'बैंकित' (Bankit) का 599 रुपये का "साइलेंट कट" धमाका: 'हमारा क्या उखाड़ लोगे?' वाला एटीट्यूड और 45 दिनों से लगातार सिर्फ 'झांसा'! बिना बताए अकाउंट से कट गए ₹599, सवाल पूछने पर अफसरों की फौज का 'अहंकार' और 'इग्नोर मोड' ऑन! जानिए कैसे छोटे दुकानदारों के पसीने की कमाई पर चल रहा है 'आश्वासन का खेल'। न्यूज़ डेस्क / विशेष रिपोर्ट: अगर आप अपनी दुकान पर ग्राहकों का पैसा निकालने या डिजिटल लेन-देन के लिए FINDI / BANKIT (बैंकित) ऐप का इस्तेमाल करते हैं, तो ज़रा अपने खाते के ट्रांजैक्शन संभालकर देख लीजिए! हो सकता है कि आपकी जेब से भी चुपके से "सब्सक्रिप्शन प्लान" के नाम पर डाका डाला जा चुका हो और आपको खबर तक न हो। ऐसा ही एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है जहाँ एक दुकानदार एजेंट के खाते से बिना किसी सहमति या जानकारी के सीधे ₹599 काट लिए गए (सेवा: Subscription Plan - 599 - M)। जब इस "साइलेंट कटौती" का पता चला, तो लगा कि कोई गलती से कटा होगा, लेकिन असली कहानी तो इसके बाद शुरू हुई! 🎭 'अधिकारियों की बारात' और 45 दिनों की 'आश्वासन एक्सप्रेस' जब दुकानदार ने अपने हक का पैसा वापस मांगा और पूछा कि “किसकी इजाजत से ये पैसे काटे गए?”, तो जवाब में कोई ठोस वजह नहीं बताई गई। बस इतना कहा गया—“एक बार कट गया है, आगे से नहीं कटेगा!” (मानो 599 रुपये कोई खैरात में बांटे जा रहे हों!) बात यहीं खत्म नहीं हुई। समाधान के नाम पर कस्टमर केयर और सेल्स टीम ने अधिकारियों की पूरी 'पदानुक्रम' (Hierarchy) की लिस्ट थमा दी: निचले स्तर पर: शोएब खान (Shoaib Khan) * उनके ऊपर: महफूज अली (Mahfuj Ali) और सबसे ऊपर: विजय श्रीवास्तव (Vijay Shrivastav) लेकिन नतीजा? ढाक के वही तीन पात! जब इन साहबानों से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो कुछ ने तो फरियाद सुनते ही फोन उठाना बंद कर दिया, तो कुछ के पास जवाब देने की फुरसत ही नहीं थी! 45 दिन बीत जाने के बाद भी हर बार सिर्फ एक ही घुट्टी पिलाई जा रही है—“पैसे वापस आ जाएंगे, प्रोसेस में है।” लेकिन वो 'जल्द' कब आएगा, इसकी कोई सीमा-रेखा नहीं है। 📱 स्क्रीनशॉट में खुला 'अहंकार' और लाचारी का सच! कंपनी के प्रतिनिधियों के रवैये की पोल उनके चैट और कॉल लॉग्स खुद खोल रहे हैं: "कंपनी को कोई फर्क नहीं पड़ेगा!" (शोएब खान की वॉर्निंग): चैट में साफ़ देखा जा सकता है कि जब पीड़ित दुकानदार ने कानूनी रास्ता अपनाने या FIR की बात कही, तो शोएब खान (Shoaib Khan Bankit) की तरफ से जवाब आता है: > "परेशान मत होइए आप लोग, ये सब से कुछ नहीं होगा। आप ही सिर्फ परेशान होंगे, कंपनी को कोई फर्क नहीं पड़ेगा!" > इसके बाद आगे बड़े ही बेपरवाह लहजे में लिखा गया—"एक बार और अगर हो गया रिफंड तो ठीक, वरना आप लोग करना जो भी करना होगा!" > वाह! क्या ग्राहक सेवा है! यह बातचीत साफ़ दर्शाती है कि छोटे दुकानदारों की परेशानी पर कंपनी के नुमाइंदों को कितना 'फर्क' पड़ता है। > "I'll call you back later" का अटूट लूप: दुकानदार दिन भर फोन मिलाता रहता है और उधर से एक ऑटो-जनरेटेड या रूखा मैसेज आता है—"I'll call you back later." पीड़ित पूछ रहा है “क्या हुआ सर, 4 दिन हो गए?” लेकिन जवाब में फिर वही घिसा-पिटा मैसेज। कॉल लॉग्स बने 'नॉट कनेक्टेड': कॉल हिस्ट्री गवाह है कि लगातार कोशिशों के बाद भी फोन काट दिए जा रहे हैं या अनसुने किए जा रहे हैं। 💣 क्या यह सिर्फ ₹599 का मामला है? सोचने वाली बात यह है कि ₹599 की रकम एक छोटे दुकानदार के लिए दिन भर की मेहनत की कमाई हो सकती है। अगर ऐसी कटौती देश भर के हज़ारों दुकानदारों के खातों से 'बिना अनुमति' की जा रही है, तो यह आंकड़ा लाखों-करोड़ों का खेल बन जाता है! सवाल यह है कि: जब सब्सक्रिप्शन ग्राहक ने मांगा ही नहीं, तो पैसे काटने का अधिकार किसने दिया? दूसरा सवाल: 45 दिनों तक रिफंड अटकाना और 'कंपनी को फर्क नहीं पड़ता' जैसी धमकियां देना किस कंज्यूमर लॉ (Customer Rights) के तहत सही है? अब देखना यह होगा कि क्या BANKIT प्रबंधन अपने इन 'भगवान स्वरूप' रवैये वाले अधिकारियों पर कोई कार्रवाई करता है और पीड़ित का पैसा रिफंड करता है, या फिर पीड़ित दुकानदारों को मजबूरन कंज्यूमर फोरम (Consumer Court) और साइबर पुलिस का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा!
'बैंकित' (Bankit) का 599 रुपये का "साइलेंट कट" धमाका: 'हमारा क्या उखाड़ लोगे?' वाला एटीट्यूड और 45 दिनों से लगातार सिर्फ 'झांसा'! बिना बताए अकाउंट से कट गए ₹599, सवाल पूछने पर अफसरों की फौज का 'अहंकार' और 'इग्नोर मोड' ऑन! जानिए कैसे छोटे दुकानदारों के पसीने की कमाई पर चल रहा है 'आश्वासन का खेल'। न्यूज़ डेस्क / विशेष रिपोर्ट: अगर आप अपनी दुकान पर ग्राहकों का पैसा निकालने या डिजिटल लेन-देन के लिए FINDI / BANKIT (बैंकित) ऐप का इस्तेमाल करते हैं, तो ज़रा अपने खाते के ट्रांजैक्शन संभालकर देख लीजिए! हो सकता है कि आपकी जेब से भी चुपके से "सब्सक्रिप्शन प्लान" के नाम पर डाका डाला जा चुका हो और आपको खबर तक न हो। ऐसा ही एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है जहाँ एक दुकानदार एजेंट के खाते से बिना किसी सहमति या जानकारी के सीधे ₹599 काट लिए गए (सेवा: Subscription Plan - 599 - M)। जब इस "साइलेंट कटौती" का पता चला, तो लगा कि कोई गलती से कटा होगा, लेकिन असली कहानी तो इसके बाद शुरू
हुई! 🎭 'अधिकारियों की बारात' और 45 दिनों की 'आश्वासन एक्सप्रेस' जब दुकानदार ने अपने हक का पैसा वापस मांगा और पूछा कि “किसकी इजाजत से ये पैसे काटे गए?”, तो जवाब में कोई ठोस वजह नहीं बताई गई। बस इतना कहा गया—“एक बार कट गया है, आगे से नहीं कटेगा!” (मानो 599 रुपये कोई खैरात में बांटे जा रहे हों!) बात यहीं खत्म नहीं हुई। समाधान के नाम पर कस्टमर केयर और सेल्स टीम ने अधिकारियों की पूरी 'पदानुक्रम' (Hierarchy) की लिस्ट थमा दी: निचले स्तर पर: शोएब खान (Shoaib Khan) * उनके ऊपर: महफूज अली (Mahfuj Ali) और सबसे ऊपर: विजय श्रीवास्तव (Vijay Shrivastav) लेकिन नतीजा? ढाक के वही तीन पात! जब इन साहबानों से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो कुछ ने तो फरियाद सुनते ही फोन उठाना बंद कर दिया, तो कुछ के पास जवाब देने की फुरसत ही नहीं थी! 45 दिन बीत जाने के बाद भी हर बार सिर्फ एक ही घुट्टी पिलाई जा रही है—“पैसे वापस आ जाएंगे, प्रोसेस में है।” लेकिन वो 'जल्द' कब आएगा, इसकी कोई सीमा-रेखा नहीं है। 📱 स्क्रीनशॉट
में खुला 'अहंकार' और लाचारी का सच! कंपनी के प्रतिनिधियों के रवैये की पोल उनके चैट और कॉल लॉग्स खुद खोल रहे हैं: "कंपनी को कोई फर्क नहीं पड़ेगा!" (शोएब खान की वॉर्निंग): चैट में साफ़ देखा जा सकता है कि जब पीड़ित दुकानदार ने कानूनी रास्ता अपनाने या FIR की बात कही, तो शोएब खान (Shoaib Khan Bankit) की तरफ से जवाब आता है: > "परेशान मत होइए आप लोग, ये सब से कुछ नहीं होगा। आप ही सिर्फ परेशान होंगे, कंपनी को कोई फर्क नहीं पड़ेगा!" > इसके बाद आगे बड़े ही बेपरवाह लहजे में लिखा गया—"एक बार और अगर हो गया रिफंड तो ठीक, वरना आप लोग करना जो भी करना होगा!" > वाह! क्या ग्राहक सेवा है! यह बातचीत साफ़ दर्शाती है कि छोटे दुकानदारों की परेशानी पर कंपनी के नुमाइंदों को कितना 'फर्क' पड़ता है। > "I'll call you back later" का अटूट लूप: दुकानदार दिन भर फोन मिलाता रहता है और उधर से एक ऑटो-जनरेटेड या रूखा मैसेज आता है—"I'll call you back later." पीड़ित पूछ रहा है “क्या हुआ सर, 4 दिन हो
गए?” लेकिन जवाब में फिर वही घिसा-पिटा मैसेज। कॉल लॉग्स बने 'नॉट कनेक्टेड': कॉल हिस्ट्री गवाह है कि लगातार कोशिशों के बाद भी फोन काट दिए जा रहे हैं या अनसुने किए जा रहे हैं। 💣 क्या यह सिर्फ ₹599 का मामला है? सोचने वाली बात यह है कि ₹599 की रकम एक छोटे दुकानदार के लिए दिन भर की मेहनत की कमाई हो सकती है। अगर ऐसी कटौती देश भर के हज़ारों दुकानदारों के खातों से 'बिना अनुमति' की जा रही है, तो यह आंकड़ा लाखों-करोड़ों का खेल बन जाता है! सवाल यह है कि: जब सब्सक्रिप्शन ग्राहक ने मांगा ही नहीं, तो पैसे काटने का अधिकार किसने दिया? दूसरा सवाल: 45 दिनों तक रिफंड अटकाना और 'कंपनी को फर्क नहीं पड़ता' जैसी धमकियां देना किस कंज्यूमर लॉ (Customer Rights) के तहत सही है? अब देखना यह होगा कि क्या BANKIT प्रबंधन अपने इन 'भगवान स्वरूप' रवैये वाले अधिकारियों पर कोई कार्रवाई करता है और पीड़ित का पैसा रिफंड करता है, या फिर पीड़ित दुकानदारों को मजबूरन कंज्यूमर फोरम (Consumer Court) और साइबर पुलिस का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा!
- :नशे के खिलाफ जशपुर पुलिस की एक और बड़ी कार्यवाही 60 किलो अवैध गांजा व चारपहिया वाहन वैन्यू कार के साथ अंतर्राज्यीय तस्कर गिरफ्तार, करीब 40 लाख रुपये की संपत्ति जप्त* *➡️ थाना बागबहार क्षेत्र में जशपुर पुलिस की बड़ी कार्यवाही, 60 किलो अवैध गांजा के साथ एक आरोपी गिरफ्तार।* *➡️ आरोपी वैन्यू कार में उड़ीसा से गांजा लेकर उत्तर प्रदेश की ओर जा रहा था।* *➡️ जशपुर पुलिस की टेक्निकल टीम एवं मुखबिर तंत्र से मिली पुख्ता सूचना पर गांधी चौक बागबहार में पुलिस ने घेराबंदी कर आरोपी को पकड़ा।* *➡️ आरोपी के कब्जे से 60 पैकेट में लगभग 60 किलो अवैध मादक पदार्थ गांजा बरामद।* *➡️ तस्करी में प्रयुक्त वैन्यू कार क्रमांक UP-91-U 6302 भी पुलिस ने जप्त की।* *➡️ जप्त गांजे की अनुमानित कीमत लगभग 30 लाख रुपये तथा वाहन की कीमत लगभग 10 लाख रुपये, कुल करीब 40 लाख रुपये की जप्ती।* *➡️ आरोपी के विरुद्ध थाना बागबहार में एनडीपीएस एक्ट की धारा 20(बी)(ii)(सी) के तहत अपराध पंजीबद्ध।* *➡️ गिरफ्तार आरोपी – विकास चौधरी, उम्र 27 वर्ष, निवासी समस्तीपुर, बिहार; वर्तमान निवास गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश।* ----00--- ➡️मामले का संक्षिप्त विवरण आज दिनांक 31.08.2026 की प्रातः करीब 04:00 से 05:00 बजे के मध्य थाना बागबहार पुलिस को जशपुर पुलिस की टेक्निकल टीम एवं विश्वसनीय मुखबिर से सूचना प्राप्त हुई कि उड़ीसा की ओर से एक वैन्यू कार क्रमांक UP-91-U 6302 में भारी मात्रा में अवैध मादक पदार्थ गांजा का परिवहन किया जा रहा है। सूचना से वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को अवगत कराया गया। पुलिस कप्तान डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जशपुर डॉ. लाल उमेद सिंह के निर्देशन में थाना बागबहार पुलिस द्वारा तत्काल कार्रवाई करते हुए गांजा तस्करों के संभावित मार्गों पर नाकाबंदी एवं घेराबंदी की गई। इसी दौरान गांधी चौक, बागबहार के पास उक्त संदिग्ध वैन्यू कार आती हुई दिखाई दी। पुलिस टीम ने घेराबंदी कर वाहन को रोककर चालक से पूछताछ की। चालक ने अपना नाम विकास चौधरी, उम्र 27 वर्ष, निवासी समस्तीपुर बिहार, वर्तमान निवास गाजियाबाद उत्तर प्रदेश बताया। पुलिस टीम द्वारा गवाहों की उपस्थिति में वाहन की विधिवत तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान वाहन की डिक्की में प्लास्टिक टेप से लिपटे हुए 60 पैकेट मिले। पैकेटों को खोलकर जांच करने पर उनमें कुल लगभग 60 किलोग्राम अवैध मादक पदार्थ गांजा पाया गया। पुलिस द्वारा गांजा एवं तस्करी में प्रयुक्त वैन्यू कार क्रमांक UP-91-U 6302 को विधिवत जप्त कर आरोपी विकास चौधरी को हिरासत में लिया गया। *➡️उड़ीसा से उत्तर प्रदेश तक गांजा तस्करी का प्रयास* प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी द्वारा उड़ीसा से अवैध गांजा लेकर उत्तर प्रदेश की ओर ले जाने का प्रयास किया जाना सामने आया है। मामले में जशपुर पुलिस द्वारा एंड-टू-एंड विवेचना की जा रही है। गांजा आरोपी को किस व्यक्ति से प्राप्त हुआ तथा उत्तर प्रदेश में इसे किस व्यक्ति तक पहुंचाया जाना था, इस संबंध में पुलिस द्वारा विस्तृत जांच की जा रही है। पुलिस द्वारा मामले से जुड़े अन्य व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। अवैध मादक पदार्थों के इस नेटवर्क से जुड़े किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा तथा संलिप्त पाए जाने पर उनके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। ➡️ मामले में पर्याप्त साक्ष्य पाए जाने एवं अपराध स्वीकार किए जाने के आधार पर आरोपी विकास चौधरी को विधिवत गिरफ्तार किया गया है। आरोपी को न्यायिक रिमांड पर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। ➡️मामले में थाना बागबहार में एनडीपीएस एक्ट की धारा 20(बी)(ii)(सी) के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना जारी है। ➡️जप्त सामग्री अवैध गांजा – लगभग 60 किलोग्राम गांजे की अनुमानित कीमत – लगभग ₹30 लाख वैन्यू कार क्रमांक UP-91-U 6302 – अनुमानित कीमत लगभग ₹10 लाख कुल जप्ती – लगभग ₹40 लाख *➡️जशपुर पुलिस का नशे के खिलाफ अभियान लगातार जारी* नशे के सौदागरों के खिलाफ जिले के पुलिस कप्तान डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जशपुर डॉ लाल उमेद सिंह के नेतृत्व में जशपुर पुलिस द्वारा चलाए जा रहे “ऑपरेशन आघात” के तहत लगातार प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। पुलिस कप्तान डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जशपुर डॉ. लाल उमेद सिंह द्वारा जिले में नशे के अवैध कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए मुखबिर तंत्र को मजबूत किया गया है एवं तकनीकी संसाधनों के बेहतर उपयोग के निर्देश दिए गए हैं। जशपुर पुलिस द्वारा नशे के अवैध कारोबार से जुड़े पूरे नेटवर्क की एंड-टू-एंड विवेचना की जा रही है। पुलिस का स्पष्ट संदेश है कि नशे के कारोबार में संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और दोषियों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्यवाही की जाएगी। *➡️ कार्यवाही में इनकी रही महत्वपूर्ण भूमिका* मामले की कार्यवाही एवं आरोपी की गिरफ्तारी में एसडीओपी पत्थलगांव डॉ. ध्रुवेश कुमार जायसवाल, डीएसपी जशपुर शुभम तिवारी, थाना प्रभारी बागबहार निरीक्षक ललित कुमार यादव, प्रधान आरक्षक लव चौहान, आरक्षक अजय खेस, आरक्षक पवन पैंकरा तथा जशपुर पुलिस की साइबर/टेक्निकल टीम का विशेष योगदान रहा।* *➡️ मामले में डी आई जी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जशपुर डॉ लाल उमेद सिंह ने बताया कि नशे के खिलाफ जशपुर पुलिस का ऑपरेशन आघात निरंतर जारी है, पुलिस ने अपने मुखबिर तंत्र को मजबूत कर अत्यंत सक्रिय किया है, साथ ही पुलिस नशे के सौदागरों पर निरंतर निगाह रखे हुई है, थाना बागबाहर क्षेत्र से 60 किलो के लगभग अवैध मादक प्रदार्थ गांजा सहित एक आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार किया है, मामले में पुलिस एंड टू एंड विवेचना कर रही है, ऐसे मामलों में संलिप्त किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा, पुलिस सख्त से सख्त कानूनी कार्यवाही करे करेगी*1
- 😱 2 साल की बीमारी के बाद चला-फिरने लगा मरीज! | Amazing Result 😱 2 साल की बीमारी के बाद चला-फिरने लगा मरीज! | Amazing Result2 साल से बीमारी, दर्द और चलने-फिरने में परेशानी से जूझ रहे इस मरीज ने कई जगह इलाज कराया, लेकिन अपेक्षित राहत नहीं मिली। इसके बाद Dr. Pharmacy A Nutraceutical Ayurvedic Medicine से उपचार की सलाह दी गई, जिसके बाद मरीज ने अपने अनुभव में काफी सुधार बताया। 🙏 यह वीडियो मरीज के व्यक्तिगत अनुभव/रिजल्ट पर आधारित है। किसी भी दवा या उपचार का उपयोग डॉक्टर/योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह से ही करें। #AyurvedicMedicine #AyurvedicTreatment #PatientResult #RecoveryStory #HealthUpdate #DrPharmacy #Nutraceutical #Ayurveda #ViralVideo #patientexperience1
- ए.डी. पब्लिक स्कूल में स्काउट्स एवं गाइड्स का 3 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर शुरू, बच्चों में दिखा जबर्दस्त उत्साह ए.डी. पब्लिक स्कूल में स्काउट्स एवं गाइड्स का 3 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर शुरू, बच्चों में दिखा जबर्दस्त उत्साह ए.डी. पब्लिक स्कूल में सोमवार को तीन दिवसीय स्काउट्स एवं गाइड्स विशेष प्रशिक्षण शिविर की शुरुआत बेहद उत्साहपूर्ण माहौल में हुई। शिविर के पहले ही दिन योग्य छात्र-छात्राओं का जोश और अनुशासन देखने लायक था। यह विशेष कैंप अगले तीन दिनों तक स्कूल कैंपस में चलेगा। इसके बाद विद्यार्थियों के निरंतर अभ्यास के लिए तय शेड्यूल के मुताबिक हर महीने 2 दिन इसका नियमित आयोजन किया जाएगा। शिविर में मुख्य ट्रेनर के तौर पर हरिओम जी बच्चों को स्काउटिंग के नियम, प्राथमिक उपचार, अनुशासन और सेवा भावना की बारीकियां सिखा रहे हैं। वहीं उनका साथ देने के लिए विद्यालय की पीटी टीचर निक्की आर्या भी मैदान पर सक्रिय रहकर बच्चों का मार्गदर्शन कर रही हैं। कार्यक्रम के शुभारंभ पर विद्यालय के निदेशक ने बच्चों की हौसला अफजाई करते हुए कहा कि स्काउट्स एवं गाइड्स केवल एक ट्रेनिंग नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक अनुशासित कला है। यह बच्चों में आत्मनिर्भरता, त्वरित निर्णय लेने की क्षमता और देश सेवा का जज्बा पैदा करता है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को पूरी लगन से सीखने के लिए प्रेरित किया। शिविर के पहले दिन बच्चों ने विभिन्न गतिविधियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।1
- कौन-कौन खाए हैं कांदा? कमेंट करके बताइए! #shorts #shortvideo #youtubeshorts #viralvideo #tanda1
- हुदू गांव की बदहाल स्थिति कौन है जिम्मेवार आज तक गांव में अच्छे पीसीसी सड़क नहीं बन पाई है आदिवासी बहुल गांव की जमीनी हकीकत! 😢 तीन कार्यकाल तक कांग्रेस को वोट दिया, लेकिन गांव को मिला सिर्फ आश्वासन!...1
- गुमला जिले के बिशनपुर प्रखंड के ग्रामीण क्षेत्र में गलत ढंग से आंगनबाड़ीका सेविका का चुनाव किया गया गुमला जिले के बिशनपुर प्रखंड के ग्रामीण क्षेत्र में गलत ढंग से आंगनबाड़ीका सेविका का चुनाव किया गया1
- 3 एकड़ 30 डिसमिल जमीन को लेकर बड़ा विवाद.? #shorts #shortvideo #viralvideo #youtubeshorts #news1
- शिक्षक की लापरवाही या बच्चों से मजदूरी? बारिश में भीगकर स्कूल का राशन ढोते दिखे नन्हे छात्र* सरयू। शिक्षा के मंदिर में बच्चों को पढ़ाई के बजाय स्कूल का राशन ढोते देखा जाए तो यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। ऐसा ही मामला सरयू प्रखंड के घासीटोला स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय से सामने आया है, जहां छोटे-छोटे छात्र-छात्राएं बारिश के बीच स्कूल के लिए अंडा, दाल, आलू सहित अन्य मध्याह्न भोजन सामग्री ले जाते दिखाई दिए।स्थानीय लोगों का आरोप है कि विद्यालय के बच्चों से राशन ढुलवाना न केवल अनुचित है, बल्कि उनकी सुरक्षा के साथ भी खिलवाड़ है। बारिश में भीगते हुए नन्हे बच्चे अपने हाथों में खाद्य सामग्री लेकर स्कूल पहुंच रहे थे। सवाल यह उठता है कि आखिर बच्चों के कंधों पर स्कूल का राशन ढोने की जिम्मेदारी क्यों डाली गई?ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों को स्कूल शिक्षा ग्रहण करने के लिए भेजा जाता है, न कि उनसे सामान ढुलवाने का काम कराने के लिएबारिश के मौसम में बच्चों के भीगने से उनके बीमार पड़ने के साथ-साथ रास्ते में किसी दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है।इस मामले को लेकर अभिभावकों और ग्रामीणों में नाराजगी है। ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों से पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करने तथा भविष्य में बच्चों से इस तरह का कार्य नहीं कराने की मांग की है।अब देखना यह है कि शिक्षा विभाग इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और नौनिहालों से राशन ढुलवाने की व्यवस्था पर कब रोक लगती है।1
- बलरामपुर आजादी के दशकों बाद भी 'टईया नाले' पर पुलिया का इंतजार, बारिश में कैद रहने को मजबूर विश्राम नगर के ग्रामीण बलरामपुर आजादी के दशकों बाद भी 'टईया नाले' पर पुलिया का इंतजार, बारिश में कैद रहने को मजबूर विश्राम नगर के ग्रामीण एंकर..बलरामपुर जिला मे सरकारें चाहे प्रदेश में बेहतर सड़कों और सुशासन के जितने भी बड़े-बड़े दावे कर लें, लेकिन बलरामपुर जिले के सुदूर इलाके में बसे विश्राम नगर की जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है आश्रित ग्राम पंचायत ब्रजवंधा का विश्राम नगर गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है। यहां के ग्रामीणों के लिए टईया नाला सालों से एक बड़ी मुसीबत बना हुआ है नाले पर आज तक एक छोटी पुलिया भी नहीं बन पाई है जिसके कारण हर बारिश में करीब 10 गांवों का संपर्क बाकी दुनिया से पूरी तरह कट जाता है चुनाव आते ही मिलते हैं सिर्फ आश्वासन बीओ01..स्थानीय लोगों का दर्द है कि जब भी चुनाव आते हैं नेता और मंत्री बड़े-बड़े वादे करके चले जाते हैं। लेकिन चुनाव खत्म होते ही सारे वादे हवा हो जाते हैं। प्रदेश में सरकारें बदलती रहीं पर विश्राम नगर के लोगों की किस्मत नहीं बदली लगातार हो रही परेशानी से तंग आकर अब ग्रामीणों ने कलेक्टर को लिखित आवेदन दिया है और जल्द से जल्द पुलिया बनवाने की मांग की है। बच्चों की पढ़ाई ठप राशन मिलना भी बंद स्कूल जाने से रोक रही बहती नदी बीओ02..नाले के दूसरी तरफ उच्च प्राथमिक और हाईस्कूल हैं बारिश में नाले का बहाव इतना तेज हो जाता है कि बच्चों को जान जोखिम में डालकर स्कूल जाना पड़ता है या फिर हफ्तों घर पर ही बैठना पड़ता है। राशन और बाजार बंद नाला उफान पर होने की वजह से लोग न तो बीओ03..हाटबाजार जा पा रहे हैं और न ही सरकारी राशन दुकान तक पहुंच पा रहे हैं इलाज के अभाव में बनी रहती है जान की आफत सबसे चिंताजनक स्थिति तब बनती है जब किसी मरीज को अचानक अस्पताल ले जाना पड़े। रात के समय या बारिश के दिनों में किसी गंभीर मरीज को समय पर अस्पताल पहुंचाना किसी चमत्कार से कम नहीं होता। कई बार वक्त पर इलाज न मिलने से लोगों की जान पर बन आती है। आखिर कब जागेगा प्रशासन बीओ04..ग्रामीणों का कहना है कि सरकार चाहे किसी की भी हो, जनता को सड़क और पुल जैसी बुनियादी चीजें तो मिलनी ही चाहिए। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस सुदूर गांव की सुध कब लेता है, या फिर ग्रामीणों को इस साल भी बारिश के दिनों में अपने ही घर में कैद होकर रहना पड़ेगा1