरती लैब में बदल देगी, जिससे सबूतों के लिए लैब रिपोर्ट का हफ्तों इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

पुलिस अधीक्षक (SP) श्री ओ.पी. शर्मा ने शनिवार, 23 मई 2026 को पुलिस लाइन बलौदाबाजार में एक कार्यक्रम के दौरान इस हाईटेक वैन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस मौके पर उनके साथ एडिशनल एसपी श्री अभिषेक सिंह, वैज्ञानिक अधिकारी श्री राजीव कुमार, रक्षित निरीक्षक उषा ठाकुर और साइबर सेल प्रभारी प्रणाली वैद्य सहित पूरा पुलिस अमला उपस्थित रहा।

यह 'सुपर वैन' पहियों पर दौड़ती एक आधुनिक वैज्ञानिक लैब है, जो गंभीर अपराधों और मर्ग जैसे मामलों में घटनास्थल पर ही ऑन-द-स्पॉट सैंपलिंग और टेस्टिंग करने में सक्षम है। इसमें जैविक साक्ष्यों जैसे खून के धब्बे और डीएनए सैंपलों को गुणवत्ता खराब होने से पहले सुरक्षित करने की सुविधा है। वैन में अत्याधुनिक कैमरे और माइक्रोस्कोप लगे हैं, जो सूक्ष्म से सूक्ष्म सबूतों को भी पकड़ सकते हैं, साथ ही डिजिटल अपराधों के लिए डेटा एनालिसिस और डिलीटेड डेटा को रिकवर करने की भी सुविधा मौजूद है।

पुलिस का मानना है कि अक्सर वैज्ञानिक साक्ष्यों की कमी या देरी के कारण शातिर अपराधी बच निकलते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। इस नई तकनीक से जांच की रफ्तार दोगुनी होगी और सबूतों की विश्वसनीयता भी बढ़ेगी। बलौदाबाजार-भाटापारा पुलिस की यह नई 'तीसरी आंख' अपराधियों के पसीने छुड़ाने और पीड़ितों को न्याय दिलाने में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगी, जिससे क्राइम सीन पर अब अपराधियों का खेल खत्म हो जाएगा।
    user_Abhas sharma
    Abhas sharma
    बलौदा बाजार, बलौदा बाजार, छत्तीसगढ़•
    6 hrs ago
  • कांग्रेस कमेटी हरदीबाजार द्वारा झीरम घाटी में शहीद हुए नेताओं का शहीद दिवस मनाया गया।
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    कांग्रेस कमेटी हरदीबाजार द्वारा झीरम घाटी में शहीद हुए नेताओं का शहीद दिवस मनाया गया।
    user_Dwarika prasad Yadaw
    Dwarika prasad Yadaw
    हरदीबाजार, कोरबा, छत्तीसगढ़•
    6 hrs ago
  • केराकछार में आयोजित समाधान शिविर के दौरान कृषि विस्तार अधिकारी ने उपस्थित लोगों को संबोधित किया और अपनी बात रखी। इस दौरान कही गई बातों और कार्यक्रम से जुड़ी विस्तृत जानकारी एक वीडियो में देखी जा सकती है।
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    केराकछार में आयोजित समाधान शिविर के दौरान कृषि विस्तार अधिकारी ने उपस्थित लोगों को संबोधित किया और अपनी बात रखी। इस दौरान कही गई बातों और कार्यक्रम से जुड़ी विस्तृत जानकारी एक वीडियो में देखी जा सकती है।
    user_SK Kashyapपत्रकार रींवापार
    SK Kashyapपत्रकार रींवापार
    Farmer बारपाली, कोरबा, छत्तीसगढ़•
    14 hrs ago
  • धर्मजयगढ़ वनमंडल क्षेत्र में हाथियों की लगातार बढ़ती गतिविधियों ने ग्रामीणों और वन विभाग दोनों की चिंता बढ़ा दी है। इस क्षेत्र में हाथी दल कभी सड़क पार करते तो कभी रिहायशी इलाकों की ओर बढ़ते नजर आ रहे हैं, जिससे हाथी प्रभावित क्षेत्रों में दहशत का माहौल बना हुआ है। इस स्थिति को देखते हुए, वन विभाग द्वारा हाथियों की आवाजाही से जुड़े विजुअल और सूचनाएं लगातार साझा की जा रही हैं, ताकि ग्रामीण समय रहते सतर्क हो सकें और किसी भी अप्रिय घटना को टाला जा सके। हाथी मित्र दल, वनकर्मी और चौकीदार सक्रिय रूप से हाथियों की निगरानी कर रहे हैं और लोगों को सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सलाह दे रहे हैं। जानकारी के अनुसार, धर्मजयगढ़ रेंज के पोटीयां, सागरपुर और दर्दीडीह क्षेत्र में लगभग 30 हाथियों का दल विचरण कर रहा है, जबकि बोरो रेंज और छाल रेंज के जंगलों में भी अन्य हाथी दल मौजूद हैं। बताया गया है कि पूरे धर्मजयगढ़ वनमंडल क्षेत्र में वर्तमान में करीब 135 हाथी विचरण कर रहे हैं। वन विभाग ने ग्रामीणों से विशेष अपील की है कि वे हाथियों के करीब न जाएं, रात के समय जंगल या सुनसान रास्तों पर अकेले निकलने से बचें और हाथियों की सूचना मिलते ही तुरंत सतर्क हो जाएं। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि मानव-हाथी संघर्ष की स्थिति उत्पन्न न हो, इसके लिए लगातार निगरानी की जा रही है।
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    धर्मजयगढ़ वनमंडल क्षेत्र में हाथियों की लगातार बढ़ती गतिविधियों ने ग्रामीणों और वन विभाग दोनों की चिंता बढ़ा दी है। इस क्षेत्र में हाथी दल कभी सड़क पार करते तो कभी रिहायशी इलाकों की ओर बढ़ते नजर आ रहे हैं, जिससे हाथी प्रभावित क्षेत्रों में दहशत का माहौल बना हुआ है।

इस स्थिति को देखते हुए, वन विभाग द्वारा हाथियों की आवाजाही से जुड़े विजुअल और सूचनाएं लगातार साझा की जा रही हैं, ताकि ग्रामीण समय रहते सतर्क हो सकें और किसी भी अप्रिय घटना को टाला जा सके। हाथी मित्र दल, वनकर्मी और चौकीदार सक्रिय रूप से हाथियों की निगरानी कर रहे हैं और लोगों को सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सलाह दे रहे हैं। जानकारी के अनुसार, धर्मजयगढ़ रेंज के पोटीयां, सागरपुर और दर्दीडीह क्षेत्र में लगभग 30 हाथियों का दल विचरण कर रहा है, जबकि बोरो रेंज और छाल रेंज के जंगलों में भी अन्य हाथी दल मौजूद हैं। बताया गया है कि पूरे धर्मजयगढ़ वनमंडल क्षेत्र में वर्तमान में करीब 135 हाथी विचरण कर रहे हैं।

वन विभाग ने ग्रामीणों से विशेष अपील की है कि वे हाथियों के करीब न जाएं, रात के समय जंगल या सुनसान रास्तों पर अकेले निकलने से बचें और हाथियों की सूचना मिलते ही तुरंत सतर्क हो जाएं। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि मानव-हाथी संघर्ष की स्थिति उत्पन्न न हो, इसके लिए लगातार निगरानी की जा रही है।
    user_Reporter sheikh Aalam Sheikh aalam
    Reporter sheikh Aalam Sheikh aalam
    उदयपुर (धरमजयगढ़), रायगढ़, छत्तीसगढ़•
    1 hr ago
  • बलौदाबाजार शहर के मोक्षधाम में बिगड़ती व्यवस्थाओं और संचालन संकट को दूर करने के लिए नगर में व्यापक जनमंथन शुरू हो गया है। पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष और पूर्व जनपद पंचायत अध्यक्ष नंदकुमार साहू के सुझाव के बाद, सामाजिक संगठनों, व्यापारियों, समाज प्रमुखों और नगरवासियों ने मोक्षधाम की व्यवस्था को स्थायी और सुव्यवस्थित बनाने हेतु खुलकर पहल की है। पूरे दिन चली चर्चा में एक के बाद एक कई सुझाव सामने आए, जिसके बाद जनसहयोग से एक मजबूत संचालन व्यवस्था खड़ी करने की दिशा में गंभीर प्रयास शुरू हो गए हैं। नगर के कई सामाजिक और व्यापारिक वर्गों ने जोर दिया है कि मोक्षधाम जैसी मानवीय और संवेदनशील व्यवस्था को राजनीति से ऊपर उठकर समाज की सामूहिक जिम्मेदारी से ही सुचारू रूप से चलाया जा सकता है। चर्चा के दौरान, नंदकुमार साहू ने प्रस्ताव दिया कि यदि केवल 25 सामाजिक संगठन या 25 जिम्मेदार व्यक्ति प्रतिमाह 600 रुपये का सहयोग देने का संकल्प लेते हैं, तो लगभग 15 हजार रुपये प्रतिमाह की राशि से मोक्षधाम की नियमित व्यवस्था स्थायी रूप से संचालित की जा सकती है। उनके इस सुझाव को कई लोगों ने व्यवहारिक और दूरदर्शी मानते हुए समर्थन दिया। एक अन्य सुझाव यह भी आया कि 100 सदस्यों की समिति बनाकर प्रत्येक सदस्य से 200 रुपये प्रतिमाह का सहयोग लिया जाए। वहीं, कई व्यापारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रतिमाह 300 रुपये से लेकर 600 रुपये तक सहयोग देने पर सहमति जताई, जबकि कुछ दानदाताओं ने तत्काल सहयोग राशि की घोषणा कर इस पहल को मजबूती दी। यह भी बताया गया कि यदि नगर के 400 से अधिक सदस्य केवल 100 रुपये प्रतिमाह भी सहयोग करें, तो मोक्षधाम की सफाई, कर्मचारियों के मानदेय, बिजली-पानी और अन्य आवश्यक सुविधाओं का संचालन सरलता से हो सकेगा। बैठक में यह बात भी सामने आई कि वर्तमान समय में सबसे बड़ी आवश्यकता जिम्मेदारी निभाने वाले लोगों की है; कई सदस्यों ने इस बात पर जोर दिया कि “समय देना ही सबसे बड़ा दान है।” मोक्षधाम की व्यवस्था संभालने में बबलू भाई की सक्रियता, समर्पण और अनुभव की खुलकर सराहना की गई, और यह सुझाव दिया गया कि संचालन की मुख्य जिम्मेदारी ऐसे व्यक्ति को मिले जिसे व्यवस्थाओं की पूरी समझ हो और जो लगातार समय दे सके। संचालन को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए मासिक रसीद बुक, रजिस्टर संधारण, QR कोड के माध्यम से भुगतान और सार्वजनिक हिसाब-किताब रखने जैसे सुझाव भी दिए गए। नंदकुमार साहू ने बताया कि एक रजिस्टर तैयार किया जा रहा है, जिसमें आय-व्यय का पूरा लेखा-जोखा प्रतिमाह दर्ज किया जाएगा ताकि किसी भी प्रकार की भ्रम या विवाद की स्थिति निर्मित न हो। नगर में चल रही इस सकारात्मक पहल को अब जनसहयोग आधारित सामाजिक आंदोलन के रूप में देखा जा रहा है, जिसके सफल होने पर यह केवल बलौदाबाजार ही नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए सामुदायिक सहभागिता और सामाजिक जिम्मेदारी का एक उदाहरण बन सकता है। लोगों ने इस बात पर जोर दिया कि मोक्षधाम केवल एक स्थान नहीं, बल्कि पूरे समाज की आस्था और अंतिम संस्कार से जुड़ी एक संवेदनशील व्यवस्था है, जिसकी जिम्मेदारी पूरे नगर को मिलकर उठानी होगी।
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    बलौदाबाजार शहर के मोक्षधाम में बिगड़ती व्यवस्थाओं और संचालन संकट को दूर करने के लिए नगर में व्यापक जनमंथन शुरू हो गया है। पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष और पूर्व जनपद पंचायत अध्यक्ष नंदकुमार साहू के सुझाव के बाद, सामाजिक संगठनों, व्यापारियों, समाज प्रमुखों और नगरवासियों ने मोक्षधाम की व्यवस्था को स्थायी और सुव्यवस्थित बनाने हेतु खुलकर पहल की है। पूरे दिन चली चर्चा में एक के बाद एक कई सुझाव सामने आए, जिसके बाद जनसहयोग से एक मजबूत संचालन व्यवस्था खड़ी करने की दिशा में गंभीर प्रयास शुरू हो गए हैं। नगर के कई सामाजिक और व्यापारिक वर्गों ने जोर दिया है कि मोक्षधाम जैसी मानवीय और संवेदनशील व्यवस्था को राजनीति से ऊपर उठकर समाज की सामूहिक जिम्मेदारी से ही सुचारू रूप से चलाया जा सकता है।

चर्चा के दौरान, नंदकुमार साहू ने प्रस्ताव दिया कि यदि केवल 25 सामाजिक संगठन या 25 जिम्मेदार व्यक्ति प्रतिमाह 600 रुपये का सहयोग देने का संकल्प लेते हैं, तो लगभग 15 हजार रुपये प्रतिमाह की राशि से मोक्षधाम की नियमित व्यवस्था स्थायी रूप से संचालित की जा सकती है। उनके इस सुझाव को कई लोगों ने व्यवहारिक और दूरदर्शी मानते हुए समर्थन दिया। एक अन्य सुझाव यह भी आया कि 100 सदस्यों की समिति बनाकर प्रत्येक सदस्य से 200 रुपये प्रतिमाह का सहयोग लिया जाए। वहीं, कई व्यापारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रतिमाह 300 रुपये से लेकर 600 रुपये तक सहयोग देने पर सहमति जताई, जबकि कुछ दानदाताओं ने तत्काल सहयोग राशि की घोषणा कर इस पहल को मजबूती दी। यह भी बताया गया कि यदि नगर के 400 से अधिक सदस्य केवल 100 रुपये प्रतिमाह भी सहयोग करें, तो मोक्षधाम की सफाई, कर्मचारियों के मानदेय, बिजली-पानी और अन्य आवश्यक सुविधाओं का संचालन सरलता से हो सकेगा।

बैठक में यह बात भी सामने आई कि वर्तमान समय में सबसे बड़ी आवश्यकता जिम्मेदारी निभाने वाले लोगों की है; कई सदस्यों ने इस बात पर जोर दिया कि “समय देना ही सबसे बड़ा दान है।” मोक्षधाम की व्यवस्था संभालने में बबलू भाई की सक्रियता, समर्पण और अनुभव की खुलकर सराहना की गई, और यह सुझाव दिया गया कि संचालन की मुख्य जिम्मेदारी ऐसे व्यक्ति को मिले जिसे व्यवस्थाओं की पूरी समझ हो और जो लगातार समय दे सके। संचालन को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए मासिक रसीद बुक, रजिस्टर संधारण, QR कोड के माध्यम से भुगतान और सार्वजनिक हिसाब-किताब रखने जैसे सुझाव भी दिए गए। नंदकुमार साहू ने बताया कि एक रजिस्टर तैयार किया जा रहा है, जिसमें आय-व्यय का पूरा लेखा-जोखा प्रतिमाह दर्ज किया जाएगा ताकि किसी भी प्रकार की भ्रम या विवाद की स्थिति निर्मित न हो। नगर में चल रही इस सकारात्मक पहल को अब जनसहयोग आधारित सामाजिक आंदोलन के रूप में देखा जा रहा है, जिसके सफल होने पर यह केवल बलौदाबाजार ही नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए सामुदायिक सहभागिता और सामाजिक जिम्मेदारी का एक उदाहरण बन सकता है। लोगों ने इस बात पर जोर दिया कि मोक्षधाम केवल एक स्थान नहीं, बल्कि पूरे समाज की आस्था और अंतिम संस्कार से जुड़ी एक संवेदनशील व्यवस्था है, जिसकी जिम्मेदारी पूरे नगर को मिलकर उठानी होगी।
    user_Rajesh mishra
    Rajesh mishra
    Local News Reporter बलौदा बाजार, बलौदा बाजार, छत्तीसगढ़•
    7 hrs ago
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